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श्री रामचन्द्र जी के साथ यह अन्याय क्यों?

Written By DR. ANWER JAMAL on सोमवार, 7 अप्रैल 2014 | 12:17 pm

चाय के ठेले पर विकास पुरूष

के बाद अब एक अहम सवाल
श्री रामचन्द्र जी के साथ यह अन्याय क्यों?
सांप्रदायिक तत्व धर्म के झंडे लेकर चलते हैं लेकिन मक़सद अपने पूरे करते हैं जो कि धर्म के खि़लाफ़ होते हैं। इसीलिए ये धार्मिक सत्पुरूषों को पीछे धकेलते रहते हैं।
राम मंदिर का मुददा गर्माने और भुनाने वाालों ने प्रधानमंत्री पद के लिए रामचन्द्र जी के वंश में से किसी का नाम आगे क्यों नहीं बढ़ाया?
क्या इन सांप्रदायिक तत्वों को श्री रामचन्द्र जी की सन्तान में कोई योग्य व्यक्ति ही नज़र नहीं आया या फिर उन्हें गुमनामी के अंधेरे में धकेलने वाले यही तत्व हैं?
रामकथा के अनुसार सारी धरती मनु को दी गई थाी और इसी उत्तराधिकार क्रम में यह श्री रामचन्द्र जी को मिली थी लेकिन आज उनके उत्तराधिकारी वंशजों के नाम दुनिया वाले तो क्या स्वयं भारत में उनके श्रद्धालु भी नहीं पहचानते।
श्री रामचन्द्र जी के साथ यह अन्याय क्यों?
यही बात मुसलमानों को भी समझ लेनी चाहिए कि उनके लीडर किसी दीनदार आलिम को अपना रहबर क्यों नहीं मान लेते?
इसके पीछे भी यही कारण है कि ये लीडर दीन के मक़सद को नहीं जो कि अमन और भाईचारा है बल्कि अपने लालच को पूरा करने में जुटे हुए हैं।
चुनाव का मौक़ा इन मौक़ापरस्तों को पहचानने का महापर्व होता है। जनता इन्हें अच्छी तरह पहचान रही है।

पैग़म्बर मुहम्मद साहब स. पर इस अनोखी किताब को शुद्ध हृदय से पढ़िए ताकि आप अपनी परेशानियों से मुक्ति पा सकें

Written By DR. ANWER JAMAL on शुक्रवार, 25 जनवरी 2013 | 12:01 pm

पैग़म्बर मुहम्मद साहब स. पर इस अनोखी किताब को शुद्ध हृदय से पढ़िए ताकि आप अपनी परेशानियों से मुक्ति पा सकें.
http://islaminhindi.blogspot.in/2010/04/book-prof-rama-krishna-rao.html

किया जा रहा है 'वास्तु' के नाम पर एक धोखा -Praveen Shah

Written By DR. ANWER JAMAL on मंगलवार, 2 अक्टूबर 2012 | 8:45 am

सुनिये मेरी भी....: किया जा रहा है एक धोखा, नाम 'वास्तु' है !...

आपके घर में रोशनी आये, हवा का आना जाना न रूके, बारिश व सीलन से घर बचा रहे व कीमती सामान सुरक्षित रहे... यदि आपका घर यह सब कर रहा है तो उसमें कोई वास्तु दोष नहीं... बेफिकर उसमें रहिये... जीवन की अपनी सफलताओं व विफलताओं व अपने आसपास के लोगों से अपने अच्छे-बुरे संबंधों के कारण अपने अंदर ढूंढिये... और कोई स्वयंभू वास्तु विशेषज्ञ यदि आपको फिर भी  घर के वास्तुदोष गिना रहा है तो आप सीना तान के उस से कहिये...
बंधु, 
कर रहे हो एक धोखा, तुम सबसे, नाम वास्तु है !
http://praveenshah.blogspot.com/2012/10/blog-post.html

उनकी पोस्ट पर हमारा विचार यह है-
विचार भी वास्तु मात्र हैं. घर-दूकान और वस्तुओं का वास्तु ठीक करने के बाद भी समस्या से नजात न मिले तो अपने विचार का वास्तु ठीक कर लीजिये आपकी समस्या दूर हो जायेगी.
आप चिंता, नफ़रत और ग़ुस्सा छोड़ दीजिये, आपके शरीर में फ़ालतू एसिड नहीं बनेगा. आप दुश्मनों को माफ़ कर दीजिये. आपका मन निर्मल हो जाएगा. साड़ी मनोग्रंथियाँ विलीन हो जायेंगी. आप लोगों से मुस्कुरा कर मिलें, हर जगह आपका स्वागत किया जाएगा. आप नौकरी कर रहे हैं तो स्किल्ड लेबर है. आप हमेशा तंगदस्त और क़र्ज़दार रहेंगे. ५० साल में आप जो बचायेंगे उसे आप से किसी अस्पताल में ५० दिन में ले लिया जाएगा. आप अपना छोटा सा बिजनेस शुरू करें. समय के साथ वह बढ़ता जाएगा और दो चार साल में ही आप धनवान हो जायेंगे.
यह सब तब होगा जब आप अपने विचार का वास्तु ठीक कर लेंगे.

हज यात्रियों को मिलेगा सउदी का सिमकार्ड

Written By DR. ANWER JAMAL on बुधवार, 29 अगस्त 2012 | 7:21 am

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इस साल हज पर जाने वाले भारतीय नागरिकों को पहली बार सउदी टेलीकॉम की ओर से सिमकार्ड बेहद किफायती  दर पर मुहैया कराया जाएगा। जेददा में भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने एक बयान में कहा कि इस सिमकार्ड के जरिए कॉल करने की दर पांच रियाल होगी, जबकि इनकमिंग मुफ्त होगी। इस सिमकार्ड में पहले से ही सभी संबंधित अधिकारियों और कुछ दूसरे महत्वपूर्ण नंबर भी होंगे। बयान में कहा गया है कि ये सिमकार्ड भारत में ही विभिन्न स्थानों पर दिए जाएंगे ताकि हज यात्रियों के परिवार के लोग ये नंबर पहले से ही जान सकें। महावाणिज्य दूतावास ने कहा कि भारतीय हज यात्रियों को पूरी सुविधा मुहैया कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। 
सौरसे : http://www.livehindustan.com/news/videsh/international/article1-Haj-Saudi-SIM-Cards-Indian-Haj-pilgrims-2-2-256582.html

राजगुरु जी की 104वी जयंती पर "हम अपने मन को निर्मल बनाकर जियें"

Written By DR. ANWER JAMAL on शुक्रवार, 24 अगस्त 2012 | 8:05 pm

आज 24 अगस्त है ... आज  राजगुरु जी की 104वी जयंती है ...

देश के लिए क़ुर्बान होने वाले वीरों के लिए "हिंदी ब्लोगर्स फोरम इंटरनेश्नल" की और से प्रेममय मनोभाव .
शिवराम हरि राजगुरु मराठी थे . उन्होंने हिन्दू धर्म-ग्रंन्थों तथा वेदों का अध्ययन तो किया ही लघु सिद्धान्त कौमुदी जैसे क्लिष्ट ग्रन्थ को भी बहुत कम आयु में ही कण्ठस्थ कर लिया था। वह छत्रपति शिवाजी की छापामार युद्ध-शैली के बड़े प्रशंसक थे.

इसके बावजूद वह क्षेत्रवाद और सांप्रदायिकता की भावना से ऊपर थे . अपने मन की संकीर्णता से मुक्ति पाना अंग्रेजों से मुक्ति पाने से भी ज़्यादा कठिन काम है. यह काम उन्होंने किया और हमारे लिए एक अच्छी मिसाल क़ायम की.
उनका जन्म 24 अगस्त 1908 को हुआ था. आज उनके जन्मदिन पर हम सब अपने मन को संकीर्णताओं से मुक्त करने का संकल्प लें.
उन्हें 23 मार्च 1931 को फाँसी पर लटका दिया गया था ।

जिन्हें फाँसी पर नहीं लटकाया गया, उनके काल के दूसरे सब भी मर चुके हैं. उन्हें फांसी देने वाला जल्लाद, जज और अंग्रेज़ सब मर गए हैं.

मौत सबको आनी है.  उन्हें आई है तो हमें भी आएगी.
हम अपने मन को निर्मल बनाकर जियें और बुराई से पवित्र हो कर मर जाएँ, तो हम सफल रहे.
यह एक लड़ाई हरेक आदमी अपने आप से लड़ ले तो हमारे देश की हर समस्या हल हो जायेगी.
वर्ना हिसाब लेने वाला एक प्रभु परमेश्वर तो हमारे सभी छिपे और खुले कामों का साक्षी है ही.
अपने शुभ अशुभ कर्मों को खुद हमें ही भोगना है.

सम्मान तो मिलेगा केवल 5 ब्लॉगर्स को अपमान आएगा बाक़ी सबके हिस्से में

Written By DR. ANWER JAMAL on सोमवार, 14 मई 2012 | 8:10 pm

हिंदी ब्लॉगिंग को एक दशक पूरा नहीं हुआ और दशक का ब्लॉगर और ब्लॉग चुना जा रहा है।
यह एक नायाब आयडिया है। इसका नतीजा वही होगा कि सम्मान तो मिलेगा केवल 5 ब्लॉगर्स को अपमान आएगा बाक़ी सबके हिस्से में। न चुने जाने का दंश मालूम नहीं किसके संवेदनशील दिल को कितना ज़्यादा दुखा दे।
गटबाज़ी और रंजिश की वजह से पहले ही बहुत से हिंदी ब्लॉगर्स रूख़सत हो चुके हैं लेकिन हिंदी ब्लॉगिंग के ताबूत में कीलें लगातार ठोंकी जा रही हैं।

दशक का ब्लॉगर, एक और गड़बड़झाला

डा. अनवर जमाल ख़ान की ख़ास पेशकश Buniyad Blog

Written By DR. ANWER JAMAL on मंगलवार, 10 अप्रैल 2012 | 6:43 pm

बुनियाद
 

ताज़ा पोस्ट

3 ख़ास पेशकश डा. अनवर जमाल ख़ान  Tuesday April 10, 2012 ‘मुशायरा‘ ब्लॉग पर 3 ख़ास पेशकश मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत मिल जाएं जो पीरी में तो मिल सकती है जन्नत लाज़िम है ये हम पर कि करें उन की इताअत जो हुक्म दें हम को वो बजा लाएं उसी वक्त ...
 
पत्नी चाहती क्या है? डा. अनवर जमाल ख़ान  Saturday April 07, 2012 पत्नी की संतुष्टि उसका स्वाभाविक अधिकार है Women's Natural Right वंदना गुप्ता जी ने हिंदी ब्लॉग जगत को एक पोस्ट दी है ‘संभलकर, विषय बोल्ड है‘ हमने उनकी इस पोस्ट पर अपनी टिप्पणी देते हुए कहा है कि वंदना गुप्ता जी ! आपने नर नारी...
 
संतुष्टि के उपाय ख़ुद नारी बताए डा. अनवर जमाल ख़ान  Friday April 06, 2012 वंदना गुप्ता जी का मानना है कि नारी की संतुष्टि के लिए अंतरंग संबंध बनाते समय पुरूष के लिए धैर्य परमावश्यक है। उनके इतना कहने मात्र से ही हिंदी ब्लॉग जगत में एक ज़बर्दस्त बहस का आग़ाज़ हो गया। वंदना गुप्ता जी को श्री कृष्ण जी की कथा वाचिका के रूप में...
 
ब्रह्मा अब्राहम इब्राहीम एक हैं? डा. अनवर जमाल ख़ान  Thursday April 05, 2012 ब्रहमा जी जैसी महान हस्ती को आज ऐतिहासिक शख्सियत के बजाय केवल एक मिथकीय पात्र मानकर उनकी महत्ता को घटाया क्यों जाता है ? हिंदी ब्लॉगर्स ने चैत्र मास से आरंभ होने वाले नवसमवत्सर पर लेख लिखे। हमने भी इस विषय पर लेख लिखा। चैत्र मास से आरंभ होने वाला यह...
 
हिंदी वेबसाइट का मजा मोबाइल पर डा. अनवर जमाल ख़ान  Wednesday April 04, 2012 एक ख़ास तोहफ़ा मोबाइल पर इंटरनेट का लुत्फ़ उठाने वालों के लिए तकनीकी विशेषज्ञ दे रहे हैं जानकारी हिंदी वेबसाइट का मजा लीजिए मोबाईल पर अक्‍सर आपने  देखा होगा कि मोबाईल में कोई हिंदी की वेबसाईट खोलने पर डब्‍बे डब्‍बे से...
 
ब्रह्मा जी ने मनुष्य बनाया डा. अनवर जमाल ख़ान  Monday April 02, 2012 होली आकर जा चुकी है और नया हिन्दू वर्ष आरम्भ हो गया है . हिन्दू धर्म की मान्यता है कि ब्रह्मा ने चैत्र मास के प्रथम दिन प्रथम सूर्योदय होने पर की. 'Hindi Bloggers Forum International' की ओर से  विक्रमी संवत 2069 के शुभ आगमन पर नव...
 
सूफ़ी दर्शन (पहला सबक़) डा. अनवर जमाल ख़ान  Saturday March 31, 2012 सच्चे बादशाह से बातें कीजिए God hears. रूह में रब का नाम नक्श है। रूह सबकी एक ही है। जो भी पैदा होता है, उसी एक रूह का नूर लेकर पैदा होता है। रूह क्या है ? रब की सिफ़ाते कामिला का अक्स (सुंदर गुणों का प्रतिबिंब) है। सिफ़ाते कामिला को...
 
फ़ायदे ग्रीन टी के डा. अनवर जमाल ख़ान  Friday March 30, 2012 चाय आज हमारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी का हिस्सा है , इसे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाये तो इसके नुकसान से बचा जा सकता है . देखें एक रिपोर्ट: बुढ़ापे की दिक्कतों से बचा सकती है ग्रीन टी नीतू सिंह ॥ नई दिल्ली || अगर आप ...
 
लड़कियों,महिलाओं के लिए नैचरोपैथी डा. अनवर जमाल ख़ान  Tuesday March 27, 2012 लड़कियों और महिलाओं के लिए नैचरोपैथी में करिअर बनाना बहुत आसान भी है और बहुत लाभदायक भी. इसके ज़रिये वे खुद को और अपने परिवार को तंदरुस्त भी रख सकती हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बन सकती हैं. प्राकृतिक जीवन पद्धति है नैचरोपैथी Naturopathy...
 
सबका धर्म एक है डा. अनवर जमाल ख़ान  Saturday March 24, 2012 ‘सबका धर्म एक है, सम्पूर्ण मानव जाति एक है‘ - स्वामी ब्रजानंद जी महाराज God is One ‘सबका धर्म एक है, सम्पूर्ण मानव जाति एक है‘ विषय पर गोष्ठी का आयोजन जामिया उर्दू अलीगढ़ में विश्वस्तरीय ख्याति प्राप्त धर्मगुरू एवं...
 
नैचरोपैथी: एक प्राकृतिक जीवन पद्धति डा. अनवर जमाल ख़ान  Saturday March 24, 2012 प्राकृतिक जीवन पद्धति है नेचुरोपैथी Naturopathy in India नेचुरोपैथी सीखने के लिए हमने औपचारिक रूप से भी D.N.Y.S. किया है। आजकल धनी लोग इस पैथी की तरफ़ रूख़ भी कर रहे हैं। रूपया काफ़ी है इसमें। फ़ाइव स्टारनुमा अस्पताल तक खुल चुके हैं नेचुरोपैथी के और...
 
ज्योतिषियों-बाबाओं की तिलिस्मी तकनीक डा. अनवर जमाल ख़ान  Wednesday March 21, 2012 भविष्य बताने वाले और कष्ट दूर करने वाले ज्योतिषियों और बाबाओं की तिलिस्मी तकनीक रोज़ी रोटी की तो क्या यहां हलवा पूरी की भी कोई समस्या नहीं है नज्म सितारे को कहते हैं और नूजूमी उसे जो सितारों की चाल से वाक़िफ़ हो। सितारों की चाल के असरात ज़मीन की आबो...
 
मूत्र मार्ग संक्रमण की रोकथाम UTI डा. अनवर जमाल ख़ान  Sunday March 18, 2012   मूत्र मार्ग संक्रमण मूत्र मार्ग संक्रमण जीवाणु जन्य संक्रमण है जिसमें मूत्र मार्ग का कोई भी भाग प्रभावित हो सकता है। हालाँकि मूत्र में तरह-तरह के द्रव एवं वर्ज्य पदार्थ होते है किंतु इसमें जीवाणु नहीं होते। यूटीआई से ग्रसित होने पर ...
 
राजनीतिक ब्लॉगर्स की औक़ात क्या है? डा. अनवर जमाल ख़ान  Friday March 16, 2012 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अब श्री अखिलेश यादव जी हैं। अखिलेश यादव जी की पार्टी के लिए हिंदी ब्लॉगर्स के बहुमत ने कोई आंदोलन नहीं चलाया इसके बावजूद उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की बागडोर संभाल रही है। उत्तराखंड की बागडोर भाजपा के हाथ से निकल गई है हालांकि...
 
 
अरब और हिंदुस्तान का ताल्लुक़- 1 डा. अनवर जमाल ख़ान  Thursday March 15, 2012 काबा वह पहला घर है जो मालिक की इबादत के लिए बनाया गया है। इसे हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने सबसे पहले बनाया था। आदम अलैहिस्सलाम को स्वयंभू मनु कहा जाता है। जब उनके बाद जल प्रलय आई तो उसका असर इस घर पर भी पड़ा था। इसके बाद हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने आज से ...

बोल्डनेस छोड़िए हो जाइए कूल...खुशदीप​ के सन्दर्भ में , सभी को इसपर अपना ऐतराज़ दर्ज कराना चाहिए.

Written By DR. ANWER JAMAL on गुरुवार, 5 अप्रैल 2012 | 8:19 am

बोल्डनेस छोड़िए हो जाइए कूल...खुशदीप​ के सन्दर्भ में 

 ख़ुशदीप सहगल किसी ब्लॉग पर अपनी मां का काल्पनिक नंगा फ़ोटो देखें तो उन्हें दुख होगा इसमें ज़रा भी शक नहीं है लेकिन उनकी मां का नंगा फ़ोटो ब्लॉग पर लगा हुआ है और उन्हें दुख का कोई अहसास ही नहीं है।
...और यह फ़ोटो उनके ही ब्लॉग पर है और ख़ुद उन्होंने ही लगाया है।
उन्होंने चुटकुलों भरी एक पोस्ट तैयार की। जिसका शीर्षक है ‘बोल्डनेस छोड़िए और हो जाइये कूल‘
इस पोस्ट का पहला चुटकुला ही हज़रत आदम अलैहिस्सलाम और अम्मा हव्वा अलैहिस्सलाम पर है। इस लिहाज़ से उन्होंने एक फ़ोटो भी उनका ही लगा दिया है। फ़ोटो में उन्हें नंगा दिखाया गया है।
दुनिया की तीन बड़ी क़ौमें यहूदी, ईसाई और मुसलमान आदम और हव्वा को मानव जाति का आदि पिता और आदि माता मानते हैं और उन्हें सम्मान देते हैं। ये तीनों मिलकर आधी दुनिया की आबादी के बराबर हैं। अरबों लोग जिनका सम्मान करते हैं, उनके नंगे फ़ोटो लगाकर ब्लॉग पर हा  हा ही ही की जा रही है।
यह कैसी बेहिसी है भाई साहब ?
आदम हव्वा का फ़ोटो इसलिए लगा दिया कि ये हमारे कुछ थोड़े ही लगते हैं, ये अब्राहमिक रिलीजन वालों के मां बाप लगते हैं।

अरे भाई ! आप किस की संतान हो ?
कहेंगे कि हम तो मनु की संतान हैं।
और पूछा जाए कि मनु कौन हैं, तो ...?
कुछ पता नहीं है कि मनु कौन हैं !

अथर्ववेद 11,8 बताता है कि मनु कौन हैं ?
इस सूक्त के रचनाकार ऋषि कोरूपथिः हैं -
यन्मन्युर्जायामावहत संकल्पस्य गृहादधिन।
क आसं जन्याः क वराः क उ ज्येष्ठवरोऽभवत्। 1 ।
तप चैवास्तां कर्भ चतर्महत्यर्णवे।
त आसं जन्यास्ते वरा ब्रह्म ज्येष्ठवरोऽभवत् । 2 ।

अर्थात मन्यु ने जाया को संकल्प के घर से विवाहा। उससे पहले सृष्टि न होने से वर पक्ष कौन हुआ और कन्या पक्ष कौन हुआ ? कन्या के चरण कराने वाले बराती कौन थे और उद्वाहक कौन था ? ।1। तप और कर्म ही वर पक्ष और कन्या पक्ष वाले थे, यही बराती थे और उद्वाहक स्वयं ब्रह्म था।2।

यहां स्वयंभू मनु के विवाह को सृष्टि का सबसे पहला विवाह बताया गया है और उनकी पत्नी को जाया और आद्या कहा गया है। ‘आद्या‘ का अर्थ ही पहली होता है और ‘आद्य‘ का अर्थ होता है पहला। ‘आद्य‘ धातु से ही ‘आदिम्‘ शब्द बना जो कि अरबी और हिब्रू भाषा में जाकर ‘आदम‘ हो गया।
स्वयंभू मनु का ही एक नाम आदम है। अब यह बिल्कुल स्पष्ट है। अब इसमें किसी को कोई शक न होना चाहिए कि मनु और जाया को ही आदम और हव्वा कहा जाता है और सारी मानव जाति के माता पिता यही हैं।
ख़ुशदीप सहगल के माता पिता भी यही हैं।
अपने मां बाप के नंगे फ़ोटो ब्लॉग पर लगाकर सहगल साहब ख़ुश हो रहे हैं कि देखो मैंने कितनी अच्छी पोस्ट लिखी है।
अपनी मां की नंगी फ़ोटो लगा नहीं सकते और जो उनकी मां की भी मां है और सबकी मां है उसका नंगा फ़ोटो लगाकर बैठ गए हैं और किसी ने उन्हें टोका तक नहीं ?
ये है हिंदी ब्लॉग जगत !
कहते हैं कि हम पढ़े लिखे और सभ्य हैं।
हम इंसान के जज़्बात को आदर देते हैं।
अपने मां बाप आदम और हव्वा अलैहिस्सलाम पर मनघड़न्त चुटकुले बनाना और उनका काल्पनिक व नंगा फ़ोटो लगाना क्या उन सबकी इंसानियत पर ही सवालिया निशान नहीं लगा रहा है जो कि यह सब देख रहे हैं और फिर भी मुस्कुरा रहे हैं ?



  •  

    रात हमने पोस्ट पब्लिश करने के साथ ही उनकी पोस्ट पर टिप्पणी भी की और इस पोस्ट की सूचना देने के लिए अपना लिंक भी छोड़ा लेकिन उन्होंने गलती को मिटने के बजाय हमारी टिप्पणी ही मिटा डाली.
    उनकी गलती दिलबाग जी ने भी दोहरा डाली. उनकी पोस्ट से फोटो लेकर उन्होंने भी चर्चा मंच की पोस्ट   (चर्चा - 840 ) में लगा दिया है.
    एक टिप्पणी हमने चर्चा मंच की पोस्ट पर भी कर दी है.
    यह मुद्दा तो सबके माता पिता की इज्ज़त से जुडा है. सभी को इसपर अपना ऐतराज़ दर्ज कराना चाहिए.
    http://blogkikhabren.blogspot.in/2012/04/manu-means-adam.html

    ‘संभलकर, विषय बोल्ड है‘ पर टिप्पणी

    Written By DR. ANWER JAMAL on मंगलवार, 3 अप्रैल 2012 | 10:30 am

    पत्नी की संतुष्टि उसका स्वाभाविक अधिकार है Women's Natural Right

    वंदना गुप्ता जी ने हिंदी ब्लॉग जगत को एक पोस्ट दी है ‘संभलकर, विषय बोल्ड है‘
    हमने उनकी इस पोस्ट पर अपनी टिप्पणी देते हुए कहा है कि

    वंदना गुप्ता जी ! आपने नर नारी संबंधों के क्रियात्मक पक्ष की जानकारी बहुत साफ़ शब्दों में दी है। यह सबके काम आएगी। तश्बीह, तम्सील और बिम्बों के ज़रिये कही गई बात को केवल विद्वान ही समझ पाते हैं और फिर उनके अर्थ भी हरेक आदमी अलग अलग ले लेता है। आपका साहित्य सरल है इसे हरेक आदमी समझ सकता है। पुरूषों को यह बात ज़रूर जाननी चाहिए कि शारीरिक संबंधों की अदायगी भी क़ायदे से होनी चाहिए जैसे कि धार्मिक कर्मकांड और इबादत में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि कहीं भी कोई कमी न रह जाए।
    ईश्वर तक पहुंचने के लिए सीढ़ी माने जाने वालों से पत्नी के लिए पति और पति के लिए पत्नी भी हैं।
    ईश्वर की प्रसन्नता चाहना भारतीय संस्कृति का अभिन्न तत्व है और अरबी संस्कृति का भी। संपूर्ण विश्व की आध्यात्मिक संस्कृति का मूल तत्व यही है। पत्नी भी प्रसन्न है कि नहीं, यह भी देखना बहुत ज़रूरी है। मां बाप गुरू अतिथि और पत्नी राज़ी हैं तो समझ लीजिए कि आपसे आपका रब भी राज़ी है।
    पत्नी को राज़ी करना भी निहायत ही आसान है।
    पत्नी चाहती क्या है ?
    सिर्फ़ दो बोल प्रशंसा के,
    जैसे कि ...
    जब से तुम इस घर में आई हो मेरी ज़िंदगी संवर गई है।
    तुम्हारे प्यार की क़द्र मेरे दिल में बहुत गहराई तक है।

    बस हो गई नारी तुम्हारी, दिल से सदा के लिए।
    लेकिन यह तारीफ़ दिल से निकलनी चाहिए।
    औरत समर्पण करती है और अपने आप को मिटाती है तो उसे तारीफ़ मिलनी भी चाहिए।

    मर्द को अपने खान पान को भी ‘औरत ओरिएंटिड‘ रखना चाहिए। मर्द को मछली और मुर्ग़ा ज़रूर खाना चाहिए। अगर मर्द शाकाहार का अभ्यस्त हो और सीधे मांस न खा सकता हो तो उसे दूध, शहद, बादाम, पनीर, लहसुन, अदरक, आंवला और एलोवेरा का सेवन ज़रूर करना चाहिए। बदन में जितनी ज़्यादा जान होगी, वह अपने महबूब के साथ उतना ही लंबा सफ़र कर सकता है।
    महबूब को चांद के पार ले जाने में एलोवेरा का जवाब नहीं है। एलोवेरा के सेवन के बाद नारी तो संतुष्ट हो ही जाती है लेकिन मर्द संतुष्टि के अहसास को रिपीट करने का बल तुरंत ही पाता है।
    चरम सुख के शीर्ष पर औरत का प्राकृतिक अधिकार है, हमारा यह उदघोष सदा से ही है।

    इतनी लंबी टिप्पणी सिर्फ़ इसलिए कि जो भी पढ़े उसका वैवाहिक जीवन पूरी तरह संतुष्ट हो। संतोष परम धन है और हम भारत के युवक युवकों को ही नहीं बल्कि वृद्धों और वृद्धाओं को भी परम धनी देखना चाहते हैं। विधवा और विधुर सब इस धन से समृद्ध हों।
    यह परम धन पास हो तो फिर लौकिक धन मुद्रा की कमी नर नारी को परेशान नहीं करती। उच्च के सामने तुच्छ का मूल्य गौण हुआ करता है।

    मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत

    Written By DR. ANWER JAMAL on रविवार, 1 अप्रैल 2012 | 12:37 pm

    मां बाप हैं अल्लाह की बख्शी हुई नेमत
    मिल जाएं जो पीरी में तो मिल सकती है जन्नत

    लाज़िम है ये हम पर कि करें उन की इताअत
    जो हुक्म दें हम को वो बजा लाएं उसी वक्त

    हम को वो कभी डांट दें हम सर को झुका लें
    नज़रें हों झुकी और चेहरे पे नदामत

    खि़दमत में कमी उन की कभी होने न पाए
    है दोनों जहां में यही मिफ़्ताहे सआदत

    भूले से भी दिल उन का कभी दुखने न पाए
    दिल उन का दुखाया तो समझ लो कि है आफ़त

    मां बाप को रखोगे हमा वक्त अगर ख़ुश
    अल्लाह भी ख़ुश होगा, संवर जाएगी क़िस्मत

    फ़ज़्लुर्रहमान महमूद शैख़
    जामिया इस्लामिया सनाबल, नई दिल्ली

    शब्दार्थः
    पीरी-बुढ़ापा, नदामत-शर्मिंदगी, इताअत-आज्ञापालन, खि़दमत-सेवा,
    मिफ़्ताहे सआदत-कल्याण की कुंजी, हमा वक्त-हर समय

    राष्ट्रीय सहारा उर्दू दिनांक 1 अप्रैल 2012 उमंग पृ. 3

    Source : http://pyarimaan.blogspot.in/2012/04/blog-post.html

    अपने ही दस बच्चों की मां को दुल्हन बनाकर लाया Sufi & Telepathy

    Written By DR. ANWER JAMAL on शनिवार, 31 मार्च 2012 | 7:50 pm

    बारात लेकर गया और अपने ही दस बच्चों की मां को दुल्हन बनाकर लाया रामौतार Dulha Dulhan 

    by


  • DR. ANWER JAMAL


  • हरदोई/एजेंसी ! बेटी के हाथ पीले करने की खातिर किसी बाप को अगर पहले अपने हाथ पीले करने पडे़ तो यह सुनने में ही अजीब लगेगा...
    Read More...



    शरीयत, तरीक़त, मारिफ़त, हक़ीक़त Sufi & Tasawwuf

     


    पीर उस सालिक को साधना के मार्ग पर बढ़ने का रास्ता दिखाते हैं। सूफ़ी गुरुओं ने साधकों को साधना के लिए ये चार सोपान निर्धारित किए हैं –


    टेलीपैथी सिखाने वाला हिन्दी ब्लॉग

     


    टेलीपैथी सिखाने वाला एक नया ब्लॉग अब हिन्दी में Easy Telepathy RELAXATION EXERCISE BY WILLIAM HEWITT

    बादशाह अपना हो तो फिर चिंता किस बात की है ?

    Written By DR. ANWER JAMAL on शुक्रवार, 30 मार्च 2012 | 7:52 pm

    सच्चे बादशाह से बातें कीजिए God hears.

    रूह में रब का नाम नक्श है।
    रूह सबकी एक ही है।
    जो भी पैदा होता है, उसी एक रूह का नूर लेकर पैदा होता है।
    रूह क्या है ?
    रब की सिफ़ाते कामिला का अक्स (सुंदर गुणों का प्रतिबिंब) है।
    सिफ़ाते कामिला को ज़ाहिर करने वाले बहुत से नाम हैं।
    रब का हरेक नाम रूह को ताक़त देता है। रब का नाम रूहानी ताक़त का ख़ज़ाना है।
    रब का नाम दिल का सुकून है।
    खड़े बैठे या लेटे कैसे भी उसका नाम लो, दिल को सुकून मिलता है।
    जहां तुम हो, वहीं तुम्हारी रूह है और तुम्हारा रब भी वहीं है।
    रब की मौजूदगी को महसूस कीजिए।
    अपने अहसास को थोड़ा थोड़ा करके गहरा करते जाइये।
    अपने रब से बातें कीजिए, उसके साथ हंसिए बोलिए।
    उसके साथ अपने सुख दुख शेयर कीजिए, जैसे कि आप अपने मां बाप और दोस्त से शेयर करते हैं।
    आप जो भी कहते हैं, वह उसे सुनता है।
    यक़ीन कीजिए, आपको उससे बातें करके अच्छा लगेगा।
    वह आपकी बातों का आपको जवाब भी देगा।
    वह आपकी बातों का जवाब बहुत तरह से देता है, आज भी दे रहा है लेकिन आपका ध्यान उसकी तरफ़ नहीं है इसलिए आप यह जान ही नहीं पाते कि उसने आपकी किस बात पर किस तरह रिएक्ट किया है ?
    आप जो कुछ सुनते हैं, उसे रब से जोड़कर सुनिए, उनमें आपको जवाब मिलेगा।
    जो कुछ आप देखते हैं, उसे रब से जोड़कर देखिए, वे चीज़ें आपको रब की तरफ़ से संकेत देंगी।
    जिन धार्मिक ग्रंथों को आप पढ़ते हैं, उन पर ध्यान दीजिए, आपको वहां अपनी बात का जवाब मिलेगा।
    जैसे जैसे आपकी प्रैक्टिस बढ़ती जाएगी, आप ख़ुदा के इशारों को बेहतर तरीक़े से समझने लगेंगे।
    रब से बात करेंगे तो आपको वह हमेशा अपने साथ ही महसूस होगा।
    इससे आपके टेंशन्स दूर होंगे, आपको सुकून मिलेगा।
    आप जिस रब से बात कर रहे हैं, वह इस कायनात का बादशाह है और बादशाह से बात करना अपने आप में ही एक गौरव की बात है।
    कायनात का बादशाह आपको हमेशा अवेलेबल है।
    बादशाह अपना हो तो फिर चिंता किस बात की है ?
    बस हम बादशाह के हो जाएं।

    मुबारक हो महफूज़ भाई Star Blogger

    Written By DR. ANWER JAMAL on मंगलवार, 13 मार्च 2012 | 9:05 am

    महफूज़ भाई स्टार हिन्दी ब्लॉगर हैं . उन्होंने बताया है कि उनकी कविता जर्मनी के स्कूल पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाएगी. यह ख़ुशी की बात है , उन्हें मुबारकबाद देते हुए बहुत से वरिष्ठ हिन्दी ब्लॉगर यहाँ देखे जा सकते हैं .
    http://redrose-vandana.blogspot.in/2012/03/blog-post_12.html
    11-3-2012 के हिन्दुस्तान अखबार में भी यह ख़बर प्रमुखता के साथ प्रकाशित की गयी है.

    इस घटना से यह भी पता चल जाता है कि जिन लोगों को यहाँ विदेशी कहकर उनकी संस्कृति को तुच्छ समझा जाता है, वे ज्ञान की क़द्र करते हैं और इसीलिए वे आगे बढ़ते हैं . महफूज़ भाई जैसे लाखों लोग हैं जिनकी काबिलियत का फायदा उठाकर भारत पूरी दुनिया का लीडर बन सकता है.
    आगे बढ़ना है तो अहंकार और पक्षपात छोड़ना होगा.
    सारे हिन्दी ब्लॉगर की तरफ से हम यही कहेंगे :
    मुबारक हो महफूज़ भाई 

    वेद में सरवरे कायनात स. का ज़िक्र है

    Written By DR. ANWER JAMAL on सोमवार, 30 जनवरी 2012 | 6:29 pm

    ‘इयं विसृष्टिर्यत आबभूव यदि वा दधे यदि वा न। यो अस्याध्यक्षः परमेव्योमन्तसो अंग वेद यदि वा न वेद।‘
    वेद 1,10,129,7
    यह विविध प्रकार की सृष्टि जहां से हुई, इसे वह धारण करता है अथवा नहीं धारण करता जो इसका अध्ययन है परमव्योम में, वह हे अंग ! जानता है अथवा नहीं जानता।
    सामान्यतः वेद भाष्यकारों ने इस मंत्र में ‘सृष्टि के अध्यक्ष‘ से ईशान परब्रह्म परमेश्वर अर्थ ग्रहण किया है, किन्तु इस मंत्र में एक बात ऐसी है जिससे यहां ‘सृष्टि के अध्यक्ष‘ से ईशान अर्थ ग्रहण नहीं किया जा सकता। वह बात यह है कि इस मंत्र में सृष्टि के अध्यक्ष के विषय में कहा गया है - ‘सो अंग ! वेद यदि वा न वेद‘ ‘वह, हे अंग ! जानता है अथवा नहीं जानता‘। ईशान के विषय में यह कल्पना भी नहीं की जा सकती कि वह कोई बात नहीं जानता। फलतः यह सर्वथा स्पष्ट है कि ईशान ने यहां सृष्टि के जिस अध्यक्ष की बात की है, वह सर्वज्ञ नहीं है। मेरे अध्ययन के अनुसार यही वेद में हुज़ूर स. का उल्लेख है। शब्द ‘नराशंस‘ का प्रयोग भी कई स्थानों पर उनके लिए हुआ है किन्तु सर्वत्र नहीं। इसी सृष्टि के अध्यक्ष का अनुवाद उर्दू में सरवरे कायनात स. किया जाता है।
    फलतः श्वेताश्वतरोपनिषद के अनुसार वेद का सर्वप्रथम प्रकाश जिस पर हुआ। वह यही सृष्टि का अध्यक्ष है। जिसे इस्लाम में हुज़ूर स. का सृष्टि-पूर्व स्वरूप माना जाता है।
    मैं जिन प्रमाणों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं, आइये अब उसका सर्वेक्षण किया जाए।
    स्वर्गीय आचार्य शम्स नवेद उस्मानी की तर्जुमानी करते हुए एस. अब्दुल्लाह तारिक़ अपनी प्रख्यात रचना ‘अगर अब भी न जागे तो ...‘ में लिखते हैं -
    ‘नीचे हम हज़रत मुजददिद अलफ़े-सानी शैख़ अहमद सरहिन्दी रह. के मक्तूबाते-रब्बानी से कतिपय हदीसें उद्धृत हैं।
    प्रख्यात हदीसे-क़ुदसी में आया है, ‘मैं एक छिपा हुआ ख़ज़ाना था, मैंने महबूब रखा कि मैं पहचाना जाऊं, फिर मैंने मख़लूक़ को पैदा किया ताकि मैं पहचाना जाऊं।‘
    सर्वप्रथम जो चीज़ इस ख़ज़ाने से प्रागट्य के रूप में समक्ष आई, वह मुहब्बत थी, जो कि मख़लूक़ात की पैदाइश का कारण हुई।
    (मक्तूबाते रब्बानी, उर्दू अनुवाद, दफ़तर 3, भाग 2, पृष्ठ 160, मक्तूब 122, प्रकाशक: मदीना पब्लिशिंग कंपनी बंदर रोड कराची)
    (-‘अगर अब भी न जागे तो ...‘, पृष्ठ 105, उर्दू से अनुवाद: दुर्गाशंकर महिमवत् सत्यार्थी-)
    यह दोनों तथ्य, जिनका उल्लेख हदीसों में इस प्रकार हुआ है, हदीसों से भी पहले हिंदू धर्मग्रंथों में इस प्रकार अभिव्यक्त की गई हैं-
    ‘एको ऽ हं बहु स्याम्।
    ‘मैं एक हूं अनेक हो जाऊं।‘
    ‘स वै नैव रेमे तस्मादे काकी न रमते स द्वितीयमैच्छत्।‘
    शतपथ ब्राह्मण 14,3,4,3
    उसने रमण नहीं किया इसीलिए एकाकी रमण नहीं होता। उसने द्वितीय की इच्छा की...।
    ‘यदिदं किंच मिथुनं आपिपीलिकाभ्यः तन्सर्वमसृक्षीत्। सो वेद अहं वाव सृष्टिरस्मि। अहं टि इदं सर्व असृक्षीति। ततः सृष्टिरभवत्।‘
    -शतपथ ब्राह्मण 14,3,4,3
    ‘जो कुछ यह चींटी पर्यन्त जोड़ा है उस संपूर्ण की सृष्टि की। उसने जाना मैं ही सृष्टि हूं। मैंने ही यह सब सृष्टि की है। उससे सृष्टि हुई।‘
    (‘विश्व एकता संदेश‘ पाक्षिक, पृष्ठ संख्या 7 व 8 पर वेद भाष्य ऋग्वेद 1,1,2 के अन्तर्गत पं. दुर्गाशंकर महिमवत् सत्यार्थी द्वारा लिखित ‘वेद आदि ग्रन्थ और क़ुरआन अन्तिम ग्रन्थ है‘, अंक 19-20, अक्तूबर 1994, रामपुर, उ. प्र.)
    Read entire article - http://vedquran.blogspot.com/2012/01/mohammad-in-ved-upanishad-quran-hadees.html

    अनाथ विधवाओं की समस्या का समाधान क्या है ? Widows in Vrindawan

    Written By DR. ANWER JAMAL on बुधवार, 11 जनवरी 2012 | 6:42 pm

    हमने स्वराज्य करूं के ब्लॉग पर एक दिल दुखाने वाली ख़बर देखी

    कृष्ण कन्हैया की धरती पर यह कैसा कलंक ?

    खबर  आयी है कि भगवान कृष्ण कन्हैया की पवित्र भूमि वृन्दावन में संचालित सरकारी आश्रय गृहों की अनाथ विधवाओं के मरने के बाद उनके शरीर के टुकड़े -टुकड़े करके स्वीपरों द्वारा जूट की थैलियों में भर कर यूं ही फेंक दिया जाता है !   यह समाचार कल एक हिन्दी सांध्य दैनिक 'छत्तीसगढ़ ' में प्रकाशित हुआ है, जो अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू ' में छपी खबर का अनुवाद है.  अगर यह खबर सच है तो  यह भयंकर अमानवीय और शर्मनाक करतूत हमारे लिए राष्ट्रीय शर्म की बात  है .  क्या आज का इंसान इतना गिर चुका है कि किसी मानव के निर्जीव शरीर को सदगति देने के बजाय वह उसके टुकड़े-टुकड़े कर  किसी गैर ज़रूरी सामान की तरह कचरे में फेंक दे ? 
       छपी खबर  के अनुसार वहाँ ऐसा इसलिए होता है ,क्योंकि इन असहाय और अनाथ महिलाओं की मौत के बाद उनके सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए कोई वित्तीय प्रावधान नहीं है.
    इस पर आई कुछ प्रतिक्रियाएं भी आप देखें  .



    ह्रदय को झकझोरनेवाली खबर दी है आपने.सत्य को परखने की बात मत कीजिये बात सत्य ही होगी. इस निर्मूल्य होते मानवीय संबंधों के लिए कुछ करने के लिए अन्ना जैसे आन्दोलन की जरूरत है और उससे पहले अपने हृदयों को स्वक्छ करने की भी


    रेखा said...

    आपकी खबर से तो मैं कांप गई हूँ ...क्या ऐसा भी कहीं हो सकता है ?
    बहुत ही मार्मिक और हृदयविदारक प्रसंग

    यह ख़बर दिल दुखाती है और हिंदी ब्लॉगर्स ने अपनी संवेदना भी प्रकट की है लेकिन यह समस्या इससे ज़्यादा तवज्जो चाहती है। यह समस्या एक स्थायी समाधान चाहती है।
    क्या है इस समस्या का समाधान कि भविष्य में फिर किसी अनाथ और ग़रीब विधवा के साथ ऐसा अमानवीय बर्ताव न हो।
    जब हमने इस पर विचार किया जो हमने पाया कि हिंदू रीति से अंतिम संस्कार बहुत महंगा पड़ता है। महंगा होने की वजह से ही ग़रीब विधवाएं अंतिम संस्कार से वंचित रह जाती हैं। महंगा होने की वजह से ही समाज के लोग उनके साथ ग़ैर इंसानी बर्ताव न चाहते भी करते हैं।
    दफ़नाने की विधि अमीर ग़रीब सब अपना सकते हैं। इसमें अपेक्षाकृत बहुत कम ख़र्च आता है और अगर बिल्कुल ग़रीब को सादा तरीक़े से दफ़नाया जाए तो फिर वह ख़र्च भी नहीं होता। दफ़नाने की विधि हिंदुओं में भी प्रचलित है लेकिन इसे केवल मासूम बच्चों के लिए और सन्यासियों के लिए ही प्रयोग किया जाता है।
    अगर सभी के लिए यही एक विधि लागू कर दी जाए तो यह समस्या ही समाप्त हो जाएगी कि ग़रीब के अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे लिहाज़ा उसका अंतिम संस्कार नहीं हो पाया।
    विधवा विवाह की व्यवस्था होनी चाहिए। समाज में इसे प्रोत्साहन देना चाहिए।
    आजकल वैसे भी समाज में स्त्री लिंग का अनुपात पुरूषों के मुक़ाबले कम है।
    ऐसे में अगर ढंग से कोशिश की जाए तो कामयाबी मिलने में कोई शक नहीं है।
    इस तरह एक विधवा नारी को समाज में इज़्ज़त का मक़ाम भी हासिल हो जाएगा और वह एक इंसान की तरह शान से सिर उठाकर जी सकेगी और मरने के बाद इज़्ज़त के साथ ही उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

    आपकी क्या राय है ?

    • आज के अख़बार में एक ख़बर भी नज़र आई है जिससे पता चलता है कि समाज में संवेनाएं अभी ज़िंदा हैं। ख़बर के मुताबिक़ बुलंदशहर (उ. प्र.) में एक संस्था काम कर रही है। जनाब एच. यू. क़ुरैशी साहब की अध्यक्षता में इस यह सोसायटी अब तक 134 लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर चुकी है।
    • न्यूज़ कटिंग की इमेज सलग्न है।

    "ब्लॉगर्स मीट वीकली (24) Happy New Year 2012"

    Written By DR. ANWER JAMAL on मंगलवार, 3 जनवरी 2012 | 11:48 am

    पेड़ पौधों में भी होता है तंत्रिका तंत्र 
    मुहब्बत  में घायल वो भी है और मैं भी हूँ,
    वस्ल के लिए पागल वो भी है और मैं भी हूँ,
    तोड़ तो सकते हैं सारी बंदिशें ज़माने की,
    लेकिन घर की इज्जत वो भी है और मैं भी हूँ,

    {वस्ल = मिलन}

    "ब्लॉगर्स मीट वीकली
    (24) Happy New Year 2012"
    में आयें .
    आपको यहाँ कुछ नया और हट कर मिलेगा .

    पेड़ पौधों में भी होता है तंत्रिका तंत्र और वे प्रतिक्रिया भी देते हैं
    आश्चर्य की बात यह है कि यह प्रक्रिया बिल्कुल वैसी है, जैसे मानव का तंत्रिका तंत्र काम करता है. ऐसा सेल्स (इलेक्ट्रो-केमिकल सिग्नल) के कारण होता है. यह पेड़-पौधों के तंत्रिका तंत्र के रूप में काम करता है.
    शोधकर्ताओं ने कहा कि प्रकाश में उपस्थित कूट सूचनाओं को पेड़-पौधे याद रखते हैं. 

    नए साल की मुबारकबाद 2012

    Written By DR. ANWER JAMAL on गुरुवार, 29 दिसंबर 2011 | 7:20 pm

    आप सभी को नए साल २०१२ की मुबारकबाद .
    मालिक हम सबको हर मुसीबत से बचाए और हरेक नेकी का रास्ता दिखाए ताकि हमारा अंजाम अच्छा हो.
    आमीन .

    अब कुछ अच्छे संदेसे

    Something in your smile which speaks to me,
    Something in your voice which sings to me,
    Something in your eyes which says to me,
    That you are the dearest to me.
    “Happy New Year”


    Another day, another month, another year.
    Another smile, another tear, another winter.
    A summer too, But there will never be another you!
    Wishing a very HAPPY N BLESSED New Year to You!!


    We will open the new book.
    Its pages are blank.
    We are going to put words on them ourselves.
    The book is called Opportunity
    and
    its first chapter is New Year's Day.


    When the mid-nite bell rings tonight..
    Let it signify new and better things for you,
    Let it signify a realisation of all things you wish for,
    Wishing you a very...very...very prosperous new year.


    Like birds, let us, leave behind what we don’t need to carry…
    GRUDGES, SADNESS, PAIN, FEAR and REGRETS.
    Life is beautiful.. Enjoy it.
    HAPPY NEW YEAR


    Beauty..
    Freshness..
    Dreams..
    Truth..
    Imagination..
    Feeling..
    Faith..
    Trust..
    This is begining of a new year!

    मनु स्मृति के इसी 8 वें अध्याय में जार कर्म और बलात्कार आदि के लिए दंड का पूरा विवरण मौजूद है

    Written By DR. ANWER JAMAL on मंगलवार, 20 दिसंबर 2011 | 9:56 am

    अवैध यौन संबंधों में कानून द्वारा लिंग भेद - एक परिचर्चा ! 

    -डा. टी. एस. दराल जी 

    धार्मिक पहलू :

    सभी धर्मों में इसे पाप माना जाता है । इस्लाम में तो इसके लिए सख्त सज़ा का प्रावधान है ।

    अब कुछ सवाल उठते हैं आम आदमी के लिए :

    * क्या इस मामले में स्त्री पुरुष में भेद भाव करना चाहिए ?
    * यदि पति की रज़ामंदी से उसकी पत्नी से रखे गए सम्बन्ध गैर कानूनी नहीं हैं तो क्या वाइफ स्वेपिंग जायज़ है ?
    * क्या इस कानून में बदलाव की ज़रुरत है ?

    पति पत्नी के सम्बन्ध आपसी विश्वास पर कायम रहते हैं । कानून भले ही ऐसे मामले में पत्नी को दोषी न मानता हो , लेकिन व्यक्तिगत , पारिवारिक , सामाजिक और नैतिक तौर पर ऐसे में दोनों को बराबर का गुनहगार माना जाना चाहिए ।

    हमारा स्वस्थ नैतिक दृष्टिकोण ही हमारे समाज के विकास में सहायक सिद्ध हो सकता है ।
     

    -----------------------

    हमने इस पोस्ट पर कहा है कि

    आपने कहा है कि
    'जहाँ तक मैं समझता हूँ , हिन्दू धर्म में इसे पाप समझा जाता है लेकिन सज़ा के लिए कोई प्रावधान नहीं है ।'
    के बारे में

    @ डा. टी. एस. दराल जी ! जिस बात को धर्मानुसार पाप कहा जाता है उसके लिए धार्मिक व्यवस्था में दण्ड का विधान भी होता है।
    यह बात आपको जाननी चाहिए कि मनु स्मृति में बलात्कार और अवैध यौन संबंधों के लिए कठोर दण्ड की व्यवस्था है।

    मनु स्मृति में अवैध यौन संबंध के लिए दंड

    कन्यां भजन्तीमुत्कृष्टं न किंचिदपि दापयेत् ।
    जघन्य सेवमानां तु संयतां वासयेद्गृहे ।।
    -मनु स्मृति, 8, 365
    अर्थात उच्चजाति के पुरूष की सकाम सेवा करने वाली कन्या दण्डनीय नहीं है किंतु हीन जाति के पास जाने वाली को प्रयत्नपूर्वक रोके।

    भर्तारं लंघयेद्या तु स्त्री ज्ञातिगुणदर्पिता ।
    तां श्वभिः खादयेद्राजा संस्थाने बहुसंस्थिते ।।
    -मनु स्मृति, 8, 371
    जो स्त्री अपने पैतृक धन और रूप के अहंकार से पर पुरूष सेवन और अपने पति का तिरस्कार करे उसे राजा कुत्तों से नुचवा दे। उस पापी जार पुरूष को भी तप्त लौह शय्या पर लिटाकर ऊपर से लकड़ी रखकर भस्म करा दे।

    मनु स्मृति के इसी 8 वें अध्याय में जार कर्म और बलात्कार आदि के लिए दंड का पूरा विवरण मौजूद है।

    http://deepakbapukahin.wordpress.com/2011/08/20/men-and-women-in-manu-smruti-hindi-lekh/
     

    सूफ़ियों ने विश्व-प्रेम का पाठ पढ़ाया Soofi

    Written By DR. ANWER JAMAL on सोमवार, 19 दिसंबर 2011 | 12:08 pm

    Welcome to

    Blogger's Meet Weekly 22

    http://hbfint.blogspot.com/2011/12/22-ramayana.html

    किसी भी रमणीय सुन्दर रास्ते को अच्छा नही कहा जा सकता यदि वह लक्ष्य तक नही पहुंचाता है।

    और ...
    सूफ़ियों ने विश्व-प्रेम का पाठ पढ़ाया अंक-1
    सूफ़ी शब्द का अर्थ
    th_sufisधार्मिक सहिष्णुता और उदारता आदिकाल से ही भारतीय संस्कृति की प्रमुख विशेषता रही है। मध्यकालीन भारत में मुसलमानों के आगमन से और खासकर दिल्ली सलतनत की स्थापना के साथ-साथ हिन्दू और इसलाम धर्म के बीच गहन संपर्क हुआ। इस दीर्घकालीन संपर्क ने दोनों धर्मों के अनुयाइयों को न सिर्फ़ परस्पर प्रभावित किया, बल्कि उनके बीच धारणाओं, धार्मिक विचारों और प्रथाओं का पारस्परिक आदान-प्रदान भी हुआ। भक्ति और प्रेम की भावना पर आधारित जिस पंथ ने इसलाम धर्म में लोकप्रियता प्राप्त की उसे सूफ़ी पंथ कहते हैं। सूफ़ी संप्रदाय का उदय इसलाम के उदय के साथ ही हुआ, किन्तु एक आन्दोलन के रूप में इसलाम की नीतिगत ढांचे के तहत इसे मध्य काल में बहुत लोकप्रियता मिली। सूफ़ी फ़क़ीरों ने अपने प्रेमाख्यानों द्वारा हिन्दू-मुस्लिम हृदय के अजनबीपन को मनोवैज्ञानिक ढंग से दूर किया और साथ-साथ खण्डनात्मकता के स्थान पर दोनों संस्कृतियों का सुन्दर सामंजस्य प्रस्तुत किया। सूफी चिंतन वस्तुतः उस सत्य का उदघाटन है जिसमें जीवात्मा और परमात्मा की अंतरंगता के अनेक रहस्य गुम्फित हैं।
    - मनोज  कुमार 

    आहार व्यवहार की पवित्रता

    Written By DR. ANWER JAMAL on बुधवार, 14 दिसंबर 2011 | 7:12 pm

    एक तथ्यपरक चर्चा बेहतर भविष्य के लिए

    हमारी भूलें : आहार व्यवहार की अपवित्रता - 2



    व्यवहार में पवित्रतता लाने के लिए आहार की पवित्रता अत्यंत आवश्यक है| कहा गया है कि – “ जैसा अन्न वैसा मन”| जिस प्रकार का हम आहार करते है उसी प्रकार का मन बनने का आशय है कि यदि हमारा आहार तामस है तो मन उससे प्रभावित होकर अहंकार के पक्ष में निर्णय करेगा व यदि आहार सात्विक है तो मन सदा बुद्धि के अनुकूल रहकर हमको तर्क संगत विकासशील मार्ग अग्रसर करता रहेगा| 

    इसी विषय पर यहां भी चर्चा जारी है.
    देखिए Facebook पर
    यह लिंक :
    http://www.facebook.com/himanshijain18/posts/260672843987658?cmntid=260738030647806

    Founder

    Founder
    Saleem Khan