नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

Home » » जज़्बात ....

जज़्बात ....

Written By Pallavi saxena on सोमवार, 9 जनवरी 2012 | 9:24 pm

संग चलना तो चाहती हूँ तेरे 
मगर कुछ मजबूरियाँ है,
मेरी,तो कुछ तेरी भी, 
आज भले ही बदल गई हो 
ज़िंदगी तेरी,जिसके चलते 
आज न तुम मेरे हो, और न मैं तुम्हारी,
मगर शायद तुम्हें याद हो
कभी लिया था तुम ने वादा एक मुझसे 
कि दूर रहकर भी पास रहूँ मैं सदा तुम्हारे 
क्यूंकि शायद डर था तुम्हें 
कहीं की छूट जाओ न तुम कभी किनारे
क्यूंकि दो नावों में सवारी करना 
अक्सर हानी कारक साबित होता है।
लेकिन तब भी मैंने कहा था हाँ ...जब भी तुम मुझे 
सच्चे दिल से याद करोगे 
मुझे साथ पाओगे अपनी रूह की तरह 
जिसे तुम देख तो ना सकोगे 
मगर महसूस नहीं कर सकोगे
हवाओं कि तरह 
क्यूंकि अब हमारी अपनी ज़िंदगी ही,
हमारी अपनी नहीं
अब अधिकार है उस पर किसी ओर का....
चाहती तो हूँ दूर रहकर भी 
तू मुझे याद करे, यादों मे ही सही 
तू मुझे अपने पास महसूस तो करे
जैसे रेगिस्तान में साथ-साथ उड़ती
या चलती रेत जिसे सिर्फ हवाओं के 
जरिये ही महसूस किया जा सकता है,
ठीक उसी तरह तेरी ज़िंदगी में, 
मैं अपना भी, वजूद देखना चाहती हूँ
जो दिखाई भले ही ना दे 
लेकिन जिसे महसूस किया जा सके
प्यार के एहसासों और यादों के ज़रिये
ऐसे जैसे समंदर के पानी में नमक..
और कुए के पानी में मिठास 
जो दिखकर भी दिखाई नहीं देती 
जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है
जज़्बातों की तरह .....
पल्लवी ....    
Share this article :

2 टिप्पणियाँ:

Rajput ने कहा…

चाहती तो हूँ दूर रहकर भी
तू मुझे याद करे, यादों मे ही सही
तू मुझे अपने पास महसूस तो करे....
खुबसूरत रचना , बधाई

ana ने कहा…

behad khubsurat si rachana...abhar

एक टिप्पणी भेजें

Thanks for your valuable comment.