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तेरे ही हाथ में है बेशक तू ही हर चीज़ पर क़ादिर है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on मंगलवार, 14 मई 2019 | 6:37 am

बेशक जो लोग ख़ुदा की आयतों से इन्कार करते हैं और नाहक़ पैग़म्बरों को क़त्ल करते हैं और उन लोगों को (भी) क़त्ल करते हैं जो (उन्हें) इन्साफ़ करने का हुक़्म करते हैं तो (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो (21)
यही वह (बदनसीब) लोग हैं जिनका सारा किया कराया दुनिया और आख़ेरत (दोनों) में अकारत गया और कोई उनका मददगार नहीं (22)
(ऐ रसूल) क्या तुमने (उलमाए यहूद) के हाल पर नज़र नहीं की जिनको किताब (तौरेत) का एक हिस्सा दिया गया था (अब) उनको किताबे ख़ुदा की तरफ़ बुलाया जाता है ताकि वही (किताब) उनके झगड़ें का फैसला कर दे इस पर भी उनमें का एक गिरोह मुँह फेर लेता है और यही लोग रूगरदानी {मुँह फेरने} करने वाले हैं (23)
ये इस वजह से है कि वह लोग कहते हैं कि हमें गिनती के चन्द दिनों के सिवा जहन्नुम की आग हरगिज़ छुएगी भी तो नहीं जो इफ़तेरा परदाज़ी ये लोग बराबर करते आए हैं उसी ने उन्हें उनके दीन में भी धोखा दिया है (24)
फि़र उनकी क्या गत होगी जब हम उनको एक दिन (क़यामत) जिसके आने में कोई शुबहा नहीं इक्ट्ठा करेंगे और हर शख़्स को उसके किए का पूरा पूरा बदला दिया जाएगा और उनकी किसी तरह हक़तल्फ़ी नहीं की जाएगी (25)
(ऐ रसूल) तुम तो यह दुआ मांगों कि ऐ ख़ुदा तमाम आलम के मालिक तू ही जिसको चाहे सल्तनत दे और जिससे चाहे सल्तनत छीन ले और तू ही जिसको चाहे इज़्ज़त दे और जिसे चाहे जि़ल्लत दे हर तरह की भलाई तेरे ही हाथ में है बेशक तू ही हर चीज़ पर क़ादिर है (26)
तू ही रात को (बढ़ा के) दिन में दाखि़ल कर देता है (तो) रात बढ़ जाती है और तू ही दिन को (बढ़ा के) रात में दाखि़ल करता है (तो दिन बढ़ जाता है) तू ही बेजान (अन्डा नुत्फ़ा वगै़रह) से जानदार को पैदा करता है और तू ही जानदार से बेजान नुत्फ़ा (वगै़रहा) निकालता है और तू ही जिसको चाहता है बेहिसाब रोज़ी देता है (27)
मोमिनीन, मोमिनीन को छोड़ के काफि़रों को अपना सरपरस्त न बनाऐं और जो ऐसा करेगा तो उससे ख़ुदा से कुछ सरोकार नहीं मगर (इस कि़स्म की तदबीरों से) किसी तरह उन (के शर) से बचना चाहो तो (ख़ैर) और ख़ुदा तुमको अपने ही से डराता है और ख़ुदा ही की तरफ़ लौट कर जाना है (28)
ऐ रसूल तुम उन (लोगों से) कह दो किजो कुछ तुम्हारे दिलों में है तो ख़्वाह उसे छिपाओ या ज़ाहिर करो (बहरहाल) ख़ुदा तो उसे जानता है और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में वह (सब कुछ) जानता है और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (29)
(और उस दिन को याद रखो) जिस दिन हर शख़्स जो कुछ उसने (दुनिया में) नेकी की है और जो कुछ बुराई की है उसको मौजूद पाएगा (और) आरज़ू करेगा कि काश उस की बदी और उसके दरमियान में ज़मानए दराज़ (हाएल) हो जाता और ख़ुदा तुमको अपने ही से डराता है और ख़ुदा अपने बन्दों पर बड़ा शफ़ीक़ और (मेहरबान भी) है (30)

इंजिनियर नरेश विजयवर्गीय ,,ह्रदय के बाईपास सफल ऑपरेशन के बाद ,घर पर आराम फरमा हैं

Written By आपका अख्तर खान अकेला on सोमवार, 13 मई 2019 | 7:03 am

अल्लाह का शुक्र है ,,कांग्रेस के प्रशिक्षक ,,थिंक टेंक ,,इंजिनियर नरेश विजयवर्गीय ,,ह्रदय के बाईपास सफल ऑपरेशन के बाद ,घर पर आराम फरमा हैं ,उनकी सह्तयाबी ,उम्रदराज़ी के लिए सभी दुआएं कीजिये ,,,नरेश विजयवर्गीय यूँ तो किसी परिचय के मोहताज नहीं ,,प्रसिद्ध लेखक ,पत्रकार ,,इंजिनियर ,, कांग्रेस के मुखर विचारक ,चिंतक ,कुशल वक्ता ,, कांग्रेस संविधान विशेषज्ञ ,,आदरणीय नरेश विजयवर्गीय ने कांग्रेस की हर पीढ़ी के साथ काम किया है ,नरेश विजय वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकर्ता रहे ,तो इंद्रा जी के विकट परिस्थितियों में भी उनके समर्थक रहे ,उन्होंने राजीव जी के साथ ,,राजीव प्रशिक्षण कार्यक्रम में कोटा ज़िले का मोर्चा संभाला ,कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मुख्य प्रशिक्षक के रूप में नरेश विजयवर्गीय ने हज़ारों हज़ार कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया उन्होंने कई पुस्तके लिखी ,वोह तकनीकी समाचार के सम्पादक प्रकाशक है ,अनेक समाज सेवी संस्थाओं से उनका सीधा जुड़ाव है ,नियमित कर्तव्यपरायण कर्मचारी की तरह वोह प्रतिदिन 5 बजे कांग्रेस कार्यालय गुमानपुरा उपस्थित रहते है ,, कांग्रेस के हर कार्यक्रम ,हर चुनाव में वोह सक्रिय रहते है ,,उनके सुझाव महत्वपूर्ण रहते ,है ,नरेश विजयवर्गीय कांग्रेस भवन ट्रस्ट के उपाध्यक्ष भी है ,,,संगठन के कई महत्वपूर्ण पदों पर वोह ज़िम्मेदार रहे है ,,नाथद्वारा मंदिर ट्रस्ट के सदस्य रहे है ,मथुराधीश मंदिर पाटनपोल के नियमित सेवादार है ,,नरेश विजयवर्गीय रिश्ते निभाने में अव्वल ,है विकट परिस्थितियों में भी वोह कार्यकर्ताओं , साथियों के ख़ुशी के कार्यक्रमों ,,गमी के कार्यक्रमों श्रद्धांजलि सभाओं ,,अस्पताल में उनकी कुशल क्षेम पूंछने में अव्वल से अव्वल नेतृत्व रहे है ,,माशा अल्लाह नरेश विजयवर्गीय का ऑपरेशन सफल रहा ,भारत विकास परिषद अस्पताल से अब वोह कोटा अपने छावनी स्थित निवास पर आराम कर रहे रहे है ,जल्द ही खेर से उनके टाँके भी कट जाएंगे ,वोह थोड़े बहुत दिन आराम के बाद ,इंशा अल्लाह फिर से पचपन से बचपन के कांग्रेस के सुपरहिट खिलाड़ी बना जाएंगे ,लेकिन अफ़सोस होता है ,ऐसे नेतृत्व ,ऐसी शख्सियत ,जो सभी के सुख दुःख के साथी हो ,पार्टी बंदिशों से अलग हठ कर जो सभी राजनितिक दलों के लोगों का सम्मान करते हों ,उन्हें अहिमयत देते हों ,उन्हें तंदरुस्ती की शुभकामनाये देने वालों की अगर कंजूसी हो तो अजीब सा महसूस होता है ,समाज की इस विकृति पर थोड़ा दुःख होता है ,,,लेकिन फिर भी क़य्यूम अली ,आबशार क़ाज़ी ,,पंकज मेहता ,मास्टर मोहनलाल जी सहित ,उनकी अपनी मित्र मण्डली ,शुभचिनक मंडली ,जिसमे युवा भी है ,बुज़ुर्ग भी है ,सभी ने उनके लिए दुआएं की है ,,और जल्द ही उनके पूर्ण स्वस्थ होने की दुआएं लगातार चल रही है ,,,अल्लाह उन्हें जल्द स्वस्थ करे ,,लम्बी उम्र ,सत्याबी के साथ फिर से उन्हें लिखने ,पढ़ने ,भाषण देने ,कांग्रेस ,,,देश ,,समाज के बारे में बेहतर से बेहतर विचार देने वाला बनाये ,,बॉस यही दुआ है ,,कोई पूंछे तो पूंछे नहीं पूंछे तो नहीं पूंछे ,,,वक़्त निकल गया ,बात याद रहती है , उनका मोबाइल नंबर 9214582469 है ,,निवास छावनी मुख्य बाज़ार कंचन चूड़ी सेंटर के सामने विजयवर्गीय भवन है ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

देश के ब्यूरोक्रेट सिस्टम को समझकर बोलने वाले होते

काश हमारे प्रधानमंत्री आप पढ़े लिखे की तरह व्यवहार करते ,,डिग्रियां असली नक़ली केसी भी हों कोई फ़र्क़ नहीं पढता ,,लेकिन समझदारी से देश के ब्यूरोक्रेट सिस्टम को समझकर बोलने वाले होते ,, तो आपको जानकारी होती एक चुनाव आयोग होता है ,,जिसके नियंत्रण में चुनाव के कार्यकाल में सारे अधिकारी ,,कलेक्टर ,एस पी ,,हो जाते ,है ,आपकी बात और है आपके हेलीकॉप्टर में रखे बक्से की तलाशी के लिए चुनाव आयोग का अधिकारी आ जाए तो आप उसे निलंबित करवा देते है ,शिकायते सुनने नहीं देते ,,लेकिन राजस्थान में अनुशासित सियासत ,है यहाँ चुनाव के दौरान ,चुनाव आयोग के नियंत्रण में सभी अधिकारी रहते है ,किसी मुख्यमंत्री ,,या मंत्री को किसी भी अधिकारी को कमांड करने का कोई अधिकार नहीं होता है ,आपको यह भी पता है ,के आपने अशोक गहलोत की लोकप्रियता ,,उनके भविष्य की व्यवस्था से घबराकर ,,अधिकतम टारगेट राजस्थान में रहकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से किया है ,वोह बात और है यहाँ की जनता आपके बहकावे में नहीं आयी ,और सधी हुई भाषा में अशोक गहलोत ने आपको लाजवाब जवाब देकर पोल खोली है ,लेकिन आपकी लगातार राजस्थान यात्राओं में योगी जी सहित कई मंत्रियों की लगातार यात्राओं में अलवर सहित सभी जगह के अधिकारी ,पुलिस ,इंटेलीजेंश ,,चुनाव आयोग के नियंत्रण में होने से खुलकर आपकी सुरक्षा ,व्यवस्था में लगे रहे ,,,,बस इसीलिए क़ानून व्यवस्था में गड़बड़ी आयी ,,किसी महिला के साथ अगर ज़्यादती हुई तो चुनाव आयोग की नियंत्रित पुलिस ,प्रशासन की ज़िम्मेदारी थी ,,जैसे चुनाव खत्म हुए ,,मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की जानकारी में सुचना आयी ,उन्होंने तुरंत चुनाव आयोग से अनुमति लेकर एस पी को हटाया ,,नए एस पी को भी चुनाव आयोग से स्वीकृति लेकर लगाया ,,,और देख लीजिये एक ऐसा अनूठा उदाहरण के महिलाओं की सुरक्षा सुनवाई के लिए राजस्थान में एक अलग से विभाग गठित जिलेवार हो गया है ,आपको भी पुरे देश में ऐसा कार्यव्यवहार करना चाहिए ,आदरणीय मोदी जी अगर आप ने चुनाव के दौरान क़ानून व्यवस्था के लिए ज़िम्मेदार अधिकारीयों को निर्वाचन आयोग के नियंत्रण में नहीं रखा होता ,,मुख्यमंत्री के नियंत्रण में कर दिया होता तो आपके यह जो चवन्नी छाप बयान जिसमे आप राजस्थान को गालियां दे रहे हो वोह नहीं ,होते आदरणीय प्रधानमंत्री साहिब ,,चुनाव के दौरान नियंत्रक ,,चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी आप गहलोत पर डालकर अपना खौफ ज़ाहिर कर रहे है , लेकिन अशोक गहलोत तो फिर भी बुलंदियों पर पहुँच रहे है ,वोह आपके पुराने मित्र है ,वोह आपके मार्गदर्शक है ,आपने उनसे बहुत कुछ सीखा ,है ,बस नहीं सीखी तो गांधीगिरी नहीं सीखी ,सच नहीं सीखा ,,,राजस्थान की हर ,महिला पीड़िता को दरिदनों से सुरक्षित करने ,त्वरित सुनवाई ओर अधिकारीयों की ज़िम्मेदारी तय करने के लिए विभाग बनाना एक संवेदनशीलता का ही परिचय है ,लेकिन निर्वाचन कार्यक्रम के वक़्त की ज़िम्मेदारियाँ निर्वाचन आयोग की ही होती है ,उस दौरान कोई भी मंत्री ,मुख्यमंत्री की हैसियत कच नहीं है ,आपकी बात कुछ और है ,आप तो आप है ,,सो प्लीज़ बयान वापस लीजिये आदरणीय ,,अख्तर

फ़रिश्तों और इल्म वालों ने गवाही दी है

(उनकी भी) क़ौमे फि़रऔन और उनसे पहले वालों की सी हालत है कि उन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया तो खुदा ने उन्हें उनके गुनाहों की पादाश {सज़ा} में ले डाला और ख़ुदा सख़्त सज़ा देने वाला है (11)
(ऐ रसूल) जिन लोगों ने कुफ्र इख़्तेयार किया उनसे कह दो कि बहुत जल्द तुम (मुसलमानो के मुक़ाबले में) मग़लूब {हारे हुए} होंगे और जहन्नुम में इकट्ठे किये जाओगे और वह (क्या) बुरा ठिकाना है (12)
बेशक तुम्हारे (समझाने के) वास्ते उन दो (मुख़ालिफ़ गिरोहों में जो (बद्र की लड़ाई में) एक दूसरे के साथ गुथ गए (रसूल की सच्चाई की) बड़ी भारी निशानी है कि एक गिरोह ख़ुदा की राह में जेहाद करता था और दूसरा काफि़रों का जिनको मुसलमान अपनी आँख से दुगना देख रहे थे (मगर ख़ुदा ने क़लील ही को फ़तह दी) और ख़ुदा अपनी मदद से जिस की चाहता है ताईद करता है बेशक आँख वालों के वास्ते इस वाक़ये में बड़ी इबरत है (13)
दुनिया में लोगों को उनकी मरग़ूब चीज़े (मसलन) बीवियों और बेटों और सोने चाँदी के बड़े बड़े लगे हुए ढेरों और उम्दा उम्दा घोड़ों और मवेशियों ओर खेती के साथ उलफ़त भली करके दिखा दी गई है ये सब दुनयावी जि़न्दगी के (चन्द रोज़ा) फ़ायदे हैं और (हमेशा का) अच्छा ठिकाना तो ख़ुदा ही के यहां है (14)
(ऐ रसूल) उन लोगों से कह दो कि क्या मैं तुमको उन सब चीज़ों से बेहतर चीज़ बता दू (अच्छा सुनो) जिन लोगों ने परहेज़गारी इख़्तेयार की उनके लिए उनके परवरदिगार के यहां (बेहिश्त) के वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं (और वह) हमेशा उसमें रहेंगे और उसके अलावा उनके लिए साफ सुथरी बीवियां हैं और (सबसे बढ़कर) ख़ुदा की ख़ुशनूदी है और ख़ुदा (अपने) उन बन्दों को खूब देख रहा हे जो दुआऐं मांगा करते हैं (15)
कि हमारे पालने वाले हम तो (बेताम्मुल) इमान लाए हैं बस तू भी हमारे गुनाहों को बख़्श दे और हमको दोज़ख़ के अज़ाब से बचा (16)
(यही लोग हैं) सब्र करने वाले और सच बोलने वाले और (ख़ुदा के) फ़रमाबरदार और (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करने वाले और पिछली रातों में (ख़ुदा से तौबा) इस्तग़फ़ार करने वाले (17)
ज़रूर ख़ुदा और फ़रिश्तों और इल्म वालों ने गवाही दी है कि उसके सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं है और वह ख़ुदा अद्ल व इन्साफ़ के साथ (कारख़ानाए आलम का) सॅभालने वाला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वही हर चीज़ पर) ग़ालिब और दाना है (सच्चा) दीन तो ख़ुदा के नज़दीक यक़ीनन (बस यही) इस्लाम है (18)
और अहले किताब ने जो उस दीने हक़ से इख़्तेलाफ़ किया तो महज़ आपस की शरारत और असली (अम्र) मालूम हो जाने के बाद (ही क्या है) और जिस शख़्स ने ख़ुदा की निशानियों से इन्कार किया तो (वह समझ ले कि यक़ीनन ख़ुदा (उससे) बहुत जल्दी हिसाब लेने वाला है (19)
(ऐ रसूल) बस अगर ये लोग तुमसे (ख़्वाह मा ख़्वाह) हुज्जत करे तो कह दो मैंने ख़ुदा के आगे अपना सरे तस्लीम ख़म कर दिया है और जो मेरे ताबे है (उन्होंने) भी) और ऐ रसूल तुम एहले किताब और जाहिलों से पूॅछो कि क्या तुम भी इस्लाम लाए हो (या नही) बस अगर इस्लाम लाए हैं तो बेख़टके राहे रास्त पर आ गए और अगर मुँह फेरे तो (ऐ रसूल) तुम पर सिर्फ़ पैग़ाम (इस्लाम) पंहुचा देना फ़र्ज़ है (बस) और ख़ुदा (अपने बन्दों) को देख रहा है (20)

बेशक ख़ुदा पर कोई चीज़ पोशीदा नहीं है (न) ज़मीन में न आसमान में

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 12 मई 2019 | 7:19 am

अलिफ़ लाम मीम अल्लाह ही वह (ख़ुदा) है जिसके सिवा कोई क़ाबिले परस्तिश नहीं है (1)
वही जि़न्दा (और) सारे जहान का सॅभालने वाला है (2)
(ऐ रसूल) उसी ने तुम पर बरहक़ किताब नाजि़ल की जो (आसमानी किताबें पहले से) उसके सामने मौजूद हैं उनकी तसदीक़ करती है और उसी ने उससे पहले लोगों की हिदायत के वास्ते तौरेत व इन्जील नाजि़ल की (3)
और हक़ व बातिल में तमीज़ देने वाली किताब (कु़रान) नाज़िल की बेशक जिन लोगों ने ख़ुदा की आयतों को न माना उनके लिए सख़्त अज़ाब है और ख़ुदा हर चीज़ पर ग़ालिब बदला लेने वाला है (4)
बेशक ख़ुदा पर कोई चीज़ पोशीदा नहीं है (न) ज़मीन में न आसमान में (5)
वही तो वह ख़ुदा है जो माँ के पेट में तुम्हारी सूरत जैसी चाहता है बनाता हे उसके सिवा कोई माबूद नहीं (6)
वही (हर चीज़ पर) ग़ालिब और दाना है (ए रसूल) वही (वह ख़ुदा) है जिसने तुमपर किताब नाजि़ल की उसमें की बाज़ आयतें तो मोहकम (बहुत सरीह) हैं वही (अमल करने के लिए) असल (व बुनियाद) किताब है और कुछ (आयतें) मुतशाबेह (मिलती जुलती) (गोल गोल जिसके मायने में से पहलू निकल सकते हैं) बस जिन लोगों के दिलों में कज़ी है वह उन्हीं आयतों के पीछे पड़े रहते हैं जो मुतशाबेह हैं ताकि फ़साद बरपा करें और इस ख़्याल से कि उन्हें मतलब पर ढाले लें हालाँकि ख़ुदा और उन लोगों के सिवा जो इल्म से बड़े पाए पर फ़ायज़ हैं उनका असली मतलब कोई नहीं जानता वह लोग (ये भी) कहते हैं कि हम उस पर ईमान लाए (यह) सब (मोहकम हो या मुतशाबेह) हमारे परवरदिगार की तरफ़ से है और अक़्ल वाले ही समझते हैं (7)
(और दुआ करते हैं) ऐ हमारे पालने वाले हमारे दिल को हिदायत करने के बाद डावाडोल न कर और अपनी बारगाह से हमें रहमत अता फ़रमा इसमें तो शक ही नहीं कि तू बड़ा देने वाला है (8)
ऐ हमारे परवरदिगार बेशक तू एक न एक दिन जिसके आने में शुबह नहीं लोगों को इक्ट्ठा करेगा (तो हम पर नज़रे इनायत रहे) बेशक ख़ुदा अपने वायदे के खि़लाफ़ नहीं करता (9)
बेशक जिन लोगों ने कुफ्र इख़्तेयार किया उनको ख़ुदा (के अज़ाब) से न उनके माल ही कुछ बचाएंगे, न उनकी औलाद (कुछ काम आएगी) और यही लोग जहन्नुम के ईधन होंगे (10)

उस दिन से डरो जिस दिन तुम सब के सब ख़ुदा की तरफ़ लौटाये जाओगे

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शुक्रवार, 10 मई 2019 | 6:25 am

और उस दिन से डरो जिस दिन तुम सब के सब ख़ुदा की तरफ़ लौटाये जाओगे फिर जो कुछ जिस शख़्स ने किया है उसका पूरा पूरा बदला दिया जाएगा और उनकी ज़रा भी हक़ तलफ़ी न होगी (281)
ऐ ईमानदारों जब एक मियादे मुक़र्ररा तक के लिए आपस में क़र्ज़ का लेन देन करो तो उसे लिखा पढ़ी कर लिया करो और लिखने वाले को चाहिये कि तुम्हारे दरम्यिान तुम्हारे क़ौल व क़रार को, इन्साफ़ से ठीक ठीक लिखे और लिखने वाले को लिखने से इन्कार न करना चाहिये (बल्कि) जिस तरह ख़ुदा ने उसे (लिखना पढ़ना) सिखाया है उसी तरह उसको भी उज़्र लिख देना चाहिये और जिसके जि़म्मे कर्ज आयद होता है उसी को चाहिए कि (तमस्सुक) की इबारत बताता जाये और ख़ुदा से डरे जो उसका सच्चा पालने वाला है डरता रहे और (बताने में) और कर्ज देने वाले के हुक़ूक़ में कुछ कमी न करे अगर कर्ज लेने वाला कम अक़्ल या माज़़ूर या ख़ुद (तमस्सुक) का मतलब लिखवा न सकता हो तो उसका सरपरस्त ठीक ठीक इन्साफ़ से लिखवा दे और अपने लोगों में से जिन लोगों को तुम गवाही लेने के लिये पसन्द करो (कम से कम) दो मर्दों की गवाही कर लिया करो फिर अगर दो मर्द न हो तो (कम से कम) एक मर्द और दो औरतें (क्योंकि) उन दोनों में से अगर एक भूल जाएगी तो एक दूसरी को याद दिला देगी, और जब गवाह हुक्काम के सामने (गवाही के लिए) बुलाया जाएँ तो हाजि़र होने से इन्कार न करे और कर्ज का मामला ख़्वाह छोटा हो या उसकी मियाद मुअय्युन तक की (दस्तावेज़) लिखवाने में काहिली न करो, ख़ुदा के नज़दीक ये लिखा पढ़ी बहुत ही मुन्सिफ़ाना कारवाई है और गवाही के लिए भी बहुत मज़बूती है और बहुत क़रीन (क़यास) है कि तुम आईन्दा किसी तरह के शक व शुबहा में न पड़ो मगर जब नक़द सौदा हो जो तुम लोग आपस में उलट फेर किया करते हो तो उसकी (दस्तावेज) के न लिखने में तुम पर कुछ इल्ज़ाम नहीं है (हां) और जब उसी तरह की ख़रीद (फ़रोख़्त) हो तो गवाह कर लिया करो और क़ातिब (दस्तावेज़) और गवाह को ज़रर न पहुँचाया जाए और अगर तुम ऐसा कर बैठे तो ये ज़रूर तुम्हारी शरारत है और ख़ुदा से डरो ख़ुदा तुमको मामले की सफ़ाई सिखाता है और वह हर चीज़ को ख़ूब जानता है (282)
और अगर तुम सफ़र में हो और कोई लिखने वाला न मिले (और कर्ज देना हो) तो रहन बा कब्ज़ा रख लो और अगर तुममें एक का एक को एतबार हो तो (यॅू ही कर्ज दे सकता है मगर) फिर जिस शख़्स पर एतबार किया गया है (कर्ज लेने वाला) उसको चाहिये कर्ज देने वाले की अमानत (कर्ज) पूरी पूरी अदा कर दे और अपने पालने वाले ख़ुदा से डरे (मुसलमानो) तुम गवाही को न छिपाओ और जो छिपाएगा तो बेशक उसका दिल गुनाहगार है और तुम लोग जो कुछ करते हो ख़ुदा उसको ख़ूब जानता है (283)
जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़) सब कुछ खुदा ही का है और जो कुछ तुम्हारे दिलों में हे ख़्वाह तुम उसको ज़ाहिर करो या उसे छिपाओ ख़ुदा तुमसे उसका हिसाब लेगा, फिर जिस को चाहे बख़्श दे और जिस पर चाहे अज़ाब करे, और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (284)
हमारे पैग़म्बर (मोहम्मद) जो कुछ उनपर उनके परवरदिगार की तरफ से नाजि़ल किया गया है उस पर ईमान लाए और उनके (साथ) मोमिनीन भी (सबके) सब ख़ुदा और उसके फ़रिश्तों और उसकी किताबों और उसके रसूलों पर ईमान लाए (और कहते हैं कि) हम ख़ुदा के पैग़म्बरों में से किसी में तफ़रक़ा नहीं करते और कहने लगे ऐ हमारे परवरदिगार हमने (तेरा इरशाद) सुना (285)
और मान लिया परवरदिगार हमें तेरी ही मग़फि़रत की (ख़्वाहिश है) और तेरी ही तरफ़ लौट कर जाना है ख़ुदा किसी को उसकी ताक़त से ज़्यादा तकलीफ़ नहीं देता उसने अच्छा काम किया तो अपने नफ़े के लिए और बुरा काम किया तो (उसका बवाल) उसी पर पडे़गा ऐ हमारे परवरदिगार अगर हम भूल जाऐं या ग़लती करें तो हमारी गिरफ़्त न कर ऐ हमारे परवरदिगार हम पर वैसा बोझ न डाल जैसा हमसे अगले लोगों पर बोझा डाला था, और ऐ हमारे परवरदिगार इतना बोझ जिसके उठाने की हमें ताक़त न हो हमसे न उठवा और हमारे कु़सूरों से दरगुज़र कर और हमारे गुनाहों को बख़्श दे और हम पर रहम फ़रमा तू ही हमारा मालिक है तू ही काफि़रों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर (286)

खुदा सूद को मिटाता है और ख़ैरात को बढ़ाता है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on गुरुवार, 9 मई 2019 | 6:11 am

अगर ख़ैरात को ज़ाहिर में दो तो यह (ज़ाहिर करके देना) भी अच्छा है और अगर उसको छिपाओ और हाजतमन्दों को दो तो ये छिपा कर देना तुम्हारे हक़ में ज़्यादा बेहतर है और ऐसे देने को ख़ुदा तुम्हारे गुनाहों का कफ़्फ़ारा कर देगा और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे ख़बरदार है (271)
ऐ रसूल उनका मंजि़ले मक़सूद तक पहुँचाना तुम्हारा काम नहीं (तुम्हारा काम सिर्फ़ रास्ता दिखाना है) मगर हां ख़ुदा जिसको चाहे मंजि़ले मक़सूद तक पहुँचा दे और (लोगों) तुम जो कुछ नेक काम में ख़र्च करोगे तो अपने लिए और तुम ख़ुदा की ख़ुशनूदी के सिवा और काम में ख़र्च करते ही नहीं हो (और जो कुछ तुम नेक काम में ख़र्च करोगे) (क़यामत में) तुमको भरपूर वापस मिलेगा और तुम्हारा हक़ न मारा जाएगा (272)
(यह खै़रात) ख़ास उन हाजतमन्दों के लिए है जो ख़ुदा की राह में घिर गये हो (और) रूए ज़मीन पर (जाना चाहें तो) चल नहीं सकते नावाकि़फ़ उनको सवाल न करने की वजह से अमीर समझते हैं (लेकिन) तू (ऐ मुख़ातिब अगर उनको देखे) तो उनकी सूरत से ताड़ जाये (कि ये मोहताज हैं अगरचे) लोगों से चिमट के सवाल नहीं करते और जो कुछ भी तुम नेक काम में ख़र्च करते हो ख़ुदा उसको ज़रूर जानता है (273)
जो लोग रात को या दिन को छिपा कर या दिखा कर (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करते हैं तो उनके लिए उनका अज्र व सवाब उनके परवरदिगार के पास है और (क़यामत में) न उन पर किसी कि़स्म का ख़ौफ़ होगा और न वह आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे (274)
जो लोग सूद खाते हैं वह (क़यामत में) खड़े न हो सकेंगे मगर उस शख़्स की तरह खड़े होंगे जिस को शैतान ने लिपट कर मख़बूतुल हवास {पागल} बना दिया है ये इस वजह से कि वह उसके क़ायल हो गए कि जैसा बिक्री का मामला वैसा ही सूद का मामला हालाकि बिक्री को तो खुदा ने हलाल और सूद को हराम कर दिया बस जिस शख़्स के पास उसके परवरदिगार की तरफ़ से नसीहत (मुमानियत) आये और वह बाज़ आ गया तो इस हुक्म के नाजि़ल होने से पहले जो सूद ले चुका वह तो उस का हो चुका और उसका अम्र (मामला) ख़ुदा के हवाले है और जो मनाही के बाद फिर सूद ले (या बिक्री और सूद के मामले को यकसा बताए जाए) तो ऐसे ही लोग जहन्नुम में रहेंगे (275)
खुदा सूद को मिटाता है और ख़ैरात को बढ़ाता है और जितने नाशुक्रे गुनाहगार हैं खुदा उन्हें दोस्त नहीं रखता (276)
(हां) जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ी और ज़कात दिया किये उनके लिए अलबत्ता उनका अज्र व (सवाब) उनके परवरदिगार के पास है और (क़यामत में) न तो उन पर किसी कि़स्म का ख़ौफ़ होगा और न वह रन्जीदा दिल होंगे (277)
ऐ ईमानदारों ख़ुदा से डरो और जो सूद लोगों के जि़म्मे बाक़ी रह गया है अगर तुम सच्चे मोमिन हो तो छोड़ दो (278)
और अगर तुमने ऐसा न किया तो ख़ुदा और उसके रसूल से लड़ने के लिये तैयार रहो और अगर तुमने तौबा की है तो तुम्हारे लिए तुम्हारा असल माल है न तुम किसी का ज़बरदस्ती नुकसान करो न तुम पर ज़बरदस्ती की जाएगी (279)
और अगर कोई तंगदस्त तुम्हारा (कर्जदार हो) तो उसे ख़ुशहाली तक मोहल्लत (दो) और सदक़ा करो और अगर तुम समझो तो तुम्हारे हक़ में ज़्यादा बेहतर है कि असल भी बख़्श दो (280)

नेकी ,इबादत ,इस्लामिक शिक्षा की ट्रेनिंग का पाक महीना

Written By आपका अख्तर खान अकेला on बुधवार, 8 मई 2019 | 6:21 am

नेकी ,इबादत ,इस्लामिक शिक्षा की ट्रेनिंग का पाक महीना ,माह ऐ रमज़ान के पहले दिन ,,पर्यावरण संरक्षण ,पंछियों के बसेरा संरक्षण और उनके लिए दाने ,पानी के प्रबंधन के लिए नयापुरा क़ब्रिस्तान ,शहर ऐ खमूशा ,यानी बशर में चले गए लोगों की आबादी में ,,पेढ पौधे लगाकर ,ऑक्सीजन ज़ोन ,बनाने की कोशिशों में जुटे ,भाई हिकमत खान और उनकी टीम ने आज फिर रमज़ान के पहले रोज़े के दिन पर्यावरण संरक्षण के तहत पेढ लगाए ,,परिंडे बांधे ,,और आसपास की बस्तियों में रह रहे बच्चों को पर्यावरण शिक्षा ,,का पाठ पढ़ाते हुए उन्हें भी पेड़ों को बचाये रखने ,परिण्डों में पानी ,जुआर ,बाजरा ,,गेहूं वगेरा दाना डालने के लिए मोटिवेट किया ,,हिकमत खान पिछले कई सालों से क़ब्रिस्तान की गंदगी साफ़ कर वहां पेढ़ों को लगाने ,,बाउंड्री कर आवारा मवेशियों से होने वाले क़ब्रों को नुकसान बचाने की कामयाब कोशिश में अपनी टीम के साथ लगातार जुटे है ,,,आज हिकमत खान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षाविद ,,समाजसेवक ,,अमित धारीवाल ,,समाजसेवक पत्रकार,,चम्बल संदेश ,, पवन आहूजा ,,पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र में कार्य कर रहे समाजसेवक डॉक्टर सुधीर गुप्ता ,,,,शिक्षाविद डॉक्टर ज़फर मोहम्मद ,,ह्यूमन रिलीफ सोसायटी के एडवोकेट अख्तर खान अकेला ,,कांग्रेस के जिला संगठन सचिव रामेश्वर सुनवालका ,,,कोटा उत्तर के ब्लॉक अध्यक्ष भाई राजीव आचार्य ,,सेवादल के भाई अमीत सूद ,विपिन बरथूनिया ,,साहित्यकार मुस्तुफा खान ,,असलम भाई ,,शाकिर भाई ,,नयापुरा बढ़ी मस्जिद के इमाम साहब ,,सहित कई पर्यावरण विद ,हिकमत भाई के साथ क़ब्रिस्तान ,सरंक्षण ,सोंदर्यकरण समिति के सदस्यगण शामिल थे ,हिकमत खान ने इस मौके पर क़ब्रिस्तान के इर्द गिर्द रहने वाले बच्चों को पेड़ ,,पौधों ,पर्यावरण ,,के बारे में जानकारी देते हुए इस्लामिक ज़िम्मेदारी ,पर्यावरण बचाओं अभियान से जुड़ने का अहसास दिलाया ,और मोटिवेशन कार्यक्रम के लिए रमज़ान का महीना होने से ऐसे बच्चे जो पेड़ पौधे संरक्षित करने में दिलचस्पी रखते रहे है ,,इस क्षेत्र में काम कर रहे है ,परिण्डों स्वेच्छा से पानी ,दाना डालकर पंछियों के भोजन पानी का ध्यान रख रहे है ,ऐसे बच्चों को ,खिताब ऐ पर्यावरण संरक्षण ,,के एजाज़ से सम्मानित करते हुए ,उनका टोपी उढ़ाकर सम्मान करवाया ,,हिकमत खान ने बताया के अभी सुरक्षित बाउंड्रीवाल होने के बाद यहाँ अलग अलग टुकड़ों में तार फेंसिंग करके ,उस क्षेत्र में क़ब्रों के आसपास और पेड़ लगाने की योजना है ,फिलहाल साफ़ सफाई अभियान में सैकड़ों किलों ,पॉलीथिन की थैलियों का कचरा साफ़ करवाया है और भविष्य में क़ब्रिस्तान संरक्षित रहे इसके लिए ,,कचरापात्र लगाए गए है ,फातिहा वगेरा पढ़ने आने जाने वालों से अपील की गयी है के वोह कचरा ,और पॉलीथिन वगेरा कचरा पात्र में डालें ,इस अपील का फायदा भी हुआ है और अब इस साल कूड़े कचरे पॉलीथिन की समस्या कम रही है ,,,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

ऐ ईमान वालों अपनी पाक कमाई और उन चीज़ों में से जो हमने तुम्हारे लिए ज़मीन से पैदा की हैं (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करो

जो लोग अपने माल खुदा की राह में खर्च करते हैं उनके (खर्च) की मिसाल उस दाने की सी मिसाल है जिसकी सात बालियाॅ निकलें (और) हर बाली में सौ (सौ) दाने हों और ख़ुदा जिसके लिये चाहता है दूना कर देता है और खुदा बड़ी गुन्जाइश वाला (हर चीज़ से) वाकि़फ़ है (261)
जो लोग अपने माल ख़़ुदा की राह में ख़र्च करते हैं और फिर ख़र्च करने के बाद किसी तरह का एहसान नहीं जताते हैं और न जिनपर एहसान किया है उनको सताते हैं उनका अज्र (व सवाब) उनके परवरदिगार के पास है और न आख़ेरत में उनपर कोई ख़ौफ़ होगा और न वह ग़मगीन होंगे (262)
(सायल को) नरमी से जवाब दे देना और (उसके इसरार पर न झिड़कना बल्कि) उससे दरगुज़र करना उस खै़रात से कहीं बेहतर है जिसके बाद (सायल को) ईज़ा पहुँचे और ख़ुदा हर शै से बेपरवा (और) बुर्दबार है (263)
ऐ इमानदारों आपनी खै़रात को एहसान जताने और (सायल को) ईज़ा {तकलीफ} देने की वजह से उस शख़्स की तरह अकारत मत करो जो अपना माल महज़ लोगों को दिखाने के वास्ते ख़र्च करता है और ख़ुदा और रोजे़ आखे़रत पर ईमान नहीं रखता तो उसकी खै़रात की मिसाल उस चिकनी चट्टान की सी है जिसपर कुछ ख़ाक (पड़ी हुयी) हो फिर उसपर ज़ोर शोर का (बड़े बड़े क़तरों से) मेंह बरसे और उसको (मिट्टी को बहाके)
चिकना चुपड़ा छोड़ जाए (इसी तरह) रियाकार अपनी उस ख़ैरात या उसके सवाब में से जो उन्होंने की है किसी चीज़ पर क़ब्ज़ा न पाएंगे (न दुनिया में न आख़ेरत में) और ख़ुदा काफि़रों को हिदायत करके मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता (264)
और जो लोग ख़ुदा की ख़ुशनूदी के लिए और अपने दिली एतक़ाद से अपने माल ख़र्च करते हैं उनकी मिसाल उस (हरे भरे) बाग़ की सी है जो किसी टीले या टीकरे पर लगा हो और उस पर ज़ोर शोर से पानी बरसा तो अपने दुगने फल लाया और अगर उस पर बड़े धड़ल्ले का पानी न भी बरसे तो उसके लिये हल्की फुआर (ही काफ़ी) है और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उसकी देखभाल करता रहता है (265)
भला तुम में कोई भी इसको पसन्द करेगा कि उसके लिए खजूरों और अंगूरों का एक बाग़ हो उसके नीचे नहरें जारी हों और उसके लिए उसमें तरह तरह के मेवे हों और (अब) उसको बुढ़ापे ने घेर लिया है और उसके (छोटे छोटे) नातवां कमज़ोर बच्चे हैं कि एकबारगी उस बाग़ पर ऐसा बगोला आ पड़ा जिसमें आग (भरी) थी कि वह बाग़ जल भुन कर रह गया ख़ुदा अपने एहकाम को तुम लोगों से साफ़ साफ़ बयान करता है ताकि तुम ग़ौर करो (266)
ऐ ईमान वालों अपनी पाक कमाई और उन चीज़ों में से जो हमने तुम्हारे लिए ज़मीन से पैदा की हैं (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करो और बुरे माल को (ख़ुदा की राह में) देने का क़सद भी न करो हालाकि अगर ऐसा माल कोई तुमको देना चाहे तो तुम अपनी ख़ुशी से उसके लेने वाले नहीं हो मगर ये कि उस (के लेने) में (अमदन) आख़ चुराओ और जाने रहो कि ख़ुदा बेशक बेनियाज़ (और) सज़ावारे हम्द है (267)
शैतान तमुको तंगदस्ती से डराता है और बुरी बात (बुख़्ल) का तुमको हुक्म करता है और ख़ुदा तुमसे अपनी बखि़्शश और फ़ज़ल (व करम) का वायदा करता है और ख़ुदा बड़ी गुन्जाइश वाला और सब बातों का जानने वाला है (268)
वह जिसको चाहता है हिकमत अता फ़रमाता है और जिसको (ख़ुदा की तरफ) से हिकमत अता की गई तो इसमें शक नहीं कि उसे ख़ूबियों से बड़ी दौलत हाथ लगी और अक़्लमन्दों के सिवा कोई नसीहत मानता ही नहीं (269)
और तुम जो कुछ भी ख़र्च करो या कोई मन्नत मानो ख़ुदा उसको ज़रूर जानता है और (ये भी याद रहे) कि ज़ालिमों का (जो) ख़ुदा का हक़ मार कर औरों की नज़्र करते हैं (क़यामत में) कोई मददगार न होगा (270)

मेरे मित्र ,मेरे भाई पंकज मेहता, को आज उनके जन्म दिन पर बेशुमार कामयाबी की दुआओं के साथ दिली मुबारकबाद

Written By आपका अख्तर खान अकेला on मंगलवार, 7 मई 2019 | 7:36 am

राजस्थान कांग्रेस में अपनी सक्रियता ,,मृदुल व्यवहार ,,हंसमुख स्वभाव ,,गाँधीवादी छवि से कांग्रेस पार्टी में ,जान फूंकने के प्रयासों में जुटे रहने वाले ,,मेरे मित्र ,मेरे भाई पंकज मेहता, को आज उनके जन्म दिन पर बेशुमार कामयाबी की दुआओं के साथ दिली मुबारकबाद ,, मुख्य मंत्री अशोक गहलोत , सचिन पायलेट सहित कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं का जन्म दिन मनाने वाले पंकज मेहता के जन्म दिन पर आज उनके मित्रों ,कार्यकर्ताओं ,वफादार साथियों ने हर साल की तरह इस बार भी ,तलवंडी कोटा स्थित पुष्पा मैरीज हॉल में ,सुबह 9 बजे से रक्तदान शिविर का आयोजन रखा है ,,
राजस्थान कांग्रेस में अपनी सक्रियता ,,मृदुल व्यवहार ,,हंसमुख स्वभाव ,,गाँधीवादी छवि से कांग्रेस पार्टी में ,जान फूंकने के प्रयासों में जुटे भाई पंकज मेहता,,का रविवार को जन्म दिन है ,उनका जन्म दिन उनके मित्र ,परिजन ,कार्यकर्ता कोटा दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में रक्तदान शिविर के साथ मनाएंगे ,,,पंकज मेहता को जन्म दिन की बधाई ,,,, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में सदस्य ,, पंकज मेहता प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महासचिव और कुशल वक्ता ,प्रवक्ता के रूप में भाजपा की नीतियों के खिलाफ लगातार मुंह तोड़ जवाब दे रहे ,है ,,,पंकज मेहता झालावाड़ ज़िले के प्रभारी है उनके प्रबंधन में राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा सिंधिया के गढ में नगर निकाय चुनाव में भाजपा को करारी हार देकर पंकज मेहता के प्रबंधन में वहां कांग्रेस का नगर निगम चेयरमेन बनाकर उन्होंने सभी को चौंका दिया था ,,,राजस्थान कांग्रेस में अपनी सक्रियता ,,मृदुल व्यवहार ,,हंसमुख स्वभाव ,,गाँधीवादी छवि से जान फूंकने के प्रयासों में जुटे भाई पंकज मेहता कोटा संभाग की कांग्रेस एक जुट सक्रिय करने की भूमिका ,,बखूबी निभा रहे है ,,,जी हाँ दोस्तों पंकज मेहता जिन्हे लोग प्यार से धरती पुत्र इसलिए कहते है के यह कभी आसमान पर नहीं देखते ,,कभी आसमान पर नहीं थूकते ,,,सिर्फ ज़मीन पर चलते है ,,ज़मीनी हक़ीक़त समझते है ,,ज़मीनी कार्यकर्ताओं को कीड़े मकोड़े नहीं बल्कि अपना दोस्त समझते है ,,इसीलिए पंकज मेहता की छवि यारो के यार के रूप में बनी हुई है ,,कोटा संभाग की कांग्रेस में चाहे कितने भी गुट हो लेकिन पंकज मेहता निर्गुट होकर सभी को साथ लेकर संगठन की छवि सुधरने के सफलतम प्रयासों में जुटे है ,,,,,किसी की खुशियां हो ,,किसी का गम हो सभी में यह शामिल रहते है ,,बाहर से आने वाले कोंग्रेसी पदाधिकारी इनकी महमान नवाज़िश के शुक्रगुज़ार रहते है ,,,कोई भी बाहर से आने वाला कोंग्रेसी पदाधिकारी इनकी जानकारी में आने के बाद इनकी महमान नवाज़िश का लुत्फ़ ज़रूर लेता है ,,,,,पंकज मेहता सहज ,,सरल ,,,सभी से जुड़ाव रखने वाले सादा जीवन उच्च विचार रखकर कोटा कंग्रेस के सभी गुटों में आलू की तरह शामिल होकर संगठन का मज़बूती से काम कर रहे है ,,पंकज मेहता को कोटा दक्षिण से टिकिट मिला विकट परिस्थितियों भीतरघात के चलते चुनाव हारे ,,लेकिन इसकी शिकन उनके चेहरे पर नहीं चुनाव में हार जीत चलती है ,,कहावत है गिरते वही शाह सवार है जो चला करते है वोह तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चला करते है ,,ऊँची सोच ऊँची उड़ान ,,,पंकज मेहता की है ,,,राजकीय महाविद्यालय कॉमर्स कॉलेज से ही छात्र राजनीति से जुड़े पंकज मेहता मुखर वक्ता रहे है और इसीलिए छात्र कांग्रेस ,,युवक कांग्रेस ,,,रोडवेज डाइरेक्टर ,,जिला कांग्रेस अध्यक्ष ,,प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ,,प्रदेश महासचिव पद के सभी अनुभवों के साथ इन्होने अपना कर्तवय ज़िम्मेदारी से निभाया है ,,,,,पंकज मेहता रोज़ अपने मित्रों और ज़रूरत मन्दो से मिलते है इनका रामपुरा स्थित ऐतिहासिक निवास ,,,गुमानपुरा वल्ल्भनगर का कार्यालय ज़रूरत मन्दो के लिए हमेशा खुला हुआ है ,,इनके सम्पर्क में कोई भी पीड़ित आये तो वोह निराश नहीं लोटता उसे न्याय ज़रूर मिलता है ,,सत्ता हो या विपक्ष इनकी एक ही चाल यारो की यारी रहती है कोई घमंड कोई गुरुर नहीं ,,,सबसे अपनापन ,,कोटा संभाग सहित राजस्थान के सभी प्रशासनिक अधिकारी इनकी सहजता और सरलता के क़ायल है और इसीलिए सत्ता हो या ना हो पंकज मेहता की वाजिब बात इन अधिकारीयों को मानना पढ़ती है ,,पंकज मेहता विपक्षी पार्टियों से भी सिर्फ और सिर्फ चुनावी विरोध रखते है वरना विपक्षी पार्टियों से भी इनके भाईचारा और सद्भाविक व्यवहार के लोग क़ायल है ,,,,राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस में सक्रिय पंकज मेहता का लोहा दूसरे पदाधिकारी भी स्वीकारते है ,,,अभी कोटा में पार्टी का बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन हुआ ,, उनके पास ,,कोटा संभाग की ज़िम्मेदारी थी विकट परिस्थतियों के बाद भी इस ज़िम्मेदारी को पंकज महेता ने सहज सरलता से स्वीकारी ,,,कोटा में सचिन पायलेट का आगमन हो या फिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोई भी वरिष्ठ नेता हो वोह हमेशा उनके स्वागत उनके निर्देशों के पालन के लिए तैयार रहते है ,, पंकज मेहता अपने हुनर से सभी को साथ लेकर कामयाबी के सफर की तरफ ले जाने के प्रयासों में जुट गए है ,,,कांग्रेस में उत्तर दक्षिण ,,पूरब पश्चिम कोंग्रेसियों को एक साथ बिठाकर ,,एक मंच पर लाकर ,,एक जुट करने के प्रयासों में अगर कोई जुटा है तो वोह पंकज मेहता है ,,,पंकज मेहता गुटबाज़ी से हारे नहीं है वोह निर्गुट होकर सभी गुटों में जाते है और उन्हें ,,मुझे उनके मित्रों को पूरा यक़ीन है के राजस्थान सरकार में बैठे गांधीवादी मुख्यमंत्री उनके त्याग ,समर्पण ,पार्टी के प्रति निष्ठां और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ध्यान में रखकर भाई पंकज मेहता को उनके क़द के मुताबिक़ कोई सरकार में ज़िम्मेदारी ज़रूर देंगे ,ोंकज मेहता क़ौमी एकता का प्रतीक भी कहे जाते है ,जहाँ पंकज मेहता रोज़ा इफ्तार ,,ईद मिलन ,,ईद मिलादुन्नबी जैसे कार्यक्रमों के अगवा रहते है वही इनके नेतृत्व में होली मिलन ,,दीपावली मिलन जैसे समारोह भी भव्य रूप में मनाये जाते रहे है ,, ,,,पंकज मेहता को सालगिरह की बधाई ,,मुबारकबाद ,,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

ख़ुदा ही वो ज़ाते पाक है कि उसके सिवा कोई माबूद नहीं

फिर तो उन लोगों ने ख़़ुदा के हुक्म से दुश्मनों को शिकस्त दी और दाऊद ने जालूत को क़त्ल किया और ख़़ुदा ने उनको सल्तनत व तदबीर तम्द्दुन अता की और इल्म व हुनर जो चाहा उन्हें गोया घोल के पिला दिया और अगर ख़ुदा बाज़ लोगों के ज़रिए से बाज़ का दफाए (शर) न करता तो तमाम रुए ज़मीन पर फ़साद फैल जाता मगर ख़़ुदा तो सारे जहाँन के लोगों पर फज़ल व रहम करता है (251)
ऐ रसूल ये ख़ुदा की सच्ची आयतें हैं जो हम तुम को ठीक ठीक पढ़के सुनाते हैं और बेशक तुम ज़रुर रसूलों में से हो (252)
यह सब रसूल (जो हमने भेजे) उनमें से बाज़ को बाज़ पर फज़ीलत दी उनमें से बाज़ तो ऐसे हैं जिनसे ख़ुद ख़ुदा ने बात की उनमें से बाज़ के (और तरह पर) दर्जे बुलन्द किये और मरियम के बेटे ईसा को (कैसे कैसे रौशन मौजिज़े अता किये) और रूहुलकुदस (जिबरईल) के ज़रिये से उनकी मदद की और अगर ख़ुदा चाहता तो लोग इन (पैग़़म्बरों) के बाद हुये वह अपने पास रौशन मौजिज़े आ चुकने पर आपस में न लड़ मरते मगर उनमें फूट पड़ गई बस उनमें से बाज़ तो ईमान लाये और बाज़ काफि़र हो गये और अगर ख़ुदा चाहता तो यह लोग आपस में न लड़ते मगर ख़ुदा वही करता है जो चाहता है (253)
ऐ ईमानदारों जो कुछ हमने तुमको दिया है उस दिन के आने से पहले (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करो जिसमें न तो ख़रीदो फरोख़्त होगी और न यारी (और न आशनाई) और न सिफ़ारिश (ही काम आयेगी) और कुफ़्र करने वाले ही तो जुल्म ढाते हैं (254)
ख़ुदा ही वो ज़ाते पाक है कि उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वह) जि़न्दा है (और) सारे जहान का संभालने वाला है उसको न ऊँघ आती है न नींद जो कुछ आसमानो में है और जो कुछ ज़मीन में है (गरज़ सब कुछ) उसी का है कौन ऐसा है जो बग़ैर उसकी इजाज़त के उसके पास किसी की सिफ़ारिश करे जो कुछ उनके सामने मौजूद है (वह) और जो कुछ उनके पीछे (हो चुका) है (खुदा सबको) जानता है और लोग उसके इल्म में से किसी चीज़ पर भी अहाता नहीं कर सकते मगर वह जिसे जितना चाहे (सिखा दे) उसकी कुर्सी सब आसमानों और ज़मीनों को घेरे हुये है और उन दोनों (आसमान व ज़मीन) की निगाहदाश्त उसपर कुछ भी मुश्किल नहीं और वह आलीशान बुजु़र्ग मरतबा है (255)
दीन में किसी तरह की जबरदस्ती नहीं क्योंकि हिदायत गुमराही से (अलग) ज़ाहिर हो चुकी तो जिस शख़्स ने झूठे खुदाओं (बुतों) से इंकार किया और खुदा ही पर ईमान लाया तो उसने वो मज़बूत रस्सी पकड़ी है जो टूट ही नहीं सकती और ख़ुदा सब कुछ सुनता और जानता है (256)
ख़ुदा उन लोगों का सरपरस्त है जो ईमान ला चुके कि उन्हें (गुमराही की) तारीकि़यों से निकाल कर (हिदायत की) रौशनी में लाता है और जिन लोगों ने कुफ़्र इख़्तेयार किया उनके सरपरस्त शैतान हैं कि उनको (ईमान की) रौशनी से निकाल कर (कुफ़्र की) तारीकियों में डाल देते हैं यही लोग तो जहन्नुमी हैं (और) यही उसमें हमेशा रहेंगे (257)
(ऐ रसूल) क्या तुम ने उस शख़्स (के हाल) पर नज़र नहीं की जो सिर्फ़ इस बिरते पर कि ख़ुदा ने उसे सल्तनत दी थी इब्राहीम से उनके परवरदिगार के बारे में उलझ पड़ा कि जब इब्राहीम ने (उससे) कहा कि मेरा परवरदिगार तो वह है जो (लोगों को) जिलाता और मारता है तो वो भी (शेख़ी में) आकर कहने लगा मैं भी जिलाता और मारता हॅू (तुम्हारे ख़ुदा ही में कौन सा कमाल है) इब्राहीम ने कहा (अच्छा) खुदा तो आफ़ताब को पूरब से निकालता है भला तुम उसको पश्चिम से निकालो इस पर वह काफि़र हक्का बक्का हो कर रह गया (मगर ईमान न लाया) और ख़ुदा ज़ालिमों को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुॅचाया करता (258)
(ऐ रसूल तुमने) मसलन उस (बन्दे के हाल पर भी नज़र की जो एक गाँव पर से होकर गुज़रा औेर वो ऐसा उजड़ा था कि अपनी छतों पर से ढह के गिर पड़ा था ये देखकर वह बन्दा (कहने लगा) अल्लाह अब इस गाँव को ऐसी वीरानी के बाद क्योंकर आबाद करेगा इस पर ख़ुदा ने उसको (मार डाला) सौ बरस तक मुर्दा रखा फिर उसको जिला उठाया (तब) पूछा तुम कितनी देर पड़े रहे अर्ज़ की एक दिन पड़ा रहा या एक दिन से भी कम फ़रमाया नहीं तुम (इसी हालत में) गाव सौ बरस पड़े रहे अब ज़रा अपने खाने पीने (की चीज़ों) को देखो कि बुसा तक नहीं और ज़रा अपने गधे (सवारी) को तो देखो कि उसकी हड्डियाँ ढेर पड़ी हैं और सब इस वास्ते किया है ताकि लोगों के लिये तुम्हें क़ुदरत का नमूना बनाये और अच्छा अब (इस गधे की) हड्डियों की तरफ़ नज़र करो कि हम क्योंकर उन को जोड़ जाड़ कर ढाँचा बनाते हैं फिर उनपर गोश्त चढ़ाते हैं बस जब ये उनपर ज़ाहिर हुआ तो बेसाख़्ता बोल उठे कि (अब) मैं ये यक़ीने कामिल जानता हॅू कि ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (259)
और (ऐ रसूल) वह वाके़या भी याद करो जब इबराहीम ने (खुदा से) दरख़्वास्त की कि ऐ मेरे परवरदिगार तू मुझे भी तो दिखा दे कि तू मुर्दों को क्योंकर जि़न्दा करता है ख़़ुदा ने फ़रमाया क्या तुम्हें (इसका) यक़ीन नहीं इबराहीम ने अर्ज की (क्यों नहीं) यक़ीन तो है मगर आँख से देखना इसलिए चाहता हॅू कि मेरे दिल को पूरा इत्मिनान हो जाए फ़रमाया (अगर ये चाहते हो) तो चार परिन्दे लो और उनको अपने पास मॅगवा लो और टुकड़े टुकड़े कर डालो फिर हर पहाड़ पर उनका एक एक टुकड़ा रख दो उसके बाद उनको बुलाओ (फिर देखो तो क्यों कर वह सब के सब तुम्हारे पास दौड़े हुए आते हैं और समझ रखो कि ख़ुदा बेशक ग़ालिब और हिकमत वाला है (260)

ऐ रसूल तबदीले कि़बला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on सोमवार, 6 मई 2019 | 6:10 am

ये वह लोग थे जो सिधार चुके जो कुछ कमा गए उनके लिए था और जो कुछ तुम कमाओगे तुम्हारे लिए होगा और जो कुछ वह कर गुज़रे उसकी पूछगछ तुमसे न होगी (141)
बाज़ अहमक़ लोग ये कह बैठेगें कि मुसलमान जिस कि़बले बैतुल मुक़द्दस की तरफ पहले से सजदा करते थे उस से दूसरे कि़बले की तरफ मुड़ जाने का क्या बाइस हुआ। ऐ रसूल तुम उनके जवाब में कहो कि पूरब पश्चिम सब ख़ुदा का है जिसे चाहता है सीधे रास्ते की तरफ हिदायत करता है (142)
और जिस तरह तुम्हारे कि़बले के बारे में हिदायत की उसी तरह तुम को आदिल उम्मत बनाया ताकि और लोगों के मुक़ाबले में तुम गवाह बनो और रसूल मोहम्मद तुम्हारे मुक़ाबले में गवाह बनें और (ऐ रसूल) जिस कि़बले की तरफ़ तुम पहले सज़दा करते थे हम ने उसको सिर्फ़ इस वजह से कि़बला क़रार दिया था कि जब कि़बला बदला जाए तो हम उन लोगों को जो रसूल की पैरवी करते हैं हम उन लोगों से अलग देख लें जो उलटे पाव फिरते हैं अगरचे ये उलट फेर सिवा उन लोगों के जिन की ख़ुदा ने हिदायत की है सब पर शाक़ ज़रुर है और ख़ुदा ऐसा नहीं है कि तुम्हारे ईमान नमाज़ को जो बैतुलमुक़द्दस की तरफ पढ़ चुके हो बरबाद कर दे बेशक ख़ुदा लोगों पर बड़ा ही रफ़ीक व मेहरबान है। (143)
ऐ रसूल कि़बला बदलने के वास्ते बेशक तुम्हारा बार बार आसमान की तरफ मुँह करना हम देख रहे हैं तो हम ज़रुर तुमको ऐसे कि़बले की तरफ फेर देगें कि तुम नेहाल हो जाओ अच्छा तो नमाज़ ही में तुम मस्जि़दे मोहतरम काबे की तरफ मुँह कर लो और ऐ मुसलमानों तुम जहाँ कही भी हो उसी की तरफ़ अपना मुँह कर लिया करो और जिन लोगों को किताब तौरेत वगै़रह दी गयी है वह बख़ूबी जानते हैं कि ये तबदील कि़बले बहुत बजा व दुरुस्त है और उस के परवरदिगार की तरफ़ से है और जो कुछ वह लोग करते हैं उस से ख़ुदा बेख़बर नही (144)
और अगर एहले किताब के सामने दुनिया की सारी दलीले पेश कर दोगे तो भी वह तुम्हारे कि़बले को न मानेंगें और न तुम ही उनके कि़बले को मानने वाले हो और ख़ुद एहले किताब भी एक दूसरे के कि़बले को नहीं मानते और जो इल्म (क़ुरान) तुम्हारे पास आ चुका है उसके बाद भी अगर तुम उनकी ख़्वाहिश पर चले तो अलबत्ता तुम नाफ़रमान हो जाओगे (145)
जिन लोगों को हमने किताब (तौरैत वग़ैरह) दी है वह जिस तरह अपने बेटों को पहचानते है उसी तरह तरह वह उस पैग़म्बर को भी पहचानते हैं और उन में कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जो दीदए व दानिस्ता {जान बुझकर} हक़ बात को छिपाते हैं (146)
ऐ रसूल तबदीले कि़बला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है बस तुम कहीं ्यक करने वालों में से न हो जाना (147)
और हर फरीक़ के वास्ते एक सिम्त है उसी की तरफ वह नमाज़ में अपना मुँह कर लेता है बस तुम ऐ मुसलमानों झगड़े को छोड़ दो और नेकियों मे उन से लपक के आगे बढ़ जाओ तुम जहाँ कहीं होगे ख़ुदा तुम सबको अपनी तरफ ले आऐगा बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (148)
और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक मक्का से) तो भी नमाज़ मे तुम अपना मुँह मस्जि़दे मोहतरम (काबा) की तरफ़ कर लिया करो और बेषक ये नया कि़बला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है (149)
और तुम्हारे कामों से ख़ुदा ग़ाफिल नही है और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक के मक्का से तो भी) तुम (नमाज़ में) अपना मुँह मस्जि़दे हराम की तरफ कर लिया करो और तुम जहाँ कही हुआ करो तो नमाज़ में अपना मुँह उसी काबा की तरफ़ कर लिया करो (बार बार हुक्म देने का एक फायदा ये है ताकि लोगों का इल्ज़ाम तुम पर न आने पाए मगर उन में से जो लोग नाहक़ हठधर्मी करते हैं वह तो ज़रुर इल्ज़ाम देगें) तो तुम लोग उनसे डरो नहीं और सिर्फ़ मुझसे डरो और (दूसरा फ़ायदा ये है) ताकि तुम पर अपनी नेअमत पूरी कर दूँ (150)

,राजस्थान में पिछली वसुंधरा सरकार द्वारा सिविल क्रिमनल संशोधन नियम में कोर्ट फीस की बेहिसाब वृद्धि की है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 5 मई 2019 | 7:53 am

राजस्थान में इन्साफ के प्रबंधन व्यवस्था के सिरमौर ,लोकप्रिय न्यायाधिपति मुख्य न्यायधीश श्रीपति रविंद्र भट्ट राजस्थान उच्च न्यायलय में मुख्य न्यायधिपति नियुक्त हुए है ,उनका शपथ ग्रहण समारोह 5 मई 2019 को प्रातः 11,,30 बजे राजभवन जयपुर में आयोजित किया गया है ,,शपथ ग्रहण यूँ तो रस्म है ,लेकिन राजस्थान के वकीलों और पक्षकारों के लिए इस शपथ ग्रहण समारोह में वकीलों के नेतृत्व की परीक्षा की घडी भी है ,,राजस्थान में पिछली वसुंधरा सरकार द्वारा सिविल क्रिमनल संशोधन नियम में कोर्ट फीस की बेहिसाब वृद्धि की है ,,जो राजस्थान में लागू होने के बाद ,,त्वरित ,सुलभ ,सस्ता न्याय प्रणाली के नारे के खिलाफ राजस्थान के वकीलों के कुछ नेतृत्व ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से गुहार लगाई थी ,,,इस मामले में मुख्यमंत्री के निर्देशों पर राजस्थान सरकार के अतिरिक्त सचिव ने एक पत्र भी कमेटी के गठन होने और निर्णय आने तक कोर्ट फीस वसूली के स्थगन बाबत मुख्य सचिव विधि विभाग को लिखा था ,,लेकिन उक्त वसूली आज भी जारी है ,इस मामले में राजस्थान बार कौंसिल से जुड़े सभी निर्वाचित लोग प्रयास करते रहे है ,लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला ,,,पांच मई कहने को तो राजस्थान के मुख्य न्यायधिपति का शपथ ग्रहण है ,,लेकिन राजस्थान के वकीलों के नेतृत्व के लिए परीक्षा की घड़ी इसलिए बन गयी है ,,के उक्त शपथ ग्रहण समारोह में बार कौंसिल के पदाधिकारी भी निमंत्रित है ,स्थान राजभवन होगा ,जहाँ राज्यपाल महोदय भी होंगे ,,जहाँ मुख्य न्यायाधिपति महोदय सहित अन्य न्याधिपति भी होंगे ,,जहाँ सरकार के अधिकारी और मंत्री भी मौजूद होंगे ,,ऐसे में जो पत्र 25 फरवरी को सिविल क्रिमनल रूल करने बाबत राजस्थान सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा लिखा गया है वोह एक निर्देश है ,,एक प्रार्थना है , या सिर्फ एक कागज़ का टुकड़ा ,है इस बारे में भी वकीलों का नेतृत्व गेट टू गेदर में बात कर सकते है ,वकीलों की समस्या चाहे एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को पारित करने की मांग हो ,चाहे पक्षकारों के हित में कोर्ट फीस स्थगन की मांग हो ,,राजस्थान के वकीलों के शीर्ष निर्वाचित नेतृत्व को इस अवसर पर उठाना ही चाहिए ऐसा वकील साथियों का मानना है ,,कोटा में इस मामले को लेकर दो बार कार्यस्थगन कर विरोध प्रदर्शन किया जा चूका है ,अभी हाल ही में एक मई को फिर कोटा के वकीलों ने अभिभाषक परिषद के अध्यक्ष दीपक मित्तल ,महासचिव ,योगेंद्र मिश्रा किट्टू ,,उपाध्यक्ष हरीश शर्मा ,सहित पूरी कार्यकारिणी के नेतृत्व में जिला कलेक्टर के माध्यम से एक ज्ञापन फिर प्रेषित किया है ,जबकि कोर्ट फ़ीस बढ़ाने के विरोध में ,कोर्ट फीस कम करने की मांग को लेकर ,राजस्थान में वकीलों पर हमलावर लोगों को कठोर सज़ा दिलवाने के लिए पूर्व में पेश किये गए ,,एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने के मामले में जंगी प्रदर्शन भी किया है ,,पहले भी वर्ष 1992 में राजस्थान में कोर्ट फ़ीस वृद्धि के खिलाफ कोटा के वकीलों ने ही आन्दोलन शुरू किया था फिर यह आंदोलन पुरे राजस्थान में चला ,,बाद में सरकार को वकीलों के आंदोलन के आगे झुकना पढ़ा और ,कोर्ट फीस वृद्धि गरीब पक्षकारों के हक़ में वापस लेना पढ़ी ,अब फिर अचानक वृद्धि की गयी कोर्ट फीस के खिलाफ आम जनता ,,पक्षकारों के हक़ में ,,अभिभाषक परिषद कोटा के अध्यक्ष दीपक मित्तल के नेतृत्व में वकीलों ने आंदोलन की अंगड़ाई ली है ,ताज्जुब है ,जिस सरकार को कोर्ट फीस वसूली से आमदनी होना है ,जिस सरकार के लिए कोर्ट फ़ीस वसूली होना है ,उस सरकार के मुख्यमंत्री के निर्देशों पर उनके अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा पत्र भी जारी कर दिया गया है ,,फिर भी उक्त कोर्ट फीस वसूली के बारे में कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है ,अब मौक़ा भी है ,दस्तूर भी है ,,आमंत्रण भी है ,मुलाक़ात का वक़्त भी है ,और खासकर सभी ज़िम्मेदारों का एक साथ एकत्रित रहने का मौक़ा भी है ,जबकि खुद मुख्य न्यायधिपति महोदय आदरणीय श्रीपति रविंद्र भट्ट का ,सस्ता ,सुलभ ,त्वरित ,निष्पक्ष ,निर्भीक न्याय दिलवाने का ऐतिहासिक स्वभाव भी है ,तो जनाब वकीलों के निर्वाचित नेतृत्व से गुज़ारिश है इस मौके पर ज़रुर गरीब पक्षकारों के लिए बढ़ी हुई कोर्ट फीस वृद्धि वापस लेने ,,स्थगित किये जाने ,,उपस्थित राज्यपाल महोदय ,,मंत्रियों से एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट ,,विधानसभा में पारित होने तक तुरंत अध्यादेश जारी कर इसे लागु करने की ज़िम्मेदारी आप लोगों की है इसलिए प्लीज़ ,,प्लीज़ ,,वैसे आप नेतृत्व पर पूरा भरोसा है ,आप रविवार पांच मई को ही इस समारोह के बाद आयोजित गेट तो गेदर में इन समस्याओं के समाधान मामले में सकारात्मक परिणाम हम साथियों तक पहुंचा देने ऐसा हमे आप नेतृत्व पर गर्व है ,,,,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

जान रखो कि ख़़ुदा ज़रुर सब कुछ सुनता (और) जानता है

और जिन औरतों को ताअय्युन मेहर और हाथ लगाए बगै़र तलाक़ दे दी जाए उनके साथ जोड़े रुपए वगै़रह से सुलूक करना लाजि़म है (241)
(ये भी) परहेज़गारों पर एक हक़ है इसी तरह ख़़ुदा तुम लोगों की हिदायत के वास्ते अपने एहक़ाम साफ़ साफ़ बयान फरमाता है (242)
ताकि तुम समझो (ऐ रसूल) क्या तुम ने उन लोगों के हाल पर नज़र नही की जो मौत के डर के मारे अपने घरों से निकल भागे और वह हज़ारो आदमी थे तो ख़़ुदा ने उन से फरमाया कि सब के सब मर जाओ (और वह मर गए) फिर ख़़ुदा न उन्हें जिन्दा किया बेशक ख़ुदा लोगों पर बड़ा मेहरबान है मगर अक्सर लोग उसका शुक्र नहीं करते (243)
और मुसलमानों ख़़ुदा की राह मे जिहाद करो और जान रखो कि ख़़ुदा ज़रुर सब कुछ सुनता (और) जानता है (244)
है कोई जो ख़़ुदा को क़र्जे़ हुसना दे ताकि ख़़ुदा उसके माल को उस के लिए कई गुना बढ़ा दे और ख़ुदा ही तंगदस्त करता है और वही कशायश देता है और उसकी तरफ सब के सब लौटा दिये जाओगे (245)
(ऐ रसूल) क्या तुमने मूसा के बाद बनी इसराइल के सरदारों की हालत पर नज़र नही की जब उन्होंने अपने नबी (शमूयेल) से कहा कि हमारे वास्ते एक बादशाह मुक़र्रर कीजिए ताकि हम राहे ख़़ुदा में जिहाद करें (पैग़म्बर ने) फ़रमाया कहीं ऐसा तो न हो कि जब तुम पर जिहाद वाजिब किया जाए तो तुम न लड़ो कहने लगे जब हम अपने घरों और अपने बाल बच्चों से निकाले जा चुके तो फिर हमे कौन सा उज़्र बाक़ी है कि हम ख़ुदा की राह में जिहाद न करें फिर जब उन पर जिहाद वाजिब किया गया तो उनमें से चन्द आदमियों के सिवा सब के सब ने लड़ने से मुँह फेरा और ख़़ुदा तो ज़ालिमों को खूब जानता है (246)
और उनके नबी ने उनसे कहा कि बेशक ख़़ुदा ने तुम्हारी दरख़्वास्त के (मुताबिक़ तालूत को तुम्हारा बादशाह मुक़र्रर किया (तब) कहने लगे उस की हुकूमत हम पर क्यों कर हो सकती है हालाकि सल्तनत के हक़दार उससे ज़्यादा तो हम हैं क्योंकि उसे तो माल के एतबार से भी फ़ारगुल बाली {ख़ुशहाली} तक नसीब नहीं (नबी ने) कहा ख़ुदा ने उसे तुम पर फज़ीलत दी है और माल में न सही मगर इल्म और जिस्म का फैलाव तो उस का ख़ुदा ने ज़्यादा फरमाया हे और ख़ुदा अपना मुल्क जिसे चाहें दे और ख़ुदा बड़ी गुन्जाइश वाला और वाकि़फ़कार है (247)
और उन के नबी ने उनसे ये भी कहा इस के (मिनाजानिब अल्लाह) बादशाह होने की ये पहचान है कि तुम्हारे पास वह सन्दूक़ आ जाएगा जिसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तसकीन दे चीजें और उन तब्बुरक़ात से बचा खुचा होगा जो मूसा और हारुन की औलाद यादगार छोड़ गयी है और उस सन्दूक को फ़रिश्ते उठाए होगें अगर तुम ईमान रखते हो तो बेशक उसमें तुम्हारे वास्ते पूरी निशानी है (248)
फिर जब तालूत लश्कर समैत (शहर ऐलिया से) रवाना हुआ तो अपने साथियों से कहा देखो आगे एक नहर मिलेगी इस से यक़ीनन ख़ुदा तुम्हारे सब्र की आज़माइश करेगा बस जो शख्स उस का पानी पियेगा वह मुझे (कुछ वास्ता) नही रखता और जो उस को नही चखेगा वह बेशक मुझ से होगा मगर हाँ जो अपने हाथ से एक (आधा चुल्लू भर के पी) ले तो कुछ हर्ज नही बस उन लोगों ने न माना और चन्द आदमियों के सिवा सब ने उस का पानी पिया ख़ैर जब तालूत और जो मोमिनीन उन के साथ थे नहर से पास हो गए तो (ख़ास मोमिनों के सिवा) सब के सब कहने लगे कि हम में तो आज भी जालूत और उसकी फौज से लड़ने की सकत नहीं मगर वह लोग जिनको यक़ीन है कि एक दिन ख़ुदा को मुँह दिखाना है बेधड़क बोल उठे कि ऐसा बहुत हुआ कि ख़ुदा के हुक्म से छोटी जमाअत बड़ी जमाअत पर ग़ालिब आ गयी है और ख़ुदा सब्र करने वालों का साथी है (249)
(ग़रज़) जब ये लोग जालूत और उसकी फौज के मुक़ाबले को निकले तो दुआ की ऐ मेरे परवरदिगार हमें कामिल सब्र अता फरमा और मैदाने जंग में हमारे क़दम जमाए रख और हमें काफिरों पर फतेह इनायत कर (250)

पुराने पत्रकार ,पुराने नेता ,सभी तो इनकी आवभगत में अपना फोटो का ब्लॉक सबसे पहले बनवाकर ले जाने की होड़ में लगे रहते थे

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शनिवार, 4 मई 2019 | 6:20 am

दोस्तों वहीद भाई की यह मुस्कुराती तस्वीर देखकर कुछ याद आया ,,पुराने पत्रकार ,पुराने नेता ,सभी तो इनकी आवभगत में अपना फोटो का ब्लॉक सबसे पहले बनवाकर ले जाने की होड़ में लगे रहते थे ,चुनाव के दिनों में वहीद भाई ,महालक्ष्मी ब्लॉक ,,के नाम से बिना रुके ,बिना आराम करे ,चौबीस घंटे की सेवा देते थे ,कलेक्टर हो ,सियासी पार्टी के प्रतिनिधि हो ,अख़बार वाले हो सभी तो ,,इनके साथ ,एक अनार सो बीमार वाली कहावत चरितार्थ किया करते थे ,,आप सभी को पता है ,एक युग था जब अखबारों में फोटो छापने के लिए ब्लॉक बनाना ज़रूरी हुआ करता था ,,कोटा में फोटो से ब्लॉक बनाने की मशीन ,सिर्फ महालक्ष्मी ब्लॉक वर्क्स ,रामपुरा कोतवाली के पास वहीद भाई की ही थी ,,कोटा में ही नहीं पुरे राजस्थान में त्वरित हु बहु साफ़ सुथरी तस्वीर का ब्लॉक बनाने में ,वहीद भाई को ही महारत हांसिल थी ,इसलिए दूर दराज़ के सरकारी विभागों के विज्ञापन ,,पोस्टरों के लिए भी ब्लॉक बनने इन वहीद भाई के पास ही आते थे ,,लकड़ी के गुट्टे पर ,एक विशेष पूर्व आदेशित निर्धारित साइज़ का फोटो एक सीसे की पट्टी पर तराश कर बनाया जाता ,फिर लकड़ी के गुट्टे पर ठोका जाता ,,कम्पोज़ हुए टाइप के पेज में खुसूसी सजावट के लिए ब्लॉक लगाया जाता था ,फोटो जो भी हो अगर छापना है तो पहले ब्लॉक बनना अनिवार्य था ,बस इसीलिए नेता जी हो ,समाज सेवक जी हो ,अख़बार वाले हो ,विज्ञापन दाता हो ,सरकार हो सभी महालक्ष्मी ब्लॉक के इर्द गिर्द इस उम्मीद में मंडराते देखे जाते थे ,हमारा ब्लॉक पहले बनकर तैयार हो जाए ,बढे बढे से बढे दैनिक अख़बार ,,नेताओ की सभाओ ,बढे कार्यक्रमों के बाद ब्लॉक बनने तक ,अख़बार का मेकअप पेज रोक लेते थे ,और फिर ब्लॉक आने के बाद ही ,सजावट के हुनर के साथ कम्पोज़ की हुई खबर में ,,यह फोटो का ब्लॉक लगाया जाता था ,जिसके बाद ही नेताजी ,,समाज सेवक जी ,अधिकारीयों के कार्यव्यवहार की तस्वीरें अख़बार में प्रकाशित हो सकती थी ,आपात स्थिति में इनके ब्लॉक निर्माण पर भी काफी चेकिंगे होती रही है ,लेकिन वहीद भाई तो वहीद भाई है ,,एक मुस्कुराहट ,सभी तकलीफे दूर ,,हंसो ,हँसाओ इनका स्वभाव ,हँसते हँसते काम करना ,,सभी लोगो को संतुष्ठ कर अतिरिक्त वक़्त निकालकर ,सभी के काम करना ,इनका हुनर रहा है ,,कल वहीद भाई अदालत में जब मिलने आए तो यूँ ही बातों बातों में पुरानी ट्रेडल संस्कृति से छपने वाले अख़बार की पत्रकारिता ,,धैर्य और संयम की लेखनी ,,निर्भीक ,,निष्पक्ष ,,पत्रकारिता के साथ ,,मेरे द्वारा रोज़ मर्रा लिखे जाने वाले कॉलम ,बेखौफ,,की भी याद ताज़ा हों गयी ,इस बेखौफ कॉलम से पत्रकारिता तो बेखौफ थी ,मज़लूम के लिए इन्साफ था ,लेकिन सभी अधिकारी ,सियासी नेता वगेरा के दिलों में इस ,बेखौफ ,कॉलम का खौफ छाया हुआ था उन्हें खौफ था ,कहीं ,,अकेला की क़लम से लिखित ,इस बेखौफ कॉलम की खबर वोह न बन जाए ,और फिर कहीं उन्हें नौकरी से निलंबित न होना पढ़ जाए ,क्योंकि उन दिनों पत्रकारिता ,,लेखन में ,छपाई में ,पिछड़ापन था ,,लेकिन क़लम वही थी ,सियाही वही थी ,बस लिखने वाले का मिजाज़ निर्भीक ,निष्पक्ष हुआ करता था ,अख़बार मालिकों का मिजाज़ व्यवसायिक नहीं ,,इन्साफ के लिए क्रन्तिकारी सेवक का हुआ करता था ,,चंद विज्ञापनों के खातिर उस वक़्त बढे संस्थानों के नाम को बचाने के लिए आपराधिक खबर में एक संस्थान कहकर खबर नहीं बना करती थी ,जो खबर छपती थी ,सरकारी जनसपर्क अधिकारी ,पुलिस सी आई डी ,,पुलिस का डी एस बी विभाग और दिल्ली का डी ऐ वी पी ,जयपुर का डी पी आर विभाग ,,अख़बार की कतरन संबंधित अधिकारीयों को आवश्यक रूप से भेजा करते थे ,उन पर जांच होती थी ,कार्यवाही होती थी ,,हालात यह थे के नेता ,,मंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस का टाइम देकर अख़बार वालों का इन्तिज़ार करते थे ,अधिकारी खुद फोन कर उनसे वक़्त लेकर उन्हें दफ्तर में बुलाकर खबर देते थे ,महीने में एक बार जनसम्पर्क अधिकारी के माध्यम से एक राब्ता हुआ करता था ,,लेकिन आज स्थित में बदलाव है ,आधुनिकता है ,,त्वरित प्रकाशन है ,बस नहीं है तो पत्रकारिता नहीं है ,नहीं है तो खबर नहीं है ,,अगर खबर कही है तो उसे दिल से सलाम ,दिल से सेल्यूट करने का जी करता है ,जनता को इंसाफ मिलता है ,,समाज में भी सुधार होता ,है ,,,सभी जानते है इन चुनाव में कितनी खबरे थी ,कितने सुबूत थे ,लेकिन क्या वोह खबरें प्रकाशित हुई ,क्या वोह इल्ज़ामात प्रतिपक्ष के नेताओं ने बतौर सबूत पेश कर पत्रकारों के समक्ष पत्रकारवार्ता बुलवा कर रखी ,,चुनाव में पार्टी के दफ्तरों में ,चुनाव के दफ्तरों में क्या हालात थे सभी ने देखे है ,लेकिन पत्रकारिता का वहीद भाई के कार्यकाल का वोह युग आज भी याद आता है और उस युग पर गर्व भी होता है ,जिस युग में ओमनारायण सक्सेना ,इन्द्रनारायण सक्सेना ,,भंवर शर्मा अटल ,,तिमिर भास्कर ,,स्वर्गीय पियूष जैन ,,लेखक प्रेम जी प्रेम ,,बजरंग सींह पांथी ,दादा मदन मदीर ,बाबू हीरा लाल जैन ,,आनंद लक्ष्मण खांडेकर ,,दिनेश दूबे ,,धीरेन्द्र राहुल ,,हीरालाल व्यास ,,रामचरण सितारा ,प्रमोद प्रीतम ,दिलीप शाह मधुप ,,शम्भू लाड़पुरी ,,मामा रूपनारायण पारीक ,,भंवर सिंह सोलंकी ,,महेंद्र नाथ चतुर्वेदी ,सीताशरण देवलिया ,,क़य्यूम अली ,, नरेश विजय वर्गीय ,,विजय नारायण सक्सेना, इंद्र दत्त स्वाधीन बी एम बांठिया ,,,पंडित रामानन्द पांडे ,गजेंद्र सिंह सोलंकी ,,मुझ सहित कई पत्रकार शामिल रहे है ,,जिनकी लेखनी ,जिनकी रिपोर्टिंग ,,जिनका सम्पादन आज सिर्फ यादगार ,सिर्फ यादगार सा लगता है , जो यादें वहीद भाई महालक्ष्मी ब्लॉकर्स ने पूरी कर दी ,आधुनिक युग में ,वहीद भाई ने भी खुद को बदल लिया अब वोह फ्लेक्स ,,,पोस्टर प्रिंटिंग का काम बखूबी करते है ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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ख़ुसूसन बीच वाली नमाज़ सुबह या ज़ोहर या अस्र की पाबन्दी करो

और जब तुम अपनी बीवियों को तलाक़ दो और उनकी मुद्दत पूरी होने को आए तो अच्छे उनवान से उन को रोक लो या हुस्ने सुलूक से बिल्कुल रुख़सत ही कर दो और उन्हें तकलीफ पहुँचाने के लिए न रोको ताकि (फिर उन पर) ज़्यादती करने लगो और जो ऐसा करेगा तो यक़ीनन अपने ही पर जु़ल्म करेगा और ख़ुदा के एहकाम को कुछ हँसी ठट्टा न समझो और ख़ुदा ने जो तुम्हें नेअमतें दी हैं उन्हें याद करो और जो किताब और अक़्ल की बातें तुम पर नाजि़ल की उनसे तुम्हारी नसीहत करता है और ख़ुदा से डरते रहो और समझ रखो कि ख़ुदा हर चीज़ को ज़रुर जानता है (231)
और जब तुम औरतों को तलाक़ दो और वह अपनी मुद्दत (इद्दत) पूरी कर लें तो उन्हें अपने शौहरो के साथ निकाह करने से न रोकों जब आपस में दोनों मिया बीवी शयरीयत के मुवाफिक़ अच्छी तरह मिल जुल जाएँ ये उसी शख्स को नसीहत की जाती है जो तुम में से ख़ुदा और रोजे़ आखे़रत पर ईमान ला चुका हो यही तुम्हारे हक़ में बड़ी पाकीज़ा और सफ़ाई की बात है और उसकी ख़ूबी ख़ुदा खूब जानता है और तुम (वैसा) नहीं जानते हो (232)
और (तलाक़ देने के बाद) जो शख्स अपनी औलाद को पूरी मुद्दत तक दूध पिलवाना चाहे तो उसकी ख़ातिर से माएँ अपनी औलाद को पूरे दो बरस दूध पिलाएँ और जिसका वह लड़का है उस बाप पर माओं का खाना कपड़ा दस्तूर के मुताबिक़ लाजि़म है किसी शख्स को ज़हमत नहीं दी जाती मगर उसकी गुन्जाइश भर न माँ का उस के बच्चे की वजह से नुक़सान गवारा किया जाए और न जिस का लड़का है उसका बाप का (बल्कि दस्तूर के मुताबिक़ दिया जाए) और अगर बाप न हो तो दूध पिलाने का हक़ उसी तरह वारिस पर लाजि़म है फिर अगर दो बरस के क़ब्ल माँ बाप दोनों अपनी मरज़ी और मशवरे से दूध बढ़ाई करना चाहें तो उन दोनों पर कोई गुनाह नहीं और अगर तुम अपनी औलाद को (किसी अन्ना से) दूध पिलवाना चाहो तो उस में भी तुम पर कुछ गुनाह नहीं है बशर्ते कि जो तुमने दस्तूर के मुताबिक़ मुक़र्रर किया है उन के हवाले कर दो और ख़ुदा से डरते रहो और जान रखो कि जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा ज़रुर देखता है (233)
और तुममें से जो लोग बीवियाँ छोड़ के मर जाएँ तो ये औरतें चार महीने दस रोज़ (इद्दा भर) अपने को रोके (और दूसरा निकाह न करें) फिर जब (इद्दे की मुद्दत) पूरी कर ले तो शरीयत के मुताबिक़ जो कुछ अपने हक़ में करें इस बारे में तुम पर कोई इल्ज़ाम नहीं है और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उस से ख़बरदार है (234)
और अगर तुम (उस ख़ौफ से कि शायद कोई दूसरा निकाह कर ले) इन औरतों से इशरतन निकाह की (कैद़ इद्दा) ख़ास्तगारी {उम्मीदवारी} करो या अपने दिलो में छिपाए रखो तो इसमें भी कुछ तुम पर इल्ज़ाम नहीं हैं (क्योंकि) ख़ुदा को मालूम है कि (तुमसे सब्र न हो सकेगा और) उन औरतों से निकाह करने का ख़्याल आएगा लेकिन चोरी छिपे से निकाह का वायदा न करना मगर ये कि उन से अच्छी बात कह गुज़रों (तो मज़ाएक़ा नहीं) और जब तक मुक़र्रर मियाद गुज़र न जाए निकाह का क़सद {इरादा} भी न करना और समझ रखो कि जो कुछ तुम्हारी दिल में है ख़ुदा उस को ज़रुर जानता है तो उस से डरते रहो और (ये भी) जान लो कि ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला बुर्दबार है (235)
और अगर तुम ने अपनी बीवियों को हाथ तक न लगाया हो और न महर मुअय्यन किया हो और उसके क़ब्ल ही तुम उनको तलाक़ दे दो (तो इस में भी) तुम पर कुछ इल्ज़ाम नहीं है हाँ उन औरतों के साथ (दस्तूर के मुताबिक़) मालदार पर अपनी हैसियत के मुआफिक़ और ग़रीब पर अपनी हैसियत के मुवाफिक़ (कपड़े रुपए वग़ैरह से) कुछ सुलूक करना लाजि़म है नेकी करने वालों पर ये भी एक हक़ है (236)
और अगर तुम उन औरतों का मेहर तो मुअय्यन कर चुके हो मगर हाथ लगाने के क़ब्ल ही तलाक़ दे दो तो उन औरतों को मेहर मुअय्यन का आधा दे दो मगर ये कि ये औरतें ख़ुद माफ कर दें या उन का वली जिसके हाथ में उनके निकाह का एख़्तेयार हो माफ़ कर दे (तब कुछ नही) और अगर तुम ही सारा मेहर बख्स दो तो परहेज़गारी से बहुत ही क़रीब है और आपस की बुज़ुर्गी को मत भूलो और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा ज़रुर देख रहा है (237)
और (मुसलमानों) तुम तमाम नमाज़ों की और ख़ुसूसन बीच वाली नमाज़ सुबह या ज़ोहर या अस्र की पाबन्दी करो और ख़ास ख़ुदा ही वास्ते नमाज़ में क़ुनूत पढ़ने वाले हो कर खड़े हो फिर अगर तुम ख़ौफ की हालत में हो (238)
और पूरी नमाज़ न पढ़ सको तो सवार या पैदल जिस तरह बन पड़े पढ़ लो फिर जब तुम्हें इत्मेनान हो तो जिस तरह ख़ुदा ने तुम्हें (अपने रसूल की मारफ़त इन बातों को सिखाया है जो तुम नहीं जानते थे (239)
उसी तरह ख़ुदा को याद करो और तुम में से जो लोग अपनी बीवियों को छोड़ कर मर जाएँ उन पर अपनी बीबियों के हक़ में साल भर तक के नान व नुफ्का {रोटी कपड़ा} और (घर से) न निकलने की वसीयत करनी (लाजि़म) है बस अगर औरतें ख़ुद निकल खड़ी हो तो जायज़ बातों (निकाह वगै़रह) से कुछ अपने हक़ में करे उसका तुम पर कुछ इल्ज़ाम नही है और ख़ुदा हर शैय पर ग़ालिब और हिक़मत वाला है (240)

छोड़ा काबुल मे और 20 साल बाद मेरे सरकार के समय यह सम्मान फिर हम को मिला

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शुक्रवार, 3 मई 2019 | 7:02 am

*"कल से हार और माला सूख रहा है समझ मे नही आता है किस को पहनाये?"*
*अमेरिकी विदेशमन्त्री Mike Pompeo का कहना है कि "यह अमेरिकी कूटनीति" की विजय है.*
*इनडोनेशिया का कहना है कि यह इनडोनेशिया का विजय है क्यों कि अभी सुरक्षा समिति का अध्यक्ष इनडोनेशिया है और यह उस के कोशिश का नतीजा है। इनडोनेशिया आतंकवाद ख़ूद झेल रहा है.*
*चीन कह रहा है कि इमरान खॉं से चीन के राष्ट्रपति से BRI forum मे बात चीत मे यह फ़ैसला लिया गया कि यूएन मे इस को अब oppose नही करना है.*
*फ़्रान्स कह रहा है यह मेरी जीत है.*
*कांग्रेस कह रही है यह डा० मनमोहन सिंह ने 2009 मे यूएन को प्रस्ताव भेजा था कि अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी कहो.यह कांग्रेस की जीत है.*
*आज बिजेपी के लोग कह रहे है हम को फूल माला पहनाओ, यह मेरी कूटनीति की जीत है। हम ने ही 1999 मे छोड़ा काबुल मे और 20 साल बाद मेरे सरकार के समय यह सम्मान फिर हम को मिला.*
*भगवान कह रहे है फूल माला हम को पहनाओ जिस अज़हर को मोदी ने surgical strike मे मारा था उस को हम फिर ज़िन्दा कर दिया. यह मेरी जीत है.*
*(Masood Azhar, a Pakistani national was released by BJP government in 1999. Azhar founded the JeM in January 2000, soon after his release from an Indian jail in exchange for 166 hostages of an Indian Airlines plane which was hijacked to Kandahar in Afghanistan during a flight from Kathmandu to New Delhi).*

कूए ग़ायब हो गये

*धूप सिपाही बन गई , सूरज थानेदार !*
*गरम हवाएं बन गईं , जुल्मी साहूकार !!*
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शीतलता शरमा रही , कर घूँघट की ओट !
मुरझाई सी छांव है , पड़ रही लू की चोट !!
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चढ़ी दुपहरी हो गया , कर्फ़्यू जैसा हाल !
घर भीतर सब बंद हैं , सूनी है चौपाल !!
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लगता है जैसे हुए , सूरज जी नाराज़ !
आग बबूला हो रहे , गिरा रहे हैं गाज !!
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तापमान यूँ बढ़ रहा , ज्यों जंगल की आग !
सूर्यदेव गाने लगे , फिर से दीपक राग !!
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कूलर हीटर सा लगे , पंखा उगले आग !
कोयलिया कू-कू करे , उत अमवा के बाग़ !!
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लिए बीजना हाथ में , दादी करे बयार !
कूलर और पंखा हुए , बिन बिजली बेकार !!
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कूए ग़ायब हो गये , सूखे पोखर - ताल !
पशु - पक्षी और आदमी , सभी हुए बेहाल !!
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धरती व्याकुल हो रही , बढ़ती जाती प्यास !
दूर अभी आषाढ़ है , रहने लगी उदास !!
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सूरज भी औकात में , आयेगा उस रोज !
बरखा रानी आयगी , धरती पर जिस रोज !!
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*पेड़ लगाओ पानी बचाओ , कहता सब संसार !*
*ये देख चेते नहीं ,तो इक दिन होगा बंटाधार !!!!*

तलाक़ (रजअई जिसके बाद रुजू) हो सकती है

ताकि तुम दुनिया और आखि़रत (के मामलात) में ग़ौर करो और तुम से लोग यतीमों के बारे में पूछते हैं तुम (उन से) कह दो कि उनकी (इसलाह दुरुस्ती) बेहतर है और अगर तुम उन से मिलजुल कर रहो तो (कुछ हर्ज) नहीं आखि़र वह तुम्हारें भाई ही तो हैं और ख़ुदा फ़सादी को ख़ैर ख़्वाह से (अलग ख़ूब) जानता है और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम को मुसीबत में डाल देता बेशक ख़ुदा ज़बरदस्त हिक़मत वाला है (220)
और (मुसलमानों) तुम मुशरिक औरतों से जब तक ईमान न लाएँ निकाह न करो क्योंकि मुशरिकीन औरत तुम्हें अपने हुस्नो जमाल में कैसी ही अच्छी क्यों न मालूम हो मगर फिर भी बंदा ए मोमिन उस से ज़रुर अच्छा है और मुशरिकीन जब तक ईमान न लाएँ अपनी औरतें उन के निकाह में न दो और मुशरिक तुम्हे कैसा ही अच्छा क्यो न मालूम हो मगर फिर भी ईमानदार औरत उस से ज़रुर अच्छी है और मुशरिकीन जब तक ईमान न लाएँ अपनी औरतें उन के निकाह में न दो और मुशरिक तुम्हें क्या ही अच्छा क्यों न मालूम हो मगर फिर भी बन्दा मोमिन उनसे ज़रुर अच्छा है ये (मुशरिक मर्द या औरत) लोगों को दोज़ख़ की तरफ बुलाते हैं और ख़ुदा अपनी इनायत से बहिश्त और बखि़्शश की तरफ बुलाता है और अपने एहकाम लोगों से साफ साफ बयान करता है ताकि ये लोग चेते (221)
(ऐ रसूल) तुम से लोग हैज़ के बारे में पूछते हैं तुम उनसे कह दो कि ये गन्दगी और घिन की बीमारी है तो (अय्यामे हैज़) में तुम औरतों से अलग रहो और जब तक वह पाक न हो जाएँ उनके पास न जाओ बस जब वह पाक हो जाएँ तो जिधर से तुम्हें ख़ुदा ने हुक्म दिया है उन के पास जाओ बेशक ख़ुदा तौबा करने वालो और सुथरे लोगों को पसन्द करता है तुम्हारी बीवियाँ (गोया) तुम्हारी खेती हैं (222)
तो तुम अपनी खेती में जिस तरह चाहो आओ और अपनी आइन्दा की भलाई के वास्ते (आमाल साके) पेशगी भेजो और ख़ुदा से डरते रहो और ये भी समझ रखो कि एक दिन तुमको उसके सामने जाना है और ऐ रसूल इमानदारों को नजात की ख़ुश ख़बरी दे दो (223)
और (मुसलमानों) तुम अपनी क़समों (के हीले) से ख़ुदा (के नाम) को लोगों के साथ सुलूक करने और ख़ुदा से डरने और लोगों के दरमियान सुलह करवा देने का मानेअ न ठहराओं और ख़ुदा सबकी सुनता और सब को जानता है (224)
तुम्हारी लग़ो {बेकार} क़समों पर जो बेइख़्तेयार ज़बान से निकल जाए ख़ुदा तुम से गिरफ़्तार नहीं करने का मगर उन कसमों पर ज़रुर तुम्हारी गिरफ़्त करेगा जो तुमने क़सदन {जान कर} दिल से खायीं हो और ख़ुदा बख्शने वाला बुर्दबार है (225)
जो लोग अपनी बीवियों के पास जाने से क़सम खायें उन के लिए चार महीने की मोहलत है बस अगर (वह अपनी क़सम से उस मुद्दत में बाज़ आए) और उनकी तरफ तवज्जो करें तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (226)
और अगर तलाक़ ही की ठान ले तो (भी) बेशक ख़ुदा सबकी सुनता और सब कुछ जानता है (227)
और जिन औरतों को तलाक़ दी गयी है वह अपने आपको तलाक़ के बाद तीन हैज़ के ख़त्म हो जाने तक निकाह सानी से रोके और अगर वह औरतें ख़ुदा और रोजे़ आखि़रत पर इमान लायीं हैं तो उनके लिए जाएज़ नहीं है कि जो कुछ भी ख़ुदा ने उनके रहम (पेट) में पैदा किया है उसको छिपाएँ और अगर उन के शौहर मेल जोल करना चाहें तो वह (मुद्दत मज़कूरा) में उन के वापस बुला लेने के ज़्यादा हक़दार हैं और शयरीयत के मुवाफिक़ औरतों का (मर्दों पर) वही सब कुछ हक़ है जो मर्दों का औरतों पर है हाँ अलबत्ता मर्दों को (फ़जीलत में) औरतों पर फौकि़यत ज़रुर है और ख़ुदा ज़बरदस्त हिक़मत वाला है (228)
तलाक़ (रजअई जिसके बाद रुजू) हो सकती है दो ही मरतबा है उसके बाद या तो शयरीयत के मवाफिक़ रोक ही लेना चाहिए या हुस्न सुलूक से (तीसरी दफ़ा) बिल्कुल रूख़सत और तुम को ये जायज़ नहीं कि जो कुछ तुम उन्हें दे चुके हो उस में से फिर कुछ वापस लो मगर जब दोनों को इसका ख़ौफ़ हो कि ख़ुदा ने जो हदें मुक़र्रर कर दी हैं उस को दोनो मिया बीवी क़ायम न रख सकेंगे फिर अगर तुम्हे (ऐ मुसलमानो) ये ख़ौफ़ हो कि यह दोनो खुदा की मुकर्रर की हुयी हदो पर क़ायम न रहेंगे तो अगर औरत मर्द को कुछ देकर अपना पीछा छुड़ाए (खुला कराए) तो इसमें उन दोनों पर कुछ गुनाह नहीं है ये ख़ुदा की मुक़र्रर की हुयी हदें हैं बस उन से आगे न बढ़ो और जो ख़ुदा की मुक़र्रर की हुयी हदों से आगे बढ़ते हैं वह ही लोग तो ज़ालिम हैं (229)
फिर अगर तीसरी बार भी औरत को तलाक़ (बाइन) दे तो उसके बाद जब तक दूसरे मर्द से निकाह न कर ले उस के लिए हलाल नही हाँ अगर दूसरा शौहर निकाह के बाद उसको तलाक़ दे दे तब अलबत्ता उन मिया बीबी पर बाहम मेल कर लेने में कुछ गुनाह नहीं है अगर उन दोनों को यह ग़ुमान हो कि ख़ुदा की हदों को क़ायम रख सकेंगें और ये ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुयी) हदें हैं जो समझदार लोगों के वास्ते साफ़ साफ़ बयान करता है (230)

बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया

Written By आपका अख्तर खान अकेला on गुरुवार, 2 मई 2019 | 6:28 am

जिन लोगों ने कुफ्र इख़्तेयार किया उन के लिये दुनिया की ज़रा सी जि़न्दगी ख़ूब अच्छी दिखायी गयी है और इमानदारों से मसखरापन करते हैं हालाकि क़यामत के दिन परहेज़गारों का दरजा उनसे (कहीं) बढ़ चढ़ के होगा और ख़ुदा जिस को चाहता है बे हिसाब रोज़ी अता फरमाता है (212)
(पहले) सब लोग एक ही दीन रखते थे (फिर आपस में झगड़ने लगे तब) ख़ुदा ने नजात से ख़ुशख़बरी देने वाले और अज़ाब से डराने वाले पैग़म्बरों को भेजा और इन पैग़म्बरों के साथ बरहक़ किताब भी नाजि़ल की ताकि जिन बातों में लोग झगड़ते थे किताबे ख़़ुदा (उसका) फ़ैसला कर दे और फिर अफ़सोस तो ये है कि इस हुक्म से इख़्तेलाफ किया भी तो उन्हीं लोगों ने जिन को किताब दी गयी थी और वह भी जब उन के पास ख़ुदा के साफ एहकाम आ चुके उसके बाद और वह भी आपस की शरारत से तब ख़ुदा ने अपनी मेहरबानी से (ख़ालिस) ईमानदारों को वह राहे हक़ दिखा दी जिस में उन लोगों ने इख़्तेलाफ डाल रखा था और ख़़ुदा जिस को चाहे राहे रास्त की हिदायत करता है (213)
क्या तुम ये ख़्याल करते हो कि बेह्श्ते में पहुँच ही जाओगे हालाकि अभी तक तुम्हे अगले ज़माने वालों की सी हालत नहीं पेश आयी कि उन्हें तरह तरह की तक़लीफों (फाक़ा कशी मोहताजी) और बीमारी ने घेर लिया था और ज़लज़ले में इस क़दर झिंझोडे़ गए कि आखि़र (आजि़ज़ हो के) पैग़म्बर और ईमान वाले जो उन के साथ थे कहने लगे देखिए ख़ुदा की मदद कब (होती) है देखो (घबराओ नहीं) ख़़ुदा की मदद यक़ीनन बहुत क़रीब है (214)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग पूछते हैं कि हम ख़ुदा की राह में क्या खर्च करें (तो तुम उन्हें) जवाब दो कि तुम अपनी नेक कमाई से जो कुछ खर्च करो तो (वह तुम्हारे माँ बाप और क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजो और परदेसियों का हक़ है और तुम कोई नेक सा काम करो ख़़ुदा उसको ज़रुर जानता है (215)
(मुसलमानों) तुम पर जिहाद फर्ज़ किया गया अगरचे तुम पर शाक़ ज़रुर है और अजब नहीं कि तुम किसी चीज़ (जिहाद) को नापसन्द करो हालाकि वह तुम्हारे हक़ में बेहतर हो और अजब नहीं कि तुम किसी चीज़ को पसन्द करो हालाॅकि वह तुम्हारे हक़ में बुरी हो और ख़ुदा (तो) जानता ही है मगर तुम नही जानते हो (216)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग हुरमत वाले महीनों की निस्बत पूछते हैं कि (आया) जिहाद उनमें जायज़ है तो तुम उन्हें जवाब दो कि इन महीनों में जेहाद बड़ा गुनाह है और ये भी याद रहे कि ख़़ुदा की राह से रोकना और ख़ुदा से इन्कार और मस्जिदुल हराम (काबा) से रोकना और जो उस के एहल है उनका मस्जिद से निकाल बाहर करना (ये सब) ख़ुदा के नज़दीक इस से भी बढ़कर गुनाह है और फि़तना परदाज़ी कुश्ती ख़़ून से भी बढ़ कर है और ये कुफ़्फ़ार हमेशा तुम से लड़ते ही चले जाएँगें यहाँ तक कि अगर उन का बस चले तो तुम को तुम्हारे दीन से फिरा दे और तुम में जो शख्स अपने दीन से फिरा और कुफ्ऱ की हालत में मर गया तो ऐसों ही का किया कराया सब कुछ दुनिया और आखे़रत (दोनों) में अकारत है और यही लोग जहन्नुमी हैं (और) वह उसी में हमेशा रहेंगें (217)
बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और ख़ुदा की राह में हिजरत की और जिहाद किया यही लोग रहमते ख़ुदा के उम्मीदवार हैं और ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (218)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग शराब और जुए के बारे में पूछते हैं तो तुम उन से कह दो कि इन दोनो में बड़ा गुनाह है और कुछ फायदे भी हैं और उन के फायदे से उन का गुनाह बढ़ के है और तुम से लोग पूछते हैं कि ख़ुदा की राह में क्या ख़र्च करे तुम उनसे कह दो कि जो तुम्हारे ज़रुरत से बचे यूँ ख़ुदा अपने एहकाम तुम से साफ़ साफ़ बयान करता है (219)
ताकि तुम दुनिया और आखि़रत (के मामलात) में ग़ौर करो और तुम से लोग यतीमों के बारे में पूछते हैं तुम (उन से) कह दो कि उनकी (इसलाह दुरुस्ती) बेहतर है और अगर तुम उन से मिलजुल कर रहो तो (कुछ हर्ज) नहीं आखि़र वह तुम्हारें भाई ही तो हैं और ख़ुदा फ़सादी को ख़ैर ख़्वाह से (अलग ख़ूब) जानता है और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम को मुसीबत में डाल देता बेशक ख़ुदा ज़बरदस्त हिक़मत वाला है (220)

बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया

Written By आपका अख्तर खान अकेला on बुधवार, 1 मई 2019 | 6:09 am

(ऐ रसूल) बनी इसराइल से पूछो कि हम ने उन को कैसी कैसी रौशन निशानियाँ दी और जब किसी शख्स के पास ख़ुदा की नेअमत (किताब) आ चुकी उस के बाद भी उस को बदल डाले तो बेषक़ ख़ुदा सख़्त अज़ाब वाला है (211)
जिन लोगों ने कुफ्र इख़्तेयार किया उन के लिये दुनिया की ज़रा सी जि़न्दगी ख़ूब अच्छी दिखायी गयी है और इमानदारों से मसखरापन करते हैं हालाकि क़यामत के दिन परहेज़गारों का दरजा उनसे (कहीं) बढ़ चढ़ के होगा और ख़ुदा जिस को चाहता है बे हिसाब रोज़ी अता फरमाता है (212)
(पहले) सब लोग एक ही दीन रखते थे (फिर आपस में झगड़ने लगे तब) ख़ुदा ने नजात से ख़ुशख़बरी देने वाले और अज़ाब से डराने वाले पैग़म्बरों को भेजा और इन पैग़म्बरों के साथ बरहक़ किताब भी नाजि़ल की ताकि जिन बातों में लोग झगड़ते थे किताबे ख़़ुदा (उसका) फ़ैसला कर दे और फिर अफ़सोस तो ये है कि इस हुक्म से इख़्तेलाफ किया भी तो उन्हीं लोगों ने जिन को किताब दी गयी थी और वह भी जब उन के पास ख़ुदा के साफ एहकाम आ चुके उसके बाद और वह भी आपस की शरारत से तब ख़ुदा ने अपनी मेहरबानी से (ख़ालिस) ईमानदारों को वह राहे हक़ दिखा दी जिस में उन लोगों ने इख़्तेलाफ डाल रखा था और ख़़ुदा जिस को चाहे राहे रास्त की हिदायत करता है (213)
क्या तुम ये ख़्याल करते हो कि बेह्श्ते में पहुँच ही जाओगे हालाकि अभी तक तुम्हे अगले ज़माने वालों की सी हालत नहीं पेश आयी कि उन्हें तरह तरह की तक़लीफों (फाक़ा कशी मोहताजी) और बीमारी ने घेर लिया था और ज़लज़ले में इस क़दर झिंझोडे़ गए कि आखि़र (आजि़ज़ हो के) पैग़म्बर और ईमान वाले जो उन के साथ थे कहने लगे देखिए ख़ुदा की मदद कब (होती) है देखो (घबराओ नहीं) ख़़ुदा की मदद यक़ीनन बहुत क़रीब है (214)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग पूछते हैं कि हम ख़ुदा की राह में क्या खर्च करें (तो तुम उन्हें) जवाब दो कि तुम अपनी नेक कमाई से जो कुछ खर्च करो तो (वह तुम्हारे माँ बाप और क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजो और परदेसियों का हक़ है और तुम कोई नेक सा काम करो ख़़ुदा उसको ज़रुर जानता है (215)
(मुसलमानों) तुम पर जिहाद फर्ज़ किया गया अगरचे तुम पर शाक़ ज़रुर है और अजब नहीं कि तुम किसी चीज़ (जिहाद) को नापसन्द करो हालाकि वह तुम्हारे हक़ में बेहतर हो और अजब नहीं कि तुम किसी चीज़ को पसन्द करो हालाॅकि वह तुम्हारे हक़ में बुरी हो और ख़ुदा (तो) जानता ही है मगर तुम नही जानते हो (216)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग हुरमत वाले महीनों की निस्बत पूछते हैं कि (आया) जिहाद उनमें जायज़ है तो तुम उन्हें जवाब दो कि इन महीनों में जेहाद बड़ा गुनाह है और ये भी याद रहे कि ख़़ुदा की राह से रोकना और ख़ुदा से इन्कार और मस्जिदुल हराम (काबा) से रोकना और जो उस के एहल है उनका मस्जिद से निकाल बाहर करना (ये सब) ख़ुदा के नज़दीक इस से भी बढ़कर गुनाह है और फि़तना परदाज़ी कुश्ती ख़़ून से भी बढ़ कर है और ये कुफ़्फ़ार हमेशा तुम से लड़ते ही चले जाएँगें यहाँ तक कि अगर उन का बस चले तो तुम को तुम्हारे दीन से फिरा दे और तुम में जो शख्स अपने दीन से फिरा और कुफ्ऱ की हालत में मर गया तो ऐसों ही का किया कराया सब कुछ दुनिया और आखे़रत (दोनों) में अकारत है और यही लोग जहन्नुमी हैं (और) वह उसी में हमेशा रहेंगें (217)
बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और ख़ुदा की राह में हिजरत की और जिहाद किया यही लोग रहमते ख़ुदा के उम्मीदवार हैं और ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (218)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग शराब और जुए के बारे में पूछते हैं तो तुम उन से कह दो कि इन दोनो में बड़ा गुनाह है और कुछ फायदे भी हैं और उन के फायदे से उन का गुनाह बढ़ के है और तुम से लोग पूछते हैं कि ख़ुदा की राह में क्या ख़र्च करे तुम उनसे कह दो कि जो तुम्हारे ज़रुरत से बचे यूँ ख़ुदा अपने एहकाम तुम से साफ़ साफ़ बयान करता है (219)
ताकि तुम दुनिया और आखि़रत (के मामलात) में ग़ौर करो और तुम से लोग यतीमों के बारे में पूछते हैं तुम (उन से) कह दो कि उनकी (इसलाह दुरुस्ती) बेहतर है और अगर तुम उन से मिलजुल कर रहो तो (कुछ हर्ज) नहीं आखि़र वह तुम्हारें भाई ही तो हैं और ख़ुदा फ़सादी को ख़ैर ख़्वाह से (अलग ख़ूब) जानता है और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम को मुसीबत में डाल देता बेशक ख़ुदा ज़बरदस्त हिक़मत वाला है (220)

पेट की आग

Written By Bisari Raahein on मंगलवार, 30 अप्रैल 2019 | 8:03 pm

मौलिक रचना

कविता का शीर्षक - पेट की आग

तप रहा है
सूरज बहुत
आग रही
है बरस ।
जला रहा
सब कुछ
नहीं करता
कोई तरस ।
पशु-पक्षी भी
दुबके पड़े हैं
किसी न किसी
छाँव में ।
गली – नुक्कड़
सुन्न हैं सब
जैसे रहता ही
न हो कोई
गाँव में ।
मुंह – सिर
गमछे से लपेटे
वो चला रहा
कुदाल है ।
अपने आप से
बातें करता
विचारों का बुन रहा
जाल है ।
सोचता है कभी
सब कुछ छोड़
जाऊं भाग ....
पर
जानता है वो
“कायत”
ये आग तो कुछ नहीं
सबसे बड़ी होती है
पेट की आग.....

कृष्ण कायत
मंड़ी डबवाली ।

ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है

और बाज़ बन्दे ऐसे हैं कि जो दुआ करते हैं कि ऐ मेरे पालने वाले मुझे दुनिया में नेअमत दे और आखि़रत में सवाब दे और दोज़ख़ की आग से बचा (201)
यही वह लोग हैं जिनके लिए अपनी कमाई का हिस्सा चैन है (202)
और ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है और इन गिनती के चन्द दिनों तक (तो) ख़ुदा का जि़क्र करो फिर जो शख्स जल्दी कर बैठै और (मिना) से और दो ही दिन में चल ख़ड़ा हो तो उस पर भी गुनाह नहीं है और जो (तीसरे दिन तक) ठहरा रहे उस पर भी कुछ गुनाह नही लेकिन यह रियायत उसके वास्ते है जो परहेज़गार हो, और खु़दा से डरते रहो और यक़ीन जानो कि एक दिन तुम सब के सब उसकी तरफ क़ब्रों से उठाए जाओगे (203)
ऐ रसूल बाज़ लोग मुनाफिक़ीन से ऐसे भी हैं जिनकी चिकनी चुपड़ी बातें (इस ज़रा सी) दुनयावी जि़न्दगी में तुम्हें बहुत भाती है और वह अपनी दिली मोहब्बत पर ख़ुदा को गवाह मुक़र्रर करते हैं हालाकि वह तुम्हारे दुश्मनों में सबसे ज़्यादा झगड़ालू हैं (204)
और जहाँ तुम्हारी मोहब्बत से मुँह फेरा तो इधर उधर दौड़ धूप करने लगा ताकि मुल्क में फ़साद फैलाए और ज़राअत {खेती बाड़ी} और मवेषी का सत्यानास करे और ख़ुदा फसाद को अच्छा नहीं समझता (205)
और जब कहा जाता है कि ख़ुदा से डरो तो उसे ग़ुरुर गुनाह पर उभारता है बस ऐसे कम्बख़्त के लिए जहन्नुम ही काफ़ी है और बहुत ही बुरा ठिकाना है (206)
और लोगों में से ख़ुदा के बन्दे कुछ ऐसे हैं जो ख़़ुदा की (ख़ुशनूदी) हासिल करने की ग़रज़ से अपनी जान तक बेच डालते हैं और ख़ुदा ऐसे बन्दों पर बड़ा ही शफ़्क़्क़त वाला है (207)
ईमान वालों तुम सबके सब एक बार इस्लाम में (पूरी तरह ) दाखि़ल हो जाओ और शैतान के क़दम ब क़दम न चलो वह तुम्हारा यक़ीनी ज़ाहिर ब ज़ाहिर दुश्मन है (208)
फिर जब तुम्हारे पास रौशन दलीले आ चुकी उसके बाद भी डगमगा गए तो अच्छी तरह समझ लो कि ख़ुदा (हर तरह) ग़ालिब और तदबीर वाला है (209)
क्या वह लोग इसी के मुन्तजि़र हैं कि सफेद बादल के साय बानो की आड़ में अज़ाबे ख़ुदा और अज़ाब के फ़रिश्ते उन पर ही आ जाए और सब झगड़े चुक ही जाते हालाकि आखि़र कुल उमुर ख़़ुदा ही की तरफ रुजू किए जाएँगे (210)

मुझे गर्व है ,, मुझे खुशी है ,

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 28 अप्रैल 2019 | 7:08 am

मुझे गर्व है ,, मुझे खुशी है ,, मोदी सरकार के खिलाफ मेरे किसी आरोप का भक्तो के पास कोई तार्किक तथ्यात्मक जवाब नही मिला ,, मेरे हर वाजिब तहज़ीब की ज़ुबान में लिखे गए सवाल पर कुछ तंख़य्ये ,, कुछ समर्थक ,, कुछ की बोखलाहट रही ,,झुंझला कर इन लोगों ने भाषा मे भी अपना आपा खोया ,, बदतहजीबी के दायरे तोड़ दिए ,, मेरे हर सवाल के जवाब में सिर्फ इन्होंने बिना जवाब दिए , मेरी पार्टी के ,, देश के लिए शहीद होने वाले ,, त्याग करने वाले , महिला पुरुषों के लिए बेहुदा , अश्लील , तर्कविहीन टिप्पणियां की है जो इनकी परवरिश को झलकाती है , लेकिन यह मेरे भाई है ,, मुझे खुशी है कुछ ने इन्हें सुधारने के लिए आयना दिखाया , तो बहुत उन लोगो पर शर्मिंदगी भी हुई जो खुद को पार्टी के , पदाधिकारी , नेता बताकर अपना वर्चस्व दिखाते है , लेकिन उनके मुंह से इनके अपने नेताओं के लिए , अश्लील बेहुदा टिप्पणियों पर भी उफ्फ तक न निकली ,, क्योंकि यह लोग सही मायनों में ,,,,,?????अख्तर

फिर जब तुम अरक़ान हज बजा ला चुको तो तुम इस तरह जि़क्रे ख़ुदा करो जिस तरह तुम अपने बाप दादाओं का जि़क्र करते हो

और तुम उन (मुशरिकों) को जहाँ पाओ मार ही डालो और उन लोगों ने जहाँ (मक्का) से तुम्हें शहर बदर किया है तुम भी उन्हें निकाल बाहर करो और फितना परदाज़ी (शिर्क) खूँरेज़ी से भी बढ़ के है और जब तक वह लोग (कुफ़्फ़ार) मस्जि़द हराम (काबा) के पास तुम से न लडे़ तुम भी उन से उस जगह न लड़ों बस अगर वह तुम से लड़े तो बेखटके तुम भी उन को क़त्ल करो काफि़रों की यही सज़ा है (191)
फिर अगर वह लोग बाज़ रहें तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (192)
और उन से लड़े जाओ यहाँ तक कि फ़साद बाक़ी न रहे और सिर्फ़ ख़ुदा ही का दीन रह जाए फिर अगर वह लोग बाज़ रहे तो उन पर ज़्यादती न करो क्यांेकि ज़ालिमों के सिवा किसी पर ज़्यादती (अच्छी) नहीं (193)
हुरमत वाला महीना हुरमत वाले महीने के बराबर है (और कुछ महीने की खुसूसियत नहीं) सब हुरमत वाली चीजे़ एक दूसरे के बराबर हैं बस जो शख्स तुम पर ज़्यादती करे तो जैसी ज़्यादती उसने तुम पर की है वैसी ही ज़्यादती तुम भी उस पर करो और ख़ुदा से डरते रहो और खू़ब समझ लो कि ख़ुदा परहेज़गारों का साथी है (194)
और ख़ुदा की राह में ख़र्च करो और अपने हाथ जान हलाकत मे न डालो और नेकी करो बेशक ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता है (195)
और सिर्फ़ ख़ुदा ही के वास्ते हज और उमरा को पूरा करो अगर तुम बीमारी वगै़रह की वजह से मजबूर हो जाओ तो फिर जैसी क़ुरबानी मयस्सर आये (कर दो) और जब तक कु़रबानी अपनी जगह पर न पहुँय जाये अपने सर न मुँडवाओ फिर जब तुम में से कोई बीमार हो या उसके सर में कोई तकलीफ हो तो (सर मुँडवाने का बदला) रोजे़ या खै़रात या कु़रबानी है बस जब मुतमइन रहों तो जो शख्स हज तमत्तो का उमरा करे तो उसको जो कु़रबानी मयस्सर आये करनी होगी और जिस से कु़रबानी ना मुमकिन हो तो तीन रोजे़ ज़ामानए हज में (रखने होगें) और सात रोजे़ जब तुम वापस आओ ये पूरी दहाई है ये हुक्म उस शख्स के वास्ते है जिस के लड़के बाले मस्जि़दुल हराम (मक्का) के बाशिन्दे न हो और ख़ुदा से डरो और समझ लो कि ख़ुदा बड़ा सख़्त अज़ाब देने वाला है (196)
हज के महीने तो (अब सब को) मालूम हैं (शव्वाल, ज़ीक़ादा, जिलहज) बस जो शख्स इन महीनों में अपने ऊपर हज लाजि़म करे तो (एहराम से आखि़र हज तक) न औरत के पास जाए न कोई और गुनाह करे और न झगडे़ और नेकी का कोई सा काम भी करों तो ख़ुदा उस को खू़ब जानता है और (रास्ते के लिए) ज़ाद राह मुहिय्या करो और सब मे बेहतर ज़ाद राह परहेज़गारी है और ऐ अक़्लमन्दों मुझ से डरते रहो (197)
इस में कोई इल्ज़ाम नहीं है कि (हज के साथ) तुम अपने परवरदिगार के फज़ल (नफ़ा तिजारत) की ख़्वाहिश करो और फिर जब तुम अरफात से चल खड़े हो तो मशअरुल हराम के पास ख़ुदा का जिक्र करो और उस की याद भी करो तो जिस तरह तुम्हे बताया है अगरचे तुम इसके पहले तो गुमराहो से थे (198)
फिर जहाँ से लोग चल खड़े हों वहीं से तुम भी चल खड़े हो और उससे मग़फिरत की दुआ माँगों बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (199)
फिर जब तुम अरक़ान हज बजा ला चुको तो तुम इस तरह जि़क्रे ख़ुदा करो जिस तरह तुम अपने बाप दादाओं का जि़क्र करते हो बल्कि उससे बढ़ कर के फिर बाज़ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि ऐ मेरे परवरदिगार हमको जो (देना है) दुनिया ही में दे दे हालाकि (फिर) आखि़रत में उनका कुछ हिस्सा नहीं (200)

Founder

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Saleem Khan