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इतना बड़ा पटाखा

Written By गजेन्द्र सिंह on शनिवार, 19 फ़रवरी 2011 | 7:02 pm


दिवाली के दिनों में सब तरफ पटाखे चल रहे थे।

ऐसे में गजोधर के बच्चे ने नीचे से अपने पिताजी को जोर से आवाज दिया,

'' पिताजी आप बाल्कनी में आओ और नीचे देखो ...

देखो मै कितना बडा पटाखा जला रहा हूं''

गजोधर ने बाल्कनी से नीचे देखा और वह

""नही...."" चिल्लाता हुआ नीचे दौड पडा।

जब
गजोधर नीचे पहूंचा तो उसका बच्चा वह पटाखा जला ही रहा था

तो
गजोधर ने '' नही....'' कहते हूए उसे जोर से धक्का देकर दूर गिरा दिया।

गजोधर के बच्चे ने अपने मैले हूए कपडे झटकते हूए,

उठते हूए अपने पिताजी से पुछा,

'' क्यों क्या हुआ ?''

गजोधर ने अपने बच्चे को डांटते हूए कहा ,

'' गधे वह पटाखा नही... गेस का सिलेंडर है"

Founder

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