नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

Home » » ग़ज़ल - दिलबाग विर्क

ग़ज़ल - दिलबाग विर्क

Written By Dilbag Virk on रविवार, 4 दिसंबर 2011 | 8:00 pm


                        इस दिल ने नादानी में
                   आग लगा दी पानी में ।

                   वा'दे सारे खाक हुए
                   आया मोड़ कहानी में ।

                   तेरी याद चली आए
                   है ये दोष निशानी में ।

                   कब उल्फत को समझ सके
                   लोग फँसे नादानी में ।

                   या रब ऐसा क्यों होता 
                   दुख हर प्यार कहानी में ।

                   टूटा दिल, बहते आँसू
                   पाए विर्क जवानी में ।

                         * * * * *
Share this article :

4 टिप्पणियाँ:

संजय भास्कर ने कहा…

...बहुत खूब!

वन्दना ने कहा…

सुन्दर ख्याल

रविकर ने कहा…

आभार ||

सुन्दर प्रस्तुति पर बधाई स्वीकारें ||

chitrayepanne.blogspot.com

Rajesh Kumari ने कहा…

bahut khoobsurat jajbaat.

एक टिप्पणी भेजें

Thanks for your valuable comment.