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श्वेता के साथ -सच का 'हाथ'

Written By shikha kaushik on सोमवार, 3 दिसंबर 2012 | 12:55 am

श्वेता के साथ -सच का 'हाथ'
Shweta Bhatt, the wife of suspended IPS officer Sanjiv Bhatt. File Photo.

 कॉंग्रेस ने गुजरात के निलंबित आई.पी.एस.अधिकारी संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट को मणिनगर सीट पर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उतारकर अपने विरोधियों का मुहं बंद कर दिया है . गुजरात दंगों का सच सामने लाने वाले बहादुर एवं ईमानदार अधिकारी संजीव भट्ट के परिवार को जो ज्यादती झेलनी पड़ी है -उसका जवाब जनता नरेंद्र मोदी को हराकर दे सकती है .जो लोग ''वन्दे मातरम'' का उद्घोष करते हुए एवं ''राष्ट्रीय ध्वज '' लहराते हुए दिल्ली में भ्रष्टाचार के विरुद्ध सीना तानकर खड़े थे और भ्रष्टाचार के लिए एकमात्र जिम्मेदार 'कॉंग्रेस 'को ठहराने की जिद पर अड़े थे क्या आज गुजरात में जाकर श्वेता के साथ  खड़े हो सकेंगें ?क्या वे भ्रष्टाचार से भी ज्यादा गंभीर मुद्दे साम्प्रदायिकता के खिलाफ श्वेता के कदम से कदम मिलाकर नरेन्द्र मोदी को हराने की मुहीम में शामिल होंगें ?पिछले दस साल से गुजरात में लोकतंत्र की धज्जिया उड़ाते इस तानाशाह के खिलाफ खड़े होने का साहस करने वाली श्वेता ने 'नेता के रूप में' मोदी से अपने को कमतर आंकते हुए कहा है की -''हालाँकि मैं मानती हूँ की मेरा और मोदी का मुकाबला बराबरी का नहीं है ''  लेकिन इस सन्दर्भ में ये उल्लेखनीय है की श्वेता और मोदी का मुकाबला बराबरी का हो ही नहीं सकता क्योंकि सच और झ्हूठ का कोई मुकाबला होता ही नहीं .गुजरात दंगों के मुख्य दोषी नरेंद्र मोदी को भले ही किसी अदालत द्वारा सजा न सुनाई गयी हो क्योंकि उनके आतंक के चलते   एक एफ.आई.आर.तक उनके खिलाफ किसी थाने   में दर्ज न हो सकी किन्तु बहादुर व् ईमानदार अधिकारी संजीव भट्ट ने उनके आतंक के आगे घुटने नहीं टेके .फिर भट्ट परिवार के सच और मोदी के झूठ  का मुकाबला कैसे हो सकता है ?श्वेता जिस सच का हाथ थामकर मोदी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरी हैं उस सच का ओहदा मोदी के झूठ और षड्यंत्रों से कहीं ऊँचा है .नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी को समझ लेना चाहिए की श्वेता का उनके खिलाफ खड़ा होना ''सत्यमेव जयते ''की एक शुरुआत भर है .ये सिलसिला अब दूर तक जारी रहेगा .गुजरात के प्रत्येक नागरिक से श्वेता जैसे बहादुर -ईमानदार उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने की अपील करते हुए मैं यही कहूँगी -
''आतंक के आगे घुटने मत टेको !
जिंदगी को मौत बनने से रोको !
हर हालत को सह  जाना  हौसला नहीं !
एक बार खिलाफत करके भी देखो !!
                                     शिखा कौशिक 'नूतन'
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2 टिप्पणियाँ:

शालिनी कौशिक ने कहा…

.सार्थक बात कही है आपने दहेज़ :इकलौती पुत्री की आग की सेज

Rajesh Kumari ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल 4/12/12को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका स्वागत है

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