नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

ana लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
ana लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

ब्लॉग-ए-आम........

Written By Anamikaghatak on सोमवार, 17 अक्टूबर 2011 | 7:45 pm


 

दिन ढला शाम हुई 
चिड़ियों की कुहक 
वीरान हुई 

दिन ने रात को 
गले लगाया 
सांझ का ये नज़ारा 
आम हुई 

पेड़ों की झुरमुटों से 
चांदनी की छटा
दीदार हुई 

तारों की अधपकी रोशनी 
आसमां की ज़मी पे 
मेहरबान हुई 

ये तो रोज़ का नज़ारा है 
जाने क्यों लिखने को 
बेचैन हुई 

चलो आखिर इस बहाने 
मेरी ये कविता 
ब्लॉग-ए-आम हुई  

ये क्या हो रहा है ?

Written By Anamikaghatak on सोमवार, 27 जून 2011 | 11:22 am

ये क्या हो रहा है ? . भारत और चीन की सीमा पर चीनी कंपनियां धड़ल्ले से निर्माण कर रही हैं। लेकिन चीन के साथ पिछले साल विवाद के बाद भारत ने लद्दाख में सीमा से सटे इलाकों में सभी तरह के निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है। लेकिन भारत सरकार के इस रुख को लेकर लद्दाख के डेमचोक इलाके के लोगों में जबर्दस्त नाराजगी है। लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंटल काउंसिल के प्रतिनिधि गुरमेत दोर्जी का कहना है कि स्थानीय लोग भारत सरकार के इस रुख से ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।दोर्जी ने कहा, ‘चीन सीमा पर निर्माण कार्य कर रहा है, लेकिन हम नहीं कर सकते। इस आदेश का मतलब क्या है? नई दिल्ली में एसी कमरों में बैठने वाले यह तय नहीं कर सकते कि हमारे लिए क्या सही है।’  स्थानीय लोगों का कहना है कि भारत सरकार के आदेश के बाद ग्रामीण विकास से जुड़े काम रोक दिए गए हैं। साथ ही स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े निर्माण भी थम गए हैं।हम कब तक कहते रहेंगे हिंदी-चीनी भाई भाई और हमारे सेंटीमेंट्स के साथ ये कब तक खिलवाड़ करते रहेंगे? भारत के खिलाफ जासूसी करने में हो या ब्रह्मपुत्र के स्रोत पर बाँध बनाने की योजना हो...चीन ने हमेशा तत्परता दिखाई है |क्या हम इतने मजबूर है हम इसके खिलाफ एक शब्द तक नहीं निकल सकते?ऐसे में रचनाकार: उदयप्रताप सिंह जी की कविता बिलकुल फिट बैठता है ...
ना तीर न तलवार से मरती है सचाई 
जितना दबाओ उतना उभरती है सचाई 

ऊँची उड़ान भर भी ले कुछ देर को फ़रेब 
आख़िर में उसके पंख कतरती है सचाई 


मकबूल फिदा हुसैन का गुरुवार को निधन....

Written By Anamikaghatak on गुरुवार, 9 जून 2011 | 5:38 pm


 भारतीय चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन का गुरुवार को निधन हो गया। वह करीब डेढ़ महीने से बीमार थे। हुसैन 95 वर्ष के थे। ‘एम एफ’ के नाम से मशहूर हुसैन को ‘भारत का पिकासो’ कहा जाता था। उन्होंने लंदन के रॉयल ब्रॉम्पटन हॉस्पिटल में स्थानीय समयानुसार तड़के ढ़ाई बजे अंतिम सांस ली।
    हुसैन का जन्म 17 सितंबर 1915 में पंढरपुर में हुआ था। हुसैन को 2006 में भारत छोड़ना पड़ा था जब कुछ लोगों ने उनकी पेंटिंग को लेकर आपत्ति जाहिर की थी। इसके बाद हुसैन लंदन चले गए। बाद में उन्हें कतर की नागरिकता मिल गई। उन्हें 1991 में पद्म विभूषण भी मिला था। राम कथा पर जो सीरीज उन्होंने हैदराबाद में बनाई थी वो स्मरणीय है।

केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति....

Written By Anamikaghatak on गुरुवार, 5 मई 2011 | 8:11 am

 सरकार  सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु ६० से ६२ - दो वर्ष बढ़ाने की योजना बना रही  है. सूत्रों ने बताया कि यह निर्णय कार्मिकऔर प्रशिक्षण (कार्मिक विभाग)  विभाग में लिया गया है.इस बारे में काम प्रारंभ हो चुका है .यह घोषणा इसी साल होने की उम्मीद है 

Founder

Founder
Saleem Khan