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हास्य-व्यंग्य दोहे

Written By Ambarish Srivastava on मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013 | 11:04 am

चिमटा बेलन प्रेम का, खुलकर करें बखान.
जोश भरें हर एक में, ले भरपूर उड़ान..

जगनिंदक घर राखिये, ए सी रूम बनाय.
चाहे सिर पर ही चढ़े, वहीं बीट करि जाय..

चमचों से डरते रहें, कभी करें नहिं बैर.
चमचे पीछे यदि पड़े, नहीं आपकी खैर..

नैनों से सुख ले रहे, नाप रहे भूगोल.
सारे भाई बंधु हैं, नहीं इन्हें कुछ बोल..

गलती कर नहिं मानिए, बने खूब पहचान.
अड़े रहें हल्ला करें, सही स्वयं को मान..

अहंकार दिखता बड़ा, 'मैं' छाया बिन प्राण.
'मैं' 'मैं' 'मैं' ही कीजिये, होगा अति कल्याण..

जब तक सीखें गुरु कहें, नहीं करें कुछ पाप.
गुरु हो बैठे आप जब, बनें गुरू के बाप..

गलत सही साबित करें, अगर चले नहिं जोर.
गुटबंदी तब कीजिये, और मचा दें शोर..

कूटतंत्र की राह पर, छूटतंत्र का राज.
लोकतंत्र है सामने रामराज्य है आज..

हास्य व्यंग्य सम-सामयिक. करते दोहे आज.
इनका उल्टा ही भला, सुखमय बने समाज..

--इं० अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर'
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5 टिप्पणियाँ:

रविकर ने कहा…

आभार आदरणीय-
दोहों कि छटा ही निराली है-
शुभकामनायें-
आदरणीय अरुण निगम जी कि रचना पर टिप्पणी कि है-
वह यहाँ भी उचित लगती है-
गल्तियों को मान लेना चाहिये
अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com)
अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ)

तिनके को भी सिद्धकर, कह सकते मल-खम्भ |
तर्क-शास्त्र में दम बड़ा, भरा पड़ा है दम्भ |

भरा पड़ा है दम्भ, गलतियाँ क्यूँकर मानें |
आठ-आठ हो साठ, विद्वता जिद है ताने |

होवे गलती सिद्ध, मगर वो ऐसे *पिनके |
बके अनाप-शनाप, तोड़ जाता कुल तिनके ||
*क्रोधित
तिनके तोडना=सम्बन्ध ख़त्म करना
http://dineshkidillagi.blogspot.in/2013/02/blog-post_1041.html

Ambarish Srivastava ने कहा…

आदरणीय रविकर जी, हास्य व्यंग्य के दोहों को पसंद करने के लिए हार्दिक धन्यवाद स्वीकारें |
आदरणीय अरुण कुमार निगम जी द्वारा रचित कुंडलिया बहुत ही सुंदर व संदेशप्रद है ....इसे व तत्संबंधित लिंक को साझा करने के लिए हार्दिक आभार| हार्दिक शुभकामनाएं|

रविकर ने कहा…

बेल बेल के पत्र से, शिव की पूजा होय |
बेलन से पति-*पारवत, पारवती दे धोय ||

पारवत=कबूतर

रविकर ने कहा…

आभार आदरणीय

अम्बरीश जी -

यह ब्लॉग काव्यमयी त्वरित टिप्पणियों का है-

पधारें-

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

Kalipad "Prasad" ने कहा…

व्यंग अच्छा लगा ,अच्छी रचना
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