नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

भोजन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
भोजन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

अन्नपूर्णा.....ड़ा श्याम गुप्त ...

Written By shyam gupta on मंगलवार, 19 जुलाई 2011 | 4:44 pm

भोजन ब्रह्म है,
और जीव -
हज़ार मुखों से ग्रहण करने वाला ,
वैश्वानर है,
जगत है;
और हज़ार हाथों से बांटने वाली ,
अन्नपूर्णा -
माया है उसी ब्रह्म की |

हाँ, ऐसा ही लगता है ,तब--
जब  तुम - तवा, चूल्हा , चकला-
रोटी, कलछा और कुकर पर,
एक ही समय में ध्यान दे लेती हो |
और , मुन्ना मुन्नी पापा व अन्य को ,
परोस भी देती हो,
एक साथ-
गर्मा-गर्म, सुस्वादु भोजन |
जैसे, अन्नपूर्णा -
हज़ार हाथों से,
सारे विश्व को तृप्त कर रही हो |
या कोई ज्ञान रूपा,
हज़ार भावों से-
वैश्वानर को,
चराचर को,
ब्रह्म का-
आस्वादन करा रही हो ||

Founder

Founder
Saleem Khan