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ब्लोगर सम्मान परम्परा का ढकोसला बंद कीजिये !'

Written By shikha kaushik on रविवार, 8 मई 2011 | 10:01 pm


'ब्लोगर सम्मान परम्परा का ढकोसला  बंद कीजिये !''
इस आलेख का जन्म वर्तमान में ब्लोगिंग जगत में चल रही ''ब्लोगर सम्मान समारोह परम्परा 'के प्रति मेरे मस्तिष्क में चल रही उधेड़-बुन से हुआ .सम्मान पाना सभी चाहते हैं और इसमें कोई बुराई भी नहीं है किन्तु ब्लॉग-जगत में जो भी सम्मान प्रदान किये गए उनका आधार क्या है ?इसकी कोई ठोस जानकारी तथाकथित सम्मान सम्मलेन आयोजित करने वालों ने अंतर्जाल पर नहीं डाली.आखिर क्या हैं ये आधार -

१-क्या किसी ब्लॉग के समर्थकों के आधार पर उसे सर्वश्रेठ ब्लोगर चुना जाता है ?

२-क्या ब्लॉग पर आने वाली टिप्पन्नियों की संख्या के आधार पर सर्वश्रेठ ब्लोगर का चुनाव होता है ?

३-आप किन ब्लोग्स को किस आधार पर सम्मान प्रदान करने हेतु विश्लेषण के लिए चुनते हैं?

४-नन्हे ब्लोगर का चयन किस आधार पर करते हैं जबकि सभी जानते हैं की नन्हे ब्लोगर स्वयं ब्लोग्स पर पोस्ट नहीं डालते उनके माता-पिता ही ये काम करते हैं ?

५-किसी बलोगर की टिपण्णी और ब्लोगर्स से श्रेठ है इसका क्या आधार है ?

६-ऐसा क्या खास है सम्मान पाने वाले ब्लोगर में जो उसे अन्य ब्लोगर से श्रेष्ठ  बनता है ?क्या उसकी लेखन क्षमता अन्य ब्लोगर्स से श्रेष्ठ है ?

७-ब्लोग्स को  किन किन kश्रेणियों  में बांटा गया -राजनैतिक,सामाजिक ,अथवा-साहित्यिक  विधा के आधार पर पर-कविता,कहानी,लघु कथा,आलेख आदि ?

                                    हो सकता है मेरा ज्ञान कम हो किन्तु मैंने सम्मान प्राप्त करने वालों की सोची तो देखी,फोटो भी देखे पर सम्मान किस आधार पर प्रदान किये गए इस सम्बन्ध में एक भी पोस्ट सम्मान आयोजित करने वालों की और से अंतर्जाल पर डाली गए हो मैंने नहीं पढ़ी  . 
                                   इस परम्परा में व्यापक परिवर्तन की जरूरत है .अभी से ही ब्लॉग जगत दो धडों में टूटता नज़र आ रहा है .मेरी समझ में नहीं आता की आखिर सम्मान की जरूरत क्या है ?मैं तो जिस भी ब्लॉग पर जाती हूँ मुझे तो ख़ुशी होती है की यहाँ पर भी एक नया ब्लोगर अपनी समस्त दुनिया को अपनी नज़र से हमारे समक्ष रख रहा है .सम्मान तो सभी के विचारों का किया जाना चाहिए .ये क्या की इसके विचार उससे बेहतर है ?
                                    इस सन्दर्भ में ''ब्लोगर मीट ''बहुत उपयोगी हो सकती हैं .ये समाज व् राष्ट्र की समस्याओं को सुलझाने की दिशा में सार्थक पहल कर सकती हैं .हर ब्लोगर का सम्मान कीजिये-सम्मान समारोह द्वारा नहीं उसका उत्साहवर्धन करके .उसकी सोच को सराह्कर.
                               ''ये ब्लोगर बेस्ट है ''कहने से ही तो सम्मान नहीं होता ये परम्परा ब्लोगर्स के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के स्थान पर कटुता की खाई ही चौड़ी करेगी .ब्लोगिंग की बगिया को फूलों से महकने दे नफरत के कांटे निकाल फेकिये .सम्मान परम्परा सभी ब्लोगर आपस में एक दूजे के ब्लोग्स पर सार्थक व् सटीक टिपण्णी देकर निभा ही रहे हैं.सभी बेस्ट ब्लोगर हैं .सभी अच्छा लिख रहे हैं ,सभी अच्छी टिपण्णी कर रहे हैं ,सभी लघु कथाएं सार्थक मुद्दे उठा रही हैं .सभी कवितायेँ दिल को छू रही हैं और .....सभी का सम्मान हमारे ह्रदय में समान रूप से है .आगे जब भी कोई सम्मान समारोह हो आप उसका बहिष्कार करें.सम्मान प्राप्त करने के स्थान पर सभी को सम्मान देने की वकालत करें ऐसा मेरा आपसे अनुरोध है .क्या आप मुझसे सहमत नहीं ?
                                                    शिखा कौशिक 
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9 टिप्पणियाँ:

निशांत ने कहा…

मेरे विचार से लेखों का क्या प्रभाव रहता है किसी मानसिकता को बदलने में और जो लेख किसी का भला कर सकते हैं ....कुछ समस्याओं का निवारण कर सकते हैं ..उन्हें ही पुरुस्कृत करना चाहिए ...
मुझे लगता है कि रचना को ही पुरुस्कृत करना चाहिए...

शालिनी कौशिक ने कहा…

ek sarthak aahwan se bhara aalekh aur bilkul sahi samay par uthaya gaya kadam jab blog jagat me charon aur best bloggars kee dhoom machi hai aur ye taq pata nahi ki aakhir ye best hain to kaise ?nishant ji kee baton se poorntaya sahmat.

डॉ० डंडा लखनवी ने कहा…

आपकी चिंता वाजिब है। आपने अपने लेख में सटीक मुद्दे उठाए हैं। आपको बहुत-बहुत बधाई। वस्तुत: ब्लाग-लेखन जन-पत्रकारिता के रूप में बड़ी तेजी से उभार रहा है। इसमें आम जनता की मनोभावानाएं व्यावसायिक पत्रकारिता की व्युह-रचना को भेद कर देश-विदेश में पहुँच रही हैं। अत: जन-पत्रकारिता की शक्ति को धन, पद, पुरस्कार, सम्मान आदि के प्रभाव से कुंठित करने का कुचक्र चल पड़ा है। अपने यहाँ जाति-धर्म की राजनीति खूब हो चुकी है। जनता के सामने ऐसे तत्व बेनकाब हो चुके हैं। अत: ओछी राजनीति को चमकाने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं के नए-नए दरवाजे खोले जा रहे हैं। ब्लाग लेखकों को और आम जनता को इन साजिसों से सावधान रहने की आवश्यकता है।
==================
सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

खट्टा-मीठा-तीखा पचाने की आदत डालनी चाहिए!
सम्मान ही तो किया है!
अपमानित तो नहीं किया?

शिखा कौशिक ने कहा…

shastri ji aapse aise cooment ki ummeed nahi thi .aap to hamare blog jagat me margdarshak ki bhanti hain .kya yah aalekh aapko aisa laga ki maine swayam ko samman pradan n kiye jane par likha hai .yadi aap ye sochte hain to mera aakalan karne me aapse bhari bhool hui hai .

Dr. shyam gupta ने कहा…

---ब्लोग्गिन्ग अपने विचार व साहित्य को अन्य के सम्मुख रखने के लिये है न कि ब्लोगर वर्गीकरण, सम्मानीकरण जैसे घटिया कार्यों के लिये जो व्यर्थ के वितन्डे, विवाद व भाई-भतीजावाद,भ्रष्टाचार व आपसी झगडे उत्पन्न करते हैं..

---हर प्रकार का पचाने का अर्थ होता है...हांजी हांजी मिलाना अर्थात यथास्थिति में चलते रहना व सभी परिस्थितियों से सम्झौता ,उचित-अनुचित का विभेद किये बिना... किसी से पन्गा न लेने की व्यवस्था.....नवीन राह नवीन सोच, यथा-योग्य विचार से परे रहना....

kkk ने कहा…

सुंदर और सार्थक विचार . एक बात जिस पर आपने गौर नहीं किया . छुपी हुई साम्प्रदायिक सोच . सम्मान समारोह हिंदी ब्लोगर्स का था ,लेकिन बैनर और अन्य चीजें कुछ और ही दर्शा रही थी

निशांत ने कहा…

jahan tak shahitya ke vikas ki baat hai..ham bahut chote hain us saagar ke liye..

par hame ek swasth soch ka utsaahvardhan karna chahiye...
ek aisa soch jisase vyaktitv ka vikaas ho..aur desh me ek accha vaatavaran bane...

sabhi apna aatm nirikshan karke nispaksh roop se sochen...

pratiyogita bahut acchi pahal hoti hai..
pratiyogita ke niti nirdharan sab spasht hona chahiye...

aur sabse zyada samman kisi ko khud se hi mil sakta hai....swadhaya karke..ki usne jo likha ya karya kiya uske liye usne kitni mehnat ki ya rachnatmakta dikhaayi...
koi kisi ke aatmsamman ko na chin sakta hai na de sakta hai...

isliye jo bhi karen...ek acche se soch ke saath ....sawarate rahiye....aur sudharate rahiye....

रचना ने कहा…

parikalpna blog par 3 saal sae ravindra prabahat apni pasand kae blog ko krm sae "badaa - chhotaa " bataa rahey haen

phir parikalpna par group banaya gaya aur bloggar sae kehaa gayaa agar aap puruskaar chahtey haen to jud jaaye aur blog post bhaejae

phir jo jud gaye unmae sae ravindra prabhat nae 51 ko puruskaar daene ki goshna kii

phir unhonae ek sponsor khojaa aur puruskaar dilvaa diyae

is kae aalwa kitab chhapaaii gayee aur blogger sae kehaa gayaa jinko apna naam chapwaana haen kitaab karidh lae

yae ek private party haen hindi bloging kaa itihaas nahin haen

aur private party karnae kae liyae yaa to paesaa chahiyae yaa sponsor

baaki shalini aap samjhdaar haen samjh gayee hogii mae kyaa keh rahee hun

aur har kisi ko maargdarshak ityadi naa kehaa karey

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