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बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया

Written By आपका अख्तर खान अकेला on बुधवार, 1 मई 2019 | 6:09 am

(ऐ रसूल) बनी इसराइल से पूछो कि हम ने उन को कैसी कैसी रौशन निशानियाँ दी और जब किसी शख्स के पास ख़ुदा की नेअमत (किताब) आ चुकी उस के बाद भी उस को बदल डाले तो बेषक़ ख़ुदा सख़्त अज़ाब वाला है (211)
जिन लोगों ने कुफ्र इख़्तेयार किया उन के लिये दुनिया की ज़रा सी जि़न्दगी ख़ूब अच्छी दिखायी गयी है और इमानदारों से मसखरापन करते हैं हालाकि क़यामत के दिन परहेज़गारों का दरजा उनसे (कहीं) बढ़ चढ़ के होगा और ख़ुदा जिस को चाहता है बे हिसाब रोज़ी अता फरमाता है (212)
(पहले) सब लोग एक ही दीन रखते थे (फिर आपस में झगड़ने लगे तब) ख़ुदा ने नजात से ख़ुशख़बरी देने वाले और अज़ाब से डराने वाले पैग़म्बरों को भेजा और इन पैग़म्बरों के साथ बरहक़ किताब भी नाजि़ल की ताकि जिन बातों में लोग झगड़ते थे किताबे ख़़ुदा (उसका) फ़ैसला कर दे और फिर अफ़सोस तो ये है कि इस हुक्म से इख़्तेलाफ किया भी तो उन्हीं लोगों ने जिन को किताब दी गयी थी और वह भी जब उन के पास ख़ुदा के साफ एहकाम आ चुके उसके बाद और वह भी आपस की शरारत से तब ख़ुदा ने अपनी मेहरबानी से (ख़ालिस) ईमानदारों को वह राहे हक़ दिखा दी जिस में उन लोगों ने इख़्तेलाफ डाल रखा था और ख़़ुदा जिस को चाहे राहे रास्त की हिदायत करता है (213)
क्या तुम ये ख़्याल करते हो कि बेह्श्ते में पहुँच ही जाओगे हालाकि अभी तक तुम्हे अगले ज़माने वालों की सी हालत नहीं पेश आयी कि उन्हें तरह तरह की तक़लीफों (फाक़ा कशी मोहताजी) और बीमारी ने घेर लिया था और ज़लज़ले में इस क़दर झिंझोडे़ गए कि आखि़र (आजि़ज़ हो के) पैग़म्बर और ईमान वाले जो उन के साथ थे कहने लगे देखिए ख़ुदा की मदद कब (होती) है देखो (घबराओ नहीं) ख़़ुदा की मदद यक़ीनन बहुत क़रीब है (214)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग पूछते हैं कि हम ख़ुदा की राह में क्या खर्च करें (तो तुम उन्हें) जवाब दो कि तुम अपनी नेक कमाई से जो कुछ खर्च करो तो (वह तुम्हारे माँ बाप और क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजो और परदेसियों का हक़ है और तुम कोई नेक सा काम करो ख़़ुदा उसको ज़रुर जानता है (215)
(मुसलमानों) तुम पर जिहाद फर्ज़ किया गया अगरचे तुम पर शाक़ ज़रुर है और अजब नहीं कि तुम किसी चीज़ (जिहाद) को नापसन्द करो हालाकि वह तुम्हारे हक़ में बेहतर हो और अजब नहीं कि तुम किसी चीज़ को पसन्द करो हालाॅकि वह तुम्हारे हक़ में बुरी हो और ख़ुदा (तो) जानता ही है मगर तुम नही जानते हो (216)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग हुरमत वाले महीनों की निस्बत पूछते हैं कि (आया) जिहाद उनमें जायज़ है तो तुम उन्हें जवाब दो कि इन महीनों में जेहाद बड़ा गुनाह है और ये भी याद रहे कि ख़़ुदा की राह से रोकना और ख़ुदा से इन्कार और मस्जिदुल हराम (काबा) से रोकना और जो उस के एहल है उनका मस्जिद से निकाल बाहर करना (ये सब) ख़ुदा के नज़दीक इस से भी बढ़कर गुनाह है और फि़तना परदाज़ी कुश्ती ख़़ून से भी बढ़ कर है और ये कुफ़्फ़ार हमेशा तुम से लड़ते ही चले जाएँगें यहाँ तक कि अगर उन का बस चले तो तुम को तुम्हारे दीन से फिरा दे और तुम में जो शख्स अपने दीन से फिरा और कुफ्ऱ की हालत में मर गया तो ऐसों ही का किया कराया सब कुछ दुनिया और आखे़रत (दोनों) में अकारत है और यही लोग जहन्नुमी हैं (और) वह उसी में हमेशा रहेंगें (217)
बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और ख़ुदा की राह में हिजरत की और जिहाद किया यही लोग रहमते ख़ुदा के उम्मीदवार हैं और ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (218)
(ऐ रसूल) तुमसे लोग शराब और जुए के बारे में पूछते हैं तो तुम उन से कह दो कि इन दोनो में बड़ा गुनाह है और कुछ फायदे भी हैं और उन के फायदे से उन का गुनाह बढ़ के है और तुम से लोग पूछते हैं कि ख़ुदा की राह में क्या ख़र्च करे तुम उनसे कह दो कि जो तुम्हारे ज़रुरत से बचे यूँ ख़ुदा अपने एहकाम तुम से साफ़ साफ़ बयान करता है (219)
ताकि तुम दुनिया और आखि़रत (के मामलात) में ग़ौर करो और तुम से लोग यतीमों के बारे में पूछते हैं तुम (उन से) कह दो कि उनकी (इसलाह दुरुस्ती) बेहतर है और अगर तुम उन से मिलजुल कर रहो तो (कुछ हर्ज) नहीं आखि़र वह तुम्हारें भाई ही तो हैं और ख़ुदा फ़सादी को ख़ैर ख़्वाह से (अलग ख़ूब) जानता है और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम को मुसीबत में डाल देता बेशक ख़ुदा ज़बरदस्त हिक़मत वाला है (220)

पेट की आग

Written By Bisari Raahein on मंगलवार, 30 अप्रैल 2019 | 8:03 pm

मौलिक रचना

कविता का शीर्षक - पेट की आग

तप रहा है
सूरज बहुत
आग रही
है बरस ।
जला रहा
सब कुछ
नहीं करता
कोई तरस ।
पशु-पक्षी भी
दुबके पड़े हैं
किसी न किसी
छाँव में ।
गली – नुक्कड़
सुन्न हैं सब
जैसे रहता ही
न हो कोई
गाँव में ।
मुंह – सिर
गमछे से लपेटे
वो चला रहा
कुदाल है ।
अपने आप से
बातें करता
विचारों का बुन रहा
जाल है ।
सोचता है कभी
सब कुछ छोड़
जाऊं भाग ....
पर
जानता है वो
“कायत”
ये आग तो कुछ नहीं
सबसे बड़ी होती है
पेट की आग.....

कृष्ण कायत
मंड़ी डबवाली ।

ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है

और बाज़ बन्दे ऐसे हैं कि जो दुआ करते हैं कि ऐ मेरे पालने वाले मुझे दुनिया में नेअमत दे और आखि़रत में सवाब दे और दोज़ख़ की आग से बचा (201)
यही वह लोग हैं जिनके लिए अपनी कमाई का हिस्सा चैन है (202)
और ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है और इन गिनती के चन्द दिनों तक (तो) ख़ुदा का जि़क्र करो फिर जो शख्स जल्दी कर बैठै और (मिना) से और दो ही दिन में चल ख़ड़ा हो तो उस पर भी गुनाह नहीं है और जो (तीसरे दिन तक) ठहरा रहे उस पर भी कुछ गुनाह नही लेकिन यह रियायत उसके वास्ते है जो परहेज़गार हो, और खु़दा से डरते रहो और यक़ीन जानो कि एक दिन तुम सब के सब उसकी तरफ क़ब्रों से उठाए जाओगे (203)
ऐ रसूल बाज़ लोग मुनाफिक़ीन से ऐसे भी हैं जिनकी चिकनी चुपड़ी बातें (इस ज़रा सी) दुनयावी जि़न्दगी में तुम्हें बहुत भाती है और वह अपनी दिली मोहब्बत पर ख़ुदा को गवाह मुक़र्रर करते हैं हालाकि वह तुम्हारे दुश्मनों में सबसे ज़्यादा झगड़ालू हैं (204)
और जहाँ तुम्हारी मोहब्बत से मुँह फेरा तो इधर उधर दौड़ धूप करने लगा ताकि मुल्क में फ़साद फैलाए और ज़राअत {खेती बाड़ी} और मवेषी का सत्यानास करे और ख़ुदा फसाद को अच्छा नहीं समझता (205)
और जब कहा जाता है कि ख़ुदा से डरो तो उसे ग़ुरुर गुनाह पर उभारता है बस ऐसे कम्बख़्त के लिए जहन्नुम ही काफ़ी है और बहुत ही बुरा ठिकाना है (206)
और लोगों में से ख़ुदा के बन्दे कुछ ऐसे हैं जो ख़़ुदा की (ख़ुशनूदी) हासिल करने की ग़रज़ से अपनी जान तक बेच डालते हैं और ख़ुदा ऐसे बन्दों पर बड़ा ही शफ़्क़्क़त वाला है (207)
ईमान वालों तुम सबके सब एक बार इस्लाम में (पूरी तरह ) दाखि़ल हो जाओ और शैतान के क़दम ब क़दम न चलो वह तुम्हारा यक़ीनी ज़ाहिर ब ज़ाहिर दुश्मन है (208)
फिर जब तुम्हारे पास रौशन दलीले आ चुकी उसके बाद भी डगमगा गए तो अच्छी तरह समझ लो कि ख़ुदा (हर तरह) ग़ालिब और तदबीर वाला है (209)
क्या वह लोग इसी के मुन्तजि़र हैं कि सफेद बादल के साय बानो की आड़ में अज़ाबे ख़ुदा और अज़ाब के फ़रिश्ते उन पर ही आ जाए और सब झगड़े चुक ही जाते हालाकि आखि़र कुल उमुर ख़़ुदा ही की तरफ रुजू किए जाएँगे (210)

मुझे गर्व है ,, मुझे खुशी है ,

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 28 अप्रैल 2019 | 7:08 am

मुझे गर्व है ,, मुझे खुशी है ,, मोदी सरकार के खिलाफ मेरे किसी आरोप का भक्तो के पास कोई तार्किक तथ्यात्मक जवाब नही मिला ,, मेरे हर वाजिब तहज़ीब की ज़ुबान में लिखे गए सवाल पर कुछ तंख़य्ये ,, कुछ समर्थक ,, कुछ की बोखलाहट रही ,,झुंझला कर इन लोगों ने भाषा मे भी अपना आपा खोया ,, बदतहजीबी के दायरे तोड़ दिए ,, मेरे हर सवाल के जवाब में सिर्फ इन्होंने बिना जवाब दिए , मेरी पार्टी के ,, देश के लिए शहीद होने वाले ,, त्याग करने वाले , महिला पुरुषों के लिए बेहुदा , अश्लील , तर्कविहीन टिप्पणियां की है जो इनकी परवरिश को झलकाती है , लेकिन यह मेरे भाई है ,, मुझे खुशी है कुछ ने इन्हें सुधारने के लिए आयना दिखाया , तो बहुत उन लोगो पर शर्मिंदगी भी हुई जो खुद को पार्टी के , पदाधिकारी , नेता बताकर अपना वर्चस्व दिखाते है , लेकिन उनके मुंह से इनके अपने नेताओं के लिए , अश्लील बेहुदा टिप्पणियों पर भी उफ्फ तक न निकली ,, क्योंकि यह लोग सही मायनों में ,,,,,?????अख्तर

फिर जब तुम अरक़ान हज बजा ला चुको तो तुम इस तरह जि़क्रे ख़ुदा करो जिस तरह तुम अपने बाप दादाओं का जि़क्र करते हो

और तुम उन (मुशरिकों) को जहाँ पाओ मार ही डालो और उन लोगों ने जहाँ (मक्का) से तुम्हें शहर बदर किया है तुम भी उन्हें निकाल बाहर करो और फितना परदाज़ी (शिर्क) खूँरेज़ी से भी बढ़ के है और जब तक वह लोग (कुफ़्फ़ार) मस्जि़द हराम (काबा) के पास तुम से न लडे़ तुम भी उन से उस जगह न लड़ों बस अगर वह तुम से लड़े तो बेखटके तुम भी उन को क़त्ल करो काफि़रों की यही सज़ा है (191)
फिर अगर वह लोग बाज़ रहें तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (192)
और उन से लड़े जाओ यहाँ तक कि फ़साद बाक़ी न रहे और सिर्फ़ ख़ुदा ही का दीन रह जाए फिर अगर वह लोग बाज़ रहे तो उन पर ज़्यादती न करो क्यांेकि ज़ालिमों के सिवा किसी पर ज़्यादती (अच्छी) नहीं (193)
हुरमत वाला महीना हुरमत वाले महीने के बराबर है (और कुछ महीने की खुसूसियत नहीं) सब हुरमत वाली चीजे़ एक दूसरे के बराबर हैं बस जो शख्स तुम पर ज़्यादती करे तो जैसी ज़्यादती उसने तुम पर की है वैसी ही ज़्यादती तुम भी उस पर करो और ख़ुदा से डरते रहो और खू़ब समझ लो कि ख़ुदा परहेज़गारों का साथी है (194)
और ख़ुदा की राह में ख़र्च करो और अपने हाथ जान हलाकत मे न डालो और नेकी करो बेशक ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता है (195)
और सिर्फ़ ख़ुदा ही के वास्ते हज और उमरा को पूरा करो अगर तुम बीमारी वगै़रह की वजह से मजबूर हो जाओ तो फिर जैसी क़ुरबानी मयस्सर आये (कर दो) और जब तक कु़रबानी अपनी जगह पर न पहुँय जाये अपने सर न मुँडवाओ फिर जब तुम में से कोई बीमार हो या उसके सर में कोई तकलीफ हो तो (सर मुँडवाने का बदला) रोजे़ या खै़रात या कु़रबानी है बस जब मुतमइन रहों तो जो शख्स हज तमत्तो का उमरा करे तो उसको जो कु़रबानी मयस्सर आये करनी होगी और जिस से कु़रबानी ना मुमकिन हो तो तीन रोजे़ ज़ामानए हज में (रखने होगें) और सात रोजे़ जब तुम वापस आओ ये पूरी दहाई है ये हुक्म उस शख्स के वास्ते है जिस के लड़के बाले मस्जि़दुल हराम (मक्का) के बाशिन्दे न हो और ख़ुदा से डरो और समझ लो कि ख़ुदा बड़ा सख़्त अज़ाब देने वाला है (196)
हज के महीने तो (अब सब को) मालूम हैं (शव्वाल, ज़ीक़ादा, जिलहज) बस जो शख्स इन महीनों में अपने ऊपर हज लाजि़म करे तो (एहराम से आखि़र हज तक) न औरत के पास जाए न कोई और गुनाह करे और न झगडे़ और नेकी का कोई सा काम भी करों तो ख़ुदा उस को खू़ब जानता है और (रास्ते के लिए) ज़ाद राह मुहिय्या करो और सब मे बेहतर ज़ाद राह परहेज़गारी है और ऐ अक़्लमन्दों मुझ से डरते रहो (197)
इस में कोई इल्ज़ाम नहीं है कि (हज के साथ) तुम अपने परवरदिगार के फज़ल (नफ़ा तिजारत) की ख़्वाहिश करो और फिर जब तुम अरफात से चल खड़े हो तो मशअरुल हराम के पास ख़ुदा का जिक्र करो और उस की याद भी करो तो जिस तरह तुम्हे बताया है अगरचे तुम इसके पहले तो गुमराहो से थे (198)
फिर जहाँ से लोग चल खड़े हों वहीं से तुम भी चल खड़े हो और उससे मग़फिरत की दुआ माँगों बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (199)
फिर जब तुम अरक़ान हज बजा ला चुको तो तुम इस तरह जि़क्रे ख़ुदा करो जिस तरह तुम अपने बाप दादाओं का जि़क्र करते हो बल्कि उससे बढ़ कर के फिर बाज़ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि ऐ मेरे परवरदिगार हमको जो (देना है) दुनिया ही में दे दे हालाकि (फिर) आखि़रत में उनका कुछ हिस्सा नहीं (200)

मै पप्पू हु (साल मे 52 बच्चे और सप्ताह मे एक बच्चे को जन्म )

Written By SACCHAI on शनिवार, 27 अप्रैल 2019 | 9:59 pm

मै पप्पू हु (साल मे 52 बच्चे और सप्ताह मे एक बच्चे को जन्म )

एक औरत 52 बच्चे साल मे और सप्ताह मे एक बच्चे को जन्म दे सकती है , अरे ये मै नहीं मगर ग्रेट ग्रेट सायंटिस्ट राहुल बाबा बोल रहे है अब राहुल गांधी कब क्या बोल दे कोई नहीं जानता यहाँ तक की उनको भी पता नहीं होता है की वो क्या बोल रहे है ..... खैर आलू से सोना बनाने की मशीन उन्होने तैयार कर ली है जिसके चलते और उसी मशीन के भरोसे वो कभी 72000 तो कभी 72000 करोड़ रुपये हर गरीब परिवार को देने की बात कर रहे है

https://www.youtube.com/watch?v=39My8xcT7iA

अपनी चुनावी सभा मे 52 बच्चे को एक साल मे जन्म दे सकती है एक महिला ऐसा कहा तब मानो मुझे ऐसा लगा की ये सायंटिस्ट नहीं मगर ........ आग्रा के पागलखाने से भागा कोई पागल तो नहीं बोल रहा ? क्या लंबी लंबी फेंकता है रे ........ और ताजुब्ब की बात ये है की ये कभी अपनी कोई बात का प्रमाण नहीं दे सकता फिर भी इसे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है

लगता है की 100 साल पुरानी पार्टी की ये अर्थी तैयार करके ही रहेगा कभी बताता है की पेंट और शर्ट मे पॉलिटिक्स है तो कभी कहेता है की मै पप्पू हु .......... 

खैर बाते तो होती रहेगी दोस्तो मगर उससे पहले ये वीडियो जरूर देखना और लाइक भी करना और हो सके तो चेनल को सबस्क्राइब करके बेल आइकॉन दबा ही देना




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वकील और आम आदमी की क़ानूनी जानकारी में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ है

वकील और आम आदमी की क़ानूनी जानकारी में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ है ,आम आदमी जज़्बात से चलता है ,जबकि वकील क़ानून ,,संविधान ,न्यायलयों की मर्यादाओं का ज्ञाता भी होता है और उनका मुहाफ़िज़ भी ,लेकिन आये दिन जज़्बात में बहकर सुप्रीमकोर्ट के फैसलों के खिलाफ ,संविधान की भावना ,न्यायिक व्यवस्था के खिलाफ जब वोह किसी आपराधिक मामले में पैरवी नहीं करने का फैसला लेता है तो अजीब सा लगता है ,कोई व्यक्ति अंतरात्मा की आवाज़ पर ऐसा फैसला ले तो समझ में आता है ,लेकिन अगर सामूहिक रूप संगठनात्मक अनुशासन में बाँध कर ऐसी व्यवस्था कर ,किसी विशेष मुक़दमे में पैरवी का बहिष्कार करने की घोषणा की जाए तो विधि सम्मत नहीं लगती ,,,,,,,,,,,,जज़्बात के हिसाब से ,मयादाओं के हिसाब से सामजिक सुधार के हिसाब से व्यक्तिगत व्यक्तिगत ऐसे फैसले लेना वाजिब है ,,,लेकिन क़ानूनी संस्थाए ऐसा किसी भी सूरत में नहीं कर सकती ,,देश का संविधान है ,,प्रत्येक व्यक्ति को आपराधिक मामले में उसके पसंद का वकील करने का अधिकार है ,क़ानूनी अधिकार है ,अगर वोह गरीब है तो ऐसे व्यक्ति को सरकारी खर्च पर ,,वकील दिया जाएगा ,,देश में हर ज़िले में ऐसे लोगो की पैरवी के लिए ,लीगल ऑथोरिटी के पेनल बने है ,,सुप्रीमकोर्ट ने बिना पैरवी के अधीनस्थ न्यायलय द्वारा दी गयी कई सज़ाओं के फैसले बदले है ,ऐसे में अगर हम ,,किसी सनसनीखेज़ ,,नृशंस हत्या के मामले में पैरवी नहीं करने का सामूहिक संस्थागत फैसला लेते है ,,तो ऐसा फैसला मुल्ज़िम को ही मदद करता है ,,होना यह चाहिए ,अपना विरोध जताने के लिए ,जो मृतक है उनको इंसाफ दिलाने के लिए ,,समाज को एक सबक़ दिखाने के लिए सामूहिक रूप से निशुल्क ऐसे मामले में फरियादी की कंसेंट लेकर ,,उसकी तरफ से ईमानदारी से पैरवी करने का फैसला लिया जाए ,अभियुक्त का वकील कोई भी हो यह उसकी नैतिकता का मामला है ,,लेकिन अगर हम उसे भी न्याय का पूरा संवैधानिक अधिकार देकर ,अपनी मज़बूत पैरवी करेंगे ,,गवाहों को सुरक्षा दिलवाएंगे ,गवाहों की विधिक मदद कर उनके बयांन दिलवाएंगे ,सफाई में जिरह के दौरान पूंछे जाने वाले सवालों के जवाब अग्रिम दिलवाएंगे ,,मुक़दमे की ठीक से पैरवी करेंगे तो हम ऐसे नृशंस हत्यारे को म्रत्युदंड दिलवाने में कामयाब हो सकेंगे ,किसी मुक़दमे के फैसले के बहिष्कार से हम अखबारों की सुर्खियां तो बन सकते है ,लेकिन दोस्तों हम वकील है ,,जानते है ,ऐसी पैरवी को क़ानूनी रूप से रोक भी नहीं सकते ,,सुप्रीमकोर्ट ने इसे अवमानना भी क़रार दिया है ,क्योंकि ऐसा करके हम उसके मुक़दमे में उसके न्यायमित्र को दबाव की बात कहने का मौक़ा दे रहे है ,तो फिर हो जाए सभी वकील भीमगंजमंडी कोटा के नृशंश हत्याकांड मामले में ज़मीर की आवाज़ सुनकर ,,मुल्ज़िम के खिलाफ फरियादी की तरफ से फरियादी को इंसाफ दिलाने और दोषी लोगों को एक व्यवस्थित विधिक ट्रायल के बाद फांसी के फंदे पर चढ़ाने ,स्पीडी ट्रायल करवाने का संकल्प ,लेंगे ,लेंगे ना ,ऐसा संकल्प ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

तौबा क़ुबूल की और तुम्हारी ख़ता से दर गुज़र किया

फिर जो सुन चुका उसके बाद उसे कुछ का कुछ कर दे तो उस का गुनाह उन्हीं लोगों की गरदन पर है जो उसे बदल डालें बेशक ख़ुदा सब कुछ जानता और सुनता है (181)
(हाँ अलबत्ता) जो शख्स वसीयत करने वाले से बेजा तरफ़दारी या बे इन्साफी का ख़ौफ रखता है और उन वारिसों में सुलह करा दे तो उस पर बदलने का कुछ गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है (182)
ऐ ईमानदारों रोज़ा रखना जिस तरह तुम से पहले के लोगों पर फर्ज़ था उसी तरह तुम पर भी फर्ज़ किया गया ताकि तुम उस की वजह से बहुत से गुनाहों से बचो (183)
(वह भी हमेशा नहीं बल्कि) गिनती के चन्द रोज़ इस पर भी (रोज़े के दिनों में) जो शख्स तुम में से बीमार हो या सफर में हो तो और दिनों में जितने क़ज़ा हुए हो) गिन के रख ले और जिन्हें रोज़ा रखने की कू़वत है और न रखें तो उन पर उस का बदला एक मोहताज को खाना खिला देना है और जो शख्स अपनी ख़ुशी से भलाई करे तो ये उस के लिए ज़्यादा बेहतर है और अगर तुम समझदार हो तो (समझ लो कि फिदये से) रोज़ा रखना तुम्हारे हक़ में बहरहाल अच्छा है (184)
(रोज़ों का) महीना रमज़ान है जिस में क़ुरान नाजि़ल किया गया जो लोगों का रहनुमा है और उसमें रहनुमाई और (हक़ व बातिल के) तमीज़ की रौशन निषानियाँ हैं (मुसलमानों) तुम में से जो शख्स इस महीनें में अपनी जगह पर हो तो उसको चाहिए कि रोज़ा रखे और जो शख्स बीमार हो या फिर सफ़र में हो तो और दिनों में रोज़े की गिनती पूरी करे ख़ुदा तुम्हारे साथ आसानी करना चाहता है और तुम्हारे साथ सख़्ती करनी नहीं चाहता और (शुमार का हुक्म इस लिए दिया है) ताकि तुम (रोज़ो की) गिनती पूरी करो और ताकि ख़ुदा ने जो तुम को राह पर लगा दिया है उस नेअमत पर उस की बड़ाई करो और ताकि तुम शुक्र गुज़ार बनो (185)
(ऐ रसूल) जब मेरे बन्दे मेरा हाल तुमसे पूछे तो (कह दो कि) मै उन के पास ही हूँ और जब मुझसे कोई दुआ माँगता है तो मै हर दुआ करने वालों की दुआ (सुन लेता हूँ और जो मुनासिब हो तो) क़ुबूल करता हूँ बस उन्हें चाहिए कि मेरा भी कहना माने) और मुझ पर ईमान लाएँ (186)
ताकि वह सीधी राह पर आ जाए (मुसलमानों) तुम्हारे वास्ते रोज़ों की रातों में अपनी बीवियों के पास जाना हलाल कर दिया गया औरतें (गोया) तुम्हारी चोली हैं और तुम (गोया उन के दामन हो) ख़ुदा ने देखा कि तुम (गुनाह) करके अपना नुकसान करते (कि आँख बचा के अपनी बीबी के पास चले जाते थे) तो उसने तुम्हारी तौबा क़ुबूल की और तुम्हारी ख़ता से दर गुज़र किया बस तुम अब उनसे हम बिस्तरी करो और (औलाद) जो कुछ ख़ुदा ने तुम्हारे लिए (तक़दीर में) लिख दिया है उसे माँगों और खाओ और पियो यहाँ तक कि सुबह की सफेद धारी (रात की) काली धारी से आसमान पर पूरब की तरफ़ तक तुम्हें साफ नज़र आने लगे फिर रात तक रोज़ा पूरा करो और हाँ जब तुम मस्जि़दों में एतेकाफ़ करने बैठो तो उन से (रात को भी) हम बिस्तरी न करो ये ख़ुदा की (मुअय्युन की हुई) हदे हैं तो तुम उनके पास भी न जाना यूँ खुल्लम खुल्ला ख़ुदा अपने एहकाम लोगों के सामने बयान करता है ताकि वह लोग (नाफ़रमानी से) बचें (187)
और आबस में एक दूसरे का माल नाहक़ न खाओ और न माल को (रिश्वत में) हुक्काम के यहाँ झोंक दो ताकि लोगों के माल में से (जो) कुछ हाथ लगे नाहक़ ख़ुर्द बुर्द कर जाओ हालाकि तुम जानते हो (188)
(ऐ रसूल) तुम से लोग चाँद के बारे में पूछते हैं (कि क्यो घटता बढ़ता है) तुम कह दो कि इससे लोगों के (दुनयावी) अम्र और हज के अवक़ात मालूम होते है और ये कोई भली बात नही है कि घरो में पिछवाड़े से फाँद के) आओ बल्कि नेकी उसकी है जो परहेज़गारी करे और घरों में आना हो तो) उनके दरवाजो़ं की तरफ से आओ और ख़ुदा से डरते रहो ताकि तुम मुराद को पहुँचो (189)
और जो लोग तुम से लड़े तुम (भी) ख़ुदा की राह में उनसे लड़ो और ज़्यादती न करो (क्योंकि) ख़ुदा ज़्यादती करने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता (190)

कुछ माल छोड़ जाएं तो माँ बाप और क़राबतदारों के लिए अच्छी वसीयत करें जो ख़ुदा से डरते हैं उन पर ये एक हक़ है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019 | 6:41 am

और जब उन से कहा जाता है कि जो हुक्म ख़ुदा की तरफ से नाजि़ल हुआ है उस को मानो तो कहते हैं कि नहीं बल्कि हम तो उसी तरीक़े पर चलेंगे जिस पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया अगरचे उन के बाप दादा कुछ भी न समझते हों और न राहे रास्त ही पर चलते रहे हों (170)
और जिन लोगों ने कुफ्र एख़्तेयार किया उन की मिसाल तो उस शख्स की मिसाल है जो ऐसे जानवर को पुकार के अपना हलक़ फाड़े जो आवाज़ और पुकार के सिवा सुनता (समझता ख़ाक) न हो ये लोग बहरे गूँगे अन्धें हैं कि ख़ाक नहीं समझते (171)
ऐ ईमानदारों जो कुछ हम ने तुम्हें दिया है उस में से सुथरी चीज़ें (षौक़ से) खाओं और अगर ख़ुदा ही की इबादत करते हो तो उसी का शुक्र करो (172)
उसने तो तुम पर बस मुर्दा जानवर और खू़न और सूअर का गोश्त और वह जिस पर ज़िबह के वक़्त ख़ुदा के सिवा और किसी का नाम लिया गया हो हराम किया है बस जो शख्स मजबूर हो और सरकशी करने वाला और ज़्यादती करने वाला न हो (और उनमे से कोई चीज़ खा ले) तो उसपर गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (173)
बेशक जो लोग इन बातों को जो ख़ुदा ने किताब में नाजि़ल की है छुपाते हैं और उसके बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनयावी नफ़ा) ले लेतें है ये लोग बस अँगारों से अपने पेट भरते हैं और क़यामत के दिन ख़ुदा उन से बात तक तो करेगा नहीं और न उन्हें (गुनाहों से) पाक करेगा और उन्हीं के लिए दर्दनाक अज़ाब है (174)
यही लोग वह हैं जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही मोल ली और बख्शिश (ख़ुदा की) के बदले अज़ाब बस वह लोग दोज़ख़ की आग को क्योंकर बरदाश्त करेंगे (175)
ये इसलिए कि ख़ुदा ने बरहक़ किताब नाजि़ल की और बेशक जिन लोगों ने किताबे ख़ुदा में रद्दो बदल की वह लोग बड़े पल्ले दरजे की मुख़ालफत में हैं (176)
नेकी कुछ यही थोड़ी है कि नमाज़ में अपने मुँह पूरब या पश्चिम की तरफ़ कर लो बल्कि नेकी तो उसकी है जो ख़ुदा और रोज़े आखि़रत और फरिश्तों और ख़ुदा की किताबों और पैग़म्बरों पर ईमान लाए और उसकी उलफ़त में अपना माल क़राबत दारों और यतीमों और मोहताजो और परदेसियों और माँगने वालों और लौन्डी ग़ुलाम (के गुलू खलासी) में सर्फ करे और पाबन्दी से नमाज़ पढे़ और ज़कात देता रहे और जब कोई एहद किया तो अपने क़ौल के पूरे हो और फ़क्र व फाक़ा रन्ज और घुटन के वक़्त साबित क़दम रहे यही लोग वह हैं जो दावे ईमान में सच्चे निकले और यही लोग परहेज़गार है (177)
ऐ मोमिनों जो लोग (नाहक़) मार डाले जाएँ उनके बदले में तुम को जान के बदले जान लेने का हुक्म दिया जाता है आज़ाद के बदले आज़ाद और ग़ुलाम के बदले ग़ुलाम और औरत के बदले औरत बस जिस (क़ातिल) को उसके ईमानी भाई के़सास की तरफ से कुछ माफ़ कर दिया जाये तो उसे भी उसके क़दम ब क़दम नेकी करना और ख़ुश मआमलती से (ख़ून बहा) अदा कर देना चाहिए ये तुम्हारे परवरदिगार की तरफ आसानी और मेहरबानी है फिर उसके बाद जो ज़्यादती करे तो उस के लिए दर्दनाक अज़ाब है (178)
और ऐ अक़लमनदों केसास (के क़वाएद मुक़र्रर कर देने) में तुम्हारी जि़न्दगी है (और इसीलिए जारी किया गया है ताकि तुम खुनरेज़ी से) परहेज़ करो (179)
(मुसलमानों) तुम को हुक्म दिया जाता है कि जब तुम में से किसी के सामने मौत आ खड़ी हो बशर्ते कि वह कुछ माल छोड़ जाएं तो माँ बाप और क़राबतदारों के लिए अच्छी वसीयत करें जो ख़ुदा से डरते हैं उन पर ये एक हक़ है (180)

छोड़ दो इस गंदी आदत को

Written By Safat Alam Taimi on बुधवार, 24 अप्रैल 2019 | 1:45 pm

ऊपर वाले ने इंसानों को दूसरी सभी प्राणियों पर प्रधानता दी है, समझ बूझ दिया और चेतना प्रदान की है, इस बुद्धि द्वारा मनुष्य अच्छाई और बुराई, लाभ और हानि में अंतर कर सकता है। जबकि बुद्धि से वंचित इंसान जानवरों की सी हरकतें करने लगता है। बल्कि जानवर भी उससे बेहतर होते हैं, जो आदमी बुद्धि खो दे वह अपने घर, परिवार और समाज के लिए बोझ बन जाता है।
लेकिन विडंबना यह है कि आज की दुनिया जिसे सभ्य और प्रगतिशील दुनिया का नाम दिया जाता है, इस दुनिया में रहने वाले कितने तथाकथित सभ्य लोग पागलों की नक़्क़ाली करते हैं, शराब का सेवन और मदिरापान का उपयोग करके अपनी बुद्धि को अपने पैरों तले रौंदते हैं। फिर वे अपनी मानवता खो कर पशुओं जैसा व्यवहार करने लगते हैं, स्वयं पर नियंत्रण खो बैठते हैं, खुद को हानि पहुंचाते हैं, उनकी ज़ींदगी में उनके बच्चे अनाथ हो जाते और उनकी पत्नि विधवा हो जाती है। ऐसे लोग जीवन की पांच प्रमुख आवश्यकताओं का खून करते हैं, धर्म का खून करते हैं, माल बर्बाद करते हैं, इज़्ज़त का हनन करते हैं, उनके सामने माँ बहन और बेटी का कोई सम्मान नहीं होता, वह नशे में दरिंदे बन जाते हैं, उन्हें न अपनी जान की और न दूसरों की जान की परवाह होती है। वे स्वयं कों,अपने परिवार को और अपने समाज को नुकसान पहुंचाते हैं और परिवार पर बोझ बन जाते हैं।
दुनिया के अपराधियों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने शराब के नशे में धुत होकर बड़े बड़े अपराध किए हैं। लेकिन फिर भी शराबी स्वयं को सभ्य समझता है, यह मूर्खता नहीं तो और क्या है।?
शराबी शराब पी कर अपने शरीर को गंवाता है, अपने स्वास्थ्य का खून करता हैः
बी बी सी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि शराब हर तरीक़े से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और अधिक या कम पीने से कोई अंतर नहीं पड़ता।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि शराब से हर साल दुनिया भर में तीन मिलियन लोग मरते हैं।
दुनिया भर में मरने वाले लोगों में हर बीस में से एक व्यक्ति की मृत्यु का कारण शराब पीना होता है।
इस्लाम ने शराब को वर्जित ठहराया है। क़ुरआन ने कहाः
“ऐ ईमान लाने वालो! ये शराब और जुआ और देवस्थान और पाँसे तो गन्दे शैतानी काम है। अतः तुम इनसे अलग रहो, ताकि तुम सफल हो। शैतान तो बस यही चाहता है कि शराब और जुए के द्वारा तुम्हारे बीच शत्रुता और द्वेष पैदा कर दे और तुम्हें अल्लाह की याद से और नमाज़ से रोक दे, तो क्या तुम बाज़ न आओगे?।”
यह पहला मोक़ा था जब शराब के हराम होने का आदेश उतरा था, मदीना में उसकी घोषणा की जाती है, कि आज से शराब हराम कर दी गई, इतिहास गवाह है कि जब सहाबा के कानों तक शराब की निषेधता की आयतें पहुंचीं तो जिसने मुंह में जाम रखा था उगल दिया, अपने हाथ के गिलास को फेंक दिया और मटकों को बहा दिया यहाँ तक कि लगता था कि मदीना में बाढ़ आ चुका है। कोई इंटेलिजेंस नहीं है, कोई जांच एजेंसी नहीं है, कोई धमकी और सख्ती नहीं है, उन्होंने यह भी नहीं कहा कि पहले तहक़ीक़ कर लेते हैं, यह भी नहीं कहा कि इतना जल्द कैसे छोड़ दें कि हम सालों से इसके रसिया हैं।
जरा शराब को हराम ठहराने वाली उपर्युक्त आयत पर विचार करें कि कैसे शराब का उल्लेख देवस्थान और पाँसे के साथ किया जा रहा है, जो मूर्ति पूजा के काम हैं, इसी लिए तो शराब के बारे में कहा गया है: शराबी मूर्ति के पुजारी के जैसे है। फिर इसी आयत में कहा गया कि यह गंदी चीज़ है, अपवित्र चीज़ है। शैतानी प्रक्रिया है, इंसान ऐसा काम नहीं करता, फिर शराब छोड़ने पर सफलता की गारंटी दी गई और यह समझाया गया कि सफल लोग शराब नहीं पीते, शराबी असफल होते हैं, निकम्मे होते हैं। फिर शराब पीने को आपसी दुश्मनी और बैर, द्वेष और ईर्ष्या का कारण ठहराया गया जो प्रत्येक सांसारिक बुराइयों की जड़ है। इसी लिए शराब को भी उम्मुल ख़बाएस (सुनन नसाईः 5666) “बुराइयों की माँ” कहा गया है। क्यों कि जो शराबी बन गया उसमें उसके अलावा दूसरे हराम काम करने की हिम्मत पैदा हो जाती है। फिर कहा गया कि शराब के कारण शैतान अल्लाह के ज़िक्र और नमाज़ से रोकता है। अंत में अल्लाह ने कहाः क्या तुम बाज़ न आओगे? यानी इतने सारे नुकसान सुनने के बावजूद क्या अभी भी तुम शराब पीते रहोगे?
शराब और शराब से जुड़े दस व्यक्तियों पर अल्लाह ने लानत भेजी है: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः
अल्लाह लानत है शराब पर, शराब बनाने वाले पर, शराब पिलाने वाले पर, शराब बेचने वाले पर, शराब ख़रीदने वाले पर, उसे तैयार करने वाले पर, उसे तैयार करवाने वाले पर, उसे उठा कर ले जाने वाले और जिसकी ओर ले जाई जा रही है उन सब पर। (सुनन अबी दाऊदः3489)
मानो केवल शराब पीना ही हराम नहीं बल्कि जो जो उसके सहायक बनेंगे, या किसी पीने, बेचने, लेने देने या दिलवाने वाले क मदद करेंगे सभी अभिशाप के योग्य और पापी होंगे। वे लोग भी इसमें शामिल हैं जो शराब की दुकानों के लिए लाइसंस देते हैं और शराब के अड्डे खोलवाते हैं।
जो चीज़ अधिक मात्रा में नशा लाए उसके संबन्ध में इस्लाम का नियम यह है कि उसकी कम मात्रा भी हराम होगी चाहे उससे नशा आए या नहीं। मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहाः
“जिस चीज़ की अधिक मात्रा नशा लाए उसकी कम मात्रा भी हराम है।” (सुनन अबी दाऊदः3681)
उसी प्रकार कहाः “हर नशा लाने वाली चीज़ शराब है और हर शराब हराम है।” (सही मुस्लिमः 2003)
इस्लाम ने मात्र शराब को हराम नहीं ठहरा बल्कि जो लोग शराब पीते हैं ऐसे लोगों के लिए सख्त से सख्त सज़ा निर्धारित की, शराब पीने वाले की सज़ा 80 कोड़े तै किए गए हैं, यदि बार बार पीता है तो बार बार सज़ा मिलेगी, और इस्लाम में सज़ा सब के लिए बराबर है चाहे मालदार हो या ग़रीब।
अंत में हम शराब पीने वाले से अनुरोध करेंगे कि अल्लाह के लिए नशा का सेवन छोड़ दो, उन्हें मत देखो जो स्वयं को पढ़ा लिखा कहते हुए शराब पीते हैं सुन लो! वे जाहिल हैं, बुद्धिहीन हैं। अपनी जान पर दया करो, स्वास्थ्य बड़ी बहुमूल्य चीज़ है, पूरी सम्पत्ति लुटाकर भी दोबारा स्वास्थ्य लौटा नहीं सकते। अपनी संतान पर दया करो, अपनी पत्नी पर दया करो, अपने परिवार पर दया करो, अपने समाज पर दया करो और छोड़ दो इस गंदी आदत को।

कोटा एक विहंगम दृष्टि पुस्तक का विमोचन रिसर्च स्कॉलर एवं हाड़ौती के पर्यटन की दृष्टि से उपयोगी--धारीवाल

कोटा एक विहंगम दृष्टि पुस्तक का विमोचन
रिसर्च स्कॉलर एवं हाड़ौती के पर्यटन की दृष्टि से उपयोगी--धारीवाल
के.डी अब्बासी
कोटा 23 अप्रैल।
राजस्थान सरकार में स्वयतशासन मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने कहा कि कोटा एक विहंगम दृृृष्टि पुस्तक रिसर्च स्कॉलर एवं हाड़ौती के पर्यटन की दृष्टि से उपयोगी साबित होगी। यह विचार उन्होंने विश्व पुस्तक दिवस पर मंगलवार को अपने निवास पर पुस्तक का विमोचन कर व्यक्त किये। उन्होंने कहा इस तरह की पुस्तक का लेखन श्रम साध्य कार्य है और लेखक बधाई के पात्र है।
पुस्तक डॉ. प्रभात कुमार सिंघल सेवानिवृत
संयुक्त निदेशक,सूचना एवम जन सम्पर्क विभाग राजस्थान एवं अधिवक्ता अख्तर खान अकेला ने संयुक्त रूप से लिखी है। डॉ. सिंघल ने बताया कि यह पुस्तक एक जिला गजेटियर के रूप में है जिसमे ज़िले के इतिहास, भूगोल, संस्कृति, प्रशासनिक व्यवस्था एवम विकास को 2018 तक अद्यतन करने का प्रयास किया गया है।
प्रारम्भ में लेखकों ने नगरीय विकास मंत्री धारीवाल का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस अवसर पर डॉ. दीपक श्रीवास्तव ,अधीक्षक राजकीय मंडल पुस्तकालय ,वरिष्ठ पत्रकार नरेश विजय वर्गीय ,पत्रकार के डी अब्बासी सहित कई प्रबुद्ध लोग मौजूद थे

जब पेशवा लोग अपने पैरवो से अपना पीछा छुड़ाएगे

बेषक जिन लोगों नें कुफ्र एख़्तेयार किया और कुफ्र ही की हालत में मर गए उन्ही पर ख़ुदा की और फरिश्तो की और तमाम लोगों की लानत है हमेशा इसी फटकार में रहेंगे (161)
न तो उनके अज़ाब ही में तख़्फ़ीफ़ {कमी} की जाएगी (162)
और न उनको अज़ाब से मोहलत दी जाएगी और तुम्हारा माबूद तो वही यकता ख़ुदा है उस के सिवा कोई माबूद नहीं जो बड़ा मेहरबान रहम वाला है (163)
बेशक आसमान व ज़मीन की पैदाइश और रात दिन के रद्दो बदल कश्तियों (जहाज़ों) में जो लोगों के नफे़ की चीज़े (माले तिजारत वगै़रह दरिया) में ले कर चलते हैं और पानी में जो ख़ुदा ने आसमान से बरसाया फिर उस से ज़मीन को मुर्दा (बेकार) होने के बाद जिला दिया (शादाब कर दिया) और उस में हर कि़स्म के जानवर फैला दिये और हवाओं के चलाने में और अब्र में जो आसमान व ज़मीन के दरमियान ख़ुदा के हुक्म से घिरा रहता है (इन सब बातों में) अक़्ल वालों के लिए बड़ी बड़ी निशनियाँ हैं (164)
और बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो ख़़ुदा के सिवा औरों को भी ख़ुदा का मिसल व शरीक बनाते हैं (और) जैसी मोहब्बत ख़ुदा से रखनी चाहिए वैसी ही उन से रखते हैं और जो लोग ईमानदार हैं वह उन से कहीं बढ़ कर ख़ुदा की उलफ़त रखते हैं और काश ज़ालिमों को (इस वक़्त) वह बात सूझती जो अज़ाब देखने के बाद सूझेगी कि यक़ीनन हर तरह की क़ूवत ख़ुदा ही को है और ये कि बेशक ख़ुदा बड़ा सख़्त अज़ाब वाला है (165)
(वह क्या सख़्त वक़्त होगा) जब पेशवा लोग अपने पैरवो से अपना पीछा छुड़ाएगे और अपनी आखों से (चश्में ख़ुद) अज़ाब को देखेगें और उनके बाहमी ताल्लुक़ात टूट जाएँगे (166)
और पैरव कहने लगेंगे कि अगर हमें कहीं फिर (दुनिया में) पलटना मिले तो हम भी उन से इसी तरह अलग हो जायेंगे जिस तरह एैन वक़्त पर ये लोग हम से अलग हो गए यूँ ही ख़ुदा उन के आमाल को दिखाएगा जो उन्हें (सर तापा पास ही) पास दिखाई देंगें और फिर भला कब वह दोज़ख़ से निकल सकतें हैं (167)
ऐ लोगों जो कुछ ज़मीन में हैं उस में से हलाल व पाकीज़ा चीज़ (शौक़ से) खाओ और शैतान के क़दम ब क़दम न चलो वह तो तुम्हारा ज़ाहिर ब ज़ाहिर दुश्मन है (168)
वह तो तुम्हें बुराई और बदकारी ही का हुक्म करेगा और ये चाहेगा कि तुम बे जाने बूझे ख़ुदा पर बोहतान बाँधों (169)
और जब उन से कहा जाता है कि जो हुक्म ख़ुदा की तरफ से नाजि़ल हुआ है उस को मानो तो कहते हैं कि नहीं बल्कि हम तो उसी तरीक़े पर चलेंगे जिस पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया अगरचे उन के बाप दादा कुछ भी न समझते हों और न राहे रास्त ही पर चलते रहे हों (170)

बस तुम हमारी याद रखो तो मै भी तुम्हारा जि़क्र (खै़र) किया करु

Written By आपका अख्तर खान अकेला on मंगलवार, 23 अप्रैल 2019 | 6:10 am

और तीसरा फायदा ये है ताकि तुम हिदायत पाओ मुसलमानों ये एहसान भी वैसा ही है जैसे हम ने तुम में तुमही में का एक रसूल भेजा जो तुमको हमारी आयतें पढ़ कर सुनाए और तुम्हारे नफ़्स को पाकीज़ा करे और तुम्हें किताब क़ुरान और अक़्ल की बातें सिखाए और तुम को वह बातें बतांए जिन की तुम्हें पहले से खबर भी न थी (151)
बस तुम हमारी याद रखो तो मै भी तुम्हारा जि़क्र (खै़र) किया करुगाँ और मेरा शुक्रिया अदा करते रहो और नाशुक्री न करो (152)
ऐ ईमानदारों मुसीबत के वक़्त सब्र और नमाज़ के ज़रिए से ख़ुदा की मदद माँगों बेशक ख़ुदा सब्र करने वालों ही का साथी है (153)
और जो लोग ख़ुदा की राह में मारे गए उन्हें कभी मुर्दा न कहना बल्कि वह लोग जि़न्दा हैं मगर तुम उनकी जि़न्दगी की हक़ीकत का कुछ भी शऊर नहीं रखते (154)
और हम तुम्हें कुछ खौफ़ और भूख से और मालों और जानों और फलों की कमी से ज़रुर आज़माएगें और (ऐ रसूल) ऐसे सब्र करने वालों को खुशख़बरी दे दो (155)
कि जब उन पर कोई मुसीबत आ पड़ी तो वह (बेसाख़्ता) बोल उठे हम तो ख़ुदा ही के हैं और हम उसी की तरफ लौट कर जाने वाले हैं (156)
उन्हीं लोगों पर उनके परवरदिगार की तरफ से इनायतें हैं और रहमत और यही लोग हिदायत याफ़्ता है (157)
बेशक (कोहे) सफ़ा और (कोह) मरवा ख़ुदा की निशानियों में से हैं बस जो शख़्स ख़ानए काबा का हज या उमरा करे उस पर उन दोनो के (दरमियान) तवाफ़ (आमद ओ रफ्त) करने में कुछ गुनाह नहीं (बल्कि सवाब है) और जो शख़्स खुश खुश नेक काम करे तो फिर ख़ुदा भी क़द्रदान (और) वाकि़फ़कार है (158)
बेशक जो लोग हमारी इन रौशन दलीलों और हिदायतों को जिन्हें हमने नाजि़ल किया उसके बाद छिपाते हैं जबकि हम किताब तौरैत में लोगों के सामने साफ़ साफ़ बयान कर चुके हैं तो यही लोग हैं जिन पर ख़ुदा भी लानत करता है और लानत करने वाले भी लानत करते हैं (159)
मगर जिन लोगों ने (हक़ छिपाने से) तौबा की और अपनी ख़राबी की इसलाह कर ली और जो किताबे ख़ुदा में है साफ़ साफ़ बयान कर दिया बस उन की तौबा मै क़ुबूल करता हूँ और मै तो बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान हूँ (160)

पक्षकार और वकीलों को रोज़ परेशांन होना पढ़ रहा है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on सोमवार, 22 अप्रैल 2019 | 6:38 am

राजस्थान के न्यायालयों में वर्तमान राजस्थान सरकार द्वारा ,,संशोधित क्रिमनल ,सिविल रूल पर स्थगन के आदेश निर्देश के बावजूद भी ,,यहाँ न्यायलयों में बढ़ी हुई कोर्ट फीस वसूली की प्रक्रिया के खिलाफ राजस्थान के वकीलों के नेतृत्व द्वारा कोई कारगर क़दम नहीं उठाने से पक्षकार और वकीलों को रोज़ परेशांन होना पढ़ रहा है ,ज्ञातव्य रहे ,राजस्थान में पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में सिविल ,क्रिमनल संशोधन नियम पारित किये गये थे ,जिसके तहत कोर्ट फीस भी पचास गुना तक वृद्धि कर दी गयी ,,राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व सरकार के पारित निर्देशानुसार ,,हायकोर्ट और अधीनस्थ न्यायलय में बढ़ी हुई कोर्ट फीस वसूली जब शुरू की ,तो वकीलों की आँखे खुली और जयपुर सहित कई वकील संगठनों ने राजस्थान सरकार की नयी सरकार के मुखिया अशोक गहलोत को ज्ञापन देकर पक्षकारों पर पढ़े अतिरिक्त भार को रोकने के लिए कोर्ट फीस की वसूली रोकने की मांग की ,मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वकील और पक्षकारों की व्यथा सुनी और तत्काल एक कमेटी का गठन करने के निर्देश जारी कर ,कमेटी की रिपोर्ट आने तक सभी संशोधन पर स्थगन के निर्देश दिए ,,मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के उक्त निर्देशों के तहत ,राजस्थान सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव रवि शंकर श्रीवास्तव ने 25 फरवरी को प्रमुख शासन सचिव विधि विभाग राजस्थान श्री महावीर प्रसाद को उक्त ज्ञापनों का हवाला देते हुए उक्त संशोधन नियमों को स्थगन के निर्देश जारी कर औचित्य पूर्ण कार्यवाही कर सूचित करने के निर्देश भी दिए ,इस पत्र की प्रतिलिपि श्री राजेश शर्मा कर्नल अध्यक्ष दी बार एसोसिएशन जयपुर को भी भेजा ,अफ़सोस की बात यह है के उक्त पत्र जो 25 फरवरी को कोर्ट फीस स्थगन सहित सम्पूर्ण नियम स्थगन बाबत है ,उसकी पालना सुनिश्चित अभी तक नहीं है ,अफ़सोस यह भी है ,के जो लोग ज्ञापन देकर आये ,जिन लोगों के ज्ञापन पर यह आदेश हुए ,उन्होंने उक्त आदेशों के तहत फॉलोअप तक नहीं किया ,नतीजन पत्र जो सरकार का प्रमुख विधि सचिव के नाम निर्देश था वोह पत्र उनके द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंचाया गया भी या नहीं किसी ने जानकारी लेना तक उचित नहीं समझा ,,राजस्थान में एक मात्र कोटा अभिभाषक परिषद के तात्कालिक अध्यक्ष मनोजपुरी के नेतृत्व में बढ़ी हुई कोर्ट फीस की आलोचना कर वापस लेने की मांग को लेकर एक दिन की सांकेतिक हड़ताल भी रखी ,,अफ़सोस यह भी है के इस मामले में जब मेने पूर्व में एक राइट अप लिखा ,अतिरिक्त मुख्य सचिव रवि शंकर श्रीवास्तव से बात की ,विधि सचिव महावीर प्रसाद शर्मा से बात की ,फिर राजेश कर्नल जयपुर बार एसोसिशन के अध्यक्ष साहब से भी इस पत्र के आदेशों की क्रियान्वित का फॉलोअप करने की गुज़ारिश की लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया ,मेने बार कौंसिल वाईस चेयरमेन जनाब शाहीद हसन साहब को भी अवगत कराया ,,उन्होंने गंभीरता दिखाई ,राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से इस मामले में बात की ,लकिन रजिस्ट्रार जनरल हाईकोर्ट ने उन तक ऐसा कोई पत्र पहुंचने से इंकार किया ऐसा शाहिद हसन साहब ने वार्ता के बाद मुझे बताया ,,मेने बार कौंसिल सदस्य युवा तुर्क समस्याएं निर्भीकता से उठाने के लिए मशहूर भाई डॉक्टर महेश शर्मा से इस समस्या के समाधान के लिए ऑपरेशन करने का निवेदन किया ,,डॉक्टर महेश शर्मा साहब ने खुद इस मामले में प्रमुख विधि सचिव महावीर शर्मा साहब से बात की लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला ,,बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान के चेयरमेन की इस मामले में चुप्पी है ,,बारकोंसिलर भी इस मामले में बहुत सख्त कार्यवाही कर कोई कारगर क़दम नहीं उठा पाए है ,कोटा अभिभाषक परिषद के नवनियुक्त अध्यक्ष ,कार्यकारिणीं ने इस मामले में अलबत्ता जिला जज के मार्फत मुख्य न्यायधीश राजस्थान हाईकोर्ट को उक्त पत्र की प्रति भेजकर इसकी क्रियान्विति के निर्देश जारी करने की मांग दोहराई है ,,मेने लगातार माननीय राजस्थान हाईकोर्ट को कई ई मेल भेजकर कार्यवाही की मांग की है ,,डॉक्टर महेश शर्मा ,शाहिद हसन बार कौंसिलर भी इसके लिए प्रयासरत है ,लेकिन नतीजे के नाम पर सिफर है ,पता चला है इस मामले में अब राजस्थान के वकील एक मई को उदयपुर में एकत्रित होकर बढ़ी हुई कोर्ट फ़ीस रोकने के लिए आंदोलन की रुपरेखा तैयार करेंगे ,,मेरी एक बात समझ में नहीं आती ,,बढ़ी हुई कोर्ट फीस की आमदनी राजस्थान सरकार के लिए वसूली जा रही ,है ,,यह बढ़ी हुई कोर्ट फ़ीस राजस्थान सरकार के कोष में जमा हो रही है ,,और इसी राजस्थान सरकार ने 25 फरवरी को प्रमुख शासन सचिव विधि विभाग को ,इस के स्थगन के आदेश जारी किये है ,फिर प्रमुख शासन सचिव विधि विभाग ने यह आदेश अब तक राजस्थान हायकोर्ट को उचित मार्गदर्शन के लिए क्यों नहीं पहुंचाए ,,खेर सरकारी लापरवाही के तहत वोह पत्र राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी नहीं निभाई तो ,वकील साथियों को ,या जिनको इस आदेश की प्रतिलिपि भेजी गयी है वोह खुद इस लापरवाही की शिकायत के साथ संबंधित सरकार द्वारा लिखित स्थगन पत्र की प्रतिलिपि देकर मुख्यन्यायधीश महोदय से अब तक दो महीने गुज़रने के बाद भी क्यों नहीं मिल सके ,क्यों राजस्थान सरकार के इस स्थगन पत्र की क्रियान्विति नहीं करवा सके ,यह एक सवाल है ,जिसे राजस्थान के सभी वकील साथियों को सोचने की ज़रूरत है ,जिसे वोह समझ सके के वकीलों के हमदर्द नेतृत्व वकीलों की समस्याओं के समाधान के लिए कितने सक्रिय है ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

ऐ रसूल तबदीले कि़बला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है

ये वह लोग थे जो सिधार चुके जो कुछ कमा गए उनके लिए था और जो कुछ तुम कमाओगे तुम्हारे लिए होगा और जो कुछ वह कर गुज़रे उसकी पूछगछ तुमसे न होगी (141)
बाज़ अहमक़ लोग ये कह बैठेगें कि मुसलमान जिस कि़बले बैतुल मुक़द्दस की तरफ पहले से सजदा करते थे उस से दूसरे कि़बले की तरफ मुड़ जाने का क्या बाइस हुआ। ऐ रसूल तुम उनके जवाब में कहो कि पूरब पश्चिम सब ख़ुदा का है जिसे चाहता है सीधे रास्ते की तरफ हिदायत करता है (142)
और जिस तरह तुम्हारे कि़बले के बारे में हिदायत की उसी तरह तुम को आदिल उम्मत बनाया ताकि और लोगों के मुक़ाबले में तुम गवाह बनो और रसूल मोहम्मद तुम्हारे मुक़ाबले में गवाह बनें और (ऐ रसूल) जिस कि़बले की तरफ़ तुम पहले सज़दा करते थे हम ने उसको सिर्फ़ इस वजह से कि़बला क़रार दिया था कि जब कि़बला बदला जाए तो हम उन लोगों को जो रसूल की पैरवी करते हैं हम उन लोगों से अलग देख लें जो उलटे पाव फिरते हैं अगरचे ये उलट फेर सिवा उन लोगों के जिन की ख़ुदा ने हिदायत की है सब पर शाक़ ज़रुर है और ख़ुदा ऐसा नहीं है कि तुम्हारे ईमान नमाज़ को जो बैतुलमुक़द्दस की तरफ पढ़ चुके हो बरबाद कर दे बेशक ख़ुदा लोगों पर बड़ा ही रफ़ीक व मेहरबान है। (143)
ऐ रसूल कि़बला बदलने के वास्ते बेशक तुम्हारा बार बार आसमान की तरफ मुँह करना हम देख रहे हैं तो हम ज़रुर तुमको ऐसे कि़बले की तरफ फेर देगें कि तुम नेहाल हो जाओ अच्छा तो नमाज़ ही में तुम मस्जि़दे मोहतरम काबे की तरफ मुँह कर लो और ऐ मुसलमानों तुम जहाँ कही भी हो उसी की तरफ़ अपना मुँह कर लिया करो और जिन लोगों को किताब तौरेत वगै़रह दी गयी है वह बख़ूबी जानते हैं कि ये तबदील कि़बले बहुत बजा व दुरुस्त है और उस के परवरदिगार की तरफ़ से है और जो कुछ वह लोग करते हैं उस से ख़ुदा बेख़बर नही (144)
और अगर एहले किताब के सामने दुनिया की सारी दलीले पेश कर दोगे तो भी वह तुम्हारे कि़बले को न मानेंगें और न तुम ही उनके कि़बले को मानने वाले हो और ख़ुद एहले किताब भी एक दूसरे के कि़बले को नहीं मानते और जो इल्म (क़ुरान) तुम्हारे पास आ चुका है उसके बाद भी अगर तुम उनकी ख़्वाहिश पर चले तो अलबत्ता तुम नाफ़रमान हो जाओगे (145)
जिन लोगों को हमने किताब (तौरैत वग़ैरह) दी है वह जिस तरह अपने बेटों को पहचानते है उसी तरह तरह वह उस पैग़म्बर को भी पहचानते हैं और उन में कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जो दीदए व दानिस्ता {जान बुझकर} हक़ बात को छिपाते हैं (146)
ऐ रसूल तबदीले कि़बला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है बस तुम कहीं ्यक करने वालों में से न हो जाना (147)
और हर फरीक़ के वास्ते एक सिम्त है उसी की तरफ वह नमाज़ में अपना मुँह कर लेता है बस तुम ऐ मुसलमानों झगड़े को छोड़ दो और नेकियों मे उन से लपक के आगे बढ़ जाओ तुम जहाँ कहीं होगे ख़ुदा तुम सबको अपनी तरफ ले आऐगा बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (148)
और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक मक्का से) तो भी नमाज़ मे तुम अपना मुँह मस्जि़दे मोहतरम (काबा) की तरफ़ कर लिया करो और बेषक ये नया कि़बला तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हक़ है (149)
और तुम्हारे कामों से ख़ुदा ग़ाफिल नही है और (ऐ रसूल) तुम जहाँ से जाओ (यहाँ तक के मक्का से तो भी) तुम (नमाज़ में) अपना मुँह मस्जि़दे हराम की तरफ कर लिया करो और तुम जहाँ कही हुआ करो तो नमाज़ में अपना मुँह उसी काबा की तरफ़ कर लिया करो (बार बार हुक्म देने का एक फायदा ये है ताकि लोगों का इल्ज़ाम तुम पर न आने पाए मगर उन में से जो लोग नाहक़ हठधर्मी करते हैं वह तो ज़रुर इल्ज़ाम देगें) तो तुम लोग उनसे डरो नहीं और सिर्फ़ मुझसे डरो और (दूसरा फ़ायदा ये है) ताकि तुम पर अपनी नेअमत पूरी कर दूँ (150)

ऐसे लोगों के उद्देश्य को विफल करना चाहिए

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 21 अप्रैल 2019 | 7:55 am

देश में आम आदमी बेहूदगी ,बदज़ुबानी ,,राष्ट्रविरोधी ,संविधान विरोधी ,धर्म शालीनता विरोधी बयांन बाज़ी करे तो बहुत अजीब नहीं लगता ,लेकिन जब साधू ,संत ,साध्वी ,,मौलवी ,मौलाना ,,आलिमा ,,मुफ़्ती ,क़ाज़ी ,,ऐसे घटिया ,राष्ट्रविरोधी ,भावनाये आहत करने वाले बेहूदा बयान देने लगे तो देश के प्रत्येक नागरिक को अफ़सोस होना चाहिए और ऐसे लोगों के उद्देश्य को विफल करना चाहिए क्योंकि यह लोग धार्मिक नहीं खुद के लिए ,खुद की सियासी पार्टी के लिए यह धर्म के नाम पर अधर्म फैला रहे है ,इनसे सावधान होकर इनका सोशल बायकॉट करना चाहिए ,क्योंकि क़ानून ने तो ऐसे लोगों के मुखालिफ कार्यवाही करने के मामले में हाथों में चूढीयां पहन ली है ,,,खेर जनता एक दिन इस गंदगी को ऐसे गंदे लोगों की सियासत को धर्म के नाम पर अधर्म फैलाने वालों को सड़को पर ही निपटेगी ,क्योंकि अति हर अपराध के खात्मे की शुरुआत होती है ,,अख्तर

तुम तो अलबत्ता राहे रास्त पर आ गए

जब उनसे उनके परवरदिगार ने कहा इस्लाम कु़बूल करो तो अजऱ् में की सारे जहाँ के परवरदिगार पर इस्लाम लाया (131)
और इसी तरीके़ की इबराहीम ने अपनी औलाद से वसीयत की और याकू़ब ने (भी) कि ऐ फरज़न्दों खु़दा ने तुम्हारे वास्ते इस दीन (इस्लाम) को पसन्द फरमाया है बस तुम हरगिज़ न मरना मगर मुसलमान ही होकर (132)
(ऐ यहूद) क्या तुम उस वक़्त मौजूद थे जब याकू़ब के सर पर मौत आ खड़ी हुई उस वक़्त उन्होंने अपने बेटों से कहा कि मेरे बाद किसी की इबादत करोगे कहने लगे हम आप के माबूद और आप के बाप दादाओं इबराहीम व इस्माइल व इसहाक़ के माबूद व यकता खु़दा की इबादत करेंगे और हम उसके फरमाबरदार हैं (133)
(ऐ यहूद) वह लोग थे जो चल बसे जो उन्होंने कमाया उनके आगे आया और जो तुम कमाओगे तुम्हारे आगे आएगा और जो कुछ भी वह करते थे उसकी पूछगछ तुमसे नहीं होगी (134)
(यहूदी ईसाई मुसलमानों से) कहते हैं कि यहूद या नसारानी हो जाओ तो राहे रास्त पर आ जाओगे (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि हम इबराहीम के तरीक़े पर हैं जो बातिल से कतरा कर चलते थे और मुशरेकीन से न थे (135)
(और ऐ मुसलमानों तुम ये) कहो कि हम तो खु़दा पर ईमान लाए हैं और उस पर जो हम पर नाजि़ल किया गया (कु़रान) और जो सहीफ़े इबराहीम व इसमाइल व इसहाक़ व याकू़ब और औलादे याकू़ब पर नाजि़ल हुए थे (उन पर) और जो किताब मूसा व ईसा को दी गई (उस पर) और जो और पैग़म्बरों को उनके परवरदिगार की तरफ से उन्हें दिया गया (उस पर) हम तो उनमें से किसी (एक) में भी तफरीक़ नहीं करते और हम तो खु़दा ही के फरमाबरदार हैं (136)
बस अगर ये लोग भी उसी तरह ईमान लाए हैं जिस तरह तुम तो अलबत्ता राहे रास्त पर आ गए और अगर वह इस तरीके़ से मुँह फेर लें तो बस वह सिर्फ तुम्हारी ही जि़द पर है तो (ऐ रसूल) उन (के शर) से (बचाने को) तुम्हारे लिए खु़दा काफ़ी होगा और वह (सबकी हालत) खू़ब जानता (और) सुनता है (137)
(मुसलमानों से कहो कि) रंग तो खु़दा ही का रंग है जिसमें तुम रंगे गए और खुदाई रंग से बेहतर कौन रंग होगा और हम तो उसी की इबादत करते हैं (138)
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो कि क्या तुम हम से खु़दा के बारे झगड़ते हो हालाँकि वही हमारा (भी) परवरदिगार है (वही) तुम्हारा भी (परवरदिगार है) हमारे लिए है हमारी कारगुज़ारियाँ और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारसतानियाँ और हम तो निरेखरे उसी के हैं (139)
क्या तुम कहते हो कि इबराहीम व इसमाइल व इसहाक़ व आलौदें याकू़ब सब के सब यहूदी या नसारानी थे (ऐ रसूल उनसे) पूछो तो कि तुम ज़्यादा वाकि़फ़ हो या खु़दा और उससे बढ़कर कौन ज़ालिम होगा जिसके पास खु़दा की तरफ से गवाही (मौजूद) हो (कि वह यहूदी न थे) और फिर वह छिपाए और जो कुछ तुम करते हो खु़दा उससे बेख़बर नहीं (140)

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज सिमलिया जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोई भी सवाल पूंछते ही ,जाति का बखान कर रोने की रणनीति की खूब खिंचाई की

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शनिवार, 20 अप्रैल 2019 | 6:25 am

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज सिमलिया जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोई भी सवाल पूंछते ही ,जाति का बखान कर रोने की रणनीति की खूब खिंचाई की ,,अशोक गहलोत कोटा लोकसभा क्षेत्र के उम्मीदवार रामनारायण मीणा के पक्ष समर्थन में चुनावी सभा को सिमलिया टोल नाके के पास सम्बोधित कर रहे थे ,,,अशोक गहलोत ने कहा के नरेंद्र मोदी से प्रधानमंत्री की हैसियत से उनके क्रियाकलापों को लेकर जब भी कोई सवाल किया जाता है ,वोह पिछड़े का अपमान का रोना रोने लग जाते है ,उन्होंने कहा मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे उनकी भी इन्होने बहुत आलोचना की है ,उन्होंने कभी नहीं कहा के मोदी सिख समाज का अपमान कर रहे है ,,उन्होंने कहा मोदी राजस्थान में आते है ,,तो खुद मेरे खिलाफ भी बोलते है ,में अतिपिछड़ा वर्ग से आता हूँ ,,मेने कभी नहीं कहा के मोदी अति पिछड़े वर्ग का अपमान करते है ,अशोक गहलोत ने मज़ाक़ उढ़ाते हुए कहा ,लोकतंत्र में जो पदों पर रहते है ,उन पर आरोप लगते है ,और देश में वाक् अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार भी है ,लेकिन नरेंद्र मोदी भारत की जनता का यह लोकतान्त्रिक अधिकार छीन लेना चाहते है ,वोह सिर्फ धर्म ,जाति समाज के नाम पर नफरत फैलाने की बात करते है ,, गहलोत ने कहा कॉग्रेस के राहुल गांधी ने देश के लिए पृथक से किसान बजट लोकसभा में पेश करने का प्रावधान किया है ,,जिसमे किसानों के लिए बजट पर पृथक से रेल बजट की तरह चर्चा होगी और उनके कल्याण के लिए योजनाए तैयार होंगी ,ऐसा राहुल गाँधी की सरकार बनने पर देश में किसानों के कल्याण के लिए पहली बार होगा ,अशोक गहलोत ने सामाजिक न्याय के तहत न्यूनतम 72 हज़ार रूपये साल प्रत्येक व्यक्ति के खाते में जमा होने वाली योजना गरीबों के लिए उत्थान योजना बतायी जबकि ,महानरेगा योजना में काम के दिन बढ़ाने से देश में आंशिक बेरोज़गारी कम करने की योजना बताते हुए उन्होंने तंज़ कसा मोदी सरकार में उद्योग बंद हुए है ,रोज़गार के अवसर बंद हो गए है ,विकास थम गया है ,उन्होंने सैनिकों के शौर्य ,उनकी शहादत पर सियासत कर वोट मांगने की प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए कहा ,इंद्रा जी ने खालिस्तान नहीं बनने दिया ,,पाकिस्तान को सबक़ सिखाया ,लेकिन सैनिकों के शौर्य और शहादत को चुनाव प्रचार का हिस्सा नहीं बनाया ,जबकि कारगिल हो या सर्जिकल स्ट्राइक हो भाजपा इसे मुद्दा बनाती है क्योंकि भाजपा सरकार के पास आम जनता से वोट मांगने के लिए और कोई इनकी उपलब्धि नहीं है ,इसलिए जाति ,धर्म और शहीदों की शहादत को यह गुमराह करने के लिए हथियार बनाते है ,गहलोत ने कहा ,,राजीव जी देश के लिए शहीद हो गये ,इंद्रा जी ने पंजाब के टुकड़े होने से बचाया वोह देश के लिए शहीद हुए ,देश में आज कम्यूटर ,मोबाइल युग ,दुनिया कर लो बंद मुट्ठी में यह राजीव गांधी की देन है ,,,,अशोक गहलोत ने कहा राजस्थान में आप वोटर ने कांग्रेस की सरकार बनाई इसके लिए धन्यवाद ,,,उन्होंने कहा के अब लोकसभा में देश के विकास ,सुखद भविष्य और सुरक्षा के लिए कांग्रेस को भारी वोटों से जिताये ,,गहलोत ने कहा मरीज़ों के मुफ्त इलाज के लिए मुफ्त दवा में हमारी सरकार ने कैंसर ,हार्ट सहित दूसरी दवाओं को भी शामिल कर लिया है ,यह दवाये बहुत महंगी आती है ,इससे राजस्थान के मरीज़ों को काफी लाभ मिलेगा ,गहलोत ने कहा हमारी सरकार ने किसानों के क़र्ज़े माफ़ किये ,,जबकि वर्तमान अनधड़ ,तूफ़ान से हुए नुकसान के लिए केंद्र सरकार की पक्षपातपूर्ण घोषणा है ,जबकि हमारी सरकार गंभीर और उदार है ,,उन्होंने कहा ,,ग्रामीण क्षेत्र में नल के बिल नहीं आएंगे जबकि शहरी क्षेत्र के लिए भी कल्याणकारी योजना है ,,अशोक गहलोत ने कांग्रेस के प्रत्याक्षी रामनारायण मीणा को कांग्रेस के लगातार विधायक रहने ,,ऐक बार सांसद रहने का हवाला देते हुए इन्हे अनुभवी बताया और रामनारायण मीणा के पक्ष में मतदान करने की अपील की ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

एडवोकेट माही माहताब असरार ने आज कोटा लोकसभा चुनाव में अल्पसंख्यक मतदाताओं की नब्ज़ टटोली

एडवोकेट माही माहताब असरार ने आज कोटा लोकसभा चुनाव में अल्पसंख्यक मतदाताओं की नब्ज़ टटोली और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाक़ात कर अल्पसंख्यक बस्तियों में अधिकतम मतदान कांग्रेस के पक्ष में करवाने के टिप्स सुझाये ,,एडवोकेट माहताब असरार राष्ट्रिय अल्पसंख्यक विभाग से कोटा लोकसभा क्षेत्र की पर्यवेक्षक बनाई गयी है ,,माहताब असरार ने आज अल्पसंख्यक विभाग के संभागीय अध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य ऐडवोकेट अख्तर खान अकेला ,,कोटा शहर अध्यक्ष अब्दुल करीम खान प्रदेश कमेटी सदस्य अब्दुल करीम खान ,देहात अल्पसंख्यक विभाग अध्यक्ष साजिद जावेद ,,बूंदी जिला अल्पसंख्यक कांग्रेस अध्यक्ष सहित कई कार्यकर्ताओं ,पदाधिकारियों से कोटा लोकसभा में वोटर्स के रूह्झान ,,उनके मुद्दे ,,उन्हें कांग्रेस के पक्ष में मोटिवेट करने के मामले में चर्चा की ,उन्होंने कोटा लोकसभा की आठ विधानसभा क्षेत्रों का फीडबैक लिया ,,वोह कोटा जिला कांग्रेस कार्यालय में भी मौजूद रही ,उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेसी नरेश विजयवर्गीय से भी कोटा लोकसभा चुनाव की व्यस्थाओं की जानकारी ली जबकि अल्पसंख्यक विभाग के पदाधिकारी मोहम्मद हुसैन गुल्लू भाई ,,गुरमीत सिंह टाक ,सहित कई पदाधिकारियों से भी उन्होंने चर्चा की ,,माहताब असरार दिल्ली में एडवोकेट है वोह कोटा के पूर्व सांसद राज्यसभा सदस्य मौलाना असरारुल हक़ की पुत्री है ,,,माहताब असरार ने सभी पदाधिकारियों ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान अधिक से अधिक करवाने के फार्मूले पर सुझाव भी मांगे है ,वोह आज बूंदी ज़िले में लाखेरी पहुंची जहाँ कांग्रेस प्रत्याक्षी रहे राकेश बोयत सहित कार्यकर्ताओं से चर्चा हुई ,जबकि बूंदी में गुड्डू क़ादरी सहित बूंदी के वरिष्ठ कांग्रेस जनों ,अल्पसंख्यक कार्यकर्ताओं से भी चर्चा हुई ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

जब इबराहीम व इसमाईल ख़ानाए काबा की बुनियादें बुलन्द कर रहे थे

जिन लोगों को हमने किताब (कु़रान) दी है वह लोग उसे इस तरह पढ़ते रहते हैं जो उसके पढ़ने का हक़ है यही लोग उस पर ईमान लाते हैं और जो उससे इनकार करते हैं वही लोग घाटे में हैं (121)
बनी इसराईल मेरी उन नेअमतों को याद करो जो मैंनं तुम को दी हैं और ये कि मैंने तुमको सारे जहाँन पर फज़ीलत दी (122)
और उस दिन से डरो जिस दिन कोई शख़्स किसी की तरफ से न फिदया हो सकेगा और न उसकी तरफ से कोई मुआवेज़ा क़ुबूल किया जाएगा और न कोई सिफारिश ही फायदा पहुचाँ सकेगी, और न लोग मदद दिए जाएँगे (123)
(ऐ रसूल) बनी इसराईल को वह वक़्त भी याद दिलाओ जब इबराहीम को उनके परवरदिगार ने चन्द बातों में आज़माया और उन्होंने पूरा कर दिया तो खु़दा ने फरमाया मैं तुमको (लोगों का) पेशवा बनाने वाला हूँ (हज़रत इबराहीम ने) अजऱ् की और मेरी औलाद में से फरमाया (हाँ मगर) मेरे इस ओहदे पर ज़ालिमों में से कोई शख़्स फ़ायज़ नहीं हो सकता (124)
(ऐ रसूल वह वक़्त भी याद दिलाओ) जब हमने ख़ानए काबा को लोगों के सवाब और पनाह की जगह क़रार दी और हुक्म दिया गया कि इबराहीम की (इस) जगह को नमाज़ की जगह बनाओ और इबराहीम व इसमाइल से अहद व पैमान लिया कि मेरे (इस) घर को तवाफ़ और एतक़ाफ़ और रूकू और सजदा करने वालों के वास्ते साफ सुथरा रखो (125)
और (ऐ रसूल वह वक़्त भी याद दिलाओ) जब इबराहीम ने दुआ माँगी कि ऐ मेरे परवरदिगार इस (शहर) को पनाह व अमन का शहर बना, और उसके रहने वालों में से जो खु़दा और रोज़े आखि़रत पर ईमान लाए उसको तरह-तरह के फल खाने को दें खु़दा ने फरमाया (अच्छा मगर) जो कुफ्र इख़तेयार करेगा उसकी दुनिया में चन्द रोज़ (उन चीज़ो से) फायदा उठाने दूँगा फिर (आख़ेरत में) उसको मजबूर करके दोज़ख़ की तरफ खींच ले जाऊँगा और वह बहुत बुरा ठिकाना है (126)
और (वह वक़्त याद दिलाओ) जब इबराहीम व इसमाईल ख़ानाए काबा की बुनियादें बुलन्द कर रहे थे (और दुआ) माँगते जाते थे कि ऐ हमारे परवरदिगार हमारी (यह खि़दमत) कु़बूल कर बेशक तू ही (दूआ का) सुनने वाला (और उसका) जानने वाला है (127)
(और) ऐ हमारे पालने वाले तू हमें अपना फरमाबरदार बन्दा बना और हमारी औलाद से एक गिरोह (पैदा कर) जो तेरा फरमाबरदार हो, और हमको हमारे हज की जगहों दिखा दे और हमारी तौबा क़ुबूल कर, बेशक तू ही बड़ा तौबा कु़बूल करने वाला मेहरबान है (128)
(और) ऐ हमारे पालने वाले मक्के वालों में उन्हीं में से एक रसूल को भेज जो उनको तेरी आयतें पढ़कर सुनाए और आसमानी किताब और अक़्ल की बातें सिखाए और उन (के नुफ़ूस) के पाकीज़ा कर दें बेशक तू ही ग़ालिब और साहिबे तदबीर है (129)
और कौन है जो इबराहीम के तरीक़े से नफरत करे मगर जो अपने को अहमक़ बनाए और बेशक हमने उनको दुनिया में भी मुन्तखब कर लिया और वह ज़रूर आख़ेरत में भी अच्छों ही में से होगे (130)

*तालियों की गूंज* उसके कानों में

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019 | 7:09 am

*"नया टीचर"*
क्लास में आते ही
नये टीचर ने
बच्चों को
अपना लंबा चौड़ा परिचय दिया
बातों ही बातों में
उसने जान लिया की
लड़कियों के इस क्लास में
सबसे तेज और सबसे आगे
कौन सी लड़की है ?
उसने खामोश सी बैठी
उस लड़की से पूछा
बेटा आपका नाम क्या है ?
लड़की खड़ी हुई और बोली
जी सर , मेरा नाम है जूही !
टीचर ने फिर पूछा..
पूरा नाम बताओ बेटा ?
जैसे उस लड़की ने
नाम मे कुछ छुपा रखा हो
लड़की ने फिर कहा
जी सर , मेरा पूरा नाम जूही ही है
टीचर ने सवाल बदल दिया
और पूछा कि अच्छा
तुम्हारे पापा का नाम बताओ ?
लड़की ने जवाब दिया
जी सर , मेरे पापा का नाम है शमशेर !!
टीचर ने फिर पूछा
अपने पापा का पूरा नाम बताओ
लड़की ने जवाब दिया
मेरे पापा का पूरा नाम
शमशेर ही है सर जी !
अब टीचर कुछ सोचकर बोला
अच्छा अपनी माँ का पूरा नाम बताओ
लड़की ने जवाब दिया
सर जी , मेरी माँ का पूरा नाम है निशा
टीचर के पसीने छूट चुके थे
क्योंकि अब तक
वो उस लड़की की फैमिली के
पूरे बायोडाटा में
जो एक चीज
ढूंढने की कोशिश कर रहा था
वो उसे नही मिली थी !!
उसने आखिरी पैंतरा आजमाया
बोला -अच्छा तुम कितने भाई बहन हो ?
टीचर ने सोचा कि
जो चीज वो ढूंढ रहा है
शायद इसके भाई बहनों के नाम मे वो क्लू मिल जाये ?
लड़की ने टीचर के
इस सवाल का भी
बड़ी मासूमियत से जवाब दिया
बोली -सर जी , मैं अकेली हूँ
मेरे कोई भाई बहन नही है !!
अब टीचर ने
सीधा और निर्णायक सवाल पूछा
बेटे तुम्हारा धर्म और जाति क्या है ?
लड़की ने
इस सीधे से सवाल का भी
सीधा सा जवाब दिया
बोली -सर *मैं एक विद्यार्थी हूँ यही मेरी जाति है*
और *ज्ञान प्राप्त करना ही*
मेरा धर्म है !
मुझे पता है की
अब आप मेरे पेरेंट्स की जाति और धर्म पूछोगे !!
तो मैं आपको बता दूं कि
*मेरे पापा का धर्म है मुझे पढ़ाना*
*और मेरी मम्मी की जरूरतों को*
पूरा करना
और *मेरी मम्मी का धर्म है मेरी देखभाल*
*और मेरे पापा की जरूरतों को*
पूरा करना
लड़की का जवाब सुनकर
टीचर के होश उड़ गये
उसने टेबल पर रखे
पानी के गिलास की ओर देखा
लेकिन उसे उठाकर पीना भूल गया !
तभी लड़की की आवाज
एक बार फिर उसके कानों में
किसी धमाके की तरह गुंजी ....
सर, *मैं विज्ञान की छात्रा हूँ*
और *एक साइंटिस्ट बनना चाहती हूँ !*
*जब अपनी पढ़ाई पूरी कर लुंगी*
*और अपने माँ बाप के*
*सपनों को पूरा कर लुंगी*
*तब कभी फुरसत में*
*सभी धर्मों के अध्ययन में जुटूंगी*
और जो भी धर्म
*विज्ञान की कसौटी* पर
खरा उतरेगा
*उसे अपना लुंगी*
लेकिन अगर
*धर्मग्रंथों के उन पन्नों में*
*एक भी बात विज्ञान के विरुद्ध हुई*
*तो मैं उस पूरी पवित्र किताब को*
*अपवित्र समझूँगी*
और उसे *कूड़े के ढेर में*
फेंक दूंगी !
क्योंकि *साइंस कहता है*
*एक गिलास दूध में*
अगर एक बूंद भी
*केरोसिन* मिली हो तो
*पूरा का पूरा दूध ही बेकार हो* जाता है !
लड़की की बात खत्म होते ही
पूरी क्लास
साथी लड़कियों की
*तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज* उठी !!
टीचर के पसीने छूट चुके थे !!
*तालियों की गूंज* उसके कानों में
गोलियों की गड़गड़ाहट की तरह
सुनाई दे रहे थे !
उसने आँंखों पर लगे
*धर्म और जाति के मोटे चश्मे* को उतार कर
कुछ देर के लिए टेबल पर रख दिया
और पानी का गिलास उठाकर
एक ही सांस में गटक लिया
थोड़ी हिम्मत जुटा कर
लड़की से बिना नजर मिलाये ही बोला !!
बेटा.....
*I Proud of you....*

तेरी सारी *फ़ुर्सत* तेरा *इतवार* कहता है

*तेरी बुराइयों* को हर *अख़बार* कहता है,
और तू मेरे *गांव* को *गँवार* कहता है //
*ऐ शहर* मुझे तेरी *औक़ात* पता है //
तू *चुल्लू भर पानी* को भी *वाटर पार्क* कहता है //
*थक* गया है हर *शख़्स* काम करते करते //
तू इसे *अमीरी* का *बाज़ार* कहता है।
*गांव* चलो *वक्त ही वक्त* है सबके पास !!
तेरी सारी *फ़ुर्सत* तेरा *इतवार* कहता है //
*मौन* होकर *फोन* पर *रिश्ते* निभाए जा रहे हैं //
तू इस *मशीनी दौर* को *परिवार* कहता है //
जिनकी *सेवा* में *खपा* देते थे जीवन सारा,
तू उन *माँ बाप* को अब *भार* कहता है //
*वो* मिलने आते थे तो *कलेजा* साथ लाते थे,
तू *दस्तूर* निभाने को *रिश्तेदार* कहता है //
बड़े-बड़े *मसले* हल करती थी *पंचायतें* //
तु अंधी *भ्रष्ट दलीलों* को *दरबार* कहता है //
बैठ जाते थे *अपने पराये* सब *बैलगाडी* में //
पूरा *परिवार* भी न बैठ पाये उसे तू *कार* कहता है //
अब *बच्चे* भी *बड़ों* का *अदब* भूल बैठे हैं //
तू इस *नये दौर* को *संस्कार* कहता है *........//

(और) ऐ हमारे पालने वाले तू हमें अपना फरमाबरदार बन्दा बना

जिन लोगों को हमने किताब (कु़रान) दी है वह लोग उसे इस तरह पढ़ते रहते हैं जो उसके पढ़ने का हक़ है यही लोग उस पर ईमान लाते हैं और जो उससे इनकार करते हैं वही लोग घाटे में हैं (121)
बनी इसराईल मेरी उन नेअमतों को याद करो जो मैंनं तुम को दी हैं और ये कि मैंने तुमको सारे जहाँन पर फज़ीलत दी (122)
और उस दिन से डरो जिस दिन कोई शख़्स किसी की तरफ से न फिदया हो सकेगा और न उसकी तरफ से कोई मुआवेज़ा क़ुबूल किया जाएगा और न कोई सिफारिश ही फायदा पहुचाँ सकेगी, और न लोग मदद दिए जाएँगे (123)
(ऐ रसूल) बनी इसराईल को वह वक़्त भी याद दिलाओ जब इबराहीम को उनके परवरदिगार ने चन्द बातों में आज़माया और उन्होंने पूरा कर दिया तो खु़दा ने फरमाया मैं तुमको (लोगों का) पेशवा बनाने वाला हूँ (हज़रत इबराहीम ने) अजऱ् की और मेरी औलाद में से फरमाया (हाँ मगर) मेरे इस ओहदे पर ज़ालिमों में से कोई शख़्स फ़ायज़ नहीं हो सकता (124)
(ऐ रसूल वह वक़्त भी याद दिलाओ) जब हमने ख़ानए काबा को लोगों के सवाब और पनाह की जगह क़रार दी और हुक्म दिया गया कि इबराहीम की (इस) जगह को नमाज़ की जगह बनाओ और इबराहीम व इसमाइल से अहद व पैमान लिया कि मेरे (इस) घर को तवाफ़ और एतक़ाफ़ और रूकू और सजदा करने वालों के वास्ते साफ सुथरा रखो (125)
और (ऐ रसूल वह वक़्त भी याद दिलाओ) जब इबराहीम ने दुआ माँगी कि ऐ मेरे परवरदिगार इस (शहर) को पनाह व अमन का शहर बना, और उसके रहने वालों में से जो खु़दा और रोज़े आखि़रत पर ईमान लाए उसको तरह-तरह के फल खाने को दें खु़दा ने फरमाया (अच्छा मगर) जो कुफ्र इख़तेयार करेगा उसकी दुनिया में चन्द रोज़ (उन चीज़ो से) फायदा उठाने दूँगा फिर (आख़ेरत में) उसको मजबूर करके दोज़ख़ की तरफ खींच ले जाऊँगा और वह बहुत बुरा ठिकाना है (126)
और (वह वक़्त याद दिलाओ) जब इबराहीम व इसमाईल ख़ानाए काबा की बुनियादें बुलन्द कर रहे थे (और दुआ) माँगते जाते थे कि ऐ हमारे परवरदिगार हमारी (यह खि़दमत) कु़बूल कर बेशक तू ही (दूआ का) सुनने वाला (और उसका) जानने वाला है (127)
(और) ऐ हमारे पालने वाले तू हमें अपना फरमाबरदार बन्दा बना और हमारी औलाद से एक गिरोह (पैदा कर) जो तेरा फरमाबरदार हो, और हमको हमारे हज की जगहों दिखा दे और हमारी तौबा क़ुबूल कर, बेशक तू ही बड़ा तौबा कु़बूल करने वाला मेहरबान है (128)
(और) ऐ हमारे पालने वाले मक्के वालों में उन्हीं में से एक रसूल को भेज जो उनको तेरी आयतें पढ़कर सुनाए और आसमानी किताब और अक़्ल की बातें सिखाए और उन (के नुफ़ूस) के पाकीज़ा कर दें बेशक तू ही ग़ालिब और साहिबे तदबीर है (129)
और कौन है जो इबराहीम के तरीक़े से नफरत करे मगर जो अपने को अहमक़ बनाए और बेशक हमने उनको दुनिया में भी मुन्तखब कर लिया और वह ज़रूर आख़ेरत में भी अच्छों ही में से होगे (130)

देश की जनता ने आपको हिन्दू सम्राट माना

Written By आपका अख्तर खान अकेला on गुरुवार, 18 अप्रैल 2019 | 6:42 am

Before one year a latter drafted by a bjp worker ,,,,know he join Inc
देश की जनता ने आपको हिन्दू सम्राट माना , आपको विकास पुरुष माना और प्रचंड बहुमत से सत्ता सौंप दी, पर आपने क्या किया सत्ता में आते ही उनके पीछे हाथ धोकर पड़ गए जो (छोटे कारोबारी, दुकानदार और छोटे व्यापारी) आजादी के बाद से ही आपके साथ थे जिन्होंने बुरे से बुरे समय भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा उनके पीछे इनकम टैक्स सहित सभी डिपार्टमेंट लगा दिए। उनको सरेआम मंचो से चोर और डकैत तक बोला। आपने कभी इस बात को समझा ही नहीं। काला धन दो तरह का होता है एक वो जो व्यापारी का है जो उसने मेहनत करके, रिस्क उठा कर कमाया है, सुबह ५ बजे जा कर दुकान खोली , पैसा लगाया और पैसा कमाया पर टैक्स नहीं दिया वो भी टैक्स सिस्टम की कॉम्प्लीकेशन्स की वजह से और आप उसके ही पीछे पड़ गए जबकि सरकारी अधिकारी और नेता जिनके पास जो भी पैसा है वो सब रिशवत और घोटालो का काला धन है बिना किसी मेहनत के कमाया हुआ उनको आपने ईमानदारी का प्रमाण पत्र दे दिया। क्या किसी अधिकारी और नेता को सजा दी गयी उनके अलावा जो आपके खिलाफ बोले। अभी भी अगर आप नहीं सम्भले तो बहुत देर हो जाएगी। और आप की सत्ता तो जाएगी ही देश को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा क्योकि इस देश की जनता को आपके ऊपर विश्वास है की आप देश का भला कर सकते है इसलिए आप से विनती है की व्यापारी का पीछा छोड़कर देश का कार्य कीजिये। स्वर्ण और दलित की राजनीति ना करके सबको एक नजर से देखिये। ब्यूरोक्रेसी पर आँख मूँद कर विश्वाश करना बंद करके कुछ विश्वास अपने परंपरागत वोटर्स पर भी कीजिये। व्यापारी और मध्यम वर्ग को चोर बोलना बंद कर उनको अपने परिवार का लालन पालन करने दीजिये। प्रोफेशनल को बुरा भला कहना बंद कीजिये नहीं तो आप हमेशा की तरह दोबारा केंद्र में सत्ता का मुंह नहीं देख पाएंगे और सत्ता हमेशा के लिए उनके हाथ चली जाएगी जिनोह्णे हमेशा देश और हिंदुत्व का नुकसान किया है। आज राष्ट्रीय नेताओ की बात तो छोड़िये भाजपा के नगर स्तर तक के नेता जिस घमंड में बात करते है वह घमंड विध्वंसकारी होता है। भाजपा के प्रवक्ता , संबित पात्रा और प्रेम शुक्ल जैसे लोग टीवी चैनलों पर जिस भाषा का प्रयोग करते है वह जनता को अच्छी नहीं लगती। नेताओ के घमंड का ही परिणाम है की भाजपा का छोटे से छोटा कार्यकर्ता भी जरा सी असहमति होने पर दूसरे को देशद्रोही बोल देता है जिससे आम लोगो में एक खुंदक सी जन्म ले रही है। मैं आप लोगो से प्रार्थना करता हूँ की पार्टी को बचा लीजिए , घमंड छोड़िये , उदार बनिए, अपनी जगह बनाओ ना की दूसरे को ख़तम करो , इस संसार में कभी कुछ ख़त्म नहीं होता इसलिये ये ख्याल दिमाग से निकाल दो कि आप कांग्रेस को ख़त्म कर देंगे। अपनी लकीर को इतना बड़ा करो की दूसरे की लकीर छोटी हो जाये। अगर इस बार गए तो कम से कम 20 साल वापसी नहीं होगी।

और यहूद कहने लगे कि खु़दा औलाद रखता है

और (यहूद) कहते हैं कि यहूद (के सिवा) और (नसारा कहते हैं कि) नसारा के सिवा कोई बेहिश्त में जाने ही न पाएगा ये उनके ख़्याली पुलाव है (ऐ रसूल) तुम उन से कहो कि भला अगर तुम सच्चे हो कि हम ही बेहिश्त में जाएँगे तो अपनी दलील पेश करो (111)
हाँ अलबत्ता जिस शख़्स ने खु़दा के आगे अपना सर झुका दिया और अच्छे काम भी करता है तो उसके लिए उसके परवरदिगार के यहाँ उसका बदला (मौजूद) है और (आख़ेरत में) ऐसे लोगों पर न किसी तरह का ख़ौफ़ होगा और न ऐसे लोग ग़मग़ीन होगे (112)
और यहूद कहते हैं कि नसारा का मज़हब कुछ (ठीक) नहीं और नसारा कहते हैं कि यहूद का मज़हब कुछ (ठीक) नहीं हालाँकि ये दोनों फरीक़ किताबे (खु़दा) पढ़ते रहते हैं इसी तरह उन्हीं जैसी बातें वह (मुशरेकीन अरब) भी किया करते हैं जो (खु़दा के एहकाम) कुछ नहीं जानते तो जिस बात में ये लोग पड़े झगड़ते हैं (दुनिया में तो तय न होगा) क़यामत के दिन खु़दा उनके दरमियान ठीक फैसला कर देगा (113)
और उससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो खु़दा की मसजिदों में उसका नाम लिए जाने से (लोगों को) रोके और उनकी बरबादी के दर पे हो, ऐसों ही को उसमें जाना मुनासिब नहीं मगर सहमे हुए ऐसे ही लोगों के लिए दुनिया में रूसवाई है और ऐसे ही लोगों के लिए आख़ेरत में बड़ा भारी अज़ाब है (114)
(तुम्हारे मसजिद में रोकने से क्या होता है क्योंकि सारी ज़मीन) खु़दा ही की है (क्या) पूरब (क्या) पच्छिम बस जहाँ कहीं कि़ब्ले की तरफ रूख़ करो वही खु़दा का सामना है बेशक खु़दा बड़ी गुन्जाइश वाला और खू़ब वाकि़फ है (115)
और यहूद कहने लगे कि खु़दा औलाद रखता है हालाँकि वह (इस बखेड़े से) पाक है बल्कि जो कुछ ज़मीन व आसमान में है सब उसी का है और सब उसी के फ़रमाबरदार हैं (116)
(वही) आसमान व ज़मीन का मोजिद है और जब किसी काम का करना ठान लेता है तो उसकी निसबत सिर्फ कह देता है कि “हो जा” बस वह (खु़द ब खु़द) हो जाता है (117)
और जो (मुशरेकीन) कुछ नहीं जानते कहते हैं कि खु़दा हमसे (खु़द) कलाम क्यों नहीं करता, या हमारे पास (खु़द) कोई निशानी क्यों नहीं आती, इसी तरह उन्हीं की सी बाते वह कर चुके हैं जो उनसे पहले थे इन सब के दिल आपस में मिलते जुलते हैं जो लोग यक़ीन रखते हैं उनको तो अपनी निशानियाँ क्यों साफतौर पर दिखा चुके (118)
(ऐ रसूल) हमने तुमको दीने हक़ के साथ (बेहिश्त की) खु़शख़बरी देने वाला और (अज़ाब से) डराने वाला बनाकर भेजा है और दोज़खि़यों के बारे में तुमसे कुछ न पूछा जाएगा (119)
और (ऐ रसूल) न तो यहूदी कभी तुमसे रज़ामंद होगे न नसारा यहाँ तक कि तुम उनके मज़हब की पैरवी करो (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि बस खु़दा ही की हिदायत तो हिदायत है (बाक़ी ढकोसला है) और अगर तुम इसके बाद भी कि तुम्हारे पास इल्म (क़ुरान) आ चुका है उनकी ख़्वाहिशों पर चले तो (याद रहे कि फिर) तुमको खु़दा (के ग़ज़ब) से बचाने वाला न कोई सरपरस्त होगा न मददगार (120)

Founder

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Saleem Khan