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यही मेरा भारत ( तांका )

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on बुधवार, 24 अक्टूबर 2012 | 7:30 am

राम का पात्र 
मुहम्मद ने खेला 
रामलीला में 
यही ढंग यहाँ का 
यही मेरा भारत ।

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कुंड़लिया ----- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on रविवार, 25 दिसंबर 2011 | 5:11 am

बहुरंगी ये तोहफे , बांटे सांता क्लॉज ।
यीशू के जन्म दिन की , याद दिलाए आज ।।
याद दिलाए आज , मिली थी सच को सूली ।
थी बहुत बड़ी बात, न थी घटना मामूली ।।
सच कब है आसान , है तलवार ये नंगी ।
पर सच से ही विर्क , बने जीवन बहुरंगी ।।


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कुंड़लिया ----- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011 | 9:02 am


       अफजल- कसाब से कई , ठूंसे हमने जेल ।
       फाँसी लटकाए नहीं , देश रहा है झेल ।।
       देश रहा है झेल , किया खर्च करोड़ों में ।
       पारा बनकर बैठ , ये गए हैं जोड़ों में ।।
       कहे विर्क कविराय , मिले ऐसा इनको फल ।
       फिर भारत की तरफ , न देखे कोई अफजल ।।

                         * * * * *

कुंड़लिया ----- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on बुधवार, 21 दिसंबर 2011 | 5:42 am


 दफ्तर लगते दस बजे , औ ' आठ बजे स्कूल ।
 अजब नीति सरकार की , टेढ़े बहुत असूल  ।
 टेढ़े बहुत असूल , फ़िक्र ना मासूमों की 
 ए.सी. में बैठकर , बात हो कानूनों की ।
 न सुनें हैं फरियाद , न दर्द जानते अफ़सर
 जमीं के साथ विर्क , कब जुड़ेंगे ये दफ्तर ?
                  
                                         दिलबाग विर्क 

कुंड़लिया ----- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on गुरुवार, 8 दिसंबर 2011 | 7:47 pm

                 आशा से संसार है, रखना दिल में आस 
          मिल जाएगी सफलता, करना तुम प्रयास ।
          करना तुम प्रयास , झोंक दो पूरी ताकत 
          जीवन होगा सफल, न टिक पाएगी आफत ।
          मत डालो हथियार, हराती हमें हताशा 
          कहत विर्क कविराय, अमृतधार है आशा ।

                                      --------- साहित्य सुरभि

                                                      * * * * *

ग़ज़ल - दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on रविवार, 4 दिसंबर 2011 | 8:00 pm


                        इस दिल ने नादानी में
                   आग लगा दी पानी में ।

                   वा'दे सारे खाक हुए
                   आया मोड़ कहानी में ।

                   तेरी याद चली आए
                   है ये दोष निशानी में ।

                   कब उल्फत को समझ सके
                   लोग फँसे नादानी में ।

                   या रब ऐसा क्यों होता 
                   दुख हर प्यार कहानी में ।

                   टूटा दिल, बहते आँसू
                   पाए विर्क जवानी में ।

                         * * * * *

कविता - दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on मंगलवार, 29 नवंबर 2011 | 8:39 pm


                            निर्णय के क्षण
कर्ण की कशमकश से सम्बन्धी कविता छः किश्तों में ब्लॉग साहित्य सुरभि पर प्रस्तुत की गई थी. यह कविता इसी शीर्षक से प्रकाशित पुस्तक में प्रकाशित है. इस पुस्तक को हरियाणा साहित्य अकादमी से 7500 रु का अनुदान मिला था. मेरे निजी विचारानुसार यह कविता अनुदान मिलने का प्रमुख कारण थी. सभी भागों पर मिली प्रतिक्रियाओं ने इस विचार को पुष्ट किया है. जो इसे नहीं पढ़ पाए या जो इसे इकट्ठा पढ़ना चाहते हैं, उनके लिए इसके सभी लिंक यहाँ पर प्रस्तुत हैं.

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अगज़ल ----- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on मंगलवार, 1 नवंबर 2011 | 12:15 pm


     माना  कि  जुदाई  से  गए  थे  बिखर  से  हम 
     नामुमकिन तो था मगर, संभल गए फिर से हम. 
                           साहित्य सुरभि 

कविता ----- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on रविवार, 16 अक्टूबर 2011 | 6:09 pm

                                         
                     कविता ----- ज़हर 
                     
                                          * * * * *

अग़ज़ल-- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on शनिवार, 1 अक्टूबर 2011 | 2:04 pm

प्रतियोगिता में शामिल अगज़ल , पसंद आए तो LIKE करें 


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अगजल--- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on शनिवार, 10 सितंबर 2011 | 12:38 pm


http://sahityasurbhi.blogspot.com/2011/08/24.html

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पतन { कविता }---दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on गुरुवार, 8 सितंबर 2011 | 4:09 pm

हाइकु गीत --- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on सोमवार, 1 अगस्त 2011 | 8:48 pm

http://sahityasurbhi.blogspot.com/2011/07/blog-post_27.html
                 
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अगज़ल ----- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on रविवार, 24 जुलाई 2011 | 8:28 pm

http://sahityasurbhi.blogspot.com/2011/07/22.html

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तांका ----- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on सोमवार, 18 जुलाई 2011 | 8:39 pm

अगज़ल ----- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on सोमवार, 27 जून 2011 | 8:12 pm

http://sahityasurbhi.blogspot.com/2011/06/21.html 

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कविता ----- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on शुक्रवार, 24 जून 2011 | 1:11 pm


                       महत्वाकांक्षा                   

                      भाग - 1
                      भाग - 2
                      भाग - 3
                      भाग - 4

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अगज़ल ----- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on शुक्रवार, 10 जून 2011 | 9:24 pm


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अगज़ल----- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on गुरुवार, 2 जून 2011 | 12:14 pm

अगज़ल ----- दिलबाग विर्क

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on गुरुवार, 26 मई 2011 | 8:29 pm

Founder

Founder
Saleem Khan