नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

realisation लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
realisation लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

था अकेला चला मैं

Written By Hema Nimbekar on सोमवार, 11 अप्रैल 2011 | 2:42 pm

था अकेला चला मैं,
जिद्द में अपनी एक लक्ष्य पाने को |
थी खबर क्या मुझे,
कारवां खड़ा है तैयार साथ आने को ||


 


थी आत्मा की आवाज़,
स्वराज और आत्म सम्मान पाने को |
थी खबर क्या मुझे,
समाज है एकजुट एक दुसरे को जगाने को ||

थी गुलामी मिटानी हमे,
पहले चरण में गोरो के खिलाफ आवाज़ उठाने को |
थी खबर क्या मुझे,
दुसरे चरण में भी लड़ना होगा अपना हक पाने को ||




थे वो मेहमान देश में,
आये थे जो देश पे गोरा राज चलाने को |
आज है अपने ही,
जो है तैयार काले भेष में देश को लुटाने को ||

नहीं झुकना, है उठना,
चाहे सिर कटाने पड़े हमें भ्रष्टाचार मिटाने को |
नहीं है पहली बार यह,
पहले भी हम एक हुए थे अपना देश बचाने को ||




अब नहीं है रुकना,
होसला है रखना ऐसे और आन्दोलन चलाने को |
दुश्मन है और अभी,
सिर्फ भ्रष्टाचार ही नहीं है मार बाहर गिराने को ||

अभी एक ही सीढ़ी चढ़ें है,
फिर भी कितना सब झेला एक सफलता पाने को |
ताकत है बचा के रखनी,
अभी है आगे और सीढियां और लक्ष्य पाने को ||

~'~hn~'~
(This Poem is Dedicated to Mohandas Karamchand Gandhi / Mahatma Gandhi and Kishan Bapat Baburao Hazare / Anna Hazzare)


मेरी लिखी और कविताएँ पढने के लिए कृपया क्लिक करें  


मेरा ब्लॉग पर कविताएँ, कहानियाँ  और शेरो शायरी  पढ़े  
 

Founder

Founder
Saleem Khan