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तुम्हारी आराधना....डा श्याम गुप्त. की कविता .........

Written By shyam gupta on रविवार, 5 जून 2011 | 7:28 pm

  प्रिये!            
उस दिन जब तुम्हें,
पहली बार देखा;
टूट गयी पलभर में,
मन की लक्ष्मण-रेखा ।

हम तो थे प्यार में,
बड़े ही सौदाई;
एक ही भ्रूभंग में,
हो गए धराशायी |

कितने पल-छिन,
कितने मुद्दों की साधना,
एक ही क्षण में, होगई-
तुम्हारी आराधना |

कि तेरी पलकों की छाँव में,
तभी  से जीते हैं, मरते हैं ;
और सुहाने दुस्वप्न की तरह,
उस पल को-
आज तक याद करते हैं ||

                          ----------- काव्य-दूत से...               

Founder

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Saleem Khan