नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

nyay/anyay लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
nyay/anyay लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

नदी की धारा मत मोड़ो हे ! ये सैलाब न ले डूबे

Written By Surendra shukla" Bhramar"5 on रविवार, 28 अगस्त 2011 | 7:37 am


नदी की धारा मत मोड़ो हे !
ये सैलाब न ले डूबे
बहुत तेज धारा है इसकी
नहीं संभलने वाली
हैं गरीब भूखे किश्ती में
करो नहीं मनमानी !!
———————-
83286-anna-hazare
अरे भागीरथ के गुण गाओ
जिसने इसे उतारा
बड़ी पुन्य पावन ये धारा
सदियों से है तारा
श्वेत हंस सी -माँ-शारद सी
ईमाँ-धर्म ये न्यारा
————————-
धारा ! -जाति धर्म न बाँटो
सूप सुभाय ले छांटो
अच्छा गुण – जो काम में आये
जन हित का हो हर मन भाये
297750_109011752535774_100002808480456_48658_2157637_n
——————————-
तेरी कश्ती मेरी कश्ती
कल के युवा जवान की कश्ती
सेना और किसान की कश्ती
भारत के हर-जन की कश्ती
डूब न जाएँ -कुटिल चाल से तेरी
नहीं बजा रन-भेरी
———————————-
माना तू है बड़ा खिलाडी
और बड़ा तैराक !
इनमे कितने गांधी -शास्त्री
भगत सिंह-आजाद !!
——————————–
जिनकी एक जुबान हिलने से
क्रूर भंवर रुक जाए
कदम ताल गर चलें मिलाये
ये धरती थर्राए !!
—————————–
इससे पहले घेर तुझे लें
सौ -सौ छोटे नाविक
अरे जगा ले मृतक -ह्रदय को
हमराही हो -संग-मुसाफिर !!
———————————-
क्या जमीर हे मारा तुम्हारा
देश -भेष कुछ नहीं विचारा
उस दधीचि की हड्डी से हे !
थोडा नजर मिलाओ
वज्र से जो तुम ना टूटे तो
मोड़ो धारा -या बह जाओ !!
———————————
सभी मित्रो को बधाई और हार्दिक शुभ कामनाये ..अपना सब का साथ हमेशा यों ही बना रहे ......

शुक्ल भ्रमर ५
जल पी बी २६.८.२०११
११.५० मध्याह्न

पूत जने माई बप्पा तो झूमें आज देशवा ख़ुशी भागशाली श्याम जू पैदा भये

Written By Surendra shukla" Bhramar"5 on सोमवार, 22 अगस्त 2011 | 7:22 am


आप सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर ढेर सारी हार्दिक शुभ कामनाएं आइये आवाहन करें की कृष्ण हम सब में आयें और अनाचार मिटायें हमारे सभी आन्दोलन सफल हों और दुराचारी भ्रष्टाचारी मुह की खाएं-इस कलयुग में द्वापर की बातें याद आ जाती हैं -आज तो कितनी द्रौपदी बेचारी कोई कान्हा नहीं पाती हैं ..ग्वाल बाल सब .सखियों सहेलियों का पवित्र प्यार अब कहाँ …जो भी हो आज अपने अंगना में गोपाला को आइये लायें ….गोदी में खिलाएं ….स्वागत करें …काले काले बदरा ..भादों का महीना … -भ्रमर ५
———–भ्रमर गीत———
3-6933cf0547.jpg-krishna-1
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
ढोल मजीरा तो हर दिन बाजे
आज घर घर बजे सब की थाली
श्याम जू पैदा भये
4-547e9811af.jpg-krishna-2
घुंघटा वाली नाचे चूड़ी कंगन बजाई के
बच्चे बूढ़े भी नाचें बजा ताली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
बदरा बजाये पशु पक्षी भी नाचें
पेड़ पौधों में छाई हरियाली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
कृष्ण पाख कुछ चाँद छिपावे
आज घर घर मने है दिवाली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
भादों में नदी नाले सागर बने
कान्हा चरण छुए यमुना भयीं खाली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
पूत जने माई बप्पा तो झूमें
आज देशवा ख़ुशी भागशाली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
——————-
कृपया मेरी अन्य तरह की रचनाएँ मेरे अन्य ब्लॉग पर पढ़ें जो इस पृष्ठ पर दायीं तरफ रहती हैं ….
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
२२.०८.२०११
प्रतापगढ़ उ.प्र. ६.३० पूर्वाह्न

भ्रष्ट -चोर को चोर कहें ना ये कैसी आजादी ??

Written By Surendra shukla" Bhramar"5 on बुधवार, 17 अगस्त 2011 | 7:44 am


कैसा अपना लोकतंत्र है ??
कैसी लोकशाही ????
भ्रष्ट -चोर को चोर कहें ना
ये कैसी आजादी ??
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें
images
(फोटो साभार गूगल /नेट से लिया गया )
———————–
पेट पे लात मार जो बैठा
क्या राजा कहलाये ?
बड़ी-बड़ी कोठी वो बैठा
झुग्गी नजर गडाए !!
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें
——————————-
मरते भूखे-कृषक -युवा हैं
मरते कोख में बच्चे
भूख अभी भी मुख्य समस्या
कैसी नीति बनाये
सौ सौ गार्ड के बीच चले हैं
जन-सेवक कहलाये ?
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें
————————
महगाई भ्रष्टाचारी से
दे दो हमें निजात
या अनशन भूखे मरने दो
सुन लो हमरी बात
कैसा न्याय कहाँ हैं मंत्री
दूध पिला हमने जो भेजे
“डसते ” देश यही क्या संतरी
रक्त-बीज हैं दस दस फैले
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें
————————————
कला धन-काली तेरी कमाई
मुह भी काला कर अपना !
श्वेत वस्त्र वो टोपी छोडो
भारत-भारती श्वेत हंस -जनता प्यारी से
दूर हटो तुम
दूर हटो तुम ………
चीख -चीख अपना कहना !!
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें
—————————-
धैर्य हमारा टूट न जाये
लग जाए ना आग
अभी होश में आ जाओ
या भाग सके तो भाग
अब मैराथन शुरू हो गयी
लम्बी चले लड़ाई
गुरु -”माँ” की कुछ सीख बची तो
धर्म -न्याय का राह पकड ले
बन रक्षक कहलाये भाई !!
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें !!
———————————
शुक्ल भ्रमर ५
जल पी बी
१७.८.२०११

ye kya ho raha hai...

Written By Shalini kaushik on शनिवार, 19 फ़रवरी 2011 | 3:10 pm

ब्लॉग एसोसिएशन अपने आपसी मन मुटाव में पडी हैं और जो असल में इनका उद्देश्य होना चाहिए उस और इनका ध्यान ही नहीं जा रहा है.मेरा मतलब है ये हम ही हैं जो अन्याय के खिलाफ मिलजुल कर आवाज उठा सकते हैं और हम ही इस और ध्यान नहीं दे रहे हैं.१७ फरवरी से अख़बारों में मुज़फ्फरनगर का गाँव भारसी की antrashtriy खिलाडी  "प्रियंका पंवार "
के उत्पीडन की ख़बरें छाई हैं और इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया  जा रहा है.एक और प्रियंका का उत्पीडन उन्हें तोड़ रहा है और दूसरी और वे राज्य का नाम रोशन कर रही हैं.३४ वें राष्ट्रीय खेलों में उन्होंने १०० मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता है और सराहना में उन्हें क्या मिल रहा है केवल रोना.उनके पिता शिवकुमार पंवार भी उन्हें लेकर चिंतित हैं.
     प्रियंका के उत्पीडन में टी.टी. ई.अनु कुमार पर मुकदमा मुज़फ्फरनगर की नई मंडी कोतवाली में पंजीकृत कराया गया है.किन्तु उनके टी.टी.ई ने कहा है की उनके आरोपों में सच्चाई नहीं है और वे उनकी पत्नी से रंजिश रखती हैं.दूसरी और प्रियंका का अपने पिता से kahna   है कि उनके बड़े बड़े लोगों से सम्बन्ध हैं और मुझ पर कार्यवाही से हटने को दबाव बनाया जा रहा है .प्रियंका के पिता को डर है कि कहीं उनकी बेटी आत्महत्या न कर ले.अगर ऐसा होता है तो ये हम सभी के लिए शर्म की बात होगी .आखिर कितनी और रूचिकाएं राठोर की शिकार बनेंगी? आखिर कब तक हमारे उदईमानों को इस तरह के उत्पीडन झेलने होंगे? आखिर कब तक सच्चाई को सबूत की तलाश करनी होगी?कब तक?सच जो भी हो सामने आना चाहिए और फिर जो भी सच्चाई पर हो उसका साथ जनता को आगे बढ़कर देना चाहिए.मैं अभी केवल मामला आपके सामने रख रही हूँ पूरी सच्चाई तो धीरे धीरे ही सामने आएगी किन्तु ऐसी बातें मेरी लेखनी को कुछ लिखने को विवश कर देती हैं कि आखिर ये क्या हो रहा है?और हम चुप क्यों हैं-आशीष"अनल"के शब्दों में मैं तो यही कहूँगी-
बागवान बाग़  के लुटेरे होते देखें हैं,
माझी खुद अपनी नाव  को डुबोते देखें हैं,
लेखनी बन गयी है तब से मेरी ज्वालामुखी
जब से इस मात्रभू के नयन रोते देखें हैं.
http://shalinikaushik2.blogspot.com/

Founder

Founder
Saleem Khan