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कोई गम क्यों नहीं ?

Written By mark rai on गुरुवार, 6 अक्टूबर 2011 | 3:05 pm

इन्तजार करना नहीं
अनुसरण का स्वभाव नहीं
कोई गिला शिकवा नहीं
कोई वादा भी नहीं
उपहास करना आदत नहीं
और सुनना भी नहीं
बहुत निराशा भी नहीं
ज्यादा आस भी नहीं
तब क्यों कुछ ठीक नहीं ?

बोझिल मन और भारी कदम है
लगता दिल में कोई गम है
कुछ तो हुआ है ?
जिंदगी ठहर सी गई है
उमंगें लुट सी गई हैं
गम होकर भी लगता ,
कोई गम नहीं
यही तो सबसे बड़ा गम है ,
कोई गम क्यों नहीं ?

अमन का पैग़ाम टी. वी. और सय्यद मुहम्मद मासूम साहब की वेबसाइट्स से क्यों नाराज़ हैं नफ़रत की फ़ज़ा बनाने वाले ?

Written By DR. ANWER JAMAL on रविवार, 10 जुलाई 2011 | 7:40 am

‘अमन का पैग़ाम‘ आज एक कसौटी की शक्ल अख्तियार कर चुका है। कोई भी नफ़रत फैलाने वाला इस ब्लॉग पर नहीं आता है और अगर आ भी जाए तो ‘अमन का पैग़ाम‘ के साथ दो क़दम भी नहीं चल पाता। बहुत बड़े समझे जाने वाले बहुत से नाम ऐसे हैं जो कि यहां कभी नज़र ही नहीं आए।
सय्यद मुहम्मद मासूम साहब को ब्लॉग जगत में एस. एम. मासूम के नाम से जाना जाता है। वह ख़ुद तो मुंबई में रहते हैं लेकिन उनका दिल जौनपुर में रहता है। जौनपुर से अपना ताल्लुक़ क़ायम रखने के लिए उन्होंने ब्लॉग भी बनाया है और एक वेबसाइट भी बनाई हुई है, जिन पर जौनपुर के मंदिर-मस्जिद से लेकर जौनपुर की मूली और मिठाई तक के बारे में जानकारी मिल जाती है।
इसके बावजूद ब्लॉग जगत में उनकी पहचान ‘अमन के पैग़ाम‘ की वजह से है।
हालांकि ब्लॉग तो उनके कई हैं
1.      हक़ और बातिल
2.      बेज़बान
3.      ब्लॉग संसार
और इसके अलावा कई वेबसाइट्स भी हैं  और यू ट्यूब पर अमन का पैग़ाम टी. वी. भी है।
इसके बावजूद जब भी जनाब मासूम साहब का नाम लिया जाता है तो उनके नाम के साथ ‘अमन का पैग़ाम‘ ब्लॉग ही याद आता है।
आखि़र इसकी वजह क्या है ?
यह जानने के लिए देखें निम्न लिंक :
http://www.hamarivani.com/user_profile.php?userid=692&blog_id=1001

तशरीफ़ लायें, हिंदी ब्लॉग जगत में पहली बार एक ‘नॉन स्टॉप मुशायरे‘ का सफ़ल आयोजन किया जा रहा है Mushayera

Written By DR. ANWER JAMAL on शनिवार, 16 अप्रैल 2011 | 11:41 am


  हिंदी ब्लॉग जगत में पहली बार एक ‘नॉन स्टॉप मुशायरे‘ का सफ़ल आयोजन किया जा रहा है और इसमें हिंदी ब्लॉग जगत की नामवर हस्तियां मंचासीन हैं। जिनमें सबसे पहले आये जनाब रूपचंदशास्त्री मयंक जी, उनके बाद शालिनी कौशिक जी तशरीफ़ लाईं और फिर जनाब कुंवर कुसुमेश जी जलवा अफ़रोज़ हुए। कवि राजेंद्र ‘तेला‘ जी भी आपको यहां मिलेंगे और ब्राह्मण पुत्री शिखा कौशिक जी भी अपनी रचनाओं के क़ीमती मोती यहां लुटा रही हैं। इन सभी के साथ यह बंदा भी आपको दिखेगा और एक ऐसा नाम भी आपको यहां दिखेगा जो पहली बार किसी साझा ब्लॉग में शामिल हुआ है। यह नाम है बहन ‘शन्नो जी‘ का। शन्नो जी फ़ेसबुक की एक मशहूर हस्ती हैं। उनकी काव्य रचनाएं अक्सर आपकी नज़र से गुज़रती रहती हैं। इसी के साथ लगातार स्थापित स्तरीय और उदीयमान, हर वर्ग के शायर और कवि रोज़ाना इस मंच पर स्थान ले रहे हैं। हरेक कवि और शायर का हम तहे-दिल से इस्तक़बाल करते हैं। 
आप भी इस ‘नॉन स्टॉप‘ मुशायरे में आमंत्रित हैं। आप अगर एक कवि या शायर हैं और आप भी इस मुशायरे में अपनी रचना पेश करना चाहते हैं तो अपनी ईमेल आईडी भेज दीजिए इस पते पर 
eshvani @gmail .com
एक सामईन अर्थात श्रोता के तौर पर तो बहरहाल आप सदा सादर आमंत्रित हैं ही। आपके सुझावों का भी स्वागत है। अगर आप अपने कमेंट के साथ कोई शेर या काव्य पंक्तियां भी दिया करें तो उससे मुशायरे में चार चांद लग जाएंगे।
...तो जनाब तशरीफ़ लायें, आने के लिए दरवाज़ा यह रहा : http://mushayera.blogspot.com/

दमकते सौन्दर्य के लिए अचूक नुस्खा Jadi buti cure

Written By DR. ANWER JAMAL on रविवार, 3 अप्रैल 2011 | 7:41 pm

नीम, अनार के छिलके, मेंहदी के सूखे पत्ते, आम्बा हल्दी, सभी को बराबर वज़न में लेकर कूट छान लें और ज़रुरत के मुताबिक सरसों के तेल में मिलकर चेहरे और पूरे बदन पर मलें और फिर एक घंटे बाद नहा लें. सारा बदन ही नहीं  बल्कि दिल तक गुलाब की तरह तारो ताज़ा हो जायेगा.

Founder

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Saleem Khan