नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

पार्ट टाइम दलित की बेटी

Written By Barun Sakhajee Shrivastav on शनिवार, 27 अप्रैल 2013 | 10:41 pm

जब वे अभेद्य किले में रहती हैं, पचासियों ब्लैक कमांडोज के बीच चलती हैं, सैकड़ों गाडिय़ों के काफिले के बीच होकर चलती हैं और जब वे रुपयों से गुथी माला पहनती हैं। तब वे दलित नहीं होती। जैसे ही सीबीआई उनपर आंखे तररेती है, किसी सुरक्षा कारण से तलाशी देती हैं या फिर जैसे ही उनके ऐशो आराम की कोई सियासतदां निंदा करता है तो वे दलित हो जाती हैं। जैसे ही उनकी कार से लाख रुपये चुनाव आयोग खंगालता है तो वे दलित हो जाती हैं। न जाने क्यों यूपी जैसे प्रबुद्ध प्रदेश की वे ऐसी चालाक  नेता हैं, जो जब-तब हारकर जीत जाती हैं। मुख्यमंत्री बन जाती हैं, देश की सरकार को चलाने की खिवैया बन जाती हैं। दलित की यह बेटी इतनी पीडि़त है कि समूचा देश दुनिया के सामने शर्मिंदा है। यह इतनी पीडि़त है जितना कि खुद दलित वर्ग नहीं। अहो। गजब है। माया। वे कहती हैं जैसा उनके साथ कर्नाटक के गुलबर्गा में हुआ वैसा सोनिया गांधी के साथ क्यों नहीं? साफ है माया की नजरों में सोनिया ब्राह्मण हैं (...लेकिन भाजपाई उन्हें क्रिश्चिन कहते हैं)...फिरोज गांदी के खानदान की कुल बहू हैं। माया कहां। दलित। कांशी राम को बंधक बनाकर बनीं नेता। वे कहां सौदेबाज, ताज के रास्ते को चबाने वाली जिम्मेदारी दलित की बेटी। बहुत खूब। और शर्मिंदा हूं, दो चीजों पर एक तो यूपी पर, जो उन्हें फिर-फिर चुनता है तो दूसरा बीजेपी और कांग्रेस पर। कैसे नेशनल दल हो, यूपी के 16 करोड़ लोगों की नजरों में इतनी भी औकात नहीं कि सरकार को समर्थन देकर बनवा सको। यह तो पार्ट टाइम दलित की बेटी बन जाती हैं। फिर ऐश्वर्य की महामाया। खैर।
- सखाजी

Life is Just a Life: कैसे भारत सो जाता है Kaise Bharat So Jata Hai

Life is Just a Life: कैसे भारत सो जाता है Kaise Bharat So Jata Hai: मैं कैसे  बदल जाऊं हर  बार कैसे  जीत बनाऊं , हार , लाशों के दम पर जीवित दिन कैसे बन जाते त्यौहार ? अगल बगल के ऐरे गैरे जब तब हम पर चढ...

हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते ?

Written By Sadhana Vaid on सोमवार, 22 अप्रैल 2013 | 7:43 pm



घृणा और जुगुप्सा के मारे दो तीन दिन से संज्ञाशून्य होने जैसी स्थिति हो गयी है ! शर्मिंदगी, क्षोभ और गुस्से का यह आलम है कि लगता है मुँह खोला तो जैसे ज्वालामुखी फट पड़ेगा ! यह किस किस्म के समाज में हम रह रहे हैं जहाँ ना तो इंसानियत बची है, न दया माया ना ही मासूम बच्चों के प्रति ममता और करुणा का भाव ! इतना तो मान कर चलना ही होगा कि इस तरह की घृणित मानसिकता वाले लोग जानवर ही होते हैं ! अब चिंता इस बात की है कि प्रतिक्षण बढ़ने वाली जनसंख्या में ऐसे जानवर कितने पैदा हो रहे हैं और कहाँ कहाँ हो रहे हैं इस आँकड़े का निर्धारण कैसे हो ! समस्या का हल सिर्फ एक ही है कि इन जानवरों को इंसान बनाना होगा ! उसके लिये जो भी उपाय हो सकते हैं किये ही जाने चाहिये ! सबसे पहले पोर्न फ़िल्में और वीडियोज दिखाने वाले टी वी चैनल्स पर तत्काल बैन लगा दिया जाना चाहिये ! फिल्मों में दिखाये जाने बेहूदा आइटम सॉंग्स, अश्लील दृश्य व संवाद, जो आजकल फिल्म की सफलता की गारंटी माने जाते हैं, सैंसर बोर्ड द्वारा पास ही नहीं किये जाने चाहिये ! समाज का एक अभिन्न अंग होने के नाते महिलाओं की भी जिम्मेदारी होती है कि समाज में हर पल बढ़ते इस मानसिक प्रदूषण को रोकने के लिये कुछ कारगर उपाय करें ! इसलिये केवल खोखली शोहरत और धन कमाने के लिये अभिनेत्रियों व मॉडल्स को ऐसी फिल्मों व विज्ञापनों में काम करने से मना कर देना चाहिये जिन्हें देख कर समाज के लोगों की मानसिकता पर दुष्प्रभाव पड़ता हो ! स्त्री एक माँ भी होती है ! अपने बच्चों को गलत रास्ते पर जाने से रोकने के लिये एक माँ हर संभव उपाय अपनाती है ! आज भारतीय समाज भी ऐसे ही निरंकुश, पथभ्रष्ट और संस्कारविहीन लोगों से भरता जा रहा है ! महिलाओं को माँ बन कर उन्हें सख्ती से रास्ते पर लाना होगा और इसके लिये सरकार को भी कुछ सख्त कदम उठा कर क़ानून कायदों को प्रभावी और समाजोपयोगी बनाना होगा ! पश्चिमी संस्कृति का जब और सारी बातों में अनुसरण किया जाता है तो इस बात में भी तो किया जाना चाहिये कि वहाँ की क़ानून व्यवस्था कितनी सख्त और पुख्ता है और उसका इम्प्लीमेंटेशन कितना त्वरित और असरदार होता है ! वहाँ किसी व्यक्ति के खिलाफ, बलात्कार तो बहुत बड़ी बात है, यदि ईव टीज़िंग की शिकायत भी दर्ज कर दी जाती है तो उसे सज़ा तो भुगतनी  ही पड़ती है उसके अलावा हमेशा के लिये उसका रिकॉर्ड खराब हो जाता है और उसे कहीं नौकरी नहीं मिलती ! हमारे देश में विरोध करने वालों की सहायता करने की बजाय पुलिसवाले उन पर हाथ उठाते हैं और उन्हें पैसे देकर मामला दबाने के लिये मजबूर करते हैं !
दामिनी वाला हादसा जब हुआ था तब भी मैंने इस विषय पर एक पोस्ट डाली थी और अपनी ओर से कुछ सुझाव दिये थे ! आज फिर उस आलेख का यह हिस्सा दोहरा रही हूँ ! दामिनी के साथ क्या हुआ, क्यों हुआ उसे दोहराना नहीं चाहती ! दोहराने से कोई फ़ायदा भी नहीं है ! हमारा सारा ध्यान इस बात पर केन्द्रित होना चाहिए कि जो हैवान उसके गुनहगार हैं उनके साथ क्या हो रहा है और क्या होना चाहिए ! देश की धीमी न्याय प्रक्रिया पर हमें भरोसा नहीं है ! यहाँ कोर्ट में मुकदमे सालों तक चलते हैं और ऐसे खतरनाक अपराधी जमानत पर छूट कर फिर उसी तरह के जघन्य अपराधों में लिप्त होकर समाज के लिए खतरा बन कर बेख़ौफ़ घूमते रहते हैं !
भागलपुर वाले केस को आप लोग अभी तक भूले नहीं होंगे जिसमें बारह साल पहले एक ऐसी ही साहसी और बहादुर लड़की पर गुंडों ने प्रतिरोध करने पर एसिड डाल कर उसका चेहरा जला दिया था ! वह लड़की अभी तक न्याय के लिए प्रतीक्षा कर रही है और उसके गुनहगार सालों से जमानत पर छूट कर ऐशो आराम की ज़िंदगी बसर कर रहे हैं साथ ही अपने गुनाहों के सबूत मिटा रहे हैं !
मेरे विचार से ऐसे गुनहगारों को कोर्ट कचहरी के टेढ़े-मेढ़े रास्तों, वकीलों और जजों की लम्बी-लम्बी बहसों और हर रोज़ आगे बढ़ती मुकदमों की तारीखों की भूलभुलैया से निकाल कर सीधे समाज के हवाले कर देना चाहिए ! सर्व सम्मति से समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र से प्रबुद्ध व्यक्तियों की समिति बनानी चाहिए जिनमें प्राध्यापक, वकील, जज, कलाकार, गृहणियाँ, डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, व्यापारी, साहित्यकार व अन्य सभी विधाओं से जुड़े लोग शामिल हों और सबकी राय से उचित फैसला किया जाना चाहिए और गुनहगारों को दंड भी सरे आम दिया जाना चाहिए ताकि बाकी सभी के लिए ऐसा फैसला सबक बन सके !
ऐसे अपराधियों के माता-पिता से पूछना चाहिए कि वे अपने ऐसे कुसंस्कारी और हैवान बेटों के लिए खुद क्या सज़ा तजवीज करते हैं ! अगर वे अपने बच्चों के लिए रहम की अपील करते हैं तो उनसे पूछना चाहिए की यदि उनकी अपनी बेटी के साथ ऐसी दुर्घटना हो जाती तो क्या वे उसके गुनहगारों के लिए भी रहम की अपील ही करते ? इतनी खराब परवरिश और इतने खराब संस्कार अपने बच्चों को देने के लिए स्वयम् उन्हें क्या सज़ा दी जानी चाहिए ? दामिनी, गुड़िया या इन दरिंदों की हवस का शिकार हुई उन जैसी अनेकों बच्चियों के गुनाहगारों पर कोल्ड ब्लडेड मर्डर का आरोप लगाया जाना चाहिए और उन्हें तुरंत कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिये !
लेकिन यह भी सच है कि हमारे आपके चाहने से क्या होगा ! होगा वही जो इस देश की धीमी गति से चलने वाली व्यवस्था में विधि सम्मत होगा ! मगर इतना तो हम कर ही सकते हैं कि इतने घटिया लोगों का पूरी तरह से सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाए ! सबसे ज्यादह आपत्ति तो मुझे इस बात पर है कि रिपोर्टिंग के वक्त ऐसे गुनाहगारों के चहरे क्यों छिपाए जाते हैं ! होना तो यह चाहिये कि जिन लोगों के ऊपर बलात्कार के आरोप सिद्ध हो चुके हैं उनकी तस्वीरें, नाम, पता व सभी डिटेल हर रोज़ टी वी पर और अखबारों में दिखाए जाने चाहिए ताकि ऐसे लोगों से जनता सावधान रह सके ! समाज के आम लोगों के साथ घुलमिल कर रहने का इन्हें मौक़ा नहीं दिया जाना चाहिए ! यदि किरायेदार हैं तो इन्हें तुरंत घर से निकाल बाहर करना चाहिए और यदि मकान मालिक हैं तो ऐसा क़ानून बनाया जाना चाहिए कि इन्हें इनकी जायदाद से बेदखल किया जा सके ! जब तक कड़े और ठोस कदम नहीं उठाये जायेंगे ये मुख्य धारा में सबके बीच छिपे रहेंगे और मौक़ा पाते ही अपने घिनौने इरादों को अंजाम देते रहेंगे ! जब दंड कठोर होगा और परिवार के अन्य सदस्य भी इसकी चपेट में आयेंगे तो घर के लोग भी अपने बच्चों के चालचलन पर निगरानी रखेंगे और लगाम खींच कर रखेंगे ! यदि इन बातों पर ध्यान दिया जाएगा तो आशा कर सकते हैं कि ऐसी घटनाओं की आवृति में निश्चित रूप से कमी आ जाएगी ! 
दामिनी के गुनाहगारों को सज़ा देने में इतनी ढील ना बरती जाती तो शायद ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति इतनी अधिक नहीं होती और कई ‘गुड़ियाएँ’ इस दमन से बच गयी होतीं ! मेरी इच्छा है इस आलेख को सभी लोग पढ़ें और सभी प्रबुद्ध पाठकों का इसे समर्थन मिले ताकि इस दमन चक्र के खिलाफ उठने वाली आवाज़ इतनी बुलंद हो जाये कि नीति नियंताओं की नींद टूटे और वे किसी सार्थक निष्कर्ष पर पहुँच सकें !

साधना वैद

Life is Just a Life: मेरा भी इम्तिहान ले लो Mera Bhi Imtihan Le Lo

Written By नीरज द्विवेदी on बुधवार, 17 अप्रैल 2013 | 8:59 am

Life is Just a Life: मेरा भी इम्तिहान ले लो Mera Bhi Imtihan Le Lo: तुम आँसू   नहीं   जान ले लो ... मेरा भी  इम्तिहान  ले  लो ... छुआ तो  एहसास हो जाएगा , हाथों में तीर  कमान ले लो ... मरने दो ...

Life is Just a Life: जिंदगी और खेल Jindagi aur Khel

Written By नीरज द्विवेदी on शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013 | 8:13 pm

Life is Just a Life: जिंदगी और खेल Jindagi aur Khel: कई दिनों से टप टप करती सुनता हूँ आवाजें , हैं तो पानी की पर लगती क्यों भूखी नंगी फरियादें , जैसे मरता हो विधान देश का खाकी के ...

Life is Just a Life: हम ढूंढ़ लायेंगे Ham Dhundh Layenge

Written By नीरज द्विवेदी on बुधवार, 10 अप्रैल 2013 | 8:52 am

Life is Just a Life: हम ढूंढ़ लायेंगे Ham Dhundh Layenge: लिखने दो आसमां को बंजर जमीं की कहानी लिखने दो , दहकता सच  सड़े बदबूदार झूंठ की  जुबानी लिखने दो। हम ढूंढ़ लायेंगे कल तक फलक से चुन ...

साथ अपने लड़कियों तेजाब रखना सीख लो !

Written By Shikha Kaushik on सोमवार, 8 अप्रैल 2013 | 2:06 pm

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ACID ATTACK IN KANDHLA[SHAMLI]

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Justice for Acid Victims in Kandhla Shamli

न्याय के लिए साथ आये




चुप नहीं रहना है अब पुरजोर आज चीख लो ,
साथ अपने लड़कियों तेजाब रखना सीख लो !

 मूक दर्शक बन के ये सारा समाज देखता ,
साथ देंगें ये नपुंसक ? मत दया की भीख लो !

 है नहीं कोई व्यवस्था  छोड़ दो बैसाखियाँ ,
अपनी सुरक्षा करने को मुट्ठियाँ अब भींच लो !

कमजोर हैं नाज़ुक हैं हम इन भ्रमों में मत रहो ,
काली तुम चंडी हो तुम पापी का रक्त चूस लो !

तुम डराओगे हमें ! हम भी डरा सकते तुम्हे ,
आर पार की ये रेखा हौसलों से खींच लो !

शिखा कौशिक 'नूतन'


THIS WAS THE FIRST ACID ATTACK IN KANDHLA [SHAMLI] ON GIRLS .ON 2ND APRIL 2013 FOUR SISTERS WERE RETURNING TO THEIR HOME AFTER A COLLEGE EXAM DUTY .TWO OR THREE BOYS HAVE THROWN ACID ON THEM .ONE SISTER WAS SERIOUSLY INJURED IN THIS ATTACK .SHE HAS BEEN ADMITTED IN SR.GANGA RAM HOSPITAL IN DELHI . AT THE SPOT SISTERS TRIED THEIR BEST TO CATCH THEM BUT THE CONVICTS GOT OFF .THE CONVICTS ARE STILL AT LARGE . THIS IS REALLY FRUSTRATING .LET US WAIT AND WATCH HOW WILL POLICE DEAL WITH THE ROGUES ? BUT ONE THING IS CLEAR WE OPPOSE THIS ATTACK  WITH ALL FORCE  .
    JAY HIND
DR.SHIKHA KAUSHIK

जानवरों की तरह कहीं भी ,कभी भी, किसी से भी ,

Written By एस एम् मासूम on रविवार, 31 मार्च 2013 | 8:16 pm

वोह औरतें या मर्द जो जानवरों की तरह कहीं भी ,कभी भी, किसी से भी ,शारीरिक सम्बन्ध बना लेने को गलत नहीं समझते यदि अपने शरीर का प्रदर्शन करते दिखाई दें तो बात समझ में आती है लेकिन आश्चर्य तो उस समय होता है जब वो लोग जो इस्लाम के कानून को मानने का दावा करते हैं अपने शरीर का प्रदर्शन करते नजर आते हैं| 

कई बार तो महरम और नामहरम की परिभाषा भी यह बदल देते हैं |कभी किसी नामहरम के करीब जाते हैं तो कहते हैं बेटी जैसी है, कभी कहते हैं बहन जैसी है | वहीं इस्लाम कहता है यह नामहरम है इस से पर्दा करो | “अल्लाह ओ अकबर “ का नारा लगाने वाले ऐसे दो चेहरे वाले मुसलमानों के यहाँ होता वही है जो यह चाहते हैं या जो इनका खुद का बनाया कानून कहता है |क्योंकि सवाल नामहरम औरत की कुर्बत का है| अल्लाह कहता है दूर रहो ,इंसान का दिल कहता है औरत के करीब रहो |जीत इन्सान के दिल की गलत ख्वाहिशों की होती है और नतीजे में कभी बलात्कार होता है कभी व्यभिचार होता है |जब औरत के शरीर के करीब रहने की लालच इंसान को अल्लाह से दूर कर देती है,इस्लाम के कानून को भुला देता है तो दौलत और शोहरत की लालच के आड़े आने वाले इस इस्लाम के कानून को भुला देने में कितनी देर लगेगी | 

आगे पढ़ें 

चाँद आंसू, चंद अलफ़ाज़ ( ग़ज़लनुमा कविताएँ )

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on शुक्रवार, 22 मार्च 2013 | 9:10 pm

अरे भई साधो......: पशु प्रताड़ना की चिंता तो कीटों की अनदेखी क्यों

आज पशु क्रूरता निवारण में कई सरकारी गैर सरकारी संस्थाएं लगी हुई हैं लेकिन पता नहीं क्यों कीट पतंगों की सुधि नहीं ली जाती. आखिर वह भी तो कुदरत के बनाये जीव हैं और डार्विन के सिद्धांतों को माना जाये तो उनका अस्तित्व मनुष्य जाति की उत्पत्ति से बहुत पहले से है. एक मायने में वे बंदर से भी प्राचीन पूर्वजों की श्रेणी में आयेंगे.
हर दिन पता नहीं कितने करोड़ मच्छर बेमौत मारे जाते हैं. कितने ही काक्रोचों की बलि चढ़ती है.माना कि कीट-पतंगो की श्रेणी के जीव अल्पजीवी होते हैं. लेकिन क्या उन्हें स्वाभाविक मौत नसीब नहीं होनी चाहिए. उनकी हत्या के लिये दवायें खुलेआम बाजार में बिक रही हैं. उनका मूल्य उनकी मारक क्षमता के अनुरूप तय किया जाता है. कहीं कोई रोक-टोक नहीं. न जाने कितनी कंपनियां उन्हें मारने के आसान उपायों पर रात दिन शोध करा रही हैं. उनकी नन्ही सी जान सबकी आंखों में कांटा की तरह चुभती रहती है. उनके संरक्षण के लिये कोई कानून नहीं. हाल में गौरैया दिवस मनाया गया. अन्य कई पशुओं और चिड़ियाओं को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा प्रदान की जाती है. क्या आजतक किसी कीट के लिये कोई दिवस घोषित हुआ. उसके प्रति प्रेम या श्रद्धा का भाव प्रदर्शित किया गया. क्या कीट सुंदर नहीं होते. उन्हें नष्ट कर दिया जाना चाहिए. बताइये भला

---देवेंद्र गौतम
अरे भई साधो......: पशु प्रताड़ना की चिंता तो कीटों की अनदेखी क्यों:

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Life is Just a Life: बनाते हैं हम मिटाते हो तुम Banate hain ham Mitate ...

Written By नीरज द्विवेदी on रविवार, 17 मार्च 2013 | 12:27 am

Life is Just a Life: बनाते हैं हम मिटाते हो तुम Banate hain ham Mitate ...: बनाते  हैं  हम  मिटाते  हो तुम , जगाते  हैं  हम  सुलाते  हो तुम। छीना झपटी में माहिर होते जो हैं , उन्ही को ही  बर्दी चढाते हो तु...

Life is Just a Life: पक चुका है नासूर भारत वालों pak chuka hai nasoor

Written By नीरज द्विवेदी on शुक्रवार, 15 मार्च 2013 | 7:22 pm

Life is Just a Life: पक चुका है नासूर भारत वालों pak chuka hai nasoor: कब गुजरेगा ये कुहासा दिल्ली से भारत के दिल से ? नेतृत्व की एतिहासिक चुप्पी , राजनैतिक नपुंसकता , दरबारी षणयंत्र , अनैतिक नै...

मै आतंकी बनूँ अगर माँ खुद “फंदा” ले आएगी


प्रिय दोस्तों इस रचना को ( कोई नहीं सहारा ) ३.३.२०१3 के दैनिक जागरण अखबार में कानपुर रायबरेली (उ.प्रदेश भारत ) आदि से प्रकाशित किया गया रचना को मान और स्नेह देने के लिए आप सभी पाठकगण और जागरण जंक्शन का बहुत बहुत आभार
भ्रमर ५
हम सहिष्णु हैं भोले भाले मूंछें ताने फिरते
अच्छे भले बोल मन काले हम को लूटा करते
भाई मेरे बड़े बहुत हैं खून पसीने वाले
अत्याचार सहे हम पैदा बुझे बुझे दिल वाले
कुछ प्रकाश की खातिर जग के अपनी कुटी जलाई
चिथड़ों में थी छिपी आबरू वस्त्र लूट गए भाई
माँ रोती है फटती छाती जमीं गयी घर सारा
घर आंगन था भरा हुआ -कल- कोई नहीं सहारा
बिना जहर कुछ सांप थे घर में देखे भागे जाते
बड़े विषैले इन्ही बिलों अब सीमा पार से आते
ज्वालामुखी दहकता दिल में मारूं काटूं खाऊँ
छोड़ अहिंसा बनूँ उग्र क्या ?? आतंकी कहलाऊँ ?
गुंडागर्दी दहशत दल बल ले जो आगे बढ़ता
बड़े निठल्ले पीछे चलते फिर आतंक पसरता
ना आतंक दबे भोलों से – गुंडों से तो और बढे
कौन ‘राह’ पकडूँ मै पागल घुट घुट पल पल खून जले
बन अभिमन्यु जोश भरे रण कुछ पल ही तो कूद सकूं
धर्म युद्ध अब कहाँ रहा है ?? ‘वीर’ बहुत- ना जीत सकूं
मटमैली इस माटी का भी रंग बदलता रहा सदा
कभी ओढती चूनर धानी कभी केसरिया रंग चढ़ा
मै हिम हिमगिरि गंधक अन्दर ‘अंतर’ देखो खौल रहा
फूट पड़े जो- सागर भी तब -अंगारा बन उफन पड़ा
समय की पैनी धार वार कर सब को धूल मिला देती
कोई ‘मुकद्दर’ ना ‘जग’ जीता अंत यहीं दिखला देती
तब बच्चा था अब अधेड़ हूँ कल मै बूढा हूँगा
माँ अब भी अंगुली पकडे हे ! बुरी राह ना चुनना
कर्म धर्म आस्था पूजा ले परम -आत्मा जाने
प्रतिदिन घुट-घुट लुट-लुट भी माँ ‘अच्छाई’ को ‘अच्छा’ माने
भोला भाला मै अबोध बन टुकुर टुकुर ताका करता
खुले आसमाँ तले ‘ख़ुशी’ को शान्ति जपे ढूँढा करता
मै आतंकी बनूँ अगर ‘माँ ‘ खुद “फंदा” ले आएगी
पथरायी आँखे पत्थर दिल ले निज हाथों पहनाएगी
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल ‘भ्रमर’ ५
प्रतापगढ़ उ प्र

Sahitya Surbhi: सम्मान स्त्रीत्व का ( चोका )

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on शुक्रवार, 8 मार्च 2013 | 8:34 pm

Sahitya Surbhi: सम्मान स्त्रीत्व का ( चोका ): अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ -  होती गोष्ठियाँ दिए जाते भाषण हालात वही लुटती महिलाएँ सरे-बाजार महिला...

स्त्री-पुरूष

(महिलाओं की स्थिति पर एक कविता)


तुम (पुरूष)
सहज सकते हो
केवल
अपना अहम्
वह (स्त्री) सहेजती है
पीड़ा‌ और दर्द

पुरूष शब्द
तुम्हारे मस्तिष्क
और
तुम्हारी सोच को
खाली कर चुका है
विपरीत इसके
स्त्री भरी रहती है हमेशा
अपनी आँखों में आँसू
क्योंकि
इकठ्ठा करना जानती है वह

भरी रहती हैं हमेशा
उसकी दोनों आँखें
इसलिए तो
पलकें नम रहती हैं
और
उसके सुख
जगह नहीं मिलने पर
लौट जाते हैं खाली हाथ

पुरूष से स्त्री का
भेद सिर्फ इतना है
कि
स्त्री
वह शब्द है
जब
कहा जाए
परिभाषा लिखो दुःख की
तो
मात्र एक शब्द ही पर्याप्त है
स्त्री

सादर ब्लॉगस्ते!: शोभना फेसबुक रत्न सम्मान प्रविष्टि संख्या - 14

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on रविवार, 3 मार्च 2013 | 8:56 pm

सादर ब्लॉगस्ते!: शोभना फेसबुक रत्न सम्मान प्रविष्टि संख्या - 14: ग़ज़ल सोचो तुम तन्हाई में  लुटते हम दानाई में । उथले जल में कुछ न मिले  मिलता सब गहराई में । दौलत को सब कुछ माना  उलझे ...

Life is Just a Life: एक बार तो जी जाने दे Ek Bar To Jee Jane De

Written By नीरज द्विवेदी on शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013 | 12:59 pm

Life is Just a Life: एक बार तो जी जाने दे Ek Bar To Jee Jane De: तेरी उदास आँखें चश्में का सहारा ले छिपा लेतीं हैं दर्द तेरा आँखों का किनारा ले। टूट जा अब बिखर जा अब पा ले खुद को, सुधर जा अब...

Life is Just a Life: ये ताजी जलन नहीं है Ye Taji Jalan Nahi hai

Written By नीरज द्विवेदी on मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013 | 9:46 am

Life is Just a Life: ये ताजी जलन नहीं है Ye Taji Jalan Nahi hai: मैं  गुमसुम था  शब्दों में  आँसू में  अंगारों में , छेड़ दिया तो टूट गए कुछ भूखे स्वप्न कतारों में, भूखे पेटों की नज़रों से  जब जब नज...

Life is Just a Life: चटका मगर मटका कोई नहीं Chatka magar Matka koi nahi...

Written By नीरज द्विवेदी on बुधवार, 13 फ़रवरी 2013 | 8:53 pm

Life is Just a Life: चटका मगर मटका कोई नहीं Chatka magar Matka koi nahi...: बेहद सलीके से चटका मगर मटका कोई नहीं , अब तक मौत की  नजर से भटका कोई नहीं। दिख तो जाते रोज हैं  कुछ एक  हसीन चेहरे , तेरे बाद आज ...

Life is Just a Life: खुद को पाना जरूर Khud ko pana jarur

Written By नीरज द्विवेदी on शनिवार, 9 फ़रवरी 2013 | 8:29 pm

Life is Just a Life: खुद को पाना जरूर Khud ko pana jarur: रूठती जा रही  है डगर  साथ चल , बीतती जा  रही है उमर साथ चल , ख्वाव जो भी बुने वो एक एक कर , टूटते जा रहें  तू मगर  साथ चल। उन्हो...

Life is Just a Life: दिमाग की बैंड बजाओ मत Dimag Ki Band Bajao Mat

Written By नीरज द्विवेदी on गुरुवार, 7 फ़रवरी 2013 | 10:04 pm

Life is Just a Life: दिमाग की बैंड बजाओ मत Dimag Ki Band Bajao Mat: तुम बरस  जाओ चिल्ल्लाओ मत , मेरे सर पर राग भैरवी गाओ मत , मत चीखो सब बहरे हैं , बेशर्म हवा के पहरे हैं , मर जाने दो भूखों को , ...

facts and opinion.....: With reference to the passage...

Written By mark rai on बुधवार, 6 फ़रवरी 2013 | 1:33 pm

facts and opinion.....: With reference to the passage...: The need for Competition Law becomes more evident when foreign direct investment (FDI) is liberalised. The impact of FDI is not always pro...

facts and opinion.....: With reference to the passage...

facts and opinion.....: With reference to the passage...: The need for Competition Law becomes more evident when foreign direct investment (FDI) is liberalised. The impact of FDI is not always pro...

हास्य-व्यंग्य दोहे

Written By Ambarish Srivastava on मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013 | 11:04 am

चिमटा बेलन प्रेम का, खुलकर करें बखान.
जोश भरें हर एक में, ले भरपूर उड़ान..

जगनिंदक घर राखिये, ए सी रूम बनाय.
चाहे सिर पर ही चढ़े, वहीं बीट करि जाय..

चमचों से डरते रहें, कभी करें नहिं बैर.
चमचे पीछे यदि पड़े, नहीं आपकी खैर..

नैनों से सुख ले रहे, नाप रहे भूगोल.
सारे भाई बंधु हैं, नहीं इन्हें कुछ बोल..

गलती कर नहिं मानिए, बने खूब पहचान.
अड़े रहें हल्ला करें, सही स्वयं को मान..

अहंकार दिखता बड़ा, 'मैं' छाया बिन प्राण.
'मैं' 'मैं' 'मैं' ही कीजिये, होगा अति कल्याण..

जब तक सीखें गुरु कहें, नहीं करें कुछ पाप.
गुरु हो बैठे आप जब, बनें गुरू के बाप..

गलत सही साबित करें, अगर चले नहिं जोर.
गुटबंदी तब कीजिये, और मचा दें शोर..

कूटतंत्र की राह पर, छूटतंत्र का राज.
लोकतंत्र है सामने रामराज्य है आज..

हास्य व्यंग्य सम-सामयिक. करते दोहे आज.
इनका उल्टा ही भला, सुखमय बने समाज..

--इं० अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर'

Founder

Founder
Saleem Khan