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दुआ

Written By Krishan Kayat on रविवार, 24 अप्रैल 2016 | 6:39 pm

                          
                                  " दुआ "
हिचकियों का इलाज ढूंढना  तेरे बस की बात नहीं 
इलाज ही करना   है   तो    मेरे मरने की दुआ कर । 
मुझे  भुला  पाना भी      इतना   आसान नहीं है 
भुलाना ही है मुझे तो जहाँ को भूलने की दुआ कर । 
मुझसे  मिले बिना     चैन न आएगा   तुमको भी 
चैन ही लेना है तो हर जन्म में मिलने की दुआ कर । 
क़त्ल कर मेरे अरमानों का  खुशियाँ  ढूंढते हो यहाँ 
खुशियाँ ही लेनी है तो अरमानों के पलने की दुआ कर । 
वो  और  होंगे  जिन्हें    ख़ाक में मिला दिया तूने कभी 
"कायत" को मिटाना है तो खाक में मिलने की दुआ कर ।
 
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