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ऐ रसूल तबदीले कि़बला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on सोमवार, 6 मई 2019 | 6:10 am

ये वह लोग थे जो सिधार चुके जो कुछ कमा गए उनके लिए था और जो कुछ तुम कमाओगे तुम्हारे लिए होगा और जो कुछ वह कर गुज़रे उसकी पूछगछ तुमसे न होगी (141)
बाज़ अहमक़ लोग ये कह बैठेगें कि मुसलमान जिस कि़बले बैतुल मुक़द्दस की तरफ पहले से सजदा करते थे उस से दूसरे कि़बले की तरफ मुड़ जाने का क्या बाइस हुआ। ऐ रसूल तुम उनके जवाब में कहो कि पूरब पश्चिम सब ख़ुदा का है जिसे चाहता है सीधे रास्ते की तरफ हिदायत करता है (142)
और जिस तरह तुम्हारे कि़बले के बारे में हिदायत की उसी तरह तुम को आदिल उम्मत बनाया ताकि और लोगों के मुक़ाबले में तुम गवाह बनो और रसूल मोहम्मद तुम्हारे मुक़ाबले में गवाह बनें और (ऐ रसूल) जिस कि़बले की तरफ़ तुम पहले सज़दा करते थे हम ने उसको सिर्फ़ इस वजह से कि़बला क़रार दिया था कि जब कि़बला बदला जाए तो हम उन लोगों को जो रसूल की पैरवी करते हैं हम उन लोगों से अलग देख लें जो उलटे पाव फिरते हैं अगरचे ये उलट फेर सिवा उन लोगों के जिन की ख़ुदा ने हिदायत की है सब पर शाक़ ज़रुर है और ख़ुदा ऐसा नहीं है कि तुम्हारे ईमान नमाज़ को जो बैतुलमुक़द्दस की तरफ पढ़ चुके हो बरबाद कर दे बेशक ख़ुदा लोगों पर बड़ा ही रफ़ीक व मेहरबान है। (143)
ऐ रसूल कि़बला बदलने के वास्ते बेशक तुम्हारा बार बार आसमान की तरफ मुँह करना हम देख रहे हैं तो हम ज़रुर तुमको ऐसे कि़बले की तरफ फेर देगें कि तुम नेहाल हो जाओ अच्छा तो नमाज़ ही में तुम मस्जि़दे मोहतरम काबे की तरफ मुँह कर लो और ऐ मुसलमानों तुम जहाँ कही भी हो उसी की तरफ़ अपना मुँह कर लिया करो और जिन लोगों को किताब तौरेत वगै़रह दी गयी है वह बख़ूबी जानते हैं कि ये तबदील कि़बले बहुत बजा व दुरुस्त है और उस के परवरदिगार की तरफ़ से है और जो कुछ वह लोग करते हैं उस से ख़ुदा बेख़बर नही (144)
और अगर एहले किताब के सामने दुनिया की सारी दलीले पेश कर दोगे तो भी वह तुम्हारे कि़बले को न मानेंगें और न तुम ही उनके कि़बले को मानने वाले हो और ख़ुद एहले किताब भी एक दूसरे के कि़बले को नहीं मानते और जो इल्म (क़ुरान) तुम्हारे पास आ चुका है उसके बाद भी अगर तुम उनकी ख़्वाहिश पर चले तो अलबत्ता तुम नाफ़रमान हो जाओगे (145)
जिन लोगों को हमने किताब (तौरैत वग़ैरह) दी है वह जिस तरह अपने बेटों को पहचानते है उसी तरह तरह वह उस पैग़म्बर को भी पहचानते हैं और उन में कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जो दीदए व दानिस्ता {जान बुझकर} हक़ बात को छिपाते हैं (146)
ऐ रसूल तबदीले कि़बला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है बस तुम कहीं ्यक करने वालों में से न हो जाना (147)
और हर फरीक़ के वास्ते एक सिम्त है उसी की तरफ वह नमाज़ में अपना मुँह कर लेता है बस तुम ऐ मुसलमानों झगड़े को छोड़ दो और नेकियों मे उन से लपक के आगे बढ़ जाओ तुम जहाँ कहीं होगे ख़ुदा तुम सबको अपनी तरफ ले आऐगा बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (148)
और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक मक्का से) तो भी नमाज़ मे तुम अपना मुँह मस्जि़दे मोहतरम (काबा) की तरफ़ कर लिया करो और बेषक ये नया कि़बला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है (149)
और तुम्हारे कामों से ख़ुदा ग़ाफिल नही है और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक के मक्का से तो भी) तुम (नमाज़ में) अपना मुँह मस्जि़दे हराम की तरफ कर लिया करो और तुम जहाँ कही हुआ करो तो नमाज़ में अपना मुँह उसी काबा की तरफ़ कर लिया करो (बार बार हुक्म देने का एक फायदा ये है ताकि लोगों का इल्ज़ाम तुम पर न आने पाए मगर उन में से जो लोग नाहक़ हठधर्मी करते हैं वह तो ज़रुर इल्ज़ाम देगें) तो तुम लोग उनसे डरो नहीं और सिर्फ़ मुझसे डरो और (दूसरा फ़ायदा ये है) ताकि तुम पर अपनी नेअमत पूरी कर दूँ (150)

,राजस्थान में पिछली वसुंधरा सरकार द्वारा सिविल क्रिमनल संशोधन नियम में कोर्ट फीस की बेहिसाब वृद्धि की है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 5 मई 2019 | 7:53 am

राजस्थान में इन्साफ के प्रबंधन व्यवस्था के सिरमौर ,लोकप्रिय न्यायाधिपति मुख्य न्यायधीश श्रीपति रविंद्र भट्ट राजस्थान उच्च न्यायलय में मुख्य न्यायधिपति नियुक्त हुए है ,उनका शपथ ग्रहण समारोह 5 मई 2019 को प्रातः 11,,30 बजे राजभवन जयपुर में आयोजित किया गया है ,,शपथ ग्रहण यूँ तो रस्म है ,लेकिन राजस्थान के वकीलों और पक्षकारों के लिए इस शपथ ग्रहण समारोह में वकीलों के नेतृत्व की परीक्षा की घडी भी है ,,राजस्थान में पिछली वसुंधरा सरकार द्वारा सिविल क्रिमनल संशोधन नियम में कोर्ट फीस की बेहिसाब वृद्धि की है ,,जो राजस्थान में लागू होने के बाद ,,त्वरित ,सुलभ ,सस्ता न्याय प्रणाली के नारे के खिलाफ राजस्थान के वकीलों के कुछ नेतृत्व ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से गुहार लगाई थी ,,,इस मामले में मुख्यमंत्री के निर्देशों पर राजस्थान सरकार के अतिरिक्त सचिव ने एक पत्र भी कमेटी के गठन होने और निर्णय आने तक कोर्ट फीस वसूली के स्थगन बाबत मुख्य सचिव विधि विभाग को लिखा था ,,लेकिन उक्त वसूली आज भी जारी है ,इस मामले में राजस्थान बार कौंसिल से जुड़े सभी निर्वाचित लोग प्रयास करते रहे है ,लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला ,,,पांच मई कहने को तो राजस्थान के मुख्य न्यायधिपति का शपथ ग्रहण है ,,लेकिन राजस्थान के वकीलों के नेतृत्व के लिए परीक्षा की घड़ी इसलिए बन गयी है ,,के उक्त शपथ ग्रहण समारोह में बार कौंसिल के पदाधिकारी भी निमंत्रित है ,स्थान राजभवन होगा ,जहाँ राज्यपाल महोदय भी होंगे ,,जहाँ मुख्य न्यायाधिपति महोदय सहित अन्य न्याधिपति भी होंगे ,,जहाँ सरकार के अधिकारी और मंत्री भी मौजूद होंगे ,,ऐसे में जो पत्र 25 फरवरी को सिविल क्रिमनल रूल करने बाबत राजस्थान सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा लिखा गया है वोह एक निर्देश है ,,एक प्रार्थना है , या सिर्फ एक कागज़ का टुकड़ा ,है इस बारे में भी वकीलों का नेतृत्व गेट टू गेदर में बात कर सकते है ,वकीलों की समस्या चाहे एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को पारित करने की मांग हो ,चाहे पक्षकारों के हित में कोर्ट फीस स्थगन की मांग हो ,,राजस्थान के वकीलों के शीर्ष निर्वाचित नेतृत्व को इस अवसर पर उठाना ही चाहिए ऐसा वकील साथियों का मानना है ,,कोटा में इस मामले को लेकर दो बार कार्यस्थगन कर विरोध प्रदर्शन किया जा चूका है ,अभी हाल ही में एक मई को फिर कोटा के वकीलों ने अभिभाषक परिषद के अध्यक्ष दीपक मित्तल ,महासचिव ,योगेंद्र मिश्रा किट्टू ,,उपाध्यक्ष हरीश शर्मा ,सहित पूरी कार्यकारिणी के नेतृत्व में जिला कलेक्टर के माध्यम से एक ज्ञापन फिर प्रेषित किया है ,जबकि कोर्ट फ़ीस बढ़ाने के विरोध में ,कोर्ट फीस कम करने की मांग को लेकर ,राजस्थान में वकीलों पर हमलावर लोगों को कठोर सज़ा दिलवाने के लिए पूर्व में पेश किये गए ,,एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने के मामले में जंगी प्रदर्शन भी किया है ,,पहले भी वर्ष 1992 में राजस्थान में कोर्ट फ़ीस वृद्धि के खिलाफ कोटा के वकीलों ने ही आन्दोलन शुरू किया था फिर यह आंदोलन पुरे राजस्थान में चला ,,बाद में सरकार को वकीलों के आंदोलन के आगे झुकना पढ़ा और ,कोर्ट फीस वृद्धि गरीब पक्षकारों के हक़ में वापस लेना पढ़ी ,अब फिर अचानक वृद्धि की गयी कोर्ट फीस के खिलाफ आम जनता ,,पक्षकारों के हक़ में ,,अभिभाषक परिषद कोटा के अध्यक्ष दीपक मित्तल के नेतृत्व में वकीलों ने आंदोलन की अंगड़ाई ली है ,ताज्जुब है ,जिस सरकार को कोर्ट फीस वसूली से आमदनी होना है ,जिस सरकार के लिए कोर्ट फ़ीस वसूली होना है ,उस सरकार के मुख्यमंत्री के निर्देशों पर उनके अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा पत्र भी जारी कर दिया गया है ,,फिर भी उक्त कोर्ट फीस वसूली के बारे में कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है ,अब मौक़ा भी है ,दस्तूर भी है ,,आमंत्रण भी है ,मुलाक़ात का वक़्त भी है ,और खासकर सभी ज़िम्मेदारों का एक साथ एकत्रित रहने का मौक़ा भी है ,जबकि खुद मुख्य न्यायधिपति महोदय आदरणीय श्रीपति रविंद्र भट्ट का ,सस्ता ,सुलभ ,त्वरित ,निष्पक्ष ,निर्भीक न्याय दिलवाने का ऐतिहासिक स्वभाव भी है ,तो जनाब वकीलों के निर्वाचित नेतृत्व से गुज़ारिश है इस मौके पर ज़रुर गरीब पक्षकारों के लिए बढ़ी हुई कोर्ट फीस वृद्धि वापस लेने ,,स्थगित किये जाने ,,उपस्थित राज्यपाल महोदय ,,मंत्रियों से एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट ,,विधानसभा में पारित होने तक तुरंत अध्यादेश जारी कर इसे लागु करने की ज़िम्मेदारी आप लोगों की है इसलिए प्लीज़ ,,प्लीज़ ,,वैसे आप नेतृत्व पर पूरा भरोसा है ,आप रविवार पांच मई को ही इस समारोह के बाद आयोजित गेट तो गेदर में इन समस्याओं के समाधान मामले में सकारात्मक परिणाम हम साथियों तक पहुंचा देने ऐसा हमे आप नेतृत्व पर गर्व है ,,,,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

जान रखो कि ख़़ुदा ज़रुर सब कुछ सुनता (और) जानता है

और जिन औरतों को ताअय्युन मेहर और हाथ लगाए बगै़र तलाक़ दे दी जाए उनके साथ जोड़े रुपए वगै़रह से सुलूक करना लाजि़म है (241)
(ये भी) परहेज़गारों पर एक हक़ है इसी तरह ख़़ुदा तुम लोगों की हिदायत के वास्ते अपने एहक़ाम साफ़ साफ़ बयान फरमाता है (242)
ताकि तुम समझो (ऐ रसूल) क्या तुम ने उन लोगों के हाल पर नज़र नही की जो मौत के डर के मारे अपने घरों से निकल भागे और वह हज़ारो आदमी थे तो ख़़ुदा ने उन से फरमाया कि सब के सब मर जाओ (और वह मर गए) फिर ख़़ुदा न उन्हें जिन्दा किया बेशक ख़ुदा लोगों पर बड़ा मेहरबान है मगर अक्सर लोग उसका शुक्र नहीं करते (243)
और मुसलमानों ख़़ुदा की राह मे जिहाद करो और जान रखो कि ख़़ुदा ज़रुर सब कुछ सुनता (और) जानता है (244)
है कोई जो ख़़ुदा को क़र्जे़ हुसना दे ताकि ख़़ुदा उसके माल को उस के लिए कई गुना बढ़ा दे और ख़ुदा ही तंगदस्त करता है और वही कशायश देता है और उसकी तरफ सब के सब लौटा दिये जाओगे (245)
(ऐ रसूल) क्या तुमने मूसा के बाद बनी इसराइल के सरदारों की हालत पर नज़र नही की जब उन्होंने अपने नबी (शमूयेल) से कहा कि हमारे वास्ते एक बादशाह मुक़र्रर कीजिए ताकि हम राहे ख़़ुदा में जिहाद करें (पैग़म्बर ने) फ़रमाया कहीं ऐसा तो न हो कि जब तुम पर जिहाद वाजिब किया जाए तो तुम न लड़ो कहने लगे जब हम अपने घरों और अपने बाल बच्चों से निकाले जा चुके तो फिर हमे कौन सा उज़्र बाक़ी है कि हम ख़ुदा की राह में जिहाद न करें फिर जब उन पर जिहाद वाजिब किया गया तो उनमें से चन्द आदमियों के सिवा सब के सब ने लड़ने से मुँह फेरा और ख़़ुदा तो ज़ालिमों को खूब जानता है (246)
और उनके नबी ने उनसे कहा कि बेशक ख़़ुदा ने तुम्हारी दरख़्वास्त के (मुताबिक़ तालूत को तुम्हारा बादशाह मुक़र्रर किया (तब) कहने लगे उस की हुकूमत हम पर क्यों कर हो सकती है हालाकि सल्तनत के हक़दार उससे ज़्यादा तो हम हैं क्योंकि उसे तो माल के एतबार से भी फ़ारगुल बाली {ख़ुशहाली} तक नसीब नहीं (नबी ने) कहा ख़ुदा ने उसे तुम पर फज़ीलत दी है और माल में न सही मगर इल्म और जिस्म का फैलाव तो उस का ख़ुदा ने ज़्यादा फरमाया हे और ख़ुदा अपना मुल्क जिसे चाहें दे और ख़ुदा बड़ी गुन्जाइश वाला और वाकि़फ़कार है (247)
और उन के नबी ने उनसे ये भी कहा इस के (मिनाजानिब अल्लाह) बादशाह होने की ये पहचान है कि तुम्हारे पास वह सन्दूक़ आ जाएगा जिसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तसकीन दे चीजें और उन तब्बुरक़ात से बचा खुचा होगा जो मूसा और हारुन की औलाद यादगार छोड़ गयी है और उस सन्दूक को फ़रिश्ते उठाए होगें अगर तुम ईमान रखते हो तो बेशक उसमें तुम्हारे वास्ते पूरी निशानी है (248)
फिर जब तालूत लश्कर समैत (शहर ऐलिया से) रवाना हुआ तो अपने साथियों से कहा देखो आगे एक नहर मिलेगी इस से यक़ीनन ख़ुदा तुम्हारे सब्र की आज़माइश करेगा बस जो शख्स उस का पानी पियेगा वह मुझे (कुछ वास्ता) नही रखता और जो उस को नही चखेगा वह बेशक मुझ से होगा मगर हाँ जो अपने हाथ से एक (आधा चुल्लू भर के पी) ले तो कुछ हर्ज नही बस उन लोगों ने न माना और चन्द आदमियों के सिवा सब ने उस का पानी पिया ख़ैर जब तालूत और जो मोमिनीन उन के साथ थे नहर से पास हो गए तो (ख़ास मोमिनों के सिवा) सब के सब कहने लगे कि हम में तो आज भी जालूत और उसकी फौज से लड़ने की सकत नहीं मगर वह लोग जिनको यक़ीन है कि एक दिन ख़ुदा को मुँह दिखाना है बेधड़क बोल उठे कि ऐसा बहुत हुआ कि ख़ुदा के हुक्म से छोटी जमाअत बड़ी जमाअत पर ग़ालिब आ गयी है और ख़ुदा सब्र करने वालों का साथी है (249)
(ग़रज़) जब ये लोग जालूत और उसकी फौज के मुक़ाबले को निकले तो दुआ की ऐ मेरे परवरदिगार हमें कामिल सब्र अता फरमा और मैदाने जंग में हमारे क़दम जमाए रख और हमें काफिरों पर फतेह इनायत कर (250)

पुराने पत्रकार ,पुराने नेता ,सभी तो इनकी आवभगत में अपना फोटो का ब्लॉक सबसे पहले बनवाकर ले जाने की होड़ में लगे रहते थे

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शनिवार, 4 मई 2019 | 6:20 am

दोस्तों वहीद भाई की यह मुस्कुराती तस्वीर देखकर कुछ याद आया ,,पुराने पत्रकार ,पुराने नेता ,सभी तो इनकी आवभगत में अपना फोटो का ब्लॉक सबसे पहले बनवाकर ले जाने की होड़ में लगे रहते थे ,चुनाव के दिनों में वहीद भाई ,महालक्ष्मी ब्लॉक ,,के नाम से बिना रुके ,बिना आराम करे ,चौबीस घंटे की सेवा देते थे ,कलेक्टर हो ,सियासी पार्टी के प्रतिनिधि हो ,अख़बार वाले हो सभी तो ,,इनके साथ ,एक अनार सो बीमार वाली कहावत चरितार्थ किया करते थे ,,आप सभी को पता है ,एक युग था जब अखबारों में फोटो छापने के लिए ब्लॉक बनाना ज़रूरी हुआ करता था ,,कोटा में फोटो से ब्लॉक बनाने की मशीन ,सिर्फ महालक्ष्मी ब्लॉक वर्क्स ,रामपुरा कोतवाली के पास वहीद भाई की ही थी ,,कोटा में ही नहीं पुरे राजस्थान में त्वरित हु बहु साफ़ सुथरी तस्वीर का ब्लॉक बनाने में ,वहीद भाई को ही महारत हांसिल थी ,इसलिए दूर दराज़ के सरकारी विभागों के विज्ञापन ,,पोस्टरों के लिए भी ब्लॉक बनने इन वहीद भाई के पास ही आते थे ,,लकड़ी के गुट्टे पर ,एक विशेष पूर्व आदेशित निर्धारित साइज़ का फोटो एक सीसे की पट्टी पर तराश कर बनाया जाता ,फिर लकड़ी के गुट्टे पर ठोका जाता ,,कम्पोज़ हुए टाइप के पेज में खुसूसी सजावट के लिए ब्लॉक लगाया जाता था ,फोटो जो भी हो अगर छापना है तो पहले ब्लॉक बनना अनिवार्य था ,बस इसीलिए नेता जी हो ,समाज सेवक जी हो ,अख़बार वाले हो ,विज्ञापन दाता हो ,सरकार हो सभी महालक्ष्मी ब्लॉक के इर्द गिर्द इस उम्मीद में मंडराते देखे जाते थे ,हमारा ब्लॉक पहले बनकर तैयार हो जाए ,बढे बढे से बढे दैनिक अख़बार ,,नेताओ की सभाओ ,बढे कार्यक्रमों के बाद ब्लॉक बनने तक ,अख़बार का मेकअप पेज रोक लेते थे ,और फिर ब्लॉक आने के बाद ही ,सजावट के हुनर के साथ कम्पोज़ की हुई खबर में ,,यह फोटो का ब्लॉक लगाया जाता था ,जिसके बाद ही नेताजी ,,समाज सेवक जी ,अधिकारीयों के कार्यव्यवहार की तस्वीरें अख़बार में प्रकाशित हो सकती थी ,आपात स्थिति में इनके ब्लॉक निर्माण पर भी काफी चेकिंगे होती रही है ,लेकिन वहीद भाई तो वहीद भाई है ,,एक मुस्कुराहट ,सभी तकलीफे दूर ,,हंसो ,हँसाओ इनका स्वभाव ,हँसते हँसते काम करना ,,सभी लोगो को संतुष्ठ कर अतिरिक्त वक़्त निकालकर ,सभी के काम करना ,इनका हुनर रहा है ,,कल वहीद भाई अदालत में जब मिलने आए तो यूँ ही बातों बातों में पुरानी ट्रेडल संस्कृति से छपने वाले अख़बार की पत्रकारिता ,,धैर्य और संयम की लेखनी ,,निर्भीक ,,निष्पक्ष ,,पत्रकारिता के साथ ,,मेरे द्वारा रोज़ मर्रा लिखे जाने वाले कॉलम ,बेखौफ,,की भी याद ताज़ा हों गयी ,इस बेखौफ कॉलम से पत्रकारिता तो बेखौफ थी ,मज़लूम के लिए इन्साफ था ,लेकिन सभी अधिकारी ,सियासी नेता वगेरा के दिलों में इस ,बेखौफ ,कॉलम का खौफ छाया हुआ था उन्हें खौफ था ,कहीं ,,अकेला की क़लम से लिखित ,इस बेखौफ कॉलम की खबर वोह न बन जाए ,और फिर कहीं उन्हें नौकरी से निलंबित न होना पढ़ जाए ,क्योंकि उन दिनों पत्रकारिता ,,लेखन में ,छपाई में ,पिछड़ापन था ,,लेकिन क़लम वही थी ,सियाही वही थी ,बस लिखने वाले का मिजाज़ निर्भीक ,निष्पक्ष हुआ करता था ,अख़बार मालिकों का मिजाज़ व्यवसायिक नहीं ,,इन्साफ के लिए क्रन्तिकारी सेवक का हुआ करता था ,,चंद विज्ञापनों के खातिर उस वक़्त बढे संस्थानों के नाम को बचाने के लिए आपराधिक खबर में एक संस्थान कहकर खबर नहीं बना करती थी ,जो खबर छपती थी ,सरकारी जनसपर्क अधिकारी ,पुलिस सी आई डी ,,पुलिस का डी एस बी विभाग और दिल्ली का डी ऐ वी पी ,जयपुर का डी पी आर विभाग ,,अख़बार की कतरन संबंधित अधिकारीयों को आवश्यक रूप से भेजा करते थे ,उन पर जांच होती थी ,कार्यवाही होती थी ,,हालात यह थे के नेता ,,मंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस का टाइम देकर अख़बार वालों का इन्तिज़ार करते थे ,अधिकारी खुद फोन कर उनसे वक़्त लेकर उन्हें दफ्तर में बुलाकर खबर देते थे ,महीने में एक बार जनसम्पर्क अधिकारी के माध्यम से एक राब्ता हुआ करता था ,,लेकिन आज स्थित में बदलाव है ,आधुनिकता है ,,त्वरित प्रकाशन है ,बस नहीं है तो पत्रकारिता नहीं है ,नहीं है तो खबर नहीं है ,,अगर खबर कही है तो उसे दिल से सलाम ,दिल से सेल्यूट करने का जी करता है ,जनता को इंसाफ मिलता है ,,समाज में भी सुधार होता ,है ,,,सभी जानते है इन चुनाव में कितनी खबरे थी ,कितने सुबूत थे ,लेकिन क्या वोह खबरें प्रकाशित हुई ,क्या वोह इल्ज़ामात प्रतिपक्ष के नेताओं ने बतौर सबूत पेश कर पत्रकारों के समक्ष पत्रकारवार्ता बुलवा कर रखी ,,चुनाव में पार्टी के दफ्तरों में ,चुनाव के दफ्तरों में क्या हालात थे सभी ने देखे है ,लेकिन पत्रकारिता का वहीद भाई के कार्यकाल का वोह युग आज भी याद आता है और उस युग पर गर्व भी होता है ,जिस युग में ओमनारायण सक्सेना ,इन्द्रनारायण सक्सेना ,,भंवर शर्मा अटल ,,तिमिर भास्कर ,,स्वर्गीय पियूष जैन ,,लेखक प्रेम जी प्रेम ,,बजरंग सींह पांथी ,दादा मदन मदीर ,बाबू हीरा लाल जैन ,,आनंद लक्ष्मण खांडेकर ,,दिनेश दूबे ,,धीरेन्द्र राहुल ,,हीरालाल व्यास ,,रामचरण सितारा ,प्रमोद प्रीतम ,दिलीप शाह मधुप ,,शम्भू लाड़पुरी ,,मामा रूपनारायण पारीक ,,भंवर सिंह सोलंकी ,,महेंद्र नाथ चतुर्वेदी ,सीताशरण देवलिया ,,क़य्यूम अली ,, नरेश विजय वर्गीय ,,विजय नारायण सक्सेना, इंद्र दत्त स्वाधीन बी एम बांठिया ,,,पंडित रामानन्द पांडे ,गजेंद्र सिंह सोलंकी ,,मुझ सहित कई पत्रकार शामिल रहे है ,,जिनकी लेखनी ,जिनकी रिपोर्टिंग ,,जिनका सम्पादन आज सिर्फ यादगार ,सिर्फ यादगार सा लगता है , जो यादें वहीद भाई महालक्ष्मी ब्लॉकर्स ने पूरी कर दी ,आधुनिक युग में ,वहीद भाई ने भी खुद को बदल लिया अब वोह फ्लेक्स ,,,पोस्टर प्रिंटिंग का काम बखूबी करते है ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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ख़ुसूसन बीच वाली नमाज़ सुबह या ज़ोहर या अस्र की पाबन्दी करो

और जब तुम अपनी बीवियों को तलाक़ दो और उनकी मुद्दत पूरी होने को आए तो अच्छे उनवान से उन को रोक लो या हुस्ने सुलूक से बिल्कुल रुख़सत ही कर दो और उन्हें तकलीफ पहुँचाने के लिए न रोको ताकि (फिर उन पर) ज़्यादती करने लगो और जो ऐसा करेगा तो यक़ीनन अपने ही पर जु़ल्म करेगा और ख़ुदा के एहकाम को कुछ हँसी ठट्टा न समझो और ख़ुदा ने जो तुम्हें नेअमतें दी हैं उन्हें याद करो और जो किताब और अक़्ल की बातें तुम पर नाजि़ल की उनसे तुम्हारी नसीहत करता है और ख़ुदा से डरते रहो और समझ रखो कि ख़ुदा हर चीज़ को ज़रुर जानता है (231)
और जब तुम औरतों को तलाक़ दो और वह अपनी मुद्दत (इद्दत) पूरी कर लें तो उन्हें अपने शौहरो के साथ निकाह करने से न रोकों जब आपस में दोनों मिया बीवी शयरीयत के मुवाफिक़ अच्छी तरह मिल जुल जाएँ ये उसी शख्स को नसीहत की जाती है जो तुम में से ख़ुदा और रोजे़ आखे़रत पर ईमान ला चुका हो यही तुम्हारे हक़ में बड़ी पाकीज़ा और सफ़ाई की बात है और उसकी ख़ूबी ख़ुदा खूब जानता है और तुम (वैसा) नहीं जानते हो (232)
और (तलाक़ देने के बाद) जो शख्स अपनी औलाद को पूरी मुद्दत तक दूध पिलवाना चाहे तो उसकी ख़ातिर से माएँ अपनी औलाद को पूरे दो बरस दूध पिलाएँ और जिसका वह लड़का है उस बाप पर माओं का खाना कपड़ा दस्तूर के मुताबिक़ लाजि़म है किसी शख्स को ज़हमत नहीं दी जाती मगर उसकी गुन्जाइश भर न माँ का उस के बच्चे की वजह से नुक़सान गवारा किया जाए और न जिस का लड़का है उसका बाप का (बल्कि दस्तूर के मुताबिक़ दिया जाए) और अगर बाप न हो तो दूध पिलाने का हक़ उसी तरह वारिस पर लाजि़म है फिर अगर दो बरस के क़ब्ल माँ बाप दोनों अपनी मरज़ी और मशवरे से दूध बढ़ाई करना चाहें तो उन दोनों पर कोई गुनाह नहीं और अगर तुम अपनी औलाद को (किसी अन्ना से) दूध पिलवाना चाहो तो उस में भी तुम पर कुछ गुनाह नहीं है बशर्ते कि जो तुमने दस्तूर के मुताबिक़ मुक़र्रर किया है उन के हवाले कर दो और ख़ुदा से डरते रहो और जान रखो कि जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा ज़रुर देखता है (233)
और तुममें से जो लोग बीवियाँ छोड़ के मर जाएँ तो ये औरतें चार महीने दस रोज़ (इद्दा भर) अपने को रोके (और दूसरा निकाह न करें) फिर जब (इद्दे की मुद्दत) पूरी कर ले तो शरीयत के मुताबिक़ जो कुछ अपने हक़ में करें इस बारे में तुम पर कोई इल्ज़ाम नहीं है और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उस से ख़बरदार है (234)
और अगर तुम (उस ख़ौफ से कि शायद कोई दूसरा निकाह कर ले) इन औरतों से इशरतन निकाह की (कैद़ इद्दा) ख़ास्तगारी {उम्मीदवारी} करो या अपने दिलो में छिपाए रखो तो इसमें भी कुछ तुम पर इल्ज़ाम नहीं हैं (क्योंकि) ख़ुदा को मालूम है कि (तुमसे सब्र न हो सकेगा और) उन औरतों से निकाह करने का ख़्याल आएगा लेकिन चोरी छिपे से निकाह का वायदा न करना मगर ये कि उन से अच्छी बात कह गुज़रों (तो मज़ाएक़ा नहीं) और जब तक मुक़र्रर मियाद गुज़र न जाए निकाह का क़सद {इरादा} भी न करना और समझ रखो कि जो कुछ तुम्हारी दिल में है ख़ुदा उस को ज़रुर जानता है तो उस से डरते रहो और (ये भी) जान लो कि ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला बुर्दबार है (235)
और अगर तुम ने अपनी बीवियों को हाथ तक न लगाया हो और न महर मुअय्यन किया हो और उसके क़ब्ल ही तुम उनको तलाक़ दे दो (तो इस में भी) तुम पर कुछ इल्ज़ाम नहीं है हाँ उन औरतों के साथ (दस्तूर के मुताबिक़) मालदार पर अपनी हैसियत के मुआफिक़ और ग़रीब पर अपनी हैसियत के मुवाफिक़ (कपड़े रुपए वग़ैरह से) कुछ सुलूक करना लाजि़म है नेकी करने वालों पर ये भी एक हक़ है (236)
और अगर तुम उन औरतों का मेहर तो मुअय्यन कर चुके हो मगर हाथ लगाने के क़ब्ल ही तलाक़ दे दो तो उन औरतों को मेहर मुअय्यन का आधा दे दो मगर ये कि ये औरतें ख़ुद माफ कर दें या उन का वली जिसके हाथ में उनके निकाह का एख़्तेयार हो माफ़ कर दे (तब कुछ नही) और अगर तुम ही सारा मेहर बख्स दो तो परहेज़गारी से बहुत ही क़रीब है और आपस की बुज़ुर्गी को मत भूलो और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा ज़रुर देख रहा है (237)
और (मुसलमानों) तुम तमाम नमाज़ों की और ख़ुसूसन बीच वाली नमाज़ सुबह या ज़ोहर या अस्र की पाबन्दी करो और ख़ास ख़ुदा ही वास्ते नमाज़ में क़ुनूत पढ़ने वाले हो कर खड़े हो फिर अगर तुम ख़ौफ की हालत में हो (238)
और पूरी नमाज़ न पढ़ सको तो सवार या पैदल जिस तरह बन पड़े पढ़ लो फिर जब तुम्हें इत्मेनान हो तो जिस तरह ख़ुदा ने तुम्हें (अपने रसूल की मारफ़त इन बातों को सिखाया है जो तुम नहीं जानते थे (239)
उसी तरह ख़ुदा को याद करो और तुम में से जो लोग अपनी बीवियों को छोड़ कर मर जाएँ उन पर अपनी बीबियों के हक़ में साल भर तक के नान व नुफ्का {रोटी कपड़ा} और (घर से) न निकलने की वसीयत करनी (लाजि़म) है बस अगर औरतें ख़ुद निकल खड़ी हो तो जायज़ बातों (निकाह वगै़रह) से कुछ अपने हक़ में करे उसका तुम पर कुछ इल्ज़ाम नही है और ख़ुदा हर शैय पर ग़ालिब और हिक़मत वाला है (240)

छोड़ा काबुल मे और 20 साल बाद मेरे सरकार के समय यह सम्मान फिर हम को मिला

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शुक्रवार, 3 मई 2019 | 7:02 am

*"कल से हार और माला सूख रहा है समझ मे नही आता है किस को पहनाये?"*
*अमेरिकी विदेशमन्त्री Mike Pompeo का कहना है कि "यह अमेरिकी कूटनीति" की विजय है.*
*इनडोनेशिया का कहना है कि यह इनडोनेशिया का विजय है क्यों कि अभी सुरक्षा समिति का अध्यक्ष इनडोनेशिया है और यह उस के कोशिश का नतीजा है। इनडोनेशिया आतंकवाद ख़ूद झेल रहा है.*
*चीन कह रहा है कि इमरान खॉं से चीन के राष्ट्रपति से BRI forum मे बात चीत मे यह फ़ैसला लिया गया कि यूएन मे इस को अब oppose नही करना है.*
*फ़्रान्स कह रहा है यह मेरी जीत है.*
*कांग्रेस कह रही है यह डा० मनमोहन सिंह ने 2009 मे यूएन को प्रस्ताव भेजा था कि अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी कहो.यह कांग्रेस की जीत है.*
*आज बिजेपी के लोग कह रहे है हम को फूल माला पहनाओ, यह मेरी कूटनीति की जीत है। हम ने ही 1999 मे छोड़ा काबुल मे और 20 साल बाद मेरे सरकार के समय यह सम्मान फिर हम को मिला.*
*भगवान कह रहे है फूल माला हम को पहनाओ जिस अज़हर को मोदी ने surgical strike मे मारा था उस को हम फिर ज़िन्दा कर दिया. यह मेरी जीत है.*
*(Masood Azhar, a Pakistani national was released by BJP government in 1999. Azhar founded the JeM in January 2000, soon after his release from an Indian jail in exchange for 166 hostages of an Indian Airlines plane which was hijacked to Kandahar in Afghanistan during a flight from Kathmandu to New Delhi).*

कूए ग़ायब हो गये

*धूप सिपाही बन गई , सूरज थानेदार !*
*गरम हवाएं बन गईं , जुल्मी साहूकार !!*
:
शीतलता शरमा रही , कर घूँघट की ओट !
मुरझाई सी छांव है , पड़ रही लू की चोट !!
:
चढ़ी दुपहरी हो गया , कर्फ़्यू जैसा हाल !
घर भीतर सब बंद हैं , सूनी है चौपाल !!
:
लगता है जैसे हुए , सूरज जी नाराज़ !
आग बबूला हो रहे , गिरा रहे हैं गाज !!
:
तापमान यूँ बढ़ रहा , ज्यों जंगल की आग !
सूर्यदेव गाने लगे , फिर से दीपक राग !!
:
कूलर हीटर सा लगे , पंखा उगले आग !
कोयलिया कू-कू करे , उत अमवा के बाग़ !!
:
लिए बीजना हाथ में , दादी करे बयार !
कूलर और पंखा हुए , बिन बिजली बेकार !!
:
कूए ग़ायब हो गये , सूखे पोखर - ताल !
पशु - पक्षी और आदमी , सभी हुए बेहाल !!
:
धरती व्याकुल हो रही , बढ़ती जाती प्यास !
दूर अभी आषाढ़ है , रहने लगी उदास !!
:
सूरज भी औकात में , आयेगा उस रोज !
बरखा रानी आयगी , धरती पर जिस रोज !!
:
*पेड़ लगाओ पानी बचाओ , कहता सब संसार !*
*ये देख चेते नहीं ,तो इक दिन होगा बंटाधार !!!!*

तलाक़ (रजअई जिसके बाद रुजू) हो सकती है

ताकि तुम दुनिया और आखि़रत (के मामलात) में ग़ौर करो और तुम से लोग यतीमों के बारे में पूछते हैं तुम (उन से) कह दो कि उनकी (इसलाह दुरुस्ती) बेहतर है और अगर तुम उन से मिलजुल कर रहो तो (कुछ हर्ज) नहीं आखि़र वह तुम्हारें भाई ही तो हैं और ख़ुदा फ़सादी को ख़ैर ख़्वाह से (अलग ख़ूब) जानता है और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम को मुसीबत में डाल देता बेशक ख़ुदा ज़बरदस्त हिक़मत वाला है (220)
और (मुसलमानों) तुम मुशरिक औरतों से जब तक ईमान न लाएँ निकाह न करो क्योंकि मुशरिकीन औरत तुम्हें अपने हुस्नो जमाल में कैसी ही अच्छी क्यों न मालूम हो मगर फिर भी बंदा ए मोमिन उस से ज़रुर अच्छा है और मुशरिकीन जब तक ईमान न लाएँ अपनी औरतें उन के निकाह में न दो और मुशरिक तुम्हे कैसा ही अच्छा क्यो न मालूम हो मगर फिर भी ईमानदार औरत उस से ज़रुर अच्छी है और मुशरिकीन जब तक ईमान न लाएँ अपनी औरतें उन के निकाह में न दो और मुशरिक तुम्हें क्या ही अच्छा क्यों न मालूम हो मगर फिर भी बन्दा मोमिन उनसे ज़रुर अच्छा है ये (मुशरिक मर्द या औरत) लोगों को दोज़ख़ की तरफ बुलाते हैं और ख़ुदा अपनी इनायत से बहिश्त और बखि़्शश की तरफ बुलाता है और अपने एहकाम लोगों से साफ साफ बयान करता है ताकि ये लोग चेते (221)
(ऐ रसूल) तुम से लोग हैज़ के बारे में पूछते हैं तुम उनसे कह दो कि ये गन्दगी और घिन की बीमारी है तो (अय्यामे हैज़) में तुम औरतों से अलग रहो और जब तक वह पाक न हो जाएँ उनके पास न जाओ बस जब वह पाक हो जाएँ तो जिधर से तुम्हें ख़ुदा ने हुक्म दिया है उन के पास जाओ बेशक ख़ुदा तौबा करने वालो और सुथरे लोगों को पसन्द करता है तुम्हारी बीवियाँ (गोया) तुम्हारी खेती हैं (222)
तो तुम अपनी खेती में जिस तरह चाहो आओ और अपनी आइन्दा की भलाई के वास्ते (आमाल साके) पेशगी भेजो और ख़ुदा से डरते रहो और ये भी समझ रखो कि एक दिन तुमको उसके सामने जाना है और ऐ रसूल इमानदारों को नजात की ख़ुश ख़बरी दे दो (223)
और (मुसलमानों) तुम अपनी क़समों (के हीले) से ख़ुदा (के नाम) को लोगों के साथ सुलूक करने और ख़ुदा से डरने और लोगों के दरमियान सुलह करवा देने का मानेअ न ठहराओं और ख़ुदा सबकी सुनता और सब को जानता है (224)
तुम्हारी लग़ो {बेकार} क़समों पर जो बेइख़्तेयार ज़बान से निकल जाए ख़ुदा तुम से गिरफ़्तार नहीं करने का मगर उन कसमों पर ज़रुर तुम्हारी गिरफ़्त करेगा जो तुमने क़सदन {जान कर} दिल से खायीं हो और ख़ुदा बख्शने वाला बुर्दबार है (225)
जो लोग अपनी बीवियों के पास जाने से क़सम खायें उन के लिए चार महीने की मोहलत है बस अगर (वह अपनी क़सम से उस मुद्दत में बाज़ आए) और उनकी तरफ तवज्जो करें तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (226)
और अगर तलाक़ ही की ठान ले तो (भी) बेशक ख़ुदा सबकी सुनता और सब कुछ जानता है (227)
और जिन औरतों को तलाक़ दी गयी है वह अपने आपको तलाक़ के बाद तीन हैज़ के ख़त्म हो जाने तक निकाह सानी से रोके और अगर वह औरतें ख़ुदा और रोजे़ आखि़रत पर इमान लायीं हैं तो उनके लिए जाएज़ नहीं है कि जो कुछ भी ख़ुदा ने उनके रहम (पेट) में पैदा किया है उसको छिपाएँ और अगर उन के शौहर मेल जोल करना चाहें तो वह (मुद्दत मज़कूरा) में उन के वापस बुला लेने के ज़्यादा हक़दार हैं और शयरीयत के मुवाफिक़ औरतों का (मर्दों पर) वही सब कुछ हक़ है जो मर्दों का औरतों पर है हाँ अलबत्ता मर्दों को (फ़जीलत में) औरतों पर फौकि़यत ज़रुर है और ख़ुदा ज़बरदस्त हिक़मत वाला है (228)
तलाक़ (रजअई जिसके बाद रुजू) हो सकती है दो ही मरतबा है उसके बाद या तो शयरीयत के मवाफिक़ रोक ही लेना चाहिए या हुस्न सुलूक से (तीसरी दफ़ा) बिल्कुल रूख़सत और तुम को ये जायज़ नहीं कि जो कुछ तुम उन्हें दे चुके हो उस में से फिर कुछ वापस लो मगर जब दोनों को इसका ख़ौफ़ हो कि ख़ुदा ने जो हदें मुक़र्रर कर दी हैं उस को दोनो मिया बीवी क़ायम न रख सकेंगे फिर अगर तुम्हे (ऐ मुसलमानो) ये ख़ौफ़ हो कि यह दोनो खुदा की मुकर्रर की हुयी हदो पर क़ायम न रहेंगे तो अगर औरत मर्द को कुछ देकर अपना पीछा छुड़ाए (खुला कराए) तो इसमें उन दोनों पर कुछ गुनाह नहीं है ये ख़ुदा की मुक़र्रर की हुयी हदें हैं बस उन से आगे न बढ़ो और जो ख़ुदा की मुक़र्रर की हुयी हदों से आगे बढ़ते हैं वह ही लोग तो ज़ालिम हैं (229)
फिर अगर तीसरी बार भी औरत को तलाक़ (बाइन) दे तो उसके बाद जब तक दूसरे मर्द से निकाह न कर ले उस के लिए हलाल नही हाँ अगर दूसरा शौहर निकाह के बाद उसको तलाक़ दे दे तब अलबत्ता उन मिया बीबी पर बाहम मेल कर लेने में कुछ गुनाह नहीं है अगर उन दोनों को यह ग़ुमान हो कि ख़ुदा की हदों को क़ायम रख सकेंगें और ये ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुयी) हदें हैं जो समझदार लोगों के वास्ते साफ़ साफ़ बयान करता है (230)

बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया

Written By आपका अख्तर खान अकेला on गुरुवार, 2 मई 2019 | 6:28 am

जिन लोगों ने कुफ्र इख़्तेयार किया उन के लिये दुनिया की ज़रा सी जि़न्दगी ख़ूब अच्छी दिखायी गयी है और इमानदारों से मसखरापन करते हैं हालाकि क़यामत के दिन परहेज़गारों का दरजा उनसे (कहीं) बढ़ चढ़ के होगा और ख़ुदा जिस को चाहता है बे हिसाब रोज़ी अता फरमाता है (212)
(पहले) सब लोग एक ही दीन रखते थे (फिर आपस में झगड़ने लगे तब) ख़ुदा ने नजात से ख़ुशख़बरी देने वाले और अज़ाब से डराने वाले पैग़म्बरों को भेजा और इन पैग़म्बरों के साथ बरहक़ किताब भी नाजि़ल की ताकि जिन बातों में लोग झगड़ते थे किताबे ख़़ुदा (उसका) फ़ैसला कर दे और फिर अफ़सोस तो ये है कि इस हुक्म से इख़्तेलाफ किया भी तो उन्हीं लोगों ने जिन को किताब दी गयी थी और वह भी जब उन के पास ख़ुदा के साफ एहकाम आ चुके उसके बाद और वह भी आपस की शरारत से तब ख़ुदा ने अपनी मेहरबानी से (ख़ालिस) ईमानदारों को वह राहे हक़ दिखा दी जिस में उन लोगों ने इख़्तेलाफ डाल रखा था और ख़़ुदा जिस को चाहे राहे रास्त की हिदायत करता है (213)
क्या तुम ये ख़्याल करते हो कि बेह्श्ते में पहुँच ही जाओगे हालाकि अभी तक तुम्हे अगले ज़माने वालों की सी हालत नहीं पेश आयी कि उन्हें तरह तरह की तक़लीफों (फाक़ा कशी मोहताजी) और बीमारी ने घेर लिया था और ज़लज़ले में इस क़दर झिंझोडे़ गए कि आखि़र (आजि़ज़ हो के) पैग़म्बर और ईमान वाले जो उन के साथ थे कहने लगे देखिए ख़ुदा की मदद कब (होती) है देखो (घबराओ नहीं) ख़़ुदा की मदद यक़ीनन बहुत क़रीब है (214)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग पूछते हैं कि हम ख़ुदा की राह में क्या खर्च करें (तो तुम उन्हें) जवाब दो कि तुम अपनी नेक कमाई से जो कुछ खर्च करो तो (वह तुम्हारे माँ बाप और क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजो और परदेसियों का हक़ है और तुम कोई नेक सा काम करो ख़़ुदा उसको ज़रुर जानता है (215)
(मुसलमानों) तुम पर जिहाद फर्ज़ किया गया अगरचे तुम पर शाक़ ज़रुर है और अजब नहीं कि तुम किसी चीज़ (जिहाद) को नापसन्द करो हालाकि वह तुम्हारे हक़ में बेहतर हो और अजब नहीं कि तुम किसी चीज़ को पसन्द करो हालाॅकि वह तुम्हारे हक़ में बुरी हो और ख़ुदा (तो) जानता ही है मगर तुम नही जानते हो (216)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग हुरमत वाले महीनों की निस्बत पूछते हैं कि (आया) जिहाद उनमें जायज़ है तो तुम उन्हें जवाब दो कि इन महीनों में जेहाद बड़ा गुनाह है और ये भी याद रहे कि ख़़ुदा की राह से रोकना और ख़ुदा से इन्कार और मस्जिदुल हराम (काबा) से रोकना और जो उस के एहल है उनका मस्जिद से निकाल बाहर करना (ये सब) ख़ुदा के नज़दीक इस से भी बढ़कर गुनाह है और फि़तना परदाज़ी कुश्ती ख़़ून से भी बढ़ कर है और ये कुफ़्फ़ार हमेशा तुम से लड़ते ही चले जाएँगें यहाँ तक कि अगर उन का बस चले तो तुम को तुम्हारे दीन से फिरा दे और तुम में जो शख्स अपने दीन से फिरा और कुफ्ऱ की हालत में मर गया तो ऐसों ही का किया कराया सब कुछ दुनिया और आखे़रत (दोनों) में अकारत है और यही लोग जहन्नुमी हैं (और) वह उसी में हमेशा रहेंगें (217)
बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और ख़ुदा की राह में हिजरत की और जिहाद किया यही लोग रहमते ख़ुदा के उम्मीदवार हैं और ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (218)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग शराब और जुए के बारे में पूछते हैं तो तुम उन से कह दो कि इन दोनो में बड़ा गुनाह है और कुछ फायदे भी हैं और उन के फायदे से उन का गुनाह बढ़ के है और तुम से लोग पूछते हैं कि ख़ुदा की राह में क्या ख़र्च करे तुम उनसे कह दो कि जो तुम्हारे ज़रुरत से बचे यूँ ख़ुदा अपने एहकाम तुम से साफ़ साफ़ बयान करता है (219)
ताकि तुम दुनिया और आखि़रत (के मामलात) में ग़ौर करो और तुम से लोग यतीमों के बारे में पूछते हैं तुम (उन से) कह दो कि उनकी (इसलाह दुरुस्ती) बेहतर है और अगर तुम उन से मिलजुल कर रहो तो (कुछ हर्ज) नहीं आखि़र वह तुम्हारें भाई ही तो हैं और ख़ुदा फ़सादी को ख़ैर ख़्वाह से (अलग ख़ूब) जानता है और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम को मुसीबत में डाल देता बेशक ख़ुदा ज़बरदस्त हिक़मत वाला है (220)

बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया

Written By आपका अख्तर खान अकेला on बुधवार, 1 मई 2019 | 6:09 am

(ऐ रसूल) बनी इसराइल से पूछो कि हम ने उन को कैसी कैसी रौशन निशानियाँ दी और जब किसी शख्स के पास ख़ुदा की नेअमत (किताब) आ चुकी उस के बाद भी उस को बदल डाले तो बेषक़ ख़ुदा सख़्त अज़ाब वाला है (211)
जिन लोगों ने कुफ्र इख़्तेयार किया उन के लिये दुनिया की ज़रा सी जि़न्दगी ख़ूब अच्छी दिखायी गयी है और इमानदारों से मसखरापन करते हैं हालाकि क़यामत के दिन परहेज़गारों का दरजा उनसे (कहीं) बढ़ चढ़ के होगा और ख़ुदा जिस को चाहता है बे हिसाब रोज़ी अता फरमाता है (212)
(पहले) सब लोग एक ही दीन रखते थे (फिर आपस में झगड़ने लगे तब) ख़ुदा ने नजात से ख़ुशख़बरी देने वाले और अज़ाब से डराने वाले पैग़म्बरों को भेजा और इन पैग़म्बरों के साथ बरहक़ किताब भी नाजि़ल की ताकि जिन बातों में लोग झगड़ते थे किताबे ख़़ुदा (उसका) फ़ैसला कर दे और फिर अफ़सोस तो ये है कि इस हुक्म से इख़्तेलाफ किया भी तो उन्हीं लोगों ने जिन को किताब दी गयी थी और वह भी जब उन के पास ख़ुदा के साफ एहकाम आ चुके उसके बाद और वह भी आपस की शरारत से तब ख़ुदा ने अपनी मेहरबानी से (ख़ालिस) ईमानदारों को वह राहे हक़ दिखा दी जिस में उन लोगों ने इख़्तेलाफ डाल रखा था और ख़़ुदा जिस को चाहे राहे रास्त की हिदायत करता है (213)
क्या तुम ये ख़्याल करते हो कि बेह्श्ते में पहुँच ही जाओगे हालाकि अभी तक तुम्हे अगले ज़माने वालों की सी हालत नहीं पेश आयी कि उन्हें तरह तरह की तक़लीफों (फाक़ा कशी मोहताजी) और बीमारी ने घेर लिया था और ज़लज़ले में इस क़दर झिंझोडे़ गए कि आखि़र (आजि़ज़ हो के) पैग़म्बर और ईमान वाले जो उन के साथ थे कहने लगे देखिए ख़ुदा की मदद कब (होती) है देखो (घबराओ नहीं) ख़़ुदा की मदद यक़ीनन बहुत क़रीब है (214)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग पूछते हैं कि हम ख़ुदा की राह में क्या खर्च करें (तो तुम उन्हें) जवाब दो कि तुम अपनी नेक कमाई से जो कुछ खर्च करो तो (वह तुम्हारे माँ बाप और क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजो और परदेसियों का हक़ है और तुम कोई नेक सा काम करो ख़़ुदा उसको ज़रुर जानता है (215)
(मुसलमानों) तुम पर जिहाद फर्ज़ किया गया अगरचे तुम पर शाक़ ज़रुर है और अजब नहीं कि तुम किसी चीज़ (जिहाद) को नापसन्द करो हालाकि वह तुम्हारे हक़ में बेहतर हो और अजब नहीं कि तुम किसी चीज़ को पसन्द करो हालाॅकि वह तुम्हारे हक़ में बुरी हो और ख़ुदा (तो) जानता ही है मगर तुम नही जानते हो (216)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग हुरमत वाले महीनों की निस्बत पूछते हैं कि (आया) जिहाद उनमें जायज़ है तो तुम उन्हें जवाब दो कि इन महीनों में जेहाद बड़ा गुनाह है और ये भी याद रहे कि ख़़ुदा की राह से रोकना और ख़ुदा से इन्कार और मस्जिदुल हराम (काबा) से रोकना और जो उस के एहल है उनका मस्जिद से निकाल बाहर करना (ये सब) ख़ुदा के नज़दीक इस से भी बढ़कर गुनाह है और फि़तना परदाज़ी कुश्ती ख़़ून से भी बढ़ कर है और ये कुफ़्फ़ार हमेशा तुम से लड़ते ही चले जाएँगें यहाँ तक कि अगर उन का बस चले तो तुम को तुम्हारे दीन से फिरा दे और तुम में जो शख्स अपने दीन से फिरा और कुफ्ऱ की हालत में मर गया तो ऐसों ही का किया कराया सब कुछ दुनिया और आखे़रत (दोनों) में अकारत है और यही लोग जहन्नुमी हैं (और) वह उसी में हमेशा रहेंगें (217)
बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और ख़ुदा की राह में हिजरत की और जिहाद किया यही लोग रहमते ख़ुदा के उम्मीदवार हैं और ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (218)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग शराब और जुए के बारे में पूछते हैं तो तुम उन से कह दो कि इन दोनो में बड़ा गुनाह है और कुछ फायदे भी हैं और उन के फायदे से उन का गुनाह बढ़ के है और तुम से लोग पूछते हैं कि ख़ुदा की राह में क्या ख़र्च करे तुम उनसे कह दो कि जो तुम्हारे ज़रुरत से बचे यूँ ख़ुदा अपने एहकाम तुम से साफ़ साफ़ बयान करता है (219)
ताकि तुम दुनिया और आखि़रत (के मामलात) में ग़ौर करो और तुम से लोग यतीमों के बारे में पूछते हैं तुम (उन से) कह दो कि उनकी (इसलाह दुरुस्ती) बेहतर है और अगर तुम उन से मिलजुल कर रहो तो (कुछ हर्ज) नहीं आखि़र वह तुम्हारें भाई ही तो हैं और ख़ुदा फ़सादी को ख़ैर ख़्वाह से (अलग ख़ूब) जानता है और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम को मुसीबत में डाल देता बेशक ख़ुदा ज़बरदस्त हिक़मत वाला है (220)

पेट की आग

Written By Bisari Raahein on मंगलवार, 30 अप्रैल 2019 | 8:03 pm

मौलिक रचना

कविता का शीर्षक - पेट की आग

तप रहा है
सूरज बहुत
आग रही
है बरस ।
जला रहा
सब कुछ
नहीं करता
कोई तरस ।
पशु-पक्षी भी
दुबके पड़े हैं
किसी न किसी
छाँव में ।
गली – नुक्कड़
सुन्न हैं सब
जैसे रहता ही
न हो कोई
गाँव में ।
मुंह – सिर
गमछे से लपेटे
वो चला रहा
कुदाल है ।
अपने आप से
बातें करता
विचारों का बुन रहा
जाल है ।
सोचता है कभी
सब कुछ छोड़
जाऊं भाग ....
पर
जानता है वो
“कायत”
ये आग तो कुछ नहीं
सबसे बड़ी होती है
पेट की आग.....

कृष्ण कायत
मंड़ी डबवाली ।

ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है

और बाज़ बन्दे ऐसे हैं कि जो दुआ करते हैं कि ऐ मेरे पालने वाले मुझे दुनिया में नेअमत दे और आखि़रत में सवाब दे और दोज़ख़ की आग से बचा (201)
यही वह लोग हैं जिनके लिए अपनी कमाई का हिस्सा चैन है (202)
और ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है और इन गिनती के चन्द दिनों तक (तो) ख़ुदा का जि़क्र करो फिर जो शख्स जल्दी कर बैठै और (मिना) से और दो ही दिन में चल ख़ड़ा हो तो उस पर भी गुनाह नहीं है और जो (तीसरे दिन तक) ठहरा रहे उस पर भी कुछ गुनाह नही लेकिन यह रियायत उसके वास्ते है जो परहेज़गार हो, और खु़दा से डरते रहो और यक़ीन जानो कि एक दिन तुम सब के सब उसकी तरफ क़ब्रों से उठाए जाओगे (203)
ऐ रसूल बाज़ लोग मुनाफिक़ीन से ऐसे भी हैं जिनकी चिकनी चुपड़ी बातें (इस ज़रा सी) दुनयावी जि़न्दगी में तुम्हें बहुत भाती है और वह अपनी दिली मोहब्बत पर ख़ुदा को गवाह मुक़र्रर करते हैं हालाकि वह तुम्हारे दुश्मनों में सबसे ज़्यादा झगड़ालू हैं (204)
और जहाँ तुम्हारी मोहब्बत से मुँह फेरा तो इधर उधर दौड़ धूप करने लगा ताकि मुल्क में फ़साद फैलाए और ज़राअत {खेती बाड़ी} और मवेषी का सत्यानास करे और ख़ुदा फसाद को अच्छा नहीं समझता (205)
और जब कहा जाता है कि ख़ुदा से डरो तो उसे ग़ुरुर गुनाह पर उभारता है बस ऐसे कम्बख़्त के लिए जहन्नुम ही काफ़ी है और बहुत ही बुरा ठिकाना है (206)
और लोगों में से ख़ुदा के बन्दे कुछ ऐसे हैं जो ख़़ुदा की (ख़ुशनूदी) हासिल करने की ग़रज़ से अपनी जान तक बेच डालते हैं और ख़ुदा ऐसे बन्दों पर बड़ा ही शफ़्क़्क़त वाला है (207)
ईमान वालों तुम सबके सब एक बार इस्लाम में (पूरी तरह ) दाखि़ल हो जाओ और शैतान के क़दम ब क़दम न चलो वह तुम्हारा यक़ीनी ज़ाहिर ब ज़ाहिर दुश्मन है (208)
फिर जब तुम्हारे पास रौशन दलीले आ चुकी उसके बाद भी डगमगा गए तो अच्छी तरह समझ लो कि ख़ुदा (हर तरह) ग़ालिब और तदबीर वाला है (209)
क्या वह लोग इसी के मुन्तजि़र हैं कि सफेद बादल के साय बानो की आड़ में अज़ाबे ख़ुदा और अज़ाब के फ़रिश्ते उन पर ही आ जाए और सब झगड़े चुक ही जाते हालाकि आखि़र कुल उमुर ख़़ुदा ही की तरफ रुजू किए जाएँगे (210)

मुझे गर्व है ,, मुझे खुशी है ,

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 28 अप्रैल 2019 | 7:08 am

मुझे गर्व है ,, मुझे खुशी है ,, मोदी सरकार के खिलाफ मेरे किसी आरोप का भक्तो के पास कोई तार्किक तथ्यात्मक जवाब नही मिला ,, मेरे हर वाजिब तहज़ीब की ज़ुबान में लिखे गए सवाल पर कुछ तंख़य्ये ,, कुछ समर्थक ,, कुछ की बोखलाहट रही ,,झुंझला कर इन लोगों ने भाषा मे भी अपना आपा खोया ,, बदतहजीबी के दायरे तोड़ दिए ,, मेरे हर सवाल के जवाब में सिर्फ इन्होंने बिना जवाब दिए , मेरी पार्टी के ,, देश के लिए शहीद होने वाले ,, त्याग करने वाले , महिला पुरुषों के लिए बेहुदा , अश्लील , तर्कविहीन टिप्पणियां की है जो इनकी परवरिश को झलकाती है , लेकिन यह मेरे भाई है ,, मुझे खुशी है कुछ ने इन्हें सुधारने के लिए आयना दिखाया , तो बहुत उन लोगो पर शर्मिंदगी भी हुई जो खुद को पार्टी के , पदाधिकारी , नेता बताकर अपना वर्चस्व दिखाते है , लेकिन उनके मुंह से इनके अपने नेताओं के लिए , अश्लील बेहुदा टिप्पणियों पर भी उफ्फ तक न निकली ,, क्योंकि यह लोग सही मायनों में ,,,,,?????अख्तर

फिर जब तुम अरक़ान हज बजा ला चुको तो तुम इस तरह जि़क्रे ख़ुदा करो जिस तरह तुम अपने बाप दादाओं का जि़क्र करते हो

और तुम उन (मुशरिकों) को जहाँ पाओ मार ही डालो और उन लोगों ने जहाँ (मक्का) से तुम्हें शहर बदर किया है तुम भी उन्हें निकाल बाहर करो और फितना परदाज़ी (शिर्क) खूँरेज़ी से भी बढ़ के है और जब तक वह लोग (कुफ़्फ़ार) मस्जि़द हराम (काबा) के पास तुम से न लडे़ तुम भी उन से उस जगह न लड़ों बस अगर वह तुम से लड़े तो बेखटके तुम भी उन को क़त्ल करो काफि़रों की यही सज़ा है (191)
फिर अगर वह लोग बाज़ रहें तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (192)
और उन से लड़े जाओ यहाँ तक कि फ़साद बाक़ी न रहे और सिर्फ़ ख़ुदा ही का दीन रह जाए फिर अगर वह लोग बाज़ रहे तो उन पर ज़्यादती न करो क्यांेकि ज़ालिमों के सिवा किसी पर ज़्यादती (अच्छी) नहीं (193)
हुरमत वाला महीना हुरमत वाले महीने के बराबर है (और कुछ महीने की खुसूसियत नहीं) सब हुरमत वाली चीजे़ एक दूसरे के बराबर हैं बस जो शख्स तुम पर ज़्यादती करे तो जैसी ज़्यादती उसने तुम पर की है वैसी ही ज़्यादती तुम भी उस पर करो और ख़ुदा से डरते रहो और खू़ब समझ लो कि ख़ुदा परहेज़गारों का साथी है (194)
और ख़ुदा की राह में ख़र्च करो और अपने हाथ जान हलाकत मे न डालो और नेकी करो बेशक ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता है (195)
और सिर्फ़ ख़ुदा ही के वास्ते हज और उमरा को पूरा करो अगर तुम बीमारी वगै़रह की वजह से मजबूर हो जाओ तो फिर जैसी क़ुरबानी मयस्सर आये (कर दो) और जब तक कु़रबानी अपनी जगह पर न पहुँय जाये अपने सर न मुँडवाओ फिर जब तुम में से कोई बीमार हो या उसके सर में कोई तकलीफ हो तो (सर मुँडवाने का बदला) रोजे़ या खै़रात या कु़रबानी है बस जब मुतमइन रहों तो जो शख्स हज तमत्तो का उमरा करे तो उसको जो कु़रबानी मयस्सर आये करनी होगी और जिस से कु़रबानी ना मुमकिन हो तो तीन रोजे़ ज़ामानए हज में (रखने होगें) और सात रोजे़ जब तुम वापस आओ ये पूरी दहाई है ये हुक्म उस शख्स के वास्ते है जिस के लड़के बाले मस्जि़दुल हराम (मक्का) के बाशिन्दे न हो और ख़ुदा से डरो और समझ लो कि ख़ुदा बड़ा सख़्त अज़ाब देने वाला है (196)
हज के महीने तो (अब सब को) मालूम हैं (शव्वाल, ज़ीक़ादा, जिलहज) बस जो शख्स इन महीनों में अपने ऊपर हज लाजि़म करे तो (एहराम से आखि़र हज तक) न औरत के पास जाए न कोई और गुनाह करे और न झगडे़ और नेकी का कोई सा काम भी करों तो ख़ुदा उस को खू़ब जानता है और (रास्ते के लिए) ज़ाद राह मुहिय्या करो और सब मे बेहतर ज़ाद राह परहेज़गारी है और ऐ अक़्लमन्दों मुझ से डरते रहो (197)
इस में कोई इल्ज़ाम नहीं है कि (हज के साथ) तुम अपने परवरदिगार के फज़ल (नफ़ा तिजारत) की ख़्वाहिश करो और फिर जब तुम अरफात से चल खड़े हो तो मशअरुल हराम के पास ख़ुदा का जिक्र करो और उस की याद भी करो तो जिस तरह तुम्हे बताया है अगरचे तुम इसके पहले तो गुमराहो से थे (198)
फिर जहाँ से लोग चल खड़े हों वहीं से तुम भी चल खड़े हो और उससे मग़फिरत की दुआ माँगों बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (199)
फिर जब तुम अरक़ान हज बजा ला चुको तो तुम इस तरह जि़क्रे ख़ुदा करो जिस तरह तुम अपने बाप दादाओं का जि़क्र करते हो बल्कि उससे बढ़ कर के फिर बाज़ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि ऐ मेरे परवरदिगार हमको जो (देना है) दुनिया ही में दे दे हालाकि (फिर) आखि़रत में उनका कुछ हिस्सा नहीं (200)

मै पप्पू हु (साल मे 52 बच्चे और सप्ताह मे एक बच्चे को जन्म )

Written By SACCHAI on शनिवार, 27 अप्रैल 2019 | 9:59 pm

मै पप्पू हु (साल मे 52 बच्चे और सप्ताह मे एक बच्चे को जन्म )

एक औरत 52 बच्चे साल मे और सप्ताह मे एक बच्चे को जन्म दे सकती है , अरे ये मै नहीं मगर ग्रेट ग्रेट सायंटिस्ट राहुल बाबा बोल रहे है अब राहुल गांधी कब क्या बोल दे कोई नहीं जानता यहाँ तक की उनको भी पता नहीं होता है की वो क्या बोल रहे है ..... खैर आलू से सोना बनाने की मशीन उन्होने तैयार कर ली है जिसके चलते और उसी मशीन के भरोसे वो कभी 72000 तो कभी 72000 करोड़ रुपये हर गरीब परिवार को देने की बात कर रहे है

https://www.youtube.com/watch?v=39My8xcT7iA

अपनी चुनावी सभा मे 52 बच्चे को एक साल मे जन्म दे सकती है एक महिला ऐसा कहा तब मानो मुझे ऐसा लगा की ये सायंटिस्ट नहीं मगर ........ आग्रा के पागलखाने से भागा कोई पागल तो नहीं बोल रहा ? क्या लंबी लंबी फेंकता है रे ........ और ताजुब्ब की बात ये है की ये कभी अपनी कोई बात का प्रमाण नहीं दे सकता फिर भी इसे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है

लगता है की 100 साल पुरानी पार्टी की ये अर्थी तैयार करके ही रहेगा कभी बताता है की पेंट और शर्ट मे पॉलिटिक्स है तो कभी कहेता है की मै पप्पू हु .......... 

खैर बाते तो होती रहेगी दोस्तो मगर उससे पहले ये वीडियो जरूर देखना और लाइक भी करना और हो सके तो चेनल को सबस्क्राइब करके बेल आइकॉन दबा ही देना




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वकील और आम आदमी की क़ानूनी जानकारी में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ है

वकील और आम आदमी की क़ानूनी जानकारी में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ है ,आम आदमी जज़्बात से चलता है ,जबकि वकील क़ानून ,,संविधान ,न्यायलयों की मर्यादाओं का ज्ञाता भी होता है और उनका मुहाफ़िज़ भी ,लेकिन आये दिन जज़्बात में बहकर सुप्रीमकोर्ट के फैसलों के खिलाफ ,संविधान की भावना ,न्यायिक व्यवस्था के खिलाफ जब वोह किसी आपराधिक मामले में पैरवी नहीं करने का फैसला लेता है तो अजीब सा लगता है ,कोई व्यक्ति अंतरात्मा की आवाज़ पर ऐसा फैसला ले तो समझ में आता है ,लेकिन अगर सामूहिक रूप संगठनात्मक अनुशासन में बाँध कर ऐसी व्यवस्था कर ,किसी विशेष मुक़दमे में पैरवी का बहिष्कार करने की घोषणा की जाए तो विधि सम्मत नहीं लगती ,,,,,,,,,,,,जज़्बात के हिसाब से ,मयादाओं के हिसाब से सामजिक सुधार के हिसाब से व्यक्तिगत व्यक्तिगत ऐसे फैसले लेना वाजिब है ,,,लेकिन क़ानूनी संस्थाए ऐसा किसी भी सूरत में नहीं कर सकती ,,देश का संविधान है ,,प्रत्येक व्यक्ति को आपराधिक मामले में उसके पसंद का वकील करने का अधिकार है ,क़ानूनी अधिकार है ,अगर वोह गरीब है तो ऐसे व्यक्ति को सरकारी खर्च पर ,,वकील दिया जाएगा ,,देश में हर ज़िले में ऐसे लोगो की पैरवी के लिए ,लीगल ऑथोरिटी के पेनल बने है ,,सुप्रीमकोर्ट ने बिना पैरवी के अधीनस्थ न्यायलय द्वारा दी गयी कई सज़ाओं के फैसले बदले है ,ऐसे में अगर हम ,,किसी सनसनीखेज़ ,,नृशंस हत्या के मामले में पैरवी नहीं करने का सामूहिक संस्थागत फैसला लेते है ,,तो ऐसा फैसला मुल्ज़िम को ही मदद करता है ,,होना यह चाहिए ,अपना विरोध जताने के लिए ,जो मृतक है उनको इंसाफ दिलाने के लिए ,,समाज को एक सबक़ दिखाने के लिए सामूहिक रूप से निशुल्क ऐसे मामले में फरियादी की कंसेंट लेकर ,,उसकी तरफ से ईमानदारी से पैरवी करने का फैसला लिया जाए ,अभियुक्त का वकील कोई भी हो यह उसकी नैतिकता का मामला है ,,लेकिन अगर हम उसे भी न्याय का पूरा संवैधानिक अधिकार देकर ,अपनी मज़बूत पैरवी करेंगे ,,गवाहों को सुरक्षा दिलवाएंगे ,गवाहों की विधिक मदद कर उनके बयांन दिलवाएंगे ,सफाई में जिरह के दौरान पूंछे जाने वाले सवालों के जवाब अग्रिम दिलवाएंगे ,,मुक़दमे की ठीक से पैरवी करेंगे तो हम ऐसे नृशंस हत्यारे को म्रत्युदंड दिलवाने में कामयाब हो सकेंगे ,किसी मुक़दमे के फैसले के बहिष्कार से हम अखबारों की सुर्खियां तो बन सकते है ,लेकिन दोस्तों हम वकील है ,,जानते है ,ऐसी पैरवी को क़ानूनी रूप से रोक भी नहीं सकते ,,सुप्रीमकोर्ट ने इसे अवमानना भी क़रार दिया है ,क्योंकि ऐसा करके हम उसके मुक़दमे में उसके न्यायमित्र को दबाव की बात कहने का मौक़ा दे रहे है ,तो फिर हो जाए सभी वकील भीमगंजमंडी कोटा के नृशंश हत्याकांड मामले में ज़मीर की आवाज़ सुनकर ,,मुल्ज़िम के खिलाफ फरियादी की तरफ से फरियादी को इंसाफ दिलाने और दोषी लोगों को एक व्यवस्थित विधिक ट्रायल के बाद फांसी के फंदे पर चढ़ाने ,स्पीडी ट्रायल करवाने का संकल्प ,लेंगे ,लेंगे ना ,ऐसा संकल्प ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

तौबा क़ुबूल की और तुम्हारी ख़ता से दर गुज़र किया

फिर जो सुन चुका उसके बाद उसे कुछ का कुछ कर दे तो उस का गुनाह उन्हीं लोगों की गरदन पर है जो उसे बदल डालें बेशक ख़ुदा सब कुछ जानता और सुनता है (181)
(हाँ अलबत्ता) जो शख्स वसीयत करने वाले से बेजा तरफ़दारी या बे इन्साफी का ख़ौफ रखता है और उन वारिसों में सुलह करा दे तो उस पर बदलने का कुछ गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (182)
ऐ ईमानदारों रोज़ा रखना जिस तरह तुम से पहले के लोगों पर फर्ज़ था उसी तरह तुम पर भी फर्ज़ किया गया ताकि तुम उस की वजह से बहुत से गुनाहों से बचो (183)
(वह भी हमेशा नहीं बल्कि) गिनती के चन्द रोज़ इस पर भी (रोज़े के दिनों में) जो शख्स तुम में से बीमार हो या सफर में हो तो और दिनों में जितने क़ज़ा हुए हो) गिन के रख ले और जिन्हें रोज़ा रखने की कू़वत है और न रखें तो उन पर उस का बदला एक मोहताज को खाना खिला देना है और जो शख्स अपनी ख़ुशी से भलाई करे तो ये उस के लिए ज़्यादा बेहतर है और अगर तुम समझदार हो तो (समझ लो कि फिदये से) रोज़ा रखना तुम्हारे हक़ में बहरहाल अच्छा है (184)
(रोज़ों का) महीना रमज़ान है जिस में क़ुरान नाजि़ल किया गया जो लोगों का रहनुमा है और उसमें रहनुमाई और (हक़ व बातिल के) तमीज़ की रौशन निषानियाँ हैं (मुसलमानों) तुम में से जो शख्स इस महीनें में अपनी जगह पर हो तो उसको चाहिए कि रोज़ा रखे और जो शख्स बीमार हो या फिर सफ़र में हो तो और दिनों में रोज़े की गिनती पूरी करे ख़ुदा तुम्हारे साथ आसानी करना चाहता है और तुम्हारे साथ सख़्ती करनी नहीं चाहता और (शुमार का हुक्म इस लिए दिया है) ताकि तुम (रोज़ो की) गिनती पूरी करो और ताकि ख़ुदा ने जो तुम को राह पर लगा दिया है उस नेअमत पर उस की बड़ाई करो और ताकि तुम शुक्र गुज़ार बनो (185)
(ऐ रसूल) जब मेरे बन्दे मेरा हाल तुमसे पूछे तो (कह दो कि) मै उन के पास ही हूँ और जब मुझसे कोई दुआ माँगता है तो मै हर दुआ करने वालों की दुआ (सुन लेता हूँ और जो मुनासिब हो तो) क़ुबूल करता हूँ बस उन्हें चाहिए कि मेरा भी कहना माने) और मुझ पर ईमान लाएँ (186)
ताकि वह सीधी राह पर आ जाए (मुसलमानों) तुम्हारे वास्ते रोज़ों की रातों में अपनी बीवियों के पास जाना हलाल कर दिया गया औरतें (गोया) तुम्हारी चोली हैं और तुम (गोया उन के दामन हो) ख़ुदा ने देखा कि तुम (गुनाह) करके अपना नुकसान करते (कि आँख बचा के अपनी बीबी के पास चले जाते थे) तो उसने तुम्हारी तौबा क़ुबूल की और तुम्हारी ख़ता से दर गुज़र किया बस तुम अब उनसे हम बिस्तरी करो और (औलाद) जो कुछ ख़ुदा ने तुम्हारे लिए (तक़दीर में) लिख दिया है उसे माँगों और खाओ और पियो यहाँ तक कि सुबह की सफेद धारी (रात की) काली धारी से आसमान पर पूरब की तरफ़ तक तुम्हें साफ नज़र आने लगे फिर रात तक रोज़ा पूरा करो और हाँ जब तुम मस्जि़दों में एतेकाफ़ करने बैठो तो उन से (रात को भी) हम बिस्तरी न करो ये ख़ुदा की (मुअय्युन की हुई) हदे हैं तो तुम उनके पास भी न जाना यूँ खुल्लम खुल्ला ख़ुदा अपने एहकाम लोगों के सामने बयान करता है ताकि वह लोग (नाफ़रमानी से) बचें (187)
और आबस में एक दूसरे का माल नाहक़ न खाओ और न माल को (रिश्वत में) हुक्काम के यहाँ झोंक दो ताकि लोगों के माल में से (जो) कुछ हाथ लगे नाहक़ ख़ुर्द बुर्द कर जाओ हालाकि तुम जानते हो (188)
(ऐ रसूल) तुम से लोग चाँद के बारे में पूछते हैं (कि क्यो घटता बढ़ता है) तुम कह दो कि इससे लोगों के (दुनयावी) अम्र और हज के अवक़ात मालूम होते है और ये कोई भली बात नही है कि घरो में पिछवाड़े से फाँद के) आओ बल्कि नेकी उसकी है जो परहेज़गारी करे और घरों में आना हो तो) उनके दरवाजो़ं की तरफ से आओ और ख़ुदा से डरते रहो ताकि तुम मुराद को पहुँचो (189)
और जो लोग तुम से लड़े तुम (भी) ख़ुदा की राह में उनसे लड़ो और ज़्यादती न करो (क्योंकि) ख़ुदा ज़्यादती करने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता (190)

कुछ माल छोड़ जाएं तो माँ बाप और क़राबतदारों के लिए अच्छी वसीयत करें जो ख़ुदा से डरते हैं उन पर ये एक हक़ है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019 | 6:41 am

और जब उन से कहा जाता है कि जो हुक्म ख़ुदा की तरफ से नाजि़ल हुआ है उस को मानो तो कहते हैं कि नहीं बल्कि हम तो उसी तरीक़े पर चलेंगे जिस पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया अगरचे उन के बाप दादा कुछ भी न समझते हों और न राहे रास्त ही पर चलते रहे हों (170)
और जिन लोगों ने कुफ्र एख़्तेयार किया उन की मिसाल तो उस शख्स की मिसाल है जो ऐसे जानवर को पुकार के अपना हलक़ फाड़े जो आवाज़ और पुकार के सिवा सुनता (समझता ख़ाक) न हो ये लोग बहरे गूँगे अन्धें हैं कि ख़ाक नहीं समझते (171)
ऐ ईमानदारों जो कुछ हम ने तुम्हें दिया है उस में से सुथरी चीज़ें (षौक़ से) खाओं और अगर ख़ुदा ही की इबादत करते हो तो उसी का शुक्र करो (172)
उसने तो तुम पर बस मुर्दा जानवर और खू़न और सूअर का गोश्त और वह जिस पर ज़िबह के वक़्त ख़ुदा के सिवा और किसी का नाम लिया गया हो हराम किया है बस जो शख्स मजबूर हो और सरकशी करने वाला और ज़्यादती करने वाला न हो (और उनमे से कोई चीज़ खा ले) तो उसपर गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (173)
बेशक जो लोग इन बातों को जो ख़ुदा ने किताब में नाजि़ल की है छुपाते हैं और उसके बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनयावी नफ़ा) ले लेतें है ये लोग बस अँगारों से अपने पेट भरते हैं और क़यामत के दिन ख़ुदा उन से बात तक तो करेगा नहीं और न उन्हें (गुनाहों से) पाक करेगा और उन्हीं के लिए दर्दनाक अज़ाब है (174)
यही लोग वह हैं जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही मोल ली और बख्शिश (ख़ुदा की) के बदले अज़ाब बस वह लोग दोज़ख़ की आग को क्योंकर बरदाश्त करेंगे (175)
ये इसलिए कि ख़ुदा ने बरहक़ किताब नाजि़ल की और बेशक जिन लोगों ने किताबे ख़ुदा में रद्दो बदल की वह लोग बड़े पल्ले दरजे की मुख़ालफत में हैं (176)
नेकी कुछ यही थोड़ी है कि नमाज़ में अपने मुँह पूरब या पश्चिम की तरफ़ कर लो बल्कि नेकी तो उसकी है जो ख़ुदा और रोज़े आखि़रत और फरिश्तों और ख़ुदा की किताबों और पैग़म्बरों पर ईमान लाए और उसकी उलफ़त में अपना माल क़राबत दारों और यतीमों और मोहताजो और परदेसियों और माँगने वालों और लौन्डी ग़ुलाम (के गुलू खलासी) में सर्फ करे और पाबन्दी से नमाज़ पढे़ और ज़कात देता रहे और जब कोई एहद किया तो अपने क़ौल के पूरे हो और फ़क्र व फाक़ा रन्ज और घुटन के वक़्त साबित क़दम रहे यही लोग वह हैं जो दावे ईमान में सच्चे निकले और यही लोग परहेज़गार है (177)
ऐ मोमिनों जो लोग (नाहक़) मार डाले जाएँ उनके बदले में तुम को जान के बदले जान लेने का हुक्म दिया जाता है आज़ाद के बदले आज़ाद और ग़ुलाम के बदले ग़ुलाम और औरत के बदले औरत बस जिस (क़ातिल) को उसके ईमानी भाई के़सास की तरफ से कुछ माफ़ कर दिया जाये तो उसे भी उसके क़दम ब क़दम नेकी करना और ख़ुश मआमलती से (ख़ून बहा) अदा कर देना चाहिए ये तुम्हारे परवरदिगार की तरफ आसानी और मेहरबानी है फिर उसके बाद जो ज़्यादती करे तो उस के लिए दर्दनाक अज़ाब है (178)
और ऐ अक़लमनदों केसास (के क़वाएद मुक़र्रर कर देने) में तुम्हारी जि़न्दगी है (और इसीलिए जारी किया गया है ताकि तुम खुनरेज़ी से) परहेज़ करो (179)
(मुसलमानों) तुम को हुक्म दिया जाता है कि जब तुम में से किसी के सामने मौत आ खड़ी हो बशर्ते कि वह कुछ माल छोड़ जाएं तो माँ बाप और क़राबतदारों के लिए अच्छी वसीयत करें जो ख़ुदा से डरते हैं उन पर ये एक हक़ है (180)

छोड़ दो इस गंदी आदत को

Written By Safat Alam Taimi on बुधवार, 24 अप्रैल 2019 | 1:45 pm

ऊपर वाले ने इंसानों को दूसरी सभी प्राणियों पर प्रधानता दी है, समझ बूझ दिया और चेतना प्रदान की है, इस बुद्धि द्वारा मनुष्य अच्छाई और बुराई, लाभ और हानि में अंतर कर सकता है। जबकि बुद्धि से वंचित इंसान जानवरों की सी हरकतें करने लगता है। बल्कि जानवर भी उससे बेहतर होते हैं, जो आदमी बुद्धि खो दे वह अपने घर, परिवार और समाज के लिए बोझ बन जाता है।
लेकिन विडंबना यह है कि आज की दुनिया जिसे सभ्य और प्रगतिशील दुनिया का नाम दिया जाता है, इस दुनिया में रहने वाले कितने तथाकथित सभ्य लोग पागलों की नक़्क़ाली करते हैं, शराब का सेवन और मदिरापान का उपयोग करके अपनी बुद्धि को अपने पैरों तले रौंदते हैं। फिर वे अपनी मानवता खो कर पशुओं जैसा व्यवहार करने लगते हैं, स्वयं पर नियंत्रण खो बैठते हैं, खुद को हानि पहुंचाते हैं, उनकी ज़ींदगी में उनके बच्चे अनाथ हो जाते और उनकी पत्नि विधवा हो जाती है। ऐसे लोग जीवन की पांच प्रमुख आवश्यकताओं का खून करते हैं, धर्म का खून करते हैं, माल बर्बाद करते हैं, इज़्ज़त का हनन करते हैं, उनके सामने माँ बहन और बेटी का कोई सम्मान नहीं होता, वह नशे में दरिंदे बन जाते हैं, उन्हें न अपनी जान की और न दूसरों की जान की परवाह होती है। वे स्वयं कों,अपने परिवार को और अपने समाज को नुकसान पहुंचाते हैं और परिवार पर बोझ बन जाते हैं।
दुनिया के अपराधियों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने शराब के नशे में धुत होकर बड़े बड़े अपराध किए हैं। लेकिन फिर भी शराबी स्वयं को सभ्य समझता है, यह मूर्खता नहीं तो और क्या है।?
शराबी शराब पी कर अपने शरीर को गंवाता है, अपने स्वास्थ्य का खून करता हैः
बी बी सी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि शराब हर तरीक़े से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और अधिक या कम पीने से कोई अंतर नहीं पड़ता।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि शराब से हर साल दुनिया भर में तीन मिलियन लोग मरते हैं।
दुनिया भर में मरने वाले लोगों में हर बीस में से एक व्यक्ति की मृत्यु का कारण शराब पीना होता है।
इस्लाम ने शराब को वर्जित ठहराया है। क़ुरआन ने कहाः
“ऐ ईमान लाने वालो! ये शराब और जुआ और देवस्थान और पाँसे तो गन्दे शैतानी काम है। अतः तुम इनसे अलग रहो, ताकि तुम सफल हो। शैतान तो बस यही चाहता है कि शराब और जुए के द्वारा तुम्हारे बीच शत्रुता और द्वेष पैदा कर दे और तुम्हें अल्लाह की याद से और नमाज़ से रोक दे, तो क्या तुम बाज़ न आओगे?।”
यह पहला मोक़ा था जब शराब के हराम होने का आदेश उतरा था, मदीना में उसकी घोषणा की जाती है, कि आज से शराब हराम कर दी गई, इतिहास गवाह है कि जब सहाबा के कानों तक शराब की निषेधता की आयतें पहुंचीं तो जिसने मुंह में जाम रखा था उगल दिया, अपने हाथ के गिलास को फेंक दिया और मटकों को बहा दिया यहाँ तक कि लगता था कि मदीना में बाढ़ आ चुका है। कोई इंटेलिजेंस नहीं है, कोई जांच एजेंसी नहीं है, कोई धमकी और सख्ती नहीं है, उन्होंने यह भी नहीं कहा कि पहले तहक़ीक़ कर लेते हैं, यह भी नहीं कहा कि इतना जल्द कैसे छोड़ दें कि हम सालों से इसके रसिया हैं।
जरा शराब को हराम ठहराने वाली उपर्युक्त आयत पर विचार करें कि कैसे शराब का उल्लेख देवस्थान और पाँसे के साथ किया जा रहा है, जो मूर्ति पूजा के काम हैं, इसी लिए तो शराब के बारे में कहा गया है: शराबी मूर्ति के पुजारी के जैसे है। फिर इसी आयत में कहा गया कि यह गंदी चीज़ है, अपवित्र चीज़ है। शैतानी प्रक्रिया है, इंसान ऐसा काम नहीं करता, फिर शराब छोड़ने पर सफलता की गारंटी दी गई और यह समझाया गया कि सफल लोग शराब नहीं पीते, शराबी असफल होते हैं, निकम्मे होते हैं। फिर शराब पीने को आपसी दुश्मनी और बैर, द्वेष और ईर्ष्या का कारण ठहराया गया जो प्रत्येक सांसारिक बुराइयों की जड़ है। इसी लिए शराब को भी उम्मुल ख़बाएस (सुनन नसाईः 5666) “बुराइयों की माँ” कहा गया है। क्यों कि जो शराबी बन गया उसमें उसके अलावा दूसरे हराम काम करने की हिम्मत पैदा हो जाती है। फिर कहा गया कि शराब के कारण शैतान अल्लाह के ज़िक्र और नमाज़ से रोकता है। अंत में अल्लाह ने कहाः क्या तुम बाज़ न आओगे? यानी इतने सारे नुकसान सुनने के बावजूद क्या अभी भी तुम शराब पीते रहोगे?
शराब और शराब से जुड़े दस व्यक्तियों पर अल्लाह ने लानत भेजी है: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः
अल्लाह लानत है शराब पर, शराब बनाने वाले पर, शराब पिलाने वाले पर, शराब बेचने वाले पर, शराब ख़रीदने वाले पर, उसे तैयार करने वाले पर, उसे तैयार करवाने वाले पर, उसे उठा कर ले जाने वाले और जिसकी ओर ले जाई जा रही है उन सब पर। (सुनन अबी दाऊदः3489)
मानो केवल शराब पीना ही हराम नहीं बल्कि जो जो उसके सहायक बनेंगे, या किसी पीने, बेचने, लेने देने या दिलवाने वाले क मदद करेंगे सभी अभिशाप के योग्य और पापी होंगे। वे लोग भी इसमें शामिल हैं जो शराब की दुकानों के लिए लाइसंस देते हैं और शराब के अड्डे खोलवाते हैं।
जो चीज़ अधिक मात्रा में नशा लाए उसके संबन्ध में इस्लाम का नियम यह है कि उसकी कम मात्रा भी हराम होगी चाहे उससे नशा आए या नहीं। मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः
“जिस चीज़ की अधिक मात्रा नशा लाए उसकी कम मात्रा भी हराम है।” (सुनन अबी दाऊदः3681)
उसी प्रकार कहाः “हर नशा लाने वाली चीज़ शराब है और हर शराब हराम है।” (सही मुस्लिमः 2003)
इस्लाम ने मात्र शराब को हराम नहीं ठहरा बल्कि जो लोग शराब पीते हैं ऐसे लोगों के लिए सख्त से सख्त सज़ा निर्धारित की, शराब पीने वाले की सज़ा 80 कोड़े तै किए गए हैं, यदि बार बार पीता है तो बार बार सज़ा मिलेगी, और इस्लाम में सज़ा सब के लिए बराबर है चाहे मालदार हो या ग़रीब।
अंत में हम शराब पीने वाले से अनुरोध करेंगे कि अल्लाह के लिए नशा का सेवन छोड़ दो, उन्हें मत देखो जो स्वयं को पढ़ा लिखा कहते हुए शराब पीते हैं सुन लो! वे जाहिल हैं, बुद्धिहीन हैं। अपनी जान पर दया करो, स्वास्थ्य बड़ी बहुमूल्य चीज़ है, पूरी सम्पत्ति लुटाकर भी दोबारा स्वास्थ्य लौटा नहीं सकते। अपनी संतान पर दया करो, अपनी पत्नी पर दया करो, अपने परिवार पर दया करो, अपने समाज पर दया करो और छोड़ दो इस गंदी आदत को।

कोटा एक विहंगम दृष्टि पुस्तक का विमोचन रिसर्च स्कॉलर एवं हाड़ौती के पर्यटन की दृष्टि से उपयोगी--धारीवाल

कोटा एक विहंगम दृष्टि पुस्तक का विमोचन
रिसर्च स्कॉलर एवं हाड़ौती के पर्यटन की दृष्टि से उपयोगी--धारीवाल
के.डी अब्बासी
कोटा 23 अप्रैल।
राजस्थान सरकार में स्वयतशासन मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने कहा कि कोटा एक विहंगम दृृृष्टि पुस्तक रिसर्च स्कॉलर एवं हाड़ौती के पर्यटन की दृष्टि से उपयोगी साबित होगी। यह विचार उन्होंने विश्व पुस्तक दिवस पर मंगलवार को अपने निवास पर पुस्तक का विमोचन कर व्यक्त किये। उन्होंने कहा इस तरह की पुस्तक का लेखन श्रम साध्य कार्य है और लेखक बधाई के पात्र है।
पुस्तक डॉ. प्रभात कुमार सिंघल सेवानिवृत
संयुक्त निदेशक,सूचना एवम जन सम्पर्क विभाग राजस्थान एवं अधिवक्ता अख्तर खान अकेला ने संयुक्त रूप से लिखी है। डॉ. सिंघल ने बताया कि यह पुस्तक एक जिला गजेटियर के रूप में है जिसमे ज़िले के इतिहास, भूगोल, संस्कृति, प्रशासनिक व्यवस्था एवम विकास को 2018 तक अद्यतन करने का प्रयास किया गया है।
प्रारम्भ में लेखकों ने नगरीय विकास मंत्री धारीवाल का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस अवसर पर डॉ. दीपक श्रीवास्तव ,अधीक्षक राजकीय मंडल पुस्तकालय ,वरिष्ठ पत्रकार नरेश विजय वर्गीय ,पत्रकार के डी अब्बासी सहित कई प्रबुद्ध लोग मौजूद थे

जब पेशवा लोग अपने पैरवो से अपना पीछा छुड़ाएगे

बेषक जिन लोगों नें कुफ्र एख़्तेयार किया और कुफ्र ही की हालत में मर गए उन्ही पर ख़ुदा की और फरिश्तो की और तमाम लोगों की लानत है हमेशा इसी फटकार में रहेंगे (161)
न तो उनके अज़ाब ही में तख़्फ़ीफ़ {कमी} की जाएगी (162)
और न उनको अज़ाब से मोहलत दी जाएगी और तुम्हारा माबूद तो वही यकता ख़ुदा है उस के सिवा कोई माबूद नहीं जो बड़ा मेहरबान रहम वाला है (163)
बेशक आसमान व ज़मीन की पैदाइश और रात दिन के रद्दो बदल कश्तियों (जहाज़ों) में जो लोगों के नफे़ की चीज़े (माले तिजारत वगै़रह दरिया) में ले कर चलते हैं और पानी में जो ख़ुदा ने आसमान से बरसाया फिर उस से ज़मीन को मुर्दा (बेकार) होने के बाद जिला दिया (शादाब कर दिया) और उस में हर कि़स्म के जानवर फैला दिये और हवाओं के चलाने में और अब्र में जो आसमान व ज़मीन के दरमियान ख़ुदा के हुक्म से घिरा रहता है (इन सब बातों में) अक़्ल वालों के लिए बड़ी बड़ी निशनियाँ हैं (164)
और बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो ख़़ुदा के सिवा औरों को भी ख़ुदा का मिसल व शरीक बनाते हैं (और) जैसी मोहब्बत ख़ुदा से रखनी चाहिए वैसी ही उन से रखते हैं और जो लोग ईमानदार हैं वह उन से कहीं बढ़ कर ख़ुदा की उलफ़त रखते हैं और काश ज़ालिमों को (इस वक़्त) वह बात सूझती जो अज़ाब देखने के बाद सूझेगी कि यक़ीनन हर तरह की क़ूवत ख़ुदा ही को है और ये कि बेशक ख़ुदा बड़ा सख़्त अज़ाब वाला है (165)
(वह क्या सख़्त वक़्त होगा) जब पेशवा लोग अपने पैरवो से अपना पीछा छुड़ाएगे और अपनी आखों से (चश्में ख़ुद) अज़ाब को देखेगें और उनके बाहमी ताल्लुक़ात टूट जाएँगे (166)
और पैरव कहने लगेंगे कि अगर हमें कहीं फिर (दुनिया में) पलटना मिले तो हम भी उन से इसी तरह अलग हो जायेंगे जिस तरह एैन वक़्त पर ये लोग हम से अलग हो गए यूँ ही ख़ुदा उन के आमाल को दिखाएगा जो उन्हें (सर तापा पास ही) पास दिखाई देंगें और फिर भला कब वह दोज़ख़ से निकल सकतें हैं (167)
ऐ लोगों जो कुछ ज़मीन में हैं उस में से हलाल व पाकीज़ा चीज़ (शौक़ से) खाओ और शैतान के क़दम ब क़दम न चलो वह तो तुम्हारा ज़ाहिर ब ज़ाहिर दुश्मन है (168)
वह तो तुम्हें बुराई और बदकारी ही का हुक्म करेगा और ये चाहेगा कि तुम बे जाने बूझे ख़ुदा पर बोहतान बाँधों (169)
और जब उन से कहा जाता है कि जो हुक्म ख़ुदा की तरफ से नाजि़ल हुआ है उस को मानो तो कहते हैं कि नहीं बल्कि हम तो उसी तरीक़े पर चलेंगे जिस पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया अगरचे उन के बाप दादा कुछ भी न समझते हों और न राहे रास्त ही पर चलते रहे हों (170)

बस तुम हमारी याद रखो तो मै भी तुम्हारा जि़क्र (खै़र) किया करु

Written By आपका अख्तर खान अकेला on मंगलवार, 23 अप्रैल 2019 | 6:10 am

और तीसरा फायदा ये है ताकि तुम हिदायत पाओ मुसलमानों ये एहसान भी वैसा ही है जैसे हम ने तुम में तुमही में का एक रसूल भेजा जो तुमको हमारी आयतें पढ़ कर सुनाए और तुम्हारे नफ़्स को पाकीज़ा करे और तुम्हें किताब क़ुरान और अक़्ल की बातें सिखाए और तुम को वह बातें बतांए जिन की तुम्हें पहले से खबर भी न थी (151)
बस तुम हमारी याद रखो तो मै भी तुम्हारा जि़क्र (खै़र) किया करुगाँ और मेरा शुक्रिया अदा करते रहो और नाशुक्री न करो (152)
ऐ ईमानदारों मुसीबत के वक़्त सब्र और नमाज़ के ज़रिए से ख़ुदा की मदद माँगों बेशक ख़ुदा सब्र करने वालों ही का साथी है (153)
और जो लोग ख़ुदा की राह में मारे गए उन्हें कभी मुर्दा न कहना बल्कि वह लोग जि़न्दा हैं मगर तुम उनकी जि़न्दगी की हक़ीकत का कुछ भी शऊर नहीं रखते (154)
और हम तुम्हें कुछ खौफ़ और भूख से और मालों और जानों और फलों की कमी से ज़रुर आज़माएगें और (ऐ रसूल) ऐसे सब्र करने वालों को खुशख़बरी दे दो (155)
कि जब उन पर कोई मुसीबत आ पड़ी तो वह (बेसाख़्ता) बोल उठे हम तो ख़ुदा ही के हैं और हम उसी की तरफ लौट कर जाने वाले हैं (156)
उन्हीं लोगों पर उनके परवरदिगार की तरफ से इनायतें हैं और रहमत और यही लोग हिदायत याफ़्ता है (157)
बेशक (कोहे) सफ़ा और (कोह) मरवा ख़ुदा की निशानियों में से हैं बस जो शख़्स ख़ानए काबा का हज या उमरा करे उस पर उन दोनो के (दरमियान) तवाफ़ (आमद ओ रफ्त) करने में कुछ गुनाह नहीं (बल्कि सवाब है) और जो शख़्स खुश खुश नेक काम करे तो फिर ख़ुदा भी क़द्रदान (और) वाकि़फ़कार है (158)
बेशक जो लोग हमारी इन रौशन दलीलों और हिदायतों को जिन्हें हमने नाजि़ल किया उसके बाद छिपाते हैं जबकि हम किताब तौरैत में लोगों के सामने साफ़ साफ़ बयान कर चुके हैं तो यही लोग हैं जिन पर ख़ुदा भी लानत करता है और लानत करने वाले भी लानत करते हैं (159)
मगर जिन लोगों ने (हक़ छिपाने से) तौबा की और अपनी ख़राबी की इसलाह कर ली और जो किताबे ख़ुदा में है साफ़ साफ़ बयान कर दिया बस उन की तौबा मै क़ुबूल करता हूँ और मै तो बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान हूँ (160)

पक्षकार और वकीलों को रोज़ परेशांन होना पढ़ रहा है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on सोमवार, 22 अप्रैल 2019 | 6:38 am

राजस्थान के न्यायालयों में वर्तमान राजस्थान सरकार द्वारा ,,संशोधित क्रिमनल ,सिविल रूल पर स्थगन के आदेश निर्देश के बावजूद भी ,,यहाँ न्यायलयों में बढ़ी हुई कोर्ट फीस वसूली की प्रक्रिया के खिलाफ राजस्थान के वकीलों के नेतृत्व द्वारा कोई कारगर क़दम नहीं उठाने से पक्षकार और वकीलों को रोज़ परेशांन होना पढ़ रहा है ,ज्ञातव्य रहे ,राजस्थान में पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में सिविल ,क्रिमनल संशोधन नियम पारित किये गये थे ,जिसके तहत कोर्ट फीस भी पचास गुना तक वृद्धि कर दी गयी ,,राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व सरकार के पारित निर्देशानुसार ,,हायकोर्ट और अधीनस्थ न्यायलय में बढ़ी हुई कोर्ट फीस वसूली जब शुरू की ,तो वकीलों की आँखे खुली और जयपुर सहित कई वकील संगठनों ने राजस्थान सरकार की नयी सरकार के मुखिया अशोक गहलोत को ज्ञापन देकर पक्षकारों पर पढ़े अतिरिक्त भार को रोकने के लिए कोर्ट फीस की वसूली रोकने की मांग की ,मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वकील और पक्षकारों की व्यथा सुनी और तत्काल एक कमेटी का गठन करने के निर्देश जारी कर ,कमेटी की रिपोर्ट आने तक सभी संशोधन पर स्थगन के निर्देश दिए ,,मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के उक्त निर्देशों के तहत ,राजस्थान सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव रवि शंकर श्रीवास्तव ने 25 फरवरी को प्रमुख शासन सचिव विधि विभाग राजस्थान श्री महावीर प्रसाद को उक्त ज्ञापनों का हवाला देते हुए उक्त संशोधन नियमों को स्थगन के निर्देश जारी कर औचित्य पूर्ण कार्यवाही कर सूचित करने के निर्देश भी दिए ,इस पत्र की प्रतिलिपि श्री राजेश शर्मा कर्नल अध्यक्ष दी बार एसोसिएशन जयपुर को भी भेजा ,अफ़सोस की बात यह है के उक्त पत्र जो 25 फरवरी को कोर्ट फीस स्थगन सहित सम्पूर्ण नियम स्थगन बाबत है ,उसकी पालना सुनिश्चित अभी तक नहीं है ,अफ़सोस यह भी है ,के जो लोग ज्ञापन देकर आये ,जिन लोगों के ज्ञापन पर यह आदेश हुए ,उन्होंने उक्त आदेशों के तहत फॉलोअप तक नहीं किया ,नतीजन पत्र जो सरकार का प्रमुख विधि सचिव के नाम निर्देश था वोह पत्र उनके द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंचाया गया भी या नहीं किसी ने जानकारी लेना तक उचित नहीं समझा ,,राजस्थान में एक मात्र कोटा अभिभाषक परिषद के तात्कालिक अध्यक्ष मनोजपुरी के नेतृत्व में बढ़ी हुई कोर्ट फीस की आलोचना कर वापस लेने की मांग को लेकर एक दिन की सांकेतिक हड़ताल भी रखी ,,अफ़सोस यह भी है के इस मामले में जब मेने पूर्व में एक राइट अप लिखा ,अतिरिक्त मुख्य सचिव रवि शंकर श्रीवास्तव से बात की ,विधि सचिव महावीर प्रसाद शर्मा से बात की ,फिर राजेश कर्नल जयपुर बार एसोसिशन के अध्यक्ष साहब से भी इस पत्र के आदेशों की क्रियान्वित का फॉलोअप करने की गुज़ारिश की लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया ,मेने बार कौंसिल वाईस चेयरमेन जनाब शाहीद हसन साहब को भी अवगत कराया ,,उन्होंने गंभीरता दिखाई ,राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से इस मामले में बात की ,लकिन रजिस्ट्रार जनरल हाईकोर्ट ने उन तक ऐसा कोई पत्र पहुंचने से इंकार किया ऐसा शाहिद हसन साहब ने वार्ता के बाद मुझे बताया ,,मेने बार कौंसिल सदस्य युवा तुर्क समस्याएं निर्भीकता से उठाने के लिए मशहूर भाई डॉक्टर महेश शर्मा से इस समस्या के समाधान के लिए ऑपरेशन करने का निवेदन किया ,,डॉक्टर महेश शर्मा साहब ने खुद इस मामले में प्रमुख विधि सचिव महावीर शर्मा साहब से बात की लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला ,,बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान के चेयरमेन की इस मामले में चुप्पी है ,,बारकोंसिलर भी इस मामले में बहुत सख्त कार्यवाही कर कोई कारगर क़दम नहीं उठा पाए है ,कोटा अभिभाषक परिषद के नवनियुक्त अध्यक्ष ,कार्यकारिणीं ने इस मामले में अलबत्ता जिला जज के मार्फत मुख्य न्यायधीश राजस्थान हाईकोर्ट को उक्त पत्र की प्रति भेजकर इसकी क्रियान्विति के निर्देश जारी करने की मांग दोहराई है ,,मेने लगातार माननीय राजस्थान हाईकोर्ट को कई ई मेल भेजकर कार्यवाही की मांग की है ,,डॉक्टर महेश शर्मा ,शाहिद हसन बार कौंसिलर भी इसके लिए प्रयासरत है ,लेकिन नतीजे के नाम पर सिफर है ,पता चला है इस मामले में अब राजस्थान के वकील एक मई को उदयपुर में एकत्रित होकर बढ़ी हुई कोर्ट फ़ीस रोकने के लिए आंदोलन की रुपरेखा तैयार करेंगे ,,मेरी एक बात समझ में नहीं आती ,,बढ़ी हुई कोर्ट फीस की आमदनी राजस्थान सरकार के लिए वसूली जा रही ,है ,,यह बढ़ी हुई कोर्ट फ़ीस राजस्थान सरकार के कोष में जमा हो रही है ,,और इसी राजस्थान सरकार ने 25 फरवरी को प्रमुख शासन सचिव विधि विभाग को ,इस के स्थगन के आदेश जारी किये है ,फिर प्रमुख शासन सचिव विधि विभाग ने यह आदेश अब तक राजस्थान हायकोर्ट को उचित मार्गदर्शन के लिए क्यों नहीं पहुंचाए ,,खेर सरकारी लापरवाही के तहत वोह पत्र राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी नहीं निभाई तो ,वकील साथियों को ,या जिनको इस आदेश की प्रतिलिपि भेजी गयी है वोह खुद इस लापरवाही की शिकायत के साथ संबंधित सरकार द्वारा लिखित स्थगन पत्र की प्रतिलिपि देकर मुख्यन्यायधीश महोदय से अब तक दो महीने गुज़रने के बाद भी क्यों नहीं मिल सके ,क्यों राजस्थान सरकार के इस स्थगन पत्र की क्रियान्विति नहीं करवा सके ,यह एक सवाल है ,जिसे राजस्थान के सभी वकील साथियों को सोचने की ज़रूरत है ,जिसे वोह समझ सके के वकीलों के हमदर्द नेतृत्व वकीलों की समस्याओं के समाधान के लिए कितने सक्रिय है ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

ऐ रसूल तबदीले कि़बला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है

ये वह लोग थे जो सिधार चुके जो कुछ कमा गए उनके लिए था और जो कुछ तुम कमाओगे तुम्हारे लिए होगा और जो कुछ वह कर गुज़रे उसकी पूछगछ तुमसे न होगी (141)
बाज़ अहमक़ लोग ये कह बैठेगें कि मुसलमान जिस कि़बले बैतुल मुक़द्दस की तरफ पहले से सजदा करते थे उस से दूसरे कि़बले की तरफ मुड़ जाने का क्या बाइस हुआ। ऐ रसूल तुम उनके जवाब में कहो कि पूरब पश्चिम सब ख़ुदा का है जिसे चाहता है सीधे रास्ते की तरफ हिदायत करता है (142)
और जिस तरह तुम्हारे कि़बले के बारे में हिदायत की उसी तरह तुम को आदिल उम्मत बनाया ताकि और लोगों के मुक़ाबले में तुम गवाह बनो और रसूल मोहम्मद तुम्हारे मुक़ाबले में गवाह बनें और (ऐ रसूल) जिस कि़बले की तरफ़ तुम पहले सज़दा करते थे हम ने उसको सिर्फ़ इस वजह से कि़बला क़रार दिया था कि जब कि़बला बदला जाए तो हम उन लोगों को जो रसूल की पैरवी करते हैं हम उन लोगों से अलग देख लें जो उलटे पाव फिरते हैं अगरचे ये उलट फेर सिवा उन लोगों के जिन की ख़ुदा ने हिदायत की है सब पर शाक़ ज़रुर है और ख़ुदा ऐसा नहीं है कि तुम्हारे ईमान नमाज़ को जो बैतुलमुक़द्दस की तरफ पढ़ चुके हो बरबाद कर दे बेशक ख़ुदा लोगों पर बड़ा ही रफ़ीक व मेहरबान है। (143)
ऐ रसूल कि़बला बदलने के वास्ते बेशक तुम्हारा बार बार आसमान की तरफ मुँह करना हम देख रहे हैं तो हम ज़रुर तुमको ऐसे कि़बले की तरफ फेर देगें कि तुम नेहाल हो जाओ अच्छा तो नमाज़ ही में तुम मस्जि़दे मोहतरम काबे की तरफ मुँह कर लो और ऐ मुसलमानों तुम जहाँ कही भी हो उसी की तरफ़ अपना मुँह कर लिया करो और जिन लोगों को किताब तौरेत वगै़रह दी गयी है वह बख़ूबी जानते हैं कि ये तबदील कि़बले बहुत बजा व दुरुस्त है और उस के परवरदिगार की तरफ़ से है और जो कुछ वह लोग करते हैं उस से ख़ुदा बेख़बर नही (144)
और अगर एहले किताब के सामने दुनिया की सारी दलीले पेश कर दोगे तो भी वह तुम्हारे कि़बले को न मानेंगें और न तुम ही उनके कि़बले को मानने वाले हो और ख़ुद एहले किताब भी एक दूसरे के कि़बले को नहीं मानते और जो इल्म (क़ुरान) तुम्हारे पास आ चुका है उसके बाद भी अगर तुम उनकी ख़्वाहिश पर चले तो अलबत्ता तुम नाफ़रमान हो जाओगे (145)
जिन लोगों को हमने किताब (तौरैत वग़ैरह) दी है वह जिस तरह अपने बेटों को पहचानते है उसी तरह तरह वह उस पैग़म्बर को भी पहचानते हैं और उन में कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जो दीदए व दानिस्ता {जान बुझकर} हक़ बात को छिपाते हैं (146)
ऐ रसूल तबदीले कि़बला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है बस तुम कहीं ्यक करने वालों में से न हो जाना (147)
और हर फरीक़ के वास्ते एक सिम्त है उसी की तरफ वह नमाज़ में अपना मुँह कर लेता है बस तुम ऐ मुसलमानों झगड़े को छोड़ दो और नेकियों मे उन से लपक के आगे बढ़ जाओ तुम जहाँ कहीं होगे ख़ुदा तुम सबको अपनी तरफ ले आऐगा बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (148)
और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक मक्का से) तो भी नमाज़ मे तुम अपना मुँह मस्जि़दे मोहतरम (काबा) की तरफ़ कर लिया करो और बेषक ये नया कि़बला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है (149)
और तुम्हारे कामों से ख़ुदा ग़ाफिल नही है और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक के मक्का से तो भी) तुम (नमाज़ में) अपना मुँह मस्जि़दे हराम की तरफ कर लिया करो और तुम जहाँ कही हुआ करो तो नमाज़ में अपना मुँह उसी काबा की तरफ़ कर लिया करो (बार बार हुक्म देने का एक फायदा ये है ताकि लोगों का इल्ज़ाम तुम पर न आने पाए मगर उन में से जो लोग नाहक़ हठधर्मी करते हैं वह तो ज़रुर इल्ज़ाम देगें) तो तुम लोग उनसे डरो नहीं और सिर्फ़ मुझसे डरो और (दूसरा फ़ायदा ये है) ताकि तुम पर अपनी नेअमत पूरी कर दूँ (150)

ऐसे लोगों के उद्देश्य को विफल करना चाहिए

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 21 अप्रैल 2019 | 7:55 am

देश में आम आदमी बेहूदगी ,बदज़ुबानी ,,राष्ट्रविरोधी ,संविधान विरोधी ,धर्म शालीनता विरोधी बयांन बाज़ी करे तो बहुत अजीब नहीं लगता ,लेकिन जब साधू ,संत ,साध्वी ,,मौलवी ,मौलाना ,,आलिमा ,,मुफ़्ती ,क़ाज़ी ,,ऐसे घटिया ,राष्ट्रविरोधी ,भावनाये आहत करने वाले बेहूदा बयान देने लगे तो देश के प्रत्येक नागरिक को अफ़सोस होना चाहिए और ऐसे लोगों के उद्देश्य को विफल करना चाहिए क्योंकि यह लोग धार्मिक नहीं खुद के लिए ,खुद की सियासी पार्टी के लिए यह धर्म के नाम पर अधर्म फैला रहे है ,इनसे सावधान होकर इनका सोशल बायकॉट करना चाहिए ,क्योंकि क़ानून ने तो ऐसे लोगों के मुखालिफ कार्यवाही करने के मामले में हाथों में चूढीयां पहन ली है ,,,खेर जनता एक दिन इस गंदगी को ऐसे गंदे लोगों की सियासत को धर्म के नाम पर अधर्म फैलाने वालों को सड़को पर ही निपटेगी ,क्योंकि अति हर अपराध के खात्मे की शुरुआत होती है ,,अख्तर

Founder

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Saleem Khan