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कोरोना है डरा रहा

Written By Surendra shukla" Bhramar"5 on गुरुवार, 13 मई 2021 | 3:48 pm

 कोरोना है डरा रहा,

 चुन चुन करे शिकार

आंख बन्द माने नहीं , 

शामिल हुए हजार।

***************

कोरोना से मत डरो,

 अपनाओ सब ढाल

हृष्ट पुष्ट ताकत रखो,

कर लो प्राणायाम,

*************

काढ़ा भाप गर्म पानी लो,

घर में करो आराम,

मास्क सैनिटाइजर ना भूलो,

बाहर गर हो काम

*************

अदरक तुलसी मिर्च हो काली, 

लौंगा और गिलोय

नीबू सेंधा नमक प्याज भी,

घर में करो प्रयोग

****************

रूप प्रभु के यहां चिकित्सक

लो सलाह भरपूर

जो बोलें तुम करो दवाई

खा लो थोड़ा धूप

***************

कुछ कपूर हो लौंग साथ में,

कभी कभी लो सूंघ

प्रोन पोजिशन लेट सांस लो,

ऑक्सिजन भरपूर।

***************

प्रात उठो टहलो बस घर में

योग ध्यान कसरत कुछ कर लो,

पौधों फूलों से कुछ खेलो

प्यार करो हंस लो मुस्का लो।

******************

आंधी आए कुछ फल गिरते

बचते फिर जो हों मजबूत

आओ बांटें व्यथा सभी की,

हृदय बचे ना कोई शूल।

*****************

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश

भारत

पल्लव कोंपल है गोद हरी

Written By SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR5 on गुरुवार, 1 अप्रैल 2021 | 5:59 am

 शीत बतास औे पाला सहे नित

ठूंठ बने हिय ताना सुने जग

कूंच गई फल फूल मिले

तेरे साहस पे नतमस्तक सब

पल्लव कोंपल है गोद हरी

रस भर महुआ निर्झर झर झर

सब खीझत रीझत दुलराते

सम्मोहित कुछ वश खो जाते

मधु रस आकर्षित भ्रमर कभी

री होली फाग सुनावत हैं

छलकाए देत रस की गागर

ज्यों अमृत पान करावत है

ऋतुराज वसंत भी देख चकित

गोरी चंदा तू कर्पूर धवल

रचिता बनिता दुहिता गुण चित

चहुं लोक बखान बखानत बस

शुध चित्त मर्मज्ञ हरित वसनी

पावन करती निर्झर जननी

बल खाती सरिता कंटक पथ

उफनत हहरत सागर दिल पर

कुछ दबती सहती शोर करे

गर्जन बन मोर नचावत तो

कुछ नाथ लेे नाथ रिझावत है

मंथन कर जग कुछ सूत्र दिए

मदिरा मदहोश हैं राहु केतु 

कुछ देव मनुज संसार हेतु

री अमृत घट करुणा रस की

मै हार गया वर्णन सिय पी

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सुरेंद्र कुमार शुक्ल

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत

प्रकृति रम्य नारी सृष्टि तू

Written By Surendra shukla" Bhramar"5 on बुधवार, 31 मार्च 2021 | 1:12 pm

 बार बार उड़ने की कोशिश

गिरती और संभलती थी

कांटों की परवाह बिना वो

गुल गुलाब सी खिलती थी

सूर्य रश्मि से तेज लिए वो

चंदा सी थी दमक रही

सरिता प्यारी कलरव करते

झरने चढ़ ज्यों गिरि पे जाती

शीतल मनहर दिव्य वायु सी

बदली बन नभ में उड़ जाती

कभी सींचती प्राण ओज वो

बिजली दुर्गा भी बन जाती

करुणा नेह गेह लक्ष्मी हे

कितने अगणित रूप दिखाती

प्रकृति रम्य नारी सृष्टि तू

प्रेम मूर्ति पर बलि बलि जाती

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सुरेंद्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत

गांव की गोरी ने लूट लिया तन मन

Written By SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR5 on शुक्रवार, 19 मार्च 2021 | 2:44 pm

 गांव की गोरी ने लूट लिया तन मन

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आम्र मंजरी बौराए तन देख देख के

बौराया मेरा निश्च्छल मन

फूटा अंकुर कोंपल फूटी

टूटे तारों से झंकृत हो आया फिर से मन

कोयल कूकी बुलबुल झूली

सरसों फूली मधुवन महका मेरा मन

छुयी मुई सी नशा नैन का 

यादों वादों का झूला वो फूला मन

हंसती और लजाती छुपती बदली जैसी

सोच बसंती सिहर उठे है कोमल मन

लगता कोई जोह रही विरहन है बादल को

पथराई आंखे हैं चातक सी ले चितवन

फूट पड़े गीत कोई अधरों पे कोई छुवन

कलियों से खेल खेल पुलकित हो आज भ्रमर

मादक सी गंध है होली के रंग लिए

कान्हा को खींच रही प्यार पगी ग्वालन

पीपल है पनघट है घुंघरू की छमछम से

गांव की गोरी ने लूट लिया तन मन

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सुरेंद्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश भारत

19.3.2021

कांटे फूल सदा ही संगी

Written By SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR5 on गुरुवार, 24 दिसंबर 2020 | 11:03 pm


कांटे फूल सदा ही संगी

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मेरा मन भी भ्रमित बहुत है

गिरगिट जैसा रंग बदलता

स्वागत को जब फूल बहुत हैं

कैक्टस फूल उगाऊं कहता

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घर आंगन फुलवारी प्यारी

खुशियों से आह्लादित सारी

और लालसा की चाहत में

बढ़ता जाऊं कंटक पथ में

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सीधी सादी भोली भाली

' तुलसी आंगन की दिवाली

कौन लगा घुन मन में मेरे

ना भाए कुछ ' दर्द ' सिवा रे !

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बहुत लोग हैं मेरे जैसे 

खुशियों का जो दंश हैं झेले,

भांति भांति के कांटे चुनते

' कैक्टस  की दीवार बनाते

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सीमित साधन या हो मरूथल,

वीराने भी सजता कैक्टस,

धैर्य और साहस का परिचय,

कांटों फूल सजाता कैक्टस

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मेहनत कांटों की शैय्या चल,

प्यारे फूल हैं लगते मनहर,

जीवन की पगडंडी ऐसी,

कांटे - फूल सदा ही संगी

__________________

बुरा नहीं कांटा भी यारों

कांटे से कांटे को निकालो

घर अंगना जो न मन भाए

सीमा पर आ बाड़ लगाएं

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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5

प्रतापगढ़,

उत्तर प्रदेश, भारत

व्हाट्सप्प से प्रेरित

Written By Barun Sakhajee Shrivastav on बुधवार, 28 अक्तूबर 2020 | 4:00 pm

*आखिर है क्या रामायण ????* 

*अगर पढ़ो तो आंसुओ पे काबू रखना...प्यारे पाठको....छोटा सा वृतांत है*

*एक रात की बात हैं,माता कौशिल्या जी को सोते में अपने महल की छत पर किसी के चलने की आहट सुनाई दी। नींद खुल गई । पूछा कौन हैं ?*

*मालूम पड़ा श्रुतिकीर्ति जी हैं ।नीचे बुलाया गया*

*श्रुतिकीर्ति जी, जो सबसे छोटी बहु हैं, आईं, चरणों में प्रणाम कर खड़ी रह गईं*

*माता कौशिल्या जी ने पूछा, श्रुति ! इतनी रात को अकेली छत पर क्या कर रही हो बिटिया ? क्या नींद नहीं आ रही ?*

*शत्रुघ्न कहाँ है ?*

*श्रुतिकीर्ति की आँखें भर आईं, माँ की छाती से चिपटी, गोद में सिमट गईं, बोलीं, माँ उन्हें तो देखे हुए तेरह वर्ष हो गए ।*

*उफ ! कौशल्या जी का ह्रदय काँप कर झटपटा गया ।*

*तुरंत आवाज लगी, सेवक दौड़े आए । आधी रात ही पालकी तैयार हुई, आज शत्रुघ्न जी की खोज होगी, माँ चली ।*

*आपको मालूम है शत्रुघ्न जी कहाँ मिले ?*

*अयोध्या जी के जिस दरवाजे के बाहर भरत जी नंदिग्राम में तपस्वी होकर रहते हैं, उसी दरवाजे के भीतर एक पत्थर की शिला हैं, उसी शिला पर, अपनी बाँह का तकिया बनाकर लेटे मिले ।*

*माँ सिराहने बैठ गईं, बालों में* *हाथ फिराया तो शत्रुघ्न जी ने* *आँखें*
*खोलीं, माँ !*

*उठे, चरणों में गिरे, माँ ! आपने क्यों कष्ट किया ? मुझे बुलवा लिया होता ।*

*माँ ने कहा, शत्रुघ्न ! यहाँ क्यों ?"*

*शत्रुघ्न जी की रुलाई फूट पड़ी, बोले- माँ ! भैया राम जी पिताजी की आज्ञा से वन चले गए, भैया लक्ष्मण जी उनके पीछे चले गए, भैया भरत जी भी नंदिग्राम में हैं, क्या ये महल, ये रथ, ये राजसी वस्त्र, विधाता ने मेरे ही लिए बनाए हैं ?*

*माता कौशल्या जी निरुत्तर रह गईं ।*

*देखो क्या है ये रामकथा...*

*यह भोग की नहीं....त्याग की कथा हैं, यहाँ त्याग की प्रतियोगिता चल रही हैं और सभी प्रथम हैं, कोई पीछे नहीं रहा* 

*चारो भाइयों का प्रेम और त्याग एक दूसरे के प्रति अद्भुत-अभिनव और अलौकिक हैं ।*

*रामायण जीवन जीने की सबसे उत्तम शिक्षा देती हैं ।*🌸🌸🌸
*भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ तो उनकी पत्नी माँ सीता ने भी सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया। परन्तु बचपन से ही बड़े भाई की सेवा मे रहने वाले लक्ष्मण जी कैसे राम जी से दूर हो जाते! माता सुमित्रा से तो उन्होंने आज्ञा ले ली थी, वन जाने की.. परन्तु जब पत्नी उर्मिला के कक्ष की ओर बढ़ रहे थे तो सोच रहे थे कि माँ ने तो आज्ञा दे दी, परन्तु उर्मिला को कैसे समझाऊंगा!! क्या कहूंगा!*

*यहीं सोच विचार करके लक्ष्मण जी जैसे ही अपने कक्ष में पहुंचे तो देखा कि उर्मिला जी आरती का थाल लेके खड़ी थीं और बोलीं- "आप मेरी चिंता छोड़ प्रभु की सेवा में वन को जाओ। मैं आपको नहीं रोकूँगीं। मेरे कारण आपकी सेवा में कोई बाधा न आये, इसलिये साथ जाने की जिद्द भी नहीं करूंगी।"*

*लक्ष्मण जी को कहने में संकोच हो रहा था। परन्तु उनके कुछ कहने से पहले ही उर्मिला जी ने उन्हें संकोच से बाहर निकाल दिया। वास्तव में यहीं पत्नी का धर्म है। पति संकोच में पड़े, उससे पहले ही पत्नी उसके मन की बात जानकर उसे संकोच से बाहर कर दे!*

*लक्ष्मण जी चले गये परन्तु 14 वर्ष तक उर्मिला ने एक तपस्विनी की भांति कठोर तप किया। वन में भैया-भाभी की सेवा में लक्ष्मण जी कभी सोये नहीं परन्तु उर्मिला ने भी अपने महलों के द्वार कभी बंद नहीं किये और सारी रात जाग जागकर उस दीपक की लौ को बुझने नहीं दिया।*

*मेघनाथ से युद्ध करते हुए जब लक्ष्मण को शक्ति लग जाती है और हनुमान जी उनके लिये संजीवनी का पहाड़ लेके लौट रहे होते हैं, तो बीच में अयोध्या में भरत जी उन्हें राक्षस समझकर बाण मारते हैं और हनुमान जी गिर जाते हैं। तब हनुमान जी सारा वृत्तांत सुनाते हैं कि सीता जी को रावण ले गया, लक्ष्मण जी मूर्छित हैं।*

*यह सुनते ही कौशल्या जी कहती हैं कि राम को कहना कि लक्ष्मण के बिना अयोध्या में पैर भी मत रखना। राम वन में ही रहे। माता सुमित्रा कहती हैं कि राम से कहना कि कोई बात नहीं। अभी शत्रुघ्न है। मैं उसे भेज दूंगी। मेरे दोनों पुत्र राम सेवा के लिये ही तो जन्मे हैं। माताओं का प्रेम देखकर हनुमान जी की आँखों से अश्रुधारा बह रही थी। परन्तु जब उन्होंने उर्मिला जी को देखा तो सोचने लगे कि यह क्यों एकदम शांत और प्रसन्न खड़ी हैं? क्या इन्हें अपनी पति के प्राणों की कोई चिंता नहीं?*

*हनुमान जी पूछते हैं- देवी! आपकी प्रसन्नता का कारण क्या है? आपके पति के प्राण संकट में हैं। सूर्य उदित होते ही सूर्य कुल का दीपक बुझ जायेगा। उर्मिला जी का उत्तर सुनकर तीनों लोकों का कोई भी प्राणी उनकी वंदना किये बिना नहीं रह पाएगा। वे बोलीं- "*
*मेरा दीपक संकट में नहीं है, वो बुझ ही नहीं सकता। रही सूर्योदय की बात तो आप चाहें तो कुछ दिन अयोध्या में विश्राम कर लीजिये, क्योंकि आपके वहां पहुंचे बिना सूर्य उदित हो ही नहीं सकता। आपने कहा कि प्रभु श्रीराम मेरे पति को अपनी गोद में लेकर बैठे हैं। जो योगेश्वर राम की गोदी में लेटा हो, काल उसे छू भी नहीं सकता। यह तो वो दोनों लीला कर रहे हैं। मेरे पति जब से वन गये हैं, तबसे सोये नहीं हैं। उन्होंने न सोने का प्रण लिया था। इसलिए वे थोड़ी देर विश्राम कर रहे हैं। और जब भगवान् की गोद मिल गयी तो थोड़ा विश्राम ज्यादा हो गया। वे उठ जायेंगे। और शक्ति मेरे पति को लगी ही नहीं शक्ति तो राम जी को लगी है। मेरे पति की हर श्वास में राम हैं, हर धड़कन में राम, उनके रोम रोम में राम हैं, उनके खून की बूंद बूंद में राम हैं, और जब उनके शरीर और आत्मा में हैं ही सिर्फ राम, तो शक्ति राम जी को ही लगी, दर्द राम जी को ही हो रहा। इसलिये हनुमान जी आप निश्चिन्त होके जाएँ। सूर्य उदित नहीं होगा।"*

*राम राज्य की नींव जनक की बेटियां ही थीं... कभी सीता तो कभी उर्मिला। भगवान् राम ने तो केवल राम राज्य का कलश स्थापित किया परन्तु वास्तव में राम राज्य इन सबके प्रेम, त्याग, समर्पण , बलिदान से ही आया।*

*"जय जय सियाराम"*
*"जयश्रीराधेकृष्णा"*
*पसंद आया हो, प्रेम, त्याग, समर्थन की भावना अगर मन में हो तो इसे आगे अवश्य बढावे🙏🏻*

मानव मानवता को वर ले

Written By Surendra shukla" Bhramar"5 on रविवार, 3 मई 2020 | 4:34 pm


हमने मिलकर थाल बजाई,
शंख बजा फिर ज्योति जगाई,
मंत्र जाप मन शक्ति अाई,
योग ध्यान आ करें सफाई,
जंग जीत हम छा जाएंगे,
विश्व गुरु हम कहलाएंगे,
आत्मशक्ति अवलोकन करके,
एकाकी ज्यों गुफा में रह के,
जन मन का कल्याण करेंगे
द्वेष नहीं हम कहीं रखेंगे
प्रेम से सब को समझाएंगे
मानव मानवता को वर ले
पूजा प्रकृति की जी भर कर ले
मां है फिर गोदी में लेगी
पीड़ा तेरी सब हर लेगी
हाथ जोड़ बस करे नमन तू
पाप बहुत कुछ दूर रहे तू
जल जीवन कल निर्मल होगा
मन तेरा भी पावन होगा
मां फिर गले लगा लेगी जब
खेल खेलना रमना बहुविधि
सब को गले लगाना फिर तुम
हंसना खूब ठ ठा ना जग तुम।

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5
UTTAR PRADESH
10APRIL2020
7.11 AM
उम्र भर जलता रहा चराग़-ए-आरज़ू अपना,
लोग कहते रहे बड़ी मुख़तसर दीवाली थी !!

रंग-ओ-बू फाख्ता थे जिस गुलों की महफ़िल में,
उसी महफ़िल में मिरी सांझ ढलने वाली थी !!

इम्तहानों में गुज़ारी थी ज़िन्दगी हमनें,
ज़िन्दगी क्या थी, कोई दस्ता-ए-सवाली थी !!

लुटे पड़े थे आंधियों से दरख़्त औे, मकां,
अब न जाले थे कहीं,और न कहीं जाली थी !!

वो गया तो कर गया,मेरे हवाले मुझको,
वो नज़ाकत वो मोहब्बत, तो बस ख़याली थी !!


- सागर

Written By SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR5 on सोमवार, 9 मार्च 2020 | 11:44 am


नफरत की ज्वाला में,
घी का हवन देते,
कुछ लोग,
तस्वीरें बनाते,
आविष्कार करते,
आपस में उलझे हैं,
आग उसने लगाई,
इस ने लगाई,
खुद जली,
बतिया रहे,
बची हुई सांसों को,
सुलगते अंगारों से,
जहरीले धुएं में,
हवा देते,
घुट घुट के जीते हुए,
छोड़ कहीं जा रहे,
हरी भरी तस्वीरें
काली विकराल हुई
मूरत की सूरत में
आंखें बस लाल हुईं
काश कुछ बौछारें,
शीतलता की आएं,
दहकती इन लपटों की
अग्नि बुझाएं,
धुंध धुएं को हटाएं,
पथराई आंखों में आंसू तो आएं
स्नेह की , दया की ,
भूख की प्यास की ,
जीवन के चाह की,
चमक तो जगाएं
सुरेंद्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर' 5

एक नाम राजेंद्र सांखला

Written By आपका अख्तर खान अकेला on गुरुवार, 30 मई 2019 | 6:07 am

एक नाम राजेंद्र सांखला ,,जो युवा नेतृत्व में कामयाबी का एक सबक़ बनकर उभरा है ,,उनकी टीम कांग्रेस समर्थित हाड़ोती विकास मोर्चा संगठन और कॉग्रेस के पदाधिकारी मिलकर आज उनका जन्म दिन बढ़ी धूम धाम ,,खुशियों के साथ मना रहे है , राजेंद्र सांखला को उनके जन्म दिन पर बधाई ,मुबारकबाद ,कामयाबी की बेशुमार दुआएं ,,,एक संघर्ष ,जनसमस्याओं के निराकरण के लिए सीधी लड़ाई लड़ने का दुसरा नाम राजेंद्र सांखला कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी ,हाड़ोती विकास मोर्चा के अध्यक्ष राजेंद्र सांखला में नेतृत्व में कोटा ज़िले के हर क्षेत्र में इनके कार्यकर्ताओं की निजी टीम है जो तत्काल सुचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर निर्भीकता से संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है ,,,,जी हाँ दोस्तों ,अपने व्यवसाय ,,अपनी सियासत ,,जन सेवा ,,जनसंघर्ष ,,नेतृत्व क्षमता में कामयाबी का एक नाम राजेंद्र सांखला ,,जो युवा नेतृत्व में कामयाबी का एक सबक़ है ,, जनहित समस्याओं के निराकरण के लिए एक संघर्ष ,,,जो कभी छोटा सा पौधा था वोह ,आज एक छायादार वृक्ष बन गया है आज वोह खुद ,,कोटा शहर की प्रमुख समस्याओं को लेकर ,,प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य ,,राजेंद्र सांखला ,,, हाड़ोती विकास मोर्चा के नाम पर खुला संघर्ष कर रहे है ,,हाल ही में कोटा विधुत वितरण निगम के खिलाफ बिलों की ज़्यादती को लेकर इनका बढ़ा संघर्ष अपनी सरकार में गरीबों के हित में अव्यवस्थाओं के खिलाफ रहा है ,,,,,जी हाँ दोस्तों शहर की हर प्रमुख समस्या और उनके निराकरण मामले में,,,अपनी पेनी नज़र रखकर ,,आवाज़ बुलंद करने वाले,,, राजेंद्र सांखला ने ,,,अपने इस विचार के समर्थन में क्रांतिकारी ,,,वफादार कार्यकर्ताओं की टीम तैयार करने में भी ,,,कामयाबी हांसिल की है ,,,राजेंद्र सांखला ने अपने संघर्ष ,,से ,,अपने व्यवसायिक समर्पण के ,साथ ,कामयाबी से ,,एक ,,कहावत ,,खुदी को कर बुलंद इतना ,,के हर तक़दीर से पहले ,खुदा बंदे से पूंछे तेरी रज़ा किया है को साबित कर दिखाया है ,,राजेंद्र सांखला ,,छात्र जीवन से ही ,,छात्र कांग्रेस के पदाधिकारी के रूप में ,,अधिकारियो ,,उनके परिजनों द्वारा सरकारी वाहनों के दुरुपयोग को रोकने का सफलतम अभियान चला चुके है ,,उन्होंने अस्पतालों की समस्याओं ,को लेकर ,अस्पतालों में खून बेचने के खिलाफ संघर्ष किया ,,जबकि चिकित्सको द्वारा ,सरकारी निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क वसूली के खिलाफ,,,, अभियान चलाकर ,,,चिकित्सको की लूट से आम जनता को बचाया ,,,राजेंद्र सांखला ने कॉलेज सहित ,,सभी छोटी बढ़ी शिक्षण संस्थाओ में ,,,छात्र छात्राओं से अवैध फीस वसूली के खिलाफ ,,आंदोलन छेड़ा ,,तो रोज़गार कार्यालय सहित ,,उद्योगों के खिलाफ स्थानीय लोगो को,,, रोज़गार देने का आन्दोलन मज़बूती से कामयाबी के साथ चलाकर ,,,कई बेरोज़गारो को रोज़गार दिलवाया ,,,,,राजेंद्र सांखला ने ,,,पुलिस थाने में निर्दोषो के साथ ज़्यादती करने वाले,,, पुलिस कर्मियों के खिलाफ खुलकर आवाज़ ,उठाई ,तो वक़्त ब वक़्त ,,शहर में पानी ,,बिजली ,,किसानो के लिए खाद ,,बीज ,,सिंचाई ,,गरीबो के लिए रोज़गार ,,कच्ची बस्तियों के नियमन ,,छात्र छात्रों से ट्यूशन के नाम पर की जा रही लूट के खिलाफ सैकड़ों आन्दोलन किये ,,राजेंद्र सांखला ने आंदोलन के साथ साथ ,मर्यादाओं का भी पूरा ध्यान रखा ,,इसी दौरान वोह कांग्रेस के युवा उत्साहित छात्र नेता से ,,युवा नेता और अब कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय नेता बन गए है ,,राजेंद्र सांखला कांग्रेस में पूर्व प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी सदस्य रहे है ,वोह कई मह्त्य्वपूर्ण पदों पर है ,,लेकिन उनके गॉड फादर ,उनके प्रेरक ,पथप्रदर्शक ,,,कोटा के विकास पुरुष ,,केबिनेट मंत्री शान्ति कुमार धारीवाल है ,,जिनके लिए ,,राजेंद्र सांखला और उनकी टीम,,, एक जुट होकर ,,कुछ भी कर गुज़रने के लिए तैयार रहती है ,,सांखला ने अपने संघर्ष ,,अपने आंदोलन के साथ साथ ,,रोज़गार पर भी ध्यान दिया ,,स्वरोजगार व्यवस्था के तहत ,,खुद को स्थापित किया ,,एक आम आदमी से खास बनने की मशक़्क़्क़त कर सांखला ने ठेकेदारी ,व्यवसायिक गतिविधियों में भी खुद को कामयाब किया ,,लोगो से भी सम्पर्क रखा ,,कांग्रेस का एक सिपाही बनकर ,,आम लोगो के लिए संघर्ष भी किया ,तो वक़्त आने पर ,,आम लोगो के लिए संघर्ष के दौरान मुक़दमो का दर्द भी झेला है ,,राजेंद्र सांखला ने ,,,कांग्रेस समर्थित हाड़ोती विकास मोर्चा गठित किया ,,इस मोर्चे में कोटा की हर विधानसभा ,हर वार्ड ,,,हर भाग संख्या के सभी जाति ,,समाज ,,वर्ग ,,समुदाय के लोग शामिल है ,,इनके मोर्चे में स्त्री ,,पुरुष ,,बूढ़े ,,नौजवान सभी जुड़ गए है ,,हालत यह के ,,कोटा के किसी आंदोलन के वक़्त एक आवाज़ ,,एक संदेश पर गली ,,मोहल्लों से निकल कर ,, सेकड़ो लोग ,,राजेंद्र सांखला के साथ ,,कांग्रेस ज़िंदाबाद ,,करते हुए हर समस्या के समाधान के लिए किसी भी क़ीमत पर कुछ भी कर गुज़रने को तैयार रहते है ,,,हाल ही में राजेंद्र सांखला ने शहर में साफ़ सफाई ,गंदगी की समस्या को लेकर आंदोलन किया ,,नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष को कार्यभार ग्रहण नहीं करवाने के खिलाफ चेतावनी भरा संघर्ष किया ,,तो कोटा हेंगींग ब्रिज जो बनकर तो तैयार था ,,लेकिन बेवजह उद्घाटन में देरी किये जाने के खिलाफ संघर्ष किया ,, इस दौरान हेंगिंग ब्रिज की खराबियों की भी पोल खुली ,,पुलिस द्वारा दमनकारी निति के तहत ,,,जब राजेंद्र सांखला ,,इनके साथ ,हेंगिंग ब्रिज का निरीक्षण करने गए ,,,केबिनेट मंत्री शान्ति कुमार धारीवाल सहित,,, कुछ लोगो के खिलाफ मुक़दमा दर्ज किया ,,तो राजेंद्र सांखला के समर्थको ने शहर की गलियों ,चोराहो पर कई हफ्ते तक प्रदर्शन किए ,,,राजेंद्र सांखला आज ,,कोटा कांग्रेस में एक कामयाब ,,संघर्ष शील ,,,युवा क्रांतिकारी नेतृत्व की पहचान बना चुके है ,,,,इनकी टीम ,,,इनकी टीम के संघर्ष के जज़्बे ,,इनकी टीम की निर्भीकता ,,क्रन्तिकारी आंदोलन शैली ,,,कॉग्रेस ज़िंदाबाद की वफादार सिपाही की भूमिका ,,इन्हे कांग्रेस के दूसरे नेताओं से जुदा और मज़बूत बनाती है ,,मेने इनका युवा कार्यकाल का संघर्ष का जज़्बा ,,इनके आंदोलन का तरीक़ा भी देखा है ,,और आज कुशल नेतृत्व में ,,गली ,,गली ,,मोहल्लों ,,वार्डों ,,सभी जगह इनके नेतृत्व में ,,कांग्रेस वफादार कार्यकर्ताओं की टीम ,,इनके हर मुद्दे पर सजग सतर्क होकर ,,आंदोलन ,,प्रदर्शन करने के तरीके से स्पष्ट है ,,के एक छात्र तरुण नेतृत्व जो आंदोलन का एक पौधा था ,आज वोह युवा बनकर ,,कांग्रेस के पक्ष में आंदोलनकारियों की टीम का एक कुशल नेतृत्व ,,कुशल कमांडर ,,एक वटवृक्ष बन गया है ,,राजेंद्र सांखला के इस ,जांबाज़ ,नेतृत्व ,,आंदोलनकारी स्वभाव ,,जनसमस्याओं के प्रति जागरूकता ,,निर्भीकता ,,निष्पक्षता और अपने कार्यकर्ताओं पर मर मिटने के जज़्बे को सलाम ,,सेल्यूट ,,सालगिरह मुबारक हो ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

ये चन्द रोज़ा फ़ायदा हैं

जो लोग उठते बैठते करवट लेते (अलगरज़ हर हाल में) ख़ुदा का जि़क्र करते हैं और आसमानों और ज़मीन की बनावट में ग़ौर व फि़क्र करते हैं और (बेसाख़्ता) कह उठते हैं कि ख़ुदावन्दा तूने इसको बेकार पैदा नहीं किया तू (फेले अबस से) पाक व पाकीज़ा है बस हमको दोज़ख़ के अज़ाब से बचा (191)
ऐ हमारे पालने वाले जिसको तूने दोज़ख़ में डाला तो यक़ीनन उसे रूसवा कर डाला और जु़ल्म करने वाले का कोई मददगार नहीं (192)
ऐ हमारे पालने वाले (जब) हमने एक आवाज़ लगाने वाले (पैग़म्बर) को सुना कि वह (ईमान के वास्ते यू पुकारता था) कि अपने परवरदिगार पर ईमान लाओ तो हम ईमान लाए बस ऐ हमारे पालने वाले हमें हमारे गुनाह बख़्श दे और हमारी बुराईयों को हमसे दूर करे दे और हमें नेकों के साथ (दुनिया से) उठा ले (193)
और ऐ पालने वाले अपने रसूलों की मारफ़त जो कुछ हमसे वायदा किया है हमें दे और हमें क़यामत के दिन रूसवा न कर तू तो वायदा खि़लाफ़ी करता ही नहीं (194)
तो उनके परवरदिगार ने दुआ कु़बूल कर ली और (फ़रमाया) कि हम तुममें से किसी काम करने वाले के काम को अकारत नहीं करते मर्द हो या औरत (इस में कुछ किसी की खु़सूसियत नहीं क्योंकि) तुम एक दूसरे (की जिन्स) से हो जो लोग (हमारे लिए वतन आवारा हुए) और शहर बदर किए गए और उन्होंने हमारी राह में अज़ीयतें उठायीं और (कुफ़्फ़र से) जंग की और शहीद हुए मैं उनकी बुराईयों से ज़रूर दरगुज़र करूंगा और उन्हें बेहिश्त के उन बाग़ों में ले जाऊॅगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं ख़ुदा के यहाँ ये उनके किये का बदला है और ख़ुदा (ऐसा ही है कि उस) के यहाँ तो अच्छा ही बदला है (195)
(ऐ रसूल) काफि़रों का शहरो शहरो चैन करते फिरना तुम्हे धोखे में न डाले (196)
ये चन्द रोज़ा फ़ायदा हैं फिर तो (आखि़रकार) उनका ठिकाना जहन्नुम ही है और क्या ही बुरा ठिकाना है (197)
मगर जिन लोगों ने अपने परवरदिगार की परहेज़गारी (इख़्तेयार की उनके लिए बेहिश्त के) वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारीं हैं और वह हमेशा उसी में रहेंगे ये ख़ुदा की तरफ़ से उनकी (दावत है और जो साज़ो सामान) ख़ुदा के यहाँ है वह नेको कारों के वास्ते दुनिया से कहीं बेहतर है (198)
और एहले किताब में से कुछ लोग तो ऐसे ज़रूर हैं जो ख़ुदा पर और जो (किताब) तुम पर नाजि़ल हुयी और जो (किताब) उनपर नाजि़ल हुयी (सब पर) ईमान रखते हैं ख़ुदा के आगे सर झुकाए हुए हैं और ख़ुदा की आयतों के बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनियावी फ़ायदे) नहीं लेते ऐसे ही लोगों के वास्ते उनके परवरदिगार के यहाँ अच्छा बदला है बेशक ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब करने वाला है (199)
ऐ ईमानदारों (दीन की तकलीफ़ों को) झेल जाओ और दूसरों को बर्दाश्त की तालीम दो और (जिहाद के लिए) कमरें कस लो और ख़ुदा ही से डरो ताकि तुम अपनी दिली मुराद पाओ (200)

(ऐ रसूल) इनको वह वक़्त तो याद दिलाओ

Written By आपका अख्तर खान अकेला on बुधवार, 29 मई 2019 | 6:14 am

जो लोग (यहूद) ये कहते हैं कि ख़ुदा तो कंगाल है और हम बड़े मालदार हैं ख़ुदा ने उनकी ये बकवास सुनी उन लोगों ने जो कुछ किया उसको और उनका पैग़म्बरों को नाहक़ क़त्ल करना हम अभी से लिख लेते हैं और (आज तो जो जी में कहें मगर क़यामत के दिन) हम कहेंगे कि अच्छा तो लो (अपनी शरारत के एवज़ में) जलाने वाले अज़ाब का मज़ा चखो ((181)
ये उन्हीं कामों का बदला है जिनको तुम्हारे हाथों ने (ज़ादे आख़ेरत बना कर) पहले से भेजा है वरना ख़ुदा तो कभी अपने बन्दों पर ज़ुल्म करने वाला नहीं (182)
(यह वही लोग हैं) जो कहते हैं कि ख़ुदा ने तो हमसे वायदा किया है कि जब तक कोई रसूल हमें ये (मौजिज़ा) न दिखा दे कि वह कुरबानी करे और उसको (आसमानी) आग आकर चट कर जाए उस वक़्त तक हम ईमान न लाएंगें (ऐ रसूल) तुम कह दो कि (भला) ये तो बताओ बहुतेरे पैग़म्बर मुझसे क़ब्ल तुम्हारे पास वाजे़ व रौशन मौजिज़ात और जिस चीज़ की तुमने (उस वक़्त) फ़रमाइश की है (वह भी) लेकर आए फिर तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो तुमने उन्हें क्यों क़त्ल किया (183)
(ऐ रसूल) अगर वह इस पर भी तुम्हें झुठलाएं तो (तुम आज़ुर्दा न हो क्योंकि) तुमसे पहले भी बहुत से पैग़म्बर रौशन मौजिज़े और सहीफे़ और नूरानी किताब लेकर आ चुके हैं (मगर) फिर भी लोगों ने आखि़र झुठला ही छोड़ा (184)
हर जान एक न एक (दिन) मौत का मज़ा चखेगी और तुम लोग क़यामत के दिन (अपने किए का) पूरा पूरा बदला भर पाओगे बस जो शख़्स जहन्नुम से हटा दिया गया और बहिश्त में पहुचा दिया गया बस वही कामयाब हुआ और दुनिया की (चन्द रोज़ा) जि़न्दगी धोखे की टट्टी के सिवा कुछ नहीं (185)
(मुसलमानों) तुम्हारे मालों और जानों का तुमसे ज़रूर इम्तेहान लिया जाएगा और जिन लोगो को तुम से पहले किताबे ख़ुदा दी जा चुकी है (यहूद व नसारा) उनसे और मुशरेकीन से बहुत ही दुख दर्द की बातें तुम्हें ज़रूर सुननी पड़ेंगी और अगर तुम (उन मुसीबतों को) झेल जाओगे और परहेज़गारी करते रहोगे तो बेशक ये बड़ी हिम्मत का काम है (186)
और (ऐ रसूल) इनको वह वक़्त तो याद दिलाओ जब ख़ुदा ने एहले किताब से एहद व पैमान लिया था कि तुम किताबे ख़ुदा को साफ़ साफ़ बयान कर देना और (ख़बरदार) उसकी कोई बात छुपाना नहीं मगर इन लोगों ने (ज़रा भी ख़्याल न किया) और उनको बसे पुश्त फेंक दिया और उसके बदले में (बस) थोड़ी सी क़ीमत हासिल कर ली बस ये क्या ही बुरा (सौदा) है जो ये लोग ख़रीद रहे हैं (187)
(ऐ रसूल) तुम उन्हें ख़्याल में भी न लाना जो अपनी कारस्तानी पर इतराए जाते हैं और किया कराया ख़ाक नहीं (मगर) तारीफ़ के ख़ास्तगार {चाहते} हैं बस तुम हरगिज़ ये ख़्याल न करना कि इनको अज़ाब से छुटकारा है बल्कि उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है (188)
और आसमान व ज़मीन सब ख़ुदा ही का मुल्क है और ख़ुदा ही हर चीज़ पर क़ादिर है (189)
इसमें तो शक ही नहीं कि आसमानों और ज़मीन की पैदाइश और रात दिन के फेर बदल में अक़्लमन्दों के लिए (क़ुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानिया हैं (190)

और (ऐ रसूल) इनको वह वक़्त तो याद दिलाओ

Written By आपका अख्तर खान अकेला on मंगलवार, 28 मई 2019 | 6:47 am

जो लोग (यहूद) ये कहते हैं कि ख़ुदा तो कंगाल है और हम बड़े मालदार हैं ख़ुदा ने उनकी ये बकवास सुनी उन लोगों ने जो कुछ किया उसको और उनका पैग़म्बरों को नाहक़ क़त्ल करना हम अभी से लिख लेते हैं और (आज तो जो जी में कहें मगर क़यामत के दिन) हम कहेंगे कि अच्छा तो लो (अपनी शरारत के एवज़ में) जलाने वाले अज़ाब का मज़ा चखो ((181)
ये उन्हीं कामों का बदला है जिनको तुम्हारे हाथों ने (ज़ादे आख़ेरत बना कर) पहले से भेजा है वरना ख़ुदा तो कभी अपने बन्दों पर ज़ुल्म करने वाला नहीं (182)
(यह वही लोग हैं) जो कहते हैं कि ख़ुदा ने तो हमसे वायदा किया है कि जब तक कोई रसूल हमें ये (मौजिज़ा) न दिखा दे कि वह कुरबानी करे और उसको (आसमानी) आग आकर चट कर जाए उस वक़्त तक हम ईमान न लाएंगें (ऐ रसूल) तुम कह दो कि (भला) ये तो बताओ बहुतेरे पैग़म्बर मुझसे क़ब्ल तुम्हारे पास वाजे़ व रौशन मौजिज़ात और जिस चीज़ की तुमने (उस वक़्त) फ़रमाइश की है (वह भी) लेकर आए फिर तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो तुमने उन्हें क्यों क़त्ल किया (183)
(ऐ रसूल) अगर वह इस पर भी तुम्हें झुठलाएं तो (तुम आज़ुर्दा न हो क्योंकि) तुमसे पहले भी बहुत से पैग़म्बर रौशन मौजिज़े और सहीफे़ और नूरानी किताब लेकर आ चुके हैं (मगर) फिर भी लोगों ने आखि़र झुठला ही छोड़ा (184)
हर जान एक न एक (दिन) मौत का मज़ा चखेगी और तुम लोग क़यामत के दिन (अपने किए का) पूरा पूरा बदला भर पाओगे बस जो शख़्स जहन्नुम से हटा दिया गया और बहिश्त में पहुचा दिया गया बस वही कामयाब हुआ और दुनिया की (चन्द रोज़ा) जि़न्दगी धोखे की टट्टी के सिवा कुछ नहीं (185)
(मुसलमानों) तुम्हारे मालों और जानों का तुमसे ज़रूर इम्तेहान लिया जाएगा और जिन लोगो को तुम से पहले किताबे ख़ुदा दी जा चुकी है (यहूद व नसारा) उनसे और मुशरेकीन से बहुत ही दुख दर्द की बातें तुम्हें ज़रूर सुननी पड़ेंगी और अगर तुम (उन मुसीबतों को) झेल जाओगे और परहेज़गारी करते रहोगे तो बेशक ये बड़ी हिम्मत का काम है (186)
और (ऐ रसूल) इनको वह वक़्त तो याद दिलाओ जब ख़ुदा ने एहले किताब से एहद व पैमान लिया था कि तुम किताबे ख़ुदा को साफ़ साफ़ बयान कर देना और (ख़बरदार) उसकी कोई बात छुपाना नहीं मगर इन लोगों ने (ज़रा भी ख़्याल न किया) और उनको बसे पुश्त फेंक दिया और उसके बदले में (बस) थोड़ी सी क़ीमत हासिल कर ली बस ये क्या ही बुरा (सौदा) है जो ये लोग ख़रीद रहे हैं (187)
(ऐ रसूल) तुम उन्हें ख़्याल में भी न लाना जो अपनी कारस्तानी पर इतराए जाते हैं और किया कराया ख़ाक नहीं (मगर) तारीफ़ के ख़ास्तगार {चाहते} हैं बस तुम हरगिज़ ये ख़्याल न करना कि इनको अज़ाब से छुटकारा है बल्कि उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है (188)
और आसमान व ज़मीन सब ख़ुदा ही का मुल्क है और ख़ुदा ही हर चीज़ पर क़ादिर है (189)
इसमें तो शक ही नहीं कि आसमानों और ज़मीन की पैदाइश और रात दिन के फेर बदल में अक़्लमन्दों के लिए (क़ुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानिया हैं (190)

साथ देते ये लोग उस दिन बनिस्बते ईमान के कुफ्र के ज़्यादा क़रीब थे

Written By आपका अख्तर खान अकेला on सोमवार, 27 मई 2019 | 6:35 am

और (तुम्हारा गुमान बिल्कुल ग़लत है) किसी नबी की (हरगिज़) ये शान नहीं कि ख़्यानत करे और ख़्यानत करेगा तो जो चीज़ ख़्यानत की है क़यामत के दिन वही चीज़ (बिलकुल वैसा ही) ख़ुदा के सामने लाना होगा फिर हर शख़्स अपने किए का पूरा पूरा बदला पाएगा और उनकी किसी तरह हक़तल्फ़ी नहीं की जाएगी (161)
भला जो शख़्स ख़ुदा की ख़ुशनूदी का पाबन्द हो क्या वह उस शख़्स के बराबर हो सकता है जो ख़ुदा के गज़ब में गिरफ़्तार हो और जिसका ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या बुरा ठिकाना है (162)
वह लोग खुदा के यहाँ मुख़्तलिफ़ दरजों के हैं और जो कुछ वह करते हैं ख़ुदा देख रहा है (163)
ख़ुदा ने तो ईमानदारों पर बड़ा एहसान किया कि उनके वास्ते उन्हीं की क़ौम का एक रसूल भेजा जो उन्हें खुदा की आयतें पढ़ पढ़ के सुनाता है और उनकी तबीयत को पाकीज़ा करता है और उन्हें किताबे (ख़ुदा) और अक़्ल की बातें सिखाता है अगरचे वह पहले खुली हुयी गुमराही में पडे़ थे (164)
मुसलमानों क्या जब तुमपर (जंगे ओहद) में वह मुसीबत पड़ी जिसकी दूनी मुसीबत तुम (कुफ़्फ़ार पर) डाल चुके थे तो (घबरा के) कहने लगे ये (आफ़त) क़हाँ से आ गयी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ये तो खुद तुम्हारी ही तरफ़ से है (न रसूल की मुख़ालेफ़त करते न सज़ा होती) बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (165)
और जिस दिन दो जमाअतें आपस में गुंथ गयीं उस दिन तुम पर जो मुसीबत पड़ी वह तुम्हारी शरारत की वजह से (ख़ुदा की इजाजत की वजह से आयी) और ताकि ख़ुदा सच्चे ईमान वालों को देख ले (166)
और मुनाफि़क़ों को देख ले (कि कौन है) और मुनाफि़क़ों से कहा गया कि आओ ख़ुदा की राह में जेहाद करो या (ये न सही अपने दुशमन को) हटा दो तो कहने लगे (हाए क्या कहीं) अगर हम लड़ना जानते तो ज़रूर तुम्हारा साथ देते ये लोग उस दिन बनिस्बते ईमान के कुफ्र के ज़्यादा क़रीब थे अपने मुँह से वह बातें कह देते हैं जो उनके दिल में (ख़ाक) नहीं होतीं और जिसे वह छिपाते हैं ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है (167)
(ये वही लोग हैं) जो (आप चैन से घरों में बैठे रहते है और अपने शहीद) भाईयों के बारे में कहने लगे काश हमारी पैरवी करते तो न मारे जाते (ऐ रसूल) उनसे कहो (अच्छा) अगर तुम सच्चे हो तो ज़रा अपनी जान से मौत को टाल दो (168)
और जो लोग ख़ुदा की राह में शहीद किए गए उन्हें हरगिज़ मुर्दा न समझना बल्कि वह लोग जीते जागते मौजूद हैं अपने परवरदिगार की तरफ़ से वह (तरह तरह की) रोज़ी पाते हैं (169)
और ख़ुदा ने जो फ़ज़ल व करम उन पर किया है उसकी (ख़ुशी) से फूले नहीं समाते और जो लोग उनसे पीछे रह गए और उनमें आकर शामिल नहीं हुए उनकी निस्बत ये (ख़्याल करके) ख़ुशियां मनाते हैं कि (ये भी शहीद हों तो) उनपर न किसी कि़स्म का ख़ौफ़ होगा और न आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे (170)

तात्कालिक रूप से चाहे यह देश ,,छद्म राष्ट्रभक्तों , ओरिजनल राष्ट्रभक्तों में बंट गया हो

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 26 मई 2019 | 6:42 am

तात्कालिक रूप से चाहे यह देश ,,छद्म राष्ट्रभक्तों , ओरिजनल राष्ट्रभक्तों में बंट गया हो ,,लेकिन मुझे गर्व है ,मेरे इस भारत महान पर ,भारतियों की महानता पर ,,वोह इस खाई को पाट कर बहुत जल्द नक़ली राष्ट्रभक्तों को फिर से ओरिजनल राष्ट्रभक्त बना ,,देंगे सत्ताये आना ,जाना अलग बात है सत्ता के लिए ,सियासत में किया गिरावट आयी है ,,यह आपने भी देखा है ,मेने भी देखा है ,लेकिन एक ओरिजनल हिन्दुस्तान एक प्यार ,मोहब्बत ,भाईचारा ,सद्भावना वाला हिंदुस्तान ,एक दूसरे को मोहब्ब्बत से गले लगाने वाला हिंदुस्तान ,,छद्म लोकतंत्र से अलग हठ कर एक दूसरे को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देने वाला ओरिजनल हिन्दुस्तान को मेरा सलाम ,मेरा सेल्यूट ,इस जज़्बे ने निराशावाद को खत्म कर आशावाद को बढ़ावा दिया है ,विश्व पटल पर हिदुस्तान मज़बूत से भी मज़बूत आदर्श देश होगा ,इस हक़ीक़त की तरफ एक विचार को ज़िंदा किया है ,दोस्तों आपने मेने ,सभी ने इन पांच सालों में प्यार भी देखा है ,,मोहब्बत भी देखी है ,,लेकिन इस देश में हमेशा अपराध पर इन्साफ ही भारी पढ़ा यही ,,नफरत पर मोहब्बत ने ही जीत हांसिल की है ,,यही वजह है के नफरत की लेखनी लिखने वाले ,,नफरत की भाषा में बेहूदा टिप्पणीकार तन्खा पर काम करने वाले मेरे कई साथी भी बदलकर मेरे साथ मोहब्बत के पैगाम में जुड़ गए है ,कुछ है जो अभी बदले नहीं ,लेकिन अंदर से अंर्तात्मा से वोह मोहब्बत का पैगाम ही इस देश का असली पैगाम है यह कड़वा समझते है ,महसूस करते है ,इंशा अल्लाह मेरी कोशिश जारी है वोह एक दिन ज़रूर बदल कर मोहब्बत के पैगाम के साथ सुर में सुर मिलाएंगे ,,नहीं भी मिलाये तो में उन्हें मोहब्बत के पैगाम की तरफ उनका रुख बदलने की कोशिशों में जुटा रहूँगा ,दोस्तों पिछले दिनों की कुछ घटनाये ऐसी ,हुई ,के भारत के डी ऍन ऐ में जो लोग हिन्दु मुस्लिम की नफरत भरना चाहते थे ,उन्ही लोगों की इन घटंनाओं से आँखे खुली और वोह मोहब्बत का पैगाम ही असली पैगाम ,न हिन्दू न मुसलमान के नारे के साथ सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे ,,,एक घटना ,एक ऑटो चालक रोज़ेदार ने हिन्दू बहन सवारी को बिठाया ,उसका डेढ़ लाख रूपये से भरा बेग ऑटो में ही छूट गया ,,हिन्दू बहन तिनका तिनका जोड़कर जमा इस राशि को पागलों की तरह से तलाशती रही ,लेकिन अचानक एक टोपी पहने रोज़ेदार ,ऑटो से उतरता है ,दीदी यह आपका बेग ,चेक कर लीजिये सामान तो पूरा है ,दीदी नॉट चेक करती है पुरे गिनती है ,,अपनी मेहनत की कमाई इस कलियुग में वापस लौटाए जाने वाले का धर्म देखे बगैर उसे सीने से लगाकर आशीर्वाद देती है ,माला पहना कर इस्तक़बाल करती है ,एक बढ़ी बहन बहकर बेशुमार खुशियों की दुआएं देती है ,एक आसाम की कर्फ्यू घटना ,,एक महिला प्रसव पीढ़ा से ग्रसित उसकी जान पर बन रही है ,सभी हिन्दू समाज के लोग ,फसादात ,हिंसा ,कर्फ्यू के हालात में खामोश है ,बेबस है ,लेकिन एक मुस्लिम रोज़ेदार अचानक ऑटो निकालता है ,हिन्दू बहन को बिठाता है ,हिंसा भरे माहौल में पुलिस कर्फ्यू को तोड़ते हुए उस महिला को लेकर सीधे अस्पताल भागता है ,भीड़ के हमले से उसे बचाकर अस्पताल ले जाता है ,और वोह हिन्दू बहन उसका परिवार इस कमालुद्दीन को गले लगाकर भाईजान आपका शुक्रिया कहकर इस मेरे भारत को महान बना देते है ,,एक मुस्लिम समाज नमाज़ पढ़ना चाहता है ,नमाज़ के लिए जगह नहीं है ,,लेकिन मेरे हिन्दू भाई अपने घरों में ,अपने मंदिर के अहाते में ,इबादत ,इबादत में कोई फ़र्क़ नहीं का नारा बुलंद कर ,मुस्लिम भाइयों को नमाज़ पढ़वाते है ,,यह कोई छोटी बढ़ी घटनाये नहीं है ,मेरे इस देश में ऐसे प्यार मोहब्बत ,मदद के क़िस्से रोज़ हज़ारों हज़ार होते है ,हिन्दू भाई मुस्लिम बहनों की रक्षा करते है ,तो मुस्लिम भाई हिन्दू बहनों के भाई का पूरा धर्म निभाते है ,,एक दूसरे के त्योहारों में ,सुख दुःख में रोज़ शामिल होकर नफरत बाज़ों के मुंह पर रोज़ करारा तमाचा जड़ते है ,दोस्तों मेने ऑटो चालक की तस्वीर सोशल मीडिया पर वाइरल की ,हज़ारों हज़ार लोगों ने लाइक किया ,एक हज़ार के लगभग लोगों ने इसे शेयर किया ,हज़ार के लगभग लोगों ने तरह तरह के मोहब्बत के पैगाम की शाबाशी वाली टिप्पणियां की ,,कुछ नफरतबाज़ जो दिल से नहीं सिर्फ वेतन के लिए काम करते है ,किसी भी ट्वीट को पकड़कर उसके खिलाफ उन्हें सिर्फ अमर्यादित टिप्पणी करने के लिए रुपया मिलता है ,वोह बेचारे अलबत्ता उनके नियोक्ता के कारण टिपणी नहीं कर सके लेकिन मुझे यक़ीन है मेरे वोह भाई भी ऐसा ही हिंदुस्तान चाहते है इस घटना पर वोह भी दिल से टिप्पणी करना चाहते थे ,लेकिन मजबूरीवश उन्होंने ऐसा नहीं किया ,फिर भी उनके अंदर के जज़्बे को में पहचान सकता हूँ वोह जब भी तनख्वाह की टिप्पणी का लालच मोहभंग करेंगे ,इंशा अल्लाह अपने मोहब्बत के पैगाम के सुर में सुर मिलाकर बात करेंगे ,राजनैतिक टिप्पणियों का जवाब नफरत से देना ऐसे सभी लोगों का फ़र्ज़ हो सकता है ,,लेकिन मोहब्बत के पैगाम को तो स्वीकार करना ही चाहिए बिना किसी टिका टिप्पणी के और अगर फिर भी कोई चाहे में रहूँ ,या कोई और तो वोह फिर खुद का ,कांग्रेस का ,भाजपा का किसी भी सियासी दल का ,हिन्दू ,,या मुसलमान ,या किसी भी धर्म का तो क्या भारतीय भी नहीं हो सकता ,,तो जनाब प्लीज़ मान जाइये ना ,,मान जाइये ना ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

तुम (सा) नरमदिल (सरदार) उनको मिला

(तुम घबराओ नहीं) हम अनक़रीब तुम्हारा रोब काफि़रों के दिलों में जमा देंगे इसलिए कि उन लोगों ने ख़ुदा का शरीक बनाया (भी तो) उस चीज़ बुत को जिसे ख़ुदा ने किसी कि़स्म की हुकूमत नहीं दी और (आखि़रकार) उनका ठिकाना दोज़ख़ है और ज़ालिमों का (भी क्या) बुरा ठिकाना है (151)
बेशक खुदा ने (जंगे ओहद में भी) अपना (फतेह का) वायदा सच्चा कर दिखाया था जब तुम उसके हुक्म से (पहले ही हमले में) उन (कुफ़्फ़ार) को खू़ब क़त्ल कर रहे थे यहाँ तक की तुम्हारे पसन्द की चीज़ (फ़तेह) तुम्हें दिखा दी इसके बाद भी तुमने (माले ग़नीमत देखकर) बुज़दिलापन किया और हुक्में रसूल (स०) (मोर्चे पर जमे रहने) में झगड़ा किया और रसूल की नाफ़रमानी की तुममें से कुछ तो तालिबे दुनिया हैं (कि माले ग़नीमत की तरफ़) से झुक पड़े और कुछ तालिबे आखेरत (कि रसूल पर अपनी जान फि़दा कर दी) फिर (बुज़दिलेपन ने) तुम्हें उन (कुफ़्फ़ार) की की तरफ से फेर दिया (और तुम भाग खड़े हुए) उससे ख़ुदा को तुम्हारा (इमान अख़लासी) आज़माना मंज़ूर था और (इसपर भी) ख़ुदा ने तुमसे दरगुज़र की और खुदा मोमिनीन पर बड़ा फ़ज़ल करने वाला है (152)
(मुसलमानों तुम) उस वक़्त को याद करके शर्माओ जब तुम (बदहवास) भागे पहाड़ पर चले जाते थे और बावजूद दस रसूल (स०) तुम्हारे खुलूस (खड़े) तुमको बुला रहे थे, मगर तुम (जान के डर से) किसी को मुड़ के भी न देखते थे बस (चूकि) रसूल को तुमने (आज़ारदा) किया ख़ुदा ने भी तुमको (उस) रंज की सज़ा में (शिकस्त का) रंज दिया ताकि जब कभी तुम्हारी कोई चीज़ हाथ से जाती रहे या कोई मुसीबत पड़े तो तुम रंज न करो और सब्र करना सीखो और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे ख़बरदार है (153)
फिर ख़ुदा ने इस रंज के बाद तुमपर इत्मिनान की हालत तारी की कि तुममें से एक गिरोह का (जो सच्चे ईमानदार थे) ख़ूब गहरी नींद आ गयी और एक गिरोह जिनको उस वक्त भी (भागने की शर्म से) जान के लाले पड़े थे ख़ुदा के साथ (ख़्वाह मख़्वाह) ज़मानाए जिहालत की ऐसी बदगुमानिया करने लगे और कहने लगे भला क्या ये अम्र (फ़तेह) कुछ भी हमारे इखि़्तयार में है (ऐ रसूल) कह दो कि हर अम्र का इखि़्तयार ख़ुदा ही को है (ज़बान से तो कहते ही है नहीं) ये अपने दिलों में ऐसी बातें छिपाए हुए हैं जो तुमसे ज़ाहिर नहीं करते (अब सुनो) कहते हैं कि इस अम्र (फ़तेह) में हमारा कुछ इखि़्तायार होता तो हम यहाँ मारे न जाते (ऐ रसूल इनसे) कह दो कि तुम अपने घरों में रहते तो जिन जिन की तकदीर में लड़ के मर जाना लिखा था वह अपने (घरों से) निकल निकल के अपने मरने की जगह ज़रूर आ जाते और (ये इस वास्ते किया गया) ताकि जो कुछ तुम्हारे दिल में है उसका इम्तिहान कर दे और ख़ुदा तो दिलों के राज़ खू़ब जानता है (154)
बेशक जिस दिन (जंगे औहद में) दो जमाअतें आपस में गुथ गयीं उस दिन जो लोग तुम (मुसलमानों) में से भाग खड़े हुए (उसकी वजह ये थी कि) उनके बाज़ गुनाहों (मुख़ालफ़ते रसूल) की वजह से शैतान ने बहका के उनके पाँव उखाड़ दिए और (उसी वक़्त तो) ख़ुदा ने ज़रूर उनसे दरगुज़र की बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला बुर्दवार है (155)
ऐ ईमानदारों उन लोगों के ऐसे न बनो जो काफि़र हो गए भाई बन्द उनके परदेस में निकले हैं या जेहाद करने गए हैं (और वहाँ) मर (गए) तो उनके बारे में कहने लगे कि वह हमारे पास रहते तो न मरते ओर न मारे जाते (और ये इस वजह से कहते हैं) ताकि ख़ुदा (इस ख़्याल को) उनके दिलों में (बाइसे) हसरत बना दे और (यू तो) ख़ुदा ही जिलाता और मारता है और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उसे देख रहा है (156)
और अगर तुम ख़ुदा की राह में मारे जाओ या (अपनी मौत से) मर जाओ तो बेशक ख़ुदा की बख़शश और रहमत इस (माल व दौलत) से जिसको तुम जमा करते हो ज़रूर बेहतर है (157)
और अगर तुम (अपनी मौत से) मरो या मारे जाओ (आखि़रकार) ख़ुदा ही की तरफ़ (क़ब्रों से) उठाए जाओगे (158)
(तो ऐ रसूल ये भी) ख़ुदा की एक मेहरबानी है कि तुम (सा) नरमदिल (सरदार) उनको मिला और तुम अगर बदमिज़ाज और सख़्त दिल होते तब तो ये लोग (ख़ुदा जाने कब के) तुम्हारे गिर्द से तितर बितर हो गए होते बस (अब भी) तुम उनसे दरगुज़र करो और उनके लिए मग़फे़रत की दुआ मांगों और (साबिक़ दस्तूरे ज़ाहिरा) उनसे काम काज में मशवरा कर लिया करो (मगर) इस पर भी जब किसी काम को ठान लो तो ख़ुदा ही पर भरोसा रखो (क्योंकि जो लोग ख़ुदा पर भरोसा रखते हैं ख़ुदा उनको ज़रूर दोस्त रखता है (159)
(मुसलमानों याद रखो) अगर ख़ुदा ने तुम्हारी मदद की तो फिर कोई तुमपर ग़ालिब नहीं आ सकता और अगर ख़ुदा तुमको छोड़ दे तो फिर कौन ऐसा है जो उसके बाद तुम्हारी मदद को खड़ा हो और मोमिनीन को चाहिये कि ख़ुदा ही पर भरोसा रखें (160)

और (मुसलमानों तुम ही नहीं) ऐसे पैग़म्बर बहुत से गुज़र चुके

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शनिवार, 25 मई 2019 | 7:16 am

और ये (भी मंजू़र था) कि सच्चे ईमानदारों को (साबित क़दमी की वजह से) निरा खरा अलग कर ले और नाफ़रमानों (भागने वालों) को मटियामेट कर दे (141)
(मुसलमानों) क्या तुम ये समझते हो कि सब के सब बहिश्त में चले ही जाओगे और क्या ख़ुदा ने अभी तक तुममें से उन लोगों को भी नहीं पहचाना जिन्होंने जेहाद किया और न साबित क़दम रहने वालों को ही पहचाना (142)
तुम तो मौत के आने से पहले (लड़ाई में) मरने की तमन्ना करते थे बस अब तुमने उसको अपन आख से देख लिया और तुम अब भी देख रहे हो (143)
(फिर लड़ाई से जी क्यों चुराते हो) और मोहम्मद (स०) तो सिर्फ रसूल हैं (ख़ुदा नहीं) इनसे पहले बहुतेरे पैग़म्बर गुज़र चुके हैं फिर क्या अगर मोहम्मद अपनी मौत से मर जाए या मार डाले जाए तो तुम उलटे पाँव (अपने कुफ्रकी तरफ़) पलट जाओगे और जो उलटे पाव फिरेगा (भी) तो (समझ लो) हरगिज़ ख़ुदा का कुछ भी नहीं बिगड़ेगा और अनक़रीब ख़ुदा का शुक्र करने वालों को अच्छा बदला देगा (144)
और बगै़र हुक्मे ख़ुदा के तो कोई शख़्स मर ही नहीं सकता वक़्ते मुअय्यन तक हर एक की मौत लिखी हुयी है और जो शख़्स (अपने किए का) बदला दुनिया में चाहे तो हम उसको इसमें से दे देते हैं और जो शख़्स आख़ेरत का बदला चाहे उसे उसी में से देंगे और (नेअमत ईमान के) शुक्र करने वालों को बहुत जल्द हम जज़ाए खै़र देंगे (145)
और (मुसलमानों तुम ही नहीं) ऐसे पैग़म्बर बहुत से गुज़र चुके हैं जिनके साथ बहुतेरे अल्लाह वालों ने (राहे खुदा में) जेहाद किया और फिर उनको ख़ुदा की राह में जो मुसीबत पड़ी है न तो उन्होंने हिम्मत हारी न बोदापन किया (और न दुशमन के सामने) गिड़गिड़ाने लगे और साबित क़दम रहने वालों से ख़ुदा उलफ़त रखता है (146)
और लुत्फ़ ये है कि उनका क़ौल इसके सिवा कुछ न था कि दुआए मांगने लगें कि ऐ हमारे पालने वाले हमारे गुनाह और अपने कामों में हमारी ज़्यादतिया माफ़ कर और दुश्मनों के मुक़ाबले में हमको साबित क़दम रख और काफि़रों के गिरोह पर हमको फ़तेह दे (147)
तो ख़ुदा ने उनको दुनिया में बदला (दिया) और आखि़रत में अच्छा बदला ईनायत फ़रमाया और ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता (ही) है (148)
ऐ ईमानदारों अगर तुम लोगों ने काफि़रों की पैरवी कर ली तो (याद रखो) वह तुमको उलटे पाव (कुफ्रकी तरफ़) फेर कर ले जाऐंगे फिर उलटे तुम ही घाटे मेंआ जाओगे (149)
(तुम किसी की मदद के मोहताज नहीं) बल्कि ख़ुदा तुम्हारा सरपरस्त है और वह सब मददगारों से बेहतर है (150)

स्वाभिमान ,सरंक्षण ,रोज़गार ,भूख ,गरीबी ,इन्साफ के लिए कांग्रेस ज़िम्मेदारी से लड़ेगी

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शुक्रवार, 24 मई 2019 | 6:42 am

दोस्तों विश्व के सबसे बढे लोकतंत्र के चुनाव नतीजे सामने है ,,नरेंद्र मोदी तो जीते है ,लेकिन भाजपा हारी है ,लेकिन जो जीता सिकंदर वही कहलाता है ,इसमें कोई शक नहीं के नरेंद्र मोदी ने चुनाव में जीत दर्ज कर खुद को सिकंदर साबित किया है ,उन्हें बधाई ,मुबारकबाद ,लेकिन इस चुनाव में नरेंद्र मोदी चाहे जीत कर सिकंदर बने हो ,लेकिन राहुल गांधी खुद मर्यादाओं में रहकर कांटे की टक्कर देने वाले क़लन्दर साबित हुए है ,चुनाव में हार जीत होती है ,,लेकिन जो जीतता है उसका दिल भी बढ़ा होना चाहिए ,,वर्ष 2014 में भाजपा अटूट बहुमत से जीती ,कई वायदे थे ,कई जुमले थे ,आम जनता को रोज़ी ,रोटी,, कपड़ा ,मकान ,,मुफ्त चिकित्सा ,मुफ्त शिक्षा ,सुरक्षा ,आंतरिक सुरक्षा की उम्मीदें थी ,रोज़गार की उम्मीदें थी ,लेकिन यह सब एक सपना बनकर रह गया ,जनता को मिली मोबलीचिंग ,,जनता को मिली नॉट बंदी ,जनता को मिली पकोड़े तल कर बेरोज़गारी दूर करने की सलाह ,जनता को मिली सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस ,जनता को मिला रिज़र्व बैंक गवर्नर का विवाद ,सीबी आई नियुक्ति का विवाद ,,जनता को मिला गाँधी के हत्यारे की वाहवाही के बयांन ,जनता को लोकपाल पुरे पांच साल नहीं आखरी लम्हों में सुप्रीमकोर्ट की कई फटकारों के बाद लोकपाल मिला ,जनता को बदले की भावना मिली ,,भाषण ,सिर्फ भाषण मिले ,मर्यादाये टूट कर तार तार होती बयानबाजियां मिली ,जो भी हुआ सब देखा ,लेकिन फिर दुबारा चुनाव में इन सब के बावजूद भी जनता का जो इन्साफ हुआ वोह निश्चित ही स्वीकार्य होना चाहिए ,,जनता ने इन सब मुद्दों के बाद भी नरेंद्र मोदी को जिताया है ,अब उनसे इल्तिजा है ,जनता द्वारा दिए गए मेंडेट का वोह सम्मान करे ,,आम जनता को भूख ,करीबी ,रोज़गार ,मकान ,सस्ता सुलभ न्याय ,,आंतरिक सुरक्षा ,सद्भाव ,हर वर्ग की सरकार में भागीदारी ,,सरकारी विभागों में हर वर्ग की सुनवाई का आत्मविश्वास ,जनता को बदले की भावना नहीं मिले ,कोई सनकी आदेश जिससे पूरा देश त्राहि त्राहि पुकारे ऐसा को सनक भरा आदेश नहीं मिले ऐसी जनता की उम्मीद है ,जनता चाहती है देश का विकास हो ,देश प्यार से मोहब्बत से ,सद्भाव से रहे ,,देश की जनता की आज़ादी क़ानूनी दायरे में सुरक्षित हो ,,बस ऐसा कुछ हो जाए तो बात बन जाए ,,,कांग्रेस के राहुल गाँधी का सफर थका नहीं है ,अभी उन्होंने विकट परिस्थितयों में कढ़ा मुक़ाबला किया है ,,जनता का भरोसा जीता है ,,एक सफल चुनावी मैनेजमेंट हांसिल किया है ,जनता का विश्वास ,जनता का प्यार जीता है ,राफेल पर आदरणीय नरेंद्र मोदी साहिब को लगातार बहस के लिए खुली चुनौती दी ,लेकिन मोदी भागते रहे ,,राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस मज़बूत होकर उभरी है ,वोह बात और है गैर भाजपाई वोटों के बिखरजाने से नरेंद्र मोदी की टीम जीत गयी ,लेकिन अब लोकसभा में प्रतिपक्ष का नेता बनाना आदरणीय नरेंद्र मोदी की मजबूरी हो ,जायेगी और एक मज़बूत विपक्ष देश की एक सो पैतीस करोड़ लोगों के अधिकारों का संरक्षक होगा ,देश की जनता के अधिकारों के लिए ,देश की जनता के स्वाभिमान ,सरंक्षण ,रोज़गार ,भूख ,गरीबी ,इन्साफ के लिए कांग्रेस ज़िम्मेदारी से लड़ेगी ,,एक बार फिर कांग्रेस मज़बूत बनकर ,उभरेगी ,बस चुनाव में हारे ,है इसे हमे स्वीकारना होगा ,ई वी एम ,,चुनाव आयोग सभी तरह के मामलों को हमे ताक में रखना होंगे ,अंतर्मन को टटोलना होगा ,आंतरिक प्रबंधन में हम आम आदमी ,आम कार्यकर्ता ,बूथ पर बैठे कार्यकर्ताओं ,बूथ क्षेत्र में रह रहे आम लोगों तक अपनी पकड़ क्यों नहीं बना पाए ,,फिर से इस पकड़ को हम मज़बूत कैसे कर सकते है इस पर हमे पुनर्विचार करना होगा ,,,निश्चित तोर पर चुनाव में हारजीत होती है ,लेकिन हम होंगे कामयाब ,इस नारे के साथ हम आमजनता की सेवा के लक्ष्य के साथ जनता के बीच रहेंगे ,फिर से कामयाब होंगे ,अभी तो पंचायत ,नगर पालिका ,,जिलापरिषद के चुनाव है ,जहाँ हमे अपनी ज़िम्मेदारी दिखाकर खुद को ज़मीनी कार्यकर्ताओं ,,जनता के बीच स्थापित करने की कार्ययोजना तैयार करना है ,,,,,लोकतंत्र के प्रहरी के रूप में एक सच्चे सेवक की भूमिका निभाना होगी ,,लड़ाई झूंठ सच के बीच में है ,इन्साफ अत्याचार के बीच में है ,,मुश्किल ज़रूर है लेकिन यह लड़ाई ना मुमकिन नहीं ,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

ऐसे ही लोगों की जज़ा उनके परवरदिगार की तरफ़ से बख़शिश है

और जहन्नुम की उस आग से डरो जो काफि़रों के लिए तैयार की गयी है (131)
और ख़ुदा और रसूल की फ़रमाबरदारी करो ताकि तुम पर रहम किया जाए (132)
और अपने परवरदिगार के (सबब) बख़शिश और जन्नत की तरफ़ दौड़ पड़ो जिसकी (वुसअत सारे) आसमान और ज़मीन के बराबर है और जो परहेज़गारों के लिये मुहय्या की गयी है (133)
जो ख़ुशहाली और कठिन वक़्त में भी (ख़ुदा की राह पर) ख़र्च करते हैं और गुस्से को रोकते हैं और लोगों (की ख़ता) से दरगुज़र करते हैं और नेकी करने वालों से अल्लाह उलफ़त रखता है (134)
और लोग इत्तिफ़ाक़ से कोई बदकारी कर बैठते हैं या आप अपने ऊपर जु़ल्म करते हैं तो ख़ुदा को याद करते हैं और अपने गुनाहों की माफ़ी मांगते हैं और ख़ुदा के सिवा गुनाहों का बख़्शने वाला और कौन है और जो (क़ूसूर) वह (नागहानी) कर बैठे तो जानबूझ कर उसपर हट नहीं करते (135)
ऐसे ही लोगों की जज़ा उनके परवरदिगार की तरफ़ से बख़शिश है और वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं कि वह उनमे हमेशा रहेंगे और (अच्छे) चलन वालों की (भी) ख़ूब खरी मज़दूरी है (136)
तुमसे पहले बहुत से वाक़यात गुज़र चुके हैं बस ज़रा रूए ज़मीन पर चल फिर कर देखो तो कि (अपने अपने वक़्त के पैग़म्बरों को) झुठलाने वालों का अन्जाम क्या हुआ (137)
ये (जो हमने कहा) आम लोगों के लिए तो सिर्फ़ बयान (वाक़या) है मगर और परहेज़गारों के लिए हिदायत व नसीहत है (138)
और मुसलमानों काहिली न करो और (इस) इत्तफ़ाक़ी शिकस्त (ओहद से) कुढ़ो नहीं (क्योंकि) अगर तुम सच्चे मोमिन हो तो तुम ही ग़ालिब और वर रहोगे (139)
अगर (जंगे ओहद में) तुमको ज़ख़्म लगा है तो उसी तरह (बदर में) तुम्हारे फ़रीक़ (कुफ़्फ़ार को) भी ज़ख़्म लग चुका है (उस पर उनकी हिम्मत तो न टूटी) ये इत्तफ़ाक़ाते ज़माना हैं जो हम लोगों के दरमियान बारी बारी उलट फेर किया करते हैं और ये (इत्तफ़ाक़ी शिकस्त इसलिए थी) ताकि ख़ुदा सच्चे ईमानदारों को (ज़ाहिरी) मुसलमानों से अलग देख लें और तुममें से बाज़ को दरजाए शहादत पर फ़ायज़ करे और ख़ुदा (हुक्मे रसूल से) सरताबी करने वालों को दोस्त नहीं रखता (140)

अगर तुम साबित क़दम रहो

Written By आपका अख्तर खान अकेला on गुरुवार, 23 मई 2019 | 6:31 am

से दो गिरोहों ने ठान लिया था कि पसपाई करें और फिर (सॅभल गए) क्योंकि ख़ुदा तो उनका सरपरस्त था और मोमिनीन को ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिये (122)
यक़ीनन ख़ुदा ने जंगे बदर में तुम्हारी मदद की (बावजूद के) तुम (दुश्मन के मुक़ाबले में) बिल्कुल बे हक़ीक़त थे (फिर भी) ख़ुदा ने फतेह दी (123)
बस तुम ख़ुदा से डरते रहो ताकि (उनके) शुक्रगुज़ार बनो (ऐ रसूल) उस वक़्त तुम मोमिनीन से कह रहे थे कि क्या तुम्हारे लिए काफ़ी नहीं है कि तुम्हारा परवरदिगार तीन हज़ार फ़रिश्ते आसमान से भेजकर तुम्हारी मदद करे हाँ (ज़रूर काफ़ी है) (124)
बल्कि अगर तुम साबित क़दम रहो और (रसूल की मुख़ालेफ़त से) बचो और कुफ़्फ़ार अपने (जोश में) तुमपर चढ़ भी आये तो तुम्हारा परवरदिगार ऐसे पांचहज़ार फ़रिश्तों से तुम्हारी मदद करेगा जो निशाने जंग लगाए हुए डटे होंगे और ख़ुदा ने ये मदद सिर्फ़ तुम्हारी ख़ुशी के लिए की है (125)
और ताकि इससे तुम्हारे दिल की ढारस हो और (ये तो ज़ाहिर है कि) मदद जब होती है तो ख़ुदा ही की तरफ़ से जो सब पर ग़ालिब (और) हिकमत वाला है (126)
(और यह मदद की भी तो) इसलिए कि काफि़रों के एक गिरोह को कम कर दे या ऐसा चैपट कर दे कि (अपना सा) मुँह लेकर नामुराद अपने घर वापस चले जायें (127)
(ऐ रसूल) तुम्हारा तो इसमें कुछ बस नहीं चाहे ख़ुदा उनकी तौबा कु़बूल करे या उनको सज़ा दे क्योंकि वह ज़ालिम तो ज़रूर हैं (128)
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब ख़ुदा ही का है जिसको चाहे बख़्शे और जिसको चाहे सज़ा करे और ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (129)
ऐ ईमानदारों सूद दूनादून खाते न चले जाओ और ख़ुदा से डरो कि तुम छुटकारा पाओ (130)

यक़ीनन ख़ुदा ने जंगे बदर में तुम्हारी मदद की

Written By आपका अख्तर खान अकेला on बुधवार, 22 मई 2019 | 6:24 am

और (ऐ रसूल) एक वक़्त वो भी था जब तुम अपने बाल बच्चों से तड़के ही निकल खड़े हुए और मोमिनीन को लड़ाई के मोर्चों पर बिठा रहे थे और खुदा सब कुछ जानता औेर सुनता है (121)
ये उस वक़्त का वाक़या है जब तुममें से दो गिरोहों ने ठान लिया था कि पसपाई करें और फिर (सॅभल गए) क्योंकि ख़ुदा तो उनका सरपरस्त था और मोमिनीन को ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिये (122)
यक़ीनन ख़ुदा ने जंगे बदर में तुम्हारी मदद की (बावजूद के) तुम (दुश्मन के मुक़ाबले में) बिल्कुल बे हक़ीक़त थे (फिर भी) ख़ुदा ने फतेह दी (123)
बस तुम ख़ुदा से डरते रहो ताकि (उनके) शुक्रगुज़ार बनो (ऐ रसूल) उस वक़्त तुम मोमिनीन से कह रहे थे कि क्या तुम्हारे लिए काफ़ी नहीं है कि तुम्हारा परवरदिगार तीन हज़ार फ़रिश्ते आसमान से भेजकर तुम्हारी मदद करे हाँ (ज़रूर काफ़ी है) (124)
बल्कि अगर तुम साबित क़दम रहो और (रसूल की मुख़ालेफ़त से) बचो और कुफ़्फ़ार अपने (जोश में) तुमपर चढ़ भी आये तो तुम्हारा परवरदिगार ऐसे पांचहज़ार फ़रिश्तों से तुम्हारी मदद करेगा जो निशाने जंग लगाए हुए डटे होंगे और ख़ुदा ने ये मदद सिर्फ़ तुम्हारी ख़ुशी के लिए की है (125)
और ताकि इससे तुम्हारे दिल की ढारस हो और (ये तो ज़ाहिर है कि) मदद जब होती है तो ख़ुदा ही की तरफ़ से जो सब पर ग़ालिब (और) हिकमत वाला है (126)
(और यह मदद की भी तो) इसलिए कि काफि़रों के एक गिरोह को कम कर दे या ऐसा चैपट कर दे कि (अपना सा) मुँह लेकर नामुराद अपने घर वापस चले जायें (127)
(ऐ रसूल) तुम्हारा तो इसमें कुछ बस नहीं चाहे ख़ुदा उनकी तौबा कु़बूल करे या उनको सज़ा दे क्योंकि वह ज़ालिम तो ज़रूर हैं (128)
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब ख़ुदा ही का है जिसको चाहे बख़्शे और जिसको चाहे सज़ा करे और ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (129)
ऐ ईमानदारों सूद दूनादून खाते न चले जाओ और ख़ुदा से डरो कि तुम छुटकारा पाओ (130)

ऐ ईमानदारों अपने (मोमिनीन) के सिवा (गै़रो को) अपना राज़दार न बनाओ

Written By आपका अख्तर खान अकेला on मंगलवार, 21 मई 2019 | 8:52 pm

(मुसलमानों) ये लोग मामूली अज़ीयत के सिवा तुम्हें हरगिज़ ज़रर नही पहुचा सकते और अगर तुमसे लड़ेंगे तो उन्हें तुम्हारी तरफ़ पीठ ही करनी होगी और फिर उनकी कहीं से मदद भी नहीं पहुचेगी (111)
और जहाँ कहीं हत्ते चढ़े उनपर रूसवाई की मार पड़ी मगर ख़ुदा के अहद (या) और लोगों के अहद के ज़रिये से (उनको कहीं पनाह मिल गयी) और फिर हेरफेर के खुदा के गज़ब में पड़ गए और उनपर मोहताजी की मार (अलग) पड़ी ये (क्यों) इस सबब से कि वह ख़ुदा की आयतों से इन्कार करते थे और पैग़म्बरों को नाहक़ क़त्ल करते थे ये सज़ा उसकी है कि उन्होंने नाफ़रमानी की और हद से गुज़र गए थे (112)
और ये लोग भी सबके सब यकसा नहीं हैं (बल्कि) एहले किताब से कुछ लोग तो ऐसे हैं कि (ख़ुदा के दीन पर) इस तरह साबित क़दम हैं कि रातों को ख़ुदा की आयतें पढ़ा करते हैं और वह बराबर सजदे किया करते हैं (113)
खुदा और रोज़े आख़ेरत पर ईमान रखते हैं और अच्छे काम का तो हुक्म करते हैं और बुरे कामों से रोकते हैं और नेक कामों में दौड़ पड़ते हैं और यही लोग तो नेक बन्दों से हैं (114)
और वह जो कुछ नेकी करेंगे उसकी हरगिज़ नाक़द्री न की जाएगी और ख़ुदा परहेज़गारों से खू़ब वाकि़फ़ है (115)
बेशक जिन लोगों ने कुफ्रइख़्तेयार किया ख़ुदा (के अज़ाब) से बचाने में हरगिज़ न उनके माल ही कुछ काम आएंगे न उनकी औलाद और यही लोग जहन्नुमी हैं और हमेशा उसी में रहेंगे (116)
दुनिया की चन्द रोज़ा जि़न्दगी में ये लोग जो कुछ (खि़लाफ़े शरा) ख़र्च करते हैं उसकी मिसाल अन्धड़ की मिसाल है जिसमें बहुत पाला हो और वह उन लोगों के खेत पर जा पड़े जिन्होंने (कुफ्रकी वजह से) अपनी जानों पर सितम ढाया हो और फिर पाला उसे मार के (नास कर दे) और ख़ुदा ने उनपर जुल्म कुछ नहीं किया बल्कि उन्होंने आप अपने ऊपर जु़ल्म किया (117)
ऐ ईमानदारों अपने (मोमिनीन) के सिवा (गै़रो को) अपना राज़दार न बनाओ (क्योंकि) ये गै़र लोग तुम्हारी बरबादी में कुछ (कसर) उठा नहीं रखेंगे (बल्कि जितना ज़्यादा तकलीफ़) में पड़ोगे उतना ही ये लोग ख़ुश होंगे दुश्मनी तो उनके मुह से टपकती है और जो (बुग़ज़ व हसद) उनके दिलों में भरा है वह कहीं उससे बढ़कर है हमने तुमसे (अपने) एहकाम साफ़ साफ़ बयान कर दिये अगर तुम समझ रखते हो (118)
ऐ लोगों तुम ऐसे (सीधे) हो कि तुम उनसे उलफ़त रखतो हो और वह तुम्हें (ज़रा भी) नहीं चाहते और तुम तो पूरी किताब (ख़ुदा) पर ईमान रखते हो और वह ऐसे नहीं हैं (मगर) जब तुमसे मिलते हैं तो कहने लगते हैं कि हम भी ईमान लाए और जब अकेले में होते हैं तो तुम पर गुस्से के मारे उॅगलिया काटते हैं (ऐ रसूल) तुम कह दो कि (काटना क्या) तुम अपने गुस्से में जल मरो जो बातें तुम्हारे दिलों में हैं बेशक ख़ुदा ज़रूर जानता है (119)
(ऐ ईमानदारों) अगर तुमको भलाई छू भी गयी तो उनको बुरा मालूम होता है और जब तुमपर कोई भी मुसीबत पड़ती है तो वह ख़ुश हो जाते हैं और अगर तुम सब्र करो और परहेज़गारी इख़्तेयार करो तो उनका फ़रेब तुम्हें कुछ भी ज़रर नहीं पहुचाएगा (क्योंकि) ख़ुदा तो उनकी कारस्तानियों पर हावी है (120)

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