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कुछ तो लोग कहेंगे - 4

Written By Pappu Parihar Bundelkhandi on रविवार, 9 अक्टूबर 2011 | 10:52 am


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कुछ तो लोग कहेंगे
ये लडकियां भी,
क्या गुल खिलाती हैं,
जवानों को तरसाकर,
बूढों से दिल लगाती हैं,

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कृतिका कामरा - 2

Written By Pappu Parihar Bundelkhandi on शनिवार, 8 अक्टूबर 2011 | 6:21 am

कृतिका कामरा Kritika Kaamra



तब समझ पाया,
तेरी सोखी, तेरी अदा का राज़,
जब जान पाया,
ईरानी हसीना के हुश्न का राज़,

सही में कहने वाले ने सही जाँचा है,
आंकने वाले ने सही आँका है,
हुश्न तो ईरान का ही,
इस दुनिया में सबसे बाँका है,

आरजू पूरी हुयी ईरानी हुश्न को देखने की,
आज तुझे जो देखा,
हुश्न की देख, देह से नहीं, रूह से देखने की,
आज तेरी रूह को देखा,

अब पता चला तेरे राज़-ए-हुश्न-का,
हुश्न मशहूर है, दुनिया में ईरान का,

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कृतिका कामरा - 1

कृतिका कामरा Kritika Kamra

जबसे तुझे देखता आ रहा हूँ,
कशिश में खिंचता आ रहा हूँ,
तुझ में एक खिचाव-सा है,
जो किसी और पड़ाव का है,

बहुत सोचा, बहुत ढूँढा,
वजह तक न पहुँचा,
तब कहीं से है जाना,
तू तो है इरानी हसीना,

सुना था किसी से,
इरानी हुश्न का दुनिया में जोर है,
ईरान जैसा हुश्न,
दुनिया में कहीं न और है,

हुश्न के मामले में,
आज भी ईरान ही अव्वल है,
ईरानी हुश्न का,
आज भी दुनिया में बल है,
 .

कुछ तो लोग कहेंगे - 3

Written By Pappu Parihar Bundelkhandi on शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2011 | 5:31 am



कृतिका कामरा - Kritika Kamra

तेरी आवाज़,
तेरी आँखें,
तेरे ओंठ,
तेरे दाँत,

डॉ. निधि वर्मा
पहली मुलाक़ात,
बड़ी अजीब-सी थी,
पेश आयी उनसे,
बड़ी करीब-सी थी,

डॉ. आशुतोष मन ही मन में
वो हड़बड़ी में,
गड़बड़ी कर रहे थे,
कहना कुछ चाह रहे थे,
कह कुछ रहे थे,

इतनी मासूमियत से वो बोलते हैं,
उलझन में न जाने क्या-क्या बोलते हैं,
दिल में उल्फत-सी घोलते हैं,
उलझन में चैन-ओ-अमन खोजते हैं,

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कुछ तो लोग कहेंगे - 2



डॉ. निधि वर्मा
नज़रें ढूंढ रहीं हैं उन्हें,
जिन्हें देखते ही दिल में,
उल्फत-सी हो जाती है,
रौशनी-सी मिल जाती है,

सामने ही आ गए हैं वो,
नज़रें न भांप पायें मेरी,
चेहरा छिपा लेती हूँ मैं,
देख ही न पायें मुझे वो,

हाय दिल घबराता है,
चेहरा न दिखलाया जाता है,
पर क्या करें अब,
हुकुम जो उनका आता है,

कुछ तो लोग कहेंगे,
बहुत फनायत-सी कहानी है,
रूह-ए-फ़ना कर जाती है,
कुछ तो लोग कहेंगे,
कहानी जिन्दगी कह जाती है,

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कुछ तो लोग कहेंगे - 1



कृतिका कामरा - Kritika Kamra

तेरी मासूमियत,
मैं पहले दिन ही भांप गया था,
जब तुझे तेखते ही,
मेरा दिल कांप गया था,

डॉ. निधि वर्मा
ये बेचैनी है किसलिए,
जरा नैन से नैन तो मिलाओ,
नज़र दूर है किसलिए,
ज़रा चेहरा तो उठाओ,

डॉ. आशुतोष मन ही मन में
चेहरा वो छुपा रहे हैं,
दर्द-ए-हाल से,
पर्दा तो हटा दो,
चेहरा-ए-नूर से,

डॉ. निधि वर्मा के लिए
उनकी बेचैनी,
उनकी बेहनतहाई बता रही है,
चुपके-चुपके दिल में,
प्यार जता रही है,

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Founder

Founder
Saleem Khan