नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

दर्पण लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
दर्पण लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

त्रिपदा अगीत .पंचक.....ड़ा श्याम गुप्त....

Written By shyam gupta on रविवार, 14 अगस्त 2011 | 9:47 am



जीवन जीना एक नियम है,
नियम स्वयं ही इक जीवन है ;
नीति-नियम से जीले मानव |

कोटिभि ग्रन्थ पढ़ लिए तो क्या,
कोटिभि ग्रन्थ लिख लिए तो क्या;
प्रेम न् जाना तो क्या जाना ?

भ्रष्ट आचरण हैयदि तो क्या,
सुधर जायगा, इच्छा तो कर;
सत्कर्मों की माला जपले |

कहने को चाहे पंडित हैं,
मुल्ला फादर भी हैं तो क्या;
यदि अच्छे इंसान नहीं हैं |

जब जब याद हमारी आये,
हमें देखने को मन चाहे;
दर्पण के सम्मुख आजाना |

Founder

Founder
Saleem Khan