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महंगाई तो मार ही गयी पर हमारी महत्वाकांक्षा का क्या....

Written By Shalini kaushik on रविवार, 26 जून 2011 | 12:23 am


महंगाई तो मार ही गयी पर हमारी महत्वाकांक्षा  का क्या. आप सोच रहे होंगे की मैं फिर उलटी बात करने बैठ गयी आज सभी समाचार पत्रों में गैस ,डीजल और केरोसिन के दाम बढ़ने की सूचना  प्रमुखता से प्रकशित है .सरकार की जिम्मेदारी जनता जनार्दन के बजट की बेहतरी देखना है ये मैं मानती हूँ और यह भी मानती हूँ की सरकार इस कार्य में पूर्णतया विफल रही है किन्तु जहाँ तक सरकार की बात है उसे पूरी जनता को देखना होता है और एक स्थिति एक के लिए अच्छी तो एक के लिए बुरी भी हो सकती है किन्तु हम हैं जिन्हें केवल स्वयं को और अपने परिवार को देखना होता है और हम यह काम भी नहीं कर पाते.
       आज जो यह महंगाई की स्थिति है इसके कहीं न कहीं हम भी जिम्मेदार हैं .मेरी इस सोच के पीछे जो वजह है वह यह है की मैं देखती हूँ कि  हमारे क्षेत्र में जहाँ पैदल भी बहुत से कार्य किये जा सकते हैं लोग यदि सुबह को दूध लेने भी जाते हैं तो मोटर सायकिल पर बैठ कर जाते हैं जबकि वे  यदि सही ढंग से कार्य करें तो  मोर्निंग वाक के साथ दूध लाकर अपनी सेहत भी बना सकते हैं.सिर्फ यही नहीं कितने ही लोग ऐसे हैं जो सारे दिन अपने स्कूटर .कार को बेवजह दौडाए फिरते हैं .क्या इस तरह हम पेट्रोल का खर्चा नहीं बढ़ा  रहे और यह हमारी आने वाली पीढ़ी को भुगतना होगा जब उसे वापस साईकिल और बैलगाड़ी पर सवार होना होगा.
ये तो हुई छोटी जगह की बात अब यदि बड़े शहरों की बात करें तो वहां भी लोगों के ऑफिस एक तरफ होने के  बावजूद वे  सभी अलग अलग गाड़ी से जाते हैं और इस तरह पेट्रोल का खर्चा भी बढ़ता है और सड़कों पर वाहनों  की आवाजाही भी जो आज के समय में दुर्घटनाओं का मुख्य कारण है.
     अब आते है गैस के मुद्दे पर जबसे गाड़ियाँ गैस से चलने लगी हैं लोगों का सिलेंडर घर में खर्च होने के साथ साथ गाड़ी में भी लगने लगा है और गैस की आपूर्ति पर भी इसका बहुत फर्क पड़ा है.अब बहुत सी बार घर में चुल्हा जलने के लिए गैस मिलना मुश्किल हो गया है और सरकार के द्वारा गाड़ी के लिए अलग सिलेंडर उपलब्ध करने के बजूद घरेलू गैस ही इस कार्य में इस्तेमाल हो रही है.क्योंकि गाड़ी के लिए मिलने वाले सिलेंडर घरेलू गैस के मुकाबले ज्यादा महंगे होते हैं.
    हम हर कार्य में अपनी जिम्मेदारी से ये कहकर की ये सब हमारी जिम्मेदारी नहीं है अपना पल्ला नहीं झाड़ सकते क्योंकि हम भी इस सब के लिए उत्तरदायी हैं .आजकल ये स्थिति आ चुकी है की बच्चा पैदा बाद में होता है उसके हाथ में वाहन  पहले आ जाता है.व्यापार आरम्भ बाद में होता है और गोदाम में भण्डारण पहले आरम्भ हो जाता है क्या ये हमारी जिम्मेदारी नहीं है कि हम भी अपनी ऐसी आदतों पर अंकुश लगायें और देश में समस्याओं से निबटने में सरकार को सहयोग करें.
                              शालिनी कौशिक 

ब्लोगर सम्मान परम्परा का ढकोसला बंद कीजिये !'

Written By Shikha Kaushik on रविवार, 8 मई 2011 | 10:01 pm


'ब्लोगर सम्मान परम्परा का ढकोसला  बंद कीजिये !''
इस आलेख का जन्म वर्तमान में ब्लोगिंग जगत में चल रही ''ब्लोगर सम्मान समारोह परम्परा 'के प्रति मेरे मस्तिष्क में चल रही उधेड़-बुन से हुआ .सम्मान पाना सभी चाहते हैं और इसमें कोई बुराई भी नहीं है किन्तु ब्लॉग-जगत में जो भी सम्मान प्रदान किये गए उनका आधार क्या है ?इसकी कोई ठोस जानकारी तथाकथित सम्मान सम्मलेन आयोजित करने वालों ने अंतर्जाल पर नहीं डाली.आखिर क्या हैं ये आधार -

१-क्या किसी ब्लॉग के समर्थकों के आधार पर उसे सर्वश्रेठ ब्लोगर चुना जाता है ?

२-क्या ब्लॉग पर आने वाली टिप्पन्नियों की संख्या के आधार पर सर्वश्रेठ ब्लोगर का चुनाव होता है ?

३-आप किन ब्लोग्स को किस आधार पर सम्मान प्रदान करने हेतु विश्लेषण के लिए चुनते हैं?

४-नन्हे ब्लोगर का चयन किस आधार पर करते हैं जबकि सभी जानते हैं की नन्हे ब्लोगर स्वयं ब्लोग्स पर पोस्ट नहीं डालते उनके माता-पिता ही ये काम करते हैं ?

५-किसी बलोगर की टिपण्णी और ब्लोगर्स से श्रेठ है इसका क्या आधार है ?

६-ऐसा क्या खास है सम्मान पाने वाले ब्लोगर में जो उसे अन्य ब्लोगर से श्रेष्ठ  बनता है ?क्या उसकी लेखन क्षमता अन्य ब्लोगर्स से श्रेष्ठ है ?

७-ब्लोग्स को  किन किन kश्रेणियों  में बांटा गया -राजनैतिक,सामाजिक ,अथवा-साहित्यिक  विधा के आधार पर पर-कविता,कहानी,लघु कथा,आलेख आदि ?

                                    हो सकता है मेरा ज्ञान कम हो किन्तु मैंने सम्मान प्राप्त करने वालों की सोची तो देखी,फोटो भी देखे पर सम्मान किस आधार पर प्रदान किये गए इस सम्बन्ध में एक भी पोस्ट सम्मान आयोजित करने वालों की और से अंतर्जाल पर डाली गए हो मैंने नहीं पढ़ी  . 
                                   इस परम्परा में व्यापक परिवर्तन की जरूरत है .अभी से ही ब्लॉग जगत दो धडों में टूटता नज़र आ रहा है .मेरी समझ में नहीं आता की आखिर सम्मान की जरूरत क्या है ?मैं तो जिस भी ब्लॉग पर जाती हूँ मुझे तो ख़ुशी होती है की यहाँ पर भी एक नया ब्लोगर अपनी समस्त दुनिया को अपनी नज़र से हमारे समक्ष रख रहा है .सम्मान तो सभी के विचारों का किया जाना चाहिए .ये क्या की इसके विचार उससे बेहतर है ?
                                    इस सन्दर्भ में ''ब्लोगर मीट ''बहुत उपयोगी हो सकती हैं .ये समाज व् राष्ट्र की समस्याओं को सुलझाने की दिशा में सार्थक पहल कर सकती हैं .हर ब्लोगर का सम्मान कीजिये-सम्मान समारोह द्वारा नहीं उसका उत्साहवर्धन करके .उसकी सोच को सराह्कर.
                               ''ये ब्लोगर बेस्ट है ''कहने से ही तो सम्मान नहीं होता ये परम्परा ब्लोगर्स के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के स्थान पर कटुता की खाई ही चौड़ी करेगी .ब्लोगिंग की बगिया को फूलों से महकने दे नफरत के कांटे निकाल फेकिये .सम्मान परम्परा सभी ब्लोगर आपस में एक दूजे के ब्लोग्स पर सार्थक व् सटीक टिपण्णी देकर निभा ही रहे हैं.सभी बेस्ट ब्लोगर हैं .सभी अच्छा लिख रहे हैं ,सभी अच्छी टिपण्णी कर रहे हैं ,सभी लघु कथाएं सार्थक मुद्दे उठा रही हैं .सभी कवितायेँ दिल को छू रही हैं और .....सभी का सम्मान हमारे ह्रदय में समान रूप से है .आगे जब भी कोई सम्मान समारोह हो आप उसका बहिष्कार करें.सम्मान प्राप्त करने के स्थान पर सभी को सम्मान देने की वकालत करें ऐसा मेरा आपसे अनुरोध है .क्या आप मुझसे सहमत नहीं ?
                                                    शिखा कौशिक 

Founder

Founder
Saleem Khan