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बड़ी कीमती आजादी है इसे संभालो

Written By shikha kaushik on सोमवार, 15 अगस्त 2011 | 9:12 pm




आया फिर से आजादी का दिन ये प्यारा ,
चहुँ दिशा में गूँज रहा ''जयहिंद' का नारा .

हाथ तिरंगा लेकर गली-गली में घूमें ,
जश्न मनाएं आओ मिलकर हम सब झूमें .

आज शहीदों  को झुक कर  हम नमन करेंगे 
याद शहादत करके आँखें नम कर लेंगे .

प्रण इतना हमको करना है अब ये हँसकर;
प्राण न्यौछावर कर देंगे हम 'भारत माँ' पर .

छोड़ आपसी द्वेष सभी को गले लगा लो ;
बड़ी कीमती आजादी है इसे संभालो .

                                          शिखा कौशिक 


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6 टिप्पणियाँ:

Anil Avtaar ने कहा…

Bahut sundar rachna.. Aabhar.

शालिनी कौशिक ने कहा…

bahut prernadayak.bahut sundar.

vandana ने कहा…

छोड़ आपसी द्वेष सभी को गले लगा लो ;
बड़ी कीमती आजादी है इसे संभालो
प्रेरणादायी सुन्दर रचना

vidhya ने कहा…

Bahut sundar rachna.

S.M.HABIB ने कहा…

छोड़ आपसी द्वेष सभी को गले लगा लो ;
बड़ी कीमती आजादी है इसे संभालो .

सुन्दर अभिव्यक्ति...
सादर बधाई...

Dilbag Virk ने कहा…

आपकी पोस्ट आज चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई ,
कृपया पधारें
चर्चा मंच

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