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चेहरे बदल रहे हैं

Written By नीरज द्विवेदी on सोमवार, 19 दिसंबर 2011 | 12:12 pm


Image from funnnygalary.blogspot.com

बदल रहे हैं शायद लोगों के चेहरे बदल रहे हैं,
गिरगिट के रंगो संग उनके मोहरे बदल रहे हैं।

कभी प्यार इतना होता है कि दुनिया जोड़ रहे हैं,
कभी किसी बात पर रूठे तो रिश्ते तोड़ रहे हैं।

न जाने किन शर्तों पर जीने ..चेहरे बदल रहे हैं(Complete)

जीवन धारा

Written By नीरज द्विवेदी on गुरुवार, 24 नवंबर 2011 | 8:53 pm




अविरल चलती करती छल छल,
रखती सुख दुःख जीवन धारा।
स्वयं अकिंचन, भरती कण कण,
गति निर्मोही ये जीवन धारा॥

दैवीय रूप

Written By नीरज द्विवेदी on मंगलवार, 22 नवंबर 2011 | 7:59 pm



नयन भटकेनयन अटके,
देख एक सुंदर स्वरूप।
चित उछल उछल करता हलचल,
सम्मुख है अभिराम रूप॥

एक साधक

Written By नीरज द्विवेदी on सोमवार, 21 नवंबर 2011 | 10:03 pm



आज कोई साधक है मगन,
शायद बन रही है एक धुन।

खुद में मस्त हैअनजान है,
रचता काव्य का अभियान है,
मेरा झट से जा पहुँचा है मन,
उसके साथ है अविचल लगन॥

साथ ही दिखता बडा सानन्द है,
शायद सृष्टि का आनन्द है,
स्थान सुन्दर पर है निर्जन,
न जाने हो रहा है किसका वर्णन?

चाहता है शान्ति का ... एक साधक (Complete)
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पलकों की पीर

Written By नीरज द्विवेदी on शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2011 | 9:21 am



-- Image from google with thanks.
पलकों में बसी है पीर बहुत,
बरखा के आने की बारी है।
वो मुझमें रहती दूर बहुत,
ज्यों बादल पानी की यारी है।

एक आस


ये है एक अँधेरी रात,
थोड़े अनदेखे हालात।
एक दो दीप जले हैं,
थोड़ी होती है बरसात॥

कुछ खट्टी मीठी यादों के संग,
मैं चलता सारी रात।
बस एक आस के साथ,
कि शायद हो उनसे मुलाकात॥

दिन ढलतारातें आतीं हैं,
एक नयी सुबह के साथ।
सुख दुख संग संग रहते हैं,
जैसे बादल में बरसात॥

खूब भीड़ है शोर बहुत,
मैं सुनता सबके साज।
बस एक आस के साथ,
कहीं तो हो उनकी आवाज़॥

शायद हो उनसे मुलाकात

एक आस

हिंदी कविता प्रतियोगिता

Written By नीरज द्विवेदी on रविवार, 2 अक्टूबर 2011 | 10:54 am


Catch my post द्वारा आयोजित हिंदी कविता प्रतियोगिता में मैंने अपनी दो रचनायें भेजी है. कृपया लिंक पर जाकर उन्हें पढ़े और अगर पसंद आये तो LIKE button  पर क्लिक करना न भूलेंआपकी आलोचना भी वहीँ अपेक्षित है. आप अपने सभी मित्रो को भी ये लिंक भेज सकते हैं.
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Saleem Khan