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छोड़ दो इस गंदी आदत को

Written By safat alam taimi on बुधवार, 24 अप्रैल 2019 | 1:45 pm

ऊपर वाले ने इंसानों को दूसरी सभी प्राणियों पर प्रधानता दी है, समझ बूझ दिया और चेतना प्रदान की है, इस बुद्धि द्वारा मनुष्य अच्छाई और बुराई, लाभ और हानि में अंतर कर सकता है। जबकि बुद्धि से वंचित इंसान जानवरों की सी हरकतें करने लगता है। बल्कि जानवर भी उससे बेहतर होते हैं, जो आदमी बुद्धि खो दे वह अपने घर, परिवार और समाज के लिए बोझ बन जाता है।
लेकिन विडंबना यह है कि आज की दुनिया जिसे सभ्य और प्रगतिशील दुनिया का नाम दिया जाता है, इस दुनिया में रहने वाले कितने तथाकथित सभ्य लोग पागलों की नक़्क़ाली करते हैं, शराब का सेवन और मदिरापान का उपयोग करके अपनी बुद्धि को अपने पैरों तले रौंदते हैं। फिर वे अपनी मानवता खो कर पशुओं जैसा व्यवहार करने लगते हैं, स्वयं पर नियंत्रण खो बैठते हैं, खुद को हानि पहुंचाते हैं, उनकी ज़ींदगी में उनके बच्चे अनाथ हो जाते और उनकी पत्नि विधवा हो जाती है। ऐसे लोग जीवन की पांच प्रमुख आवश्यकताओं का खून करते हैं, धर्म का खून करते हैं, माल बर्बाद करते हैं, इज़्ज़त का हनन करते हैं, उनके सामने माँ बहन और बेटी का कोई सम्मान नहीं होता, वह नशे में दरिंदे बन जाते हैं, उन्हें न अपनी जान की और न दूसरों की जान की परवाह होती है। वे स्वयं कों,अपने परिवार को और अपने समाज को नुकसान पहुंचाते हैं और परिवार पर बोझ बन जाते हैं।
दुनिया के अपराधियों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने शराब के नशे में धुत होकर बड़े बड़े अपराध किए हैं। लेकिन फिर भी शराबी स्वयं को सभ्य समझता है, यह मूर्खता नहीं तो और क्या है।?
शराबी शराब पी कर अपने शरीर को गंवाता है, अपने स्वास्थ्य का खून करता हैः
बी बी सी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि शराब हर तरीक़े से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और अधिक या कम पीने से कोई अंतर नहीं पड़ता।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि शराब से हर साल दुनिया भर में तीन मिलियन लोग मरते हैं।
दुनिया भर में मरने वाले लोगों में हर बीस में से एक व्यक्ति की मृत्यु का कारण शराब पीना होता है।
इस्लाम ने शराब को वर्जित ठहराया है। क़ुरआन ने कहाः
“ऐ ईमान लाने वालो! ये शराब और जुआ और देवस्थान और पाँसे तो गन्दे शैतानी काम है। अतः तुम इनसे अलग रहो, ताकि तुम सफल हो। शैतान तो बस यही चाहता है कि शराब और जुए के द्वारा तुम्हारे बीच शत्रुता और द्वेष पैदा कर दे और तुम्हें अल्लाह की याद से और नमाज़ से रोक दे, तो क्या तुम बाज़ न आओगे?।”
यह पहला मोक़ा था जब शराब के हराम होने का आदेश उतरा था, मदीना में उसकी घोषणा की जाती है, कि आज से शराब हराम कर दी गई, इतिहास गवाह है कि जब सहाबा के कानों तक शराब की निषेधता की आयतें पहुंचीं तो जिसने मुंह में जाम रखा था उगल दिया, अपने हाथ के गिलास को फेंक दिया और मटकों को बहा दिया यहाँ तक कि लगता था कि मदीना में बाढ़ आ चुका है। कोई इंटेलिजेंस नहीं है, कोई जांच एजेंसी नहीं है, कोई धमकी और सख्ती नहीं है, उन्होंने यह भी नहीं कहा कि पहले तहक़ीक़ कर लेते हैं, यह भी नहीं कहा कि इतना जल्द कैसे छोड़ दें कि हम सालों से इसके रसिया हैं।
जरा शराब को हराम ठहराने वाली उपर्युक्त आयत पर विचार करें कि कैसे शराब का उल्लेख देवस्थान और पाँसे के साथ किया जा रहा है, जो मूर्ति पूजा के काम हैं, इसी लिए तो शराब के बारे में कहा गया है: शराबी मूर्ति के पुजारी के जैसे है। फिर इसी आयत में कहा गया कि यह गंदी चीज़ है, अपवित्र चीज़ है। शैतानी प्रक्रिया है, इंसान ऐसा काम नहीं करता, फिर शराब छोड़ने पर सफलता की गारंटी दी गई और यह समझाया गया कि सफल लोग शराब नहीं पीते, शराबी असफल होते हैं, निकम्मे होते हैं। फिर शराब पीने को आपसी दुश्मनी और बैर, द्वेष और ईर्ष्या का कारण ठहराया गया जो प्रत्येक सांसारिक बुराइयों की जड़ है। इसी लिए शराब को भी उम्मुल ख़बाएस (सुनन नसाईः 5666) “बुराइयों की माँ” कहा गया है। क्यों कि जो शराबी बन गया उसमें उसके अलावा दूसरे हराम काम करने की हिम्मत पैदा हो जाती है। फिर कहा गया कि शराब के कारण शैतान अल्लाह के ज़िक्र और नमाज़ से रोकता है। अंत में अल्लाह ने कहाः क्या तुम बाज़ न आओगे? यानी इतने सारे नुकसान सुनने के बावजूद क्या अभी भी तुम शराब पीते रहोगे?
शराब और शराब से जुड़े दस व्यक्तियों पर अल्लाह ने लानत भेजी है: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः
अल्लाह लानत है शराब पर, शराब बनाने वाले पर, शराब पिलाने वाले पर, शराब बेचने वाले पर, शराब ख़रीदने वाले पर, उसे तैयार करने वाले पर, उसे तैयार करवाने वाले पर, उसे उठा कर ले जाने वाले और जिसकी ओर ले जाई जा रही है उन सब पर। (सुनन अबी दाऊदः3489)
मानो केवल शराब पीना ही हराम नहीं बल्कि जो जो उसके सहायक बनेंगे, या किसी पीने, बेचने, लेने देने या दिलवाने वाले क मदद करेंगे सभी अभिशाप के योग्य और पापी होंगे। वे लोग भी इसमें शामिल हैं जो शराब की दुकानों के लिए लाइसंस देते हैं और शराब के अड्डे खोलवाते हैं।
जो चीज़ अधिक मात्रा में नशा लाए उसके संबन्ध में इस्लाम का नियम यह है कि उसकी कम मात्रा भी हराम होगी चाहे उससे नशा आए या नहीं। मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः
“जिस चीज़ की अधिक मात्रा नशा लाए उसकी कम मात्रा भी हराम है।” (सुनन अबी दाऊदः3681)
उसी प्रकार कहाः “हर नशा लाने वाली चीज़ शराब है और हर शराब हराम है।” (सही मुस्लिमः 2003)
इस्लाम ने मात्र शराब को हराम नहीं ठहरा बल्कि जो लोग शराब पीते हैं ऐसे लोगों के लिए सख्त से सख्त सज़ा निर्धारित की, शराब पीने वाले की सज़ा 80 कोड़े तै किए गए हैं, यदि बार बार पीता है तो बार बार सज़ा मिलेगी, और इस्लाम में सज़ा सब के लिए बराबर है चाहे मालदार हो या ग़रीब।
अंत में हम शराब पीने वाले से अनुरोध करेंगे कि अल्लाह के लिए नशा का सेवन छोड़ दो, उन्हें मत देखो जो स्वयं को पढ़ा लिखा कहते हुए शराब पीते हैं सुन लो! वे जाहिल हैं, बुद्धिहीन हैं। अपनी जान पर दया करो, स्वास्थ्य बड़ी बहुमूल्य चीज़ है, पूरी सम्पत्ति लुटाकर भी दोबारा स्वास्थ्य लौटा नहीं सकते। अपनी संतान पर दया करो, अपनी पत्नी पर दया करो, अपने परिवार पर दया करो, अपने समाज पर दया करो और छोड़ दो इस गंदी आदत को।
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