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हिंदी ब्लॉग-जगत की पुरुषवादी धारा का रुख़ मोड़ने लिए AIBA के अध्यक्ष पद पर 'वन्दना जी' की नियुक्ति, आईये स्वागत करें !!!

Written By Saleem Khan on गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011 | 1:04 am



वन्दना जी
अध्यक्षा, AIBA
ज दौर बदल रहा है और हालात भी बदल रहें हैं. लोगों के कपडे पहनने से लेकर साधन तक सब बदल रहें हैं, उनका खानपान भी बदल रहा है लेकिन मन में बैठी हुई रूढ़ियाँ और पूर्वाग्रह  ज्यों का त्यों बने हुए हैं. इन्हीं में से एक पूर्वाग्रह औरतों के प्रति है जो हमारे भारतीय हिंदी ब्लॉग-जगत में भी व्याप्त है ! औरत का वजूद सम्मान के लायक़ है. ध्यान देने वालों के लिए  किसी सबूत की ज़रुरत नहीं है कि औरत आख़िर क्यूँ सम्मान के लायक़ है बल्कि यह क़ुदरती-रूप से ही सम्मानित है. हर औरत सम्मान के लायक़ है फिर वो किसी भी देश की क्यूँ न हो ! भारतीय नारी तो विशेष रूप से आदरणीय है क्यूंकि आज सिर्फ़ उसी के दम से भारतीय सभ्यता और संस्कार ज़िंदा हैं.


वंदना जी AIBA की अध्यक्षा नियुक्त हुईं:::  
भारतीय ब्लॉग-जगत में नारी-शक्ति को महसूस करते हुए AIBA ने अध्यक्षा के पद पर भारत देश की राजधानी दिल्ली निवासी वंदना जी को नियुक्त किया गया है. वैसे तो वंदना जी का नाम ब्लॉग-जगत में परिचय का मोहताज नहीं है फिर भी औपचारिकता हेतु परिचय की आवश्यकता है::: 

वन्दना जी का कहना है की वे जाल-जगत रुपी महासागर की एक अकिंचन बूंद हैं, जबकि हक़ीक़त ये है कि वे सुहृदयता की महासागर हैं.  उनकी सबसे बड़ी ख़ूबी ये है कि वह ब्लॉग-जगत की हरेक अच्छी रचना और सृजन को ह्रदय से सराहती हैं फ़िर रचना-कर्ता कोई भी क्यूँ न हो. उनको अपनी प्रसंशा करना नहीं आता, जिसकी तारीफ़ पूरा ब्लॉग जगत करता है उसे ख़ुद अपनी तारीफ़ करने की कोई आवश्यकता नहीं. वन्दना जी एक गृहणी होते हुए भी ब्लॉग-जगत में पिछले आधे दशक से सक्रिय हैं यह उनकी रचना-धर्मिता का आईना है. उनके प्रमुख ब्लॉग हैं::: ज़िन्दगी...एक ख़ामोश सफ़र (2007), ज़ख्म...जो फूलों ने दिए (2008), एक प्रयास (2009).

अगर उनकी रूचि की बात करें तो उनकी एक ख़ास रूचि है ब्लॉग को सर्च करना. बहुत से ब्लॉगर अभी भी ऐसे हैं जो ब्लॉग जगत में एक हद तक ही महदूद हैं मगर वंदना जी आपको हर श्रेणी के ब्लॉग पर मिल ही जाएँगी. इसकी एक ख़ास वजह है कि  वे अच्छी रचना को सराहे बिना नहीं रहतीं. इसके अतिरिक्त उन्हें लिखना-पढ़ना, संगीत सुनना और चैटिंग करना बहुत पसंद है.   किस्से कहानी वाली मैगजींस उन्हें पसंद हैं और गृह शोभा नामक पत्रिका उनकी फेवरेट है. अगर हम फिल्मों की बात करें तो बक़ौल वन्दना जी 'हम दिल दे चुके सनम', 'देवदास', 'आनन्द', 'सफ़र' और 'देवर' फ़िल्में बहुत पसंद हैं.
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AIBA केवल शाब्दिक पहलवानी का अखाड़ा मात्र नहीं है, यह भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व भी करता है और इसके लिए इसमें भारतीय महिलाओं की मौजूदगी की महति आवश्यकता है. इसी आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए वंदना जी को इस अपूर्व ब्लॉग की अध्यक्षा का काम सँभालने का मौक़ा दिया गया है. नारी शक्ति को दर्शाने के लिए इस ब्लॉग में महान ममता मंडल का भी गठन किया गया है. इस मंडल में AIBA की सभी महिला सदस्य/अनुसरणकर्ता स्वमेव शामिल कर ली जाएँगी, इसके लिए उन्हें किसी औपचारिकता की आवश्यकता नहीं रहेगी. 

महान ममता मंडल
ममता त्रिपाठी
डॉ दिव्या श्रीवास्तव
प्रियंका राठौड़

रेखा श्रीवास्तव

डॉ. निरुपमा वर्मा
मीनाक्षी पन्त 
आलोकिता
रश्मि प्रभा
शिखा कौशिक

शालिनी कौशिक
सदा
मिसेज़ अख्तर ख़ान

ज़ीशान ज़ैदी कोशाध्यक्ष नियुक्त हुए:::  
भारतीय पुरुष वर्ग के प्रति भी कोई पूर्वाग्रह नहीं है. इसलिए ज़ीशान ज़ैदी साहब को AIBA का कोषाध्यक्ष बनाया जाता है. जीशान ज़ैदी की लेखन प्रतिभा के सभी क़ायल हैं फिर चाहे वो किसी भी वर्ग के क्यूँ न हों. ज़ीशान ज़ैदी साहब भी पिछले आधे दशक से हिंदी ब्लॉग-जगत के जाने माने स्तम्भ हैं. आईये पढ़ते हैं जीशन भाई के बारे में उन्ही की ज़ुबानी:::
ज़ीशान ज़ैदी
कोषाध्यक्ष, AIBA
जन्म : 18 अक्तूबर 1973 / शिक्षा : एम0एस-सी (गणितीय सांख्यकी)/ सृजन:विज्ञान कथाएं (साइंस फिक्शन) व हास्य लेखन में विशेष रूचि। देश की प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में कहानियाँ प्रकाशित। नाट्य लेखन: प्रमुख मंचित नाटक हैं - उठाये जा सितम, पानी कहाँ हो तुम, बहू की तलाश, चोर-चोर मौसेरे, हाय ये मैली हवा, ये है डाक्टरी वर्कशाप, ये दिल मांगे पॉप, कहानी परलोक की,हाजिर हो, सौ साल बाद, पागल बीवी का महबूब, माडर्न हातिमताई, बुड्ढा फ्यूचर इत्यादि। टेलीफिल्म: ये सच है, अनजान रिश्ते अ¡धेरों की जंग, सितमगर इत्यादिरेडियो प्रसारण : अकेला, जीवित ऊर्जा, असली नकली इत्यादि कहानियां रेडियो से प्रसारित। दिल का मामला, हम भी हैं इंसान, रंगीले बाबा के रंग टीवी सीरियल लखनऊ दूरदर्शन से प्रसारित । किताबें :ताबूत (विज्ञान कथा में धारावाहिक रूप में प्रकाशित) /खुदा का वजूद साइंस की दलीलों में (थियोलोजी)/ प्रोफेसर मंकी (साइंस फिक्शन कहानियों का संग्रह)/कंप्यूटर की मौत (साइंस फिक्शन कहानियों का संग्रह) /एसोसियेशन ऑफ एजूकेशनल इम्प्रूवमेन्ट के अध्‍यक्ष, भारतीय विज्ञान कथा लेखक समिति, भारतीय विज्ञान कांग्रेस व तस्लीम के आजीवन सदस्य। अनेक कार्यशालाओं में स्क्रिप्ट लेखक विशेषज्ञ के तौर पर योगदान.

वहीँ न्यू क्रांतिदूत के संपादक महोदय श्री हरीश सिंह जी और मिथिलेश दुबे जी को AIBA का प्रचारक पद सँभालने की ज़िम्मेदारी दी जा रही है. हरीश जी भदोही के रहने वाले हैं वहीँ वर्तमान में मिथिलेश दूबे लखनऊ में ही कार्यरत है 

AIBA का मकसद ब्लॉग को पारम्परिक मीडिया का मात्र विकल्प ही नहीं बनाना बल्कि समानांतर बनाना है, इस उद्देश्य के सफल होने के लिए AIBA का हाथ मज़बूत करें. 

शीघ्र ही अन्य पदों की घोषणा की जायेगी.

-सलीम ख़ान
संस्थापक AIBA
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27 टिप्पणियाँ:

अख़्तर खान 'अकेला' ने कहा…

slim bhaia aek nya kmaal nyi himmt kr dikhayi he khudaa aiba ko vishv ke mnzr e aam pr kamyaab kre aamin . akhtar khan akela kota rajsthan

Tarkeshwar Giri ने कहा…

Sabhi ko Mubarak Bad

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

इस फ़ैसले के बाद हिंदी ब्लागजगत में संगठित पुरूषगर्दी पर लगाम लगेगी । इसे कहते हैं मुख्य धारा का रूख़ मोड़ देना ।
जो कि एक अभूतपूर्व कदम है । मैं इस आशय का प्रस्ताव AIBA पर संयोजक जनाब सलीम ख़ान साहब को कल एक पोस्ट के माध्यम से दे चुका हूँ ।
इस अद्भुत फ़ैसले का स्वागत है।
मैं सभी बहनों का विशेषकर और भाइयों का आम तौर पर स्वागत करता हूँ क्योंकि मेरा अनुभव है कि महिला ब्लागर्स मर्दों की तरह गुटबाज़ नहीं होतीं । ये चाहे असहमत हों तब भी ये किसी का बहिष्कार नहीं करतीं । इसके पीछे कारण यह है कि नारी ममता प्रधान है । इसी के साथ ख़ुशी की बात यह है कि वंदना जी प्यारी माँ ब्लाग की सदस्या भी हैं ।यह एक अभूतपूर्व कदम है ।
'महान ममता मंडल' में शामिल रेखा श्रीवास्तव जी, रश्मि प्रभा जी, शालिनी जी, शिखा जी और मीनाक्षी पंत जी भी प्यारी माँ ब्लाग के माध्यम से एक ज़बर्दस्त आंदोलन चला रही हैं ।
इस अद्भुत फ़ैसले का स्वागत है।

शिवकुमार ( शिवा) ने कहा…

सभी को बहुत -बहुत बाधाई

Minakshi Pant ने कहा…

आज मुझे पुरुष द्वारा नारी को इतना सम्मान देते हुए देख कर बहुत ख़ुशी हो रही है ये नारी जाति के लिए बहुत गर्व और ख़ुशी की बात है और में पुरुष जाति को भी थे तहे दिल से शुक्रिया कहना चाहूंगी की उन्होंने इतने जोश और सम्मान के साथ नारी का साथ दिया क्युकी कोई भी काम को आगे ले जाने के लिए किसी एक का नहीं दोनों का साथ चलना बहुत जरुरी है | में वंदना जी को बहुत सारी शुभकामनाये देती हूँ की वो अपने काम को आगे ले जाने सफलता प्राप्त करें बाकि हम सब उनके साथ हैं और बाकि सभी दोस्तों को मेरी तरफ से शुभकामनायें |

कवि सुधीर गुप्ता “चक्र” ने कहा…

आदरणीया वंदना जी, AIBS की अध्यक्षा पद पर नियुक्ति के लिए आपको अनंत बधाईयाँ और शुभकामनाएँ।
वर्षों से ब्लॉग़ जगत से जुडे‌ होने एवं मर्यादित लेखन और सरल एवं सहज शब्दों की भाषा प्रयोग के कारण निःसंदेह वंदना जी का अनुभव AIBS के लिए प्राण वायु का कार्य करेगा। मैं उन निर्णायकों को धन्यवाद देना चाहता हूँ जिन्होंने व्यक्तिगत व्यक्तित्व और साहित्य सेवा की धनी वंदना जी का चयन किया।
साथ ही साथ मैं "महान ममता मंडल" की सभी नारी शक्ति को भी अपनी ओर से ढेरों बधाईयाँ और शुभकामनाएँ देता हूँ।
व्यक्तिगत अपील: नारी शक्ति के आगमन का सहर्ष स्वागत करें और उनके सम्मान में अपनी टिप्पणी अवश्य दें।

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

bahut bahut badhai...aur shubhkamnayen!!

वन्दना ने कहा…

मेरे लिये महान आश्चर्य की बात है ये………मै तो अपने आप को किसी काबिल नही समझती मगर मुझे इस काबिल समझा गया जानकर सुखद भी लगा…………अभी चर्चा मंच पर बधाई देखी तो सोचा ये क्या है और अब यहाँ आकर पता चला कि मुझे किसी काबिल समझा गया………सबसे पहले हार्दिक आभारी हूँ और कोशिश करूँगी कि किसी को भी शिकायत का मौका न मिले………नारी शक्ति को पहचानने की तरफ़ जो ये पहला कदम आपने उठाया है उसका स्वागत है ……मै ना पुरुष विरोधी हूँ और ना ही महिलाओ की ही तरफ़दार …………बस जो सही हो उसे ही स्वीकार करती हूँ क्योंकि दोनो मे से किसी का भी अस्तित्व एक दूजे के बिना पूर्ण नही है…………महान ममता मंड्ल मे अभी काफ़ी नाम और शामिल होने चाहिये…………कितने ही नाम और ऐसे हैं जिनके बिना ये प्रक्रिया पूरी नही होगी………उम्मीद है जल्द से जल्द वे सभी नाम भी शामिल हो जायेंगे……………एक बार फिर से आभार्।

आलोकिता ने कहा…

Vandana ji bahut bahut subhkaamnayen aapko main purntah sahmat hun is baat se ki aap is pad ke kabil hain aur aapki tareef mein jitni baaten likhi hain sab sahi hain

आलोकिता ने कहा…

Sabhi chayaneet sadasyon ko hardik subhkaamnayen

Atul Shrivastava ने कहा…

सभी को ढेरों बधाईयां।
अच्‍छा करने के लिए शुभकामनाएं।

राजेन्द्र सिंह ने कहा…

Vandna Mem
Aapko Bahut Bahut Hardik Badhai.
Aur AIBA ke sabhi Members ko Bhi SubhkamnayeSabhi

D.P.Mishra ने कहा…

SALEM BHAI
Aapke prayaso ko ese tarah gati milate rahe.
bahut bahut badhai...aur shubhkamnayen!!

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

आल इंडिया ब्लोगर्स एसोसिएशन के लिए वंदना जी का अध्यक्ष का पद संभालना हमारे लिए ख़ुशी की बात है और इससे इस ब्लॉग की प्रगति और गरिमा को चार चंद लग रहे हैं

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

यहाँ चार से ज्यादा चाँद तो अभी भी हैं और जैसा कि वंदना जी कह रही हैं कि महान ममता मंडल में अभी कुछ सम्मानित हस्तियाँ और भी शामिल होने वाली हैं तो कुछ ताज्जुब नहीं कि चाँद चालीस से ज्यादा हो जाएँ।

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

aap sabhi ko bahut bahut badhayi .. mujhe bahut khushi hai ki blogging jaise medium ka durupyog na hone dene ke liye mahilao ko niyukt kiya gaya hai .. i really appreciate this move.. saare sadasya bahut hi anubhavi hai , rashmi didi bhi hia , mujhe bahut khushi hui hai ... agar koi post mere laayak ho to batana dosto .. main haazir hoon ..

vijay

रचना ने कहा…

waah meri bhi badhaii swikaar karey

anitakumar ने कहा…

सभी को बहुत -बहुत बाधाई।

आशा है कि जल्द ही मुझे भी सदस्यता मिल जायेगी। धन्यवाद

Prakash Joshi ने कहा…

आप सभी को ढेरों बधाई और शुभकामनाएँ। सबको मंगलकामना॥

सलीम ख़ान ने कहा…

AWASHY ANITA JEE

हरीश सिंह ने कहा…

एबा के संयोजक सलीम भाई ने जो निर्णय लिया है वह अत्यंत ही प्रशंसनीय है.. वंदना जी को अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई . मेरे यहाँ मुख्यमंत्री मायावती जी का दौरा होने के कारन मैं आप सब को शुभकामना और बधाई समय से नहीं दे पाया इसके लिए आप सभी से माफ़ी चाहते हुए आग्रह करता हु की एबा को सिर्फ नाम का नहीं बल्कि वास्तव में एक मजबूत संगठन बनाये. आपस में कभी किसी से कोई शिकायत हो तो उसे बेझिझक होकर कह दे मन में न रखे ताकि आपसी प्रेम बना रहे.
.......साथ ही सभी सदस्यों से मेरा निवेदन है की सभी की पोस्ट पर अपने अमूल्य समय निकल कर विचार अवश्य दे ताकि लेखको का मनोबल सुदृढ़ हो.
..........जरा फोटो पर विचार........... ममता जी और मिसेज़ अख्तर ख़ान का शर्मीलापन,, डॉ दिव्या श्रीवास्तव का आत्मविश्वास, प्रियंका राठौड़ और आलोकित की उन्मुक्त हंसी, रेखा श्रीवास्तव, डॉ. निरुपमा वर्मा, मीनाक्षी पन्त, और रश्मि प्रभा जी का ममत्व, शिखा कौशिक और शालिनी कौशिक की सादगी हमेशा बरकरार रहे. किन्तु लगता है की सदा की सदा ही हम लोंगो सुनाई देगी. खैर सब बढ़िया सब ठीक... वैसे हमारी अध्यक्ष वन्दना जी की मनमोहक हंसी निश्चय ही परिवार को बांध कर रखेगी...
आप सभी को एक बार फिर हार्दिक शुभकामना, बधाई...........
सलीम भाई से एक प्रार्थना......... डॉ. अनवर जमाल भाई को फ्री न छोड़े बड़ी शरारत करते है... उन्हें अवश्य किसी बड़ी जिम्मेदारी में बांधे............ पुनः बधाई.

हरीश सिंह ने कहा…

उपरोक्त एबा को AIBA पढ़ें.

Dr. shyam gupta ने कहा…

बधाई, वन्दना जी को....सभी ने सभी कुछ लिख दिया है और क्या लिखा जाय....

गीता पंडित (शमा) ने कहा…

सलीम भाई! आभार ...स्त्री होने के नाते मैं सभी नारी जाति की तरफ से आपको धन्यवाद देना चाहती हूँ...

वंदना जी को हार्दिक शुभ कामनाए...


सस्नेह
गीता पंडित

***Punam*** ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
***Punam*** ने कहा…

वंदनाजी..

AIBA की सदस्यता चाहती हूँ..

आपके सहयोग की प्रार्थी हूँ !!

S P MISHRA ने कहा…

नारी तो हमेशा ही शक्ति का प्रतीक होती है. वन्दनी जी इस माध्यम को और अधिक सशक्त बनायेगी ऐसा मेरा विश्वास है . बहुत बहुत बधाई...

S P MISHRA
http://shivemishra.blogspot.com

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