नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

ब्लॉग- पहेली-१२

Written By shikha kaushik on मंगलवार, 31 जनवरी 2012 | 10:50 pm


ब्लॉग- पहेली-१२
BLOG PAHELI CHALO HAL KARTE HAIN 

इस बार दिए गए हैं तीन ब्लोगर्स  के परिचय  .आपको  बताने हैं इनके नाम .सर्वप्रथम  व् सही जवाब देने पर बन सकते हैं आप ''विजेता '' तो देर किस बात की है?


                       शुभकामनाओं के साथ 
                                   शिखा कौशिक 

वेद में सरवरे कायनात स. का ज़िक्र है

Written By DR. ANWER JAMAL on सोमवार, 30 जनवरी 2012 | 6:29 pm

‘इयं विसृष्टिर्यत आबभूव यदि वा दधे यदि वा न। यो अस्याध्यक्षः परमेव्योमन्तसो अंग वेद यदि वा न वेद।‘
वेद 1,10,129,7
यह विविध प्रकार की सृष्टि जहां से हुई, इसे वह धारण करता है अथवा नहीं धारण करता जो इसका अध्ययन है परमव्योम में, वह हे अंग ! जानता है अथवा नहीं जानता।
सामान्यतः वेद भाष्यकारों ने इस मंत्र में ‘सृष्टि के अध्यक्ष‘ से ईशान परब्रह्म परमेश्वर अर्थ ग्रहण किया है, किन्तु इस मंत्र में एक बात ऐसी है जिससे यहां ‘सृष्टि के अध्यक्ष‘ से ईशान अर्थ ग्रहण नहीं किया जा सकता। वह बात यह है कि इस मंत्र में सृष्टि के अध्यक्ष के विषय में कहा गया है - ‘सो अंग ! वेद यदि वा न वेद‘ ‘वह, हे अंग ! जानता है अथवा नहीं जानता‘। ईशान के विषय में यह कल्पना भी नहीं की जा सकती कि वह कोई बात नहीं जानता। फलतः यह सर्वथा स्पष्ट है कि ईशान ने यहां सृष्टि के जिस अध्यक्ष की बात की है, वह सर्वज्ञ नहीं है। मेरे अध्ययन के अनुसार यही वेद में हुज़ूर स. का उल्लेख है। शब्द ‘नराशंस‘ का प्रयोग भी कई स्थानों पर उनके लिए हुआ है किन्तु सर्वत्र नहीं। इसी सृष्टि के अध्यक्ष का अनुवाद उर्दू में सरवरे कायनात स. किया जाता है।
फलतः श्वेताश्वतरोपनिषद के अनुसार वेद का सर्वप्रथम प्रकाश जिस पर हुआ। वह यही सृष्टि का अध्यक्ष है। जिसे इस्लाम में हुज़ूर स. का सृष्टि-पूर्व स्वरूप माना जाता है।
मैं जिन प्रमाणों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं, आइये अब उसका सर्वेक्षण किया जाए।
स्वर्गीय आचार्य शम्स नवेद उस्मानी की तर्जुमानी करते हुए एस. अब्दुल्लाह तारिक़ अपनी प्रख्यात रचना ‘अगर अब भी न जागे तो ...‘ में लिखते हैं -
‘नीचे हम हज़रत मुजददिद अलफ़े-सानी शैख़ अहमद सरहिन्दी रह. के मक्तूबाते-रब्बानी से कतिपय हदीसें उद्धृत हैं।
प्रख्यात हदीसे-क़ुदसी में आया है, ‘मैं एक छिपा हुआ ख़ज़ाना था, मैंने महबूब रखा कि मैं पहचाना जाऊं, फिर मैंने मख़लूक़ को पैदा किया ताकि मैं पहचाना जाऊं।‘
सर्वप्रथम जो चीज़ इस ख़ज़ाने से प्रागट्य के रूप में समक्ष आई, वह मुहब्बत थी, जो कि मख़लूक़ात की पैदाइश का कारण हुई।
(मक्तूबाते रब्बानी, उर्दू अनुवाद, दफ़तर 3, भाग 2, पृष्ठ 160, मक्तूब 122, प्रकाशक: मदीना पब्लिशिंग कंपनी बंदर रोड कराची)
(-‘अगर अब भी न जागे तो ...‘, पृष्ठ 105, उर्दू से अनुवाद: दुर्गाशंकर महिमवत् सत्यार्थी-)
यह दोनों तथ्य, जिनका उल्लेख हदीसों में इस प्रकार हुआ है, हदीसों से भी पहले हिंदू धर्मग्रंथों में इस प्रकार अभिव्यक्त की गई हैं-
‘एको ऽ हं बहु स्याम्।
‘मैं एक हूं अनेक हो जाऊं।‘
‘स वै नैव रेमे तस्मादे काकी न रमते स द्वितीयमैच्छत्।‘
शतपथ ब्राह्मण 14,3,4,3
उसने रमण नहीं किया इसीलिए एकाकी रमण नहीं होता। उसने द्वितीय की इच्छा की...।
‘यदिदं किंच मिथुनं आपिपीलिकाभ्यः तन्सर्वमसृक्षीत्। सो वेद अहं वाव सृष्टिरस्मि। अहं टि इदं सर्व असृक्षीति। ततः सृष्टिरभवत्।‘
-शतपथ ब्राह्मण 14,3,4,3
‘जो कुछ यह चींटी पर्यन्त जोड़ा है उस संपूर्ण की सृष्टि की। उसने जाना मैं ही सृष्टि हूं। मैंने ही यह सब सृष्टि की है। उससे सृष्टि हुई।‘
(‘विश्व एकता संदेश‘ पाक्षिक, पृष्ठ संख्या 7 व 8 पर वेद भाष्य ऋग्वेद 1,1,2 के अन्तर्गत पं. दुर्गाशंकर महिमवत् सत्यार्थी द्वारा लिखित ‘वेद आदि ग्रन्थ और क़ुरआन अन्तिम ग्रन्थ है‘, अंक 19-20, अक्तूबर 1994, रामपुर, उ. प्र.)
Read entire article - http://vedquran.blogspot.com/2012/01/mohammad-in-ved-upanishad-quran-hadees.html

भारत देश हमारा प्यारा

Written By Surendra shukla" Bhramar"5 on गुरुवार, 26 जनवरी 2012 | 8:31 pm


भारत देश हमारा प्यारा
बड़ा अनोखा अद्भुत न्यारा
शत शत इसे नमन .......
------------------------------------
तरह तरह की भाषाएँ हैं
भिन्न भिन्न है बोली
रहन सहन पहनावे कितने
फिर भी सब हमजोली
भारत देश हमारा प्यारा
बड़ा अनोखा अद्भुत न्यारा
शत शत इसे नमन ......
----------------------------------
मन मिलते हैं गले मिलें हम
हर त्यौहार मनाएं
धूमधाम से हँसते गाते
हाथ मिलाये सीढ़ी चढ़ते जाएँ ..
भारत देश हमारा प्यारा
बड़ा अनोखा अद्भुत न्यारा
शत शत इसे नमन .......

------------------------------------------
बड़े बड़े त्यागी मुनि ऋषि सब
इस पावन धरती पर आये
वेद ज्ञान विज्ञानं गणित सब
दुनिया योग  सिखाये ...
भारत देश हमारा प्यारा
बड़ा अनोखा अद्भुत न्यारा
शत शत इसे नमन .......

-------------------------------------
आलस त्यागे बच्चे बूढ़े कर्म जुटे  हैं
हरियाली खुशहाली  देखो
घर घर में है ज्योति जगाये
लिए तिरंगा नापे धरती सागर चीरे
पर्वत चढ़ के आसमान हम छाये
चमक दामिनी सी गरजें जब
दुश्मन सब थर्राएँ
भारत देश हमारा प्यारा
बड़ा अनोखा अद्भुत न्यारा
शत शत इसे नमन .......

-----------------------------------------
कितने जालिम तोड़े हमको
लूटे - ले घर भागे
सोने की चिड़िया हम अब भी
देखो सब से आगे
जहां रहेंगे खिल जायेंगे
फूल से महके जाते
वे जलते कोयले सा बनते
हीरा हम सब चमके जाते
भारत देश हमारा प्यारा
बड़ा अनोखा अद्भुत न्यारा
शत शत इसे नमन .......

-------------------------------
वीर जवानों वीर शहीदों
शत शत नमन तुम्हे ,
तेरे ऋण से उऋण  कहाँ हे !
नक़्शे कदम पे तेरे जाके
है प्रयास हम प्रजा सभी का
झंडा ले हम विश्व पटल पे
भरे  ऊर्जा जोश दोगुना
ऊंचाई   चढ़ सूर्य से चमकें
पल पल हम गतिशील रहें !
भारत देश हमारा प्यारा
बड़ा अनोखा अद्भुत न्यारा
शत शत इसे नमन .....

-----------------------------
सुरेन्द्र शुक्ल भ्रमर ५
करतारपुर पंजाब
२६ जनवरी २०१२
८-८.१५ पूर्वाह्न
---------------------------

HAPPY REPUBLIC DAY !

Written By shikha kaushik on बुधवार, 25 जनवरी 2012 | 9:11 pm







we live-love ''india''
so we are ''indian'',
india like an earthly heaven.
*******************************

no -no we are not ''punjabi ''
no-no we are not ''madrasi'
no-no we are not ''kashmeeri'
no-no we are not ''gujrati''
we are indian, only indian,
******soully indian***********
we are indian !

we have different dresses,
we have different foods,
we have different languages,
we have different religion,
but we are indian ,only indian
*******soully indian***********
     we are indian !

we serve our nation ,
this is our embition ,
destroy our enemy,
and save our nation ,
we are indian,only indian
************soully indian *********
          
            jai hind !jai bharat !
                                  shikha kaushik 
                                    [earthly heaven]

ब्लॉग -पहेली-११में हार्दिक स्वागत है

Written By shikha kaushik on मंगलवार, 24 जनवरी 2012 | 8:53 pm


ब्लॉग  -पहेली-११में  हार्दिक  स्वागत  है  


ब्लॉग  -पहेली-११में  आप सभी ब्लॉग बंधुओं व् बहनों का  हार्दिक  स्वागत  है  .इस बार  आपको क्रम  ठीक कर बताना  है  दिए   गए   तीन   ब्लोगर्स   के   नाम  .
                                                
                                               अग्रिम  शुभ कामनाओं  के  साथ  
                                               
                                                                 


                                                              शिखा कौशिक 
                                      
                                              [ब्लॉग पहेली चलो हल करते हैं ]

उत्तर प्रदेश में कब तक हावी रहेगी धर्म और जाति की राजनीती

Written By हरीश सिंह on सोमवार, 23 जनवरी 2012 | 9:12 pm

एक बार फिर उत्तरप्रदेश में चुनावी बयार बहने लगी है, चुनावी महाभारत में कूदने वाले रणबांकुरे महासमर पर विजय प्राप्त करने के लिए सभी नीतियों को अपना रहे है. उन्हें इस बात की चिंता नहीं है की किस तरह क्षेत्र, प्रदेश और देश का विकास होगा, उन्हें चिंता इस बात की है की चाहे जैसे हो जनता को बेवकूफ बनाकर वे विधानसभा में पहुँच जाय और पाँच साल तक जनता को बेवकूफ बनाने का मौका मिल जाय, किसी भी तरह मकसद सिर्फ एक ही है, चाहे वे किसी भी दल के हो. धर्म और जाति की गठजोड़ हो रही है. 
 आज सुबह एक मदरसे के प्रधान अध्यापक मौलाना अशरफी से मुलाकात हुई वे मूलतः बिहार के रहने वाले है, बिहार में जनता दल यूनाइटेड और भाजपा गठबंधन की सरकार चल रही है. उसी पर चर्चा शुरू हो गयी, वे नितीश की सरकार के गुड गाते नहीं थक रहे थे. निश्चित तौर पर बिहार का रहने वाला हर व्यक्ति आज नितीश के गुड गा रहा है. आखिर क्या कर दिया नितीश ने कौन सा जादू चला दिया, जी हा उन्होंने वहा  पर सिर्फ एक ही जादू चलाया है, चाहे वे किसी के वोट से जीते हो पर उन्होंने बिना किसी भेदभाव के चहुमुखी विकास किया, मैंने देखा नहीं है पर सुनता रहता हूँ, सबसे पिछड़ा कहा जाने वाला बिहार आज विकास   की ओर उन्मुख है, वहा की सड़के अच्छी है, कानून व्यवस्था सुदृढ़ है,  लोगो को रोजगार मिल रहा है. युवको का पलायन रुक गया है. जो दुकाने शाम ढलते ही बंद हो जाती थी आज वे आधी रात तक खुली रहती है. हो सकता है की मैंने गलत सुना हो पर आपको बता दू की मैं कालीन नगरी में रहता हूँ. भदोही का कालीन पूरे विश्व में मशहूर है. इसे डालर नगरी  भी कहा जाता है. पर यहाँ की टूटी फूटी सड़के, बजबजाती नालिया देखकर लगता है की हम किसी कसबे में रहते है. पहले जिन बिहारियों को यहाँ पर पैर की जूती समझा जाता था आज कालीन कारखाने वाले उनकी मन्नत करते है फिर भी वे आने को तैयार नहीं है. लोंगो को बुनकर नहीं मिल रहे है. क्योंकि नितीश ने रोज़गार के साधन उपलब्ध कराये. आप यह न सोचे की मैं जनता दल का कार्यकर्त्ता हूँ बल्कि जो सच है उसे कहने में परहेज नहीं है. बिहार के कानून व्यवस्था की देन है पूर्वांचल से अपहरण उद्योग बंद हो गया. 
अब जरा यु पी को देखिये.. प्रदेश की राजधानी चमक रही है. बसपा प्रमुख मायावती ने विकाश किया है पर अपना और अपने समाज का. राजा को सदैव समान भाव हर प्रजा के प्रति रखना चाहिए. पर ऐसा कभी नहीं हुआ, मुलायम सिंह आये तो यादवो को देखा, मायावती आयी तो उन्हें सिर्फ दलित दिखाई दिखाई दिया. पूर्ण बहुमत में आने के बाद उन्हें सुनहरा मौका मिला था चाहती तो वे अपराध मुक्त स्वच्छ समाज की स्थापना कर सकती थी. हर वर्ग में गरीब होता है, सभी के हित के लिए कार्य करती पर उन्हें अपना वोट बैंक बचाना था. इसका सबसे बड़ा दुस्परिनाम यह हुआ की मुलायम और भाजपा ने हिन्दू मुसलमानों के बीच दूरियां पैदा की और जबकि मायावती ने हिन्दुओ में ही मतभेद कर दिया. आज पूर्वांचल में दलितों के प्रति सवर्णों में जो आक्रोश पैदा हुआ है उसका परिणाम शायद बहुत बुरा होगा. जिससे बात होती है वह यही कहता है की अब सरकार नहीं रहेगी तो पता चलेगा. यह सामाजिक पतन का ही मार्ग है. मायावती चाहती तो आज उत्तर प्रदेश की सारी जनता उनका वोट बैंक होती पर वे फेल हो गयी.
आज गरीब महगाई, भ्रष्टाचार, अपराध, रिश्वत आदि समस्याओ से ग्रस्त है. फिर भी उसकी आंख नहीं खुल रही है. सभी राजनितिक दलों ने जाति धर्म की बहुलता के आधार पर टिकट बांटे है. अभी जिस दल की मैं बड़ाई  कर रहा था. उसी दल के एक बड़े  नेता से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. मैं लखनऊ एक मित्र को उसी पार्टी से टिकट दिलाने गया था. वह पढ़ा लिखा एक उत्साही युवक है. देहरादून मसूरी से पढने के बाद उसके मन में राजनीती में आने का शौक था. अच्छी बात है ऐसे लोंगो को आना चाहिए. पर साक्षात्कार के दौरान उससे पूछे गए प्रश्न ने मुझे हैरान कर दिया. उसकी जाति के साथ जातिगत आंकड़े और अन्य दलों के प्रत्यासियो की जाति पूछी जा रही थी. खैर टिकट तो मिला पर नेता जी के सवालो ने मुझे विचलित कर दिया. 
मैंने आज तक सिर्फ दो जातिया देखी है. 
अमीर और गरीब .... एक वह है जो अपने बच्चो को दो वक्त की रोटी खिलाने  के लिए दिन रात मेहनत  करता है. और एक वह है जो अपने कुत्तो को भी बिरयानी खिलाता है. एक वह है जिसके बच्चे कर में बैठकर स्कूल जाते है. एक वह है जिसकी बेटी आवारा लडको की फ़ब्तिया सुनते  हुए स्कूल  जाती है. या फिर वे पढ़ नहीं पाती है और अपनी इच्छाओ का गला घोटकर घर में पड़ी रहती हैं.

हमें सोचना होगा, धर्म कोई  भी हो वह हमें जीवन जीने की रह देता है. धर्म व जातिया इश्वर ने नहीं बनायीं. उसे हमने बनाया है. एक बार फिर हमें फैसला करने का वक्त मिला है. आज प्रत्यासी हमारी अदालत में फरियादी बनकर खड़ा है. हम जज है हमें न्याय करना है. जाति धर्म के बन्धनों से ऊपर उठकर हमें उसे चुनना  है जो हमारा रहनुमा बनने की क़ाबलियत रखता हो, इस बार मतदान करने से पहले जाती और धर्म न देंखे ... प्रत्यासी  की योग्यता , उसके संस्कार  उसका चरित्र, पूर्व में उसके किये गए कार्य देंखे. पार्टी कोई भी हो यदि सही व्यक्ति चुनकर जायेगा तो वह निश्चित रूप से बदलाव लायेगा .

सोचे समझे और मतदान अवश्य  करे, यह परिवर्तन  की बेला है. अब भी नहीं सोचे तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ़ नहीं करेगी .
उत्तर प्रदेश से धर्म और जाति की राजनीति ख़त्म करने के लिए एक कदम आप भी बढ़ाये...  
{शब्दों के उलटफेर और व्याकरण की अशुद्धियो के लिए माफ़ी चाहूँगा}

शांति और रूहानियत का संदेश लेकर पूरब से लेकर पश्चिम तक घूम रहे हैं मौलाना वहीदुददीन ख़ान

Written By DR. ANWER JAMAL on रविवार, 22 जनवरी 2012 | 8:23 pm

जिहाद का मतलब क्या है और जन्नत का हक़दार कौन है ? Jihad and Jannat


Dr. Anwer Jamal with Maulana Wahiduddin Khan

जो अपने आपको पाक करता है। उसके लिए जन्नत है। जितनी भी नेगेटिव थिंकिंग्स हैं, उनसे ख़ुद को पाक करना है। नफ़रत, हसद और ग़ुस्से से ख़ुद को पाक करना है।

Video Stream

Maulana has been addressing individuals, for decades, to re-engineer their minds and begin the process of constructing a positive personality in them Presently his addressals are held on a weekly basis at the Centre with an interactive session on Saturdays and Sundays.
हमने मौलाना वहीदुददीन ख़ान साहब का लेक्चर (15 जनवरी 2012) सुना तो हमने सोचा कि मौलाना के विचार नियमित रूप से हिंदी ब्लॉगर्स और हिंदी नेट यूज़र्स के सामने भी आने चाहिएं सो हमने उनका एक हिंदी ब्लॉग बना दिया है जो कि आपको सप्रेम भेंट है, देखिए
अल-रिसाला हिंदी
शांति और रूहानियत की उपलब्धि के लिए

A spiritual gift for you

और इसी के साथ इंसान को जिन सवालों की वजह से परेशान रहता है उन सबका जवाब भी वह पा सकता है उनकी वेबसाइट पर देखिए

Frequently Asked Questions


मौलाना अपनी बुढ़ापे की उम्र में भी इसी शांति और रूहानियत का संदेश लेकर पूरब से लेकर पश्चिम तक घूम रहे हैं, जो लोग दिल्ली या उसके आस पास रहते हैं वे मौलाना वहीदुददीन ख़ान साहब को रू रू सुनने की ख़ुशक़िस्मती पा सकते हैं उनके सेंटर पर जिसका पता है सीपीएस इंटरनेशनल 1 निज़ामुददीन वेस्ट नई दिल्ली 110013 एक फ़ोन नंबर भी है जिस पर आप उनके कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं- 01124357333

कैसी
लगी आपको आज की हमारी ख़ास पेशकश ?


Source : ब्लॉगर्स मीट वीकली (27) Frequently Asked Questions

पवित्र प्रेम ही सारी समस्याओं का एकमात्र हल है

Written By DR. ANWER JAMAL on शुक्रवार, 20 जनवरी 2012 | 3:17 pm

अपने प्रेम को पवित्र कैसे बनाएं ?
चरम सुख के शीर्ष पर औरत का प्राकृतिक अधिकार है और उसे यह उपलब्ध कराना
उसके पति की नैतिक और धार्मिक ज़िम्मेदारी है.
प्रेम को पवित्र होना चाहिए और प्रेम त्याग भी चाहता है.
धर्म-मतों की दूरियां अब ख़त्म होनी चाहिएं. जो बेहतर हो उसे सब करें और जो ग़लत हो उसे कोई भी न करे और नफ़रत फैलाने की बात तो कोई भी न करे. सब आपस में प्यार करें. बुराई को मिटाना सबसे बड़ा जिहाद है.
जिहाद करना ही है तो सब मिलकर ऐसी बुराईयों के खि़लाफ़ जिहाद करें जिनके चलते बहुत सी लड़कियां और बहुत सी विधवाएं आज भी निकाह और विवाह से रह जाती हैं।
हम सब मिलकर ऐसी बुराईयों के खि़लाफ़ मिलकर संघर्ष करें.
आनंद बांटें और आनंद पाएं.
पवित्र प्रेम ही सारी समस्याओं का एकमात्र हल है.

Read entire article on this blog
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2012/01/love-jihad.html

खबरगंगा: शाबाश! अभिनव प्रकाश!

Written By devendra gautam on सोमवार, 16 जनवरी 2012 | 1:33 am

हाल के वर्षों में बिहार झारखंड के कस्बाई इलाकों की कई प्रतिभाओं ने राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर यह साबित किया है कि ऊंची उड़ान कहीं से भी लगाई जा सकती है. इसके लिए महानगरों में जन्म लेना या वहां की आबो-हवा में पलना ज़रूरी नहीं है. ऐसा ही एक कारनामा कर दिखाया है बिहार के भोजपुर जिला मुख्यालय आरा के एक मध्यमवर्गीय परिवार से आये युवक अभिनव प्रकाश ने.उसने कैट की 2012 की परीक्षा में 99 .98 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सबको चौंका दिया है. उसके पिता अनिल कुमार सिन्हा और मां गीता सिन्हा का सीना तो गर्व से चौड़ा हो ही गया है. पूरे सूबे के लोग स्वयं को गर्वान्वित महसूस कर रहे हैं.
अभिनव आरा के राजेंद्र नगर का रहना वाला है. उसने डीएवी, आरा से 10 वीं और डीएवी खगौल से 12 वीं पास किया. सुपर 30 के जरिये उसने कोचिंग की और 2005 में आईआईटी-जेईई की प्रतियोगी परीक्षा पास कर आईआईटी, बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय में दाखिला लिया. वर्ष 2009 में वहां की पढाई पूरी की. कैम्पस प्लेसमेंट के तहत उसे कोल इंडिया लिमिटेड में मैनेजमेंट ट्रेनी के लिए चयनित किया गया. उसने कोल इंडिया में योगदान दिया लेकिन उसे अभी और ऊंची उड़ान भरनी थी लिहाज़ा 2010 में उसे छोड़ कर जेडएस एसोसिएट्स, नई दिल्ली को ज्वाइन कर लिया. इस बीच जमकर तैयारी की और 2012 में कैट की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया. अब उसकी अगली उड़ान क्या होगी यही देखना है.
----देवेंद्र गौतम

अनाथ विधवाओं की समस्या का समाधान क्या है ? Widows in Vrindawan

Written By DR. ANWER JAMAL on बुधवार, 11 जनवरी 2012 | 6:42 pm

हमने स्वराज्य करूं के ब्लॉग पर एक दिल दुखाने वाली ख़बर देखी

कृष्ण कन्हैया की धरती पर यह कैसा कलंक ?

खबर  आयी है कि भगवान कृष्ण कन्हैया की पवित्र भूमि वृन्दावन में संचालित सरकारी आश्रय गृहों की अनाथ विधवाओं के मरने के बाद उनके शरीर के टुकड़े -टुकड़े करके स्वीपरों द्वारा जूट की थैलियों में भर कर यूं ही फेंक दिया जाता है !   यह समाचार कल एक हिन्दी सांध्य दैनिक 'छत्तीसगढ़ ' में प्रकाशित हुआ है, जो अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू ' में छपी खबर का अनुवाद है.  अगर यह खबर सच है तो  यह भयंकर अमानवीय और शर्मनाक करतूत हमारे लिए राष्ट्रीय शर्म की बात  है .  क्या आज का इंसान इतना गिर चुका है कि किसी मानव के निर्जीव शरीर को सदगति देने के बजाय वह उसके टुकड़े-टुकड़े कर  किसी गैर ज़रूरी सामान की तरह कचरे में फेंक दे ? 
   छपी खबर  के अनुसार वहाँ ऐसा इसलिए होता है ,क्योंकि इन असहाय और अनाथ महिलाओं की मौत के बाद उनके सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए कोई वित्तीय प्रावधान नहीं है.
इस पर आई कुछ प्रतिक्रियाएं भी आप देखें  .



ह्रदय को झकझोरनेवाली खबर दी है आपने.सत्य को परखने की बात मत कीजिये बात सत्य ही होगी. इस निर्मूल्य होते मानवीय संबंधों के लिए कुछ करने के लिए अन्ना जैसे आन्दोलन की जरूरत है और उससे पहले अपने हृदयों को स्वक्छ करने की भी


रेखा said...

आपकी खबर से तो मैं कांप गई हूँ ...क्या ऐसा भी कहीं हो सकता है ?
बहुत ही मार्मिक और हृदयविदारक प्रसंग

यह ख़बर दिल दुखाती है और हिंदी ब्लॉगर्स ने अपनी संवेदना भी प्रकट की है लेकिन यह समस्या इससे ज़्यादा तवज्जो चाहती है। यह समस्या एक स्थायी समाधान चाहती है।
क्या है इस समस्या का समाधान कि भविष्य में फिर किसी अनाथ और ग़रीब विधवा के साथ ऐसा अमानवीय बर्ताव न हो।
जब हमने इस पर विचार किया जो हमने पाया कि हिंदू रीति से अंतिम संस्कार बहुत महंगा पड़ता है। महंगा होने की वजह से ही ग़रीब विधवाएं अंतिम संस्कार से वंचित रह जाती हैं। महंगा होने की वजह से ही समाज के लोग उनके साथ ग़ैर इंसानी बर्ताव न चाहते भी करते हैं।
दफ़नाने की विधि अमीर ग़रीब सब अपना सकते हैं। इसमें अपेक्षाकृत बहुत कम ख़र्च आता है और अगर बिल्कुल ग़रीब को सादा तरीक़े से दफ़नाया जाए तो फिर वह ख़र्च भी नहीं होता। दफ़नाने की विधि हिंदुओं में भी प्रचलित है लेकिन इसे केवल मासूम बच्चों के लिए और सन्यासियों के लिए ही प्रयोग किया जाता है।
अगर सभी के लिए यही एक विधि लागू कर दी जाए तो यह समस्या ही समाप्त हो जाएगी कि ग़रीब के अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे लिहाज़ा उसका अंतिम संस्कार नहीं हो पाया।
विधवा विवाह की व्यवस्था होनी चाहिए। समाज में इसे प्रोत्साहन देना चाहिए।
आजकल वैसे भी समाज में स्त्री लिंग का अनुपात पुरूषों के मुक़ाबले कम है।
ऐसे में अगर ढंग से कोशिश की जाए तो कामयाबी मिलने में कोई शक नहीं है।
इस तरह एक विधवा नारी को समाज में इज़्ज़त का मक़ाम भी हासिल हो जाएगा और वह एक इंसान की तरह शान से सिर उठाकर जी सकेगी और मरने के बाद इज़्ज़त के साथ ही उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

आपकी क्या राय है ?

  • आज के अख़बार में एक ख़बर भी नज़र आई है जिससे पता चलता है कि समाज में संवेनाएं अभी ज़िंदा हैं। ख़बर के मुताबिक़ बुलंदशहर (उ. प्र.) में एक संस्था काम कर रही है। जनाब एच. यू. क़ुरैशी साहब की अध्यक्षता में इस यह सोसायटी अब तक 134 लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर चुकी है।
  • न्यूज़ कटिंग की इमेज सलग्न है।

ये नेता अब बिगड़ गए हैं

ये नेता अब बिगड़ गए हैं
—————————–
खटमल तो हैं भले बिचारे
चूस रक्त फिर भक्त बने
ये नेता तो चूसे जाते
घर भर लेते नहीं अघाते
दिन में भी हैं लूट रहे
सात समुन्दर पार हैं उड़ते
दिल बदले फिर फिर कर आते
जिस थाली में आते खाते
उसी में सौ सौ छेद करें
——————————–
मच्छर तो हैं भले बिचारे
बोल चूस कर उड़ जाते
बच सकते जो जागे होते
नेता जैसे नहीं ये होते
आँख झंपी तो वार करें
अपने बीच में पड़े खड़े हैं
कोल्हू जैसे पेर रहे
यहीं घूमते गोले-गोले
निशि दिन तेल निकाल रहे
———————————–
मगरमच्छ सा भोले बन के
यहाँ वहां है सोये
खून सूंघते आहट पर ये
“सौ” -टन जबड़ा कसते
————————-
माया मोह न भाई बंधू
कुछ भी ना पहचानें
बड़े बेरहम हैं -अंधे -ये
माँ को भी ना जानें
—————————-
ये बन्दर हैं छीन झपट लें
शेर से करते वार
देव -दूत ना हंस नहीं हैं
गीदड़ -रंगा-नील सियार
पिजड़े में जब तेरे होंगे
मिट्ठू मिट्ठू बोलें
नाक नकेल अगर तुम ला दो
देश का बोझा ढो दें !!
————————————
ये नेता अब बिगड़ गए हैं
फूल का हार न भाता
कोई जूता -हार -पहनता
कोई थप्पड़ खाता !
——————————
काल कोठरी इनको भाती
एक एक कर जाते
माँ के दूध की लाज भी भूले
तनिको ना शरमाते
——————————-
रौंद रौंद फुलवारी को अब
सब पराग ले जाता
अंडे खा ना पेट भरे ये
“सोने चिड़िया ” नजर गडाए
—————————
विद्वानों की मति मारें ये
पार्टी चाबुक लाये
जनता को सौ टुकड़े बाँटें
खून हैं रोज बहाते
रावण कंस बने ये दम्भी
देव से लड़ने जाते !!
——————————-
अथक परिश्रम से बनता है
भाई अपना खून
पानी सा मत इसे बहाना
सपने में ना भूल
कल रथ की डोरी हाथों में
तेरे फिर फिर आये
कोड़ा -चाबुक ले कर ही चढ़ना
गीता रखना याद !
माया -मोह- न रटना- “अपने ”
अर्जुन कृष्ण को लाना चुन के
तभी जीत हे ! जनता तेरी
तेरा होगा राज !!
———————————————
शुक्ल भ्रमर ५
३.३०-४.३१ पूर्वाह्न
२७.११.११ यच पी

जज़्बात ....

Written By Pallavi saxena on सोमवार, 9 जनवरी 2012 | 9:24 pm

संग चलना तो चाहती हूँ तेरे 
मगर कुछ मजबूरियाँ है,
मेरी,तो कुछ तेरी भी, 
आज भले ही बदल गई हो 
ज़िंदगी तेरी,जिसके चलते 
आज न तुम मेरे हो, और न मैं तुम्हारी,
मगर शायद तुम्हें याद हो
कभी लिया था तुम ने वादा एक मुझसे 
कि दूर रहकर भी पास रहूँ मैं सदा तुम्हारे 
क्यूंकि शायद डर था तुम्हें 
कहीं की छूट जाओ न तुम कभी किनारे
क्यूंकि दो नावों में सवारी करना 
अक्सर हानी कारक साबित होता है।
लेकिन तब भी मैंने कहा था हाँ ...जब भी तुम मुझे 
सच्चे दिल से याद करोगे 
मुझे साथ पाओगे अपनी रूह की तरह 
जिसे तुम देख तो ना सकोगे 
मगर महसूस नहीं कर सकोगे
हवाओं कि तरह 
क्यूंकि अब हमारी अपनी ज़िंदगी ही,
हमारी अपनी नहीं
अब अधिकार है उस पर किसी ओर का....
चाहती तो हूँ दूर रहकर भी 
तू मुझे याद करे, यादों मे ही सही 
तू मुझे अपने पास महसूस तो करे
जैसे रेगिस्तान में साथ-साथ उड़ती
या चलती रेत जिसे सिर्फ हवाओं के 
जरिये ही महसूस किया जा सकता है,
ठीक उसी तरह तेरी ज़िंदगी में, 
मैं अपना भी, वजूद देखना चाहती हूँ
जो दिखाई भले ही ना दे 
लेकिन जिसे महसूस किया जा सके
प्यार के एहसासों और यादों के ज़रिये
ऐसे जैसे समंदर के पानी में नमक..
और कुए के पानी में मिठास 
जो दिखकर भी दिखाई नहीं देती 
जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है
जज़्बातों की तरह .....
पल्लवी ....    

Sahitya Surbhi: दीवारें ( कविता )

Written By Dilbag Virk on रविवार, 8 जनवरी 2012 | 1:40 pm

Sahitya Surbhi: दीवारें ( कविता ): धर्मों के बीच जातियों के बीच इंसानों के बीच कब खिंचती हैं ईंट-पत्थर की दीवारें बेशक एक घर को दो घरों में बांटती है दीवार एक धरती को ...

ग़ज़लगंगा.dg: तमन्नाओं की नगरी को कहीं फिर से बसा लूंगा

तमन्नाओं की नगरी को कहीं फिर से बसा लूंगा.

यही दस्तूरे-दुनिया है तो खुद को बेच डालूंगा.


तुझे खंदक में जाने से मैं रोकूंगा नहीं लेकिन

जहां तक तू संभल पाए वहां तक तो संभालूंगा.


उसे मैं ढूंढ़ लाऊंगा जहां भी छुप के बैठा हो

मैं हर सहरा को छानूंगा, समंदर को खंगालूंगा


दिखाऊंगा कि कैसे आसमान में छेद होता है

मैं एक पत्थर तबीयत से हवाओं में उछालूंगा .


मिलेगी कामयाबी हर कदम पर देखना गौतम

खुदा का खौफ मैं जिस रोज भी दिल से निकालूंगा.


----देवेंद्र गौतम

प्रयाग = प्राय + आग

Written By Brahmachari Prahladanand on शनिवार, 7 जनवरी 2012 | 7:49 am

.
प्राय जहां पर आग रहती है, उसे ही प्रयाग कहते हैं, काफी दिनों से एक बात अंदर ही अंदर कुलबुला रही थी की इस कडाके की ठंडी में, हर साल माघ के मेला में, एक महीने तक गंगा और जमुना के संगम पर कैसे लोग प्रयाग में रह जाते हैं, फिर पता चला की गंगा का जल ठंडा है, और यमुना का जल गर्म है, और जब यह गर्म और ठन्डे पानी की जलधारा प्रयाग में मिलती हैं, तो वहां पर एक अलग ही तरह की आग पैदा करती हैं, और उस आग में जो रस बनता है उसे सरस्वती कहते हैं, यानी सरस्वती वहां पर मिलती नहीं, वहां पर प्रकट होती है |
.
जो गंगा का जल प्रयाग से पहले है और जो जमुना का जल प्रयाग से पहले है, और प्रयाग के बाद का जल है उसमे अंतर आ जाता है, तो गंगा के ठन्डे जल और यमुना के गर्म जल के मिलने पर जो एक अलग तरह की आग एक आभा प्रकट होती है, उस आभा में उन लोगों को ठण्ड का पता नहीं चलता है, और वहाँ पर ज्ञान रुपी सरस्वती फिर बहती है, गंगा नहीं बहती है, क्यूंकि प्रयाग ज्ञान के मामले में बहुत बड़ा शिक्षा का केंद्र है |
.
और फिर उससे आगे बनारस है, फिर आगे जैसे-जैसे बढती जाती है, आगे उस गंगा के किनारे पर रहने वाले या उस प्रदेश के लोग ज्ञान वाले होते हैं, और बुद्धिमान होते हैं, और जब गंगा बंगाल में जाती है तो वहां पर बंगाली लोग सबसे ज्यादा बुद्धिमान और विद्वान होते हैं, क्यूंकि वह अब गंगा नहीं अब सरस्वती है, और फिर यही सरस्वती आगे ब्रह्मपुत्र में मिलकर ज्ञान की पूर्ति करती है और पदमा नाम से जानी जाती है |

.

न जाने कितने रूपों को अपनाता है

Written By Brahmachari Prahladanand on गुरुवार, 5 जनवरी 2012 | 8:35 am

न जाने कितने रूपों को अपनाता है,
न जाने कितने रुपयों को कमाता है,
एक बार जो दुनिया को ठगने लग जाता है,
वही रूप बदलने वाला ही तो बहुरुपिया कहलाता है,

रूप वो बदल लेता है,
हर भाषा जान लेता है,
जिस देश में जाएँ,
वेश वही पहन लेता है,

लोगों को लगता अपना है,
पूरा करता सपना है,
कुछ दिन रहकर साथ में,
कूच उसको करना है,

बातों ही बातों में,
बात वो सब निकाल लेता है,
रूप हर किसी का धर लेता है,
भाषा हर किसी की बोल लेता है,

ऐसे ही धीरे-धीरे,
बहुरुपिओं को जमा कर लेता है,
एक नाटक फिर बना लेता है,
नाटक कर-कर, रुपया जमा कर लेता है,

बहुरूपिये का रूप बना वो,
सारी धरती घूम लेता है,
ईधर की चीज़ उधर,
इसी सहारे कर लेता है,

बहुरूपिये का असली चेहरा न कोई देख पाता है,
बगल में भी गर खड़ा हो तो कोई न पहचान पाता है,
यही बहुरुपिया नाम बदल कर नाटक में आता है,
असली नाम भी बहुरूपिये का न कोई जान पाता है,



.

blog paheli chalo hal karte hain !-8

Written By shikha kaushik on मंगलवार, 3 जनवरी 2012 | 10:46 pm

HAZRAT BAQI BILA KI KARAMAT DR TAHIR UL QADRI



"ब्लॉगर्स मीट वीकली (24) Happy New Year 2012"

पेड़ पौधों में भी होता है तंत्रिका तंत्र 
मुहब्बत  में घायल वो भी है और मैं भी हूँ,
वस्ल के लिए पागल वो भी है और मैं भी हूँ,
तोड़ तो सकते हैं सारी बंदिशें ज़माने की,
लेकिन घर की इज्जत वो भी है और मैं भी हूँ,

{वस्ल = मिलन}

"ब्लॉगर्स मीट वीकली
(24) Happy New Year 2012"
में आयें .
आपको यहाँ कुछ नया और हट कर मिलेगा .

पेड़ पौधों में भी होता है तंत्रिका तंत्र और वे प्रतिक्रिया भी देते हैं
आश्चर्य की बात यह है कि यह प्रक्रिया बिल्कुल वैसी है, जैसे मानव का तंत्रिका तंत्र काम करता है. ऐसा सेल्स (इलेक्ट्रो-केमिकल सिग्नल) के कारण होता है. यह पेड़-पौधों के तंत्रिका तंत्र के रूप में काम करता है.
शोधकर्ताओं ने कहा कि प्रकाश में उपस्थित कूट सूचनाओं को पेड़-पौधे याद रखते हैं. 

टार्गेट फिफ्टीन को लेकर अल्पसंख्यक मामलात फ्रंट का अभियान कोटा में १९ से

Written By Akhtar khan Akela on रविवार, 1 जनवरी 2012 | 7:22 pm


टार्गेट फिफ्टीन को लेकर अल्पसंख्यक मामलात फ्रंट का अभियान कोटा में १९ से सम्भाग स्तर पर शुरू होगा जिसमे अल्पसंख्यक मामलों को लेकर अधिकारीयों को दिए गये टार्गेट पूरा नहीं करने के मामले में और अल्पसंख्यकों के काम अनावश्यक अटकाने वाले अधिकारीयों से जवाब तलब होगा ..............उक्त निर्णय आज यहाँ कोटा में आयोजित अल्पसंख्यक मामलात फ्रंट के नव वर्ष स्नेह मिलन और चिन्तन शिविर में फ्रंट के अध्यक्ष एजाज़ अहमद अज्जू भाई की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया ..कोटा में आज आयोजित फ्रंट के शिविर में संयोजक अख्तर खान अकेला ने बताया के केंद्र और राज्य सरकार ने पन्द्रह सूत्रीय कार्यक्रम के तहत अल्पसंख्यकों को विभिन्न मामलों में विशेष योजनाओं की सुविधाएं दी है साथ ही .राजस्थान सरकार ने सभी योजनाओं में विभाग्यध्य्क्षों को पन्द्रह फीसदी अल्पसंख्यकों को लाभ देने के भी निर्देश दिए हैं ......अख्तर खान अकेला ने आंकड़ों पर ध्यान दिलाते हुए बताया के कोटा में महिला विकास ग्रामीण अभिकरण सहित विभिन्न ऋण योजनाओं और अन्य योजनाओं में टार्गेट फिफ्टीन की पूर्ति नहीं की गयी है यहाँ तक के पन्द्रह सूत्रीय कार्यक्रमों में भी विशेष उपलब्धि नहीं दिखाई गयी है ............. बैठक में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एजाज अहमद ने कहा के अल्पसंख्यक मामलात विभाग की तरफ से कोटा में स्वीक्रत हज डेस्क में कोटा वक्फ कमेटी नोडल एजेंसी बन कर सम्पूर्ण सहयोग करेगी जबकि रोज़गार के लियें ..शेक्षणिक ऋण और छात्र्वर्त्तियों के लियें ..उर्दू जुबां के उत्थान ..मदरसों के आधुनिकीकरण के लियें जिला उद्ध्योग विभाग से आयोजित प्रशिक्षण शिविर के लियें कम्प्यूटर प्रशिक्षण और अन्य सभी योजनाओं के लियें फ्रंट के पदाधिकारी और इनके द्वारा नियुक्त कर्मचारी कोटा सहित सभी जिलों में जाकर जाग्रति अभियान चलाएंगे और सभी जिलों में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के साथ क्षेत्रीय अल्पसंख्यक समस्याओं को अधिकारीयों को लिखित में देंगे और फिर अगर समय बद्ध कार्यक्रम के तहत उन शिकायतों पर विचार नहीं किया जाता है तो राज्यसरकार में तेनात मंत्रियों ..अयोगों के अध्यक्षों से ऐसे अधिकारीयों की शिकायत की जायेगी ताके उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करवाई जा सके .......... कार्यक्रम में बोलते हुए फ्रंट के उपाध्यक्ष पूर्व नगरपालिका चेयरमेन केथुन नसरुद्दीन अंसारी ने कहा के आज अल्पसंख्यकों को सुविधाएँ देने वाले कार्यालयों में भी कोटा सहित अन्य जिलों में पर्याप्त स्टाफ और भवन की व्यवस्था नहीं है उन्होंने कहा के कोटा के कार्यालय में अल्पसंख्यक आवेदकों के बेठने के स्थान की बात तो दूर कर्मचारियों के बेठने की भी व्यवस्था नहीं है यही हाल अन्य जिलों का भी है उन्होंने कहा के सभी जिलों में कार्यालय व्यस्थित रूप से अपना कार्य करें और पीड़ित आवेदकों तक सभी योजनाओं का लाभ प्रचार प्रसार कर पहुंचाए इस पर विशेष निगरानी की जरूरत है .........कार्यक्रम में बोलते हुए जिला वक्फ कमेटी कोटा के चेयरमेन हाजी अज़ीज़ अंसारी ने कहा के अल्पसंख्यक मामलात फ्रंट को कार्यालय के लिए वक्फ कमेटी जगह उपलब्ध कराएगी उन्होंने कहा के आगामी १९ जनवरी को आयोजित इस कार्यक्रम की त्य्यारियों के लियें कोटा , बूंदी, बारां ,झालावाड की सभी वक्फ कमेटियों मदरसा को ओर्दिनेटरों , मस्जिद कमेटियों ..समाज की तंजीमों को इसकी सुचना दे दी गयी है इस कार्यक्रम की सरपरस्ती के लियें शहर काजी अनवर अहमद का नाम प्रस्तावित किया गया जिसे सभी ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया .....बैठक में फ्रंट का विस्तार करते हुए कोमरेड करीम , अब्दुल सलाम जर्रा ... रईस अहमद अनंतपुरा ...अरब अली अफगान ....बशीर अहमद ...को कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया .... बैठक में मुस्लिम माइनिरिती फ्रंट ..मोमिन कोंफ्रेंस ॥ फातेहान । ॥ अब्बासी वेलफेयर सोसाइटी ..सलमान पंचायत..राहीन पंचायत ... आल मुस्लिम संघ ..अंसारी वेलफेयर सोसाइटी ..ब्राद्राने कुरैशी .....अल्फ्लाह वेलफेयर सोसाइटी ..सभी मुस्लिम पार्षद जिला परिषद सदस्य .पंच ..सरपंच ..सर्वोदय स्कुल के हाजी गफ्फार मिर्ज़ा ..सहारा स्कुल के लियाकत अंसारी ..चिल्ड्रन स्कुल के शफी खान ..कोंग्रेस के प्रदेश महासचिव डोक्टर जफर ॥ हाजी बुन्दू ..इरफ़ान गोरी ..कोमरेड गफ्फार सदर अंजुमन भीमगंज मंडी ॥ हशमत अली ..... अब्दुल रजाक बाबा ...अब्दुल माजिद विज्ञान नगर ..वफाती खान ..अब्दुल सलाम अंसारी सहित सभी मुस्लिम तंजीमों अन्जुमानों समितियों मदरसा समितियों अल्पसंख्यक कर्मचारी संघ को आयोजन समिति में लेने का निर्णय लिया गया ...... फ्रंट के अध्यक्ष एजाज़ खान ने बताया के इस सम्बन्ध में शीघ्र ही आयोजन समिति से जुड़े लोगों की बैठक आयोजित कर फ्रंट का विस्तार भी किया जाएगा .............. अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

साहित्य सुरभि: हो मुबारिक साल नया

साहित्य सुरभि: हो मुबारिक साल नया: नव जीवन की आस ले , आया है नव वर्ष माहौल बने शान्ति का , फैले हर-सू हर्ष । फैले हर - सू हर्ष , यही कोशिश हो सबकी सुधरें कुछ ह...

Founder

Founder
Saleem Khan