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भ्रष्ट -चोर को चोर कहें ना ये कैसी आजादी ??

Written By Surendra shukla" Bhramar"5 on बुधवार, 17 अगस्त 2011 | 7:44 am


कैसा अपना लोकतंत्र है ??
कैसी लोकशाही ????
भ्रष्ट -चोर को चोर कहें ना
ये कैसी आजादी ??
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें
images
(फोटो साभार गूगल /नेट से लिया गया )
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पेट पे लात मार जो बैठा
क्या राजा कहलाये ?
बड़ी-बड़ी कोठी वो बैठा
झुग्गी नजर गडाए !!
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें
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मरते भूखे-कृषक -युवा हैं
मरते कोख में बच्चे
भूख अभी भी मुख्य समस्या
कैसी नीति बनाये
सौ सौ गार्ड के बीच चले हैं
जन-सेवक कहलाये ?
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें
————————
महगाई भ्रष्टाचारी से
दे दो हमें निजात
या अनशन भूखे मरने दो
सुन लो हमरी बात
कैसा न्याय कहाँ हैं मंत्री
दूध पिला हमने जो भेजे
“डसते ” देश यही क्या संतरी
रक्त-बीज हैं दस दस फैले
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें
————————————
कला धन-काली तेरी कमाई
मुह भी काला कर अपना !
श्वेत वस्त्र वो टोपी छोडो
भारत-भारती श्वेत हंस -जनता प्यारी से
दूर हटो तुम
दूर हटो तुम ………
चीख -चीख अपना कहना !!
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें
—————————-
धैर्य हमारा टूट न जाये
लग जाए ना आग
अभी होश में आ जाओ
या भाग सके तो भाग
अब मैराथन शुरू हो गयी
लम्बी चले लड़ाई
गुरु -”माँ” की कुछ सीख बची तो
धर्म -न्याय का राह पकड ले
बन रक्षक कहलाये भाई !!
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें !!
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शुक्ल भ्रमर ५
जल पी बी
१७.८.२०११
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4 टिप्पणियाँ:

शिखा कौशिक ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति .आभार .
virangna maina

Neeraj Dwivedi ने कहा…

Bahut Acchi rachna

Surendra shukla" Bhramar"5 ने कहा…

शिखा जी अभिवादन -रचना पसंद आई ...लिखना सार्थक रहा ..आइये सब मिल अपनी आवाज और बुलंद कर बढ़ चलें
धन्यवाद
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 ने कहा…

प्रिय नीरज द्विवेदी जी अभिवादन और अभिनन्दन -रचना पसंद आई ..सुन ख़ुशी हुयी ...हमारे युवकों को बहुत कुछ करना है अति शीघ्र ....लिखना सार्थक रहा ..आइये सब मिल अपनी आवाज और बुलंद कर बढ़ चलें
धन्यवाद
भ्रमर ५

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