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काला धन न सफ़ेद हुआ बाबा के बाल सफ़ेद !

Written By shikha kaushik on शुक्रवार, 11 मई 2012 | 5:22 pm



[ अमर  उजाला  दैनिक 11 मई  2012 पेज  11 ]
  काला  धन  न  सफ़ेद हुआ  बाबा  के  बाल सफ़ेद  !


राजनीति की कोठरी   में  छिपे हुए हैं भेद ,
ऐसी छलनी में क्या छने जिसके हो छोटे  छेद ,
काले  धन को लेकर बाबा को है बड़ा खेद  ;
इस चक्कर  में हो  गए  उनके  बाल  सफ़ेद  .

                              शिखा  कौशिक 
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3 टिप्पणियाँ:

रविकर फैजाबादी ने कहा…

जी |
आज हमें भी दिखी यह सफेदी ||

Shanti Garg ने कहा…

बहुत बेहतरीन व प्रभावपूर्ण रचना....
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Lajawaab.

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