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प्रदूषण का मारा ... कविता ---डा श्याम गुप्त....

Written By shyam gupta on बुधवार, 11 मई 2011 | 3:44 pm

      प्रदूषण का मारा.....
        ( बृज भाषा )

हे बगुला ! तू कारो क्यों है ,
सूखौ ढीलौ ढालौ क्यों है ?
कितै गईं वे उजरी पंखियां ,
चौंच नुकीली तीखी अँखियाँ ||

दर्द तिहारौ दयौ , भला अब -
पूछत हौ दुःख भरी कहानी |
नदिया ताल नहरि पोखरि कौ,
तुमनै कियौ प्रदूषित पानी ||

मछरी कबहुं कबहुं मिलि जावे ,
कहाँ  प्रदूसन मैं पलि पावै |
कारन है जानौ पहचानौ,
भूखौ रहिबौ, दूषित खानौ ||

ताल- तलैया पाटि दये हैं ,
दूर दूर  उडि कै जाऊं मैं |
धुंआ डीज़ल मिली हवा में ,
पांखें कारी  करि लाऊँ मैं ||

खानौ पीनौ सब जहरीलौ,
क्यों न बदन हो सूखौ ढीलौ |
मंद भईं अँखियाँ चमकीली ,
कहा करै अब चौंच नुकीली ||

Founder

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Saleem Khan