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कुंड़लिया ----- दिलबाग विर्क

Written By Dilbag Virk on गुरुवार, 8 दिसंबर 2011 | 7:47 pm

                 आशा से संसार है, रखना दिल में आस 
          मिल जाएगी सफलता, करना तुम प्रयास ।
          करना तुम प्रयास , झोंक दो पूरी ताकत 
          जीवन होगा सफल, न टिक पाएगी आफत ।
          मत डालो हथियार, हराती हमें हताशा 
          कहत विर्क कविराय, अमृतधार है आशा ।

                                      --------- साहित्य सुरभि

                                                      * * * * *
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2 टिप्पणियाँ:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बढ़िया कुण्डली!

sangita ने कहा…

करत-करत अभ्यास के जड़मति हॉट सूजान
रसरी आवत जाट से सिल पर पड़त निसान|| यही कहा है न आपने !

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