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एक नाम राजेंद्र सांखला

Written By आपका अख्तर खान अकेला on गुरुवार, 30 मई 2019 | 6:07 am

एक नाम राजेंद्र सांखला ,,जो युवा नेतृत्व में कामयाबी का एक सबक़ बनकर उभरा है ,,उनकी टीम कांग्रेस समर्थित हाड़ोती विकास मोर्चा संगठन और कॉग्रेस के पदाधिकारी मिलकर आज उनका जन्म दिन बढ़ी धूम धाम ,,खुशियों के साथ मना रहे है , राजेंद्र सांखला को उनके जन्म दिन पर बधाई ,मुबारकबाद ,कामयाबी की बेशुमार दुआएं ,,,एक संघर्ष ,जनसमस्याओं के निराकरण के लिए सीधी लड़ाई लड़ने का दुसरा नाम राजेंद्र सांखला कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी ,हाड़ोती विकास मोर्चा के अध्यक्ष राजेंद्र सांखला में नेतृत्व में कोटा ज़िले के हर क्षेत्र में इनके कार्यकर्ताओं की निजी टीम है जो तत्काल सुचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर निर्भीकता से संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है ,,,,जी हाँ दोस्तों ,अपने व्यवसाय ,,अपनी सियासत ,,जन सेवा ,,जनसंघर्ष ,,नेतृत्व क्षमता में कामयाबी का एक नाम राजेंद्र सांखला ,,जो युवा नेतृत्व में कामयाबी का एक सबक़ है ,, जनहित समस्याओं के निराकरण के लिए एक संघर्ष ,,,जो कभी छोटा सा पौधा था वोह ,आज एक छायादार वृक्ष बन गया है आज वोह खुद ,,कोटा शहर की प्रमुख समस्याओं को लेकर ,,प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य ,,राजेंद्र सांखला ,,, हाड़ोती विकास मोर्चा के नाम पर खुला संघर्ष कर रहे है ,,हाल ही में कोटा विधुत वितरण निगम के खिलाफ बिलों की ज़्यादती को लेकर इनका बढ़ा संघर्ष अपनी सरकार में गरीबों के हित में अव्यवस्थाओं के खिलाफ रहा है ,,,,,जी हाँ दोस्तों शहर की हर प्रमुख समस्या और उनके निराकरण मामले में,,,अपनी पेनी नज़र रखकर ,,आवाज़ बुलंद करने वाले,,, राजेंद्र सांखला ने ,,,अपने इस विचार के समर्थन में क्रांतिकारी ,,,वफादार कार्यकर्ताओं की टीम तैयार करने में भी ,,,कामयाबी हांसिल की है ,,,राजेंद्र सांखला ने अपने संघर्ष ,,से ,,अपने व्यवसायिक समर्पण के ,साथ ,कामयाबी से ,,एक ,,कहावत ,,खुदी को कर बुलंद इतना ,,के हर तक़दीर से पहले ,खुदा बंदे से पूंछे तेरी रज़ा किया है को साबित कर दिखाया है ,,राजेंद्र सांखला ,,छात्र जीवन से ही ,,छात्र कांग्रेस के पदाधिकारी के रूप में ,,अधिकारियो ,,उनके परिजनों द्वारा सरकारी वाहनों के दुरुपयोग को रोकने का सफलतम अभियान चला चुके है ,,उन्होंने अस्पतालों की समस्याओं ,को लेकर ,अस्पतालों में खून बेचने के खिलाफ संघर्ष किया ,,जबकि चिकित्सको द्वारा ,सरकारी निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क वसूली के खिलाफ,,,, अभियान चलाकर ,,,चिकित्सको की लूट से आम जनता को बचाया ,,,राजेंद्र सांखला ने कॉलेज सहित ,,सभी छोटी बढ़ी शिक्षण संस्थाओ में ,,,छात्र छात्राओं से अवैध फीस वसूली के खिलाफ ,,आंदोलन छेड़ा ,,तो रोज़गार कार्यालय सहित ,,उद्योगों के खिलाफ स्थानीय लोगो को,,, रोज़गार देने का आन्दोलन मज़बूती से कामयाबी के साथ चलाकर ,,,कई बेरोज़गारो को रोज़गार दिलवाया ,,,,,राजेंद्र सांखला ने ,,,पुलिस थाने में निर्दोषो के साथ ज़्यादती करने वाले,,, पुलिस कर्मियों के खिलाफ खुलकर आवाज़ ,उठाई ,तो वक़्त ब वक़्त ,,शहर में पानी ,,बिजली ,,किसानो के लिए खाद ,,बीज ,,सिंचाई ,,गरीबो के लिए रोज़गार ,,कच्ची बस्तियों के नियमन ,,छात्र छात्रों से ट्यूशन के नाम पर की जा रही लूट के खिलाफ सैकड़ों आन्दोलन किये ,,राजेंद्र सांखला ने आंदोलन के साथ साथ ,मर्यादाओं का भी पूरा ध्यान रखा ,,इसी दौरान वोह कांग्रेस के युवा उत्साहित छात्र नेता से ,,युवा नेता और अब कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय नेता बन गए है ,,राजेंद्र सांखला कांग्रेस में पूर्व प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी सदस्य रहे है ,वोह कई मह्त्य्वपूर्ण पदों पर है ,,लेकिन उनके गॉड फादर ,उनके प्रेरक ,पथप्रदर्शक ,,,कोटा के विकास पुरुष ,,केबिनेट मंत्री शान्ति कुमार धारीवाल है ,,जिनके लिए ,,राजेंद्र सांखला और उनकी टीम,,, एक जुट होकर ,,कुछ भी कर गुज़रने के लिए तैयार रहती है ,,सांखला ने अपने संघर्ष ,,अपने आंदोलन के साथ साथ ,,रोज़गार पर भी ध्यान दिया ,,स्वरोजगार व्यवस्था के तहत ,,खुद को स्थापित किया ,,एक आम आदमी से खास बनने की मशक़्क़्क़त कर सांखला ने ठेकेदारी ,व्यवसायिक गतिविधियों में भी खुद को कामयाब किया ,,लोगो से भी सम्पर्क रखा ,,कांग्रेस का एक सिपाही बनकर ,,आम लोगो के लिए संघर्ष भी किया ,तो वक़्त आने पर ,,आम लोगो के लिए संघर्ष के दौरान मुक़दमो का दर्द भी झेला है ,,राजेंद्र सांखला ने ,,,कांग्रेस समर्थित हाड़ोती विकास मोर्चा गठित किया ,,इस मोर्चे में कोटा की हर विधानसभा ,हर वार्ड ,,,हर भाग संख्या के सभी जाति ,,समाज ,,वर्ग ,,समुदाय के लोग शामिल है ,,इनके मोर्चे में स्त्री ,,पुरुष ,,बूढ़े ,,नौजवान सभी जुड़ गए है ,,हालत यह के ,,कोटा के किसी आंदोलन के वक़्त एक आवाज़ ,,एक संदेश पर गली ,,मोहल्लों से निकल कर ,, सेकड़ो लोग ,,राजेंद्र सांखला के साथ ,,कांग्रेस ज़िंदाबाद ,,करते हुए हर समस्या के समाधान के लिए किसी भी क़ीमत पर कुछ भी कर गुज़रने को तैयार रहते है ,,,हाल ही में राजेंद्र सांखला ने शहर में साफ़ सफाई ,गंदगी की समस्या को लेकर आंदोलन किया ,,नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष को कार्यभार ग्रहण नहीं करवाने के खिलाफ चेतावनी भरा संघर्ष किया ,,तो कोटा हेंगींग ब्रिज जो बनकर तो तैयार था ,,लेकिन बेवजह उद्घाटन में देरी किये जाने के खिलाफ संघर्ष किया ,, इस दौरान हेंगिंग ब्रिज की खराबियों की भी पोल खुली ,,पुलिस द्वारा दमनकारी निति के तहत ,,,जब राजेंद्र सांखला ,,इनके साथ ,हेंगिंग ब्रिज का निरीक्षण करने गए ,,,केबिनेट मंत्री शान्ति कुमार धारीवाल सहित,,, कुछ लोगो के खिलाफ मुक़दमा दर्ज किया ,,तो राजेंद्र सांखला के समर्थको ने शहर की गलियों ,चोराहो पर कई हफ्ते तक प्रदर्शन किए ,,,राजेंद्र सांखला आज ,,कोटा कांग्रेस में एक कामयाब ,,संघर्ष शील ,,,युवा क्रांतिकारी नेतृत्व की पहचान बना चुके है ,,,,इनकी टीम ,,,इनकी टीम के संघर्ष के जज़्बे ,,इनकी टीम की निर्भीकता ,,क्रन्तिकारी आंदोलन शैली ,,,कॉग्रेस ज़िंदाबाद की वफादार सिपाही की भूमिका ,,इन्हे कांग्रेस के दूसरे नेताओं से जुदा और मज़बूत बनाती है ,,मेने इनका युवा कार्यकाल का संघर्ष का जज़्बा ,,इनके आंदोलन का तरीक़ा भी देखा है ,,और आज कुशल नेतृत्व में ,,गली ,,गली ,,मोहल्लों ,,वार्डों ,,सभी जगह इनके नेतृत्व में ,,कांग्रेस वफादार कार्यकर्ताओं की टीम ,,इनके हर मुद्दे पर सजग सतर्क होकर ,,आंदोलन ,,प्रदर्शन करने के तरीके से स्पष्ट है ,,के एक छात्र तरुण नेतृत्व जो आंदोलन का एक पौधा था ,आज वोह युवा बनकर ,,कांग्रेस के पक्ष में आंदोलनकारियों की टीम का एक कुशल नेतृत्व ,,कुशल कमांडर ,,एक वटवृक्ष बन गया है ,,राजेंद्र सांखला के इस ,जांबाज़ ,नेतृत्व ,,आंदोलनकारी स्वभाव ,,जनसमस्याओं के प्रति जागरूकता ,,निर्भीकता ,,निष्पक्षता और अपने कार्यकर्ताओं पर मर मिटने के जज़्बे को सलाम ,,सेल्यूट ,,सालगिरह मुबारक हो ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

ये चन्द रोज़ा फ़ायदा हैं

जो लोग उठते बैठते करवट लेते (अलगरज़ हर हाल में) ख़ुदा का जि़क्र करते हैं और आसमानों और ज़मीन की बनावट में ग़ौर व फि़क्र करते हैं और (बेसाख़्ता) कह उठते हैं कि ख़ुदावन्दा तूने इसको बेकार पैदा नहीं किया तू (फेले अबस से) पाक व पाकीज़ा है बस हमको दोज़ख़ के अज़ाब से बचा (191)
ऐ हमारे पालने वाले जिसको तूने दोज़ख़ में डाला तो यक़ीनन उसे रूसवा कर डाला और जु़ल्म करने वाले का कोई मददगार नहीं (192)
ऐ हमारे पालने वाले (जब) हमने एक आवाज़ लगाने वाले (पैग़म्बर) को सुना कि वह (ईमान के वास्ते यू पुकारता था) कि अपने परवरदिगार पर ईमान लाओ तो हम ईमान लाए बस ऐ हमारे पालने वाले हमें हमारे गुनाह बख़्श दे और हमारी बुराईयों को हमसे दूर करे दे और हमें नेकों के साथ (दुनिया से) उठा ले (193)
और ऐ पालने वाले अपने रसूलों की मारफ़त जो कुछ हमसे वायदा किया है हमें दे और हमें क़यामत के दिन रूसवा न कर तू तो वायदा खि़लाफ़ी करता ही नहीं (194)
तो उनके परवरदिगार ने दुआ कु़बूल कर ली और (फ़रमाया) कि हम तुममें से किसी काम करने वाले के काम को अकारत नहीं करते मर्द हो या औरत (इस में कुछ किसी की खु़सूसियत नहीं क्योंकि) तुम एक दूसरे (की जिन्स) से हो जो लोग (हमारे लिए वतन आवारा हुए) और शहर बदर किए गए और उन्होंने हमारी राह में अज़ीयतें उठायीं और (कुफ़्फ़र से) जंग की और शहीद हुए मैं उनकी बुराईयों से ज़रूर दरगुज़र करूंगा और उन्हें बेहिश्त के उन बाग़ों में ले जाऊॅगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं ख़ुदा के यहाँ ये उनके किये का बदला है और ख़ुदा (ऐसा ही है कि उस) के यहाँ तो अच्छा ही बदला है (195)
(ऐ रसूल) काफि़रों का शहरो शहरो चैन करते फिरना तुम्हे धोखे में न डाले (196)
ये चन्द रोज़ा फ़ायदा हैं फिर तो (आखि़रकार) उनका ठिकाना जहन्नुम ही है और क्या ही बुरा ठिकाना है (197)
मगर जिन लोगों ने अपने परवरदिगार की परहेज़गारी (इख़्तेयार की उनके लिए बेहिश्त के) वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारीं हैं और वह हमेशा उसी में रहेंगे ये ख़ुदा की तरफ़ से उनकी (दावत है और जो साज़ो सामान) ख़ुदा के यहाँ है वह नेको कारों के वास्ते दुनिया से कहीं बेहतर है (198)
और एहले किताब में से कुछ लोग तो ऐसे ज़रूर हैं जो ख़ुदा पर और जो (किताब) तुम पर नाजि़ल हुयी और जो (किताब) उनपर नाजि़ल हुयी (सब पर) ईमान रखते हैं ख़ुदा के आगे सर झुकाए हुए हैं और ख़ुदा की आयतों के बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनियावी फ़ायदे) नहीं लेते ऐसे ही लोगों के वास्ते उनके परवरदिगार के यहाँ अच्छा बदला है बेशक ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब करने वाला है (199)
ऐ ईमानदारों (दीन की तकलीफ़ों को) झेल जाओ और दूसरों को बर्दाश्त की तालीम दो और (जिहाद के लिए) कमरें कस लो और ख़ुदा ही से डरो ताकि तुम अपनी दिली मुराद पाओ (200)

(ऐ रसूल) इनको वह वक़्त तो याद दिलाओ

Written By आपका अख्तर खान अकेला on बुधवार, 29 मई 2019 | 6:14 am

जो लोग (यहूद) ये कहते हैं कि ख़ुदा तो कंगाल है और हम बड़े मालदार हैं ख़ुदा ने उनकी ये बकवास सुनी उन लोगों ने जो कुछ किया उसको और उनका पैग़म्बरों को नाहक़ क़त्ल करना हम अभी से लिख लेते हैं और (आज तो जो जी में कहें मगर क़यामत के दिन) हम कहेंगे कि अच्छा तो लो (अपनी शरारत के एवज़ में) जलाने वाले अज़ाब का मज़ा चखो ((181)
ये उन्हीं कामों का बदला है जिनको तुम्हारे हाथों ने (ज़ादे आख़ेरत बना कर) पहले से भेजा है वरना ख़ुदा तो कभी अपने बन्दों पर ज़ुल्म करने वाला नहीं (182)
(यह वही लोग हैं) जो कहते हैं कि ख़ुदा ने तो हमसे वायदा किया है कि जब तक कोई रसूल हमें ये (मौजिज़ा) न दिखा दे कि वह कुरबानी करे और उसको (आसमानी) आग आकर चट कर जाए उस वक़्त तक हम ईमान न लाएंगें (ऐ रसूल) तुम कह दो कि (भला) ये तो बताओ बहुतेरे पैग़म्बर मुझसे क़ब्ल तुम्हारे पास वाजे़ व रौशन मौजिज़ात और जिस चीज़ की तुमने (उस वक़्त) फ़रमाइश की है (वह भी) लेकर आए फिर तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो तुमने उन्हें क्यों क़त्ल किया (183)
(ऐ रसूल) अगर वह इस पर भी तुम्हें झुठलाएं तो (तुम आज़ुर्दा न हो क्योंकि) तुमसे पहले भी बहुत से पैग़म्बर रौशन मौजिज़े और सहीफे़ और नूरानी किताब लेकर आ चुके हैं (मगर) फिर भी लोगों ने आखि़र झुठला ही छोड़ा (184)
हर जान एक न एक (दिन) मौत का मज़ा चखेगी और तुम लोग क़यामत के दिन (अपने किए का) पूरा पूरा बदला भर पाओगे बस जो शख़्स जहन्नुम से हटा दिया गया और बहिश्त में पहुचा दिया गया बस वही कामयाब हुआ और दुनिया की (चन्द रोज़ा) जि़न्दगी धोखे की टट्टी के सिवा कुछ नहीं (185)
(मुसलमानों) तुम्हारे मालों और जानों का तुमसे ज़रूर इम्तेहान लिया जाएगा और जिन लोगो को तुम से पहले किताबे ख़ुदा दी जा चुकी है (यहूद व नसारा) उनसे और मुशरेकीन से बहुत ही दुख दर्द की बातें तुम्हें ज़रूर सुननी पड़ेंगी और अगर तुम (उन मुसीबतों को) झेल जाओगे और परहेज़गारी करते रहोगे तो बेशक ये बड़ी हिम्मत का काम है (186)
और (ऐ रसूल) इनको वह वक़्त तो याद दिलाओ जब ख़ुदा ने एहले किताब से एहद व पैमान लिया था कि तुम किताबे ख़ुदा को साफ़ साफ़ बयान कर देना और (ख़बरदार) उसकी कोई बात छुपाना नहीं मगर इन लोगों ने (ज़रा भी ख़्याल न किया) और उनको बसे पुश्त फेंक दिया और उसके बदले में (बस) थोड़ी सी क़ीमत हासिल कर ली बस ये क्या ही बुरा (सौदा) है जो ये लोग ख़रीद रहे हैं (187)
(ऐ रसूल) तुम उन्हें ख़्याल में भी न लाना जो अपनी कारस्तानी पर इतराए जाते हैं और किया कराया ख़ाक नहीं (मगर) तारीफ़ के ख़ास्तगार {चाहते} हैं बस तुम हरगिज़ ये ख़्याल न करना कि इनको अज़ाब से छुटकारा है बल्कि उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है (188)
और आसमान व ज़मीन सब ख़ुदा ही का मुल्क है और ख़ुदा ही हर चीज़ पर क़ादिर है (189)
इसमें तो शक ही नहीं कि आसमानों और ज़मीन की पैदाइश और रात दिन के फेर बदल में अक़्लमन्दों के लिए (क़ुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानिया हैं (190)

और (ऐ रसूल) इनको वह वक़्त तो याद दिलाओ

Written By आपका अख्तर खान अकेला on मंगलवार, 28 मई 2019 | 6:47 am

जो लोग (यहूद) ये कहते हैं कि ख़ुदा तो कंगाल है और हम बड़े मालदार हैं ख़ुदा ने उनकी ये बकवास सुनी उन लोगों ने जो कुछ किया उसको और उनका पैग़म्बरों को नाहक़ क़त्ल करना हम अभी से लिख लेते हैं और (आज तो जो जी में कहें मगर क़यामत के दिन) हम कहेंगे कि अच्छा तो लो (अपनी शरारत के एवज़ में) जलाने वाले अज़ाब का मज़ा चखो ((181)
ये उन्हीं कामों का बदला है जिनको तुम्हारे हाथों ने (ज़ादे आख़ेरत बना कर) पहले से भेजा है वरना ख़ुदा तो कभी अपने बन्दों पर ज़ुल्म करने वाला नहीं (182)
(यह वही लोग हैं) जो कहते हैं कि ख़ुदा ने तो हमसे वायदा किया है कि जब तक कोई रसूल हमें ये (मौजिज़ा) न दिखा दे कि वह कुरबानी करे और उसको (आसमानी) आग आकर चट कर जाए उस वक़्त तक हम ईमान न लाएंगें (ऐ रसूल) तुम कह दो कि (भला) ये तो बताओ बहुतेरे पैग़म्बर मुझसे क़ब्ल तुम्हारे पास वाजे़ व रौशन मौजिज़ात और जिस चीज़ की तुमने (उस वक़्त) फ़रमाइश की है (वह भी) लेकर आए फिर तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो तुमने उन्हें क्यों क़त्ल किया (183)
(ऐ रसूल) अगर वह इस पर भी तुम्हें झुठलाएं तो (तुम आज़ुर्दा न हो क्योंकि) तुमसे पहले भी बहुत से पैग़म्बर रौशन मौजिज़े और सहीफे़ और नूरानी किताब लेकर आ चुके हैं (मगर) फिर भी लोगों ने आखि़र झुठला ही छोड़ा (184)
हर जान एक न एक (दिन) मौत का मज़ा चखेगी और तुम लोग क़यामत के दिन (अपने किए का) पूरा पूरा बदला भर पाओगे बस जो शख़्स जहन्नुम से हटा दिया गया और बहिश्त में पहुचा दिया गया बस वही कामयाब हुआ और दुनिया की (चन्द रोज़ा) जि़न्दगी धोखे की टट्टी के सिवा कुछ नहीं (185)
(मुसलमानों) तुम्हारे मालों और जानों का तुमसे ज़रूर इम्तेहान लिया जाएगा और जिन लोगो को तुम से पहले किताबे ख़ुदा दी जा चुकी है (यहूद व नसारा) उनसे और मुशरेकीन से बहुत ही दुख दर्द की बातें तुम्हें ज़रूर सुननी पड़ेंगी और अगर तुम (उन मुसीबतों को) झेल जाओगे और परहेज़गारी करते रहोगे तो बेशक ये बड़ी हिम्मत का काम है (186)
और (ऐ रसूल) इनको वह वक़्त तो याद दिलाओ जब ख़ुदा ने एहले किताब से एहद व पैमान लिया था कि तुम किताबे ख़ुदा को साफ़ साफ़ बयान कर देना और (ख़बरदार) उसकी कोई बात छुपाना नहीं मगर इन लोगों ने (ज़रा भी ख़्याल न किया) और उनको बसे पुश्त फेंक दिया और उसके बदले में (बस) थोड़ी सी क़ीमत हासिल कर ली बस ये क्या ही बुरा (सौदा) है जो ये लोग ख़रीद रहे हैं (187)
(ऐ रसूल) तुम उन्हें ख़्याल में भी न लाना जो अपनी कारस्तानी पर इतराए जाते हैं और किया कराया ख़ाक नहीं (मगर) तारीफ़ के ख़ास्तगार {चाहते} हैं बस तुम हरगिज़ ये ख़्याल न करना कि इनको अज़ाब से छुटकारा है बल्कि उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है (188)
और आसमान व ज़मीन सब ख़ुदा ही का मुल्क है और ख़ुदा ही हर चीज़ पर क़ादिर है (189)
इसमें तो शक ही नहीं कि आसमानों और ज़मीन की पैदाइश और रात दिन के फेर बदल में अक़्लमन्दों के लिए (क़ुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानिया हैं (190)

साथ देते ये लोग उस दिन बनिस्बते ईमान के कुफ्र के ज़्यादा क़रीब थे

Written By आपका अख्तर खान अकेला on सोमवार, 27 मई 2019 | 6:35 am

और (तुम्हारा गुमान बिल्कुल ग़लत है) किसी नबी की (हरगिज़) ये शान नहीं कि ख़्यानत करे और ख़्यानत करेगा तो जो चीज़ ख़्यानत की है क़यामत के दिन वही चीज़ (बिलकुल वैसा ही) ख़ुदा के सामने लाना होगा फिर हर शख़्स अपने किए का पूरा पूरा बदला पाएगा और उनकी किसी तरह हक़तल्फ़ी नहीं की जाएगी (161)
भला जो शख़्स ख़ुदा की ख़ुशनूदी का पाबन्द हो क्या वह उस शख़्स के बराबर हो सकता है जो ख़ुदा के गज़ब में गिरफ़्तार हो और जिसका ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या बुरा ठिकाना है (162)
वह लोग खुदा के यहाँ मुख़्तलिफ़ दरजों के हैं और जो कुछ वह करते हैं ख़ुदा देख रहा है (163)
ख़ुदा ने तो ईमानदारों पर बड़ा एहसान किया कि उनके वास्ते उन्हीं की क़ौम का एक रसूल भेजा जो उन्हें खुदा की आयतें पढ़ पढ़ के सुनाता है और उनकी तबीयत को पाकीज़ा करता है और उन्हें किताबे (ख़ुदा) और अक़्ल की बातें सिखाता है अगरचे वह पहले खुली हुयी गुमराही में पडे़ थे (164)
मुसलमानों क्या जब तुमपर (जंगे ओहद) में वह मुसीबत पड़ी जिसकी दूनी मुसीबत तुम (कुफ़्फ़ार पर) डाल चुके थे तो (घबरा के) कहने लगे ये (आफ़त) क़हाँ से आ गयी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ये तो खुद तुम्हारी ही तरफ़ से है (न रसूल की मुख़ालेफ़त करते न सज़ा होती) बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (165)
और जिस दिन दो जमाअतें आपस में गुंथ गयीं उस दिन तुम पर जो मुसीबत पड़ी वह तुम्हारी शरारत की वजह से (ख़ुदा की इजाजत की वजह से आयी) और ताकि ख़ुदा सच्चे ईमान वालों को देख ले (166)
और मुनाफि़क़ों को देख ले (कि कौन है) और मुनाफि़क़ों से कहा गया कि आओ ख़ुदा की राह में जेहाद करो या (ये न सही अपने दुशमन को) हटा दो तो कहने लगे (हाए क्या कहीं) अगर हम लड़ना जानते तो ज़रूर तुम्हारा साथ देते ये लोग उस दिन बनिस्बते ईमान के कुफ्र के ज़्यादा क़रीब थे अपने मुँह से वह बातें कह देते हैं जो उनके दिल में (ख़ाक) नहीं होतीं और जिसे वह छिपाते हैं ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है (167)
(ये वही लोग हैं) जो (आप चैन से घरों में बैठे रहते है और अपने शहीद) भाईयों के बारे में कहने लगे काश हमारी पैरवी करते तो न मारे जाते (ऐ रसूल) उनसे कहो (अच्छा) अगर तुम सच्चे हो तो ज़रा अपनी जान से मौत को टाल दो (168)
और जो लोग ख़ुदा की राह में शहीद किए गए उन्हें हरगिज़ मुर्दा न समझना बल्कि वह लोग जीते जागते मौजूद हैं अपने परवरदिगार की तरफ़ से वह (तरह तरह की) रोज़ी पाते हैं (169)
और ख़ुदा ने जो फ़ज़ल व करम उन पर किया है उसकी (ख़ुशी) से फूले नहीं समाते और जो लोग उनसे पीछे रह गए और उनमें आकर शामिल नहीं हुए उनकी निस्बत ये (ख़्याल करके) ख़ुशियां मनाते हैं कि (ये भी शहीद हों तो) उनपर न किसी कि़स्म का ख़ौफ़ होगा और न आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे (170)

तात्कालिक रूप से चाहे यह देश ,,छद्म राष्ट्रभक्तों , ओरिजनल राष्ट्रभक्तों में बंट गया हो

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 26 मई 2019 | 6:42 am

तात्कालिक रूप से चाहे यह देश ,,छद्म राष्ट्रभक्तों , ओरिजनल राष्ट्रभक्तों में बंट गया हो ,,लेकिन मुझे गर्व है ,मेरे इस भारत महान पर ,भारतियों की महानता पर ,,वोह इस खाई को पाट कर बहुत जल्द नक़ली राष्ट्रभक्तों को फिर से ओरिजनल राष्ट्रभक्त बना ,,देंगे सत्ताये आना ,जाना अलग बात है सत्ता के लिए ,सियासत में किया गिरावट आयी है ,,यह आपने भी देखा है ,मेने भी देखा है ,लेकिन एक ओरिजनल हिन्दुस्तान एक प्यार ,मोहब्बत ,भाईचारा ,सद्भावना वाला हिंदुस्तान ,एक दूसरे को मोहब्ब्बत से गले लगाने वाला हिंदुस्तान ,,छद्म लोकतंत्र से अलग हठ कर एक दूसरे को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देने वाला ओरिजनल हिन्दुस्तान को मेरा सलाम ,मेरा सेल्यूट ,इस जज़्बे ने निराशावाद को खत्म कर आशावाद को बढ़ावा दिया है ,विश्व पटल पर हिदुस्तान मज़बूत से भी मज़बूत आदर्श देश होगा ,इस हक़ीक़त की तरफ एक विचार को ज़िंदा किया है ,दोस्तों आपने मेने ,सभी ने इन पांच सालों में प्यार भी देखा है ,,मोहब्बत भी देखी है ,,लेकिन इस देश में हमेशा अपराध पर इन्साफ ही भारी पढ़ा यही ,,नफरत पर मोहब्बत ने ही जीत हांसिल की है ,,यही वजह है के नफरत की लेखनी लिखने वाले ,,नफरत की भाषा में बेहूदा टिप्पणीकार तन्खा पर काम करने वाले मेरे कई साथी भी बदलकर मेरे साथ मोहब्बत के पैगाम में जुड़ गए है ,कुछ है जो अभी बदले नहीं ,लेकिन अंदर से अंर्तात्मा से वोह मोहब्बत का पैगाम ही इस देश का असली पैगाम है यह कड़वा समझते है ,महसूस करते है ,इंशा अल्लाह मेरी कोशिश जारी है वोह एक दिन ज़रूर बदल कर मोहब्बत के पैगाम के साथ सुर में सुर मिलाएंगे ,,नहीं भी मिलाये तो में उन्हें मोहब्बत के पैगाम की तरफ उनका रुख बदलने की कोशिशों में जुटा रहूँगा ,दोस्तों पिछले दिनों की कुछ घटनाये ऐसी ,हुई ,के भारत के डी ऍन ऐ में जो लोग हिन्दु मुस्लिम की नफरत भरना चाहते थे ,उन्ही लोगों की इन घटंनाओं से आँखे खुली और वोह मोहब्बत का पैगाम ही असली पैगाम ,न हिन्दू न मुसलमान के नारे के साथ सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे ,,,एक घटना ,एक ऑटो चालक रोज़ेदार ने हिन्दू बहन सवारी को बिठाया ,उसका डेढ़ लाख रूपये से भरा बेग ऑटो में ही छूट गया ,,हिन्दू बहन तिनका तिनका जोड़कर जमा इस राशि को पागलों की तरह से तलाशती रही ,लेकिन अचानक एक टोपी पहने रोज़ेदार ,ऑटो से उतरता है ,दीदी यह आपका बेग ,चेक कर लीजिये सामान तो पूरा है ,दीदी नॉट चेक करती है पुरे गिनती है ,,अपनी मेहनत की कमाई इस कलियुग में वापस लौटाए जाने वाले का धर्म देखे बगैर उसे सीने से लगाकर आशीर्वाद देती है ,माला पहना कर इस्तक़बाल करती है ,एक बढ़ी बहन बहकर बेशुमार खुशियों की दुआएं देती है ,एक आसाम की कर्फ्यू घटना ,,एक महिला प्रसव पीढ़ा से ग्रसित उसकी जान पर बन रही है ,सभी हिन्दू समाज के लोग ,फसादात ,हिंसा ,कर्फ्यू के हालात में खामोश है ,बेबस है ,लेकिन एक मुस्लिम रोज़ेदार अचानक ऑटो निकालता है ,हिन्दू बहन को बिठाता है ,हिंसा भरे माहौल में पुलिस कर्फ्यू को तोड़ते हुए उस महिला को लेकर सीधे अस्पताल भागता है ,भीड़ के हमले से उसे बचाकर अस्पताल ले जाता है ,और वोह हिन्दू बहन उसका परिवार इस कमालुद्दीन को गले लगाकर भाईजान आपका शुक्रिया कहकर इस मेरे भारत को महान बना देते है ,,एक मुस्लिम समाज नमाज़ पढ़ना चाहता है ,नमाज़ के लिए जगह नहीं है ,,लेकिन मेरे हिन्दू भाई अपने घरों में ,अपने मंदिर के अहाते में ,इबादत ,इबादत में कोई फ़र्क़ नहीं का नारा बुलंद कर ,मुस्लिम भाइयों को नमाज़ पढ़वाते है ,,यह कोई छोटी बढ़ी घटनाये नहीं है ,मेरे इस देश में ऐसे प्यार मोहब्बत ,मदद के क़िस्से रोज़ हज़ारों हज़ार होते है ,हिन्दू भाई मुस्लिम बहनों की रक्षा करते है ,तो मुस्लिम भाई हिन्दू बहनों के भाई का पूरा धर्म निभाते है ,,एक दूसरे के त्योहारों में ,सुख दुःख में रोज़ शामिल होकर नफरत बाज़ों के मुंह पर रोज़ करारा तमाचा जड़ते है ,दोस्तों मेने ऑटो चालक की तस्वीर सोशल मीडिया पर वाइरल की ,हज़ारों हज़ार लोगों ने लाइक किया ,एक हज़ार के लगभग लोगों ने इसे शेयर किया ,हज़ार के लगभग लोगों ने तरह तरह के मोहब्बत के पैगाम की शाबाशी वाली टिप्पणियां की ,,कुछ नफरतबाज़ जो दिल से नहीं सिर्फ वेतन के लिए काम करते है ,किसी भी ट्वीट को पकड़कर उसके खिलाफ उन्हें सिर्फ अमर्यादित टिप्पणी करने के लिए रुपया मिलता है ,वोह बेचारे अलबत्ता उनके नियोक्ता के कारण टिपणी नहीं कर सके लेकिन मुझे यक़ीन है मेरे वोह भाई भी ऐसा ही हिंदुस्तान चाहते है इस घटना पर वोह भी दिल से टिप्पणी करना चाहते थे ,लेकिन मजबूरीवश उन्होंने ऐसा नहीं किया ,फिर भी उनके अंदर के जज़्बे को में पहचान सकता हूँ वोह जब भी तनख्वाह की टिप्पणी का लालच मोहभंग करेंगे ,इंशा अल्लाह अपने मोहब्बत के पैगाम के सुर में सुर मिलाकर बात करेंगे ,राजनैतिक टिप्पणियों का जवाब नफरत से देना ऐसे सभी लोगों का फ़र्ज़ हो सकता है ,,लेकिन मोहब्बत के पैगाम को तो स्वीकार करना ही चाहिए बिना किसी टिका टिप्पणी के और अगर फिर भी कोई चाहे में रहूँ ,या कोई और तो वोह फिर खुद का ,कांग्रेस का ,भाजपा का किसी भी सियासी दल का ,हिन्दू ,,या मुसलमान ,या किसी भी धर्म का तो क्या भारतीय भी नहीं हो सकता ,,तो जनाब प्लीज़ मान जाइये ना ,,मान जाइये ना ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

तुम (सा) नरमदिल (सरदार) उनको मिला

(तुम घबराओ नहीं) हम अनक़रीब तुम्हारा रोब काफि़रों के दिलों में जमा देंगे इसलिए कि उन लोगों ने ख़ुदा का शरीक बनाया (भी तो) उस चीज़ बुत को जिसे ख़ुदा ने किसी कि़स्म की हुकूमत नहीं दी और (आखि़रकार) उनका ठिकाना दोज़ख़ है और ज़ालिमों का (भी क्या) बुरा ठिकाना है (151)
बेशक खुदा ने (जंगे ओहद में भी) अपना (फतेह का) वायदा सच्चा कर दिखाया था जब तुम उसके हुक्म से (पहले ही हमले में) उन (कुफ़्फ़ार) को खू़ब क़त्ल कर रहे थे यहाँ तक की तुम्हारे पसन्द की चीज़ (फ़तेह) तुम्हें दिखा दी इसके बाद भी तुमने (माले ग़नीमत देखकर) बुज़दिलापन किया और हुक्में रसूल (स०) (मोर्चे पर जमे रहने) में झगड़ा किया और रसूल की नाफ़रमानी की तुममें से कुछ तो तालिबे दुनिया हैं (कि माले ग़नीमत की तरफ़) से झुक पड़े और कुछ तालिबे आखेरत (कि रसूल पर अपनी जान फि़दा कर दी) फिर (बुज़दिलेपन ने) तुम्हें उन (कुफ़्फ़ार) की की तरफ से फेर दिया (और तुम भाग खड़े हुए) उससे ख़ुदा को तुम्हारा (इमान अख़लासी) आज़माना मंज़ूर था और (इसपर भी) ख़ुदा ने तुमसे दरगुज़र की और खुदा मोमिनीन पर बड़ा फ़ज़ल करने वाला है (152)
(मुसलमानों तुम) उस वक़्त को याद करके शर्माओ जब तुम (बदहवास) भागे पहाड़ पर चले जाते थे और बावजूद दस रसूल (स०) तुम्हारे खुलूस (खड़े) तुमको बुला रहे थे, मगर तुम (जान के डर से) किसी को मुड़ के भी न देखते थे बस (चूकि) रसूल को तुमने (आज़ारदा) किया ख़ुदा ने भी तुमको (उस) रंज की सज़ा में (शिकस्त का) रंज दिया ताकि जब कभी तुम्हारी कोई चीज़ हाथ से जाती रहे या कोई मुसीबत पड़े तो तुम रंज न करो और सब्र करना सीखो और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे ख़बरदार है (153)
फिर ख़ुदा ने इस रंज के बाद तुमपर इत्मिनान की हालत तारी की कि तुममें से एक गिरोह का (जो सच्चे ईमानदार थे) ख़ूब गहरी नींद आ गयी और एक गिरोह जिनको उस वक्त भी (भागने की शर्म से) जान के लाले पड़े थे ख़ुदा के साथ (ख़्वाह मख़्वाह) ज़मानाए जिहालत की ऐसी बदगुमानिया करने लगे और कहने लगे भला क्या ये अम्र (फ़तेह) कुछ भी हमारे इखि़्तयार में है (ऐ रसूल) कह दो कि हर अम्र का इखि़्तयार ख़ुदा ही को है (ज़बान से तो कहते ही है नहीं) ये अपने दिलों में ऐसी बातें छिपाए हुए हैं जो तुमसे ज़ाहिर नहीं करते (अब सुनो) कहते हैं कि इस अम्र (फ़तेह) में हमारा कुछ इखि़्तायार होता तो हम यहाँ मारे न जाते (ऐ रसूल इनसे) कह दो कि तुम अपने घरों में रहते तो जिन जिन की तकदीर में लड़ के मर जाना लिखा था वह अपने (घरों से) निकल निकल के अपने मरने की जगह ज़रूर आ जाते और (ये इस वास्ते किया गया) ताकि जो कुछ तुम्हारे दिल में है उसका इम्तिहान कर दे और ख़ुदा तो दिलों के राज़ खू़ब जानता है (154)
बेशक जिस दिन (जंगे औहद में) दो जमाअतें आपस में गुथ गयीं उस दिन जो लोग तुम (मुसलमानों) में से भाग खड़े हुए (उसकी वजह ये थी कि) उनके बाज़ गुनाहों (मुख़ालफ़ते रसूल) की वजह से शैतान ने बहका के उनके पाँव उखाड़ दिए और (उसी वक़्त तो) ख़ुदा ने ज़रूर उनसे दरगुज़र की बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला बुर्दवार है (155)
ऐ ईमानदारों उन लोगों के ऐसे न बनो जो काफि़र हो गए भाई बन्द उनके परदेस में निकले हैं या जेहाद करने गए हैं (और वहाँ) मर (गए) तो उनके बारे में कहने लगे कि वह हमारे पास रहते तो न मरते ओर न मारे जाते (और ये इस वजह से कहते हैं) ताकि ख़ुदा (इस ख़्याल को) उनके दिलों में (बाइसे) हसरत बना दे और (यू तो) ख़ुदा ही जिलाता और मारता है और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उसे देख रहा है (156)
और अगर तुम ख़ुदा की राह में मारे जाओ या (अपनी मौत से) मर जाओ तो बेशक ख़ुदा की बख़शश और रहमत इस (माल व दौलत) से जिसको तुम जमा करते हो ज़रूर बेहतर है (157)
और अगर तुम (अपनी मौत से) मरो या मारे जाओ (आखि़रकार) ख़ुदा ही की तरफ़ (क़ब्रों से) उठाए जाओगे (158)
(तो ऐ रसूल ये भी) ख़ुदा की एक मेहरबानी है कि तुम (सा) नरमदिल (सरदार) उनको मिला और तुम अगर बदमिज़ाज और सख़्त दिल होते तब तो ये लोग (ख़ुदा जाने कब के) तुम्हारे गिर्द से तितर बितर हो गए होते बस (अब भी) तुम उनसे दरगुज़र करो और उनके लिए मग़फे़रत की दुआ मांगों और (साबिक़ दस्तूरे ज़ाहिरा) उनसे काम काज में मशवरा कर लिया करो (मगर) इस पर भी जब किसी काम को ठान लो तो ख़ुदा ही पर भरोसा रखो (क्योंकि जो लोग ख़ुदा पर भरोसा रखते हैं ख़ुदा उनको ज़रूर दोस्त रखता है (159)
(मुसलमानों याद रखो) अगर ख़ुदा ने तुम्हारी मदद की तो फिर कोई तुमपर ग़ालिब नहीं आ सकता और अगर ख़ुदा तुमको छोड़ दे तो फिर कौन ऐसा है जो उसके बाद तुम्हारी मदद को खड़ा हो और मोमिनीन को चाहिये कि ख़ुदा ही पर भरोसा रखें (160)

और (मुसलमानों तुम ही नहीं) ऐसे पैग़म्बर बहुत से गुज़र चुके

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शनिवार, 25 मई 2019 | 7:16 am

और ये (भी मंजू़र था) कि सच्चे ईमानदारों को (साबित क़दमी की वजह से) निरा खरा अलग कर ले और नाफ़रमानों (भागने वालों) को मटियामेट कर दे (141)
(मुसलमानों) क्या तुम ये समझते हो कि सब के सब बहिश्त में चले ही जाओगे और क्या ख़ुदा ने अभी तक तुममें से उन लोगों को भी नहीं पहचाना जिन्होंने जेहाद किया और न साबित क़दम रहने वालों को ही पहचाना (142)
तुम तो मौत के आने से पहले (लड़ाई में) मरने की तमन्ना करते थे बस अब तुमने उसको अपन आख से देख लिया और तुम अब भी देख रहे हो (143)
(फिर लड़ाई से जी क्यों चुराते हो) और मोहम्मद (स०) तो सिर्फ रसूल हैं (ख़ुदा नहीं) इनसे पहले बहुतेरे पैग़म्बर गुज़र चुके हैं फिर क्या अगर मोहम्मद अपनी मौत से मर जाए या मार डाले जाए तो तुम उलटे पाँव (अपने कुफ्रकी तरफ़) पलट जाओगे और जो उलटे पाव फिरेगा (भी) तो (समझ लो) हरगिज़ ख़ुदा का कुछ भी नहीं बिगड़ेगा और अनक़रीब ख़ुदा का शुक्र करने वालों को अच्छा बदला देगा (144)
और बगै़र हुक्मे ख़ुदा के तो कोई शख़्स मर ही नहीं सकता वक़्ते मुअय्यन तक हर एक की मौत लिखी हुयी है और जो शख़्स (अपने किए का) बदला दुनिया में चाहे तो हम उसको इसमें से दे देते हैं और जो शख़्स आख़ेरत का बदला चाहे उसे उसी में से देंगे और (नेअमत ईमान के) शुक्र करने वालों को बहुत जल्द हम जज़ाए खै़र देंगे (145)
और (मुसलमानों तुम ही नहीं) ऐसे पैग़म्बर बहुत से गुज़र चुके हैं जिनके साथ बहुतेरे अल्लाह वालों ने (राहे खुदा में) जेहाद किया और फिर उनको ख़ुदा की राह में जो मुसीबत पड़ी है न तो उन्होंने हिम्मत हारी न बोदापन किया (और न दुशमन के सामने) गिड़गिड़ाने लगे और साबित क़दम रहने वालों से ख़ुदा उलफ़त रखता है (146)
और लुत्फ़ ये है कि उनका क़ौल इसके सिवा कुछ न था कि दुआए मांगने लगें कि ऐ हमारे पालने वाले हमारे गुनाह और अपने कामों में हमारी ज़्यादतिया माफ़ कर और दुश्मनों के मुक़ाबले में हमको साबित क़दम रख और काफि़रों के गिरोह पर हमको फ़तेह दे (147)
तो ख़ुदा ने उनको दुनिया में बदला (दिया) और आखि़रत में अच्छा बदला ईनायत फ़रमाया और ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता (ही) है (148)
ऐ ईमानदारों अगर तुम लोगों ने काफि़रों की पैरवी कर ली तो (याद रखो) वह तुमको उलटे पाव (कुफ्रकी तरफ़) फेर कर ले जाऐंगे फिर उलटे तुम ही घाटे मेंआ जाओगे (149)
(तुम किसी की मदद के मोहताज नहीं) बल्कि ख़ुदा तुम्हारा सरपरस्त है और वह सब मददगारों से बेहतर है (150)

स्वाभिमान ,सरंक्षण ,रोज़गार ,भूख ,गरीबी ,इन्साफ के लिए कांग्रेस ज़िम्मेदारी से लड़ेगी

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शुक्रवार, 24 मई 2019 | 6:42 am

दोस्तों विश्व के सबसे बढे लोकतंत्र के चुनाव नतीजे सामने है ,,नरेंद्र मोदी तो जीते है ,लेकिन भाजपा हारी है ,लेकिन जो जीता सिकंदर वही कहलाता है ,इसमें कोई शक नहीं के नरेंद्र मोदी ने चुनाव में जीत दर्ज कर खुद को सिकंदर साबित किया है ,उन्हें बधाई ,मुबारकबाद ,लेकिन इस चुनाव में नरेंद्र मोदी चाहे जीत कर सिकंदर बने हो ,लेकिन राहुल गांधी खुद मर्यादाओं में रहकर कांटे की टक्कर देने वाले क़लन्दर साबित हुए है ,चुनाव में हार जीत होती है ,,लेकिन जो जीतता है उसका दिल भी बढ़ा होना चाहिए ,,वर्ष 2014 में भाजपा अटूट बहुमत से जीती ,कई वायदे थे ,कई जुमले थे ,आम जनता को रोज़ी ,रोटी,, कपड़ा ,मकान ,,मुफ्त चिकित्सा ,मुफ्त शिक्षा ,सुरक्षा ,आंतरिक सुरक्षा की उम्मीदें थी ,रोज़गार की उम्मीदें थी ,लेकिन यह सब एक सपना बनकर रह गया ,जनता को मिली मोबलीचिंग ,,जनता को मिली नॉट बंदी ,जनता को मिली पकोड़े तल कर बेरोज़गारी दूर करने की सलाह ,जनता को मिली सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस ,जनता को मिला रिज़र्व बैंक गवर्नर का विवाद ,सीबी आई नियुक्ति का विवाद ,,जनता को मिला गाँधी के हत्यारे की वाहवाही के बयांन ,जनता को लोकपाल पुरे पांच साल नहीं आखरी लम्हों में सुप्रीमकोर्ट की कई फटकारों के बाद लोकपाल मिला ,जनता को बदले की भावना मिली ,,भाषण ,सिर्फ भाषण मिले ,मर्यादाये टूट कर तार तार होती बयानबाजियां मिली ,जो भी हुआ सब देखा ,लेकिन फिर दुबारा चुनाव में इन सब के बावजूद भी जनता का जो इन्साफ हुआ वोह निश्चित ही स्वीकार्य होना चाहिए ,,जनता ने इन सब मुद्दों के बाद भी नरेंद्र मोदी को जिताया है ,अब उनसे इल्तिजा है ,जनता द्वारा दिए गए मेंडेट का वोह सम्मान करे ,,आम जनता को भूख ,करीबी ,रोज़गार ,मकान ,सस्ता सुलभ न्याय ,,आंतरिक सुरक्षा ,सद्भाव ,हर वर्ग की सरकार में भागीदारी ,,सरकारी विभागों में हर वर्ग की सुनवाई का आत्मविश्वास ,जनता को बदले की भावना नहीं मिले ,कोई सनकी आदेश जिससे पूरा देश त्राहि त्राहि पुकारे ऐसा को सनक भरा आदेश नहीं मिले ऐसी जनता की उम्मीद है ,जनता चाहती है देश का विकास हो ,देश प्यार से मोहब्बत से ,सद्भाव से रहे ,,देश की जनता की आज़ादी क़ानूनी दायरे में सुरक्षित हो ,,बस ऐसा कुछ हो जाए तो बात बन जाए ,,,कांग्रेस के राहुल गाँधी का सफर थका नहीं है ,अभी उन्होंने विकट परिस्थितयों में कढ़ा मुक़ाबला किया है ,,जनता का भरोसा जीता है ,,एक सफल चुनावी मैनेजमेंट हांसिल किया है ,जनता का विश्वास ,जनता का प्यार जीता है ,राफेल पर आदरणीय नरेंद्र मोदी साहिब को लगातार बहस के लिए खुली चुनौती दी ,लेकिन मोदी भागते रहे ,,राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस मज़बूत होकर उभरी है ,वोह बात और है गैर भाजपाई वोटों के बिखरजाने से नरेंद्र मोदी की टीम जीत गयी ,लेकिन अब लोकसभा में प्रतिपक्ष का नेता बनाना आदरणीय नरेंद्र मोदी की मजबूरी हो ,जायेगी और एक मज़बूत विपक्ष देश की एक सो पैतीस करोड़ लोगों के अधिकारों का संरक्षक होगा ,देश की जनता के अधिकारों के लिए ,देश की जनता के स्वाभिमान ,सरंक्षण ,रोज़गार ,भूख ,गरीबी ,इन्साफ के लिए कांग्रेस ज़िम्मेदारी से लड़ेगी ,,एक बार फिर कांग्रेस मज़बूत बनकर ,उभरेगी ,बस चुनाव में हारे ,है इसे हमे स्वीकारना होगा ,ई वी एम ,,चुनाव आयोग सभी तरह के मामलों को हमे ताक में रखना होंगे ,अंतर्मन को टटोलना होगा ,आंतरिक प्रबंधन में हम आम आदमी ,आम कार्यकर्ता ,बूथ पर बैठे कार्यकर्ताओं ,बूथ क्षेत्र में रह रहे आम लोगों तक अपनी पकड़ क्यों नहीं बना पाए ,,फिर से इस पकड़ को हम मज़बूत कैसे कर सकते है इस पर हमे पुनर्विचार करना होगा ,,,निश्चित तोर पर चुनाव में हारजीत होती है ,लेकिन हम होंगे कामयाब ,इस नारे के साथ हम आमजनता की सेवा के लक्ष्य के साथ जनता के बीच रहेंगे ,फिर से कामयाब होंगे ,अभी तो पंचायत ,नगर पालिका ,,जिलापरिषद के चुनाव है ,जहाँ हमे अपनी ज़िम्मेदारी दिखाकर खुद को ज़मीनी कार्यकर्ताओं ,,जनता के बीच स्थापित करने की कार्ययोजना तैयार करना है ,,,,,लोकतंत्र के प्रहरी के रूप में एक सच्चे सेवक की भूमिका निभाना होगी ,,लड़ाई झूंठ सच के बीच में है ,इन्साफ अत्याचार के बीच में है ,,मुश्किल ज़रूर है लेकिन यह लड़ाई ना मुमकिन नहीं ,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

ऐसे ही लोगों की जज़ा उनके परवरदिगार की तरफ़ से बख़शिश है

और जहन्नुम की उस आग से डरो जो काफि़रों के लिए तैयार की गयी है (131)
और ख़ुदा और रसूल की फ़रमाबरदारी करो ताकि तुम पर रहम किया जाए (132)
और अपने परवरदिगार के (सबब) बख़शिश और जन्नत की तरफ़ दौड़ पड़ो जिसकी (वुसअत सारे) आसमान और ज़मीन के बराबर है और जो परहेज़गारों के लिये मुहय्या की गयी है (133)
जो ख़ुशहाली और कठिन वक़्त में भी (ख़ुदा की राह पर) ख़र्च करते हैं और गुस्से को रोकते हैं और लोगों (की ख़ता) से दरगुज़र करते हैं और नेकी करने वालों से अल्लाह उलफ़त रखता है (134)
और लोग इत्तिफ़ाक़ से कोई बदकारी कर बैठते हैं या आप अपने ऊपर जु़ल्म करते हैं तो ख़ुदा को याद करते हैं और अपने गुनाहों की माफ़ी मांगते हैं और ख़ुदा के सिवा गुनाहों का बख़्शने वाला और कौन है और जो (क़ूसूर) वह (नागहानी) कर बैठे तो जानबूझ कर उसपर हट नहीं करते (135)
ऐसे ही लोगों की जज़ा उनके परवरदिगार की तरफ़ से बख़शिश है और वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं कि वह उनमे हमेशा रहेंगे और (अच्छे) चलन वालों की (भी) ख़ूब खरी मज़दूरी है (136)
तुमसे पहले बहुत से वाक़यात गुज़र चुके हैं बस ज़रा रूए ज़मीन पर चल फिर कर देखो तो कि (अपने अपने वक़्त के पैग़म्बरों को) झुठलाने वालों का अन्जाम क्या हुआ (137)
ये (जो हमने कहा) आम लोगों के लिए तो सिर्फ़ बयान (वाक़या) है मगर और परहेज़गारों के लिए हिदायत व नसीहत है (138)
और मुसलमानों काहिली न करो और (इस) इत्तफ़ाक़ी शिकस्त (ओहद से) कुढ़ो नहीं (क्योंकि) अगर तुम सच्चे मोमिन हो तो तुम ही ग़ालिब और वर रहोगे (139)
अगर (जंगे ओहद में) तुमको ज़ख़्म लगा है तो उसी तरह (बदर में) तुम्हारे फ़रीक़ (कुफ़्फ़ार को) भी ज़ख़्म लग चुका है (उस पर उनकी हिम्मत तो न टूटी) ये इत्तफ़ाक़ाते ज़माना हैं जो हम लोगों के दरमियान बारी बारी उलट फेर किया करते हैं और ये (इत्तफ़ाक़ी शिकस्त इसलिए थी) ताकि ख़ुदा सच्चे ईमानदारों को (ज़ाहिरी) मुसलमानों से अलग देख लें और तुममें से बाज़ को दरजाए शहादत पर फ़ायज़ करे और ख़ुदा (हुक्मे रसूल से) सरताबी करने वालों को दोस्त नहीं रखता (140)

अगर तुम साबित क़दम रहो

Written By आपका अख्तर खान अकेला on गुरुवार, 23 मई 2019 | 6:31 am

से दो गिरोहों ने ठान लिया था कि पसपाई करें और फिर (सॅभल गए) क्योंकि ख़ुदा तो उनका सरपरस्त था और मोमिनीन को ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिये (122)
यक़ीनन ख़ुदा ने जंगे बदर में तुम्हारी मदद की (बावजूद के) तुम (दुश्मन के मुक़ाबले में) बिल्कुल बे हक़ीक़त थे (फिर भी) ख़ुदा ने फतेह दी (123)
बस तुम ख़ुदा से डरते रहो ताकि (उनके) शुक्रगुज़ार बनो (ऐ रसूल) उस वक़्त तुम मोमिनीन से कह रहे थे कि क्या तुम्हारे लिए काफ़ी नहीं है कि तुम्हारा परवरदिगार तीन हज़ार फ़रिश्ते आसमान से भेजकर तुम्हारी मदद करे हाँ (ज़रूर काफ़ी है) (124)
बल्कि अगर तुम साबित क़दम रहो और (रसूल की मुख़ालेफ़त से) बचो और कुफ़्फ़ार अपने (जोश में) तुमपर चढ़ भी आये तो तुम्हारा परवरदिगार ऐसे पांचहज़ार फ़रिश्तों से तुम्हारी मदद करेगा जो निशाने जंग लगाए हुए डटे होंगे और ख़ुदा ने ये मदद सिर्फ़ तुम्हारी ख़ुशी के लिए की है (125)
और ताकि इससे तुम्हारे दिल की ढारस हो और (ये तो ज़ाहिर है कि) मदद जब होती है तो ख़ुदा ही की तरफ़ से जो सब पर ग़ालिब (और) हिकमत वाला है (126)
(और यह मदद की भी तो) इसलिए कि काफि़रों के एक गिरोह को कम कर दे या ऐसा चैपट कर दे कि (अपना सा) मुँह लेकर नामुराद अपने घर वापस चले जायें (127)
(ऐ रसूल) तुम्हारा तो इसमें कुछ बस नहीं चाहे ख़ुदा उनकी तौबा कु़बूल करे या उनको सज़ा दे क्योंकि वह ज़ालिम तो ज़रूर हैं (128)
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब ख़ुदा ही का है जिसको चाहे बख़्शे और जिसको चाहे सज़ा करे और ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (129)
ऐ ईमानदारों सूद दूनादून खाते न चले जाओ और ख़ुदा से डरो कि तुम छुटकारा पाओ (130)

यक़ीनन ख़ुदा ने जंगे बदर में तुम्हारी मदद की

Written By आपका अख्तर खान अकेला on बुधवार, 22 मई 2019 | 6:24 am

और (ऐ रसूल) एक वक़्त वो भी था जब तुम अपने बाल बच्चों से तड़के ही निकल खड़े हुए और मोमिनीन को लड़ाई के मोर्चों पर बिठा रहे थे और खुदा सब कुछ जानता औेर सुनता है (121)
ये उस वक़्त का वाक़या है जब तुममें से दो गिरोहों ने ठान लिया था कि पसपाई करें और फिर (सॅभल गए) क्योंकि ख़ुदा तो उनका सरपरस्त था और मोमिनीन को ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिये (122)
यक़ीनन ख़ुदा ने जंगे बदर में तुम्हारी मदद की (बावजूद के) तुम (दुश्मन के मुक़ाबले में) बिल्कुल बे हक़ीक़त थे (फिर भी) ख़ुदा ने फतेह दी (123)
बस तुम ख़ुदा से डरते रहो ताकि (उनके) शुक्रगुज़ार बनो (ऐ रसूल) उस वक़्त तुम मोमिनीन से कह रहे थे कि क्या तुम्हारे लिए काफ़ी नहीं है कि तुम्हारा परवरदिगार तीन हज़ार फ़रिश्ते आसमान से भेजकर तुम्हारी मदद करे हाँ (ज़रूर काफ़ी है) (124)
बल्कि अगर तुम साबित क़दम रहो और (रसूल की मुख़ालेफ़त से) बचो और कुफ़्फ़ार अपने (जोश में) तुमपर चढ़ भी आये तो तुम्हारा परवरदिगार ऐसे पांचहज़ार फ़रिश्तों से तुम्हारी मदद करेगा जो निशाने जंग लगाए हुए डटे होंगे और ख़ुदा ने ये मदद सिर्फ़ तुम्हारी ख़ुशी के लिए की है (125)
और ताकि इससे तुम्हारे दिल की ढारस हो और (ये तो ज़ाहिर है कि) मदद जब होती है तो ख़ुदा ही की तरफ़ से जो सब पर ग़ालिब (और) हिकमत वाला है (126)
(और यह मदद की भी तो) इसलिए कि काफि़रों के एक गिरोह को कम कर दे या ऐसा चैपट कर दे कि (अपना सा) मुँह लेकर नामुराद अपने घर वापस चले जायें (127)
(ऐ रसूल) तुम्हारा तो इसमें कुछ बस नहीं चाहे ख़ुदा उनकी तौबा कु़बूल करे या उनको सज़ा दे क्योंकि वह ज़ालिम तो ज़रूर हैं (128)
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब ख़ुदा ही का है जिसको चाहे बख़्शे और जिसको चाहे सज़ा करे और ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (129)
ऐ ईमानदारों सूद दूनादून खाते न चले जाओ और ख़ुदा से डरो कि तुम छुटकारा पाओ (130)

ऐ ईमानदारों अपने (मोमिनीन) के सिवा (गै़रो को) अपना राज़दार न बनाओ

Written By आपका अख्तर खान अकेला on मंगलवार, 21 मई 2019 | 8:52 pm

(मुसलमानों) ये लोग मामूली अज़ीयत के सिवा तुम्हें हरगिज़ ज़रर नही पहुचा सकते और अगर तुमसे लड़ेंगे तो उन्हें तुम्हारी तरफ़ पीठ ही करनी होगी और फिर उनकी कहीं से मदद भी नहीं पहुचेगी (111)
और जहाँ कहीं हत्ते चढ़े उनपर रूसवाई की मार पड़ी मगर ख़ुदा के अहद (या) और लोगों के अहद के ज़रिये से (उनको कहीं पनाह मिल गयी) और फिर हेरफेर के खुदा के गज़ब में पड़ गए और उनपर मोहताजी की मार (अलग) पड़ी ये (क्यों) इस सबब से कि वह ख़ुदा की आयतों से इन्कार करते थे और पैग़म्बरों को नाहक़ क़त्ल करते थे ये सज़ा उसकी है कि उन्होंने नाफ़रमानी की और हद से गुज़र गए थे (112)
और ये लोग भी सबके सब यकसा नहीं हैं (बल्कि) एहले किताब से कुछ लोग तो ऐसे हैं कि (ख़ुदा के दीन पर) इस तरह साबित क़दम हैं कि रातों को ख़ुदा की आयतें पढ़ा करते हैं और वह बराबर सजदे किया करते हैं (113)
खुदा और रोज़े आख़ेरत पर ईमान रखते हैं और अच्छे काम का तो हुक्म करते हैं और बुरे कामों से रोकते हैं और नेक कामों में दौड़ पड़ते हैं और यही लोग तो नेक बन्दों से हैं (114)
और वह जो कुछ नेकी करेंगे उसकी हरगिज़ नाक़द्री न की जाएगी और ख़ुदा परहेज़गारों से खू़ब वाकि़फ़ है (115)
बेशक जिन लोगों ने कुफ्रइख़्तेयार किया ख़ुदा (के अज़ाब) से बचाने में हरगिज़ न उनके माल ही कुछ काम आएंगे न उनकी औलाद और यही लोग जहन्नुमी हैं और हमेशा उसी में रहेंगे (116)
दुनिया की चन्द रोज़ा जि़न्दगी में ये लोग जो कुछ (खि़लाफ़े शरा) ख़र्च करते हैं उसकी मिसाल अन्धड़ की मिसाल है जिसमें बहुत पाला हो और वह उन लोगों के खेत पर जा पड़े जिन्होंने (कुफ्रकी वजह से) अपनी जानों पर सितम ढाया हो और फिर पाला उसे मार के (नास कर दे) और ख़ुदा ने उनपर जुल्म कुछ नहीं किया बल्कि उन्होंने आप अपने ऊपर जु़ल्म किया (117)
ऐ ईमानदारों अपने (मोमिनीन) के सिवा (गै़रो को) अपना राज़दार न बनाओ (क्योंकि) ये गै़र लोग तुम्हारी बरबादी में कुछ (कसर) उठा नहीं रखेंगे (बल्कि जितना ज़्यादा तकलीफ़) में पड़ोगे उतना ही ये लोग ख़ुश होंगे दुश्मनी तो उनके मुह से टपकती है और जो (बुग़ज़ व हसद) उनके दिलों में भरा है वह कहीं उससे बढ़कर है हमने तुमसे (अपने) एहकाम साफ़ साफ़ बयान कर दिये अगर तुम समझ रखते हो (118)
ऐ लोगों तुम ऐसे (सीधे) हो कि तुम उनसे उलफ़त रखतो हो और वह तुम्हें (ज़रा भी) नहीं चाहते और तुम तो पूरी किताब (ख़ुदा) पर ईमान रखते हो और वह ऐसे नहीं हैं (मगर) जब तुमसे मिलते हैं तो कहने लगते हैं कि हम भी ईमान लाए और जब अकेले में होते हैं तो तुम पर गुस्से के मारे उॅगलिया काटते हैं (ऐ रसूल) तुम कह दो कि (काटना क्या) तुम अपने गुस्से में जल मरो जो बातें तुम्हारे दिलों में हैं बेशक ख़ुदा ज़रूर जानता है (119)
(ऐ ईमानदारों) अगर तुमको भलाई छू भी गयी तो उनको बुरा मालूम होता है और जब तुमपर कोई भी मुसीबत पड़ती है तो वह ख़ुश हो जाते हैं और अगर तुम सब्र करो और परहेज़गारी इख़्तेयार करो तो उनका फ़रेब तुम्हें कुछ भी ज़रर नहीं पहुचाएगा (क्योंकि) ख़ुदा तो उनकी कारस्तानियों पर हावी है (120)

करनी कुछ ऐसी कर चलो ,के जग सारा रॉय

Written By आपका अख्तर खान अकेला on सोमवार, 20 मई 2019 | 7:08 am

करनी कुछ ऐसी कर चलो ,के जग सारा रॉय ,,जी हाँ दोस्तों कल कोटा का पत्रकार जगत ,समाजसेवी क्षेत्र सहित सभी वर्गों में पत्रकार श्याम दुबे के अचानक निधन हो जाने से शोक की लहर दोढ़ गयी ,,क़ुरआन का आदेश है ,कुल्लू नफ़्सूंन ज़ायकातुल मोत ,यानि हर इंसान को मोत का मज़ा चखना है ,भगवत गीता का फरमान है ,जो पैदा हुआ है उसे मरना निश्चित है ,यह कटु सत्य है ,फिर भी न जाने क्यों हम ,परस्पर एक दूसरे से नफरत पालते है ,विवादों में रहते है ,एक दूसरे को नीचा दिखाकर खुद दम्भी बन जाते है ,हमारी सभी की डोर ऊपर वाली अदृश्य शक्ति के हाथ में है न जाने डोर खिच जाए और हम एक बेजान शरीर बनकर मिटटी में मिल जाए ,,जी हाँ दोस्तों जीवन के हमारे कर्म ही है जो हमे याद रखने को मजबूर करते है ,,पत्रकार श्याम दूबे ,,बेहतरीन लेखक ,बहतरीन पत्रकार ,,बेहतरीन सम्पादक ,प्रकाशक तो थे ही ,लेकिन वोह एक ऐसी बेहतरीन शख्सियत ,अजात शत्रु थे ,,जिन्हे हर कोई शख्स प्यार सिर्फ प्यार करता था ,वोह हर दिल अज़ीज़ शख्सियत होने से ,,कोटा में भी लोकप्रिय थे ,तो जयपुर में भी लोगों की धड़कन बने हुए थे ,पत्रकारिता श्याम दूबे का निर्विवाद शोक रहा है ,,बनारस उत्तर प्रदेश में उनके वालिद दीनानाथ दूबे खुद क़लमकार थे बाद में दीनानाथ दूबे कोटा डी सी एम में कार्यरत रहकर उद्योग की प्रकाशित मैगज़ीन के सम्पादक रहे ,,,श्याम दूबे ,कोटा में दैनिक नवज्योति में पत्रकार बने ,,बेहतरीन लेखन ,खबर की पकड़ ,निष्पक्ष रिपोर्टिंग ,और सम्पादन प्रबंध में माहिर ,श्याम दूबे ,,विशिष्ठ परिस्थितियों में भी बेदाग़ छवि वाले पत्रकार रहे ,,उन्होंने कर्मचारियों का नेतृत्व भी किया ,,कोटा प्रेस क्लब सहित अन्य संस्थाओं से श्याम जी का सीधा जुड़ाव भी रहा ,लेकिन हर संस्था में वोह निर्विवाद साथी रहे ,,बिना किसी पक्षपात की खबरे डेस्क पर बैठकर चयनित करना इनका स्वभाव रहा ,इनके निजी विचार कुछ भी हों ,लेकिन लेखन और संपादन के दौरान यह अपने नीजि विचारों को किसी पर थोपते नहीं थे ,दूसरों की अभिव्यक्ति की आज़ादी की स्वतंत्रता को बनाये रखने की ज़िम्मेदारी के तहत यह सभी के विचारों को बिना किसी दुर्भावना के अपने सम्पादन में अहमियत्त देने के लिए मशहूर रहे थे ,,दो दशक पहले अलग अलग मैगज़ीन में खबरे लिखने के अलावा इनके वालिद दीना नाथ दूबे के साथ श्याम दूबे ने पहले प्रदेश स्तर पर तथ्य भारती नामक एक मैगज़ीन का प्रकाशन शुरू किया ,,फिर श्याम जी की मेहनत लगन से इस मैगज़ीन को राष्ट्रिय स्तर पर प्रकाशित कर देश के विशष्ठ ,लेखकों ,,चिंतकों ,विचारकों, पत्रकारों को जोड़कर श्याम जी ने पत्रकारिता का एक नया अनुभव तैयार किया ,, कोटा में लगातार पत्रकारों के प्रेस क्लब के चुनाव हुए ,,कोटा के अनेक पत्रकार आज भी उनके इशारों पर चलने वाली उनके चहेते साथी है कई लोगों ने कोटा प्रेसक्लब का प्रत्याक्षी बनकर उनके रिश्तों की दुहाई देकर ,,कोटा प्रेसक्लब में उनके चहेते साथियों से वोट डलवाने की मदद मांगी ,लेकिन वोह तो श्याम थे ,किसी एक के नहीं सभी के श्याम ,थे ,वोह न्यूट्रल रहे ,कोई पक्षपात किसी का समर्थन विरोध नहीं किया ,यही वजह रही के वोह कोटा के छोटे ,,मंझोले ,बढे समाचार पत्रों के पत्रकारों ,,,साप्तहिक ,पाक्षिक ,मासिक पत्र पत्रिकाओं से जुड़े पत्रकारों ,जनसम्पर्क विभाग से जुड़े सदस्यों के चहेते बने रहे ,,,श्रीमती वसुंधरा सिंधिया के मुख्यमंत्री कार्यकाल में श्याम दूबे ,उनकी प्रेस व्यवस्था टीम में अप्रत्यक्ष रूप से निकटतम हिस्सेदार थे ,लेकिन उन्होंने अपनी इस अहमियत का कभी दुरूपयोग नहीं किया ,मुख्यमंत्री कार्यालय में लगातार आने जाने ,,प्रभाव होने के बाद भी उन्होंने खुद को अलग थलग रखा ,वोह बात और है के कोटा के पत्रकार साथियों ,,उनके परिजनों ,,उनके कोटा के पुराने मित्र जनों के परिजनों से संबंधित कोई भी कार्य अगर हुआ तो उसके लिए श्याम जी ने निजी तोर पर संबंधित मंत्री ,अधिकारी से कहकर उनके काम अवश्य करवाए ,पत्रकारों के कल्याण ,उनकी बीमारी के वक़्त कल्याण कोष से मदद के वक़्त भी वोह सक्रिय रहे ,,यही वजह है के कोटा से दो दशक पूर्व ही जयपुर जाने के बाद भी उनका लगाव कोटा ,कोटा के निवासियों से बना रहा और इसीलिए उनके पार्थिव शरीर को कोटा में ही अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि के साथ ,,पंचतत्त्व में विलीन किया गया ,,बस अब कोटा के पत्रकारों के संगठनों ,कोटा के कथित वरिष्ठ कहे जाने वाले पत्रकार साथियों से यही इल्तिजा है ,ऐसी ,शख्सियत ,जिसने पत्रकारिता को जिया है ,जिसने पत्रकारिता के क्षेत्र में निष्पक्ष निर्भिक्ता निर्विवाददिता के लिए अनूठे आयाम ,अनूठे उदाहरण प्रस्तुत किये है ,ऐसे युवा हर दिल अज़ीज़ पत्रकार के असामयिक निधन के बाद ,उनकी जीवनी ,उनकी प्र्रेरणा को लेकर ,,कोटा के पत्रकार संगठनों के ज़रिये कोई प्रकाशन सामग्री बनवाये ,,हर साल कोई कार्यक्रम ,,विचारगोष्ठियाँ ,पत्रकार पुरस्कार योजनाओं का संचालन करवाए ,,उनकी पत्रकारिता के टिप्स ,,उनके स्वभाव ,सम्पादन में खबरों का निष्पक्ष चयन ,वैचारिक मतभेद होने पर भी ,पत्रकारिता के लेखन में निष्पक्षता का हुनर जो उनमे था उसे सभी को पढ़ाये ,यही कोटा के इस पत्र्कारिता के लाल के आसामयिक चले जाने के बाद भी उन्हें ज़िंदा रखने के लिए काफी होगा ,,महत्वपूर्ण बात यह है के सोशल मीडिया की सक्रियता के बावजूद भी इसमें ग्रॉस्पिंग ,विवाद ,नफरत की ज़्यादती होने के कारण श्याम जी सर्वसम्पन्न होने के बाद भी सोशल मीडिया के हिस्सेदार नहीं बने ,अलबत्ता उनकी मैगज़ीन तथ्यभारती की उन्होंने वेबसाइट बनाई ,,ट्विटर ,,फेसबुक पेज बनाया ,उसमे भी उन्होंने खुद को गौण ही रखा ,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है

और (भला) तुम क्योंकर काफि़र बन जाओगे हालांकि तुम्हारे सामने ख़ुदा की आयतें (बराबर) पढ़ी जाती हैं और उसके रसूल (मोहम्मद) भी तुममें (मौजूद) हैं और जो शख़्स ख़ुदा से वाबस्ता हो वह (तो) जरूर सीधी राह पर लगा दिया गया (101)
ऐ ईमान वालों ख़ुदा से डरो जितना उससे डरने का हक़ है और तुम (दीन) इस्लाम के सिवा किसी और दीन पर हरगिज़ न मरना (102)
और तुम सब के सब (मिलकर) ख़ुदा की रस्सी मज़बूती से थामे रहो और आपस में (एक दूसरे) के फूट न डालो और अपने हाल (ज़ार) पर ख़ुदा के एहसान को तो याद करो जब तुम आपस में (एक दूसरे के) दुश्मन थे तो ख़ुदा ने तुम्हारे दिलों में (एक दूसरे की) उलफ़त पैदा कर दी तो तुम उसके फ़ज़ल से आपस में भाई भाई हो गए और तुम गोया सुलगती हुयी आग की भट्टी (दोज़ख) के लब पर (खडे़) थे गिरना ही चाहते थे कि ख़ुदा ने तुमको उससे बचा लिया तो ख़ुदा अपने एहकाम यू वाजे़ह करके बयान करता है ताकि तुम राहे रास्त पर आ जाओ (103)
और तुमसे एक गिरोह ऐसे (लोगों का भी) तो होना चाहिये जो (लोगों को) नेकी की तरफ़ बुलाए अच्छे काम का हुक्म दे और बुरे कामों से रोके और ऐसे ही लोग (आख़ेरत में) अपनी दिली मुरादें पायेंगे (104)
औेर तुम (कहीं) उन लोगों के ऐसे न हो जाना जो आपस में फूट डाल कर बैठ रहे और रौशन (दलील) आने के बाद भी एक मुँह एक ज़बान न रहे और ऐसे ही लोगों के वास्ते बड़ा (भारी) अज़ाब है (105)
(उस दिन से डरो) जिस दिन कुछ यू लोगों के चेहरे तो सफेद नूरानी होंगे और कुछ (लोगो) के चेहरे सियाह जिन लोगों के मुहॅ में कालिक होगी (उनसे कहा जायेगा) हाए क्यों तुम तो इमान लाने के बाद काफि़र हो गए थे अच्छा तो (लो) (अब) अपने कुफ्रकी सज़ा में अज़ाब (के मजे़) चखो (106)
और जिनके चेहरे पर नूर बरसता होगा वह तो ख़ुदा की रहमत (बहिश्त) में होंगे (और) उसी में सदा रहेंगे (107)
(ऐ रसूल) ये ख़ुदा की आयतें हैं जो हम तुमको ठीक (ठीक) पढ़ के सुनाते हैं और ख़ुदा सारे जहांन के लोगों (से किसी) पर जु़ल्म करना नहीं चाहता (108)
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) ख़ुदा ही का है और (आखि़र) सब कामों की रूज़ु ख़ुदा ही की तरफ़ है (109)
तुम क्या अच्छे गिरोह हो कि (लोगों की) हिदायत के वास्ते पैदा किये गए हो तुम (लोगों को) अच्छे काम का हुक्म करते हो और बुरे कामों से रोकते हो और ख़ुदा पर ईमान रखते हो और अगर एहले किताब भी (इसी तरह) ईमान लाते तो उनके हक़ में बहुत अच्छा होता उनमें से कुछ ही तो इमानदार हैं और अक्सर बदकार (110)

सुधींद्र गोढ़ प्रेस फोटोग्राफर बखूबी निभाते थे ,,

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 19 मई 2019 | 6:45 am

अभी हाल ही में चुनावी रैली के दौरान ,,कांग्रेस के राष्ट्रिय अध्यक्ष राहुलगांधी के साथ प्रेस फोटोग्राफर के रूप में रफ़ीक़ पठान साथ थे ,,,राहुल गांधी ने रफ़ीक़ पठान को आवाज़ देकर पोज़ बनाकर एक फोटो खेंचने के लिए कहा ,तो मुझे अचानक पुरानी प्रेस फोटोग्राफरी का दौर याद आ गया जब रंगीन फोटो ग्राफ़ी नहीं हुआ करती थी ,महंगे ज़ूम वाले कैमरे डिजिटल नहीं हुआ करते थे ,एक रील जिसे वी आई पी फोटो होने पर बीच में से काटकर हाथों हाथ ,फोटो धोकर देना ही फोटोग्राफर की कला हुआ करती थी ,इस और इस कला को मन में मंदिर की पूजा की तरह पुजारी बनकर ,,सुधींद्र गोढ़ प्रेस फोटोग्राफर बखूबी निभाते थे ,,ऐसे में उनकी फोटोग्राफी की कलाकृतियां ,कलामंदिर स्टूडियो के नाम से खूब प्रसिद्ध हुई ,,सभी जानते है ,,फोटो अपने आप में बहुत कुछ कहानिये बयांन करते है ,एक फोटो अपने आप में एक खबर होता है ,आज डिजिटल ,एडिटिंग कैमरा युग में चाहे यह सब आसान हो लेकिन भागम भाग के उस पुराने दौर अख़बार की आत्मा ,अख़बार की रूह सिर्फ प्रेस फोटोग्राफर ही हुआ करते थे , जिसके इर्द गिर्द सभी खबरे ,खबरे छपवाने वाले घूमते नज़र आते है , पुराने प्रेस फोटोग्राफरों में यह विधा ,,मंदिर के पुजारी की तरह ,इस कला को पूजा की तरह जनमानस टटोल कर प्रस्तुतिकरण करने में माहिर ,,सुधींद्र गोड़ प्रमुख कहे जाते थे ,जिनका कला मंदिर ऐसे रेयरेस्ट आदिकाल की प्रेस फोटोग्राफी का रिसर्च म्यूज़ियम भी कहा जा सकता है ,बाद में इस लाइन में ओमेंद्र सक्सेना ,,पेट्रिओट स्टूडियो के नाम से आगे आये फिर पत्रिका अखबार आ जाने के बाद हाबुलाल ,,रफ़ीक़ पठान ,प्रेस फोटोग्राफर के रूप में हीरो बनकर उभरे है ,,अब डिजिटल युग है ,मोबाइल युग है ,लेकिन फोटोग्राफी की आर्ट ,स्पीड फोटोग्राफी हर किसी के बस की बात नहीं है ,मुझे याद है ,कलामंदिर स्टूडियों के भाई सुधींद्र गौड़ का कैमरा ऐ के फोर्टी सेवन की तरह हर कार्यक्रम ,में ,हर वी आई पी यात्रा में प्रत्येक ऐंगल से धांय ,धांय फोटो शूट करता ,था हर ,तस्वीर हर लम्हा ,,हर कार्यक्रम ,हर वी आ पी यात्रा इनके कैमरे की खबर हुआ करती थी ,,अख़बार छपने के पहले सुधींद्र गॉड के स्टूडियो के बाहर इन्तिज़ार में रहते थे ,,जहाँ यह तत्काल शूट के बाद एक अँधेरे कमरे में ,,रील रोल को कट लगाकर ,लाल बल्ब की रौशनी में ,केमिकल से नेगेटिव धोकर पोजेटिव बनाकर ,,खूबसूरत फोटो निकलते थे ,फिर इन फोटोओं के ब्लॉक ,महालक्ष्मी ब्लॉक पर भाई वहीद अंसारी बनाया करते थे ,इनकी हर तस्वीर एक कहानी बयांन करती थी ,इस दौर अब्दुल हनीफ ज़ैदी की केमराग्राफी भी क़ाबिल ऐ तारीफ़ थी ,लेकिन वोह जूलॉजिकल ,,जियोग्राफिकल फोटोग्राफी के शौक़ीन थे फिर वोह सरकारी ओहदेदार होने से उनकी अपनी मर्यादाये भी थी ,सुधींद्र गौड़ वी आई पी यात्राओं में खुद वी आई पी हो जाते थे ,,मेने देखा है आज जो बढे बढे ओहदों पर बैठे सियासी लोग है ,यह इनके इर्द गिर्द वी आई पी नेताओं के साथ फोटो खिंचवाने के लिए इनसे अनुनय करते थे विनय करते थे ,फिर उस फोटो को बनवाकर सजाने के लिए इनके इर्द गिर्द मेला लगाते थे ,एक बार इंद्रा गांधी की कोटा में सभा थी ,,मूवमेंट फोटो नहीं बन रहा था ,सभी सुरक्षा कर्मियों के साथ इंद्रा जी को घेरे हुए थे ,,सुधींद्र गौड़ ,तपाक से अंदर घेरे में घुसे ,इंद्रा जी का अंदाज़ देखने जैसा था ,,सब सकपकाए हुए थे ,,सुधींद्र गौड़ ,हाथ जोड़े ,इंद्रा जी से प्रार्थना की एक मिनट पोज़ प्लीज़ ,,इन्द्रा जी मुस्कुराई ,उनका वोह फोटो दूसरे दिन ,,अख़बार की सुर्ख़ियों में एक अपने आप में खबर कह रहा था ,सुधींद्र गौड़ ने उस फोटो में अपनी पूरी कलाकारी उंडेल दी थी ,,,इसी तरह अटल बिहारी वाजपेयी का एयरपोर्ट पर सभी नेता इन्तिज़ार कर रहे थे ,,अटल बिहारी वाजपेयी हवाई जहाज़ से उतरे ,,नेताओं से दूर से हाय ,नमस्कार किया और दूसरी तरफ अधिकारियों के घेरे की तरफ मुड़ ,गए ,,जो नेता एयरपोर्ट पर ,प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से हाथ मिलाकर ,अभिवादन कर कुछ कहना चाहते थे ,उनके साथ यादगार तस्वीर के लम्हों को कैमरे में क़ैद करवाना चाहते थे ,वोह सभी नेता लोग स्तब्ध थे ,निराश थे ,लेकिन सुधींद्र गौड़ मुस्कुराये ,उचके ,और भागते हुए सीधे अटल बिहारी वाजपेयी का रास्ता रोककर उनके फोटो खेंचते हुए ,उनसे बतियाने लगे ,उनसे कहा साहिब ,कुछ लोग आपका उधर काफी उम्मीदों से इन्तिज़ार कर रहे है ,अटल बिहारी वाजपेयी भी मुस्कुराये ,वोह मुड़े ,,और फिर वापस लौटकर उन कार्यकर्ताओं के पास आये ,फोटो शूट हुए ,,अभिवादन ,सत्कार ,स्वागत हुआ ,,सभी नेता ,अटल बिहारी वाजपेयी के साथ फोटो ग्राफ़ी से खुश हो गए ,कोटा मेले दशहरे कार्यक्रम में फिल्म स्टार हो , कवि हों ,शायर हो ,,सभी कार्यक्रमों की फोटोग्राफी इनके पास थी ,रात्रि को वही कैमरा कट ,फोटो बनाकर ब्लॉक बनवाकर अख़बारों में पहुचवाना इनकी ततपरता पर ही निर्भर था ,,कलेक्टर हो , स्थानीय नेता हो ,,प्राइवेट उद्योगपति हो ,,अख़बार के मालिक हो सभी इन के इर्द गिर्द थे ,फिर यह मोर्चा एकल कम्पीटिशन खत्म होने के बाद ओमेंद्र सक्सेना की हिस्सेदारी में रहा ,,पुराना कैमरा युग बदला ,,कलर फोटोग्राफी आयी ,,फिर वही डिजिटल फोटोग्राफी आने के बाद अब तो तुरंत फोटो प्रकाशन के लिए तैयार है ,लेकिन प्रेस फोटोग्राफर की ज़िंदगी पहले जितने जोखिम में थी ,जितनी चैलेंजिंग थी वोह आज नहीं है ,आज सुविधाएं है ,,आज तत्कालिक तकनीक है ,,वाह वाही है ,पहले फोटग्राफर गुमनामी के अँधेरे में भी रहता था और अखबारों को रौशनी से भी भरता था ,पहले प्रेस फोटोग्राफर अपने कैमरे छोटे बढे नेताओं का इतिहास केंद्रीय नेताओं के साथ क़ैद भी करता था ,,आज तो मोबाइल पर ही सब मच सम्भव हो गया है ,,,,ऑडियो,, वीडियो,, फोटोग्राफी सब राजीव गाँधी के डिजिटल युग के इक्कीसवीं सदी के सपने का अंग बन गया है ,,यही बात राजीव गांधी जब बूंदी दूरदर्शन रिले केंद्र का लोकार्पण करने आये थे तब ,दैनिक जननायक के तात्कालिक पत्रकार भंवर शर्मा अटल का पास नहीं होने से उन्होंने उनकी फीएट सर्किट हाउस के गेट पर रोकी थी और पास नहीं बनाने पर अधिकारियों से विवाद चल ही रहा था ,के राजीव गाँधी जी आये ,वोह उतरे ,फीएट कार एक तरफ लगवाई ,,बूंदी जाने की तैयारी थी ,तब राजीव गांधी जी ने प्रेस फोटोग्राफी के तात्कालिक युग के आधुनिकीकरण ,डिज़िलीकरण के लिए इक्कीसवीं सदी का भारत स्वर्णिम काल बनाने की बात कही थी ,,, प्रेस फोटोग्राफी आज भी जस की तस है ,चाहे सोशल मीडिया पर मोबाइल की डिजिटल तस्वीरें हों ,तात्कालिक फोटो हों ,लकिन जो आर्ट ,जो कला ,जो स्टाइल प्रेस फोटोग्राफी की जीवंत शैली ,भाई सुधींद्र गौड़ ने शुरू की थी ,ओमेंद्र सक्सेना ने अंगीकार की ,,हाबुलाल शर्मा ,,रफ़ीक ,पठान ,कमलेश बागड़ी ,,सलीम शेरी ,गिर्राज पांचाल ,,अशफ़ाक़ खान ,,ऐ एच जैदी ,,छोटे जैदी सहित कई लोग है जो इस विधा को ,,जीवंत खबरों की प्रेस् फोटोग्राफी को आगे बढ़ा रहे है ,,बस यूँ ही , राहुल गाँधी जी कोटा यात्रा पर रफ़ीक़ पठान के आधुनिक कैमरे से धड़ाधड़ मुलाक़ात की फोटोग्राफी फिर ,राहुल जी का रफ़ीक़ पठान को इशारा देकर पुकार कर आसिफ मिर्ज़ा ,,सहित हमारी तरफ बुलाकर एक फोटो खेंचने का पोज़ बनाकर फोटो खिंचवाने की घटना ने मुझे पुरानी प्रेस फोटोग्राफी की जोखिम भरी तकनीक ,तात्कालिक दुश्वारियां ,,वर्तमान के आधुनिकीकरण फोटोग्राफी के युग की कुछ दास्ताने ,,कुछ संस्मरण ताज़ा कर दिए और आप लोगों तक यह भूली बिसरी यादे जिसमे पुराने और नए कोटा की कलाकृतियां फोटो शूट यादें शामिल है ,अल्फ़ाज़ों में उकेर कर पहुंचाने के लिए में मजबूर हो गया ,सभी प्रेस फोटोग्राफर्स को मेरा सेल्यूट ,मेरा सलाम ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

लोगों (की इबादत) के वास्ते जो घर सबसे पहले बनाया गया वह तो यक़ीनन यही (काबा) है

बेशक जिन लोगों ने कुफ्रइखि़्तयार किया और कुफ्रकी हालत में मर गये तो अगरचे इतना सोना भी किसी की गुलू ख़लासी {छुटकारा पाने} में दिया जाए कि ज़मीन भर जाए तो भी हरगिज़ न कु़बूल किया जाएगा यही लोग हैं जिनके लिए दर्दनाक अज़ाब होगा और उनका कोई मददगार भी न होगा (91)
(लोगों) जब तक तुम अपनी पसन्दीदा चीज़ों में से कुछ राहे ख़ुदा में ख़र्च न करोगे हरगिज़ नेकी के दरजे पर फ़ायज़ नहीं हो सकते और तुम कोई (92)
सी चीज़ भी ख़र्च करो ख़ुदा तो उसको ज़रूर जानता है तौरैत के नाजि़ल होने के क़ब्ल याकू़ब ने जो जो चीज़े अपने ऊपर हराम कर ली थीं उनके सिवा बनी इसराइल के लिए सब खाने हलाल थे (ऐ रसूल उन यहूद से) कह दो कि अगर तुम (अपने दावे में सच्चे हो तो तौरेत ले आओ (93)
और उसको (हमारे सामने) पढ़ो फिर उसके बाद भी जो कोई ख़ुदा पर झूठ तूफ़ान जोड़े तो (समझ लो) कि यही लोग ज़ालिम (हठधर्म) हैं (94)
(ऐ रसूल) कह दो कि ख़ुदा ने सच फ़रमाया तो अब तुम मिल्लते इबराहीम (इस्लाम) की पैरवी करो जो बातिल से कतरा के चलते थे और मुशरेकीन से न थे (95)
लोगों (की इबादत) के वास्ते जो घर सबसे पहले बनाया गया वह तो यक़ीनन यही (काबा) है जो मक्के में है बड़ी (खै़र व बरकत) वाला और सारे जहान के लोगों का रहनुमा (96)
इसमें (हुरमत की) बहुत सी वाज़े और रौशन निशानिया हैं (उनमें से) मुक़ाम इबराहीम है (जहाँ आपके क़दमों का पत्थर पर निशान है) और जो इस घर में दाखि़ल हुआ अमन में आ गया और लोगों पर वाजिब है कि महज़ ख़ुदा के लिए ख़ानाए काबा का हज करें जिन्हे वहां तक पहुँचने की इस्तेताअत है और जिसने बावजूद कु़दरत हज से इन्कार किया तो (याद रखे) कि ख़ुदा सारे जहान से बेपरवाह है (97)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब खुदा की आयतो से क्यो मुन्किर हुए जाते हो हालांकि जो काम काज तुम करते हो खु़दा को उसकी (पूरी) पूरी इत्तेला है (98)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब दीदए दानिस्ता (जान बुझ कर) खुदा की (सीधी) राह में (नाहक़ की) कज़ी ढॅूढो (ढूढ) के ईमान लाने वालों को उससे क्यों रोकते हो ओर जो कुछ तुम करते हो खु़दा उससे बेख़बर नहीं है (99)
ऐ ईमान वालों अगर तुमने एहले किताब के किसी फि़रके़ का भी कहना माना तो (याद रखो कि) वह तुमको ईमान लाने के बाद (भी) फिर दुबारा काफि़र बना छोडेंगे (100)

तो क्या ये लोग ख़ुदा के दीन के सिवा (कोई और दीन) ढूढते हैं

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शनिवार, 18 मई 2019 | 6:39 am

(और ऐ रसूल वह वक़्त भी याद दिलाओ) जब ख़ुदा ने पैग़म्बरों से इक़रार लिया कि हम तुमको जो कुछ किताब और हिकमत (वगै़रह) दे उसके बाद तुम्हारे पास कोई रसूल आए और जो किताब तुम्हारे पास उसकी तसदीक़ करे तो (देखो) तुम ज़रूर उस पर ईमान लाना, और ज़रूर उसकी मदद करना (और) ख़ुदा ने फ़रमाया क्या तुमने इक़रार कर लिया तुमने मेरे (अहद का) बोझ उठा लिया सबने अर्ज़ की हमने इक़रार किया इरशाद हुआ (अच्छा) तो आज के क़ौल व (क़रार के) आपस में एक दूसरे के गवाह रहना (81)
और तुम्हारे साथ मैं भी एक गवाह हॅू फिर उसके बाद जो शख़्स (अपने क़ौल से) मुँह फेरे तो वही लोग बदचलन हैं (82)
तो क्या ये लोग ख़ुदा के दीन के सिवा (कोई और दीन) ढूढते हैं हालांकि जो (फ़रिश्ते) आसमानों में हैं औेर जो (लोग) ज़मीन में हैं सबने ख़ुशी ख़ुशी या ज़बरदस्ती उसके सामने अपनी गर्दन डाल दी है और (आखि़र सब) उसकी तरफ़ लौट कर जाएंगे (83)
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि हम तो ख़ुदा पर ईमान लाए और जो किताब हम पर नाजि़ल हुयी और जो (सहीफ़े) इबराहीम और इस्माईल और इसहाक़ और याकू़ब और औलादे याकू़ब पर नाजि़ल हुये और मूसा और ईसा और दूसरे पैग़म्बरों को जो (जो किताब) उनके परवरदिगार की तरफ़ से इनायत हुयी (सब पर ईमान लाए) हम तो उनमें से किसी एक में भी फ़क्र नहीं करते(84)
और हम तो उसी (यकता ख़ुदा) के फ़रमाबरदार हैं और जो शख़्स इस्लाम के सिवा किसी और दीन की ख़्वाहिश करे तो उसका वह दीन हरगिज़ कुबूल ही न किया जाएगा और वह आखि़रत में सख़्त घाटे में रहेगा (85)
भला ख़ुदा ऐसे लोगों की क्योंकर हिदायत करेगा जो इमाने लाने के बाद फिर काफि़र हो गए हालांकि वह इक़रार कर चुके थे कि पैग़म्बर (आखि़रूज़ज़मा) बरहक़ हैं और उनके पास वाज़ेह व रौशन मौजिज़े भी आ चुके थे और ख़ुदा ऐसी हठधर्मी करने वाले लोगों की हिदायत नहीं करता (86)
ऐसे लोगों की सज़ा यह है कि उनपर ख़ुदा और फ़रिश्तों और (दुनिया जहान के) सब लोगों की फिटकार हैं (87)
और वह हमेशा उसी फिटकार में रहेंगे न तो उनके अज़ाब ही में तख़्फ़ीफ़ (कमी) की जाएगी और न उनको मोहलत दी जाएगी (88)
मगर (हां) जिन लोगों ने इसके बाद तौबा कर ली और अपनी (ख़राबी की) इस्लाह कर ली तो अलबत्ता ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (89)
जो अपने ईमान के बाद काफि़र हो बैठे फि़र (रोज़ बरोज़ अपना) कुफ्रबढ़ाते चले गये तो उनकी तौबा हरगिज़ न कु़बूल की जाएगी और यही लोग (पल्ले दरजे के) गुमराह हैं (90)

आपको याद होगा ,,कोटा में मर्दानी टू ,,फिल्म की शूटिंग

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शुक्रवार, 17 मई 2019 | 6:07 am

आपको याद होगा ,,कोटा में मर्दानी टू ,,फिल्म की शूटिंग ,फिल्मस्टार रानी मुखर्जी ,उनके साथी स्टार मिलकर पिछले एक हफ्ते से लगातार कर रहे है ,कोटा के सीन शूट हो रहे है ,,कोटा के कुछ लोग भी मुफ्त में उस सीन बाज़ी में शामिल हो रहे है ,कुछ वी आई पी ,कुछ वी वी आई पी ,इन स्टारों के साथ फोटो सेल्फी वगेरा कर रहे है ,अच्छी बात है ,लेकिन बुरी बात यह है के शूटिंग नियमों का उलंग्घन है या फिर स्वीकृत विधि नियमों के तहत ,,शूटिंग की स्वीकृति ,विधिक व्यवस्थाएं चल रही है ,रिश्ते निभाने के लिए कहीं कोटा को आर्थिक नुकसान हो रहा है ,या फायदा ,इसका पोस्टमार्टम किसी भी दैनिक अख़बार ,किसी भी अख़बार ,,किसी भी न्यूज़ चैनल पर देखने और सुनने को नहीं मिला ,,सभी जानते है ,फिल्म शूटिंग ,क़ानून व्यवस्था का हिस्सा नहीं होकर कॉमर्शियल सिस्टम से जुड़ा मामला है ,ऐसे में व्यवस्थाओं की स्वीकृति तो नाट्य प्रदर्शन अधिनियम ,,पुलिस अधिनियम सहित अन्य विधिक प्रावधानों में होती है ,शूटिंग आम सड़कों ,गलियों में होती है तो पुलिस जवानों को सुरक्षा के लिए लगाना पढ़ता है ,आम जनता को भी परेशानी होती है ,हमे यह जानने का ,,यह पूंछने का अधिकार तो है ही सही ,के रानी मुखर्जी की इस फिल्म मर्दानी टू की शूटिंग के दौरान ,कोटा शहर ,कोटा ग्रामीण ,,बूंदी पुलिस यानी कोटा रेंज की कितनी पुलिस कब कब लगाई गयी ,,इन जवानों की क्या रोज़नामचे में रवानगी ,आमद दर्ज है ,क्या इन पुलिस जवानों को विधिक क़ानून व्यवस्था से हटाकर ,,,,इस शूटिंग व्यवस्था में लगाने के लिए ,प्रति सिपाही ,अधिकारी ,पुलिस कल्याण कोष में विधिक रूप से स्वीकृति प्राप्त कर राशि जमा कराई गयी है ,क्योंकि सभी जानते है जाब्ता क़ानून व्यवस्था के लिए ही कम है ,एक न्यायालय के आदेश की विधिक डिक्री की पालना करवाने के लिए ही दो पुलिस जवान भी अगर भेजे जाते है तो उसका पूरा खर्च आम पक्षकार से न्यायालय के ज़रिये जमा करवाया जाता है ,चरित्र प्रमाणपत्र हो ,दूसरे कार्य हो ,उसका वेरिफिकेशन खर्च भी आम आदमी से लिया जाता है ,अब जब क़ानूनी रूप से ,ऐसी शूटिंग और गैर क़ानून व्यवस्था से संबंधित कॉमर्शियल कार्यक्रमों में ,क़ानून व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस जवान ,ट्रेफिक ,पुलिस पुलिस अधिकारी लगाए गए है ,लगाए जाते रहे है ,और आगे भी लगाए जाएंगे तो प्रति पुलिस कर्मी ,कितने पुलिस कर्मचारी ,अधिकारीयों का कितना खर्चा ,मर्दानी शूटिंग की रानी मुखर्जी के प्रोड्यूसर ,डाइरेक्टर ,,प्रबंधक ने कोटा पुलिस प्रशासन में जमा कराकर रसीद प्राप्त की है ,,यह जांनने का हक़ सभी को है ,और इस बिंदु पर अधिकारीयों से खोजखबर लेकर सवाल पूंछकर ,इन सवालों का जवाब अख़बारों में प्रकाशित करने ,, न्यूज़ चैनल में प्रसारित करने का कर्तव्य भी कोटा के खोजी पत्रकारों का है ही सही ,,,,अख्तर खान अकेला

इन्हें मिटा दिया करता हूँ..

*उलझनें हैं बहुत..*
*मग़र, सुलझा लिया करता हूँ..*
*और, फोटो खिंचवाते वक़्त..*
*मैं अक्सर मुस्कुरा लिया करता हूँ..*
क्यूँ नुमाइश करुँ..
अपने माथे पर शिकन की..
मैं, अक्सर मुस्कुरा के..
इन्हें मिटा दिया करता हूँ..
*क्योंकि..*
*जब लड़ना है, खुद को खुद ही से..*
*तो, हार-जीत में..*
*कोई फ़र्क नहीं रखता हूँ..*
हारुँ या जीतूं..
कोई रंज नहीं..
कभी खुद को जिता देता हूँ..
तो, कभी खुद से जीत जाता हूँ..
*ज़िंदगी तुम बहुत खूबसूरत हो..*
*इसलिए मैंने तुम्हें..*
*सोचना बंद और..*
*जीना शुरु कर दिया है..*

क़यामत के दिन ख़ुदा उनसे बात तक तो करेगा नहीं

ऐ अहले किताब तुम क्यो हक़ व बातिल को गड़बड़ करते और हक़ को छुपाते हो हालांकि तुम जानते हो (71)
और अहले किताब से एक गिरोह ने (अपने लोगों से) कहा कि मुसलमानों पर जो किताब नाजि़ल हुयी है उसपर सुबह सवेरे ईमान लाओ और आखि़र वक़्त इन्कार कर दिया करो शायद मुसलमान (इसी तदबीर से अपने दीन से) फिर जाए (72)
और तुम्हारे दीन की पैरवरी करे उसके सिवा किसी दूसरे की बात का ऐतबार न करो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि बस ख़ुदा ही की हिदायत तो हिदायत है (यहूदी बाहम ये भी कहते हैं कि) उसको भी न (मानना) कि जैसा (उम्दा दीन) तुमको दिया गया है, वैसा किसी और को दिया जाय या तुमसे कोई शख़्स ख़ुदा के यहाँ झगड़ा करे (ऐ रसूल तुम उनसे) कह दो कि (ये क्या ग़लत ख़्याल है) फ़ज़ल (व करम) ख़ुदा के हाथ में है वह जिसको चाहे दे और ख़ुदा बड़ी गुन्जाईश वाला है (और हर शै को) जानता है (73)
जिसको चाहे अपनी रहमत के लिये ख़ास कर लेता है और ख़ुदा बड़ा फ़ज़लों करम वाला हे (74)
और एहले किताब कुछ ऐसे भी हैं कि अगर उनके पास रूपए की ढेर अमानत रख दो तो भी उसे (जब चाहो) वैसे ही तुम्हारे हवाले कर देंगे और बाज़ ऐसे हें कि अगर एक अशरफी भी अमानत रखो तो जब तक तुम बराबर (उनके सर) पर खड़े न रहोगे तुम्हें वापस न देंगे ये इस वजह से है कि उन का तो ये क़ौल है कि (अरब के) जाहिलो (का हक़ मार लेने) में हम पर कोई इल्ज़ाम की राह ही नहीं और जान बूझ कर खुदा पर झूठ (तूफ़ान) जोड़ते हैं (75)
हाँ (अलबत्ता) जो शख़्स अपने अहद को पूरा करे और परहेज़गारी इख़्तेयार करे तो बेशक ख़ुदा परहेज़गारों को दोस्त रखता है (76)
बेशक जो लोग अपने अहद और (क़समे) जो ख़ुदा (से किया था उसके) बदले थोड़ा (दुनयावी) मुआवेज़ा ले लेते हैं उन ही लोगों के वास्ते आखि़रत में कुछ हिस्सा नहीं और क़यामत के दिन ख़ुदा उनसे बात तक तो करेगा नहीं ओर न उनकी तरफ़ नज़र (रहमत) ही करेगा और न उनको (गुनाहों की गन्दगी से) पाक करेगा और उनके लिये दर्दनाम अज़ाब है (77)
और एहले किताब से बाज़ ऐसे ज़रूर हैं कि किताब (तौरेत) में अपनी ज़बाने मरोड़ मरोड़ के (कुछ का कुछ) पढ़ जाते हैं ताकि तुम ये समझो कि ये किताब का जुज़ है हालांकि वह किताब का जुज़ नहीं और कहते हैं कि ये (जो हम पढ़ते हैं) ख़ुदा के यहाँ से (उतरा) है हालांकि वह ख़ुदा के यहाँ से नहीं (उतरा) और जानबूझ कर ख़ुदा पर झूठ (बोहतान) जोड़ते हैं (78)
किसी आदमी को ये ज़ेबा न था कि ख़ुदा तो उसे (अपनी) किताब और हिकमत और नबूवत अता फ़रमाए और वह लोगों से कहता फिरे कि ख़ुदा को छोड़कर मेरे बन्दे बन जाओ बल्कि (वह तो यही कहेगा कि) तुम अल्लाह वाले बन जाओ क्योंकि तुम तो (हमेशा) किताबे ख़ुदा (दूसरो) को पढ़ाते रहते हो और तुम ख़ुद भी सदा पढ़ते रहे हो (79)
और वह तुमसे ये तो (कभी) न कहेगा कि फ़रिश्तों और पैग़म्बरों को ख़ुदा बना लो भला (कहीं ऐसा हो सकता है कि) तुम्हारे मुसलमान हो जाने के बाद तुम्हें कुफ्र का हुक्म करेगा (80)

काश आदरणीय नरेंद्र मोदी ,अमित शाह के राजस्थान सरकार में मुख्यमंत्री महोदया ने दुष्कर्म पीड़िताओं की मदद के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन मान ली होती

Written By आपका अख्तर खान अकेला on गुरुवार, 16 मई 2019 | 6:30 am

काश आदरणीय नरेंद्र मोदी ,अमित शाह के राजस्थान सरकार में मुख्यमंत्री महोदया ने दुष्कर्म पीड़िताओं की मदद के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन मान ली होती ,,राजेंद्र राठोड ,,मंत्री साहब ,किरोड़ी मीणा की सरकार ने गृहमंत्रालय ,विधि मंत्रालय से इसे लागू कर दिया होता तो राजस्थान में आज दुष्कर्म अपराधियों के हौसले नहीं बढ़ते , उक्त दिशा निर्देशों की पालना अब जाकर अशोक गहलोत सरकार ने शुरू की है ,,,,जी हाँ दोस्तों वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म सहित सभी तरह के पीड़ितों ,गवाहों को मुक़दमों के अनुसंधान के दौरान सभी थानाधिकारियों ,,पुलिस अधिकारीयों को विशेष प्रशिक्षण देने ,पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने ,अनुसंधान व्यस्था बनाने ,संबंधित निर्देश थे ,जबकि मुक़दमा दर्ज होने के बाद ऑफिसर केस स्कीम के तहत फॉलोअप करने ,,गवाहान को पूर्व में ही प्रशिक्षित करने ,विशेषज्ञ वकीलों को पैरवी के लिए उपलब्ध कराने ,,गवाहान को सुरक्षा उपलब्ध कराने ,,गवाहान को लोकअभियोजक सहित विशेषज्ञ वकील से मदद लेकर ,बयान समझाने ,जिरह के बारे में जानकारी देने संबंधित दिशा निर्देश जारी किये गए थे ,जिसे केंद्र और राजस्थान सरकार से गंभीरता से नहीं लिया था ,मेने खुद ने उक्त सुप्रीमकोर्ट के दिशा निर्देशों की पालना सुनिश्चित करवाने के लिए ह्यूमन रिलीफ सोसायटी का महासचिव होने के नाते ,,मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा सिंधिया और पुरे देश के राज्यों में सुप्रीमकोर्ट के वर्ष 2014 में जारी उक्त दिशा निर्देशों को लागू करवाने के मामले में तात्कालिक राष्ट्रपति महामहीम को उक्त सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रतिलिपि के साथ ,,निर्देशों को क्रियान्वित करने के महत्वपूर्ण सुझावों के साथ ,,इसे लागु करने की लिखित प्रार्थना की थी ,लेकिन अफ़सोस संवेदन शील प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी ,,उनकी पार्टी द्वारा नियुक्त मुख्यमंत्री आदरणीय श्रीमती वसुंधरा सिंधियाँ ने इन दिशा निर्देशों पर कोई काम नहीं किया ,खुद ,आदरणीय प्रधानमंत्री साहिब ,प्रतिपक्ष में रहने वाले किरोड़ी मीणा साहिब जो उस वक़्त भाजपा के कटटर दुश्मन थे उन्होंने ,राजस्थान सरकार के मंत्री राजेंद्र राठोड सहित किसी ने भी इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया ,और माननीय उच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुरूप[किसी भी तरह की पालना सुनिश्चित नहीं की ,न विशेष शाखा बनाई ,न गवाहों के लिए समझाइश पूर्व प्रशिक्षण की कोई व्यवस्था की ,न पुलिस के लिए विशेष प्रशिशक्षण रिफ्रेशर अनुसंधान टिप्स कार्यक्रम चालू करवाए ,,इतना ही नहीं ,सरकार ने लोक अभियोजक विशेषज्ञ प्रशिक्षण कार्यक्रम तक नहीं चालू किये ,लोकअभियोजकों को गवाहान को समझाइश ,पुलिस कर्मियों को ऐसे मामलों के अनुसंधान ,,उनकी पूर्व सूचनाएं जुटाने संबंधित कोई कार्यक्रम नहीं बनाये ,,केस ऑफिसर स्कीम लागू नहीं की ,,तो जनाब दोषी कोन हुआ ,महिलाओं के अत्याचार ,उनके अनुसंन्धान ,,उनके आरोपियों को सज़ा दिलवाने की प्रक्रिया ,,पूर्व सूचनाओं को लागू करवाने में लापरवाह किसकी सरकार , किसकी पार्टी रही यह खुद मुख्यमंत्री भवन में डाक आमद में ह्यूमन रिलीफ सोसायटी के महासचिव की हैसियत से लिखा गया एडवोकेट अख्तर खान अकेला का पत्र निकाल कर देख लेना ,काश उस पर कार्यवाही हो गयी होती तो आज ,,राजस्थान में माहौल दूसरा होता ,,ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगता ,दोषी लोगों को त्वरित कठोर दंड मिलने से ,अपराधियों के हौसले पस्त हो गए होते ,इसलिए जनाब ज़रा अपने गिरेहबान में भी झाँक ले ,,यह भी देखले ,के अशोक गहलोत ने ,चुनाव आचार संहिता में चुनाव आयोग का नियंत्रण होने के बाद भी ,,ऐसे संवेदनशील मामलों में सुरक्षा ,त्वरित कार्यवाही ,पृथक सेल का जिलेवार गठन ,ऑफिसर केस स्कीम व्यवस्था की घोषणा ही नहीं की बल्कि इस विधि नियम को अमल में भी ला दिया है ,,,,अपराधी पकडे जा रहे है ,,उन्हें जेल हो रही है ,,अभी ऐसी घटनाओं में शामिल अपराधियों को सख्त से सख्त सजा भी ,मिलेगी ,,,तो जनाब सियासत मत कीजिये सुझाव दीजिये ,,क्या होना चाहिए ,गलत अगर व्यवस्था है तो उसे कैसे सुधारे आराजकता फैलाकर आप अपने ही राज्य के लोगों का नुकसान कर रहे है ,अपने ही राज्य को बदनाम कर रहे है ,यहाँ विदेशी पर्यटकों के आने से काफी आय होती है ,अगर आप लोगों ने राजनितिक हथियार बनाने के लिए ऐसी घटनाओं को लेकर हिंसा भड़काई तोड़फोड़ की तो यक़ीन मानिये राजस्थान का मान सम्मान को ठेस पहुंचेगी ,बहुत सी विदेशी पर्यटन महिलाये राजस्थान में आने से हिचकने लगेंगी ,यह हमारे राज्य के लिए ठीक नहीं है सो प्लीज़ सियासत नहीं ,सुझाव दीजिये ,उन वाजिब सुझावों पर अमल अगर नहीं हो तो फिर आंदोलन कीजिये ,हम भी तुम्हारे साथ रहेंगे ,,वाजिब समर्थन के लिए ,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

झूठों पर ख़ुदा की लानत करें

फिर जब तुम्हारे पास इल्म (कुरान) आ चुका उसके बाद भी अगर तुम से कोई (नसरानी) ईसा के बारे में हुज्जत करें तो कहो कि (अच्छा मैदान में) आओ हम अपने बेटों को बुलाएं तुम अपने बेटों को और हम अपनी औरतों को (बुलाए) औेर तुम अपनी औेरतों को और हम अपनी जानों को बुलाएं ओर तुम अपनी जानों को (61)
उसके बाद हम सब मिलकर (खुदा की बारगाह में) गिड़गिड़ाएं और झूठों पर ख़ुदा की लानत करें (ऐ रसूल) ये सब यक़ीनी सच्चे वाक़यात हैं और ख़ुदा के सिवा कोई माबूद (क़ाबिले परसतिश) नहीं है (62)
और बेशक ख़ुदा ही सब पर ग़ालिब और हिकमत वाला है (63)
फिर अगर इससे भी मुँह फेरें तो (कुछ) परवाह (नहीं) ख़ुदा फ़सादी लोगों को खूब जानता है (ऐ रसूल) तुम (उनसे) कहो कि ऐ एहले किताब तुम ऐसी (ठिकाने की) बात पर तो आओ जो हमारे और तुम्हारे दरम्यिान यकसा है कि खुदा के सिवा किसी की इबादत न करें और किसी चीज़ को उसका शरीक न बुलाएं और ख़ुदा के सिवा हममें से कोई किसी को अपना परवरदिगार न बनाए अगर इससे भी मुँह मोडे़ं तो तुम गवाह रहना हम (ख़ुदा के) फ़रमाबरदार हैं (64)
ऐ एहले किताब तुम इबराहीम के बारे में (ख़्वाह मा ख़्वाह) क्यों झगड़ते हो कि कोई उनको नसरानी कहता है कोई यहूदी हालांकि तौरेत व इन्जील (जिनसे यहूद व नसारा की इब्तेदा है वह) तो उनके बाद ही नाजि़ल हुई (65)
तो क्या तुम इतना भी नहीं समझते? (ऐ लो अरे) तुम वही एहमक़ लोग हो कि जिस का तुम्हें कुछ इल्म था उसमें तो झगड़ा कर चुके (खै़र) फिर तब उसमें क्या (ख्व़ाह मा ख़्वाह) झगड़ने बैठे हो जिसकी (सिरे से) तुम्हें कुछ ख़बर नहीं और (हकी़क़ते हाल तो) खुदा जानता है और तुम नहीं जानते (66)
इबराहीम न तो यहूदी थे और न नसरानी बल्कि निरे खरे हक़ पर थे (और) फ़रमाबरदार (बन्दे) थे और मुशरिकोंसे भी न थे (67)
इबराहीम से ज़्यादा ख़ुसूसियत तो उन लोगों को थी जो ख़ास उनकी पैरवी करते थे और उस पैग़म्बर और ईमानदारों को (भी) है और मोमिनीन का ख़ुदा मालिक है (68)
(मुसलमानो) एहले किताब से एक गिरोह ने बहुत चाहा कि किसी तरह तुमको राहेरास्त से भटका दे हालांकि वह (अपनी तदबीरों से तुमको तो नहीं मगर) अपने ही को भटकाते हैं (69)
और उसको समझते (भी) नहीं ऐ एहले किताब तुम ख़ुदा की आयतों से क्यों इन्कार करते हो, हालांकि तुम ख़ुद गवाह बन सकते हो (70)
ऐ अहले किताब तुम क्यो हक़ व बातिल को गड़बड़ करते और हक़ को छुपाते हो हालांकि तुम जानते हो (71)
और अहले किताब से एक गिरोह ने (अपने लोगों से) कहा कि मुसलमानों पर जो किताब नाजि़ल हुयी है उसपर सुबह सवेरे ईमान लाओ और आखि़र वक़्त इन्कार कर दिया करो शायद मुसलमान (इसी तदबीर से अपने दीन से) फिर जाए (72)
और तुम्हारे दीन की पैरवरी करे उसके सिवा किसी दूसरे की बात का ऐतबार न करो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि बस ख़ुदा ही की हिदायत तो हिदायत है (यहूदी बाहम ये भी कहते हैं कि) उसको भी न (मानना) कि जैसा (उम्दा दीन) तुमको दिया गया है, वैसा किसी और को दिया जाय या तुमसे कोई शख़्स ख़ुदा के यहाँ झगड़ा करे (ऐ रसूल तुम उनसे) कह दो कि (ये क्या ग़लत ख़्याल है) फ़ज़ल (व करम) ख़ुदा के हाथ में है वह जिसको चाहे दे और ख़ुदा बड़ी गुन्जाईश वाला है (और हर शै को) जानता है (73)
जिसको चाहे अपनी रहमत के लिये ख़ास कर लेता है और ख़ुदा बड़ा फ़ज़लों करम वाला हे (74)
और एहले किताब कुछ ऐसे भी हैं कि अगर उनके पास रूपए की ढेर अमानत रख दो तो भी उसे (जब चाहो) वैसे ही तुम्हारे हवाले कर देंगे और बाज़ ऐसे हें कि अगर एक अशरफी भी अमानत रखो तो जब तक तुम बराबर (उनके सर) पर खड़े न रहोगे तुम्हें वापस न देंगे ये इस वजह से है कि उन का तो ये क़ौल है कि (अरब के) जाहिलो (का हक़ मार लेने) में हम पर कोई इल्ज़ाम की राह ही नहीं और जान बूझ कर खुदा पर झूठ (तूफ़ान) जोड़ते हैं (75)
हाँ (अलबत्ता) जो शख़्स अपने अहद को पूरा करे और परहेज़गारी इख़्तेयार करे तो बेशक ख़ुदा परहेज़गारों को दोस्त रखता है (76)
बेशक जो लोग अपने अहद और (क़समे) जो ख़ुदा (से किया था उसके) बदले थोड़ा (दुनयावी) मुआवेज़ा ले लेते हैं उन ही लोगों के वास्ते आखि़रत में कुछ हिस्सा नहीं और क़यामत के दिन ख़ुदा उनसे बात तक तो करेगा नहीं ओर न उनकी तरफ़ नज़र (रहमत) ही करेगा और न उनको (गुनाहों की गन्दगी से) पाक करेगा और उनके लिये दर्दनाम अज़ाब है (77)
और एहले किताब से बाज़ ऐसे ज़रूर हैं कि किताब (तौरेत) में अपनी ज़बाने मरोड़ मरोड़ के (कुछ का कुछ) पढ़ जाते हैं ताकि तुम ये समझो कि ये किताब का जुज़ है हालांकि वह किताब का जुज़ नहीं और कहते हैं कि ये (जो हम पढ़ते हैं) ख़ुदा के यहाँ से (उतरा) है हालांकि वह ख़ुदा के यहाँ से नहीं (उतरा) और जानबूझ कर ख़ुदा पर झूठ (बोहतान) जोड़ते हैं (78)
किसी आदमी को ये ज़ेबा न था कि ख़ुदा तो उसे (अपनी) किताब और हिकमत और नबूवत अता फ़रमाए और वह लोगों से कहता फिरे कि ख़ुदा को छोड़कर मेरे बन्दे बन जाओ बल्कि (वह तो यही कहेगा कि) तुम अल्लाह वाले बन जाओ क्योंकि तुम तो (हमेशा) किताबे ख़ुदा (दूसरो) को पढ़ाते रहते हो और तुम ख़ुद भी सदा पढ़ते रहे हो (79)
और वह तुमसे ये तो (कभी) न कहेगा कि फ़रिश्तों और पैग़म्बरों को ख़ुदा बना लो भला (कहीं ऐसा हो सकता है कि) तुम्हारे मुसलमान हो जाने के बाद तुम्हें कुफ्र का हुक्म करेगा (80)

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