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Life is Just a Life: ढलता सूरज dhalta suraj

Written By Neeraj Dwivedi on गुरुवार, 29 अगस्त 2013 | 3:29 pm

Life is Just a Life: ढलता सूरज dhalta suraj: डगमगाती चाल , टूटी अस्थियों की ढाल , कुछ बुदबुदाते होंठ , कुछ सहेज रक्खीं चोट , कांपती जर्जर जरा , हर श्वांस  में अनुभव भरा , ...

श्याम हमारे नान्हे कान्हा मनमोहन हैं भाई

Written By surendra kumar shukla BHRAMAR on बुधवार, 28 अगस्त 2013 | 8:42 pm





श्याम हमारे नान्हे कान्हा मनमोहन हैं भाई

हमारे सभी प्यारे दुलारे कान्हा गोपियों राधे माँ  को प्रभु कृष्ण के  जन्म पर ढेर सारी हार्दिक शुभ कामनाएं सब मंगल हो
आइये एक बार खुले दिल से जोर से बोलें 
प्रभु श्री कृष्ण की जय
हरे कृष्ण -हरे राम राम राम हरे हरे
और रात के बारह बजे तक कान्हा के संग बाल गोपाल बन के  ध्यान और आराधना में डूब जाएँ


श्याम हमारे नान्हे कान्हा मनमोहन हैं भाई
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मोर पंख संग रत्न जड़े हैं
कारे घुंघराले हैं बाल
माथे तिलक चाँद सोहे है
सूरज सम चमके है भाल
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सुन्दर भृकुटी मन-मोहक है
मोर पंख ज्यों घेरे नैना
तीन लोक दर्शन अँखियन में
अजब जादुई वशीकरण कान्हा के नैना
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मुख-मण्डल यों आभा बिखरी
मन-मोहन खिंचते सब आयें
कोई दधि  ले माखन कोई
आतुर छू लें कैसे दर्शन पायें
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कर्ण कपोल गाल पे कुण्डल
हहर -हहर जाए भक्तन  मन
लाल होंठ ज्यों बोल पड़ेंगे
खुले दिखे मुख जीव जगत सब
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दमकत लपकत हार गले है
ज्यों दामिनि  छवि धरती -अम्बर
दर्द मोह माया सब भूले
प्रभु चरणों सब मिलता सम्बल
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रंग -बिरंगे पट आच्छादित
मुरली  खोंसे हैं करधन
गायग्वाल सखियाँ आह्लादित
पुलकि-पुलकि हैं  खिले सभी मन
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श्याम हमारे नान्हे कान्हा मन-मोहन हैं भाई
मातु देवकी यसुदा माता आज धन्य हर माई
पूत जने ललना यों लायक घर घर बाजे थाली
गद-गद ढोल नगाड़े तासेमथुरा वृन्दावन काशी
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर'
५ .० ५ - ५ . ३ ५ मध्याह्न
कृष्ण जन्माष्टमी
प्रतापगढ़

कुल्लू हिमाचल



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Life is Just a Life: कन्हा - रास नहीं अब समर चाहिये Kanha - Raas nahi a...

Life is Just a Life: कन्हा - रास नहीं अब समर चाहिये Kanha - Raas nahi a...: हे कृष्ण तुम्हारी लीलाएं कुछ प्रेमपगी कुछ शोणितमय, कुछ माखनचोरी गौपालन कुछ त्यागमयी कुछ अन्त्योदय। कुछ चोरी सीनाजोरी कर कुछ गो...

Life is Just a Life: खोखला भाषण - १५ अगस्त २०१३ Khokhla Bhashan - 15 Au...

Written By Neeraj Dwivedi on गुरुवार, 15 अगस्त 2013 | 2:24 pm

Life is Just a Life: खोखला भाषण - १५ अगस्त २०१३ Khokhla Bhashan - 15 Au...खोखला भाषण - १५ अगस्त २०१३

देखीं आज कतारें दिल्ली में रंगों की मूक इशारों की,
PM के भाषण में गयी सुनाई  ख़ामोशी दरबारों की,

भारत के  ठेकेदारों ने  कायरता  इस कदर दिखाई,
टूटी चीखों  के आगे मरता आवाहन न पड़ा सुनाई,
न जाने किस आज़ादी की भारत को दी गयी बधाई,
लालकिले को वीरों के कटे सिरों की याद नहीं आई,

दिल्ली में होती तार तार बहनों की चीख नहीं देखी,
सतरंगी वादों पर पलती  भारत की भूख नहीं देखी,
सीमा पर हो गए शहीदों की माँओं का दर्द नहीं देखा,
वीरों की ललनाओं के  सिंदूरों का सन्दर्भ नहीं देखा,

वो काश्मीर जहाँ केसर में ....

हर चश्म ए दीदार खुदा तेरे नूर से है

Written By बरुण सखाजी on मंगलवार, 6 अगस्त 2013 | 12:42 pm

Durgashakti Nagpal
यह वास्तव में कांग्रेस के सेकुलरिज्म की जीत है, जो उसने भाजपा के हिंदूवाद के साथ मिलकर देश में पैदा किया है, कि हर मामले के मूल, तना, फल, पत्ती से लेकर पुंकेसर तक धर्म रमा, जमा है। यूं कहिए कि हर चश्म ए दीदार खुदा तेरे नूर से है। हर घटना, व्यक्ति, बात, विचार, आचार, खाना, मरना सब कुछ धर्म के चश्मे से ही देखा जाता है। मामला बहुत छोटा है दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन। लेकिन इसने जो पैर फैलाए हैं, वह देश के लिए घातक हंै। यूपी की सरकार जैसे यह मान रही है कि यूपी उनका कोई पर्सनल राज्य है, तो वहीं केंद्र से सोनिया ने महिला अफसर होने के नाते चिमटी काटने की कोशिश भी कुछ ऐसी ही धारणा की उपज है। भाजपा इसमें क्या करे वह तय नहीं कर पा रही, सामान्य प्रोटेस्ट के अलावा कोई वैचारिक पृष्ठ इसका उसके पास है नहीं।
ऐसे में जिसको जो मिल रहा है वह किए जा रहा है। जिक्र है कि रायपुर में भी अधिकारी की जाति नागपाल के बारे में तहकीकात की जा रही है, कि वह अगर सिंधी है तो सिंधी समाज की सियासी विंग इसमें एक एंगल यह जोड़ दे या फिर वह ठाकुर है तो क्षत्रिय समाज की विंग कुछ करने लगे। यानी दुर्गाशक्ति नागपाल कम से कम यूपी राज्य सरकार की अफसर तो नहीं है। वह यूपी सरकार की नजरों में आतातायी हिंदू अफसर है, जो मुस्लिमों पर कुल्हाड़ी लेकर वार करने को तत्पर है, तो सोनिया की नजरों में पीडि़त महिला अफसर, भाजपा की नजरों में कुछ नहीं है, तो सिंधियों की नजरों में सिंधी, ठाकुरों के नजरों में ठाकुर, तो पंजाबियों की नजरों में पंजाबी है। कुछ आजीवन छात्रों की नजरों में वह चश्माधारी पढ़ाकू मैरिटोरियस है, जो उसे मैरिटोरियस कहकर यह बताना और जताना चाहते हैं कि देश में पढ़ाकुओं की कद्र नहीं है।
यह कोई नई बात नहीं है, देश में लगभग हर मामले को इसी दूरबीन से ताड़ा जाता है, फिर उसमें संभावनाएं देखी जाती हैं। ऐसा होता ही है, तो होने दीजिए। इसे रोकने के लिए कुछ तथाकथित लिख्खाड़ों और विचारों के गुब्बारों को फूटना होगा, अपने कंफर्ट से बाहर आना होगा, वह चूंकि संभव ही नहीं है, तो जाने दीजिए।
बेशक यह कांग्रेस के यूरोपियन शब्द सेकुलर से उपजी गंदगी है, लेकिन इसमें भाजपा की भूमिका भी कम नहीं है। चूंकि वे दूसरी तरफ एक अजीब सी बात रचते गए, अपने फायदे के लिए गढ़ते गए। अंतराल में सेकुलरिज्म को खतरा संप्रदायवाद से नहीं रहा, बल्कि हिंदूवाद से हो गया।
-सखाजी

Sahitya Surbhi: फैले मुहब्बत करो ये दुआ

Written By Dilbag Virk on शनिवार, 3 अगस्त 2013 | 8:30 pm

Sahitya Surbhi: फैले मुहब्बत करो ये दुआ:                  दर्द देगी यहाँ साफगोई सदा                 सीख लो बात को तुम घुमाना जरा ।                          तुम गलत मानते, ब...

तीसरे मोर्चे की कवायद

Written By बरुण सखाजी on गुरुवार, 1 अगस्त 2013 | 9:53 pm

Third front rehearsal in CG is dangerous.
छत्तीसगढ़ सियासी तौर पर बाई पोलर ही है। ऐसा रहना किसी भी डेमोक्रेसी के लिए सशर्त अच्छा है। सशर्त यानी अमेरिका जैसा टू पार्टी सिस्टम नहीं, बल्कि टू पावरफुल पार्टीज सिस्टम, जहां पर तीसरी और चौथी शक्तियां भी हो सकती हैं, किंतु वह महीन और कमजोर हों। लेकिन उनमें भी यह संभावना हमेशा बनी रहनी चाहिए कि वे कभी, किसी भी वक्त इन दो पॉवरफुल पार्टीज में से किसी एक का स्थान हासिल कर सकती हैं। छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के अलावा तीसरी शक्ति का कोई उदय नहीं है, कहने को भले ही 2003 में एक सीट एनसीपी और दो सीटें बीएसपी के पास थीं, ऐसे ही 2008 में भी एनसीपी की सीट नहीं रही, लेकिन बीएसपी बरकरार रही। किंतु इसका तब तक कोई मायना नहीं, जब तक कि यह 4-5 का आंकड़ा क्रॉस नहीं करती।
इन दिनों तीसरे मोर्चे की कवायद देखने को मिल रही है। इसमें तमाम मुहल्ला और उधारी सियासी दल जोरआजमाइश कर रहे हैं। यह राज्य के लिए खराब है। चूंकि इन दिनों जोगी भी मार्जनाइज हैं। ऐसे में कहीं इस तथाकथित तीसरे मोर्चे ने ताकत पकड़ ली और हर पार्टी कहीं न कहीं बीजेपी कांग्रेस की वोट काटू बन गईं, तब जोगी अपने परिवार के बूते 3 सीटों के साथ कांग्रेस से अलग होकर इनसे जुड़ सकते हैं। और कहीं अगर तीसरे मोर्चे की तमाम पार्टियों में से एक या दो दलों ने भी सीटें हासिल कर लीं, तब फिर देखिए राज्य में न होने लगें सियासी सौदे। और फिर जब इस तीसरे मोर्चे का गुरु और महात्मा सियासत के चतुर सुजान जोगी होंगे, तब तो और भी खतरनाक हालात यहां बन जाएंगे। यूं शांत कहे जाने वाले इस राज्य में सियासी उखाड़ फेंक ठीक नहीं है।
मीडिया के कवरेज और तवज्जो को देखते हुए तीसरे मोर्चे की कम से कम विजुएलिटी तो बढ़ ही रही है। यह अलहदा बात है कि वह कनेक्टिविटी लेवल पर वह कितना क्या कर पाते हैं। मीडिया का आज का तवज्जो, कल पर भारी पड़ सकता है।
-सखाजी

Founder

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Saleem Khan