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त्रिपदा अगीत गज़ल... डा श्याम गुप्त .....

Written By shyam gupta on शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011 | 2:53 pm


    त्रिपदा अगीत गज़ल....
       (पागल-दिल)
भग्न अतीत की न बात करें,
व्यर्थ बात की क्या बात करें;
अब नवोन्मेष की बात करें।

यदि महलों मैं जीवन हंसता,
झोंपडियों में जीवन पलता;
क्या ऊंच नीच की बात करें।

शीश झुकायें क्यों पश्चिम को,
क्यों अतीत से हम भरमायें;
कुछ आदर्शों की बात करें  ।

शास्त्र ,बडे-बूडे औ बालक,
है सम्मान देना पाना तो;
मत श्याम’ व्यन्ग्य की बात करें ।

Founder

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Saleem Khan