लघुत्तम विचारौषधि: कामनाएं
Written By Barun Sakhajee Shrivastav on सोमवार, 6 जून 2022 | 12:12 pm
योगी जी और पर्यावरण दिवस - गहरा नाता
Written By Shalini kaushik on रविवार, 5 जून 2022 | 8:15 am
माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश श्री योगी आदित्यनाथ जी और पर्यावरण दिवस का एक दूसरे से बहुत गहरा नाता है. संयुक्त राष्ट्र ने पर्यावरण के प्रति राजनीतिक और सामाजिक जागृति लाने के लिए पांच जून साल 1972 को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की घोषणा की. इस तरह दोनों का ही जन्म दिवस एक ही दिन, एक ही साल हुआ ये अलग बात है कि पर्यावरण दिवस पहली बार 5 जून 1974 को मनाया गया. आज हमारी धरती तप रही है और इस तपन का मुख्य असर हम अपने पेड़ पौधों पर देख सकते हैं, सुबह पानी से अच्छी सिंचाई के बाद भी वे शाम तक सूख जाते हैं, पनपने का तो सवाल ही नहीं है बस किसी तरह वे जिंदा ही बच जाएं. कारण इसके हम खुद हैं, सामान्य पँखों से काम नहीं चलता है अब हर किसी को ए सी चाहिए, एक बार बताइए सच्चे मन से - कितने ए सी वालों ने एक भी पौधा अपनी जिंदगी में इस धरती पर लगाया है. योगी आदित्यनाथ जी द्वारा हर साल लाखों पौधे लगाए जा रहे हैं हमारी धरती की रक्षा के लिए, क्या आपका कोई दायित्व नहीं है उस धरती के लिए जिस पर आपका घर बनता है, आपका परिवार रहता है. अगर कोई दायित्व स्वीकार करते हैं तो आगे आइए और कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और धरती माँ का कर्ज चुकाएं और हाँ पौधा लगाते हुए अपना फोटो लेकर सोशल मीडिया पर अवश्य शेयर करें ताकि आप अन्यों की प्रेरणा का स्रोत बनें.
माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को जन्म दिवस की और आप सभी को विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏
द्वारा
शालिनी कौशिक एडवोकेट
कैराना /कांधला
बीसीआई विचार करे
Written By Shalini kaushik on गुरुवार, 2 जून 2022 | 9:29 am
BJP-Congress में जबरदस्त Digital War | बीजेपी-कांग्रेस दोनों के हुए One ...
Written By Barun Sakhajee Shrivastav on शनिवार, 7 मई 2022 | 1:28 pm
नारी का श्रृंगार तो पति है
Written By Surendra shukla" Bhramar"5 on शनिवार, 30 अप्रैल 2022 | 12:37 pm
कचहरी को बाजार न बनाया जाए
Written By Shalini kaushik on शनिवार, 23 अप्रैल 2022 | 12:21 pm
ऐसा नहीं है कि न्यायालय परिसर में यह कोई पहली घटना हो. उत्तर प्रदेश में तो ये घटनाएं आम हैं. कभी शाहजहांपुर में अधिवक्ता की हत्या हो जाती है तो कभी गोरखपुर में दुष्कर्म आरोपी की, गाजियाबाद में कचहरी में कड़ी सुरक्षा के बावजूद वाहनों की चोरी हो जाती हैं किन्तु दो चार दिन महीने सुरक्षा मजबूत कर कचहरी फिर वापस लौट आती है लापरवाही की तरफ, किसी अगली घटना के इंतजार में.
देखा जाए तो कचहरी न्याय पाने का एक केंद्र है और वहां न्यायाधीशों, वकीलों, मुन्शी, न्यायालयों के कर्मचारियों, स्टाम्प वेंडर्स, बैनामा लेखकों आदि न्यायालय कार्य करने वाले और वकीलों के कार्य करने वालों का और कचहरी में आने जाने वालों के चाय नाश्ते आदि का प्रबंध करने वालों का होना एक अनिवार्य आवश्यकता है किन्तु कचहरी में भीख मांगने वालों का आना, मेवे आदि बेचने वालों का आना, कान साफ करने वालों का आना कचहरी को सामान्य बाजार की श्रेणी में ला देता है और उसकी सुरक्षा को खतरे में डाल देता है और सबसे खतरनाक है ऐसे में बगैर किसी जांच - पड़ताल पूछताछ के गैर जरूरी लोगों का कचहरी परिसर में प्रवेश. क्या ज़रूरी नहीं है ऐसे में ये उपाय -
1 - सभी वकीलों, मुंशियों आदि के लिए आई कार्ड हों.
2- वकील अपने मुवक्किल और गवाहों को कचहरी परिसर में आने का पत्र जारी करें, जिसे गेट पर तैनात पुलिस को दिखाकर ही मुवक्किल और गवाह कचहरी में प्रवेश कर सकें.
3- जिन लोगों का कचहरी के किसी कार्य से ताल्लुक नहीं है, उन्हें केवल सामान या सेवा बेचने के लिए या भीख मांगने के लिए ही कचहरी में आना है, उनका कचहरी में प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए.
4- कचहरी में प्रवेश करने वाले की जांच पड़ताल कर ही प्रवेश कराया जाए और यदि उसके पास हथियार या कोई भी घातक वस्तु हों तो उसके लाने का कारण पता कर गेट पर ही रजिस्टर में दर्ज कर हथियार जमा कराया जाए और गैर जरूरी होने पर हथियार सहित कचहरी में प्रवेश न करने दिया जाए.
हमें ये प्रतिबंध नागवार गुजर सकते हैं किन्तु ये सब जरूरी हैं न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ और सुरक्षित रूप से कायम रखने के लिए और मैं समझती हूं कि सतर्कता के तौर पर इन्हें अपनाया जाना चाहिए.
शालिनी कौशिक एडवोकेट
कैराना
बाल मजदूरी - भारत का कलंक
Written By Shalini kaushik on बुधवार, 20 अप्रैल 2022 | 11:23 pm
उठे न बोझ खुद का भी उठाये रोड़ी ,सीमेंट को .”
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”लोहा ,प्लास्टिक ,रद्दी आकर बेच लो हमको ,
हमारे देश के सपने कबाड़ी कहते हैं खुद को .”
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”खड़े हैं सुनते आवाज़ें ,कहें जो मालिक ले आएं ,
दुकानों पर इन्हीं हाथों ने थामा बढ़के ग्राहक को .”
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”होना चाहिए बस्ता किताबों,कापियों का जिनके हाथों में ,
ठेली खींचकर ले जा रहे वे बांधकर खुद को .”
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”सुनहरे ख्वाबों की खातिर ये आँखें देखें सबकी ओर ,
समर्थन ‘शालिनी ‘ का कर इन्हीं से जोड़ें अब खुद को .”
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वकीलों का ड्रेस कोड
Written By Shalini kaushik on मंगलवार, 19 अप्रैल 2022 | 12:01 pm
अंदोसर शिवालय कांधला विश्व धरोहर घोषित हो
Written By Shalini kaushik on सोमवार, 18 अप्रैल 2022 | 8:46 am
18 अप्रैल को विश्व विरासत दिवस के रूप में मनाया जाता है. पुरसीवाडा (पंजाब) से आए पंडित रामचंद्र जी के तीन पुत्रों हकीम शिवनाथ जी, पंडित शिव प्रसाद जी और पंडित शिव सिंह जी द्वारा वर्ष 1800 में कस्बा कांधला के उत्तरी भाग में शिवालय की स्थापना की गई. यह शिवालय कांधला के सबसे बड़े क्षेत्र में स्थापित शिवालय है और 200 साल से पूरे भारत के भक्तों की श्रद्धा और आस्था का केंद्र है. साधू - संतों की शरण स्थली के रूप में रहा यह मन्दिर आज भी स्वामी सत्यनारायण गिरी महाराज जी की शरण स्थली है और यहां हकीम शिवनाथ जी द्वारा साधू संतों के ठहरने के लिए मुसाफिर खानों का निर्माण भी कराया गया है. सूर्य की पहली किरण आकर प्रभु गौरी नाथ के सिद्ध पीठ को नमन करती है और प्रभु भोलेनाथ का श्वेत शिवलिंग भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं.
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश श्री योगी आदित्यनाथ जी से विनम्र निवेदन है कि पुश्तैनी शिवालय अंदोसर मंदिर नई बस्ती कांधला के शिवालय मन्दिर महादेव मारूफ शिवाला, कांधला को विश्व धरोहर स्थल की सूची में सम्मिलित किया जाए.
सभी सनातन धर्मावलंबियों को ‼️विश्व धरोहर दिवस ‼️की हार्दिक शुभकामनाएं
हर हर महादेव 🙏🌼🙏
निवेदन
शालिनी कौशिक एडवोकेट
अध्यक्ष
मन्दिर महादेव मारूफ शिवाला कांधला धर्मार्थ ट्रस्ट (रजिस्टर्ड)
व्यापारी वर्ग " पाप से घृणा" का उदाहरण प्रस्तुत करता.
Written By Shalini kaushik on सोमवार, 4 अप्रैल 2022 | 4:14 pm
2 अप्रैल 2022 से विक्रम संवत 2079 का आरंभ होता है. चूंकि संवत की शुरूआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में नवरात्रों से होती है और नवरात्र के व्रतों में हिंदू धर्मावलंबियों द्वारा कुट्टू के आटे का ही प्रयोग बहुतायत में किया जाता है तो यही किया गया किन्तु दुर्भाग्यवश वह आटा शामली और सहारनपुर जिले के 28 व्रती जनों को नुकसानदायक रहा और उन्हें स्वास्थ्य लाभ हेतु अस्पताल जाना पड़ गया.
खबर तेजी से फैल गई और जिला मजिस्ट्रेट शामली सुश्री जसजीत कौर ने सतर्कता बरतते हुए तुरंत जांच के निर्देश जारी कर दिए और एसडीएम बृजेश कुमार सिंह पहुंच गए उन दुकानों पर, जहां से खाद्य पदार्थ की बिक्री हुई थी. जहां पहुँचकर उन्होंने खाद्य पदार्थों के नमूने लिए और नमूने लेते ही शुरू हो गया प्रशासन की कार्रवाई का व्यापारियों द्वारा विरोध.
मन्दिरों को पितृ स्थान से बचाएं योगी आदित्यनाथ जी
Written By Shalini kaushik on सोमवार, 28 मार्च 2022 | 8:30 pm
आज उत्तर प्रदेश में धर्म का राज है .ऐसे में सरकार द्वारा मंदिरों को पुनरुद्धार के लिए अनुदान दिया जा रहा है .फलस्वरूप मंदिरों को लेकर राजनीति और छीना-झपटी का समय चल रहा है .जैसे भी हो ,मंदिरों में कब्जे के लिए हिंदुओं का एक विशेष वर्ग काफी हाथ-पैर मार रहा है .साथ ही एक और षड्यंत्र उस विशेष वर्ग ने किया है और वह है मंदिरों में अपने पूर्वजों के स्थान स्थापित कर मंदिरों पर अपने कब्जे दिखाने की ओर , उस पर तुर्रा ये कि इस तरह मंदिरों में भक्तों का आवागमन बढ़ेगा , मतलब ये कि अब भगवान् के दर्शन के लिए भी भक्तों को बहाने चाहिए और इसके लिए वे अपने घर के कुंवारे मृत पूर्वजों की अस्थियों की राख को मंदिर की जमीन में दबायेंगे ,उनकी जयंती ,बरसी या श्राद्ध में उन्हें श्रृद्धासुमन अर्पित करने आएंगे और तब थोड़ा समय निकालकर भगवान् के दर्शन कर उन्हें भी कृतार्थ कर देंगे और ये पूर्वजों के स्थान भी ओरिजिनल रूप से नहीं वरन अपनी उन जमीनों से स्थानांतरित कर ,जिन्हें अपने क्षेत्र को छोड़कर जाने के लिए बेचकर नोट कमाने हैं और जो वर्षों पहले खेतों की मिट्टी में दबकर भूमि में समाहित हो चुके हैं , से मंदिर में लाये जायेंगे .
पवित्र पुण्य धाम हरिद्वार [उत्तराखंड] के निवासी पंडित सत्यनारायण जी के अनुसार मंदिरों में पूर्वजों के स्थान स्थापित करना उन्हें श्मशान बना देना है और अगर हम वास्तु शास्त्र का अध्ययन करते हैं तो उसमें साफ लिखा है कि मंदिर के शीर्ष पर स्थापित कलश और ध्वजा जहाँ तक दिखाई देती है वह सब क्षेत्र मंदिर की परिधि में आता है और यदि हम मंदिर तक नहीं भी पहुँच सकते हैं किंतु मंदिर के कलश और ध्वजा का बहुत दूर से भी दर्शन कर प्रभु को नमस्कार करते हैं तब भी प्रभु दर्शन का पुण्यफल हमें प्राप्त होता है .मंदिर के कलश ध्वजा दिखाई देने की यह परिधि एक धर्मक्षेत्र होता है ,जिसमे कोई भी धर्मविरुद्ध कार्य करना घोर पाप की श्रेणी में आता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि उस क्षेत्र में परमात्मा का प्रभा मंडल अधिक सक्रिय रूप में उपस्थित होता है.
आप अगर वास्तुशास्त्र का अध्ययन करते हैं तो आप पाएंगे कि घर के मंदिर तक में पूर्वजों की तस्वीर तक रखना मंदिर में नकारात्मक ऊर्जा को प्रविष्ट करता है ,ऐसा कहा गया है ,जबकि घर के मंदिर में तो भगवान् की प्राण-प्रतिष्ठा भी नहीं की जाती ,फिर क्यों इस तथ्य पर विचार नहीं किया जा रहा है कि जहां हमने भगवान को प्राण प्रतिष्ठा कर स्थापित किया है, हम वहां उनके बराबर में मृत शरीरों की अस्थियों की राख को दबाकर उन्हें क्यूँ असहज कर रहे हैं, क्यूँ वहां नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश द्वार खोल रहे हैं, क्यूँ मन्दिर को श्मशान बना रहे हैं?
ऐसे में, सम्मानीय योगी आदित्यनाथ जी से विनम्र निवेदन है कि धर्म के राज में अधर्म न होने दें और मन्दिरों की पवित्र भूमि पर पूर्वजों के स्थान स्थापित किए जाने पर रोक लगाने के लिए कानून लाने की कृपा करें और जिन परिवारों ने मंदिरों में अपने पूर्वजों के स्थान दबंगई दिखाकर स्थापित कर लिए हैं उन्हें निश्चित समय में हटाने के लिए सरकार द्वारा नोटिस जारी किए जाएं क्योंकि ये पितृ स्थान स्थानीय मान्यताओं के अनुसार परिवारों द्वारा अपनी निजी भूमि में बनाए जाते हैं और ये व्यक्तिगत आस्था का विषय हैं इस तरह से मंदिरों की सार्वजनिक भूमि में इनका स्थापित किया जाना इन्हें जनसाधारण की पूजा का पात्र बना देता है जिसका बाद में पता चलने पर जिनके ये पितृ स्थान होते हैं और जो अनदेखी या अज्ञानता मे इन्हें पूजते हैं दोनों पक्षों के मध्य में घोर रोष की वज़ह बन जाता है. इसलिए मंदिरों में परिवारों के पितृ स्थानों पर रोक लगनी चाहिए साथ ही जो मन्दिर की देखरेख करने वाले या मन्दिर के ट्रस्ट या कमेटी के लोग ऐसी अनाधिकृत चेष्टा करते हैं उन्हें दण्डित भी किया जाना चाहिए.
शालिनी कौशिक एडवोकेट
अध्यक्ष
मंदिर महादेव मारूफ शिवाला
कांधला धर्मार्थ ट्रस्ट (रजिस्टर्ड)
कैराना स्थित जनपद न्यायालय ही हो शामली जनपद का मुख्य न्यायालय
Written By Shalini kaushik on शनिवार, 26 मार्च 2022 | 9:02 pm
2011 में 28 सितंबर को शामली जिले का सृजन किया गया. तब उसमें केवल शामली और कैराना तहसील शामिल थी. इससे पहले शामली और कैराना तहसील मुजफ्फरनगर जनपद के अंतर्गत आती थी. कुछ समय बाद शामली जिले में ऊन तहसील बनने के बाद अब शामली जिले के अंतर्गत तीन तहसील कार्यरत हैं. 2018 के अगस्त तक शामली जिले का कानूनी कार्य मुजफ्फरनगर जिले के अंतर्गत ही कार्यान्वित रहा किन्तु अगस्त 2018 में शामली जिले की कोर्ट शामली जिले में जगह का चयन न हो पाने के कारण कैराना में आ गई और इसे नाम दिया गया -" जिला एवं सत्र न्यायालय शामली स्थित कैराना. "
2018 से अब तक मतलब मार्च 2022 तक शामली जिले के मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर जिला जज की कोर्ट के लिए जगह का चयन हो जाने के बाद केवल बाउंड्रीवाल का ही निर्माण हो पाया है और शामली जिले में केवल तहसील स्तर का ही कार्य सम्पन्न हो रहा है. जिसे देखते हुए कहा जा सकता है कि वहां कानूनी विभाग लगभग शून्यता की स्थिति में है और वहां जिला जज की कोर्ट की स्थापना के साथ साथ मुंसिफ कोर्ट से लेकर जिला जज की कोर्ट की स्थापना करने के लिए बहुत बड़े स्तर का कार्य सम्पन्न करना होगा, जबकि शामली जिले की तहसील कैराना में जिला जज की कोर्ट से एक नंबर कम की कही जाने वाली कोर्ट ए डी जे कोर्ट की स्थापना ही 2011 में हो चुकी है और कैराना तहसील में स्थापित न्यायालय परिसर शामली जिले के मुख्यालय से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.
ऐसे में, माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से विनम्र निवेदन है कि वे कैराना की सुदृढ़ न्यायिक व्यवस्था, कैराना में फैली अपराधियों की जड़ें और शामली जिले की बदहाल कर देने वाली जाम की समस्या को देखते हुए कैराना में ही जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय को शामली जिले का मुख्य न्यायालय घोषित करें और यदि इसके लिए उन्हें कैराना में न्यायालय परिसर तक के क्षेत्र को शामली जिले के अंतर्गत ही घोषित करना पड़े तो करें क्योंकि शामली जिले में जिस जगह का चयन जिला कोर्ट के लिए किया गया है वहां तक क्षेत्र के निवासियों का पहुंचना असंभव नहीं तो कठिन अवश्य है क्योंकि शामली जिला इतना सघन रूप से बसा हुआ है कि मात्र एक किलोमीटर पार करने में भी 1-2 घण्टे से ऊपर का समय लग रहा है. ऐसे में न्याय पाने के लिए पीड़ितों को या तो रात में ही घर से निकलना पड़ेगा या फिर न्याय पाने की आशा को ही खो देना पड़ेगा. साथ ही, यदि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कैराना स्थित जनपद न्यायालय को मुख्य न्यायालय का दर्जा दिया जाता है तो सरकार का बहुत सारा धन भी बचेगा और कैराना तहसील में लगभग खंडहर पड़े बहुत सारे क्षेत्र का न्यायालय और अधिवक्ताओं के चेम्बर के रूप में इस्तेमाल भी हो सकेगा.
अतः माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी कम से कम एक बार जांच कमेटी बिठाकर कैराना स्थित जनपद न्यायालय को ही शामली जिले के मुख्य न्यायालय का दर्जा दिए जाने की मांग पर विचार करें.
🙏🙏धन्यवाद 🙏🙏
शालिनी कौशिक एडवोकेट
कैराना (शामली)
खंडपीठ /चेंबर /आर्थिक मदद /आरक्षण कुछ तो दें योगी जी - शालिनी कौशिक एडवोकेट
Written By Shalini kaushik on शुक्रवार, 25 मार्च 2022 | 10:37 pm
माननीय योगी आदित्यनाथ जी ने आज उत्तर प्रदेश के दूसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की है. जहां एक ओर योगी आदित्यनाथ जी ने अपने पिछले कार्यकाल में पुलिस और प्रशासन का बेहतर तरीके से इस्तेमाल करते हुए आपराधिक तत्वों को उत्तर प्रदेश में जेल के सींखचों में डालने का कार्य सफलतापूर्वक किया है वहीं न्याय के पैरोकार अधिवक्ताओं के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैया योगी सरकार द्वारा अख्तियार किया गया है. योगी आदित्यनाथ जी के माध्यम से सभी के लिए घोषणाएं की जा रही हैं किन्तु वकीलों को लेकर अभी तक किसी मदद का आश्वासन सामने नहीं आया है. अतः देश औेर दुनिया की कोरोना कालीन उपजी विषम परिस्थितियों को देखते हुए मेरा योगी जी से निम्न निवेदन है -
1 - यह कि जूनियर अधिवक्ताओं के लिए आर्थिक सहायता हेतु कुछ राशि सरकार द्वारा घोषित की जाए और कुछ निश्चित धनराशि इस बीमारी के कारण अपने परिजन को खो चुके वकील के परिवार को दिए जाने की जल्द घोषणा की जाए.
2- यह कि रोजगार की समस्या को लेकर देखते हुए आज बड़ी संख्या में युवाओं द्वारा वक़ालत को अपने व्यवसाय के रूप में अपनाया जा रहा है किन्तु कचहरी में जूनियर वकीलों के लिए सबसे बड़ी समस्या उनके व्यवसाय स्थल को लेकर आ रही है. ऐसे में जूनियर वकीलों के चेम्बर के लिए सम्बन्धित कचहरी में स्थल की उपलब्धता सुनिश्चित करायी जाए.
3- यह कि वक़ालत व्यवसाय में आज भी महिला अधिवक्ताओं को दोयम दर्जा प्राप्त है और उन्हें अभी भी अपना स्थान मजबूत बनाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है. ऐसे में, महिला अधिवक्ताओं के लिए न्यायालयों में कमिश्नर और सरकारी वकीलों के पदों पर आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था की जाए.
4- यह कि पिछले 5 दशक से पश्चिमी यू पी के अधिवक्ताओं द्वारा हाई कोर्ट की खंडपीठ की मांग की जा रही है और अब भाजपा नीत सरकार द्वारा अपने मंत्रिमंडल में वेस्ट यू पी को तरजीह दी गई है. ऐसे में अधिवक्ताओं की इस मांग के साथ न्याय करते हुए माननीय योगी जी से निवेदन है कि वेस्ट यू पी में हाई कोर्ट खंडपीठ प्रदान करते हुए यहां की जनता को न्याय के करीब लाया जाए और अधिवक्ताओं के दामन पर हड़ताल प्रिय होने का कलंक हाई कोर्ट खंडपीठ देकर मिटा दिया जाए.
माननीय श्री योगी आदित्यनाथ जी अधिवक्ताओं की इन सभी समस्याओं पर विचार करेंगे और उन्हें अवश्य हल करेंगे, ऐसा " योगी है तो यकीन है" उक्ति पर ध्यान केन्द्रित करते हुए कहा जा सकता है.
शालिनी कौशिक एडवोकेट
कैराना
प्रसन्नता और गौरैया - एक सिक्के के दो पहलू
Written By Shalini kaushik on रविवार, 20 मार्च 2022 | 8:37 am
20 मार्च अंतरराष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस और विश्व गौरैया दिवस के रूप में मनाया जाता है. प्रसन्नता कोई वस्तु नहीं है कि आप बाजार में गए और कुछ सस्ती या महंगी पैसा खर्च कर खरीद लाए. प्रसन्नता को आप महँगी होने पर सस्ती दर पर खरीद कर भी प्राप्त नहीं कर सकते, यह वह मानसिक क्षण है जिसे आप तभी पा सकते हैं जब यह आपके मन को गहराई तक स्पर्श करती है और हम भले ही कितने भौतिकवादी हो जाएं, हमारी आत्मा कभी किसी भी प्रकार के छल - प्रपंच का शिकार नहीं हो सकती और हमें सच्ची खुशी हमारी आत्मा की संतुष्टि से ही प्राप्त होती है और हमारी आत्मा की यह संतुष्टि ही प्रसन्नता का सही रूप है और क्योंकि आज विश्व गौरैया दिवस भी है ऐसे में अपने घर की बेटी - गौरैया की सुरक्षा हमें सही रूप में प्रसन्नता का हकदार बना सकती है. पहले घरों में गौरैया के, तोतों के रहने के छोटे छोटे कोटर बनाये जाते थे, पेड़ - पौधे होते थे, आज ये सब खत्म होते जा रहे हैं ऐसे में गौरैया का दिखाई देना भी बंद हो गया है.
अतः मेरा आप सभी से विनम्र निवेदन है कि आप सभी अपने घर के पास, यदि कस्बों में रहते हैं तो मोहल्ले में, यदि शहरों में रहते हैं तो कॉलोनी में पेड़ पौधे अवश्य लगाएं, उनका संवर्धन और संरक्षण करें. यदि आप वास्तव में ऐसा कर पाते हैं तो निश्चित रूप से आपके आँगन में एक बार फिर गौरैया फुदकते हुए आएगी और तब सच्ची प्रसन्नता आपके चेहरे पर आएगी और हृदय पर छाएगी.
शालिनी कौशिक एडवोकेट
कैराना
बेटे का इतिहास
Written By Shalini kaushik on शनिवार, 19 मार्च 2022 | 11:24 pm
आज का बेटा
जब
कल बाप बनेगा
देखेगा
बेटा बाप के सर पर
रखकर पैर
खुद को
आगे बढ़ा रहा है
और
अपने बाप के मुँह पर
पर्दा डालता जा रहा है.
तब याद आता है उसे
इतिहास खुद को
दोहरा रहा है.
कल जो तूने
अपने
बाप के साथ किया था
आज तेरा बेटा
तेरे साथ
वही
किए जा रहा है.
शालिनी कौशिक एडवोकेट, कैराना
BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN: सरयू तट राम खेलें होली सरयू तट
जूतों का भार
Written By Bisari Raahein on रविवार, 16 जनवरी 2022 | 4:41 pm
*लघुकथा*
*( जूतों का भार )*
"मैडम जी फैमली आइडी चाहिए जी...." सातवीं कक्षा की नेहा के साथ आए उसके पिता ने मैडम सुनीता के पास आकर गुहार लगाई ।
'क्यों ? क्या करना है उसका...' सुनीता मैडम ने प्रश्न दागा ।
"जी ... वो राशन डिपो वाले ने राशन देने से मना कर दिया । कहता है कि पहले स्कूल से अपनी फैमिली आइडी लेकर आओ" नेहा के पिता ने व्यथित स्वर में कहा ।
"अच्छा अब खुद को काम पड़ा तो स्कूल की याद आ गई ... और हम जो रोज फोन कर - कर के पागल हो गए कि अपनी बच्ची को आनलाईन भेजा गया गृह कार्य करवा कर मोबाइल पर भेजो । उसकी तो सुनवाई की नहीं आपने....?" सुनीता मैडम बिफर पड़ीं ।
"जी.. वो हमारे फोन का नेट पैक खत्म हो गया था इसलिए..........." नेहा के पिता ने मजबूरी बतानी चाही लेकिन सुनीता मैडम उनकी बात बीच में ही काटकर गुस्से से चिल्ला उठी ।
"जाओ , पहले जाकर फोन रिचार्ज करवा कर लाओ और आनलाईन फीडबैक फार्म भरो फिर मिलेगी आईडी....।''
थोड़ी देर बाद बाप बेटी फिर से स्कूल में आ गए और सुनीता मैडम को फोन पकड़ा कर बोले ... "जी , फोन रिचार्ज करवा लिया है आप बता दो अब कि आनलाईन क्या करना है इसमें ?"
सुनीता मैडम का उनसे फोन पकड़ते हुए ध्यान गया कि इतनी ठंड में भी नेहा नंगे पांव स्कूल आई थी जबकि आज तो जुराब-जूतों में भी ठंड महसूस हो रही है । इसलिए फिर से गुस्से में नेहा से पूछा "इतनी ठंड में भी बिना जूते - चप्पल के घूम रही हो ... अक्ल नाम की चीज है या नहीं .....?"
"जी .... जूते हैं नहीं और कई दिन हुए चप्पलें टूट गई हैं ..." नेहा ने डरते हुए जवाब दिया ।
नेहा के पिता ने सफाई देने के लहजे में बोला , " जी... अभी थोड़ी तंगी चल रही है इसलिए...... बस दो-चार दिहाड़ी लगातार लग जाएं तो दिलवा देंगे चप्पल इसे ..... अभी तो ये फोन भी दुकानदार से मिन्नतें करके उधार में रिचार्ज करवाया है।"
तभी मैडम सुनीता को लगा कि उसके हाथ में मोबाइल नहीं जूतों समेत नेहा का भार है और वह नि:शब्द हो गई ।
*कृष्ण कायत - 9896105643*
*संयोजक :- हरियाणा लघुकथा मंच डबवाली।*
Written By yayawer on गुरुवार, 9 दिसंबर 2021 | 4:12 pm
सैनी घोष ब्लॉग पर पाठको की संख्या निरंतर बढती जा रही है, कृपया आप भी सैनी घोष को पढ़े और ज्ञानवर्धक जानकारिय हासिल करे
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लघुत्तम विचारौषधि: आकांक्षा/महत्वाकांक्षा
Written By Barun Sakhajee Shrivastav on सोमवार, 6 दिसंबर 2021 | 12:15 am
कोरोना है डरा रहा
Written By Surendra shukla" Bhramar"5 on गुरुवार, 13 मई 2021 | 3:48 pm
कोरोना है डरा रहा,
चुन चुन करे शिकार
आंख बन्द माने नहीं ,
शामिल हुए हजार।
***************
कोरोना से मत डरो,
अपनाओ सब ढाल
हृष्ट पुष्ट ताकत रखो,
कर लो प्राणायाम,
*************
काढ़ा भाप गर्म पानी लो,
घर में करो आराम,
मास्क सैनिटाइजर ना भूलो,
बाहर गर हो काम
*************
अदरक तुलसी मिर्च हो काली,
लौंगा और गिलोय
नीबू सेंधा नमक प्याज भी,
घर में करो प्रयोग
****************
रूप प्रभु के यहां चिकित्सक
लो सलाह भरपूर
जो बोलें तुम करो दवाई
खा लो थोड़ा धूप
***************
कुछ कपूर हो लौंग साथ में,
कभी कभी लो सूंघ
प्रोन पोजिशन लेट सांस लो,
ऑक्सिजन भरपूर।
***************
प्रात उठो टहलो बस घर में
योग ध्यान कसरत कुछ कर लो,
पौधों फूलों से कुछ खेलो
प्यार करो हंस लो मुस्का लो।
******************
आंधी आए कुछ फल गिरते
बचते फिर जो हों मजबूत
आओ बांटें व्यथा सभी की,
हृदय बचे ना कोई शूल।
*****************
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश
भारत
पल्लव कोंपल है गोद हरी
Written By SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR5 on गुरुवार, 1 अप्रैल 2021 | 5:59 am
शीत बतास औे पाला सहे नित
ठूंठ बने हिय ताना सुने जग
कूंच गई फल फूल मिले
तेरे साहस पे नतमस्तक सब
पल्लव कोंपल है गोद हरी
रस भर महुआ निर्झर झर झर
सब खीझत रीझत दुलराते
सम्मोहित कुछ वश खो जाते
मधु रस आकर्षित भ्रमर कभी
री होली फाग सुनावत हैं
छलकाए देत रस की गागर
ज्यों अमृत पान करावत है
ऋतुराज वसंत भी देख चकित
गोरी चंदा तू कर्पूर धवल
रचिता बनिता दुहिता गुण चित
चहुं लोक बखान बखानत बस
शुध चित्त मर्मज्ञ हरित वसनी
पावन करती निर्झर जननी
बल खाती सरिता कंटक पथ
उफनत हहरत सागर दिल पर
कुछ दबती सहती शोर करे
गर्जन बन मोर नचावत तो
कुछ नाथ लेे नाथ रिझावत है
मंथन कर जग कुछ सूत्र दिए
मदिरा मदहोश हैं राहु केतु
कुछ देव मनुज संसार हेतु
री अमृत घट करुणा रस की
मै हार गया वर्णन सिय पी
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सुरेंद्र कुमार शुक्ल
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत
प्रकृति रम्य नारी सृष्टि तू
Written By Surendra shukla" Bhramar"5 on बुधवार, 31 मार्च 2021 | 1:12 pm
बार बार उड़ने की कोशिश
गिरती और संभलती थी
कांटों की परवाह बिना वो
गुल गुलाब सी खिलती थी
सूर्य रश्मि से तेज लिए वो
चंदा सी थी दमक रही
सरिता प्यारी कलरव करते
झरने चढ़ ज्यों गिरि पे जाती
शीतल मनहर दिव्य वायु सी
बदली बन नभ में उड़ जाती
कभी सींचती प्राण ओज वो
बिजली दुर्गा भी बन जाती
करुणा नेह गेह लक्ष्मी हे
कितने अगणित रूप दिखाती
प्रकृति रम्य नारी सृष्टि तू
प्रेम मूर्ति पर बलि बलि जाती
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सुरेंद्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत
गांव की गोरी ने लूट लिया तन मन
Written By SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR5 on शुक्रवार, 19 मार्च 2021 | 2:44 pm
गांव की गोरी ने लूट लिया तन मन
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आम्र मंजरी बौराए तन देख देख के
बौराया मेरा निश्च्छल मन
फूटा अंकुर कोंपल फूटी
टूटे तारों से झंकृत हो आया फिर से मन
कोयल कूकी बुलबुल झूली
सरसों फूली मधुवन महका मेरा मन
छुयी मुई सी नशा नैन का
यादों वादों का झूला वो फूला मन
हंसती और लजाती छुपती बदली जैसी
सोच बसंती सिहर उठे है कोमल मन
लगता कोई जोह रही विरहन है बादल को
पथराई आंखे हैं चातक सी ले चितवन
फूट पड़े गीत कोई अधरों पे कोई छुवन
कलियों से खेल खेल पुलकित हो आज भ्रमर
मादक सी गंध है होली के रंग लिए
कान्हा को खींच रही प्यार पगी ग्वालन
पीपल है पनघट है घुंघरू की छमछम से
गांव की गोरी ने लूट लिया तन मन
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सुरेंद्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश भारत
19.3.2021
कांटे फूल सदा ही संगी
Written By SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR5 on गुरुवार, 24 दिसंबर 2020 | 11:03 pm
कांटे फूल सदा ही संगी
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मेरा मन भी भ्रमित बहुत है
गिरगिट जैसा रंग बदलता
स्वागत को जब फूल बहुत हैं
कैक्टस फूल उगाऊं कहता
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घर आंगन फुलवारी प्यारी
खुशियों से आह्लादित सारी
और लालसा की चाहत में
बढ़ता जाऊं कंटक पथ में
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सीधी सादी भोली भाली
' तुलसी आंगन की दिवाली
कौन लगा घुन मन में मेरे
ना भाए कुछ ' दर्द ' सिवा रे !
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बहुत लोग हैं मेरे जैसे
खुशियों का जो दंश हैं झेले,
भांति भांति के कांटे चुनते
' कैक्टस की दीवार बनाते
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सीमित साधन या हो मरूथल,
वीराने भी सजता कैक्टस,
धैर्य और साहस का परिचय,
कांटों फूल सजाता कैक्टस
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मेहनत कांटों की शैय्या चल,
प्यारे फूल हैं लगते मनहर,
जीवन की पगडंडी ऐसी,
कांटे - फूल सदा ही संगी
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बुरा नहीं कांटा भी यारों
कांटे से कांटे को निकालो
घर अंगना जो न मन भाए
सीमा पर आ बाड़ लगाएं
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5
प्रतापगढ़,
उत्तर प्रदेश, भारत









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