नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

Home » » “दिया” जला तो अम्मा -बाबू -चैन से सोये

“दिया” जला तो अम्मा -बाबू -चैन से सोये

Written By Surendra shukla" Bhramar"5 on शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011 | 11:34 am


“दिया” जला तो
अम्मा -बाबू -चैन से सोये
भिनसारे ही उठकर भाई
ख़ुशी-झूम कर –‘नाच’ पड़े हैं
मेरा ‘दर्द’ हुआ कम भाई
नहीं ‘दवाई’ उनने खायी
लिए मोबाईल
‘सन्देशा’ वे भेज रहे हैं
‘गुल्ली’- ‘डंडा’ याद तू करना
 ‘मुन्ना’ - मेरे ‘लाल’ 
जरा नहीं घबराना उनसे 
कर देना मुह ‘लाल’ 
‘एक’+ -‘एक’- रन जोड़े जाना 
‘चौका’ भी धर देना
यहाँ -वहां ताके तुम रहना 
‘छक्का’ भी जड़ देना
जितने तेरे ‘भाई’ –‘संग’ हैं
मिल के ‘गले’ लगाना  
सबको जिम्मेदारी देना
"माँ" की लाज बचाना
‘कांटे’ –‘पत्थर’ दौड़ा था तू
करता ‘मुश्किल’- काम
जिले राज्य से भेजा हमने
करना ना बदनाम
आज तो ‘मखमल’ दौड़ रहा तू
कर सकता है ‘हर’-‘ काम’
तेरा बल्ला
तेरी माँ के बल्ले से ‘वो’ बनी टोकरी
संग -संग रक्खे
उसमे रक्खा ‘फूल’




सदा ‘होश’ में खेले जाना
कुछ भी ना हो ‘भूल’
रखो ‘भरोसा’- अपने ऊपर
सभी काम- ‘आसान’
‘अश्वमेध’ हम  करते बैठे
‘घोड़े’ भागें तेज
‘विजय’ रथ ना रुके हमारा
तेरी ‘अम्मा’ ने भी माँगा
‘नवरात्रि’ !!! हे दुर्गा माई !!
पूत हमारा -  ‘दुनिया’ छाये
लिए “विश्व –कप” जल्दी आये !!

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५
प्रतापगढ़ उ.प्र.
अब हम जीत के आयेंगे >>>>>
1.4.2011
Share this article :

1 टिप्पणियाँ:

Shikha Kaushik ने कहा…

mata pita apni santan se yahi aasha rakkhte hain .bahut sundar bhavabhivyakti .badhai .

एक टिप्पणी भेजें

Thanks for your valuable comment.