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पेट की आग

Written By Bisari Raahein on मंगलवार, 30 अप्रैल 2019 | 8:03 pm

मौलिक रचना

कविता का शीर्षक - पेट की आग

तप रहा है
सूरज बहुत
आग रही
है बरस ।
जला रहा
सब कुछ
नहीं करता
कोई तरस ।
पशु-पक्षी भी
दुबके पड़े हैं
किसी न किसी
छाँव में ।
गली – नुक्कड़
सुन्न हैं सब
जैसे रहता ही
न हो कोई
गाँव में ।
मुंह – सिर
गमछे से लपेटे
वो चला रहा
कुदाल है ।
अपने आप से
बातें करता
विचारों का बुन रहा
जाल है ।
सोचता है कभी
सब कुछ छोड़
जाऊं भाग ....
पर
जानता है वो
“कायत”
ये आग तो कुछ नहीं
सबसे बड़ी होती है
पेट की आग.....

कृष्ण कायत
मंड़ी डबवाली ।

ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है

और बाज़ बन्दे ऐसे हैं कि जो दुआ करते हैं कि ऐ मेरे पालने वाले मुझे दुनिया में नेअमत दे और आखि़रत में सवाब दे और दोज़ख़ की आग से बचा (201)
यही वह लोग हैं जिनके लिए अपनी कमाई का हिस्सा चैन है (202)
और ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है और इन गिनती के चन्द दिनों तक (तो) ख़ुदा का जि़क्र करो फिर जो शख्स जल्दी कर बैठै और (मिना) से और दो ही दिन में चल ख़ड़ा हो तो उस पर भी गुनाह नहीं है और जो (तीसरे दिन तक) ठहरा रहे उस पर भी कुछ गुनाह नही लेकिन यह रियायत उसके वास्ते है जो परहेज़गार हो, और खु़दा से डरते रहो और यक़ीन जानो कि एक दिन तुम सब के सब उसकी तरफ क़ब्रों से उठाए जाओगे (203)
ऐ रसूल बाज़ लोग मुनाफिक़ीन से ऐसे भी हैं जिनकी चिकनी चुपड़ी बातें (इस ज़रा सी) दुनयावी जि़न्दगी में तुम्हें बहुत भाती है और वह अपनी दिली मोहब्बत पर ख़ुदा को गवाह मुक़र्रर करते हैं हालाकि वह तुम्हारे दुश्मनों में सबसे ज़्यादा झगड़ालू हैं (204)
और जहाँ तुम्हारी मोहब्बत से मुँह फेरा तो इधर उधर दौड़ धूप करने लगा ताकि मुल्क में फ़साद फैलाए और ज़राअत {खेती बाड़ी} और मवेषी का सत्यानास करे और ख़ुदा फसाद को अच्छा नहीं समझता (205)
और जब कहा जाता है कि ख़ुदा से डरो तो उसे ग़ुरुर गुनाह पर उभारता है बस ऐसे कम्बख़्त के लिए जहन्नुम ही काफ़ी है और बहुत ही बुरा ठिकाना है (206)
और लोगों में से ख़ुदा के बन्दे कुछ ऐसे हैं जो ख़़ुदा की (ख़ुशनूदी) हासिल करने की ग़रज़ से अपनी जान तक बेच डालते हैं और ख़ुदा ऐसे बन्दों पर बड़ा ही शफ़्क़्क़त वाला है (207)
ईमान वालों तुम सबके सब एक बार इस्लाम में (पूरी तरह ) दाखि़ल हो जाओ और शैतान के क़दम ब क़दम न चलो वह तुम्हारा यक़ीनी ज़ाहिर ब ज़ाहिर दुश्मन है (208)
फिर जब तुम्हारे पास रौशन दलीले आ चुकी उसके बाद भी डगमगा गए तो अच्छी तरह समझ लो कि ख़ुदा (हर तरह) ग़ालिब और तदबीर वाला है (209)
क्या वह लोग इसी के मुन्तजि़र हैं कि सफेद बादल के साय बानो की आड़ में अज़ाबे ख़ुदा और अज़ाब के फ़रिश्ते उन पर ही आ जाए और सब झगड़े चुक ही जाते हालाकि आखि़र कुल उमुर ख़़ुदा ही की तरफ रुजू किए जाएँगे (210)

मुझे गर्व है ,, मुझे खुशी है ,

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 28 अप्रैल 2019 | 7:08 am

मुझे गर्व है ,, मुझे खुशी है ,, मोदी सरकार के खिलाफ मेरे किसी आरोप का भक्तो के पास कोई तार्किक तथ्यात्मक जवाब नही मिला ,, मेरे हर वाजिब तहज़ीब की ज़ुबान में लिखे गए सवाल पर कुछ तंख़य्ये ,, कुछ समर्थक ,, कुछ की बोखलाहट रही ,,झुंझला कर इन लोगों ने भाषा मे भी अपना आपा खोया ,, बदतहजीबी के दायरे तोड़ दिए ,, मेरे हर सवाल के जवाब में सिर्फ इन्होंने बिना जवाब दिए , मेरी पार्टी के ,, देश के लिए शहीद होने वाले ,, त्याग करने वाले , महिला पुरुषों के लिए बेहुदा , अश्लील , तर्कविहीन टिप्पणियां की है जो इनकी परवरिश को झलकाती है , लेकिन यह मेरे भाई है ,, मुझे खुशी है कुछ ने इन्हें सुधारने के लिए आयना दिखाया , तो बहुत उन लोगो पर शर्मिंदगी भी हुई जो खुद को पार्टी के , पदाधिकारी , नेता बताकर अपना वर्चस्व दिखाते है , लेकिन उनके मुंह से इनके अपने नेताओं के लिए , अश्लील बेहुदा टिप्पणियों पर भी उफ्फ तक न निकली ,, क्योंकि यह लोग सही मायनों में ,,,,,?????अख्तर

फिर जब तुम अरक़ान हज बजा ला चुको तो तुम इस तरह जि़क्रे ख़ुदा करो जिस तरह तुम अपने बाप दादाओं का जि़क्र करते हो

और तुम उन (मुशरिकों) को जहाँ पाओ मार ही डालो और उन लोगों ने जहाँ (मक्का) से तुम्हें शहर बदर किया है तुम भी उन्हें निकाल बाहर करो और फितना परदाज़ी (शिर्क) खूँरेज़ी से भी बढ़ के है और जब तक वह लोग (कुफ़्फ़ार) मस्जि़द हराम (काबा) के पास तुम से न लडे़ तुम भी उन से उस जगह न लड़ों बस अगर वह तुम से लड़े तो बेखटके तुम भी उन को क़त्ल करो काफि़रों की यही सज़ा है (191)
फिर अगर वह लोग बाज़ रहें तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (192)
और उन से लड़े जाओ यहाँ तक कि फ़साद बाक़ी न रहे और सिर्फ़ ख़ुदा ही का दीन रह जाए फिर अगर वह लोग बाज़ रहे तो उन पर ज़्यादती न करो क्यांेकि ज़ालिमों के सिवा किसी पर ज़्यादती (अच्छी) नहीं (193)
हुरमत वाला महीना हुरमत वाले महीने के बराबर है (और कुछ महीने की खुसूसियत नहीं) सब हुरमत वाली चीजे़ एक दूसरे के बराबर हैं बस जो शख्स तुम पर ज़्यादती करे तो जैसी ज़्यादती उसने तुम पर की है वैसी ही ज़्यादती तुम भी उस पर करो और ख़ुदा से डरते रहो और खू़ब समझ लो कि ख़ुदा परहेज़गारों का साथी है (194)
और ख़ुदा की राह में ख़र्च करो और अपने हाथ जान हलाकत मे न डालो और नेकी करो बेशक ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता है (195)
और सिर्फ़ ख़ुदा ही के वास्ते हज और उमरा को पूरा करो अगर तुम बीमारी वगै़रह की वजह से मजबूर हो जाओ तो फिर जैसी क़ुरबानी मयस्सर आये (कर दो) और जब तक कु़रबानी अपनी जगह पर न पहुँय जाये अपने सर न मुँडवाओ फिर जब तुम में से कोई बीमार हो या उसके सर में कोई तकलीफ हो तो (सर मुँडवाने का बदला) रोजे़ या खै़रात या कु़रबानी है बस जब मुतमइन रहों तो जो शख्स हज तमत्तो का उमरा करे तो उसको जो कु़रबानी मयस्सर आये करनी होगी और जिस से कु़रबानी ना मुमकिन हो तो तीन रोजे़ ज़ामानए हज में (रखने होगें) और सात रोजे़ जब तुम वापस आओ ये पूरी दहाई है ये हुक्म उस शख्स के वास्ते है जिस के लड़के बाले मस्जि़दुल हराम (मक्का) के बाशिन्दे न हो और ख़ुदा से डरो और समझ लो कि ख़ुदा बड़ा सख़्त अज़ाब देने वाला है (196)
हज के महीने तो (अब सब को) मालूम हैं (शव्वाल, ज़ीक़ादा, जिलहज) बस जो शख्स इन महीनों में अपने ऊपर हज लाजि़म करे तो (एहराम से आखि़र हज तक) न औरत के पास जाए न कोई और गुनाह करे और न झगडे़ और नेकी का कोई सा काम भी करों तो ख़ुदा उस को खू़ब जानता है और (रास्ते के लिए) ज़ाद राह मुहिय्या करो और सब मे बेहतर ज़ाद राह परहेज़गारी है और ऐ अक़्लमन्दों मुझ से डरते रहो (197)
इस में कोई इल्ज़ाम नहीं है कि (हज के साथ) तुम अपने परवरदिगार के फज़ल (नफ़ा तिजारत) की ख़्वाहिश करो और फिर जब तुम अरफात से चल खड़े हो तो मशअरुल हराम के पास ख़ुदा का जिक्र करो और उस की याद भी करो तो जिस तरह तुम्हे बताया है अगरचे तुम इसके पहले तो गुमराहो से थे (198)
फिर जहाँ से लोग चल खड़े हों वहीं से तुम भी चल खड़े हो और उससे मग़फिरत की दुआ माँगों बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (199)
फिर जब तुम अरक़ान हज बजा ला चुको तो तुम इस तरह जि़क्रे ख़ुदा करो जिस तरह तुम अपने बाप दादाओं का जि़क्र करते हो बल्कि उससे बढ़ कर के फिर बाज़ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि ऐ मेरे परवरदिगार हमको जो (देना है) दुनिया ही में दे दे हालाकि (फिर) आखि़रत में उनका कुछ हिस्सा नहीं (200)

मै पप्पू हु (साल मे 52 बच्चे और सप्ताह मे एक बच्चे को जन्म )

Written By SACCHAI on शनिवार, 27 अप्रैल 2019 | 9:59 pm

मै पप्पू हु (साल मे 52 बच्चे और सप्ताह मे एक बच्चे को जन्म )

एक औरत 52 बच्चे साल मे और सप्ताह मे एक बच्चे को जन्म दे सकती है , अरे ये मै नहीं मगर ग्रेट ग्रेट सायंटिस्ट राहुल बाबा बोल रहे है अब राहुल गांधी कब क्या बोल दे कोई नहीं जानता यहाँ तक की उनको भी पता नहीं होता है की वो क्या बोल रहे है ..... खैर आलू से सोना बनाने की मशीन उन्होने तैयार कर ली है जिसके चलते और उसी मशीन के भरोसे वो कभी 72000 तो कभी 72000 करोड़ रुपये हर गरीब परिवार को देने की बात कर रहे है

https://www.youtube.com/watch?v=39My8xcT7iA

अपनी चुनावी सभा मे 52 बच्चे को एक साल मे जन्म दे सकती है एक महिला ऐसा कहा तब मानो मुझे ऐसा लगा की ये सायंटिस्ट नहीं मगर ........ आग्रा के पागलखाने से भागा कोई पागल तो नहीं बोल रहा ? क्या लंबी लंबी फेंकता है रे ........ और ताजुब्ब की बात ये है की ये कभी अपनी कोई बात का प्रमाण नहीं दे सकता फिर भी इसे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है

लगता है की 100 साल पुरानी पार्टी की ये अर्थी तैयार करके ही रहेगा कभी बताता है की पेंट और शर्ट मे पॉलिटिक्स है तो कभी कहेता है की मै पप्पू हु .......... 

खैर बाते तो होती रहेगी दोस्तो मगर उससे पहले ये वीडियो जरूर देखना और लाइक भी करना और हो सके तो चेनल को सबस्क्राइब करके बेल आइकॉन दबा ही देना




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वकील और आम आदमी की क़ानूनी जानकारी में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ है

वकील और आम आदमी की क़ानूनी जानकारी में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ है ,आम आदमी जज़्बात से चलता है ,जबकि वकील क़ानून ,,संविधान ,न्यायलयों की मर्यादाओं का ज्ञाता भी होता है और उनका मुहाफ़िज़ भी ,लेकिन आये दिन जज़्बात में बहकर सुप्रीमकोर्ट के फैसलों के खिलाफ ,संविधान की भावना ,न्यायिक व्यवस्था के खिलाफ जब वोह किसी आपराधिक मामले में पैरवी नहीं करने का फैसला लेता है तो अजीब सा लगता है ,कोई व्यक्ति अंतरात्मा की आवाज़ पर ऐसा फैसला ले तो समझ में आता है ,लेकिन अगर सामूहिक रूप संगठनात्मक अनुशासन में बाँध कर ऐसी व्यवस्था कर ,किसी विशेष मुक़दमे में पैरवी का बहिष्कार करने की घोषणा की जाए तो विधि सम्मत नहीं लगती ,,,,,,,,,,,,जज़्बात के हिसाब से ,मयादाओं के हिसाब से सामजिक सुधार के हिसाब से व्यक्तिगत व्यक्तिगत ऐसे फैसले लेना वाजिब है ,,,लेकिन क़ानूनी संस्थाए ऐसा किसी भी सूरत में नहीं कर सकती ,,देश का संविधान है ,,प्रत्येक व्यक्ति को आपराधिक मामले में उसके पसंद का वकील करने का अधिकार है ,क़ानूनी अधिकार है ,अगर वोह गरीब है तो ऐसे व्यक्ति को सरकारी खर्च पर ,,वकील दिया जाएगा ,,देश में हर ज़िले में ऐसे लोगो की पैरवी के लिए ,लीगल ऑथोरिटी के पेनल बने है ,,सुप्रीमकोर्ट ने बिना पैरवी के अधीनस्थ न्यायलय द्वारा दी गयी कई सज़ाओं के फैसले बदले है ,ऐसे में अगर हम ,,किसी सनसनीखेज़ ,,नृशंस हत्या के मामले में पैरवी नहीं करने का सामूहिक संस्थागत फैसला लेते है ,,तो ऐसा फैसला मुल्ज़िम को ही मदद करता है ,,होना यह चाहिए ,अपना विरोध जताने के लिए ,जो मृतक है उनको इंसाफ दिलाने के लिए ,,समाज को एक सबक़ दिखाने के लिए सामूहिक रूप से निशुल्क ऐसे मामले में फरियादी की कंसेंट लेकर ,,उसकी तरफ से ईमानदारी से पैरवी करने का फैसला लिया जाए ,अभियुक्त का वकील कोई भी हो यह उसकी नैतिकता का मामला है ,,लेकिन अगर हम उसे भी न्याय का पूरा संवैधानिक अधिकार देकर ,अपनी मज़बूत पैरवी करेंगे ,,गवाहों को सुरक्षा दिलवाएंगे ,गवाहों की विधिक मदद कर उनके बयांन दिलवाएंगे ,सफाई में जिरह के दौरान पूंछे जाने वाले सवालों के जवाब अग्रिम दिलवाएंगे ,,मुक़दमे की ठीक से पैरवी करेंगे तो हम ऐसे नृशंस हत्यारे को म्रत्युदंड दिलवाने में कामयाब हो सकेंगे ,किसी मुक़दमे के फैसले के बहिष्कार से हम अखबारों की सुर्खियां तो बन सकते है ,लेकिन दोस्तों हम वकील है ,,जानते है ,ऐसी पैरवी को क़ानूनी रूप से रोक भी नहीं सकते ,,सुप्रीमकोर्ट ने इसे अवमानना भी क़रार दिया है ,क्योंकि ऐसा करके हम उसके मुक़दमे में उसके न्यायमित्र को दबाव की बात कहने का मौक़ा दे रहे है ,तो फिर हो जाए सभी वकील भीमगंजमंडी कोटा के नृशंश हत्याकांड मामले में ज़मीर की आवाज़ सुनकर ,,मुल्ज़िम के खिलाफ फरियादी की तरफ से फरियादी को इंसाफ दिलाने और दोषी लोगों को एक व्यवस्थित विधिक ट्रायल के बाद फांसी के फंदे पर चढ़ाने ,स्पीडी ट्रायल करवाने का संकल्प ,लेंगे ,लेंगे ना ,ऐसा संकल्प ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

तौबा क़ुबूल की और तुम्हारी ख़ता से दर गुज़र किया

फिर जो सुन चुका उसके बाद उसे कुछ का कुछ कर दे तो उस का गुनाह उन्हीं लोगों की गरदन पर है जो उसे बदल डालें बेशक ख़ुदा सब कुछ जानता और सुनता है (181)
(हाँ अलबत्ता) जो शख्स वसीयत करने वाले से बेजा तरफ़दारी या बे इन्साफी का ख़ौफ रखता है और उन वारिसों में सुलह करा दे तो उस पर बदलने का कुछ गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (182)
ऐ ईमानदारों रोज़ा रखना जिस तरह तुम से पहले के लोगों पर फर्ज़ था उसी तरह तुम पर भी फर्ज़ किया गया ताकि तुम उस की वजह से बहुत से गुनाहों से बचो (183)
(वह भी हमेशा नहीं बल्कि) गिनती के चन्द रोज़ इस पर भी (रोज़े के दिनों में) जो शख्स तुम में से बीमार हो या सफर में हो तो और दिनों में जितने क़ज़ा हुए हो) गिन के रख ले और जिन्हें रोज़ा रखने की कू़वत है और न रखें तो उन पर उस का बदला एक मोहताज को खाना खिला देना है और जो शख्स अपनी ख़ुशी से भलाई करे तो ये उस के लिए ज़्यादा बेहतर है और अगर तुम समझदार हो तो (समझ लो कि फिदये से) रोज़ा रखना तुम्हारे हक़ में बहरहाल अच्छा है (184)
(रोज़ों का) महीना रमज़ान है जिस में क़ुरान नाजि़ल किया गया जो लोगों का रहनुमा है और उसमें रहनुमाई और (हक़ व बातिल के) तमीज़ की रौशन निषानियाँ हैं (मुसलमानों) तुम में से जो शख्स इस महीनें में अपनी जगह पर हो तो उसको चाहिए कि रोज़ा रखे और जो शख्स बीमार हो या फिर सफ़र में हो तो और दिनों में रोज़े की गिनती पूरी करे ख़ुदा तुम्हारे साथ आसानी करना चाहता है और तुम्हारे साथ सख़्ती करनी नहीं चाहता और (शुमार का हुक्म इस लिए दिया है) ताकि तुम (रोज़ो की) गिनती पूरी करो और ताकि ख़ुदा ने जो तुम को राह पर लगा दिया है उस नेअमत पर उस की बड़ाई करो और ताकि तुम शुक्र गुज़ार बनो (185)
(ऐ रसूल) जब मेरे बन्दे मेरा हाल तुमसे पूछे तो (कह दो कि) मै उन के पास ही हूँ और जब मुझसे कोई दुआ माँगता है तो मै हर दुआ करने वालों की दुआ (सुन लेता हूँ और जो मुनासिब हो तो) क़ुबूल करता हूँ बस उन्हें चाहिए कि मेरा भी कहना माने) और मुझ पर ईमान लाएँ (186)
ताकि वह सीधी राह पर आ जाए (मुसलमानों) तुम्हारे वास्ते रोज़ों की रातों में अपनी बीवियों के पास जाना हलाल कर दिया गया औरतें (गोया) तुम्हारी चोली हैं और तुम (गोया उन के दामन हो) ख़ुदा ने देखा कि तुम (गुनाह) करके अपना नुकसान करते (कि आँख बचा के अपनी बीबी के पास चले जाते थे) तो उसने तुम्हारी तौबा क़ुबूल की और तुम्हारी ख़ता से दर गुज़र किया बस तुम अब उनसे हम बिस्तरी करो और (औलाद) जो कुछ ख़ुदा ने तुम्हारे लिए (तक़दीर में) लिख दिया है उसे माँगों और खाओ और पियो यहाँ तक कि सुबह की सफेद धारी (रात की) काली धारी से आसमान पर पूरब की तरफ़ तक तुम्हें साफ नज़र आने लगे फिर रात तक रोज़ा पूरा करो और हाँ जब तुम मस्जि़दों में एतेकाफ़ करने बैठो तो उन से (रात को भी) हम बिस्तरी न करो ये ख़ुदा की (मुअय्युन की हुई) हदे हैं तो तुम उनके पास भी न जाना यूँ खुल्लम खुल्ला ख़ुदा अपने एहकाम लोगों के सामने बयान करता है ताकि वह लोग (नाफ़रमानी से) बचें (187)
और आबस में एक दूसरे का माल नाहक़ न खाओ और न माल को (रिश्वत में) हुक्काम के यहाँ झोंक दो ताकि लोगों के माल में से (जो) कुछ हाथ लगे नाहक़ ख़ुर्द बुर्द कर जाओ हालाकि तुम जानते हो (188)
(ऐ रसूल) तुम से लोग चाँद के बारे में पूछते हैं (कि क्यो घटता बढ़ता है) तुम कह दो कि इससे लोगों के (दुनयावी) अम्र और हज के अवक़ात मालूम होते है और ये कोई भली बात नही है कि घरो में पिछवाड़े से फाँद के) आओ बल्कि नेकी उसकी है जो परहेज़गारी करे और घरों में आना हो तो) उनके दरवाजो़ं की तरफ से आओ और ख़ुदा से डरते रहो ताकि तुम मुराद को पहुँचो (189)
और जो लोग तुम से लड़े तुम (भी) ख़ुदा की राह में उनसे लड़ो और ज़्यादती न करो (क्योंकि) ख़ुदा ज़्यादती करने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता (190)

कुछ माल छोड़ जाएं तो माँ बाप और क़राबतदारों के लिए अच्छी वसीयत करें जो ख़ुदा से डरते हैं उन पर ये एक हक़ है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019 | 6:41 am

और जब उन से कहा जाता है कि जो हुक्म ख़ुदा की तरफ से नाजि़ल हुआ है उस को मानो तो कहते हैं कि नहीं बल्कि हम तो उसी तरीक़े पर चलेंगे जिस पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया अगरचे उन के बाप दादा कुछ भी न समझते हों और न राहे रास्त ही पर चलते रहे हों (170)
और जिन लोगों ने कुफ्र एख़्तेयार किया उन की मिसाल तो उस शख्स की मिसाल है जो ऐसे जानवर को पुकार के अपना हलक़ फाड़े जो आवाज़ और पुकार के सिवा सुनता (समझता ख़ाक) न हो ये लोग बहरे गूँगे अन्धें हैं कि ख़ाक नहीं समझते (171)
ऐ ईमानदारों जो कुछ हम ने तुम्हें दिया है उस में से सुथरी चीज़ें (षौक़ से) खाओं और अगर ख़ुदा ही की इबादत करते हो तो उसी का शुक्र करो (172)
उसने तो तुम पर बस मुर्दा जानवर और खू़न और सूअर का गोश्त और वह जिस पर ज़िबह के वक़्त ख़ुदा के सिवा और किसी का नाम लिया गया हो हराम किया है बस जो शख्स मजबूर हो और सरकशी करने वाला और ज़्यादती करने वाला न हो (और उनमे से कोई चीज़ खा ले) तो उसपर गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (173)
बेशक जो लोग इन बातों को जो ख़ुदा ने किताब में नाजि़ल की है छुपाते हैं और उसके बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनयावी नफ़ा) ले लेतें है ये लोग बस अँगारों से अपने पेट भरते हैं और क़यामत के दिन ख़ुदा उन से बात तक तो करेगा नहीं और न उन्हें (गुनाहों से) पाक करेगा और उन्हीं के लिए दर्दनाक अज़ाब है (174)
यही लोग वह हैं जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही मोल ली और बख्शिश (ख़ुदा की) के बदले अज़ाब बस वह लोग दोज़ख़ की आग को क्योंकर बरदाश्त करेंगे (175)
ये इसलिए कि ख़ुदा ने बरहक़ किताब नाजि़ल की और बेशक जिन लोगों ने किताबे ख़ुदा में रद्दो बदल की वह लोग बड़े पल्ले दरजे की मुख़ालफत में हैं (176)
नेकी कुछ यही थोड़ी है कि नमाज़ में अपने मुँह पूरब या पश्चिम की तरफ़ कर लो बल्कि नेकी तो उसकी है जो ख़ुदा और रोज़े आखि़रत और फरिश्तों और ख़ुदा की किताबों और पैग़म्बरों पर ईमान लाए और उसकी उलफ़त में अपना माल क़राबत दारों और यतीमों और मोहताजो और परदेसियों और माँगने वालों और लौन्डी ग़ुलाम (के गुलू खलासी) में सर्फ करे और पाबन्दी से नमाज़ पढे़ और ज़कात देता रहे और जब कोई एहद किया तो अपने क़ौल के पूरे हो और फ़क्र व फाक़ा रन्ज और घुटन के वक़्त साबित क़दम रहे यही लोग वह हैं जो दावे ईमान में सच्चे निकले और यही लोग परहेज़गार है (177)
ऐ मोमिनों जो लोग (नाहक़) मार डाले जाएँ उनके बदले में तुम को जान के बदले जान लेने का हुक्म दिया जाता है आज़ाद के बदले आज़ाद और ग़ुलाम के बदले ग़ुलाम और औरत के बदले औरत बस जिस (क़ातिल) को उसके ईमानी भाई के़सास की तरफ से कुछ माफ़ कर दिया जाये तो उसे भी उसके क़दम ब क़दम नेकी करना और ख़ुश मआमलती से (ख़ून बहा) अदा कर देना चाहिए ये तुम्हारे परवरदिगार की तरफ आसानी और मेहरबानी है फिर उसके बाद जो ज़्यादती करे तो उस के लिए दर्दनाक अज़ाब है (178)
और ऐ अक़लमनदों केसास (के क़वाएद मुक़र्रर कर देने) में तुम्हारी जि़न्दगी है (और इसीलिए जारी किया गया है ताकि तुम खुनरेज़ी से) परहेज़ करो (179)
(मुसलमानों) तुम को हुक्म दिया जाता है कि जब तुम में से किसी के सामने मौत आ खड़ी हो बशर्ते कि वह कुछ माल छोड़ जाएं तो माँ बाप और क़राबतदारों के लिए अच्छी वसीयत करें जो ख़ुदा से डरते हैं उन पर ये एक हक़ है (180)

छोड़ दो इस गंदी आदत को

Written By Safat Alam Taimi on बुधवार, 24 अप्रैल 2019 | 1:45 pm

ऊपर वाले ने इंसानों को दूसरी सभी प्राणियों पर प्रधानता दी है, समझ बूझ दिया और चेतना प्रदान की है, इस बुद्धि द्वारा मनुष्य अच्छाई और बुराई, लाभ और हानि में अंतर कर सकता है। जबकि बुद्धि से वंचित इंसान जानवरों की सी हरकतें करने लगता है। बल्कि जानवर भी उससे बेहतर होते हैं, जो आदमी बुद्धि खो दे वह अपने घर, परिवार और समाज के लिए बोझ बन जाता है।
लेकिन विडंबना यह है कि आज की दुनिया जिसे सभ्य और प्रगतिशील दुनिया का नाम दिया जाता है, इस दुनिया में रहने वाले कितने तथाकथित सभ्य लोग पागलों की नक़्क़ाली करते हैं, शराब का सेवन और मदिरापान का उपयोग करके अपनी बुद्धि को अपने पैरों तले रौंदते हैं। फिर वे अपनी मानवता खो कर पशुओं जैसा व्यवहार करने लगते हैं, स्वयं पर नियंत्रण खो बैठते हैं, खुद को हानि पहुंचाते हैं, उनकी ज़ींदगी में उनके बच्चे अनाथ हो जाते और उनकी पत्नि विधवा हो जाती है। ऐसे लोग जीवन की पांच प्रमुख आवश्यकताओं का खून करते हैं, धर्म का खून करते हैं, माल बर्बाद करते हैं, इज़्ज़त का हनन करते हैं, उनके सामने माँ बहन और बेटी का कोई सम्मान नहीं होता, वह नशे में दरिंदे बन जाते हैं, उन्हें न अपनी जान की और न दूसरों की जान की परवाह होती है। वे स्वयं कों,अपने परिवार को और अपने समाज को नुकसान पहुंचाते हैं और परिवार पर बोझ बन जाते हैं।
दुनिया के अपराधियों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने शराब के नशे में धुत होकर बड़े बड़े अपराध किए हैं। लेकिन फिर भी शराबी स्वयं को सभ्य समझता है, यह मूर्खता नहीं तो और क्या है।?
शराबी शराब पी कर अपने शरीर को गंवाता है, अपने स्वास्थ्य का खून करता हैः
बी बी सी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि शराब हर तरीक़े से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और अधिक या कम पीने से कोई अंतर नहीं पड़ता।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि शराब से हर साल दुनिया भर में तीन मिलियन लोग मरते हैं।
दुनिया भर में मरने वाले लोगों में हर बीस में से एक व्यक्ति की मृत्यु का कारण शराब पीना होता है।
इस्लाम ने शराब को वर्जित ठहराया है। क़ुरआन ने कहाः
“ऐ ईमान लाने वालो! ये शराब और जुआ और देवस्थान और पाँसे तो गन्दे शैतानी काम है। अतः तुम इनसे अलग रहो, ताकि तुम सफल हो। शैतान तो बस यही चाहता है कि शराब और जुए के द्वारा तुम्हारे बीच शत्रुता और द्वेष पैदा कर दे और तुम्हें अल्लाह की याद से और नमाज़ से रोक दे, तो क्या तुम बाज़ न आओगे?।”
यह पहला मोक़ा था जब शराब के हराम होने का आदेश उतरा था, मदीना में उसकी घोषणा की जाती है, कि आज से शराब हराम कर दी गई, इतिहास गवाह है कि जब सहाबा के कानों तक शराब की निषेधता की आयतें पहुंचीं तो जिसने मुंह में जाम रखा था उगल दिया, अपने हाथ के गिलास को फेंक दिया और मटकों को बहा दिया यहाँ तक कि लगता था कि मदीना में बाढ़ आ चुका है। कोई इंटेलिजेंस नहीं है, कोई जांच एजेंसी नहीं है, कोई धमकी और सख्ती नहीं है, उन्होंने यह भी नहीं कहा कि पहले तहक़ीक़ कर लेते हैं, यह भी नहीं कहा कि इतना जल्द कैसे छोड़ दें कि हम सालों से इसके रसिया हैं।
जरा शराब को हराम ठहराने वाली उपर्युक्त आयत पर विचार करें कि कैसे शराब का उल्लेख देवस्थान और पाँसे के साथ किया जा रहा है, जो मूर्ति पूजा के काम हैं, इसी लिए तो शराब के बारे में कहा गया है: शराबी मूर्ति के पुजारी के जैसे है। फिर इसी आयत में कहा गया कि यह गंदी चीज़ है, अपवित्र चीज़ है। शैतानी प्रक्रिया है, इंसान ऐसा काम नहीं करता, फिर शराब छोड़ने पर सफलता की गारंटी दी गई और यह समझाया गया कि सफल लोग शराब नहीं पीते, शराबी असफल होते हैं, निकम्मे होते हैं। फिर शराब पीने को आपसी दुश्मनी और बैर, द्वेष और ईर्ष्या का कारण ठहराया गया जो प्रत्येक सांसारिक बुराइयों की जड़ है। इसी लिए शराब को भी उम्मुल ख़बाएस (सुनन नसाईः 5666) “बुराइयों की माँ” कहा गया है। क्यों कि जो शराबी बन गया उसमें उसके अलावा दूसरे हराम काम करने की हिम्मत पैदा हो जाती है। फिर कहा गया कि शराब के कारण शैतान अल्लाह के ज़िक्र और नमाज़ से रोकता है। अंत में अल्लाह ने कहाः क्या तुम बाज़ न आओगे? यानी इतने सारे नुकसान सुनने के बावजूद क्या अभी भी तुम शराब पीते रहोगे?
शराब और शराब से जुड़े दस व्यक्तियों पर अल्लाह ने लानत भेजी है: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः
अल्लाह लानत है शराब पर, शराब बनाने वाले पर, शराब पिलाने वाले पर, शराब बेचने वाले पर, शराब ख़रीदने वाले पर, उसे तैयार करने वाले पर, उसे तैयार करवाने वाले पर, उसे उठा कर ले जाने वाले और जिसकी ओर ले जाई जा रही है उन सब पर। (सुनन अबी दाऊदः3489)
मानो केवल शराब पीना ही हराम नहीं बल्कि जो जो उसके सहायक बनेंगे, या किसी पीने, बेचने, लेने देने या दिलवाने वाले क मदद करेंगे सभी अभिशाप के योग्य और पापी होंगे। वे लोग भी इसमें शामिल हैं जो शराब की दुकानों के लिए लाइसंस देते हैं और शराब के अड्डे खोलवाते हैं।
जो चीज़ अधिक मात्रा में नशा लाए उसके संबन्ध में इस्लाम का नियम यह है कि उसकी कम मात्रा भी हराम होगी चाहे उससे नशा आए या नहीं। मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः
“जिस चीज़ की अधिक मात्रा नशा लाए उसकी कम मात्रा भी हराम है।” (सुनन अबी दाऊदः3681)
उसी प्रकार कहाः “हर नशा लाने वाली चीज़ शराब है और हर शराब हराम है।” (सही मुस्लिमः 2003)
इस्लाम ने मात्र शराब को हराम नहीं ठहरा बल्कि जो लोग शराब पीते हैं ऐसे लोगों के लिए सख्त से सख्त सज़ा निर्धारित की, शराब पीने वाले की सज़ा 80 कोड़े तै किए गए हैं, यदि बार बार पीता है तो बार बार सज़ा मिलेगी, और इस्लाम में सज़ा सब के लिए बराबर है चाहे मालदार हो या ग़रीब।
अंत में हम शराब पीने वाले से अनुरोध करेंगे कि अल्लाह के लिए नशा का सेवन छोड़ दो, उन्हें मत देखो जो स्वयं को पढ़ा लिखा कहते हुए शराब पीते हैं सुन लो! वे जाहिल हैं, बुद्धिहीन हैं। अपनी जान पर दया करो, स्वास्थ्य बड़ी बहुमूल्य चीज़ है, पूरी सम्पत्ति लुटाकर भी दोबारा स्वास्थ्य लौटा नहीं सकते। अपनी संतान पर दया करो, अपनी पत्नी पर दया करो, अपने परिवार पर दया करो, अपने समाज पर दया करो और छोड़ दो इस गंदी आदत को।

कोटा एक विहंगम दृष्टि पुस्तक का विमोचन रिसर्च स्कॉलर एवं हाड़ौती के पर्यटन की दृष्टि से उपयोगी--धारीवाल

कोटा एक विहंगम दृष्टि पुस्तक का विमोचन
रिसर्च स्कॉलर एवं हाड़ौती के पर्यटन की दृष्टि से उपयोगी--धारीवाल
के.डी अब्बासी
कोटा 23 अप्रैल।
राजस्थान सरकार में स्वयतशासन मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने कहा कि कोटा एक विहंगम दृृृष्टि पुस्तक रिसर्च स्कॉलर एवं हाड़ौती के पर्यटन की दृष्टि से उपयोगी साबित होगी। यह विचार उन्होंने विश्व पुस्तक दिवस पर मंगलवार को अपने निवास पर पुस्तक का विमोचन कर व्यक्त किये। उन्होंने कहा इस तरह की पुस्तक का लेखन श्रम साध्य कार्य है और लेखक बधाई के पात्र है।
पुस्तक डॉ. प्रभात कुमार सिंघल सेवानिवृत
संयुक्त निदेशक,सूचना एवम जन सम्पर्क विभाग राजस्थान एवं अधिवक्ता अख्तर खान अकेला ने संयुक्त रूप से लिखी है। डॉ. सिंघल ने बताया कि यह पुस्तक एक जिला गजेटियर के रूप में है जिसमे ज़िले के इतिहास, भूगोल, संस्कृति, प्रशासनिक व्यवस्था एवम विकास को 2018 तक अद्यतन करने का प्रयास किया गया है।
प्रारम्भ में लेखकों ने नगरीय विकास मंत्री धारीवाल का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस अवसर पर डॉ. दीपक श्रीवास्तव ,अधीक्षक राजकीय मंडल पुस्तकालय ,वरिष्ठ पत्रकार नरेश विजय वर्गीय ,पत्रकार के डी अब्बासी सहित कई प्रबुद्ध लोग मौजूद थे

जब पेशवा लोग अपने पैरवो से अपना पीछा छुड़ाएगे

बेषक जिन लोगों नें कुफ्र एख़्तेयार किया और कुफ्र ही की हालत में मर गए उन्ही पर ख़ुदा की और फरिश्तो की और तमाम लोगों की लानत है हमेशा इसी फटकार में रहेंगे (161)
न तो उनके अज़ाब ही में तख़्फ़ीफ़ {कमी} की जाएगी (162)
और न उनको अज़ाब से मोहलत दी जाएगी और तुम्हारा माबूद तो वही यकता ख़ुदा है उस के सिवा कोई माबूद नहीं जो बड़ा मेहरबान रहम वाला है (163)
बेशक आसमान व ज़मीन की पैदाइश और रात दिन के रद्दो बदल कश्तियों (जहाज़ों) में जो लोगों के नफे़ की चीज़े (माले तिजारत वगै़रह दरिया) में ले कर चलते हैं और पानी में जो ख़ुदा ने आसमान से बरसाया फिर उस से ज़मीन को मुर्दा (बेकार) होने के बाद जिला दिया (शादाब कर दिया) और उस में हर कि़स्म के जानवर फैला दिये और हवाओं के चलाने में और अब्र में जो आसमान व ज़मीन के दरमियान ख़ुदा के हुक्म से घिरा रहता है (इन सब बातों में) अक़्ल वालों के लिए बड़ी बड़ी निशनियाँ हैं (164)
और बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो ख़़ुदा के सिवा औरों को भी ख़ुदा का मिसल व शरीक बनाते हैं (और) जैसी मोहब्बत ख़ुदा से रखनी चाहिए वैसी ही उन से रखते हैं और जो लोग ईमानदार हैं वह उन से कहीं बढ़ कर ख़ुदा की उलफ़त रखते हैं और काश ज़ालिमों को (इस वक़्त) वह बात सूझती जो अज़ाब देखने के बाद सूझेगी कि यक़ीनन हर तरह की क़ूवत ख़ुदा ही को है और ये कि बेशक ख़ुदा बड़ा सख़्त अज़ाब वाला है (165)
(वह क्या सख़्त वक़्त होगा) जब पेशवा लोग अपने पैरवो से अपना पीछा छुड़ाएगे और अपनी आखों से (चश्में ख़ुद) अज़ाब को देखेगें और उनके बाहमी ताल्लुक़ात टूट जाएँगे (166)
और पैरव कहने लगेंगे कि अगर हमें कहीं फिर (दुनिया में) पलटना मिले तो हम भी उन से इसी तरह अलग हो जायेंगे जिस तरह एैन वक़्त पर ये लोग हम से अलग हो गए यूँ ही ख़ुदा उन के आमाल को दिखाएगा जो उन्हें (सर तापा पास ही) पास दिखाई देंगें और फिर भला कब वह दोज़ख़ से निकल सकतें हैं (167)
ऐ लोगों जो कुछ ज़मीन में हैं उस में से हलाल व पाकीज़ा चीज़ (शौक़ से) खाओ और शैतान के क़दम ब क़दम न चलो वह तो तुम्हारा ज़ाहिर ब ज़ाहिर दुश्मन है (168)
वह तो तुम्हें बुराई और बदकारी ही का हुक्म करेगा और ये चाहेगा कि तुम बे जाने बूझे ख़ुदा पर बोहतान बाँधों (169)
और जब उन से कहा जाता है कि जो हुक्म ख़ुदा की तरफ से नाजि़ल हुआ है उस को मानो तो कहते हैं कि नहीं बल्कि हम तो उसी तरीक़े पर चलेंगे जिस पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया अगरचे उन के बाप दादा कुछ भी न समझते हों और न राहे रास्त ही पर चलते रहे हों (170)

बस तुम हमारी याद रखो तो मै भी तुम्हारा जि़क्र (खै़र) किया करु

Written By आपका अख्तर खान अकेला on मंगलवार, 23 अप्रैल 2019 | 6:10 am

और तीसरा फायदा ये है ताकि तुम हिदायत पाओ मुसलमानों ये एहसान भी वैसा ही है जैसे हम ने तुम में तुमही में का एक रसूल भेजा जो तुमको हमारी आयतें पढ़ कर सुनाए और तुम्हारे नफ़्स को पाकीज़ा करे और तुम्हें किताब क़ुरान और अक़्ल की बातें सिखाए और तुम को वह बातें बतांए जिन की तुम्हें पहले से खबर भी न थी (151)
बस तुम हमारी याद रखो तो मै भी तुम्हारा जि़क्र (खै़र) किया करुगाँ और मेरा शुक्रिया अदा करते रहो और नाशुक्री न करो (152)
ऐ ईमानदारों मुसीबत के वक़्त सब्र और नमाज़ के ज़रिए से ख़ुदा की मदद माँगों बेशक ख़ुदा सब्र करने वालों ही का साथी है (153)
और जो लोग ख़ुदा की राह में मारे गए उन्हें कभी मुर्दा न कहना बल्कि वह लोग जि़न्दा हैं मगर तुम उनकी जि़न्दगी की हक़ीकत का कुछ भी शऊर नहीं रखते (154)
और हम तुम्हें कुछ खौफ़ और भूख से और मालों और जानों और फलों की कमी से ज़रुर आज़माएगें और (ऐ रसूल) ऐसे सब्र करने वालों को खुशख़बरी दे दो (155)
कि जब उन पर कोई मुसीबत आ पड़ी तो वह (बेसाख़्ता) बोल उठे हम तो ख़ुदा ही के हैं और हम उसी की तरफ लौट कर जाने वाले हैं (156)
उन्हीं लोगों पर उनके परवरदिगार की तरफ से इनायतें हैं और रहमत और यही लोग हिदायत याफ़्ता है (157)
बेशक (कोहे) सफ़ा और (कोह) मरवा ख़ुदा की निशानियों में से हैं बस जो शख़्स ख़ानए काबा का हज या उमरा करे उस पर उन दोनो के (दरमियान) तवाफ़ (आमद ओ रफ्त) करने में कुछ गुनाह नहीं (बल्कि सवाब है) और जो शख़्स खुश खुश नेक काम करे तो फिर ख़ुदा भी क़द्रदान (और) वाकि़फ़कार है (158)
बेशक जो लोग हमारी इन रौशन दलीलों और हिदायतों को जिन्हें हमने नाजि़ल किया उसके बाद छिपाते हैं जबकि हम किताब तौरैत में लोगों के सामने साफ़ साफ़ बयान कर चुके हैं तो यही लोग हैं जिन पर ख़ुदा भी लानत करता है और लानत करने वाले भी लानत करते हैं (159)
मगर जिन लोगों ने (हक़ छिपाने से) तौबा की और अपनी ख़राबी की इसलाह कर ली और जो किताबे ख़ुदा में है साफ़ साफ़ बयान कर दिया बस उन की तौबा मै क़ुबूल करता हूँ और मै तो बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान हूँ (160)

पक्षकार और वकीलों को रोज़ परेशांन होना पढ़ रहा है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on सोमवार, 22 अप्रैल 2019 | 6:38 am

राजस्थान के न्यायालयों में वर्तमान राजस्थान सरकार द्वारा ,,संशोधित क्रिमनल ,सिविल रूल पर स्थगन के आदेश निर्देश के बावजूद भी ,,यहाँ न्यायलयों में बढ़ी हुई कोर्ट फीस वसूली की प्रक्रिया के खिलाफ राजस्थान के वकीलों के नेतृत्व द्वारा कोई कारगर क़दम नहीं उठाने से पक्षकार और वकीलों को रोज़ परेशांन होना पढ़ रहा है ,ज्ञातव्य रहे ,राजस्थान में पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में सिविल ,क्रिमनल संशोधन नियम पारित किये गये थे ,जिसके तहत कोर्ट फीस भी पचास गुना तक वृद्धि कर दी गयी ,,राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व सरकार के पारित निर्देशानुसार ,,हायकोर्ट और अधीनस्थ न्यायलय में बढ़ी हुई कोर्ट फीस वसूली जब शुरू की ,तो वकीलों की आँखे खुली और जयपुर सहित कई वकील संगठनों ने राजस्थान सरकार की नयी सरकार के मुखिया अशोक गहलोत को ज्ञापन देकर पक्षकारों पर पढ़े अतिरिक्त भार को रोकने के लिए कोर्ट फीस की वसूली रोकने की मांग की ,मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वकील और पक्षकारों की व्यथा सुनी और तत्काल एक कमेटी का गठन करने के निर्देश जारी कर ,कमेटी की रिपोर्ट आने तक सभी संशोधन पर स्थगन के निर्देश दिए ,,मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के उक्त निर्देशों के तहत ,राजस्थान सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव रवि शंकर श्रीवास्तव ने 25 फरवरी को प्रमुख शासन सचिव विधि विभाग राजस्थान श्री महावीर प्रसाद को उक्त ज्ञापनों का हवाला देते हुए उक्त संशोधन नियमों को स्थगन के निर्देश जारी कर औचित्य पूर्ण कार्यवाही कर सूचित करने के निर्देश भी दिए ,इस पत्र की प्रतिलिपि श्री राजेश शर्मा कर्नल अध्यक्ष दी बार एसोसिएशन जयपुर को भी भेजा ,अफ़सोस की बात यह है के उक्त पत्र जो 25 फरवरी को कोर्ट फीस स्थगन सहित सम्पूर्ण नियम स्थगन बाबत है ,उसकी पालना सुनिश्चित अभी तक नहीं है ,अफ़सोस यह भी है ,के जो लोग ज्ञापन देकर आये ,जिन लोगों के ज्ञापन पर यह आदेश हुए ,उन्होंने उक्त आदेशों के तहत फॉलोअप तक नहीं किया ,नतीजन पत्र जो सरकार का प्रमुख विधि सचिव के नाम निर्देश था वोह पत्र उनके द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंचाया गया भी या नहीं किसी ने जानकारी लेना तक उचित नहीं समझा ,,राजस्थान में एक मात्र कोटा अभिभाषक परिषद के तात्कालिक अध्यक्ष मनोजपुरी के नेतृत्व में बढ़ी हुई कोर्ट फीस की आलोचना कर वापस लेने की मांग को लेकर एक दिन की सांकेतिक हड़ताल भी रखी ,,अफ़सोस यह भी है के इस मामले में जब मेने पूर्व में एक राइट अप लिखा ,अतिरिक्त मुख्य सचिव रवि शंकर श्रीवास्तव से बात की ,विधि सचिव महावीर प्रसाद शर्मा से बात की ,फिर राजेश कर्नल जयपुर बार एसोसिशन के अध्यक्ष साहब से भी इस पत्र के आदेशों की क्रियान्वित का फॉलोअप करने की गुज़ारिश की लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया ,मेने बार कौंसिल वाईस चेयरमेन जनाब शाहीद हसन साहब को भी अवगत कराया ,,उन्होंने गंभीरता दिखाई ,राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से इस मामले में बात की ,लकिन रजिस्ट्रार जनरल हाईकोर्ट ने उन तक ऐसा कोई पत्र पहुंचने से इंकार किया ऐसा शाहिद हसन साहब ने वार्ता के बाद मुझे बताया ,,मेने बार कौंसिल सदस्य युवा तुर्क समस्याएं निर्भीकता से उठाने के लिए मशहूर भाई डॉक्टर महेश शर्मा से इस समस्या के समाधान के लिए ऑपरेशन करने का निवेदन किया ,,डॉक्टर महेश शर्मा साहब ने खुद इस मामले में प्रमुख विधि सचिव महावीर शर्मा साहब से बात की लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला ,,बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान के चेयरमेन की इस मामले में चुप्पी है ,,बारकोंसिलर भी इस मामले में बहुत सख्त कार्यवाही कर कोई कारगर क़दम नहीं उठा पाए है ,कोटा अभिभाषक परिषद के नवनियुक्त अध्यक्ष ,कार्यकारिणीं ने इस मामले में अलबत्ता जिला जज के मार्फत मुख्य न्यायधीश राजस्थान हाईकोर्ट को उक्त पत्र की प्रति भेजकर इसकी क्रियान्विति के निर्देश जारी करने की मांग दोहराई है ,,मेने लगातार माननीय राजस्थान हाईकोर्ट को कई ई मेल भेजकर कार्यवाही की मांग की है ,,डॉक्टर महेश शर्मा ,शाहिद हसन बार कौंसिलर भी इसके लिए प्रयासरत है ,लेकिन नतीजे के नाम पर सिफर है ,पता चला है इस मामले में अब राजस्थान के वकील एक मई को उदयपुर में एकत्रित होकर बढ़ी हुई कोर्ट फ़ीस रोकने के लिए आंदोलन की रुपरेखा तैयार करेंगे ,,मेरी एक बात समझ में नहीं आती ,,बढ़ी हुई कोर्ट फीस की आमदनी राजस्थान सरकार के लिए वसूली जा रही ,है ,,यह बढ़ी हुई कोर्ट फ़ीस राजस्थान सरकार के कोष में जमा हो रही है ,,और इसी राजस्थान सरकार ने 25 फरवरी को प्रमुख शासन सचिव विधि विभाग को ,इस के स्थगन के आदेश जारी किये है ,फिर प्रमुख शासन सचिव विधि विभाग ने यह आदेश अब तक राजस्थान हायकोर्ट को उचित मार्गदर्शन के लिए क्यों नहीं पहुंचाए ,,खेर सरकारी लापरवाही के तहत वोह पत्र राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी नहीं निभाई तो ,वकील साथियों को ,या जिनको इस आदेश की प्रतिलिपि भेजी गयी है वोह खुद इस लापरवाही की शिकायत के साथ संबंधित सरकार द्वारा लिखित स्थगन पत्र की प्रतिलिपि देकर मुख्यन्यायधीश महोदय से अब तक दो महीने गुज़रने के बाद भी क्यों नहीं मिल सके ,क्यों राजस्थान सरकार के इस स्थगन पत्र की क्रियान्विति नहीं करवा सके ,यह एक सवाल है ,जिसे राजस्थान के सभी वकील साथियों को सोचने की ज़रूरत है ,जिसे वोह समझ सके के वकीलों के हमदर्द नेतृत्व वकीलों की समस्याओं के समाधान के लिए कितने सक्रिय है ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

ऐ रसूल तबदीले कि़बला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है

ये वह लोग थे जो सिधार चुके जो कुछ कमा गए उनके लिए था और जो कुछ तुम कमाओगे तुम्हारे लिए होगा और जो कुछ वह कर गुज़रे उसकी पूछगछ तुमसे न होगी (141)
बाज़ अहमक़ लोग ये कह बैठेगें कि मुसलमान जिस कि़बले बैतुल मुक़द्दस की तरफ पहले से सजदा करते थे उस से दूसरे कि़बले की तरफ मुड़ जाने का क्या बाइस हुआ। ऐ रसूल तुम उनके जवाब में कहो कि पूरब पश्चिम सब ख़ुदा का है जिसे चाहता है सीधे रास्ते की तरफ हिदायत करता है (142)
और जिस तरह तुम्हारे कि़बले के बारे में हिदायत की उसी तरह तुम को आदिल उम्मत बनाया ताकि और लोगों के मुक़ाबले में तुम गवाह बनो और रसूल मोहम्मद तुम्हारे मुक़ाबले में गवाह बनें और (ऐ रसूल) जिस कि़बले की तरफ़ तुम पहले सज़दा करते थे हम ने उसको सिर्फ़ इस वजह से कि़बला क़रार दिया था कि जब कि़बला बदला जाए तो हम उन लोगों को जो रसूल की पैरवी करते हैं हम उन लोगों से अलग देख लें जो उलटे पाव फिरते हैं अगरचे ये उलट फेर सिवा उन लोगों के जिन की ख़ुदा ने हिदायत की है सब पर शाक़ ज़रुर है और ख़ुदा ऐसा नहीं है कि तुम्हारे ईमान नमाज़ को जो बैतुलमुक़द्दस की तरफ पढ़ चुके हो बरबाद कर दे बेशक ख़ुदा लोगों पर बड़ा ही रफ़ीक व मेहरबान है। (143)
ऐ रसूल कि़बला बदलने के वास्ते बेशक तुम्हारा बार बार आसमान की तरफ मुँह करना हम देख रहे हैं तो हम ज़रुर तुमको ऐसे कि़बले की तरफ फेर देगें कि तुम नेहाल हो जाओ अच्छा तो नमाज़ ही में तुम मस्जि़दे मोहतरम काबे की तरफ मुँह कर लो और ऐ मुसलमानों तुम जहाँ कही भी हो उसी की तरफ़ अपना मुँह कर लिया करो और जिन लोगों को किताब तौरेत वगै़रह दी गयी है वह बख़ूबी जानते हैं कि ये तबदील कि़बले बहुत बजा व दुरुस्त है और उस के परवरदिगार की तरफ़ से है और जो कुछ वह लोग करते हैं उस से ख़ुदा बेख़बर नही (144)
और अगर एहले किताब के सामने दुनिया की सारी दलीले पेश कर दोगे तो भी वह तुम्हारे कि़बले को न मानेंगें और न तुम ही उनके कि़बले को मानने वाले हो और ख़ुद एहले किताब भी एक दूसरे के कि़बले को नहीं मानते और जो इल्म (क़ुरान) तुम्हारे पास आ चुका है उसके बाद भी अगर तुम उनकी ख़्वाहिश पर चले तो अलबत्ता तुम नाफ़रमान हो जाओगे (145)
जिन लोगों को हमने किताब (तौरैत वग़ैरह) दी है वह जिस तरह अपने बेटों को पहचानते है उसी तरह तरह वह उस पैग़म्बर को भी पहचानते हैं और उन में कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जो दीदए व दानिस्ता {जान बुझकर} हक़ बात को छिपाते हैं (146)
ऐ रसूल तबदीले कि़बला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है बस तुम कहीं ्यक करने वालों में से न हो जाना (147)
और हर फरीक़ के वास्ते एक सिम्त है उसी की तरफ वह नमाज़ में अपना मुँह कर लेता है बस तुम ऐ मुसलमानों झगड़े को छोड़ दो और नेकियों मे उन से लपक के आगे बढ़ जाओ तुम जहाँ कहीं होगे ख़ुदा तुम सबको अपनी तरफ ले आऐगा बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (148)
और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक मक्का से) तो भी नमाज़ मे तुम अपना मुँह मस्जि़दे मोहतरम (काबा) की तरफ़ कर लिया करो और बेषक ये नया कि़बला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है (149)
और तुम्हारे कामों से ख़ुदा ग़ाफिल नही है और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक के मक्का से तो भी) तुम (नमाज़ में) अपना मुँह मस्जि़दे हराम की तरफ कर लिया करो और तुम जहाँ कही हुआ करो तो नमाज़ में अपना मुँह उसी काबा की तरफ़ कर लिया करो (बार बार हुक्म देने का एक फायदा ये है ताकि लोगों का इल्ज़ाम तुम पर न आने पाए मगर उन में से जो लोग नाहक़ हठधर्मी करते हैं वह तो ज़रुर इल्ज़ाम देगें) तो तुम लोग उनसे डरो नहीं और सिर्फ़ मुझसे डरो और (दूसरा फ़ायदा ये है) ताकि तुम पर अपनी नेअमत पूरी कर दूँ (150)

ऐसे लोगों के उद्देश्य को विफल करना चाहिए

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 21 अप्रैल 2019 | 7:55 am

देश में आम आदमी बेहूदगी ,बदज़ुबानी ,,राष्ट्रविरोधी ,संविधान विरोधी ,धर्म शालीनता विरोधी बयांन बाज़ी करे तो बहुत अजीब नहीं लगता ,लेकिन जब साधू ,संत ,साध्वी ,,मौलवी ,मौलाना ,,आलिमा ,,मुफ़्ती ,क़ाज़ी ,,ऐसे घटिया ,राष्ट्रविरोधी ,भावनाये आहत करने वाले बेहूदा बयान देने लगे तो देश के प्रत्येक नागरिक को अफ़सोस होना चाहिए और ऐसे लोगों के उद्देश्य को विफल करना चाहिए क्योंकि यह लोग धार्मिक नहीं खुद के लिए ,खुद की सियासी पार्टी के लिए यह धर्म के नाम पर अधर्म फैला रहे है ,इनसे सावधान होकर इनका सोशल बायकॉट करना चाहिए ,क्योंकि क़ानून ने तो ऐसे लोगों के मुखालिफ कार्यवाही करने के मामले में हाथों में चूढीयां पहन ली है ,,,खेर जनता एक दिन इस गंदगी को ऐसे गंदे लोगों की सियासत को धर्म के नाम पर अधर्म फैलाने वालों को सड़को पर ही निपटेगी ,क्योंकि अति हर अपराध के खात्मे की शुरुआत होती है ,,अख्तर

तुम तो अलबत्ता राहे रास्त पर आ गए

जब उनसे उनके परवरदिगार ने कहा इस्लाम कु़बूल करो तो अजऱ् में की सारे जहाँ के परवरदिगार पर इस्लाम लाया (131)
और इसी तरीके़ की इबराहीम ने अपनी औलाद से वसीयत की और याकू़ब ने (भी) कि ऐ फरज़न्दों खु़दा ने तुम्हारे वास्ते इस दीन (इस्लाम) को पसन्द फरमाया है बस तुम हरगिज़ न मरना मगर मुसलमान ही होकर (132)
(ऐ यहूद) क्या तुम उस वक़्त मौजूद थे जब याकू़ब के सर पर मौत आ खड़ी हुई उस वक़्त उन्होंने अपने बेटों से कहा कि मेरे बाद किसी की इबादत करोगे कहने लगे हम आप के माबूद और आप के बाप दादाओं इबराहीम व इस्माइल व इसहाक़ के माबूद व यकता खु़दा की इबादत करेंगे और हम उसके फरमाबरदार हैं (133)
(ऐ यहूद) वह लोग थे जो चल बसे जो उन्होंने कमाया उनके आगे आया और जो तुम कमाओगे तुम्हारे आगे आएगा और जो कुछ भी वह करते थे उसकी पूछगछ तुमसे नहीं होगी (134)
(यहूदी ईसाई मुसलमानों से) कहते हैं कि यहूद या नसारानी हो जाओ तो राहे रास्त पर आ जाओगे (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि हम इबराहीम के तरीक़े पर हैं जो बातिल से कतरा कर चलते थे और मुशरेकीन से न थे (135)
(और ऐ मुसलमानों तुम ये) कहो कि हम तो खु़दा पर ईमान लाए हैं और उस पर जो हम पर नाजि़ल किया गया (कु़रान) और जो सहीफ़े इबराहीम व इसमाइल व इसहाक़ व याकू़ब और औलादे याकू़ब पर नाजि़ल हुए थे (उन पर) और जो किताब मूसा व ईसा को दी गई (उस पर) और जो और पैग़म्बरों को उनके परवरदिगार की तरफ से उन्हें दिया गया (उस पर) हम तो उनमें से किसी (एक) में भी तफरीक़ नहीं करते और हम तो खु़दा ही के फरमाबरदार हैं (136)
बस अगर ये लोग भी उसी तरह ईमान लाए हैं जिस तरह तुम तो अलबत्ता राहे रास्त पर आ गए और अगर वह इस तरीके़ से मुँह फेर लें तो बस वह सिर्फ तुम्हारी ही जि़द पर है तो (ऐ रसूल) उन (के शर) से (बचाने को) तुम्हारे लिए खु़दा काफ़ी होगा और वह (सबकी हालत) खू़ब जानता (और) सुनता है (137)
(मुसलमानों से कहो कि) रंग तो खु़दा ही का रंग है जिसमें तुम रंगे गए और खुदाई रंग से बेहतर कौन रंग होगा और हम तो उसी की इबादत करते हैं (138)
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो कि क्या तुम हम से खु़दा के बारे झगड़ते हो हालाँकि वही हमारा (भी) परवरदिगार है (वही) तुम्हारा भी (परवरदिगार है) हमारे लिए है हमारी कारगुज़ारियाँ और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारसतानियाँ और हम तो निरेखरे उसी के हैं (139)
क्या तुम कहते हो कि इबराहीम व इसमाइल व इसहाक़ व आलौदें याकू़ब सब के सब यहूदी या नसारानी थे (ऐ रसूल उनसे) पूछो तो कि तुम ज़्यादा वाकि़फ़ हो या खु़दा और उससे बढ़कर कौन ज़ालिम होगा जिसके पास खु़दा की तरफ से गवाही (मौजूद) हो (कि वह यहूदी न थे) और फिर वह छिपाए और जो कुछ तुम करते हो खु़दा उससे बेख़बर नहीं (140)

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज सिमलिया जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोई भी सवाल पूंछते ही ,जाति का बखान कर रोने की रणनीति की खूब खिंचाई की

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शनिवार, 20 अप्रैल 2019 | 6:25 am

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज सिमलिया जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोई भी सवाल पूंछते ही ,जाति का बखान कर रोने की रणनीति की खूब खिंचाई की ,,अशोक गहलोत कोटा लोकसभा क्षेत्र के उम्मीदवार रामनारायण मीणा के पक्ष समर्थन में चुनावी सभा को सिमलिया टोल नाके के पास सम्बोधित कर रहे थे ,,,अशोक गहलोत ने कहा के नरेंद्र मोदी से प्रधानमंत्री की हैसियत से उनके क्रियाकलापों को लेकर जब भी कोई सवाल किया जाता है ,वोह पिछड़े का अपमान का रोना रोने लग जाते है ,उन्होंने कहा मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे उनकी भी इन्होने बहुत आलोचना की है ,उन्होंने कभी नहीं कहा के मोदी सिख समाज का अपमान कर रहे है ,,उन्होंने कहा मोदी राजस्थान में आते है ,,तो खुद मेरे खिलाफ भी बोलते है ,में अतिपिछड़ा वर्ग से आता हूँ ,,मेने कभी नहीं कहा के मोदी अति पिछड़े वर्ग का अपमान करते है ,अशोक गहलोत ने मज़ाक़ उढ़ाते हुए कहा ,लोकतंत्र में जो पदों पर रहते है ,उन पर आरोप लगते है ,और देश में वाक् अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार भी है ,लेकिन नरेंद्र मोदी भारत की जनता का यह लोकतान्त्रिक अधिकार छीन लेना चाहते है ,वोह सिर्फ धर्म ,जाति समाज के नाम पर नफरत फैलाने की बात करते है ,, गहलोत ने कहा कॉग्रेस के राहुल गांधी ने देश के लिए पृथक से किसान बजट लोकसभा में पेश करने का प्रावधान किया है ,,जिसमे किसानों के लिए बजट पर पृथक से रेल बजट की तरह चर्चा होगी और उनके कल्याण के लिए योजनाए तैयार होंगी ,ऐसा राहुल गाँधी की सरकार बनने पर देश में किसानों के कल्याण के लिए पहली बार होगा ,अशोक गहलोत ने सामाजिक न्याय के तहत न्यूनतम 72 हज़ार रूपये साल प्रत्येक व्यक्ति के खाते में जमा होने वाली योजना गरीबों के लिए उत्थान योजना बतायी जबकि ,महानरेगा योजना में काम के दिन बढ़ाने से देश में आंशिक बेरोज़गारी कम करने की योजना बताते हुए उन्होंने तंज़ कसा मोदी सरकार में उद्योग बंद हुए है ,रोज़गार के अवसर बंद हो गए है ,विकास थम गया है ,उन्होंने सैनिकों के शौर्य ,उनकी शहादत पर सियासत कर वोट मांगने की प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए कहा ,इंद्रा जी ने खालिस्तान नहीं बनने दिया ,,पाकिस्तान को सबक़ सिखाया ,लेकिन सैनिकों के शौर्य और शहादत को चुनाव प्रचार का हिस्सा नहीं बनाया ,जबकि कारगिल हो या सर्जिकल स्ट्राइक हो भाजपा इसे मुद्दा बनाती है क्योंकि भाजपा सरकार के पास आम जनता से वोट मांगने के लिए और कोई इनकी उपलब्धि नहीं है ,इसलिए जाति ,धर्म और शहीदों की शहादत को यह गुमराह करने के लिए हथियार बनाते है ,गहलोत ने कहा ,,राजीव जी देश के लिए शहीद हो गये ,इंद्रा जी ने पंजाब के टुकड़े होने से बचाया वोह देश के लिए शहीद हुए ,देश में आज कम्यूटर ,मोबाइल युग ,दुनिया कर लो बंद मुट्ठी में यह राजीव गांधी की देन है ,,,,अशोक गहलोत ने कहा राजस्थान में आप वोटर ने कांग्रेस की सरकार बनाई इसके लिए धन्यवाद ,,,उन्होंने कहा के अब लोकसभा में देश के विकास ,सुखद भविष्य और सुरक्षा के लिए कांग्रेस को भारी वोटों से जिताये ,,गहलोत ने कहा मरीज़ों के मुफ्त इलाज के लिए मुफ्त दवा में हमारी सरकार ने कैंसर ,हार्ट सहित दूसरी दवाओं को भी शामिल कर लिया है ,यह दवाये बहुत महंगी आती है ,इससे राजस्थान के मरीज़ों को काफी लाभ मिलेगा ,गहलोत ने कहा हमारी सरकार ने किसानों के क़र्ज़े माफ़ किये ,,जबकि वर्तमान अनधड़ ,तूफ़ान से हुए नुकसान के लिए केंद्र सरकार की पक्षपातपूर्ण घोषणा है ,जबकि हमारी सरकार गंभीर और उदार है ,,उन्होंने कहा ,,ग्रामीण क्षेत्र में नल के बिल नहीं आएंगे जबकि शहरी क्षेत्र के लिए भी कल्याणकारी योजना है ,,अशोक गहलोत ने कांग्रेस के प्रत्याक्षी रामनारायण मीणा को कांग्रेस के लगातार विधायक रहने ,,ऐक बार सांसद रहने का हवाला देते हुए इन्हे अनुभवी बताया और रामनारायण मीणा के पक्ष में मतदान करने की अपील की ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

एडवोकेट माही माहताब असरार ने आज कोटा लोकसभा चुनाव में अल्पसंख्यक मतदाताओं की नब्ज़ टटोली

एडवोकेट माही माहताब असरार ने आज कोटा लोकसभा चुनाव में अल्पसंख्यक मतदाताओं की नब्ज़ टटोली और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाक़ात कर अल्पसंख्यक बस्तियों में अधिकतम मतदान कांग्रेस के पक्ष में करवाने के टिप्स सुझाये ,,एडवोकेट माहताब असरार राष्ट्रिय अल्पसंख्यक विभाग से कोटा लोकसभा क्षेत्र की पर्यवेक्षक बनाई गयी है ,,माहताब असरार ने आज अल्पसंख्यक विभाग के संभागीय अध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य ऐडवोकेट अख्तर खान अकेला ,,कोटा शहर अध्यक्ष अब्दुल करीम खान प्रदेश कमेटी सदस्य अब्दुल करीम खान ,देहात अल्पसंख्यक विभाग अध्यक्ष साजिद जावेद ,,बूंदी जिला अल्पसंख्यक कांग्रेस अध्यक्ष सहित कई कार्यकर्ताओं ,पदाधिकारियों से कोटा लोकसभा में वोटर्स के रूह्झान ,,उनके मुद्दे ,,उन्हें कांग्रेस के पक्ष में मोटिवेट करने के मामले में चर्चा की ,उन्होंने कोटा लोकसभा की आठ विधानसभा क्षेत्रों का फीडबैक लिया ,,वोह कोटा जिला कांग्रेस कार्यालय में भी मौजूद रही ,उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेसी नरेश विजयवर्गीय से भी कोटा लोकसभा चुनाव की व्यस्थाओं की जानकारी ली जबकि अल्पसंख्यक विभाग के पदाधिकारी मोहम्मद हुसैन गुल्लू भाई ,,गुरमीत सिंह टाक ,सहित कई पदाधिकारियों से भी उन्होंने चर्चा की ,,माहताब असरार दिल्ली में एडवोकेट है वोह कोटा के पूर्व सांसद राज्यसभा सदस्य मौलाना असरारुल हक़ की पुत्री है ,,,माहताब असरार ने सभी पदाधिकारियों ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान अधिक से अधिक करवाने के फार्मूले पर सुझाव भी मांगे है ,वोह आज बूंदी ज़िले में लाखेरी पहुंची जहाँ कांग्रेस प्रत्याक्षी रहे राकेश बोयत सहित कार्यकर्ताओं से चर्चा हुई ,जबकि बूंदी में गुड्डू क़ादरी सहित बूंदी के वरिष्ठ कांग्रेस जनों ,अल्पसंख्यक कार्यकर्ताओं से भी चर्चा हुई ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

जब इबराहीम व इसमाईल ख़ानाए काबा की बुनियादें बुलन्द कर रहे थे

जिन लोगों को हमने किताब (कु़रान) दी है वह लोग उसे इस तरह पढ़ते रहते हैं जो उसके पढ़ने का हक़ है यही लोग उस पर ईमान लाते हैं और जो उससे इनकार करते हैं वही लोग घाटे में हैं (121)
बनी इसराईल मेरी उन नेअमतों को याद करो जो मैंनं तुम को दी हैं और ये कि मैंने तुमको सारे जहाँन पर फज़ीलत दी (122)
और उस दिन से डरो जिस दिन कोई शख़्स किसी की तरफ से न फिदया हो सकेगा और न उसकी तरफ से कोई मुआवेज़ा क़ुबूल किया जाएगा और न कोई सिफारिश ही फायदा पहुचाँ सकेगी, और न लोग मदद दिए जाएँगे (123)
(ऐ रसूल) बनी इसराईल को वह वक़्त भी याद दिलाओ जब इबराहीम को उनके परवरदिगार ने चन्द बातों में आज़माया और उन्होंने पूरा कर दिया तो खु़दा ने फरमाया मैं तुमको (लोगों का) पेशवा बनाने वाला हूँ (हज़रत इबराहीम ने) अजऱ् की और मेरी औलाद में से फरमाया (हाँ मगर) मेरे इस ओहदे पर ज़ालिमों में से कोई शख़्स फ़ायज़ नहीं हो सकता (124)
(ऐ रसूल वह वक़्त भी याद दिलाओ) जब हमने ख़ानए काबा को लोगों के सवाब और पनाह की जगह क़रार दी और हुक्म दिया गया कि इबराहीम की (इस) जगह को नमाज़ की जगह बनाओ और इबराहीम व इसमाइल से अहद व पैमान लिया कि मेरे (इस) घर को तवाफ़ और एतक़ाफ़ और रूकू और सजदा करने वालों के वास्ते साफ सुथरा रखो (125)
और (ऐ रसूल वह वक़्त भी याद दिलाओ) जब इबराहीम ने दुआ माँगी कि ऐ मेरे परवरदिगार इस (शहर) को पनाह व अमन का शहर बना, और उसके रहने वालों में से जो खु़दा और रोज़े आखि़रत पर ईमान लाए उसको तरह-तरह के फल खाने को दें खु़दा ने फरमाया (अच्छा मगर) जो कुफ्र इख़तेयार करेगा उसकी दुनिया में चन्द रोज़ (उन चीज़ो से) फायदा उठाने दूँगा फिर (आख़ेरत में) उसको मजबूर करके दोज़ख़ की तरफ खींच ले जाऊँगा और वह बहुत बुरा ठिकाना है (126)
और (वह वक़्त याद दिलाओ) जब इबराहीम व इसमाईल ख़ानाए काबा की बुनियादें बुलन्द कर रहे थे (और दुआ) माँगते जाते थे कि ऐ हमारे परवरदिगार हमारी (यह खि़दमत) कु़बूल कर बेशक तू ही (दूआ का) सुनने वाला (और उसका) जानने वाला है (127)
(और) ऐ हमारे पालने वाले तू हमें अपना फरमाबरदार बन्दा बना और हमारी औलाद से एक गिरोह (पैदा कर) जो तेरा फरमाबरदार हो, और हमको हमारे हज की जगहों दिखा दे और हमारी तौबा क़ुबूल कर, बेशक तू ही बड़ा तौबा कु़बूल करने वाला मेहरबान है (128)
(और) ऐ हमारे पालने वाले मक्के वालों में उन्हीं में से एक रसूल को भेज जो उनको तेरी आयतें पढ़कर सुनाए और आसमानी किताब और अक़्ल की बातें सिखाए और उन (के नुफ़ूस) के पाकीज़ा कर दें बेशक तू ही ग़ालिब और साहिबे तदबीर है (129)
और कौन है जो इबराहीम के तरीक़े से नफरत करे मगर जो अपने को अहमक़ बनाए और बेशक हमने उनको दुनिया में भी मुन्तखब कर लिया और वह ज़रूर आख़ेरत में भी अच्छों ही में से होगे (130)

*तालियों की गूंज* उसके कानों में

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019 | 7:09 am

*"नया टीचर"*
क्लास में आते ही
नये टीचर ने
बच्चों को
अपना लंबा चौड़ा परिचय दिया
बातों ही बातों में
उसने जान लिया की
लड़कियों के इस क्लास में
सबसे तेज और सबसे आगे
कौन सी लड़की है ?
उसने खामोश सी बैठी
उस लड़की से पूछा
बेटा आपका नाम क्या है ?
लड़की खड़ी हुई और बोली
जी सर , मेरा नाम है जूही !
टीचर ने फिर पूछा..
पूरा नाम बताओ बेटा ?
जैसे उस लड़की ने
नाम मे कुछ छुपा रखा हो
लड़की ने फिर कहा
जी सर , मेरा पूरा नाम जूही ही है
टीचर ने सवाल बदल दिया
और पूछा कि अच्छा
तुम्हारे पापा का नाम बताओ ?
लड़की ने जवाब दिया
जी सर , मेरे पापा का नाम है शमशेर !!
टीचर ने फिर पूछा
अपने पापा का पूरा नाम बताओ
लड़की ने जवाब दिया
मेरे पापा का पूरा नाम
शमशेर ही है सर जी !
अब टीचर कुछ सोचकर बोला
अच्छा अपनी माँ का पूरा नाम बताओ
लड़की ने जवाब दिया
सर जी , मेरी माँ का पूरा नाम है निशा
टीचर के पसीने छूट चुके थे
क्योंकि अब तक
वो उस लड़की की फैमिली के
पूरे बायोडाटा में
जो एक चीज
ढूंढने की कोशिश कर रहा था
वो उसे नही मिली थी !!
उसने आखिरी पैंतरा आजमाया
बोला -अच्छा तुम कितने भाई बहन हो ?
टीचर ने सोचा कि
जो चीज वो ढूंढ रहा है
शायद इसके भाई बहनों के नाम मे वो क्लू मिल जाये ?
लड़की ने टीचर के
इस सवाल का भी
बड़ी मासूमियत से जवाब दिया
बोली -सर जी , मैं अकेली हूँ
मेरे कोई भाई बहन नही है !!
अब टीचर ने
सीधा और निर्णायक सवाल पूछा
बेटे तुम्हारा धर्म और जाति क्या है ?
लड़की ने
इस सीधे से सवाल का भी
सीधा सा जवाब दिया
बोली -सर *मैं एक विद्यार्थी हूँ यही मेरी जाति है*
और *ज्ञान प्राप्त करना ही*
मेरा धर्म है !
मुझे पता है की
अब आप मेरे पेरेंट्स की जाति और धर्म पूछोगे !!
तो मैं आपको बता दूं कि
*मेरे पापा का धर्म है मुझे पढ़ाना*
*और मेरी मम्मी की जरूरतों को*
पूरा करना
और *मेरी मम्मी का धर्म है मेरी देखभाल*
*और मेरे पापा की जरूरतों को*
पूरा करना
लड़की का जवाब सुनकर
टीचर के होश उड़ गये
उसने टेबल पर रखे
पानी के गिलास की ओर देखा
लेकिन उसे उठाकर पीना भूल गया !
तभी लड़की की आवाज
एक बार फिर उसके कानों में
किसी धमाके की तरह गुंजी ....
सर, *मैं विज्ञान की छात्रा हूँ*
और *एक साइंटिस्ट बनना चाहती हूँ !*
*जब अपनी पढ़ाई पूरी कर लुंगी*
*और अपने माँ बाप के*
*सपनों को पूरा कर लुंगी*
*तब कभी फुरसत में*
*सभी धर्मों के अध्ययन में जुटूंगी*
और जो भी धर्म
*विज्ञान की कसौटी* पर
खरा उतरेगा
*उसे अपना लुंगी*
लेकिन अगर
*धर्मग्रंथों के उन पन्नों में*
*एक भी बात विज्ञान के विरुद्ध हुई*
*तो मैं उस पूरी पवित्र किताब को*
*अपवित्र समझूँगी*
और उसे *कूड़े के ढेर में*
फेंक दूंगी !
क्योंकि *साइंस कहता है*
*एक गिलास दूध में*
अगर एक बूंद भी
*केरोसिन* मिली हो तो
*पूरा का पूरा दूध ही बेकार हो* जाता है !
लड़की की बात खत्म होते ही
पूरी क्लास
साथी लड़कियों की
*तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज* उठी !!
टीचर के पसीने छूट चुके थे !!
*तालियों की गूंज* उसके कानों में
गोलियों की गड़गड़ाहट की तरह
सुनाई दे रहे थे !
उसने आँंखों पर लगे
*धर्म और जाति के मोटे चश्मे* को उतार कर
कुछ देर के लिए टेबल पर रख दिया
और पानी का गिलास उठाकर
एक ही सांस में गटक लिया
थोड़ी हिम्मत जुटा कर
लड़की से बिना नजर मिलाये ही बोला !!
बेटा.....
*I Proud of you....*

तेरी सारी *फ़ुर्सत* तेरा *इतवार* कहता है

*तेरी बुराइयों* को हर *अख़बार* कहता है,
और तू मेरे *गांव* को *गँवार* कहता है //
*ऐ शहर* मुझे तेरी *औक़ात* पता है //
तू *चुल्लू भर पानी* को भी *वाटर पार्क* कहता है //
*थक* गया है हर *शख़्स* काम करते करते //
तू इसे *अमीरी* का *बाज़ार* कहता है।
*गांव* चलो *वक्त ही वक्त* है सबके पास !!
तेरी सारी *फ़ुर्सत* तेरा *इतवार* कहता है //
*मौन* होकर *फोन* पर *रिश्ते* निभाए जा रहे हैं //
तू इस *मशीनी दौर* को *परिवार* कहता है //
जिनकी *सेवा* में *खपा* देते थे जीवन सारा,
तू उन *माँ बाप* को अब *भार* कहता है //
*वो* मिलने आते थे तो *कलेजा* साथ लाते थे,
तू *दस्तूर* निभाने को *रिश्तेदार* कहता है //
बड़े-बड़े *मसले* हल करती थी *पंचायतें* //
तु अंधी *भ्रष्ट दलीलों* को *दरबार* कहता है //
बैठ जाते थे *अपने पराये* सब *बैलगाडी* में //
पूरा *परिवार* भी न बैठ पाये उसे तू *कार* कहता है //
अब *बच्चे* भी *बड़ों* का *अदब* भूल बैठे हैं //
तू इस *नये दौर* को *संस्कार* कहता है *........//

(और) ऐ हमारे पालने वाले तू हमें अपना फरमाबरदार बन्दा बना

जिन लोगों को हमने किताब (कु़रान) दी है वह लोग उसे इस तरह पढ़ते रहते हैं जो उसके पढ़ने का हक़ है यही लोग उस पर ईमान लाते हैं और जो उससे इनकार करते हैं वही लोग घाटे में हैं (121)
बनी इसराईल मेरी उन नेअमतों को याद करो जो मैंनं तुम को दी हैं और ये कि मैंने तुमको सारे जहाँन पर फज़ीलत दी (122)
और उस दिन से डरो जिस दिन कोई शख़्स किसी की तरफ से न फिदया हो सकेगा और न उसकी तरफ से कोई मुआवेज़ा क़ुबूल किया जाएगा और न कोई सिफारिश ही फायदा पहुचाँ सकेगी, और न लोग मदद दिए जाएँगे (123)
(ऐ रसूल) बनी इसराईल को वह वक़्त भी याद दिलाओ जब इबराहीम को उनके परवरदिगार ने चन्द बातों में आज़माया और उन्होंने पूरा कर दिया तो खु़दा ने फरमाया मैं तुमको (लोगों का) पेशवा बनाने वाला हूँ (हज़रत इबराहीम ने) अजऱ् की और मेरी औलाद में से फरमाया (हाँ मगर) मेरे इस ओहदे पर ज़ालिमों में से कोई शख़्स फ़ायज़ नहीं हो सकता (124)
(ऐ रसूल वह वक़्त भी याद दिलाओ) जब हमने ख़ानए काबा को लोगों के सवाब और पनाह की जगह क़रार दी और हुक्म दिया गया कि इबराहीम की (इस) जगह को नमाज़ की जगह बनाओ और इबराहीम व इसमाइल से अहद व पैमान लिया कि मेरे (इस) घर को तवाफ़ और एतक़ाफ़ और रूकू और सजदा करने वालों के वास्ते साफ सुथरा रखो (125)
और (ऐ रसूल वह वक़्त भी याद दिलाओ) जब इबराहीम ने दुआ माँगी कि ऐ मेरे परवरदिगार इस (शहर) को पनाह व अमन का शहर बना, और उसके रहने वालों में से जो खु़दा और रोज़े आखि़रत पर ईमान लाए उसको तरह-तरह के फल खाने को दें खु़दा ने फरमाया (अच्छा मगर) जो कुफ्र इख़तेयार करेगा उसकी दुनिया में चन्द रोज़ (उन चीज़ो से) फायदा उठाने दूँगा फिर (आख़ेरत में) उसको मजबूर करके दोज़ख़ की तरफ खींच ले जाऊँगा और वह बहुत बुरा ठिकाना है (126)
और (वह वक़्त याद दिलाओ) जब इबराहीम व इसमाईल ख़ानाए काबा की बुनियादें बुलन्द कर रहे थे (और दुआ) माँगते जाते थे कि ऐ हमारे परवरदिगार हमारी (यह खि़दमत) कु़बूल कर बेशक तू ही (दूआ का) सुनने वाला (और उसका) जानने वाला है (127)
(और) ऐ हमारे पालने वाले तू हमें अपना फरमाबरदार बन्दा बना और हमारी औलाद से एक गिरोह (पैदा कर) जो तेरा फरमाबरदार हो, और हमको हमारे हज की जगहों दिखा दे और हमारी तौबा क़ुबूल कर, बेशक तू ही बड़ा तौबा कु़बूल करने वाला मेहरबान है (128)
(और) ऐ हमारे पालने वाले मक्के वालों में उन्हीं में से एक रसूल को भेज जो उनको तेरी आयतें पढ़कर सुनाए और आसमानी किताब और अक़्ल की बातें सिखाए और उन (के नुफ़ूस) के पाकीज़ा कर दें बेशक तू ही ग़ालिब और साहिबे तदबीर है (129)
और कौन है जो इबराहीम के तरीक़े से नफरत करे मगर जो अपने को अहमक़ बनाए और बेशक हमने उनको दुनिया में भी मुन्तखब कर लिया और वह ज़रूर आख़ेरत में भी अच्छों ही में से होगे (130)

देश की जनता ने आपको हिन्दू सम्राट माना

Written By आपका अख्तर खान अकेला on गुरुवार, 18 अप्रैल 2019 | 6:42 am

Before one year a latter drafted by a bjp worker ,,,,know he join Inc
देश की जनता ने आपको हिन्दू सम्राट माना , आपको विकास पुरुष माना और प्रचंड बहुमत से सत्ता सौंप दी, पर आपने क्या किया सत्ता में आते ही उनके पीछे हाथ धोकर पड़ गए जो (छोटे कारोबारी, दुकानदार और छोटे व्यापारी) आजादी के बाद से ही आपके साथ थे जिन्होंने बुरे से बुरे समय भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा उनके पीछे इनकम टैक्स सहित सभी डिपार्टमेंट लगा दिए। उनको सरेआम मंचो से चोर और डकैत तक बोला। आपने कभी इस बात को समझा ही नहीं। काला धन दो तरह का होता है एक वो जो व्यापारी का है जो उसने मेहनत करके, रिस्क उठा कर कमाया है, सुबह ५ बजे जा कर दुकान खोली , पैसा लगाया और पैसा कमाया पर टैक्स नहीं दिया वो भी टैक्स सिस्टम की कॉम्प्लीकेशन्स की वजह से और आप उसके ही पीछे पड़ गए जबकि सरकारी अधिकारी और नेता जिनके पास जो भी पैसा है वो सब रिशवत और घोटालो का काला धन है बिना किसी मेहनत के कमाया हुआ उनको आपने ईमानदारी का प्रमाण पत्र दे दिया। क्या किसी अधिकारी और नेता को सजा दी गयी उनके अलावा जो आपके खिलाफ बोले। अभी भी अगर आप नहीं सम्भले तो बहुत देर हो जाएगी। और आप की सत्ता तो जाएगी ही देश को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा क्योकि इस देश की जनता को आपके ऊपर विश्वास है की आप देश का भला कर सकते है इसलिए आप से विनती है की व्यापारी का पीछा छोड़कर देश का कार्य कीजिये। स्वर्ण और दलित की राजनीति ना करके सबको एक नजर से देखिये। ब्यूरोक्रेसी पर आँख मूँद कर विश्वाश करना बंद करके कुछ विश्वास अपने परंपरागत वोटर्स पर भी कीजिये। व्यापारी और मध्यम वर्ग को चोर बोलना बंद कर उनको अपने परिवार का लालन पालन करने दीजिये। प्रोफेशनल को बुरा भला कहना बंद कीजिये नहीं तो आप हमेशा की तरह दोबारा केंद्र में सत्ता का मुंह नहीं देख पाएंगे और सत्ता हमेशा के लिए उनके हाथ चली जाएगी जिनोह्णे हमेशा देश और हिंदुत्व का नुकसान किया है। आज राष्ट्रीय नेताओ की बात तो छोड़िये भाजपा के नगर स्तर तक के नेता जिस घमंड में बात करते है वह घमंड विध्वंसकारी होता है। भाजपा के प्रवक्ता , संबित पात्रा और प्रेम शुक्ल जैसे लोग टीवी चैनलों पर जिस भाषा का प्रयोग करते है वह जनता को अच्छी नहीं लगती। नेताओ के घमंड का ही परिणाम है की भाजपा का छोटे से छोटा कार्यकर्ता भी जरा सी असहमति होने पर दूसरे को देशद्रोही बोल देता है जिससे आम लोगो में एक खुंदक सी जन्म ले रही है। मैं आप लोगो से प्रार्थना करता हूँ की पार्टी को बचा लीजिए , घमंड छोड़िये , उदार बनिए, अपनी जगह बनाओ ना की दूसरे को ख़तम करो , इस संसार में कभी कुछ ख़त्म नहीं होता इसलिये ये ख्याल दिमाग से निकाल दो कि आप कांग्रेस को ख़त्म कर देंगे। अपनी लकीर को इतना बड़ा करो की दूसरे की लकीर छोटी हो जाये। अगर इस बार गए तो कम से कम 20 साल वापसी नहीं होगी।

और यहूद कहने लगे कि खु़दा औलाद रखता है

और (यहूद) कहते हैं कि यहूद (के सिवा) और (नसारा कहते हैं कि) नसारा के सिवा कोई बेहिश्त में जाने ही न पाएगा ये उनके ख़्याली पुलाव है (ऐ रसूल) तुम उन से कहो कि भला अगर तुम सच्चे हो कि हम ही बेहिश्त में जाएँगे तो अपनी दलील पेश करो (111)
हाँ अलबत्ता जिस शख़्स ने खु़दा के आगे अपना सर झुका दिया और अच्छे काम भी करता है तो उसके लिए उसके परवरदिगार के यहाँ उसका बदला (मौजूद) है और (आख़ेरत में) ऐसे लोगों पर न किसी तरह का ख़ौफ़ होगा और न ऐसे लोग ग़मग़ीन होगे (112)
और यहूद कहते हैं कि नसारा का मज़हब कुछ (ठीक) नहीं और नसारा कहते हैं कि यहूद का मज़हब कुछ (ठीक) नहीं हालाँकि ये दोनों फरीक़ किताबे (खु़दा) पढ़ते रहते हैं इसी तरह उन्हीं जैसी बातें वह (मुशरेकीन अरब) भी किया करते हैं जो (खु़दा के एहकाम) कुछ नहीं जानते तो जिस बात में ये लोग पड़े झगड़ते हैं (दुनिया में तो तय न होगा) क़यामत के दिन खु़दा उनके दरमियान ठीक फैसला कर देगा (113)
और उससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो खु़दा की मसजिदों में उसका नाम लिए जाने से (लोगों को) रोके और उनकी बरबादी के दर पे हो, ऐसों ही को उसमें जाना मुनासिब नहीं मगर सहमे हुए ऐसे ही लोगों के लिए दुनिया में रूसवाई है और ऐसे ही लोगों के लिए आख़ेरत में बड़ा भारी अज़ाब है (114)
(तुम्हारे मसजिद में रोकने से क्या होता है क्योंकि सारी ज़मीन) खु़दा ही की है (क्या) पूरब (क्या) पच्छिम बस जहाँ कहीं कि़ब्ले की तरफ रूख़ करो वही खु़दा का सामना है बेशक खु़दा बड़ी गुन्जाइश वाला और खू़ब वाकि़फ है (115)
और यहूद कहने लगे कि खु़दा औलाद रखता है हालाँकि वह (इस बखेड़े से) पाक है बल्कि जो कुछ ज़मीन व आसमान में है सब उसी का है और सब उसी के फ़रमाबरदार हैं (116)
(वही) आसमान व ज़मीन का मोजिद है और जब किसी काम का करना ठान लेता है तो उसकी निसबत सिर्फ कह देता है कि “हो जा” बस वह (खु़द ब खु़द) हो जाता है (117)
और जो (मुशरेकीन) कुछ नहीं जानते कहते हैं कि खु़दा हमसे (खु़द) कलाम क्यों नहीं करता, या हमारे पास (खु़द) कोई निशानी क्यों नहीं आती, इसी तरह उन्हीं की सी बाते वह कर चुके हैं जो उनसे पहले थे इन सब के दिल आपस में मिलते जुलते हैं जो लोग यक़ीन रखते हैं उनको तो अपनी निशानियाँ क्यों साफतौर पर दिखा चुके (118)
(ऐ रसूल) हमने तुमको दीने हक़ के साथ (बेहिश्त की) खु़शख़बरी देने वाला और (अज़ाब से) डराने वाला बनाकर भेजा है और दोज़खि़यों के बारे में तुमसे कुछ न पूछा जाएगा (119)
और (ऐ रसूल) न तो यहूदी कभी तुमसे रज़ामंद होगे न नसारा यहाँ तक कि तुम उनके मज़हब की पैरवी करो (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि बस खु़दा ही की हिदायत तो हिदायत है (बाक़ी ढकोसला है) और अगर तुम इसके बाद भी कि तुम्हारे पास इल्म (क़ुरान) आ चुका है उनकी ख़्वाहिशों पर चले तो (याद रहे कि फिर) तुमको खु़दा (के ग़ज़ब) से बचाने वाला न कोई सरपरस्त होगा न मददगार (120)

(ऐ रसूल) हमने तुमको दीने हक़ के साथ (बेहिश्त की) खु़शख़बरी देने वाला और (अज़ाब से) डराने वाला बनाकर भेजा है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on बुधवार, 17 अप्रैल 2019 | 7:20 am

और (यहूद) कहते हैं कि यहूद (के सिवा) और (नसारा कहते हैं कि) नसारा के सिवा कोई बेहिश्त में जाने ही न पाएगा ये उनके ख़्याली पुलाव है (ऐ रसूल) तुम उन से कहो कि भला अगर तुम सच्चे हो कि हम ही बेहिश्त में जाएँगे तो अपनी दलील पेश करो (111)
हाँ अलबत्ता जिस शख़्स ने खु़दा के आगे अपना सर झुका दिया और अच्छे काम भी करता है तो उसके लिए उसके परवरदिगार के यहाँ उसका बदला (मौजूद) है और (आख़ेरत में) ऐसे लोगों पर न किसी तरह का ख़ौफ़ होगा और न ऐसे लोग ग़मग़ीन होगे (112)
और यहूद कहते हैं कि नसारा का मज़हब कुछ (ठीक) नहीं और नसारा कहते हैं कि यहूद का मज़हब कुछ (ठीक) नहीं हालाँकि ये दोनों फरीक़ किताबे (खु़दा) पढ़ते रहते हैं इसी तरह उन्हीं जैसी बातें वह (मुशरेकीन अरब) भी किया करते हैं जो (खु़दा के एहकाम) कुछ नहीं जानते तो जिस बात में ये लोग पड़े झगड़ते हैं (दुनिया में तो तय न होगा) क़यामत के दिन खु़दा उनके दरमियान ठीक फैसला कर देगा (113)
और उससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो खु़दा की मसजिदों में उसका नाम लिए जाने से (लोगों को) रोके और उनकी बरबादी के दर पे हो, ऐसों ही को उसमें जाना मुनासिब नहीं मगर सहमे हुए ऐसे ही लोगों के लिए दुनिया में रूसवाई है और ऐसे ही लोगों के लिए आख़ेरत में बड़ा भारी अज़ाब है (114)
(तुम्हारे मसजिद में रोकने से क्या होता है क्योंकि सारी ज़मीन) खु़दा ही की है (क्या) पूरब (क्या) पच्छिम बस जहाँ कहीं कि़ब्ले की तरफ रूख़ करो वही खु़दा का सामना है बेशक खु़दा बड़ी गुन्जाइश वाला और खू़ब वाकि़फ है (115)
और यहूद कहने लगे कि खु़दा औलाद रखता है हालाँकि वह (इस बखेड़े से) पाक है बल्कि जो कुछ ज़मीन व आसमान में है सब उसी का है और सब उसी के फ़रमाबरदार हैं (116)
(वही) आसमान व ज़मीन का मोजिद है और जब किसी काम का करना ठान लेता है तो उसकी निसबत सिर्फ कह देता है कि “हो जा” बस वह (खु़द ब खु़द) हो जाता है (117)
और जो (मुशरेकीन) कुछ नहीं जानते कहते हैं कि खु़दा हमसे (खु़द) कलाम क्यों नहीं करता, या हमारे पास (खु़द) कोई निशानी क्यों नहीं आती, इसी तरह उन्हीं की सी बाते वह कर चुके हैं जो उनसे पहले थे इन सब के दिल आपस में मिलते जुलते हैं जो लोग यक़ीन रखते हैं उनको तो अपनी निशानियाँ क्यों साफतौर पर दिखा चुके (118)
(ऐ रसूल) हमने तुमको दीने हक़ के साथ (बेहिश्त की) खु़शख़बरी देने वाला और (अज़ाब से) डराने वाला बनाकर भेजा है और दोज़खि़यों के बारे में तुमसे कुछ न पूछा जाएगा (119)
और (ऐ रसूल) न तो यहूदी कभी तुमसे रज़ामंद होगे न नसारा यहाँ तक कि तुम उनके मज़हब की पैरवी करो (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि बस खु़दा ही की हिदायत तो हिदायत है (बाक़ी ढकोसला है) और अगर तुम इसके बाद भी कि तुम्हारे पास इल्म (क़ुरान) आ चुका है उनकी ख़्वाहिशों पर चले तो (याद रहे कि फिर) तुमको खु़दा (के ग़ज़ब) से बचाने वाला न कोई सरपरस्त होगा न मददगार (120)

,चुनाव आयुक्त की निर्भीकता ,निष्पक्षता ,दब्बू प्रवृत्ति से ,देश के लोकतंत्र पर यह खतरा मंडराया है ,,

Written By आपका अख्तर खान अकेला on मंगलवार, 16 अप्रैल 2019 | 6:37 am

देश का लोकतंत्र लंगड़ा होता जा रहा है ,,,चुनाव आयुक्त की निर्भीकता ,निष्पक्षता ,दब्बू प्रवृत्ति से ,देश के लोकतंत्र पर यह खतरा मंडराया है ,,लोकप्रतिनिधित्व क़ानून ,देश का सबसे सशक्त ,बढ़ा ,मज़बूत क़ानून है ,इसकी संवैधानिकता ,,,इसकी शक्तियां ,प्रधानमंत्री महोदय से भी मज़बूत है ,लेकिन अफ़सोस ,,कई सालों से ,,चुनाव आयोग ,रस्म अदायगी से ज़्यादा कुछ खास नहीं कर रहा है ,नतीजन ,चुनाव आयोग का जो खौफ ,जो निष्पक्षता की छवि ,,टी ऍन शेषन ने क़ायम की थी उसे पलीता लग रहा है ,,क़ानून वही है ,उससे ज़्यादा मज़बूत है ,लेकिन लाचार स्थितियां ,,बन रही है ,,चुनाव में ,धर्म ,,मज़हब ,,नफरत ,,जाति ,,समाज ,फब्तियां ,बेतुके निराधार आरोप ,,धमकियां ,,खरीद फरोख्त ,और चुनाव जीतने के बाद की सुविधाओं की घोषणाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है ,,के देश के अरबों अरब रूपये खर्च के बाद भी यहाँ निर्भीकता से काम नहीं हो रहा है ,,राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के खुले भाजपा कार्यकर्ता मोदी भक्ति ,प्रचार बयान मामले अब तक कुछ नहीं हुआ , चुनाव आयोग की बेबसी ,,लाचारी साफ नज़र आ रही है ,जबकि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जो देश के संविधान की शपथ से बंधे है ,वोह चुनाव प्रचार के दौरान बाज़ारू ,,धार्मिक भावनाओं को ,आहत द्वेषता पूर्ण और चुनाव प्रभावित करने वाला खुला बयान देते है ,पूर्व मुख्यमंत्री मायावती खुले रूप से एक समुदाय ,धर्म मज़हब से जुड़े लोगों को ग़ैरक़ानूनी तरीके से प्रभावित करने का प्रयास करती है ,जांच होती है ,,यह अपराधी साबित होते है ,, लेकिन लाचार ,,चुनाव आयोग ,योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद से स्तीफा देने के लिए मजबूर नहीं करते ,,मायावती और योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कोई विधिक प्रावधान के तहत सज़ा दिलवाने के लिए मुक़दमा दर्ज नहीं होता ,परिवाद न्यायालय में पेश नहीं होता ,उन्हें भविष्य के चुनाव से डिबार नहीं किया जाता ,सिर्फ थोड़ी बहुत देर के लिए उन्हें चुनाव प्रचार से अलग करने की बात कहकर जनता को बहलाया जाता है ,आज़म खान खूब बकवास करते है ,, महिलाओं का अपमान करते है ,,मेनका गाँधी वोटर्स को बाद में काम नहीं करने को लेकर धमकिया देती है ,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुलकर सैनिक कार्यवाहियों का दुरूपयोग करते है ,,कर्नाटक ,,पश्चिमी बंगाल ,सभी जगह पर यह सिलसिला जारी है ,,लेकिन अफ़सोस ,चुनाव आयोग जिसका देश भर में ,,स्वस्थ लोकतंत्र को निर्वाचित करने की ज़िम्मेदारी है ,वोह चुनाव आयोग बेहतर तरीके से प्रदर्शन नहीं कर रहा ,निगरानी बेहतर नहीं है ,,पर्चियों से लेकर ,,,वोटर लिस्ट प्रॉपर नहीं है ,खेर यह तो ठीक है ,लेकिन चुनाव में निष्पक्षता ,निर्भीकता ,झूंठ ,फरेब ,मज़हबी ,उन्माद ,,वेमन्सयता के माध्यम से कुर्सी हथियाने के साज़िशकर्ताओं से चुनाव आयोग न जाने क्यों लाचारी दिखा रहा है ,,अगर अभी लोकप्रतिनिधित्व क़ानून की शत प्रतिशत पालना करने वाला कोई निष्पक्ष शक्ती होती , तो योगी आदित्यनाथ ,,राज्यपाल कल्याण सिंह अपने पद से इस्तीफा दे चुके होते ,,मायावती का चुनाव ख़ारिज हो गया होता ,,और भी कई सख्त कार्यवाहियां होती ,,लेकिन लोकतंत्र का निर्वाचन कई खामियों ,,कमज़ोरियों ,से भरा होने से यह दिक़्क़ते आ रही है ,अगर चुनाव आयोग बहादुरी दिखाए ,खुद को मुख्यमंत्री ,राज्यपाल ,,प्रधानमंत्री से ऊंचा साबित करे तो निश्चित तोर पर जनता के मुआफ़िक उसकी मर्ज़ी का लोकतंत्र स्थापित होगा वरना इन हालातों में अनचाहा ,,प्रभावित ,,लोकतंत्र स्थापित होता है ,जो राष्ट्र के लिए घातक है ,इसलिए मतदाता जागो ,,राष्ट्र की बेहतरी के लिए घर से निकल कर सभी वोट डालों ,,,मज़बूत लोकतंत्र स्थापित करो ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

नमाज़ पढ़ते रहो और ज़कात दिये जाओ

और जब उनके पास खु़दा की तरफ से रसूल (मोहम्मद) आया और उस किताब (तौरेत) की जो उनके पास है तसदीक़ भी करता है तो उन अहले किताब के एक गिरोह ने किताबे खु़दा को अपने बस पुश्त फेंक दिया गोया वह लोग कुछ जानते ही नहीं और उस मंत्र के पीछे पड़ गए (101)
जिसको सुलेमान के ज़माने की सलतनत में शयातीन जपा करते थे हालाँकि सुलेमान ने कुफ्र नहीं इख़तेयार किया लेकिन शैतानों ने कुफ्र एख़तेयार किया कि वह लोगों को जादू सिखाया करते थे और वह चीज़ें जो हारूत और मारूत दोनों फ़रिश्तों पर बाइबिल में नाजि़ल की गई थी हालाँकि ये दोनों फ़रिश्ते किसी को सिखाते न थे जब तक ये न कह देते थे कि हम दोनों तो फ़क़त (ज़रियाए आज़माइश) है बस तो (इस पर अमल करके) बेइमान न हो जाना इस पर भी उनसे वह (टोटके) सीखते थे जिनकी वजह से मिया बीवी में तफ़रक़ा डालते हालाँकि बग़ैर अज़्ने खु़दा बन्दी वह अपनी इन बातों से किसी को ज़रर नहीं पहुँचा सकते थे और ये लोग ऐसी बातें सीखते थे जो खु़द उन्हें नुक़सान पहुँचाती थी बावजूद कि वह यक़ीनन जान चुके थे कि जो शख़्स इन (बुराईयों) का ख़रीदार हुआ वह आखि़रत में बेनसीब हैं और बेशुबह (मुआवज़ा) बहुत ही बड़ा है जिसके बदले उन्होंने अपनी जानों को बेचा काश (इसे कुछ) सोचे समझे होते (102)
और अगर वह ईमान लाते और जादू वग़ैरह से बचकर परहेज़गार बनते तो खु़दा की दरगाह से जो सवाब मिलता वह उससे कहीं बेहतर होता काश ये लोग (इतना तो) समझते (103)
ऐ ईमानवालों तुम (रसूल को अपनी तरफ मुतावज्जे करना चाहो तो) रआना (हमारी रिआयत कर) न कहा करो बल्कि उनज़ुरना (हम पर नज़रे तवज्जो रख) कहा करो और (जी लगाकर) सुनते रहो और काफिरों के लिए दर्दनाक अज़ाब है (104)
ऐ रसूल अहले किताब में से जिन लोगों ने कुफ्र इख़तेयार किया वह और मुशरेकीन ये नहीं चाहते हैं कि तुम पर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से भलाई (वही) नाजि़ल की जाए और (उनका तो इसमें कुछ इजारा नहीं) खु़दा जिसको चाहता है अपनी रहमत के लिए ख़ास कर लेता है और खु़दा बड़ा फज़ल (करने) वाला है (105)
(ऐ रसूल) हम जब कोई आयत मन्सूख़ करते हैं या तुम्हारे ज़ेहन से मिटा देते हैं तो उससे बेहतर या वैसी ही (और) नाजि़ल भी कर देते हैं क्या तुम नहीं जानते कि बेशुबहा खु़दा हर चीज़ पर क़ादिर है (106)
क्या तुम नहीं जानते कि आसमान की सलतनत बेशुबहा ख़ास खु़दा ही के लिए है और खु़दा के सिवा तुम्हारा न कोई सरपरस्त है न मददगार (107)
(मुसलमानों) क्या तुम चाहते हो कि तुम भी अपने रसूल से वैसै ही (बेढ़ंगे) सवालात करो जिस तरह साबिक़ (पहले) ज़माने में मूसा से (बेतुके) सवालात किए गए थे और जिस शख़्स ने इमान के बदले कुफ्र एख़तेयार किया वह तो यक़ीनी सीधे रास्ते से भटक गया (108)
(मुसलमानों) अहले किताब में से अक्सर लोग अपने दिली हसद की वजह से ये ख़्वाहिश रखते हैं कि तुमको ईमान लाने के बाद फिर काफि़र बना दें (और लुत्फ तो ये है कि) उन पर हक़ ज़ाहिर हो चुका है उसके बाद भी (ये तमन्ना बाक़ी है) बस तुम माफ करो और दरगुज़र करो यहाँ तक कि खु़दा अपना (कोई और) हुक्म भेजे बेशक खु़दा हर चीज़ पर क़ादिर है (109)
और नमाज़ पढ़ते रहो और ज़कात दिये जाओ और जो कुछ भलाई अपने लिए (खु़दा के यहाँ) पहले से भेज दोगे उस (के सवाब) को मौजूद पाआगे जो कुछ तुम करते हो उसे खु़दा ज़रूर देख रहा है (110)

एक इंजिनियर सरफ़राज़ कुरैशी साहब ,,जिनमे सोशल इंजीनियरिंग का भी जज़्बा है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on सोमवार, 15 अप्रैल 2019 | 6:30 am

एक इंजिनियर सरफ़राज़ कुरैशी साहब ,,जिनमे सोशल इंजीनियरिंग का भी जज़्बा है ,,ऐसा जज़्बा ,,जिसका फाउंडेशन ,रिश्तों में मिठास पैदा करता है ,,रिश्तों का मिलान करता है ,,गरीब ,गुरबा लोगों की खिदमत और उनके लिए पढ़ाई ,चिकित्सा सुविधा से लेकर हर तरह की सुविधाएँ मुहैया कराता है ,जी हाँ दोस्तों इंजीनियर सरफ़राज़ कुरैशी ,उनकी पूरी टीम और उनके समूह द्वारा संचालित ,,जज़्बा सोश्यल फाउंडेशन उज्जैन मध्यप्रदेश किसी पहचान का मोहताज नहीं ,देश भर के लोगों के लिए एक ही छत के नीचे ,रिश्तों की सौगात देने वाला यह पहला जज़्बा है जो मुस्लिम समाज में लाख विरोध के बावजूद आज घर घर की ज़रूरत बन गया है ,,कहावत है ,बगल में छोरा ,शहर में ढिंढोरा ,,सही कहावत है ,हमारे आसपास कई रिश्ते होते है ,लेकिन मसरूपियात और जानकारी के अभाव में आसपास के लोगो तक से हम रिश्ते नातों के लिए बात नहीं कर पाते है ,,मुस्लिम समाज जहाँ ज़रा ज़रा से मुद्दों पर फतवागिरी मीन मेख निकालने का खुसूसी हुनर हो ,उस समाज को ऐसे मामले में एक ही छत के नीचे इस्लामिक पर्दा प्रथा की मर्यादाओं को ध्यान में रखकर ,रिश्तों का मजमा जमाना ,मुश्किल ही नहीं ,नामुमकिन काम था ,जिसे मुमकिन ,जज़्बा फाउंडेशन की पूरी टीम और भाई सरफ़राज़ इंजीनियर ने कामयाब कर दिखाया ,है ,कई सालों से चल रहे इस तार्रूफी जलसे के दौरान हज़ारों रिश्ते आज कामयाबी के साथ ,,मिलजुलकर निकाह क़ुबूल है ,निकाह क़ुबूल है के बंधन में बंध गए है ,अल्लाह का शुक्र है ,,रिश्तों में मिठास है ,,और उनकी ज़िंदगी का सफर कामयाबी के साथ चल भी रहा हूँ ,हर साल उज्जैन का मन्नत गार्डन ,जज़्बा फाउडनेशन के इजीनियर सरफ़राज़ कुरैशी के साथ डॉक्टर शादाब सिद्दीक़ी ,,नईम खान ,,गुलरेज़ खान ,,इंजीनियर इसरार शेख ,,सलीम दहलवी ,,भाभी रुबीना सरफ़राज़ कुरैशी ,सहबा शादाब सिद्दीक़ी सहित कई दर्जन ,सम्पर्पित लोगों की टीम के साथ ,,इस्लामिक अदब के दायरे में ,पर्दानशीन प्रबंधन के साथ ,बहतरीन रिश्तों की महफ़िल सजाता है ,,बेहतर प्रबंधन के साथ रिश्तों का मिलान एक पुस्तिका का प्रकाशन ,,मोटिवेशन ,, लोगों की खिदमत के लिए जज़्बे के मोटिवेशन के साथ एक महफील सजती है ,जिसमे सिर्फ उज्जैन ,मध्य्प्रदेश के ही नहीं ,देश भर के हर कोने से आये हुए रिश्तो की दरकार रखने वाले लोगों के बीच देशभर के ,,खिदमतगार खुसूसी मेहमानों का मजमा होता है ,,मेहमानों की खिदमत ,मेहमाननवाज़ी होती है ,,,और फिर यह सब एक ख़िदमति जज़्बे के साथ ,,वाहवाह करते हुए ,,अपने दिलों में जज़्बा सोशल फाउंडेशन के खिदमतगारों को दुआए देते हुए वापस अगले साल के बेहतरीन जलसे के इन्तिज़ार में लोट जाते है ,,दोस्तों जज़्बा फाउडनेशन की पूरी टीम यह सारा मजमा यह सारा खिदमत का खुद अपनी सहयोग राशि के साथ ,बिना किसी चंदबाज़ी के ,,बिना किसी सरकारी मदद के खुद ही करते है ,,जज़्बा फाउंडेशन का सोशल सिस्टम देखिये के ज़ीरो से पढ़ाई के प्रति साक्षरता अभियान है ,फिर चिकित्सा सुविधा ,परामर्श की व्यवस्थाये है ,,एम्बुलेंस सेवा ,,आख़िरत के वक़्त क़ब्रिस्तान तक लेजाने की मुफ्त वाहन खिदमत ,,कोचिंग के ज़रिये छात्र छात्राओं में अफसर बनने का जज़्बा और कामयाबी इनका उद्देश्य है ,जज़्बा फाउडनेशन में कोई इंजीनियर ,कोई अधिकारी ,,कोई प्रशासनिक सेवाओं से जुड़ा हुआ वरिश्ठतम अधिकारी है ,तो कोई कोचिंग संचालक ,कोई बॉडी बिल्डर ,कोई व्यवसायी ,,कोई शिक्षा गुरु ,,सभी तरह के साथी एक साथ जज़्बे के साथ जुड़ते है ,सोशल होते है ,फाउंडेशन बनाते है ,और हर साल प्रतिमाह कोई न कोई मोटिवेशन खिदमतगार कार्यक्रम से जुड़े रहते है ,मुख्य कार्यक्रम को कामयाब करने के लिए यह सभी लोग बिना कंगूरा बने ,सिर्फ और सिर्फ नींव की ईंट बनकर इस कार्यक्रम को खुद ही मैनेज करते है ,अल्लाह सरफ़राज़ कुरैशी के इस इंजीनियरिंग सिस्टम के जज़्बे को कामयाब ,बनाये भाई शादाब सिद्दीक़ी यूँ तो ,प्रशासनिक अधिकारी है लेकिन बेहतरीन वक्ता ,मददगार ,खिदमतगार और बहतरीन साहित्यकार शायर भी है ,,,,नईम भाई कोचिंग गुरु है तो सभी अपनी फेमिली के साथ इस जज़्बे को खिदमत के साथ अंजाम दे रहे है ,अललाह इन्हे ,इनके जज़्बे को ,इनके हौसले को और कामयाबी दे ,बुलंदी पर पहुंचाए ,जो इनके ख़ल्क़ ऐ खिदमत के ख़्वाब है ,,उन्हें कामयाब करने के लिए हालात बेहतर से बेहतर बनाये ,,,आमीन ,,सुम्मा आमीन ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

जब कभी कोई अहद किया तो उनमें से एक फरीक़ ने तोड़ डाला

और जब उनसे कहा गया कि (जो क़ुरान) खु़दा ने नाजि़ल किया है उस पर ईमान लाओ तो कहने लगे कि हम तो उसी किताब (तौरेत) पर ईमान लाए हैं जो हम पर नाजि़ल की गई थी और उस किताब (कु़रान) को जो उसके बाद आई है नहीं मानते हैं हालाँकि वह (क़ुरान) हक़ है और उस किताब (तौरेत) की जो उनके पास है तसदीक़ भी करती है मगर उस किताब कु़रान का जो उसके बाद आई है इन्कार करते हैं (ऐ रसूल) उनसे ये तो पूछो कि तुम (तुम्हारे बुजुर्गों) अगर ईमानदार थे तो फिर क्यों खु़दा के पैग़म्बरों का साबिक़ मे क़त्ल करते थे (91)
और तुम्हारे पास मूसा तो वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आ ही चुके थे फिर भी तुमने उनके बाद बछड़े को खु़दा बना ही लिया और उससे तुम अपने ही ऊपर ज़ुल्म करने वाले थे (92)
और (वह वक़्त याद करो) जब हमने तुमसे अहद लिया और (क़ोहे) तूर को (तुम्हारी उदूले हुक्मी से) तुम्हारे सर पर लटकाया और (हमने कहा कि ये किताब तौरेत) जो हमने दी है मज़बूती से लिए रहो और (जो कुछ उसमें है) सुनो तो कहने लगे सुना तो (सही लेकिन) हम इसको मानते नहीं और उनकी बेईमानी की वजह से (गोया) बछड़े की उलफ़त घोल के उनके दिलों में पिला दी गई (ऐ रसूल) उन लोगों से कह दो कि अगर तुम ईमानदार थे तो तुमको तुम्हारा ईमान क्या ही बुरा हुक्म करता था (93)
(ऐ रसूल) इन लोगों से कह दो कि अगर खु़दा के नज़दीक आख़ेरत का घर (बेहिश्त) ख़ास तुम्हारे वास्ते है और लोगों के वासते नहीं है बस अगर तुम सच्चे हो तो मौत की आरजू़ करो (94)
(ताकि जल्दी बेहिश्त में जाओ) लेकिन वह उन आमाले बद की वजह से जिनको उनके हाथों ने पहले से आगे भेजा है हरगिज़ मौत की आरज़ू न करेंगे और खु़दा ज़ालिमों से खू़ब वाकि़फ है (95)
और (ऐ रसूल) तुम उन ही को जि़न्दगी का सबसे ज़्यादा हरीस पाओगे और मुशरिक़ों में से हर एक शख़्स चाहता है कि काश उसको हज़ार बरस की उम्र दी जाती हालाँकि अगर इतनी तूलानी उम्र भी दी जाए तो वह ख़ुदा के अज़ाब से छुटकारा देने वाली नहीं, और जो कुछ वह लोग करते हैं खु़दा उसे देख रहा है (96)
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि जो जिबरील का दुशमन है (उसका खु़दा दुशमन है) क्योंकि उस फ़रिश्ते ने खु़दा के हुक्म से (इस कु़रान को) तुम्हारे दिल पर डाला है और वह उन किताबों की भी तसदीक करता है जो (पहले नाजि़ल हो चुकी हैं और सब) उसके सामने मौजूद हैं और ईमानदारों के वास्ते खु़शख़बरी है (97)
जो शख़्स ख़ुदा और उसके फरिश्तों और उसके रसूलों और (ख़ासकर) जिबराईल व मीकाइल का दुशमन हो तो बेशक खु़दा भी (ऐसे) काफि़रों का दुश्मन है (98)
और (ऐ रसूल) हमने तुम पर ऐसी निशानियाँ नाजि़ल की हैं जो वाजेए और रौशन हैं और ऐसे नाफरमानों के सिवा उनका कोई इन्कार नहीं कर सकता (99)
और उनकी ये हालत है कि जब कभी कोई अहद किया तो उनमें से एक फरीक़ ने तोड़ डाला बल्कि उनमें से अक्सर तो ईमान ही नहीं रखते (100)

इस दौर में अख़बार वाले ,टी वी चैनल वाले सरकारी गुलाम हुए

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 14 अप्रैल 2019 | 6:36 am

देश में चल रही ,,वर्तमान पत्रकारिता ,,भक्तगिरि से देश शर्मिन्दा है ,,विश्व में देश की पत्रकारिता को शर्मसार करने वाले क़िस्से है ,लेकिन आज बैसाखी पर्व के दिन ,,ब्रिटेन हुकूमत में ,भारत के सिक्ख भाइयों के सामूहिक नरसंहार को ,दंगा ,फसाद ,,बताकर फ़र्ज़ी खबरे छापने ,,हुकूमत की गुलामी करने वाले पत्रकारों की शर्मसार पत्रकारिता का यादगार दिन है ,अफ़सोस ,,ऐसे घटिया ,बिकाऊ ,सरकारी सुविधाओं की गुलामी पर ,,देश को ,विश्व को गुमराह कर ,,सरकार का स्तुति गुणगान करने वाले पत्रकारों के खिलाफ देश की जनता ने तब भी आवाज़ नहीं उठाई थी ,, अब भी नहीं उठाई है ,,लेकिन हाँ पत्रकार गोरीलंकेश की हत्या की तरह ,पत्रकार रवीशकुमार ,अभिसार की प्रताड़ना की तरह तब भी ब्रिटेन हुकूमत में पत्रकार थे ,उनके साथ प्रताड़ना थी ,दोस्तों सिक्ख भाइयों का यह बैसाखी नरसंहार अंग्रेज़ो की एकतरफा सामूहिक हत्या का मामला था ,लेकिन हुकूमत के गुलाम पत्रकारों ने इस घटना की रिपोर्टिंग आज की गुलाम पत्रकारिता की तरह ही करते हुए ,इसे दंगा फसाद ,, क़ानून की बहाली बताकर ,इतिश्री कर ली थी ,लेकिन इस वक़्त भी एक पत्रकार रविश कुमार ,अभिसार की तरह ,थे ,उन्होंने ,क़लम उठाई ,और पत्रकार हैनिमेन ने विश्व को 13 अप्रेल 1919 के इस नरसंहार की सच्चाई बताई ,उस वक़्त भी ऐसे ही दमनकारी हाकम थे ,इन्होने इस सच को उजागर करने पर ,हनीमेंन पत्रकार को दो साल के लिए जेल में डाल कर आवाज़ दबाने की कोशिश की ,,दोस्तों भारत की पत्रकारिता का अपना इतिहास रहा है ,अपना स्वाभिमान रहा है ,,यहां पत्रकारिता ने सत्ता पलटी है ,,देश के स्वाभिमान को ज़िंदा किया है ,गरीब ,,मज़लूमों को इंसाफ दिलवाया है ,, गुजरात के दंगों का सच देश को बताया है ,,लेकिन पत्रकारिता का पिछले पांच सालों में एक खतरनाक ,राष्ट्रविरोधी ,जन विरोधी ,पूंजीपति पोषक ,बिकाऊ दौर आया ,,इस दौर में अख़बार वाले ,टी वी चैनल वाले सरकारी गुलाम हुए ,उद्योपतियों के घरानों ने अख़बार ,टी वी चैनल अपने मुआफ़िक खबरों के लिए ख़रीदे ,,खुद सियासत में ,मंत्री ,राजयसभा सदस्य बने ,और फिर पत्रकारिता ,पत्रकारिता से अलग होकर ,सियासी घरानों की गुलाम ,व्यक्ति की गुणगान करने वाली भोंपू होगयी ,,पत्रकारिता लूली हो गयी ,,देख कर भी क़लम नहीं चला सकी ,पत्रकारिता लंगड़ी हो गयी ,घटनाये देखकर भी वहां नहीं जा सकी ,,पत्रकारिता अंधी हो ,गयी ,,घटनाये देखकर भी रिपोर्टिंग नहीं कर सकी ,,पत्रकारिता बहरी हो गयी ,,,सुन कर भी घटना का बयान नहीं कर , सकी सकी ,,लेकिन यह देश चमत्कारों का देश ,है ,जब जब भी यहाँ ज़ुल्म हुआ है ,,यहां रावण पैदा हुआ है ,तो उसे मारने के लिए राम ने जन्म ज़रूर लिया है ,,,आज सेलेब्रेटरी पार्टियों ,व्यक्तियों के विज्ञापन कर रही है ,,रूपये लेकर नफरत भड़काने ,, रूपये लेकर खबरें दबाने ,,देश के गद्दारों ,क़ानून तोड़ने वालों को बचाने ,फिर से कुर्सी हथियाने के लिए झूंठ फैलाने के मामले में पत्रकारिता के खिलाफ हुए स्टिंग ऑपरेशन ब्लेक कोबरा ,,अनिरुद्ध बहल के ऑपरेशन ,,रविश कुमार की दहाड़ ,अभिसार की पुकार ने ऐसे उद्योगपति कथित पत्रकारों को बेनक़ाब कर दिया है ,,खेर पत्रकारिता के रावण के वध के लिए राम ज़रूर आएंगे ,लक्ष्मण ज़रूर आएंगे ,,पत्रकारिता के रावण की लंका को जलाने के लिए हनुमान ज़रूर आएंगे ऐसी मेरे जैसे नागरिक को उम्मीद है ,उम्मीद है ,,उम्मीद है ,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

हाँ (सच तो यह है)

हाँ (सच तो यह है) कि जिसने बुराई हासिल की और उसके गुनाहों ने चारों तरफ से उसे घेर लिया है वही लोग तो दोज़ख़ी हैं और वही (तो) उसमें हमेशा रहेगें (81)
और जो लोग ईमानदार हैं और उन्होंने अच्छे काम किए हैं वही लोग जन्नती हैं कि हमेशा जन्नत में रहेंगे (82)
और (वह वक़्त याद करो) जब हमने बनी ईसराइल से (जो तुम्हारे बुजुर्ग थे) अहद व पैमान लिया था कि खु़दा के सिवा किसी की इबादत न करना और माँ बाप और क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजों के साथ अच्छे सुलूक करना और लोगों के साथ अच्छी तरह (नरमी) से बातें करना और बराबर नमाज़ पढ़ना और ज़कात देना फिर तुममें से थोड़े आदमियों के सिवा (सब के सब) फिर गए और तुम लोग हो ही इक़रार से मुँह फेरने वाले (83)
और (वह वक़्त याद करो) जब हमने तुम (तुम्हारे बुजुर्गों) से अहद लिया था कि आपस में खू़रेजि़याँ न करना और न अपने लोगों को शहर बदर करना तो तुम (तुम्हारे बुजुर्गों) ने इक़रार किया था और तुम भी उसकी गवाही देते हो (84)
(कि हाँ ऐसा हुआ था) फिर वही लोग तो तुम हो कि आपस में एक दूसरे को क़त्ल करते हो और अपनों से एक जत्थे के नाहक़ और ज़बरदस्ती हिमायती बनकर दूसरे को शहर बदर करते हो (और लुत्फ़ तो ये है कि) अगर वही लोग क़ैदी बनकर तम्हारे पास (मदद माँगने) आए तो उनको तावान देकर छुड़ा लेते हो हालाँकि उनका निकालना ही तुम पर हराम किया गया था तो फिर क्या तुम (किताबे खु़दा की) बाज़ बातों पर ईमान रखते हो और बाज़ से इन्कार करते हो बस तुम में से जो लोग ऐसा करें उनकी सज़ा इसके सिवा और कुछ नहीं कि जि़न्दगी भर की रूसवाई हो और (आखि़रकार) क़यामत के दिन सख़्त अज़ाब की तरफ लौटा दिये जाए और जो कुछ तुम लोग करते हो खु़दा उससे ग़ाफि़ल नहीं है (85)
यही वह लोग हैं जिन्होंने आख़ेरत के बदले दुनिया की जि़न्दगी ख़रीद ली बस न उनके अज़ाब ही में तख़्फ़ीफ़ (कमी) की जाएगी और न वह लोग किसी तरह की मदद दिए जाएँगे (86)
और ये हक़ीक़ी बात है कि हमने मूसा को किताब (तौरेत) दी और उनके बाद बहुत से पैग़म्बरों को उनके क़दम ब क़दम ले चलें और मरयम के बेटे ईसा को (भी बहुत से) वाजे़ए व रौशन मौजिजे दिए और पाक रूह जिबरील के ज़रिये से उनकी मदद की क्या तुम उस क़द्र बददिमाग़ हो गए हो कि जब कोई पैग़म्बर तुम्हारे पास तुम्हारी ख़्वाहिशे नफ़सानी के खि़लाफ कोई हुक्म लेकर आया तो तुम अकड़ बैठे फिर तुमने बाज़ पैग़म्बरों को तो झुठलाया और बाज़ को जान से मार डाला (87)
और कहने लगे कि हमारे दिलों पर गि़लाफ चढ़ा हुआ है (ऐसा नहीं) बल्कि उनके कुफ्र की वजह से खु़दा ने उनपर लानत की है बस कम ही लोग ईमान लाते हैं (88)
और जब उनके पास खु़दा की तरफ़ से किताब (कु़रान) आई और वह उस (किताब तौरेत) की जो उन के पास है तसदीक़ भी करती है। और उससे पहले (इसकी उम्मीद पर) काफि़रों पर फतेहयाब होने की दुआएँ माँगते थे बस जब उनके पास वह चीज़ जिसे पहचानते थे आ गई तो लगे इन्कार करने बस काफि़रों पर खु़दा की लानत है (89)
क्या ही बुरा है वह काम जिसके मुक़ाबले में (इतनी बात पर) वह लोग अपनी जानें बेच बैठे हैं कि खु़दा अपने बन्दों से जिस पर चाहे अपनी इनायत से किताब नाजि़ल किया करे इस रश्क से जो कुछ खु़दा ने नाजि़ल किया है सबका इन्कार कर बैठे बस उन पर ग़ज़ब पर ग़ज़ब टूट पड़ा और काफि़रों के लिए (बड़ी) रूसवाई का अज़ाब है (90)

जरा याद करो कुर्बानी

Written By Swarajya karun on शनिवार, 13 अप्रैल 2019 | 1:57 pm


                                           - स्वराज करुण
जलियांवाला बाग के अमर शहीदों को आज उनके  शहादत दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि । सौ साल पहले  आज ही के दिन 13 अप्रेल 1919 को अमृतसर के पास जलियांवाला बाग में अंग्रेजी हुकूमत के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण विशाल आम सभा में एकत्रित हजारों लोगों को  जनरल डायर नामक एक कायर अंग्रेज अधिकारी के नेतृत्व में फ़ौज ने गोलियों से भून दिया था.  हजारों देशभक्त पुरुषों ,महिलाओं और बच्चों ने भारत माता को गुलामी के बंधनों से मुक्त करने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी ।
     वह पंजाब के प्रमुख लोकपर्व वैशाखी का दिन था ,जब त्यौहार की खुशियाँ मातम में बदल गयी । आज के दिन आइए ,हम याद करें इन अमर शहीदों की कुर्बानी ।  इस घटना के लगभग 21 वर्ष बाद पंजाब के ही महान क्रांतिकारी उधमसिंह ने 13 मार्च 1940 को  लंदन स्थित रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी के एक कार्यक्रम में जनरल डायर को गोलियों से छलनी कर जलियांवाला बाग के जघन्य हत्याकांड का बदला ले लिया । हालांकि अंग्रेजों की अदालत ने उधमसिंह को 4 जून 1940 को दोषी ठहराया और 31 जुलाई 1940 को ब्रिटेन के पेंटनविले जेल में फाँसी  दे दी । मातृभूमि की आज़ादी के लिए उधमसिंह भी शहीद हो गए ।
      -- स्वराज करुण

और जो (कु़रान) मैंने नाजि़ल किया

Written By आपका अख्तर खान अकेला on बुधवार, 10 अप्रैल 2019 | 6:36 am

और जो (कु़रान) मैंने नाजि़ल किया वह उस किताब (तौरेत) की (भी) तसदीक़ करता हूँ जो तुम्हारे पास है और तुम सबसे चले उसके इन्कार पर मौजूद न हो जाओ और मेरी आयतों के बदले थोड़ी क़ीमत (दुनयावी फायदा) न लो और मुझ ही से डरते रहो (41)
और हक़ को बातिल के साथ न मिलाओ और हक़ बात को न छिपाओ हालाँकि तुम जानते हो और पाबन्दी से नमाज़ अदा करो (42)
और ज़कात दिया करो और जो लोग (हमारे सामने) इबादत के लिए झुकते हैं उनके साथ तुम भी झुका करो (43)
और तुम लोगों से नेकी करने को कहते हो और अपनी ख़बर नहीं लेते हालाँकि तुम किताबे खु़दा को (बराबर) रटा करते हो तो तुम क्या इतना भी नहीं समझते (44)
और (मुसीबत के वक़्त) सब्र और नमाज़ का सहारा पकड़ो और अलबत्ता नमाज़ दूभर तो है मगर उन ख़ाक़सारों पर (नहीं) जो बख़ूबी जानते हैं (45)
कि वह अपने परवरदिगार की बारगाह में हाजि़र होंगे और ज़रूर उसकी तरफ लौट जाएँगे (46)
ऐ बनी इसराइल मेरी उन नेअमतों को याद करो जो मैंने पहले तुम्हें दी और ये (भी तो सोचो) कि हमने तुमको सारे जहाँन के लोगों से बढ़ा दिया (47)
और उस दिन से डरो (जिस दिन) कोई शख़्स किसी की तरफ से न फिदिया हो सकेगा और न उसकी तरफ से कोई सिफारिश मानी जाएगी और न उसका कोई मुआवज़ा लिया जाएगा और न वह मदद पहुँचाए जाएँगे (48)
और (उस वक़्त को याद करो) जब हमने तुम्हें (तुम्हारे बुजुर्गों को) फिरऔन (के पन्जे) से छुड़ाया जो तुम्हें बड़े-बड़े दुख दे के सताते थे तुम्हारे लड़कों पर छुरी फेरते थे और तुम्हारी औरतों को (अपनी खि़दमत के लिए) जि़न्दा रहने देते थे और उसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (तुम्हारे सब्र की) सख़्त आज़माइश थी (49)
और (वह वक़्त भी याद करो) जब हमने तुम्हारे लिए दरया को टुकड़े-टुकड़े किया फिर हमने तुमको छुटकारा दिया (50)

तब शैतान ने आदम व हौव्वा को (धोखा देकर) वहाँ से डगमगाया

Written By आपका अख्तर खान अकेला on मंगलवार, 9 अप्रैल 2019 | 6:34 am

और (आदम की हक़ीक़त ज़ाहिर करने की ग़रज़ से) आदम को सब चीज़ों के नाम सिखा दिए फिर उनको फरिश्तों के सामने पेश किया और फ़रमाया कि अगर तुम अपने दावे में कि हम मुस्तहके़ खि़लाफ़त हैं। सच्चे हो तो मुझे इन चीज़ों के नाम बताओ (31)
तब फ़रिश्तों ने (आजिज़ी से) अजऱ् की तू (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है हमे तो जो कुछ तूने बताया है उसके सिवा कुछ नहीं जानते तू बड़ा जानने वाला, मसलहक़े का पहचानने वाला है (32)
(उस वक़्त खु़दा ने आदम को) हुक्म दिया कि ऐ आदम तुम इन फ़रिश्तों को उन सब चीज़ों के नाम बता दो बस जब आदम ने फ़रिश्तों को उन चीज़ों के नाम बता दिए तो खु़दा ने फरिश्तों की तरफ खि़ताब करके फरमाया क्यों, मैं तुमसे न कहता था कि मैं आसमानों और ज़मीनों के छिपे हुए राज़ को जानता हूँ, और जो कुछ तुम अब ज़ाहिर करते हो और जो कुछ तुम छुपाते थे (वह सब) जानता हूँ (33)
और (उस वक़्त को याद करो) जब हमने फ़रिश्तों से कहा कि आदम को सजदा करो तो सब के सब झुक गए मगर शैतान ने इन्कार किया और ग़ुरूर में आ गया और काफि़र हो गया (34)
और हमने आदम से कहा ऐ आदम तुम अपनी बीवी समैत बेहिश्त में रहा सहा करो और जहाँ से तुम्हारा जी चाहे उसमें से ब फराग़त खाओ (पियो) मगर उस दरख़्त के पास भी न जाना (वरना) फिर तुम अपना आप नुक़सान करोगे (35)
तब शैतान ने आदम व हौव्वा को (धोखा देकर) वहाँ से डगमगाया और आखि़र कार उनको जिस (ऐश व राहत) में थे उनसे निकाल फेंका और हमने कहा (ऐ आदम व हौव्वा) तुम (ज़मीन पर) उतर पड़ो तुममें से एक का एक दुशमन होगा और ज़मीन में तुम्हारे लिए एक ख़ास वक़्त (क़यामत) तक ठहराव और ठिकाना है (36)
फिर आदम ने अपने परवरदिगार से (माज़रत के चन्द अल्फाज़) सीखे बस खु़दा ने उन अल्फाज़ की बरकत से आदम की तौबा कु़बूल कर ली बेशक वह बड़ा माफ़ करने वाला मेहरबान है (37)
(और जब आदम को) ये हुक्म दिया था कि यहाँ से उतर पड़ो (तो भी कह दिया था कि) अगर तुम्हारे पास मेरी तरफ़ से हिदायत आए तो (उसकी पैरवी करना क्योंकि) जो लोग मेरी हिदायत पर चलेंगे उन पर (क़यामत) में न कोई ख़ौफ होगा (38)
और न वह रंजीदा होगे और (ये भी याद रखो) जिन लोगों ने कुफ्र इख़तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया तो वही जहन्नुमी हैं और हमेशा दोज़ख़ में पड़े रहेगे (39)
ऐ बनी इसराईल (याक़ूब की औलाद) मेरे उन एहसानात को याद करो जो तुम पर पहले कर चुके हैं और तुम मेरे एहद व इक़रार (ईमान) को पूरा करो तो मैं तुम्हारे एहद (सवाब) को पूरा करूँगा, और मुझ ही से डरते रहो (40)

अदालत का सम्मान तामील नहीं करवा पायी पुलिस

Written By आपका अख्तर खान अकेला on सोमवार, 8 अप्रैल 2019 | 7:28 am

कोटा पुलिस आपराधिक निगरानी मामले में महावीर नगर थाने में रह रहे पुलिस कर्मी रविंद्र सिंह यादव को अदालत का सम्मान तामील नहीं करवा पायी है ,,जबकि लोकेन्द्र जोशी द्वारा प्रस्तुत ऐक फौजदारी निगरानी याचिका में बूंदी पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता जो तात्कालिक जवाहर नगर थाने की प्रशिक्षु थानाधिकारी थी ,उन्हें तलबी हो गयी है इसके अलावा अन्य गैर निगराकर प्रीतम गोस्वामी ,,पवन कुमार को भी सम्मन तामील हो गए है ,,,लोकेन्द्र जोशी ने रविंद्र यादव पुलिस कर्मी ,,आई पी एस ममता गुप्ता ,,प्रीतम गोस्वामी ,,पवनकुमार के खिलाफ कोटा न्यायालय में एक परिवाद पेश कर उनके खिलाफ ,,झूंठे मुक़दमे में फंसाने ,हिरासत में हिंसा करने ,,फ़र्ज़ी दस्तावेज कूटरचित कर ,पद से रिलीव होने के बाद भी ओवर इंट्रेस्टेड होते हुए पत्रावली में ग़ैरक़ानूनी रूप से षड्यंत्रकारी ,मुक़दमे में फंसाने के आरोप लगाए थे ,,लोकेन्द्र जोशी के विरुद्ध जो पुलिस ने कार्यवाही की थी उसे निगरानी अदालत ने अपराध मुक्त करते हुए ,,पुलिस अधिकारी की कार्यवाही को गलत क़रार दिया था ,,लोकेन्द्र जोशी ने अपने मान ,,सम्मान ,प्रतिष्ठा के संघर्ष के लिए ,उन्हें झूंठा ,षड्यंत्र रच कर फंसाने वाले पुलिस अधिकारी ,,पुलिस कर्मी और ,परिवादी गवाहान के खिलाफ संगीन धाराओं में मुक़दमा पेश कर न्यायालय के समक्ष खुद को परीक्षित कराया था ,अधीनस्थ न्यायलय ने उक्त कार्यवाही पर प्रसंज्ञान नहीं लिया ,तो लोकेन्द्र जोशी ने फैसले की समीक्षा कर न्याय का पक्ष रखते हुए ,,निगरानी याचिका जिला जज के समक्ष पेश की थी ,जो सुनवाई के लिए महिला उत्पीड़न विशेष न्यायालय क्रम एक के समक्ष विचाराधीन ,है ,उक्त याचिका में सभी गैर निगराकर की तरफ से उपस्थिति हो गयी है लेकिन महावीर नगर थाना परिसर में निवासित पुलिसकर्मी को ,अदालत के नोटिस के बाद भी कोटा पुलिस तलाश कर उन्हें न्यायालय में उपस्थिति की सुचना नहीं करवा पायी है ,खेर अदालत ऐसे मामले में गंभीर क़दम उठाकर ,,ऐसी उपेक्षित कार्यवाहियों के खिलाफ संज्ञान भी लेती है ,निगराकर फरियादी लोकेन्द्र जोशी इस मामले में अब अदालत से ऐसे उपेक्षा करने वाले पुलिस अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग भी करेंगे ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

आदम को सब चीज़ों के नाम सिखा दिए

और (आदम की हक़ीक़त ज़ाहिर करने की ग़रज़ से) आदम को सब चीज़ों के नाम सिखा दिए फिर उनको फरिश्तों के सामने पेश किया और फ़रमाया कि अगर तुम अपने दावे में कि हम मुस्तहके़ खि़लाफ़त हैं। सच्चे हो तो मुझे इन चीज़ों के नाम बताओ (31)
तब फ़रिश्तों ने (आजिज़ी से) अजऱ् की तू (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है हमे तो जो कुछ तूने बताया है उसके सिवा कुछ नहीं जानते तू बड़ा जानने वाला, मसलहक़े का पहचानने वाला है (32)
(उस वक़्त खु़दा ने आदम को) हुक्म दिया कि ऐ आदम तुम इन फ़रिश्तों को उन सब चीज़ों के नाम बता दो बस जब आदम ने फ़रिश्तों को उन चीज़ों के नाम बता दिए तो खु़दा ने फरिश्तों की तरफ खि़ताब करके फरमाया क्यों, मैं तुमसे न कहता था कि मैं आसमानों और ज़मीनों के छिपे हुए राज़ को जानता हूँ, और जो कुछ तुम अब ज़ाहिर करते हो और जो कुछ तुम छुपाते थे (वह सब) जानता हूँ (33)
और (उस वक़्त को याद करो) जब हमने फ़रिश्तों से कहा कि आदम को सजदा करो तो सब के सब झुक गए मगर शैतान ने इन्कार किया और ग़ुरूर में आ गया और काफि़र हो गया (34)
और हमने आदम से कहा ऐ आदम तुम अपनी बीवी समैत बेहिश्त में रहा सहा करो और जहाँ से तुम्हारा जी चाहे उसमें से ब फराग़त खाओ (पियो) मगर उस दरख़्त के पास भी न जाना (वरना) फिर तुम अपना आप नुक़सान करोगे (35)
तब शैतान ने आदम व हौव्वा को (धोखा देकर) वहाँ से डगमगाया और आखि़र कार उनको जिस (ऐश व राहत) में थे उनसे निकाल फेंका और हमने कहा (ऐ आदम व हौव्वा) तुम (ज़मीन पर) उतर पड़ो तुममें से एक का एक दुशमन होगा और ज़मीन में तुम्हारे लिए एक ख़ास वक़्त (क़यामत) तक ठहराव और ठिकाना है (36)
फिर आदम ने अपने परवरदिगार से (माज़रत के चन्द अल्फाज़) सीखे बस खु़दा ने उन अल्फाज़ की बरकत से आदम की तौबा कु़बूल कर ली बेशक वह बड़ा माफ़ करने वाला मेहरबान है (37)
(और जब आदम को) ये हुक्म दिया था कि यहाँ से उतर पड़ो (तो भी कह दिया था कि) अगर तुम्हारे पास मेरी तरफ़ से हिदायत आए तो (उसकी पैरवी करना क्योंकि) जो लोग मेरी हिदायत पर चलेंगे उन पर (क़यामत) में न कोई ख़ौफ होगा (38)
और न वह रंजीदा होगे और (ये भी याद रखो) जिन लोगों ने कुफ्र इख़तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया तो वही जहन्नुमी हैं और हमेशा दोज़ख़ में पड़े रहेगे (39)
ऐ बनी इसराईल (याक़ूब की औलाद) मेरे उन एहसानात को याद करो जो तुम पर पहले कर चुके हैं और तुम मेरे एहद व इक़रार (ईमान) को पूरा करो तो मैं तुम्हारे एहद (सवाब) को पूरा करूँगा, और मुझ ही से डरते रहो (40)

यही लोग घाटा उठाने वाले हैं

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 7 अप्रैल 2019 | 8:40 am

ऐ लोगों अपने परवरदिगार की इबादत करो जिसने तुमको और उन लोगों को जो तुम से पहले थे पैदा किया है अजब नहीं तुम परहेज़गार बन जाओ (21)
जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन का बिछौना और आसमान को छत बनाया और आसमान से पानी बरसाया फिर उसी ने तुम्हारे खाने के लिए बाज़ फल पैदा किए बस किसी को खु़दा का हमसर न बनाओ हालाँकि तुम खू़ब जानते हो (22)
और अगर तुम लोग इस कलाम से जो हमने अपने बन्दे (मोहम्मद) पर नाजि़ल किया है शक में पड़े हो बस अगर तुम सच्चे हो तो तुम (भी) एक सूरा बना लाओ और खु़दा के सिवा जो भी तुम्हारे मददगार हों उनको भी बुला लो (23)
बस अगर तुम ये नहीं कर सकते हो और हरगिज़ नहीं कर सकोगे तो उस आग से डरो जिसके ईधन आदमी और पत्थर होंगे और काफि़रों के लिए तैयार की गई है (24)
और जो लोग इमान लाए और उन्होंने नेक काम किए उनको (ऐ पैग़म्बर) खुशख़बरी दे दो कि उनके लिए (बेहिश्त के) वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरे जारी हैं जब उन्हें इन बाग़ात का कोई मेवा खाने को मिलेगा तो कहेंगे ये तो वही (मेवा है जो पहले भी हमें खाने को मिल चुका है) (क्योंकि) उन्हें मिलती जुलती सूरत व रंग के (मेवे) मिला करेंगे और बेहिश्त में उनके लिए साफ सुथरी बीवियाँ होगी और ये लोग उस बाग़ में हमेशा रहेंगे (25)
बेशक खु़दा मच्छर या उससे भी बढ़कर (हक़ीर चीज़) की कोई मिसाल बयान करने में नहीं झेंपता बस जो लोग ईमान ला चुके हैं वह तो यह यक़ीन जानते हैं कि ये (मिसाल) बिल्कुल ठीक है और ये परवरदिगार की तरफ़ से है (अब रहे) वह लोग जो काफि़र है बस वह बोल उठते हैं कि खु़दा का इस मिसाल से क्या मतलब है, ऐसी मिसाल से ख़ुदा बहुतेरों की हिदायत करता है मगर गुमराही में छोड़ता भी है तो ऐसे बदकारों को (26)
जो लोग खु़दा के एहदो पैमान को मज़बूत हो जाने के बाद तोड़ डालते हैं और जिन (ताल्लुक़ात) का खु़दा ने हुक्म दिया है उनको क़ताआ कर देते हैं और मुल्क में फसाद करते फिरते हैं, यही लोग घाटा उठाने वाले हैं (27)
(हाँए) क्यों कर तुम खु़दा का इन्कार कर सकते हो हालाँकि तुम (माओं के पेट में) बेजान थे तो उसी ने तुमको ज़िन्दा किया फिर वही तुमको मार डालेगा, फिर वही तुमको (दोबारा क़यामत में) जि़न्दा करेगा फिर उसी की तरफ लौटाए जाओगे (28)
वही तो वह (खु़दा) है जिसने तुम्हारे (नफ़े) के ज़मीन की कुल चीज़ों को पैदा किया फिर आसमान (के बनाने) की तरफ़ मुतावज्जेह हुआ तो सात आसमान हमवार (व मुसतहकम) बना दिए और वह (खु़दा) हर चीज़ से (खू़ब) वाकि़फ है (29)
और (ऐ रसूल) उस वक़्त को याद करो जब तुम्हारे परवरदिगार ने फ़रिश्तों से कहा कि मैं (अपना) एक नायब ज़मीन में बनानेवाला हूँ (फरिश्ते ताज्जुब से) कहने लगे क्या तू ज़मीन में ऐसे शख़्स को पैदा करेगा जो ज़मीन में फ़साद और खू़ँरेजि़याँ करता फिरे हालाँ तो कि (अगर) ख़लीफा बनाना है (तो हमारा ज़्यादा हक़ है) क्योंकि हम तेरी तारीफ व तसबीह करते हैं और तेरी पाकीज़गी साबित करते हैं तब खु़दा ने फरमाया इसमें तो शक ही नहीं कि जो मैं जानता हूँ तुम नहीं जानते (30)

राहुल बाबा, ज्ञानी बाबा का ज्ञान ( वीडियो )

Written By SACCHAI on शनिवार, 6 अप्रैल 2019 | 11:55 am

https://youtu.be/ygWbnoPHnCU
 ज्ञानी बाबा का ज्ञान ( वीडियो )
काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को मज़ाक के रूप मे देश याद रखेगा ना की कोई ऊपलब्धि के कारण , राहुल गांधी क्या बोलते है वो खुदको भी पता नहीं होता है


ये उतना ही सच है जितना भगवान है , बहुत सारे वीडियो आपने देखे होंगे उनकी बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करनेवाले मगर आज एक वीडियो आपके लिए लाया हु जो सबसे हटकर है क्यू की इस वीडियो मे उन्होने सारी मर्यादाए तोड़ दी है

ये ज्ञानी बाबा का ज्ञान सुनकर आप भी हँसते रहे जाओगे 

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