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दुआ

Written By Krishan Kayat on रविवार, 24 अप्रैल 2016 | 6:39 pm

                          
                                  " दुआ "
हिचकियों का इलाज ढूंढना  तेरे बस की बात नहीं 
इलाज ही करना   है   तो    मेरे मरने की दुआ कर । 
मुझे  भुला  पाना भी      इतना   आसान नहीं है 
भुलाना ही है मुझे तो जहाँ को भूलने की दुआ कर । 
मुझसे  मिले बिना     चैन न आएगा   तुमको भी 
चैन ही लेना है तो हर जन्म में मिलने की दुआ कर । 
क़त्ल कर मेरे अरमानों का  खुशियाँ  ढूंढते हो यहाँ 
खुशियाँ ही लेनी है तो अरमानों के पलने की दुआ कर । 
वो  और  होंगे  जिन्हें    ख़ाक में मिला दिया तूने कभी 
"कायत" को मिटाना है तो खाक में मिलने की दुआ कर ।
 

तुम तो जिगरी यार हो

Written By surendra kumar shukla BHRAMAR on बुधवार, 20 अप्रैल 2016 | 12:07 pm

तुम तो जिगरी यार हो
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दोस्त बनकर आये हो तो
मित्रवत तुम दिल रहो
गर कभी मायूस हूँ मैं
हाल तो पूछा करो ..?
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पथ भटक जाऊं अगर मैं
हो अहम या कुछ गुरुर
डांटकर तुम राह लाना
(मित्र है क्या ........?)
याद रखना तुम जरूर
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तुम हो प्रतिभा के धनी हे ! 
और ऊंचे तुम चढ़ो
पर न सीढ़ी नींव अपनी
सपने भी -भूला करो
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हे सखा या सखी मेरे
प्रेम के रिश्ते बने हैं
सम्पदा ये महत् मेरी
भाव भक्ति के सजे हैं
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जिसको मानो तुम प्रभू सा
मान नित दिल से करो
कृष्ण सा निज भूल करके
मित्र की पूजा करो
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जितने  गुण  हैं मित्र में  वो
ग्रहण कर तू बाँट दे
बांटने से और बढ़ता
परख ले पहचान ले
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सुख भी मिलता मन है खिलता
आत्म संयम जागता है
भय हमारा भागता है
ना अकेले हम धरा पर
संग तुम -परिवार हो
खिलखिला दो हंस के कह दो
तुम तो जिगरी यार हो
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
कुल्लू हिमाचल भारत
१५.४.२०१६

८ पूर्वाह्न -८.१४ पूर्वाह्न 

Founder

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Saleem Khan