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मसाल

Written By बरुण सखाजी on बुधवार, 24 अक्तूबर 2012 | 10:27 pm

लेकर मसाल हाथ में,
चिन्गारियों का ख्याल साथ में,
भींचकर मु_ियां मैं रावण खोजता हूं।
रिमझिम सा बूंदों से बना
इल्जामों का सावन खोजता हूं।
- सखाजी
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