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अगर तुम साबित क़दम रहो

Written By आपका अख्तर खान अकेला on गुरुवार, 23 मई 2019 | 6:31 am

से दो गिरोहों ने ठान लिया था कि पसपाई करें और फिर (सॅभल गए) क्योंकि ख़ुदा तो उनका सरपरस्त था और मोमिनीन को ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिये (122)
यक़ीनन ख़ुदा ने जंगे बदर में तुम्हारी मदद की (बावजूद के) तुम (दुश्मन के मुक़ाबले में) बिल्कुल बे हक़ीक़त थे (फिर भी) ख़ुदा ने फतेह दी (123)
बस तुम ख़ुदा से डरते रहो ताकि (उनके) शुक्रगुज़ार बनो (ऐ रसूल) उस वक़्त तुम मोमिनीन से कह रहे थे कि क्या तुम्हारे लिए काफ़ी नहीं है कि तुम्हारा परवरदिगार तीन हज़ार फ़रिश्ते आसमान से भेजकर तुम्हारी मदद करे हाँ (ज़रूर काफ़ी है) (124)
बल्कि अगर तुम साबित क़दम रहो और (रसूल की मुख़ालेफ़त से) बचो और कुफ़्फ़ार अपने (जोश में) तुमपर चढ़ भी आये तो तुम्हारा परवरदिगार ऐसे पांचहज़ार फ़रिश्तों से तुम्हारी मदद करेगा जो निशाने जंग लगाए हुए डटे होंगे और ख़ुदा ने ये मदद सिर्फ़ तुम्हारी ख़ुशी के लिए की है (125)
और ताकि इससे तुम्हारे दिल की ढारस हो और (ये तो ज़ाहिर है कि) मदद जब होती है तो ख़ुदा ही की तरफ़ से जो सब पर ग़ालिब (और) हिकमत वाला है (126)
(और यह मदद की भी तो) इसलिए कि काफि़रों के एक गिरोह को कम कर दे या ऐसा चैपट कर दे कि (अपना सा) मुँह लेकर नामुराद अपने घर वापस चले जायें (127)
(ऐ रसूल) तुम्हारा तो इसमें कुछ बस नहीं चाहे ख़ुदा उनकी तौबा कु़बूल करे या उनको सज़ा दे क्योंकि वह ज़ालिम तो ज़रूर हैं (128)
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब ख़ुदा ही का है जिसको चाहे बख़्शे और जिसको चाहे सज़ा करे और ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (129)
ऐ ईमानदारों सूद दूनादून खाते न चले जाओ और ख़ुदा से डरो कि तुम छुटकारा पाओ (130)

यक़ीनन ख़ुदा ने जंगे बदर में तुम्हारी मदद की

Written By आपका अख्तर खान अकेला on बुधवार, 22 मई 2019 | 6:24 am

और (ऐ रसूल) एक वक़्त वो भी था जब तुम अपने बाल बच्चों से तड़के ही निकल खड़े हुए और मोमिनीन को लड़ाई के मोर्चों पर बिठा रहे थे और खुदा सब कुछ जानता औेर सुनता है (121)
ये उस वक़्त का वाक़या है जब तुममें से दो गिरोहों ने ठान लिया था कि पसपाई करें और फिर (सॅभल गए) क्योंकि ख़ुदा तो उनका सरपरस्त था और मोमिनीन को ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिये (122)
यक़ीनन ख़ुदा ने जंगे बदर में तुम्हारी मदद की (बावजूद के) तुम (दुश्मन के मुक़ाबले में) बिल्कुल बे हक़ीक़त थे (फिर भी) ख़ुदा ने फतेह दी (123)
बस तुम ख़ुदा से डरते रहो ताकि (उनके) शुक्रगुज़ार बनो (ऐ रसूल) उस वक़्त तुम मोमिनीन से कह रहे थे कि क्या तुम्हारे लिए काफ़ी नहीं है कि तुम्हारा परवरदिगार तीन हज़ार फ़रिश्ते आसमान से भेजकर तुम्हारी मदद करे हाँ (ज़रूर काफ़ी है) (124)
बल्कि अगर तुम साबित क़दम रहो और (रसूल की मुख़ालेफ़त से) बचो और कुफ़्फ़ार अपने (जोश में) तुमपर चढ़ भी आये तो तुम्हारा परवरदिगार ऐसे पांचहज़ार फ़रिश्तों से तुम्हारी मदद करेगा जो निशाने जंग लगाए हुए डटे होंगे और ख़ुदा ने ये मदद सिर्फ़ तुम्हारी ख़ुशी के लिए की है (125)
और ताकि इससे तुम्हारे दिल की ढारस हो और (ये तो ज़ाहिर है कि) मदद जब होती है तो ख़ुदा ही की तरफ़ से जो सब पर ग़ालिब (और) हिकमत वाला है (126)
(और यह मदद की भी तो) इसलिए कि काफि़रों के एक गिरोह को कम कर दे या ऐसा चैपट कर दे कि (अपना सा) मुँह लेकर नामुराद अपने घर वापस चले जायें (127)
(ऐ रसूल) तुम्हारा तो इसमें कुछ बस नहीं चाहे ख़ुदा उनकी तौबा कु़बूल करे या उनको सज़ा दे क्योंकि वह ज़ालिम तो ज़रूर हैं (128)
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब ख़ुदा ही का है जिसको चाहे बख़्शे और जिसको चाहे सज़ा करे और ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (129)
ऐ ईमानदारों सूद दूनादून खाते न चले जाओ और ख़ुदा से डरो कि तुम छुटकारा पाओ (130)

ऐ ईमानदारों अपने (मोमिनीन) के सिवा (गै़रो को) अपना राज़दार न बनाओ

Written By आपका अख्तर खान अकेला on मंगलवार, 21 मई 2019 | 8:52 pm

(मुसलमानों) ये लोग मामूली अज़ीयत के सिवा तुम्हें हरगिज़ ज़रर नही पहुचा सकते और अगर तुमसे लड़ेंगे तो उन्हें तुम्हारी तरफ़ पीठ ही करनी होगी और फिर उनकी कहीं से मदद भी नहीं पहुचेगी (111)
और जहाँ कहीं हत्ते चढ़े उनपर रूसवाई की मार पड़ी मगर ख़ुदा के अहद (या) और लोगों के अहद के ज़रिये से (उनको कहीं पनाह मिल गयी) और फिर हेरफेर के खुदा के गज़ब में पड़ गए और उनपर मोहताजी की मार (अलग) पड़ी ये (क्यों) इस सबब से कि वह ख़ुदा की आयतों से इन्कार करते थे और पैग़म्बरों को नाहक़ क़त्ल करते थे ये सज़ा उसकी है कि उन्होंने नाफ़रमानी की और हद से गुज़र गए थे (112)
और ये लोग भी सबके सब यकसा नहीं हैं (बल्कि) एहले किताब से कुछ लोग तो ऐसे हैं कि (ख़ुदा के दीन पर) इस तरह साबित क़दम हैं कि रातों को ख़ुदा की आयतें पढ़ा करते हैं और वह बराबर सजदे किया करते हैं (113)
खुदा और रोज़े आख़ेरत पर ईमान रखते हैं और अच्छे काम का तो हुक्म करते हैं और बुरे कामों से रोकते हैं और नेक कामों में दौड़ पड़ते हैं और यही लोग तो नेक बन्दों से हैं (114)
और वह जो कुछ नेकी करेंगे उसकी हरगिज़ नाक़द्री न की जाएगी और ख़ुदा परहेज़गारों से खू़ब वाकि़फ़ है (115)
बेशक जिन लोगों ने कुफ्रइख़्तेयार किया ख़ुदा (के अज़ाब) से बचाने में हरगिज़ न उनके माल ही कुछ काम आएंगे न उनकी औलाद और यही लोग जहन्नुमी हैं और हमेशा उसी में रहेंगे (116)
दुनिया की चन्द रोज़ा जि़न्दगी में ये लोग जो कुछ (खि़लाफ़े शरा) ख़र्च करते हैं उसकी मिसाल अन्धड़ की मिसाल है जिसमें बहुत पाला हो और वह उन लोगों के खेत पर जा पड़े जिन्होंने (कुफ्रकी वजह से) अपनी जानों पर सितम ढाया हो और फिर पाला उसे मार के (नास कर दे) और ख़ुदा ने उनपर जुल्म कुछ नहीं किया बल्कि उन्होंने आप अपने ऊपर जु़ल्म किया (117)
ऐ ईमानदारों अपने (मोमिनीन) के सिवा (गै़रो को) अपना राज़दार न बनाओ (क्योंकि) ये गै़र लोग तुम्हारी बरबादी में कुछ (कसर) उठा नहीं रखेंगे (बल्कि जितना ज़्यादा तकलीफ़) में पड़ोगे उतना ही ये लोग ख़ुश होंगे दुश्मनी तो उनके मुह से टपकती है और जो (बुग़ज़ व हसद) उनके दिलों में भरा है वह कहीं उससे बढ़कर है हमने तुमसे (अपने) एहकाम साफ़ साफ़ बयान कर दिये अगर तुम समझ रखते हो (118)
ऐ लोगों तुम ऐसे (सीधे) हो कि तुम उनसे उलफ़त रखतो हो और वह तुम्हें (ज़रा भी) नहीं चाहते और तुम तो पूरी किताब (ख़ुदा) पर ईमान रखते हो और वह ऐसे नहीं हैं (मगर) जब तुमसे मिलते हैं तो कहने लगते हैं कि हम भी ईमान लाए और जब अकेले में होते हैं तो तुम पर गुस्से के मारे उॅगलिया काटते हैं (ऐ रसूल) तुम कह दो कि (काटना क्या) तुम अपने गुस्से में जल मरो जो बातें तुम्हारे दिलों में हैं बेशक ख़ुदा ज़रूर जानता है (119)
(ऐ ईमानदारों) अगर तुमको भलाई छू भी गयी तो उनको बुरा मालूम होता है और जब तुमपर कोई भी मुसीबत पड़ती है तो वह ख़ुश हो जाते हैं और अगर तुम सब्र करो और परहेज़गारी इख़्तेयार करो तो उनका फ़रेब तुम्हें कुछ भी ज़रर नहीं पहुचाएगा (क्योंकि) ख़ुदा तो उनकी कारस्तानियों पर हावी है (120)

करनी कुछ ऐसी कर चलो ,के जग सारा रॉय

Written By आपका अख्तर खान अकेला on सोमवार, 20 मई 2019 | 7:08 am

करनी कुछ ऐसी कर चलो ,के जग सारा रॉय ,,जी हाँ दोस्तों कल कोटा का पत्रकार जगत ,समाजसेवी क्षेत्र सहित सभी वर्गों में पत्रकार श्याम दुबे के अचानक निधन हो जाने से शोक की लहर दोढ़ गयी ,,क़ुरआन का आदेश है ,कुल्लू नफ़्सूंन ज़ायकातुल मोत ,यानि हर इंसान को मोत का मज़ा चखना है ,भगवत गीता का फरमान है ,जो पैदा हुआ है उसे मरना निश्चित है ,यह कटु सत्य है ,फिर भी न जाने क्यों हम ,परस्पर एक दूसरे से नफरत पालते है ,विवादों में रहते है ,एक दूसरे को नीचा दिखाकर खुद दम्भी बन जाते है ,हमारी सभी की डोर ऊपर वाली अदृश्य शक्ति के हाथ में है न जाने डोर खिच जाए और हम एक बेजान शरीर बनकर मिटटी में मिल जाए ,,जी हाँ दोस्तों जीवन के हमारे कर्म ही है जो हमे याद रखने को मजबूर करते है ,,पत्रकार श्याम दूबे ,,बेहतरीन लेखक ,बहतरीन पत्रकार ,,बेहतरीन सम्पादक ,प्रकाशक तो थे ही ,लेकिन वोह एक ऐसी बेहतरीन शख्सियत ,अजात शत्रु थे ,,जिन्हे हर कोई शख्स प्यार सिर्फ प्यार करता था ,वोह हर दिल अज़ीज़ शख्सियत होने से ,,कोटा में भी लोकप्रिय थे ,तो जयपुर में भी लोगों की धड़कन बने हुए थे ,पत्रकारिता श्याम दूबे का निर्विवाद शोक रहा है ,,बनारस उत्तर प्रदेश में उनके वालिद दीनानाथ दूबे खुद क़लमकार थे बाद में दीनानाथ दूबे कोटा डी सी एम में कार्यरत रहकर उद्योग की प्रकाशित मैगज़ीन के सम्पादक रहे ,,,श्याम दूबे ,कोटा में दैनिक नवज्योति में पत्रकार बने ,,बेहतरीन लेखन ,खबर की पकड़ ,निष्पक्ष रिपोर्टिंग ,और सम्पादन प्रबंध में माहिर ,श्याम दूबे ,,विशिष्ठ परिस्थितियों में भी बेदाग़ छवि वाले पत्रकार रहे ,,उन्होंने कर्मचारियों का नेतृत्व भी किया ,,कोटा प्रेस क्लब सहित अन्य संस्थाओं से श्याम जी का सीधा जुड़ाव भी रहा ,लेकिन हर संस्था में वोह निर्विवाद साथी रहे ,,बिना किसी पक्षपात की खबरे डेस्क पर बैठकर चयनित करना इनका स्वभाव रहा ,इनके निजी विचार कुछ भी हों ,लेकिन लेखन और संपादन के दौरान यह अपने नीजि विचारों को किसी पर थोपते नहीं थे ,दूसरों की अभिव्यक्ति की आज़ादी की स्वतंत्रता को बनाये रखने की ज़िम्मेदारी के तहत यह सभी के विचारों को बिना किसी दुर्भावना के अपने सम्पादन में अहमियत्त देने के लिए मशहूर रहे थे ,,दो दशक पहले अलग अलग मैगज़ीन में खबरे लिखने के अलावा इनके वालिद दीना नाथ दूबे के साथ श्याम दूबे ने पहले प्रदेश स्तर पर तथ्य भारती नामक एक मैगज़ीन का प्रकाशन शुरू किया ,,फिर श्याम जी की मेहनत लगन से इस मैगज़ीन को राष्ट्रिय स्तर पर प्रकाशित कर देश के विशष्ठ ,लेखकों ,,चिंतकों ,विचारकों, पत्रकारों को जोड़कर श्याम जी ने पत्रकारिता का एक नया अनुभव तैयार किया ,, कोटा में लगातार पत्रकारों के प्रेस क्लब के चुनाव हुए ,,कोटा के अनेक पत्रकार आज भी उनके इशारों पर चलने वाली उनके चहेते साथी है कई लोगों ने कोटा प्रेसक्लब का प्रत्याक्षी बनकर उनके रिश्तों की दुहाई देकर ,,कोटा प्रेसक्लब में उनके चहेते साथियों से वोट डलवाने की मदद मांगी ,लेकिन वोह तो श्याम थे ,किसी एक के नहीं सभी के श्याम ,थे ,वोह न्यूट्रल रहे ,कोई पक्षपात किसी का समर्थन विरोध नहीं किया ,यही वजह रही के वोह कोटा के छोटे ,,मंझोले ,बढे समाचार पत्रों के पत्रकारों ,,,साप्तहिक ,पाक्षिक ,मासिक पत्र पत्रिकाओं से जुड़े पत्रकारों ,जनसम्पर्क विभाग से जुड़े सदस्यों के चहेते बने रहे ,,,श्रीमती वसुंधरा सिंधिया के मुख्यमंत्री कार्यकाल में श्याम दूबे ,उनकी प्रेस व्यवस्था टीम में अप्रत्यक्ष रूप से निकटतम हिस्सेदार थे ,लेकिन उन्होंने अपनी इस अहमियत का कभी दुरूपयोग नहीं किया ,मुख्यमंत्री कार्यालय में लगातार आने जाने ,,प्रभाव होने के बाद भी उन्होंने खुद को अलग थलग रखा ,वोह बात और है के कोटा के पत्रकार साथियों ,,उनके परिजनों ,,उनके कोटा के पुराने मित्र जनों के परिजनों से संबंधित कोई भी कार्य अगर हुआ तो उसके लिए श्याम जी ने निजी तोर पर संबंधित मंत्री ,अधिकारी से कहकर उनके काम अवश्य करवाए ,पत्रकारों के कल्याण ,उनकी बीमारी के वक़्त कल्याण कोष से मदद के वक़्त भी वोह सक्रिय रहे ,,यही वजह है के कोटा से दो दशक पूर्व ही जयपुर जाने के बाद भी उनका लगाव कोटा ,कोटा के निवासियों से बना रहा और इसीलिए उनके पार्थिव शरीर को कोटा में ही अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि के साथ ,,पंचतत्त्व में विलीन किया गया ,,बस अब कोटा के पत्रकारों के संगठनों ,कोटा के कथित वरिष्ठ कहे जाने वाले पत्रकार साथियों से यही इल्तिजा है ,ऐसी ,शख्सियत ,जिसने पत्रकारिता को जिया है ,जिसने पत्रकारिता के क्षेत्र में निष्पक्ष निर्भिक्ता निर्विवाददिता के लिए अनूठे आयाम ,अनूठे उदाहरण प्रस्तुत किये है ,ऐसे युवा हर दिल अज़ीज़ पत्रकार के असामयिक निधन के बाद ,उनकी जीवनी ,उनकी प्र्रेरणा को लेकर ,,कोटा के पत्रकार संगठनों के ज़रिये कोई प्रकाशन सामग्री बनवाये ,,हर साल कोई कार्यक्रम ,,विचारगोष्ठियाँ ,पत्रकार पुरस्कार योजनाओं का संचालन करवाए ,,उनकी पत्रकारिता के टिप्स ,,उनके स्वभाव ,सम्पादन में खबरों का निष्पक्ष चयन ,वैचारिक मतभेद होने पर भी ,पत्रकारिता के लेखन में निष्पक्षता का हुनर जो उनमे था उसे सभी को पढ़ाये ,यही कोटा के इस पत्र्कारिता के लाल के आसामयिक चले जाने के बाद भी उन्हें ज़िंदा रखने के लिए काफी होगा ,,महत्वपूर्ण बात यह है के सोशल मीडिया की सक्रियता के बावजूद भी इसमें ग्रॉस्पिंग ,विवाद ,नफरत की ज़्यादती होने के कारण श्याम जी सर्वसम्पन्न होने के बाद भी सोशल मीडिया के हिस्सेदार नहीं बने ,अलबत्ता उनकी मैगज़ीन तथ्यभारती की उन्होंने वेबसाइट बनाई ,,ट्विटर ,,फेसबुक पेज बनाया ,उसमे भी उन्होंने खुद को गौण ही रखा ,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है

और (भला) तुम क्योंकर काफि़र बन जाओगे हालांकि तुम्हारे सामने ख़ुदा की आयतें (बराबर) पढ़ी जाती हैं और उसके रसूल (मोहम्मद) भी तुममें (मौजूद) हैं और जो शख़्स ख़ुदा से वाबस्ता हो वह (तो) जरूर सीधी राह पर लगा दिया गया (101)
ऐ ईमान वालों ख़ुदा से डरो जितना उससे डरने का हक़ है और तुम (दीन) इस्लाम के सिवा किसी और दीन पर हरगिज़ न मरना (102)
और तुम सब के सब (मिलकर) ख़ुदा की रस्सी मज़बूती से थामे रहो और आपस में (एक दूसरे) के फूट न डालो और अपने हाल (ज़ार) पर ख़ुदा के एहसान को तो याद करो जब तुम आपस में (एक दूसरे के) दुश्मन थे तो ख़ुदा ने तुम्हारे दिलों में (एक दूसरे की) उलफ़त पैदा कर दी तो तुम उसके फ़ज़ल से आपस में भाई भाई हो गए और तुम गोया सुलगती हुयी आग की भट्टी (दोज़ख) के लब पर (खडे़) थे गिरना ही चाहते थे कि ख़ुदा ने तुमको उससे बचा लिया तो ख़ुदा अपने एहकाम यू वाजे़ह करके बयान करता है ताकि तुम राहे रास्त पर आ जाओ (103)
और तुमसे एक गिरोह ऐसे (लोगों का भी) तो होना चाहिये जो (लोगों को) नेकी की तरफ़ बुलाए अच्छे काम का हुक्म दे और बुरे कामों से रोके और ऐसे ही लोग (आख़ेरत में) अपनी दिली मुरादें पायेंगे (104)
औेर तुम (कहीं) उन लोगों के ऐसे न हो जाना जो आपस में फूट डाल कर बैठ रहे और रौशन (दलील) आने के बाद भी एक मुँह एक ज़बान न रहे और ऐसे ही लोगों के वास्ते बड़ा (भारी) अज़ाब है (105)
(उस दिन से डरो) जिस दिन कुछ यू लोगों के चेहरे तो सफेद नूरानी होंगे और कुछ (लोगो) के चेहरे सियाह जिन लोगों के मुहॅ में कालिक होगी (उनसे कहा जायेगा) हाए क्यों तुम तो इमान लाने के बाद काफि़र हो गए थे अच्छा तो (लो) (अब) अपने कुफ्रकी सज़ा में अज़ाब (के मजे़) चखो (106)
और जिनके चेहरे पर नूर बरसता होगा वह तो ख़ुदा की रहमत (बहिश्त) में होंगे (और) उसी में सदा रहेंगे (107)
(ऐ रसूल) ये ख़ुदा की आयतें हैं जो हम तुमको ठीक (ठीक) पढ़ के सुनाते हैं और ख़ुदा सारे जहांन के लोगों (से किसी) पर जु़ल्म करना नहीं चाहता (108)
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) ख़ुदा ही का है और (आखि़र) सब कामों की रूज़ु ख़ुदा ही की तरफ़ है (109)
तुम क्या अच्छे गिरोह हो कि (लोगों की) हिदायत के वास्ते पैदा किये गए हो तुम (लोगों को) अच्छे काम का हुक्म करते हो और बुरे कामों से रोकते हो और ख़ुदा पर ईमान रखते हो और अगर एहले किताब भी (इसी तरह) ईमान लाते तो उनके हक़ में बहुत अच्छा होता उनमें से कुछ ही तो इमानदार हैं और अक्सर बदकार (110)

सुधींद्र गोढ़ प्रेस फोटोग्राफर बखूबी निभाते थे ,,

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 19 मई 2019 | 6:45 am

अभी हाल ही में चुनावी रैली के दौरान ,,कांग्रेस के राष्ट्रिय अध्यक्ष राहुलगांधी के साथ प्रेस फोटोग्राफर के रूप में रफ़ीक़ पठान साथ थे ,,,राहुल गांधी ने रफ़ीक़ पठान को आवाज़ देकर पोज़ बनाकर एक फोटो खेंचने के लिए कहा ,तो मुझे अचानक पुरानी प्रेस फोटोग्राफरी का दौर याद आ गया जब रंगीन फोटो ग्राफ़ी नहीं हुआ करती थी ,महंगे ज़ूम वाले कैमरे डिजिटल नहीं हुआ करते थे ,एक रील जिसे वी आई पी फोटो होने पर बीच में से काटकर हाथों हाथ ,फोटो धोकर देना ही फोटोग्राफर की कला हुआ करती थी ,इस और इस कला को मन में मंदिर की पूजा की तरह पुजारी बनकर ,,सुधींद्र गोढ़ प्रेस फोटोग्राफर बखूबी निभाते थे ,,ऐसे में उनकी फोटोग्राफी की कलाकृतियां ,कलामंदिर स्टूडियो के नाम से खूब प्रसिद्ध हुई ,,सभी जानते है ,,फोटो अपने आप में बहुत कुछ कहानिये बयांन करते है ,एक फोटो अपने आप में एक खबर होता है ,आज डिजिटल ,एडिटिंग कैमरा युग में चाहे यह सब आसान हो लेकिन भागम भाग के उस पुराने दौर अख़बार की आत्मा ,अख़बार की रूह सिर्फ प्रेस फोटोग्राफर ही हुआ करते थे , जिसके इर्द गिर्द सभी खबरे ,खबरे छपवाने वाले घूमते नज़र आते है , पुराने प्रेस फोटोग्राफरों में यह विधा ,,मंदिर के पुजारी की तरह ,इस कला को पूजा की तरह जनमानस टटोल कर प्रस्तुतिकरण करने में माहिर ,,सुधींद्र गोड़ प्रमुख कहे जाते थे ,जिनका कला मंदिर ऐसे रेयरेस्ट आदिकाल की प्रेस फोटोग्राफी का रिसर्च म्यूज़ियम भी कहा जा सकता है ,बाद में इस लाइन में ओमेंद्र सक्सेना ,,पेट्रिओट स्टूडियो के नाम से आगे आये फिर पत्रिका अखबार आ जाने के बाद हाबुलाल ,,रफ़ीक़ पठान ,प्रेस फोटोग्राफर के रूप में हीरो बनकर उभरे है ,,अब डिजिटल युग है ,मोबाइल युग है ,लेकिन फोटोग्राफी की आर्ट ,स्पीड फोटोग्राफी हर किसी के बस की बात नहीं है ,मुझे याद है ,कलामंदिर स्टूडियों के भाई सुधींद्र गौड़ का कैमरा ऐ के फोर्टी सेवन की तरह हर कार्यक्रम ,में ,हर वी आई पी यात्रा में प्रत्येक ऐंगल से धांय ,धांय फोटो शूट करता ,था हर ,तस्वीर हर लम्हा ,,हर कार्यक्रम ,हर वी आ पी यात्रा इनके कैमरे की खबर हुआ करती थी ,,अख़बार छपने के पहले सुधींद्र गॉड के स्टूडियो के बाहर इन्तिज़ार में रहते थे ,,जहाँ यह तत्काल शूट के बाद एक अँधेरे कमरे में ,,रील रोल को कट लगाकर ,लाल बल्ब की रौशनी में ,केमिकल से नेगेटिव धोकर पोजेटिव बनाकर ,,खूबसूरत फोटो निकलते थे ,फिर इन फोटोओं के ब्लॉक ,महालक्ष्मी ब्लॉक पर भाई वहीद अंसारी बनाया करते थे ,इनकी हर तस्वीर एक कहानी बयांन करती थी ,इस दौर अब्दुल हनीफ ज़ैदी की केमराग्राफी भी क़ाबिल ऐ तारीफ़ थी ,लेकिन वोह जूलॉजिकल ,,जियोग्राफिकल फोटोग्राफी के शौक़ीन थे फिर वोह सरकारी ओहदेदार होने से उनकी अपनी मर्यादाये भी थी ,सुधींद्र गौड़ वी आई पी यात्राओं में खुद वी आई पी हो जाते थे ,,मेने देखा है आज जो बढे बढे ओहदों पर बैठे सियासी लोग है ,यह इनके इर्द गिर्द वी आई पी नेताओं के साथ फोटो खिंचवाने के लिए इनसे अनुनय करते थे विनय करते थे ,फिर उस फोटो को बनवाकर सजाने के लिए इनके इर्द गिर्द मेला लगाते थे ,एक बार इंद्रा गांधी की कोटा में सभा थी ,,मूवमेंट फोटो नहीं बन रहा था ,सभी सुरक्षा कर्मियों के साथ इंद्रा जी को घेरे हुए थे ,,सुधींद्र गौड़ ,तपाक से अंदर घेरे में घुसे ,इंद्रा जी का अंदाज़ देखने जैसा था ,,सब सकपकाए हुए थे ,,सुधींद्र गौड़ ,हाथ जोड़े ,इंद्रा जी से प्रार्थना की एक मिनट पोज़ प्लीज़ ,,इन्द्रा जी मुस्कुराई ,उनका वोह फोटो दूसरे दिन ,,अख़बार की सुर्ख़ियों में एक अपने आप में खबर कह रहा था ,सुधींद्र गौड़ ने उस फोटो में अपनी पूरी कलाकारी उंडेल दी थी ,,,इसी तरह अटल बिहारी वाजपेयी का एयरपोर्ट पर सभी नेता इन्तिज़ार कर रहे थे ,,अटल बिहारी वाजपेयी हवाई जहाज़ से उतरे ,,नेताओं से दूर से हाय ,नमस्कार किया और दूसरी तरफ अधिकारियों के घेरे की तरफ मुड़ ,गए ,,जो नेता एयरपोर्ट पर ,प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से हाथ मिलाकर ,अभिवादन कर कुछ कहना चाहते थे ,उनके साथ यादगार तस्वीर के लम्हों को कैमरे में क़ैद करवाना चाहते थे ,वोह सभी नेता लोग स्तब्ध थे ,निराश थे ,लेकिन सुधींद्र गौड़ मुस्कुराये ,उचके ,और भागते हुए सीधे अटल बिहारी वाजपेयी का रास्ता रोककर उनके फोटो खेंचते हुए ,उनसे बतियाने लगे ,उनसे कहा साहिब ,कुछ लोग आपका उधर काफी उम्मीदों से इन्तिज़ार कर रहे है ,अटल बिहारी वाजपेयी भी मुस्कुराये ,वोह मुड़े ,,और फिर वापस लौटकर उन कार्यकर्ताओं के पास आये ,फोटो शूट हुए ,,अभिवादन ,सत्कार ,स्वागत हुआ ,,सभी नेता ,अटल बिहारी वाजपेयी के साथ फोटो ग्राफ़ी से खुश हो गए ,कोटा मेले दशहरे कार्यक्रम में फिल्म स्टार हो , कवि हों ,शायर हो ,,सभी कार्यक्रमों की फोटोग्राफी इनके पास थी ,रात्रि को वही कैमरा कट ,फोटो बनाकर ब्लॉक बनवाकर अख़बारों में पहुचवाना इनकी ततपरता पर ही निर्भर था ,,कलेक्टर हो , स्थानीय नेता हो ,,प्राइवेट उद्योगपति हो ,,अख़बार के मालिक हो सभी इन के इर्द गिर्द थे ,फिर यह मोर्चा एकल कम्पीटिशन खत्म होने के बाद ओमेंद्र सक्सेना की हिस्सेदारी में रहा ,,पुराना कैमरा युग बदला ,,कलर फोटोग्राफी आयी ,,फिर वही डिजिटल फोटोग्राफी आने के बाद अब तो तुरंत फोटो प्रकाशन के लिए तैयार है ,लेकिन प्रेस फोटोग्राफर की ज़िंदगी पहले जितने जोखिम में थी ,जितनी चैलेंजिंग थी वोह आज नहीं है ,आज सुविधाएं है ,,आज तत्कालिक तकनीक है ,,वाह वाही है ,पहले फोटग्राफर गुमनामी के अँधेरे में भी रहता था और अखबारों को रौशनी से भी भरता था ,पहले प्रेस फोटोग्राफर अपने कैमरे छोटे बढे नेताओं का इतिहास केंद्रीय नेताओं के साथ क़ैद भी करता था ,,आज तो मोबाइल पर ही सब मच सम्भव हो गया है ,,,,ऑडियो,, वीडियो,, फोटोग्राफी सब राजीव गाँधी के डिजिटल युग के इक्कीसवीं सदी के सपने का अंग बन गया है ,,यही बात राजीव गांधी जब बूंदी दूरदर्शन रिले केंद्र का लोकार्पण करने आये थे तब ,दैनिक जननायक के तात्कालिक पत्रकार भंवर शर्मा अटल का पास नहीं होने से उन्होंने उनकी फीएट सर्किट हाउस के गेट पर रोकी थी और पास नहीं बनाने पर अधिकारियों से विवाद चल ही रहा था ,के राजीव गाँधी जी आये ,वोह उतरे ,फीएट कार एक तरफ लगवाई ,,बूंदी जाने की तैयारी थी ,तब राजीव गांधी जी ने प्रेस फोटोग्राफी के तात्कालिक युग के आधुनिकीकरण ,डिज़िलीकरण के लिए इक्कीसवीं सदी का भारत स्वर्णिम काल बनाने की बात कही थी ,,, प्रेस फोटोग्राफी आज भी जस की तस है ,चाहे सोशल मीडिया पर मोबाइल की डिजिटल तस्वीरें हों ,तात्कालिक फोटो हों ,लकिन जो आर्ट ,जो कला ,जो स्टाइल प्रेस फोटोग्राफी की जीवंत शैली ,भाई सुधींद्र गौड़ ने शुरू की थी ,ओमेंद्र सक्सेना ने अंगीकार की ,,हाबुलाल शर्मा ,,रफ़ीक ,पठान ,कमलेश बागड़ी ,,सलीम शेरी ,गिर्राज पांचाल ,,अशफ़ाक़ खान ,,ऐ एच जैदी ,,छोटे जैदी सहित कई लोग है जो इस विधा को ,,जीवंत खबरों की प्रेस् फोटोग्राफी को आगे बढ़ा रहे है ,,बस यूँ ही , राहुल गाँधी जी कोटा यात्रा पर रफ़ीक़ पठान के आधुनिक कैमरे से धड़ाधड़ मुलाक़ात की फोटोग्राफी फिर ,राहुल जी का रफ़ीक़ पठान को इशारा देकर पुकार कर आसिफ मिर्ज़ा ,,सहित हमारी तरफ बुलाकर एक फोटो खेंचने का पोज़ बनाकर फोटो खिंचवाने की घटना ने मुझे पुरानी प्रेस फोटोग्राफी की जोखिम भरी तकनीक ,तात्कालिक दुश्वारियां ,,वर्तमान के आधुनिकीकरण फोटोग्राफी के युग की कुछ दास्ताने ,,कुछ संस्मरण ताज़ा कर दिए और आप लोगों तक यह भूली बिसरी यादे जिसमे पुराने और नए कोटा की कलाकृतियां फोटो शूट यादें शामिल है ,अल्फ़ाज़ों में उकेर कर पहुंचाने के लिए में मजबूर हो गया ,सभी प्रेस फोटोग्राफर्स को मेरा सेल्यूट ,मेरा सलाम ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

लोगों (की इबादत) के वास्ते जो घर सबसे पहले बनाया गया वह तो यक़ीनन यही (काबा) है

बेशक जिन लोगों ने कुफ्रइखि़्तयार किया और कुफ्रकी हालत में मर गये तो अगरचे इतना सोना भी किसी की गुलू ख़लासी {छुटकारा पाने} में दिया जाए कि ज़मीन भर जाए तो भी हरगिज़ न कु़बूल किया जाएगा यही लोग हैं जिनके लिए दर्दनाक अज़ाब होगा और उनका कोई मददगार भी न होगा (91)
(लोगों) जब तक तुम अपनी पसन्दीदा चीज़ों में से कुछ राहे ख़ुदा में ख़र्च न करोगे हरगिज़ नेकी के दरजे पर फ़ायज़ नहीं हो सकते और तुम कोई (92)
सी चीज़ भी ख़र्च करो ख़ुदा तो उसको ज़रूर जानता है तौरैत के नाजि़ल होने के क़ब्ल याकू़ब ने जो जो चीज़े अपने ऊपर हराम कर ली थीं उनके सिवा बनी इसराइल के लिए सब खाने हलाल थे (ऐ रसूल उन यहूद से) कह दो कि अगर तुम (अपने दावे में सच्चे हो तो तौरेत ले आओ (93)
और उसको (हमारे सामने) पढ़ो फिर उसके बाद भी जो कोई ख़ुदा पर झूठ तूफ़ान जोड़े तो (समझ लो) कि यही लोग ज़ालिम (हठधर्म) हैं (94)
(ऐ रसूल) कह दो कि ख़ुदा ने सच फ़रमाया तो अब तुम मिल्लते इबराहीम (इस्लाम) की पैरवी करो जो बातिल से कतरा के चलते थे और मुशरेकीन से न थे (95)
लोगों (की इबादत) के वास्ते जो घर सबसे पहले बनाया गया वह तो यक़ीनन यही (काबा) है जो मक्के में है बड़ी (खै़र व बरकत) वाला और सारे जहान के लोगों का रहनुमा (96)
इसमें (हुरमत की) बहुत सी वाज़े और रौशन निशानिया हैं (उनमें से) मुक़ाम इबराहीम है (जहाँ आपके क़दमों का पत्थर पर निशान है) और जो इस घर में दाखि़ल हुआ अमन में आ गया और लोगों पर वाजिब है कि महज़ ख़ुदा के लिए ख़ानाए काबा का हज करें जिन्हे वहां तक पहुँचने की इस्तेताअत है और जिसने बावजूद कु़दरत हज से इन्कार किया तो (याद रखे) कि ख़ुदा सारे जहान से बेपरवाह है (97)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब खुदा की आयतो से क्यो मुन्किर हुए जाते हो हालांकि जो काम काज तुम करते हो खु़दा को उसकी (पूरी) पूरी इत्तेला है (98)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब दीदए दानिस्ता (जान बुझ कर) खुदा की (सीधी) राह में (नाहक़ की) कज़ी ढॅूढो (ढूढ) के ईमान लाने वालों को उससे क्यों रोकते हो ओर जो कुछ तुम करते हो खु़दा उससे बेख़बर नहीं है (99)
ऐ ईमान वालों अगर तुमने एहले किताब के किसी फि़रके़ का भी कहना माना तो (याद रखो कि) वह तुमको ईमान लाने के बाद (भी) फिर दुबारा काफि़र बना छोडेंगे (100)

तो क्या ये लोग ख़ुदा के दीन के सिवा (कोई और दीन) ढूढते हैं

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शनिवार, 18 मई 2019 | 6:39 am

(और ऐ रसूल वह वक़्त भी याद दिलाओ) जब ख़ुदा ने पैग़म्बरों से इक़रार लिया कि हम तुमको जो कुछ किताब और हिकमत (वगै़रह) दे उसके बाद तुम्हारे पास कोई रसूल आए और जो किताब तुम्हारे पास उसकी तसदीक़ करे तो (देखो) तुम ज़रूर उस पर ईमान लाना, और ज़रूर उसकी मदद करना (और) ख़ुदा ने फ़रमाया क्या तुमने इक़रार कर लिया तुमने मेरे (अहद का) बोझ उठा लिया सबने अर्ज़ की हमने इक़रार किया इरशाद हुआ (अच्छा) तो आज के क़ौल व (क़रार के) आपस में एक दूसरे के गवाह रहना (81)
और तुम्हारे साथ मैं भी एक गवाह हॅू फिर उसके बाद जो शख़्स (अपने क़ौल से) मुँह फेरे तो वही लोग बदचलन हैं (82)
तो क्या ये लोग ख़ुदा के दीन के सिवा (कोई और दीन) ढूढते हैं हालांकि जो (फ़रिश्ते) आसमानों में हैं औेर जो (लोग) ज़मीन में हैं सबने ख़ुशी ख़ुशी या ज़बरदस्ती उसके सामने अपनी गर्दन डाल दी है और (आखि़र सब) उसकी तरफ़ लौट कर जाएंगे (83)
(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि हम तो ख़ुदा पर ईमान लाए और जो किताब हम पर नाजि़ल हुयी और जो (सहीफ़े) इबराहीम और इस्माईल और इसहाक़ और याकू़ब और औलादे याकू़ब पर नाजि़ल हुये और मूसा और ईसा और दूसरे पैग़म्बरों को जो (जो किताब) उनके परवरदिगार की तरफ़ से इनायत हुयी (सब पर ईमान लाए) हम तो उनमें से किसी एक में भी फ़क्र नहीं करते(84)
और हम तो उसी (यकता ख़ुदा) के फ़रमाबरदार हैं और जो शख़्स इस्लाम के सिवा किसी और दीन की ख़्वाहिश करे तो उसका वह दीन हरगिज़ कुबूल ही न किया जाएगा और वह आखि़रत में सख़्त घाटे में रहेगा (85)
भला ख़ुदा ऐसे लोगों की क्योंकर हिदायत करेगा जो इमाने लाने के बाद फिर काफि़र हो गए हालांकि वह इक़रार कर चुके थे कि पैग़म्बर (आखि़रूज़ज़मा) बरहक़ हैं और उनके पास वाज़ेह व रौशन मौजिज़े भी आ चुके थे और ख़ुदा ऐसी हठधर्मी करने वाले लोगों की हिदायत नहीं करता (86)
ऐसे लोगों की सज़ा यह है कि उनपर ख़ुदा और फ़रिश्तों और (दुनिया जहान के) सब लोगों की फिटकार हैं (87)
और वह हमेशा उसी फिटकार में रहेंगे न तो उनके अज़ाब ही में तख़्फ़ीफ़ (कमी) की जाएगी और न उनको मोहलत दी जाएगी (88)
मगर (हां) जिन लोगों ने इसके बाद तौबा कर ली और अपनी (ख़राबी की) इस्लाह कर ली तो अलबत्ता ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है (89)
जो अपने ईमान के बाद काफि़र हो बैठे फि़र (रोज़ बरोज़ अपना) कुफ्रबढ़ाते चले गये तो उनकी तौबा हरगिज़ न कु़बूल की जाएगी और यही लोग (पल्ले दरजे के) गुमराह हैं (90)

आपको याद होगा ,,कोटा में मर्दानी टू ,,फिल्म की शूटिंग

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शुक्रवार, 17 मई 2019 | 6:07 am

आपको याद होगा ,,कोटा में मर्दानी टू ,,फिल्म की शूटिंग ,फिल्मस्टार रानी मुखर्जी ,उनके साथी स्टार मिलकर पिछले एक हफ्ते से लगातार कर रहे है ,कोटा के सीन शूट हो रहे है ,,कोटा के कुछ लोग भी मुफ्त में उस सीन बाज़ी में शामिल हो रहे है ,कुछ वी आई पी ,कुछ वी वी आई पी ,इन स्टारों के साथ फोटो सेल्फी वगेरा कर रहे है ,अच्छी बात है ,लेकिन बुरी बात यह है के शूटिंग नियमों का उलंग्घन है या फिर स्वीकृत विधि नियमों के तहत ,,शूटिंग की स्वीकृति ,विधिक व्यवस्थाएं चल रही है ,रिश्ते निभाने के लिए कहीं कोटा को आर्थिक नुकसान हो रहा है ,या फायदा ,इसका पोस्टमार्टम किसी भी दैनिक अख़बार ,किसी भी अख़बार ,,किसी भी न्यूज़ चैनल पर देखने और सुनने को नहीं मिला ,,सभी जानते है ,फिल्म शूटिंग ,क़ानून व्यवस्था का हिस्सा नहीं होकर कॉमर्शियल सिस्टम से जुड़ा मामला है ,ऐसे में व्यवस्थाओं की स्वीकृति तो नाट्य प्रदर्शन अधिनियम ,,पुलिस अधिनियम सहित अन्य विधिक प्रावधानों में होती है ,शूटिंग आम सड़कों ,गलियों में होती है तो पुलिस जवानों को सुरक्षा के लिए लगाना पढ़ता है ,आम जनता को भी परेशानी होती है ,हमे यह जानने का ,,यह पूंछने का अधिकार तो है ही सही ,के रानी मुखर्जी की इस फिल्म मर्दानी टू की शूटिंग के दौरान ,कोटा शहर ,कोटा ग्रामीण ,,बूंदी पुलिस यानी कोटा रेंज की कितनी पुलिस कब कब लगाई गयी ,,इन जवानों की क्या रोज़नामचे में रवानगी ,आमद दर्ज है ,क्या इन पुलिस जवानों को विधिक क़ानून व्यवस्था से हटाकर ,,,,इस शूटिंग व्यवस्था में लगाने के लिए ,प्रति सिपाही ,अधिकारी ,पुलिस कल्याण कोष में विधिक रूप से स्वीकृति प्राप्त कर राशि जमा कराई गयी है ,क्योंकि सभी जानते है जाब्ता क़ानून व्यवस्था के लिए ही कम है ,एक न्यायालय के आदेश की विधिक डिक्री की पालना करवाने के लिए ही दो पुलिस जवान भी अगर भेजे जाते है तो उसका पूरा खर्च आम पक्षकार से न्यायालय के ज़रिये जमा करवाया जाता है ,चरित्र प्रमाणपत्र हो ,दूसरे कार्य हो ,उसका वेरिफिकेशन खर्च भी आम आदमी से लिया जाता है ,अब जब क़ानूनी रूप से ,ऐसी शूटिंग और गैर क़ानून व्यवस्था से संबंधित कॉमर्शियल कार्यक्रमों में ,क़ानून व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस जवान ,ट्रेफिक ,पुलिस पुलिस अधिकारी लगाए गए है ,लगाए जाते रहे है ,और आगे भी लगाए जाएंगे तो प्रति पुलिस कर्मी ,कितने पुलिस कर्मचारी ,अधिकारीयों का कितना खर्चा ,मर्दानी शूटिंग की रानी मुखर्जी के प्रोड्यूसर ,डाइरेक्टर ,,प्रबंधक ने कोटा पुलिस प्रशासन में जमा कराकर रसीद प्राप्त की है ,,यह जांनने का हक़ सभी को है ,और इस बिंदु पर अधिकारीयों से खोजखबर लेकर सवाल पूंछकर ,इन सवालों का जवाब अख़बारों में प्रकाशित करने ,, न्यूज़ चैनल में प्रसारित करने का कर्तव्य भी कोटा के खोजी पत्रकारों का है ही सही ,,,,अख्तर खान अकेला

इन्हें मिटा दिया करता हूँ..

*उलझनें हैं बहुत..*
*मग़र, सुलझा लिया करता हूँ..*
*और, फोटो खिंचवाते वक़्त..*
*मैं अक्सर मुस्कुरा लिया करता हूँ..*
क्यूँ नुमाइश करुँ..
अपने माथे पर शिकन की..
मैं, अक्सर मुस्कुरा के..
इन्हें मिटा दिया करता हूँ..
*क्योंकि..*
*जब लड़ना है, खुद को खुद ही से..*
*तो, हार-जीत में..*
*कोई फ़र्क नहीं रखता हूँ..*
हारुँ या जीतूं..
कोई रंज नहीं..
कभी खुद को जिता देता हूँ..
तो, कभी खुद से जीत जाता हूँ..
*ज़िंदगी तुम बहुत खूबसूरत हो..*
*इसलिए मैंने तुम्हें..*
*सोचना बंद और..*
*जीना शुरु कर दिया है..*

क़यामत के दिन ख़ुदा उनसे बात तक तो करेगा नहीं

ऐ अहले किताब तुम क्यो हक़ व बातिल को गड़बड़ करते और हक़ को छुपाते हो हालांकि तुम जानते हो (71)
और अहले किताब से एक गिरोह ने (अपने लोगों से) कहा कि मुसलमानों पर जो किताब नाजि़ल हुयी है उसपर सुबह सवेरे ईमान लाओ और आखि़र वक़्त इन्कार कर दिया करो शायद मुसलमान (इसी तदबीर से अपने दीन से) फिर जाए (72)
और तुम्हारे दीन की पैरवरी करे उसके सिवा किसी दूसरे की बात का ऐतबार न करो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि बस ख़ुदा ही की हिदायत तो हिदायत है (यहूदी बाहम ये भी कहते हैं कि) उसको भी न (मानना) कि जैसा (उम्दा दीन) तुमको दिया गया है, वैसा किसी और को दिया जाय या तुमसे कोई शख़्स ख़ुदा के यहाँ झगड़ा करे (ऐ रसूल तुम उनसे) कह दो कि (ये क्या ग़लत ख़्याल है) फ़ज़ल (व करम) ख़ुदा के हाथ में है वह जिसको चाहे दे और ख़ुदा बड़ी गुन्जाईश वाला है (और हर शै को) जानता है (73)
जिसको चाहे अपनी रहमत के लिये ख़ास कर लेता है और ख़ुदा बड़ा फ़ज़लों करम वाला हे (74)
और एहले किताब कुछ ऐसे भी हैं कि अगर उनके पास रूपए की ढेर अमानत रख दो तो भी उसे (जब चाहो) वैसे ही तुम्हारे हवाले कर देंगे और बाज़ ऐसे हें कि अगर एक अशरफी भी अमानत रखो तो जब तक तुम बराबर (उनके सर) पर खड़े न रहोगे तुम्हें वापस न देंगे ये इस वजह से है कि उन का तो ये क़ौल है कि (अरब के) जाहिलो (का हक़ मार लेने) में हम पर कोई इल्ज़ाम की राह ही नहीं और जान बूझ कर खुदा पर झूठ (तूफ़ान) जोड़ते हैं (75)
हाँ (अलबत्ता) जो शख़्स अपने अहद को पूरा करे और परहेज़गारी इख़्तेयार करे तो बेशक ख़ुदा परहेज़गारों को दोस्त रखता है (76)
बेशक जो लोग अपने अहद और (क़समे) जो ख़ुदा (से किया था उसके) बदले थोड़ा (दुनयावी) मुआवेज़ा ले लेते हैं उन ही लोगों के वास्ते आखि़रत में कुछ हिस्सा नहीं और क़यामत के दिन ख़ुदा उनसे बात तक तो करेगा नहीं ओर न उनकी तरफ़ नज़र (रहमत) ही करेगा और न उनको (गुनाहों की गन्दगी से) पाक करेगा और उनके लिये दर्दनाम अज़ाब है (77)
और एहले किताब से बाज़ ऐसे ज़रूर हैं कि किताब (तौरेत) में अपनी ज़बाने मरोड़ मरोड़ के (कुछ का कुछ) पढ़ जाते हैं ताकि तुम ये समझो कि ये किताब का जुज़ है हालांकि वह किताब का जुज़ नहीं और कहते हैं कि ये (जो हम पढ़ते हैं) ख़ुदा के यहाँ से (उतरा) है हालांकि वह ख़ुदा के यहाँ से नहीं (उतरा) और जानबूझ कर ख़ुदा पर झूठ (बोहतान) जोड़ते हैं (78)
किसी आदमी को ये ज़ेबा न था कि ख़ुदा तो उसे (अपनी) किताब और हिकमत और नबूवत अता फ़रमाए और वह लोगों से कहता फिरे कि ख़ुदा को छोड़कर मेरे बन्दे बन जाओ बल्कि (वह तो यही कहेगा कि) तुम अल्लाह वाले बन जाओ क्योंकि तुम तो (हमेशा) किताबे ख़ुदा (दूसरो) को पढ़ाते रहते हो और तुम ख़ुद भी सदा पढ़ते रहे हो (79)
और वह तुमसे ये तो (कभी) न कहेगा कि फ़रिश्तों और पैग़म्बरों को ख़ुदा बना लो भला (कहीं ऐसा हो सकता है कि) तुम्हारे मुसलमान हो जाने के बाद तुम्हें कुफ्र का हुक्म करेगा (80)

काश आदरणीय नरेंद्र मोदी ,अमित शाह के राजस्थान सरकार में मुख्यमंत्री महोदया ने दुष्कर्म पीड़िताओं की मदद के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन मान ली होती

Written By आपका अख्तर खान अकेला on गुरुवार, 16 मई 2019 | 6:30 am

काश आदरणीय नरेंद्र मोदी ,अमित शाह के राजस्थान सरकार में मुख्यमंत्री महोदया ने दुष्कर्म पीड़िताओं की मदद के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन मान ली होती ,,राजेंद्र राठोड ,,मंत्री साहब ,किरोड़ी मीणा की सरकार ने गृहमंत्रालय ,विधि मंत्रालय से इसे लागू कर दिया होता तो राजस्थान में आज दुष्कर्म अपराधियों के हौसले नहीं बढ़ते , उक्त दिशा निर्देशों की पालना अब जाकर अशोक गहलोत सरकार ने शुरू की है ,,,,जी हाँ दोस्तों वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म सहित सभी तरह के पीड़ितों ,गवाहों को मुक़दमों के अनुसंधान के दौरान सभी थानाधिकारियों ,,पुलिस अधिकारीयों को विशेष प्रशिक्षण देने ,पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने ,अनुसंधान व्यस्था बनाने ,संबंधित निर्देश थे ,जबकि मुक़दमा दर्ज होने के बाद ऑफिसर केस स्कीम के तहत फॉलोअप करने ,,गवाहान को पूर्व में ही प्रशिक्षित करने ,विशेषज्ञ वकीलों को पैरवी के लिए उपलब्ध कराने ,,गवाहान को सुरक्षा उपलब्ध कराने ,,गवाहान को लोकअभियोजक सहित विशेषज्ञ वकील से मदद लेकर ,बयान समझाने ,जिरह के बारे में जानकारी देने संबंधित दिशा निर्देश जारी किये गए थे ,जिसे केंद्र और राजस्थान सरकार से गंभीरता से नहीं लिया था ,मेने खुद ने उक्त सुप्रीमकोर्ट के दिशा निर्देशों की पालना सुनिश्चित करवाने के लिए ह्यूमन रिलीफ सोसायटी का महासचिव होने के नाते ,,मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा सिंधिया और पुरे देश के राज्यों में सुप्रीमकोर्ट के वर्ष 2014 में जारी उक्त दिशा निर्देशों को लागू करवाने के मामले में तात्कालिक राष्ट्रपति महामहीम को उक्त सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रतिलिपि के साथ ,,निर्देशों को क्रियान्वित करने के महत्वपूर्ण सुझावों के साथ ,,इसे लागु करने की लिखित प्रार्थना की थी ,लेकिन अफ़सोस संवेदन शील प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी ,,उनकी पार्टी द्वारा नियुक्त मुख्यमंत्री आदरणीय श्रीमती वसुंधरा सिंधियाँ ने इन दिशा निर्देशों पर कोई काम नहीं किया ,खुद ,आदरणीय प्रधानमंत्री साहिब ,प्रतिपक्ष में रहने वाले किरोड़ी मीणा साहिब जो उस वक़्त भाजपा के कटटर दुश्मन थे उन्होंने ,राजस्थान सरकार के मंत्री राजेंद्र राठोड सहित किसी ने भी इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया ,और माननीय उच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुरूप[किसी भी तरह की पालना सुनिश्चित नहीं की ,न विशेष शाखा बनाई ,न गवाहों के लिए समझाइश पूर्व प्रशिक्षण की कोई व्यवस्था की ,न पुलिस के लिए विशेष प्रशिशक्षण रिफ्रेशर अनुसंधान टिप्स कार्यक्रम चालू करवाए ,,इतना ही नहीं ,सरकार ने लोक अभियोजक विशेषज्ञ प्रशिक्षण कार्यक्रम तक नहीं चालू किये ,लोकअभियोजकों को गवाहान को समझाइश ,पुलिस कर्मियों को ऐसे मामलों के अनुसंधान ,,उनकी पूर्व सूचनाएं जुटाने संबंधित कोई कार्यक्रम नहीं बनाये ,,केस ऑफिसर स्कीम लागू नहीं की ,,तो जनाब दोषी कोन हुआ ,महिलाओं के अत्याचार ,उनके अनुसंन्धान ,,उनके आरोपियों को सज़ा दिलवाने की प्रक्रिया ,,पूर्व सूचनाओं को लागू करवाने में लापरवाह किसकी सरकार , किसकी पार्टी रही यह खुद मुख्यमंत्री भवन में डाक आमद में ह्यूमन रिलीफ सोसायटी के महासचिव की हैसियत से लिखा गया एडवोकेट अख्तर खान अकेला का पत्र निकाल कर देख लेना ,काश उस पर कार्यवाही हो गयी होती तो आज ,,राजस्थान में माहौल दूसरा होता ,,ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगता ,दोषी लोगों को त्वरित कठोर दंड मिलने से ,अपराधियों के हौसले पस्त हो गए होते ,इसलिए जनाब ज़रा अपने गिरेहबान में भी झाँक ले ,,यह भी देखले ,के अशोक गहलोत ने ,चुनाव आचार संहिता में चुनाव आयोग का नियंत्रण होने के बाद भी ,,ऐसे संवेदनशील मामलों में सुरक्षा ,त्वरित कार्यवाही ,पृथक सेल का जिलेवार गठन ,ऑफिसर केस स्कीम व्यवस्था की घोषणा ही नहीं की बल्कि इस विधि नियम को अमल में भी ला दिया है ,,,,अपराधी पकडे जा रहे है ,,उन्हें जेल हो रही है ,,अभी ऐसी घटनाओं में शामिल अपराधियों को सख्त से सख्त सजा भी ,मिलेगी ,,,तो जनाब सियासत मत कीजिये सुझाव दीजिये ,,क्या होना चाहिए ,गलत अगर व्यवस्था है तो उसे कैसे सुधारे आराजकता फैलाकर आप अपने ही राज्य के लोगों का नुकसान कर रहे है ,अपने ही राज्य को बदनाम कर रहे है ,यहाँ विदेशी पर्यटकों के आने से काफी आय होती है ,अगर आप लोगों ने राजनितिक हथियार बनाने के लिए ऐसी घटनाओं को लेकर हिंसा भड़काई तोड़फोड़ की तो यक़ीन मानिये राजस्थान का मान सम्मान को ठेस पहुंचेगी ,बहुत सी विदेशी पर्यटन महिलाये राजस्थान में आने से हिचकने लगेंगी ,यह हमारे राज्य के लिए ठीक नहीं है सो प्लीज़ सियासत नहीं ,सुझाव दीजिये ,उन वाजिब सुझावों पर अमल अगर नहीं हो तो फिर आंदोलन कीजिये ,हम भी तुम्हारे साथ रहेंगे ,,वाजिब समर्थन के लिए ,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

झूठों पर ख़ुदा की लानत करें

फिर जब तुम्हारे पास इल्म (कुरान) आ चुका उसके बाद भी अगर तुम से कोई (नसरानी) ईसा के बारे में हुज्जत करें तो कहो कि (अच्छा मैदान में) आओ हम अपने बेटों को बुलाएं तुम अपने बेटों को और हम अपनी औरतों को (बुलाए) औेर तुम अपनी औेरतों को और हम अपनी जानों को बुलाएं ओर तुम अपनी जानों को (61)
उसके बाद हम सब मिलकर (खुदा की बारगाह में) गिड़गिड़ाएं और झूठों पर ख़ुदा की लानत करें (ऐ रसूल) ये सब यक़ीनी सच्चे वाक़यात हैं और ख़ुदा के सिवा कोई माबूद (क़ाबिले परसतिश) नहीं है (62)
और बेशक ख़ुदा ही सब पर ग़ालिब और हिकमत वाला है (63)
फिर अगर इससे भी मुँह फेरें तो (कुछ) परवाह (नहीं) ख़ुदा फ़सादी लोगों को खूब जानता है (ऐ रसूल) तुम (उनसे) कहो कि ऐ एहले किताब तुम ऐसी (ठिकाने की) बात पर तो आओ जो हमारे और तुम्हारे दरम्यिान यकसा है कि खुदा के सिवा किसी की इबादत न करें और किसी चीज़ को उसका शरीक न बुलाएं और ख़ुदा के सिवा हममें से कोई किसी को अपना परवरदिगार न बनाए अगर इससे भी मुँह मोडे़ं तो तुम गवाह रहना हम (ख़ुदा के) फ़रमाबरदार हैं (64)
ऐ एहले किताब तुम इबराहीम के बारे में (ख़्वाह मा ख़्वाह) क्यों झगड़ते हो कि कोई उनको नसरानी कहता है कोई यहूदी हालांकि तौरेत व इन्जील (जिनसे यहूद व नसारा की इब्तेदा है वह) तो उनके बाद ही नाजि़ल हुई (65)
तो क्या तुम इतना भी नहीं समझते? (ऐ लो अरे) तुम वही एहमक़ लोग हो कि जिस का तुम्हें कुछ इल्म था उसमें तो झगड़ा कर चुके (खै़र) फिर तब उसमें क्या (ख्व़ाह मा ख़्वाह) झगड़ने बैठे हो जिसकी (सिरे से) तुम्हें कुछ ख़बर नहीं और (हकी़क़ते हाल तो) खुदा जानता है और तुम नहीं जानते (66)
इबराहीम न तो यहूदी थे और न नसरानी बल्कि निरे खरे हक़ पर थे (और) फ़रमाबरदार (बन्दे) थे और मुशरिकोंसे भी न थे (67)
इबराहीम से ज़्यादा ख़ुसूसियत तो उन लोगों को थी जो ख़ास उनकी पैरवी करते थे और उस पैग़म्बर और ईमानदारों को (भी) है और मोमिनीन का ख़ुदा मालिक है (68)
(मुसलमानो) एहले किताब से एक गिरोह ने बहुत चाहा कि किसी तरह तुमको राहेरास्त से भटका दे हालांकि वह (अपनी तदबीरों से तुमको तो नहीं मगर) अपने ही को भटकाते हैं (69)
और उसको समझते (भी) नहीं ऐ एहले किताब तुम ख़ुदा की आयतों से क्यों इन्कार करते हो, हालांकि तुम ख़ुद गवाह बन सकते हो (70)
ऐ अहले किताब तुम क्यो हक़ व बातिल को गड़बड़ करते और हक़ को छुपाते हो हालांकि तुम जानते हो (71)
और अहले किताब से एक गिरोह ने (अपने लोगों से) कहा कि मुसलमानों पर जो किताब नाजि़ल हुयी है उसपर सुबह सवेरे ईमान लाओ और आखि़र वक़्त इन्कार कर दिया करो शायद मुसलमान (इसी तदबीर से अपने दीन से) फिर जाए (72)
और तुम्हारे दीन की पैरवरी करे उसके सिवा किसी दूसरे की बात का ऐतबार न करो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि बस ख़ुदा ही की हिदायत तो हिदायत है (यहूदी बाहम ये भी कहते हैं कि) उसको भी न (मानना) कि जैसा (उम्दा दीन) तुमको दिया गया है, वैसा किसी और को दिया जाय या तुमसे कोई शख़्स ख़ुदा के यहाँ झगड़ा करे (ऐ रसूल तुम उनसे) कह दो कि (ये क्या ग़लत ख़्याल है) फ़ज़ल (व करम) ख़ुदा के हाथ में है वह जिसको चाहे दे और ख़ुदा बड़ी गुन्जाईश वाला है (और हर शै को) जानता है (73)
जिसको चाहे अपनी रहमत के लिये ख़ास कर लेता है और ख़ुदा बड़ा फ़ज़लों करम वाला हे (74)
और एहले किताब कुछ ऐसे भी हैं कि अगर उनके पास रूपए की ढेर अमानत रख दो तो भी उसे (जब चाहो) वैसे ही तुम्हारे हवाले कर देंगे और बाज़ ऐसे हें कि अगर एक अशरफी भी अमानत रखो तो जब तक तुम बराबर (उनके सर) पर खड़े न रहोगे तुम्हें वापस न देंगे ये इस वजह से है कि उन का तो ये क़ौल है कि (अरब के) जाहिलो (का हक़ मार लेने) में हम पर कोई इल्ज़ाम की राह ही नहीं और जान बूझ कर खुदा पर झूठ (तूफ़ान) जोड़ते हैं (75)
हाँ (अलबत्ता) जो शख़्स अपने अहद को पूरा करे और परहेज़गारी इख़्तेयार करे तो बेशक ख़ुदा परहेज़गारों को दोस्त रखता है (76)
बेशक जो लोग अपने अहद और (क़समे) जो ख़ुदा (से किया था उसके) बदले थोड़ा (दुनयावी) मुआवेज़ा ले लेते हैं उन ही लोगों के वास्ते आखि़रत में कुछ हिस्सा नहीं और क़यामत के दिन ख़ुदा उनसे बात तक तो करेगा नहीं ओर न उनकी तरफ़ नज़र (रहमत) ही करेगा और न उनको (गुनाहों की गन्दगी से) पाक करेगा और उनके लिये दर्दनाम अज़ाब है (77)
और एहले किताब से बाज़ ऐसे ज़रूर हैं कि किताब (तौरेत) में अपनी ज़बाने मरोड़ मरोड़ के (कुछ का कुछ) पढ़ जाते हैं ताकि तुम ये समझो कि ये किताब का जुज़ है हालांकि वह किताब का जुज़ नहीं और कहते हैं कि ये (जो हम पढ़ते हैं) ख़ुदा के यहाँ से (उतरा) है हालांकि वह ख़ुदा के यहाँ से नहीं (उतरा) और जानबूझ कर ख़ुदा पर झूठ (बोहतान) जोड़ते हैं (78)
किसी आदमी को ये ज़ेबा न था कि ख़ुदा तो उसे (अपनी) किताब और हिकमत और नबूवत अता फ़रमाए और वह लोगों से कहता फिरे कि ख़ुदा को छोड़कर मेरे बन्दे बन जाओ बल्कि (वह तो यही कहेगा कि) तुम अल्लाह वाले बन जाओ क्योंकि तुम तो (हमेशा) किताबे ख़ुदा (दूसरो) को पढ़ाते रहते हो और तुम ख़ुद भी सदा पढ़ते रहे हो (79)
और वह तुमसे ये तो (कभी) न कहेगा कि फ़रिश्तों और पैग़म्बरों को ख़ुदा बना लो भला (कहीं ऐसा हो सकता है कि) तुम्हारे मुसलमान हो जाने के बाद तुम्हें कुफ्र का हुक्म करेगा (80)

Baatein ye Kabhi na Tu Bhulna || Khamoshiyaan ||Arijit Singh || Cover by...

आखि़रत (दोनों में) सख़्त अज़ाब करूंगा

Written By आपका अख्तर खान अकेला on बुधवार, 15 मई 2019 | 6:07 am

बस तुम ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो बेशक ख़ुदा ही मेरा और तुम्हारा परवरदिगार है (51)
बस उसकी इबादत करो (क्योंकि) यही नजात का सीधा रास्ता है फिर जब ईसा ने (इतनी बातों के बाद भी) उनका कुफ्ऱ (पर अड़े रहना) देखा तो (आखि़र) कहने लगे कौन ऐसा है जो ख़ुदा की तरफ़ होकर मेरा मददगार बने (ये सुनकर) हवारियों ने कहा हम ख़ुदा के तरफ़दार हैं और हम ख़ुदा पर ईमान लाए (52)
और (ईसा से कहा) आप गवाह रहिए कि हम फ़रमाबरदार हैं (53)
और ख़ुदा की बारगाह में अर्ज़ की कि ऐ हमारे पालने वाले जो कुछ तूने नाजि़ल किया हम उसपर ईमान लाए और हमने तेरे रसूल (ईसा) की पैरवी इख़्तेयार की बस तू हमें (अपने रसूल के) गवाहों के दफ़्तर में लिख ले (54)
और यहूदियों (ने ईसा से) मक्कारी की और ख़ुदा ने उसके दफ़ईया (तोड़) की तदबीर की और ख़ुदा सब से बेहतर तदबीर करने वाला है (वह वक़्त भी याद करो) जब ईसा से ख़ुदा ने फ़रमाया ऐ ईसा मैं ज़रूर तुम्हारी जि़न्दगी की मुद्दत पूरी करके तुमको अपनी तरफ़ उठा लूगा और काफि़रों (की जि़न्दगी) से तुमको पाक व पाकीज़ रखुंगा और जिन लोगों ने तुम्हारी पैरवी की उनको क़यामत तक काफि़रों पर ग़ालिब रखुंगा फिर तुम सबको मेरी तरफ़ लौटकर आना है (55)
तब (उस दिन) जिन बातों में तुम (दुनिया) में झगड़े करते थे (उनका) तुम्हारे दरमियान फ़ैसला कर दूंगा बस जिन लोगों ने कुफ्र इख़्तेयार किया उनपर दुनिया और आखि़रत (दोनों में) सख़्त अज़ाब करूंगा और उनका कोई मददगार न होगा (56)
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए तो ख़ुदा उनको उनका पूरा अज्र व सवाब देगा और ख़ुदा ज़ालिमों को दोस्त नहीं रखता (57)
(ऐ रसूल) ये जो हम तुम्हारे सामने बयान कर रहे हैं कु़दरते ख़ुदा की निशानियाँ और हिकमत से भरे हुये तज़किरे हैं (58)
ख़ुदा के नज़दीक तो जैसे ईसा की हालत वैसी ही आदम की हालत कि उनको को मिट्टी का पुतला बनाकर कहा कि ‘हो जा’ बस (फ़ौरन ही) वह (इन्सान) हो गया (59)
(ऐ रसूल ये है) हक़ बात (जो) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (बताई जाती है) तो तुम शक करने वालों में से न हो जाना (60)

तेरे ही हाथ में है बेशक तू ही हर चीज़ पर क़ादिर है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on मंगलवार, 14 मई 2019 | 6:37 am

बेशक जो लोग ख़ुदा की आयतों से इन्कार करते हैं और नाहक़ पैग़म्बरों को क़त्ल करते हैं और उन लोगों को (भी) क़त्ल करते हैं जो (उन्हें) इन्साफ़ करने का हुक़्म करते हैं तो (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो (21)
यही वह (बदनसीब) लोग हैं जिनका सारा किया कराया दुनिया और आख़ेरत (दोनों) में अकारत गया और कोई उनका मददगार नहीं (22)
(ऐ रसूल) क्या तुमने (उलमाए यहूद) के हाल पर नज़र नहीं की जिनको किताब (तौरेत) का एक हिस्सा दिया गया था (अब) उनको किताबे ख़ुदा की तरफ़ बुलाया जाता है ताकि वही (किताब) उनके झगड़ें का फैसला कर दे इस पर भी उनमें का एक गिरोह मुँह फेर लेता है और यही लोग रूगरदानी {मुँह फेरने} करने वाले हैं (23)
ये इस वजह से है कि वह लोग कहते हैं कि हमें गिनती के चन्द दिनों के सिवा जहन्नुम की आग हरगिज़ छुएगी भी तो नहीं जो इफ़तेरा परदाज़ी ये लोग बराबर करते आए हैं उसी ने उन्हें उनके दीन में भी धोखा दिया है (24)
फि़र उनकी क्या गत होगी जब हम उनको एक दिन (क़यामत) जिसके आने में कोई शुबहा नहीं इक्ट्ठा करेंगे और हर शख़्स को उसके किए का पूरा पूरा बदला दिया जाएगा और उनकी किसी तरह हक़तल्फ़ी नहीं की जाएगी (25)
(ऐ रसूल) तुम तो यह दुआ मांगों कि ऐ ख़ुदा तमाम आलम के मालिक तू ही जिसको चाहे सल्तनत दे और जिससे चाहे सल्तनत छीन ले और तू ही जिसको चाहे इज़्ज़त दे और जिसे चाहे जि़ल्लत दे हर तरह की भलाई तेरे ही हाथ में है बेशक तू ही हर चीज़ पर क़ादिर है (26)
तू ही रात को (बढ़ा के) दिन में दाखि़ल कर देता है (तो) रात बढ़ जाती है और तू ही दिन को (बढ़ा के) रात में दाखि़ल करता है (तो दिन बढ़ जाता है) तू ही बेजान (अन्डा नुत्फ़ा वगै़रह) से जानदार को पैदा करता है और तू ही जानदार से बेजान नुत्फ़ा (वगै़रहा) निकालता है और तू ही जिसको चाहता है बेहिसाब रोज़ी देता है (27)
मोमिनीन, मोमिनीन को छोड़ के काफि़रों को अपना सरपरस्त न बनाऐं और जो ऐसा करेगा तो उससे ख़ुदा से कुछ सरोकार नहीं मगर (इस कि़स्म की तदबीरों से) किसी तरह उन (के शर) से बचना चाहो तो (ख़ैर) और ख़ुदा तुमको अपने ही से डराता है और ख़ुदा ही की तरफ़ लौट कर जाना है (28)
ऐ रसूल तुम उन (लोगों से) कह दो किजो कुछ तुम्हारे दिलों में है तो ख़्वाह उसे छिपाओ या ज़ाहिर करो (बहरहाल) ख़ुदा तो उसे जानता है और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में वह (सब कुछ) जानता है और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (29)
(और उस दिन को याद रखो) जिस दिन हर शख़्स जो कुछ उसने (दुनिया में) नेकी की है और जो कुछ बुराई की है उसको मौजूद पाएगा (और) आरज़ू करेगा कि काश उस की बदी और उसके दरमियान में ज़मानए दराज़ (हाएल) हो जाता और ख़ुदा तुमको अपने ही से डराता है और ख़ुदा अपने बन्दों पर बड़ा शफ़ीक़ और (मेहरबान भी) है (30)

इंजिनियर नरेश विजयवर्गीय ,,ह्रदय के बाईपास सफल ऑपरेशन के बाद ,घर पर आराम फरमा हैं

Written By आपका अख्तर खान अकेला on सोमवार, 13 मई 2019 | 7:03 am

अल्लाह का शुक्र है ,,कांग्रेस के प्रशिक्षक ,,थिंक टेंक ,,इंजिनियर नरेश विजयवर्गीय ,,ह्रदय के बाईपास सफल ऑपरेशन के बाद ,घर पर आराम फरमा हैं ,उनकी सह्तयाबी ,उम्रदराज़ी के लिए सभी दुआएं कीजिये ,,,नरेश विजयवर्गीय यूँ तो किसी परिचय के मोहताज नहीं ,,प्रसिद्ध लेखक ,पत्रकार ,,इंजिनियर ,, कांग्रेस के मुखर विचारक ,चिंतक ,कुशल वक्ता ,, कांग्रेस संविधान विशेषज्ञ ,,आदरणीय नरेश विजयवर्गीय ने कांग्रेस की हर पीढ़ी के साथ काम किया है ,नरेश विजय वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकर्ता रहे ,तो इंद्रा जी के विकट परिस्थितियों में भी उनके समर्थक रहे ,उन्होंने राजीव जी के साथ ,,राजीव प्रशिक्षण कार्यक्रम में कोटा ज़िले का मोर्चा संभाला ,कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मुख्य प्रशिक्षक के रूप में नरेश विजयवर्गीय ने हज़ारों हज़ार कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया उन्होंने कई पुस्तके लिखी ,वोह तकनीकी समाचार के सम्पादक प्रकाशक है ,अनेक समाज सेवी संस्थाओं से उनका सीधा जुड़ाव है ,नियमित कर्तव्यपरायण कर्मचारी की तरह वोह प्रतिदिन 5 बजे कांग्रेस कार्यालय गुमानपुरा उपस्थित रहते है ,, कांग्रेस के हर कार्यक्रम ,हर चुनाव में वोह सक्रिय रहते है ,,उनके सुझाव महत्वपूर्ण रहते ,है ,नरेश विजयवर्गीय कांग्रेस भवन ट्रस्ट के उपाध्यक्ष भी है ,,,संगठन के कई महत्वपूर्ण पदों पर वोह ज़िम्मेदार रहे है ,,नाथद्वारा मंदिर ट्रस्ट के सदस्य रहे है ,मथुराधीश मंदिर पाटनपोल के नियमित सेवादार है ,,नरेश विजयवर्गीय रिश्ते निभाने में अव्वल ,है विकट परिस्थितियों में भी वोह कार्यकर्ताओं , साथियों के ख़ुशी के कार्यक्रमों ,,गमी के कार्यक्रमों श्रद्धांजलि सभाओं ,,अस्पताल में उनकी कुशल क्षेम पूंछने में अव्वल से अव्वल नेतृत्व रहे है ,,माशा अल्लाह नरेश विजयवर्गीय का ऑपरेशन सफल रहा ,भारत विकास परिषद अस्पताल से अब वोह कोटा अपने छावनी स्थित निवास पर आराम कर रहे रहे है ,जल्द ही खेर से उनके टाँके भी कट जाएंगे ,वोह थोड़े बहुत दिन आराम के बाद ,इंशा अल्लाह फिर से पचपन से बचपन के कांग्रेस के सुपरहिट खिलाड़ी बना जाएंगे ,लेकिन अफ़सोस होता है ,ऐसे नेतृत्व ,ऐसी शख्सियत ,जो सभी के सुख दुःख के साथी हो ,पार्टी बंदिशों से अलग हठ कर जो सभी राजनितिक दलों के लोगों का सम्मान करते हों ,उन्हें अहिमयत देते हों ,उन्हें तंदरुस्ती की शुभकामनाये देने वालों की अगर कंजूसी हो तो अजीब सा महसूस होता है ,समाज की इस विकृति पर थोड़ा दुःख होता है ,,,लेकिन फिर भी क़य्यूम अली ,आबशार क़ाज़ी ,,पंकज मेहता ,मास्टर मोहनलाल जी सहित ,उनकी अपनी मित्र मण्डली ,शुभचिनक मंडली ,जिसमे युवा भी है ,बुज़ुर्ग भी है ,सभी ने उनके लिए दुआएं की है ,,और जल्द ही उनके पूर्ण स्वस्थ होने की दुआएं लगातार चल रही है ,,,अल्लाह उन्हें जल्द स्वस्थ करे ,,लम्बी उम्र ,सत्याबी के साथ फिर से उन्हें लिखने ,पढ़ने ,भाषण देने ,कांग्रेस ,,,देश ,,समाज के बारे में बेहतर से बेहतर विचार देने वाला बनाये ,,बॉस यही दुआ है ,,कोई पूंछे तो पूंछे नहीं पूंछे तो नहीं पूंछे ,,,वक़्त निकल गया ,बात याद रहती है , उनका मोबाइल नंबर 9214582469 है ,,निवास छावनी मुख्य बाज़ार कंचन चूड़ी सेंटर के सामने विजयवर्गीय भवन है ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

देश के ब्यूरोक्रेट सिस्टम को समझकर बोलने वाले होते

काश हमारे प्रधानमंत्री आप पढ़े लिखे की तरह व्यवहार करते ,,डिग्रियां असली नक़ली केसी भी हों कोई फ़र्क़ नहीं पढता ,,लेकिन समझदारी से देश के ब्यूरोक्रेट सिस्टम को समझकर बोलने वाले होते ,, तो आपको जानकारी होती एक चुनाव आयोग होता है ,,जिसके नियंत्रण में चुनाव के कार्यकाल में सारे अधिकारी ,,कलेक्टर ,एस पी ,,हो जाते ,है ,आपकी बात और है आपके हेलीकॉप्टर में रखे बक्से की तलाशी के लिए चुनाव आयोग का अधिकारी आ जाए तो आप उसे निलंबित करवा देते है ,शिकायते सुनने नहीं देते ,,लेकिन राजस्थान में अनुशासित सियासत ,है यहाँ चुनाव के दौरान ,चुनाव आयोग के नियंत्रण में सभी अधिकारी रहते है ,किसी मुख्यमंत्री ,,या मंत्री को किसी भी अधिकारी को कमांड करने का कोई अधिकार नहीं होता है ,आपको यह भी पता है ,के आपने अशोक गहलोत की लोकप्रियता ,,उनके भविष्य की व्यवस्था से घबराकर ,,अधिकतम टारगेट राजस्थान में रहकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से किया है ,वोह बात और है यहाँ की जनता आपके बहकावे में नहीं आयी ,और सधी हुई भाषा में अशोक गहलोत ने आपको लाजवाब जवाब देकर पोल खोली है ,लेकिन आपकी लगातार राजस्थान यात्राओं में योगी जी सहित कई मंत्रियों की लगातार यात्राओं में अलवर सहित सभी जगह के अधिकारी ,पुलिस ,इंटेलीजेंश ,,चुनाव आयोग के नियंत्रण में होने से खुलकर आपकी सुरक्षा ,व्यवस्था में लगे रहे ,,,,बस इसीलिए क़ानून व्यवस्था में गड़बड़ी आयी ,,किसी महिला के साथ अगर ज़्यादती हुई तो चुनाव आयोग की नियंत्रित पुलिस ,प्रशासन की ज़िम्मेदारी थी ,,जैसे चुनाव खत्म हुए ,,मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की जानकारी में सुचना आयी ,उन्होंने तुरंत चुनाव आयोग से अनुमति लेकर एस पी को हटाया ,,नए एस पी को भी चुनाव आयोग से स्वीकृति लेकर लगाया ,,,और देख लीजिये एक ऐसा अनूठा उदाहरण के महिलाओं की सुरक्षा सुनवाई के लिए राजस्थान में एक अलग से विभाग गठित जिलेवार हो गया है ,आपको भी पुरे देश में ऐसा कार्यव्यवहार करना चाहिए ,आदरणीय मोदी जी अगर आप ने चुनाव के दौरान क़ानून व्यवस्था के लिए ज़िम्मेदार अधिकारीयों को निर्वाचन आयोग के नियंत्रण में नहीं रखा होता ,,मुख्यमंत्री के नियंत्रण में कर दिया होता तो आपके यह जो चवन्नी छाप बयान जिसमे आप राजस्थान को गालियां दे रहे हो वोह नहीं ,होते आदरणीय प्रधानमंत्री साहिब ,,चुनाव के दौरान नियंत्रक ,,चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी आप गहलोत पर डालकर अपना खौफ ज़ाहिर कर रहे है , लेकिन अशोक गहलोत तो फिर भी बुलंदियों पर पहुँच रहे है ,वोह आपके पुराने मित्र है ,वोह आपके मार्गदर्शक है ,आपने उनसे बहुत कुछ सीखा ,है ,बस नहीं सीखी तो गांधीगिरी नहीं सीखी ,सच नहीं सीखा ,,,राजस्थान की हर ,महिला पीड़िता को दरिदनों से सुरक्षित करने ,त्वरित सुनवाई ओर अधिकारीयों की ज़िम्मेदारी तय करने के लिए विभाग बनाना एक संवेदनशीलता का ही परिचय है ,लेकिन निर्वाचन कार्यक्रम के वक़्त की ज़िम्मेदारियाँ निर्वाचन आयोग की ही होती है ,उस दौरान कोई भी मंत्री ,मुख्यमंत्री की हैसियत कच नहीं है ,आपकी बात कुछ और है ,आप तो आप है ,,सो प्लीज़ बयान वापस लीजिये आदरणीय ,,अख्तर

फ़रिश्तों और इल्म वालों ने गवाही दी है

(उनकी भी) क़ौमे फि़रऔन और उनसे पहले वालों की सी हालत है कि उन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया तो खुदा ने उन्हें उनके गुनाहों की पादाश {सज़ा} में ले डाला और ख़ुदा सख़्त सज़ा देने वाला है (11)
(ऐ रसूल) जिन लोगों ने कुफ्र इख़्तेयार किया उनसे कह दो कि बहुत जल्द तुम (मुसलमानो के मुक़ाबले में) मग़लूब {हारे हुए} होंगे और जहन्नुम में इकट्ठे किये जाओगे और वह (क्या) बुरा ठिकाना है (12)
बेशक तुम्हारे (समझाने के) वास्ते उन दो (मुख़ालिफ़ गिरोहों में जो (बद्र की लड़ाई में) एक दूसरे के साथ गुथ गए (रसूल की सच्चाई की) बड़ी भारी निशानी है कि एक गिरोह ख़ुदा की राह में जेहाद करता था और दूसरा काफि़रों का जिनको मुसलमान अपनी आँख से दुगना देख रहे थे (मगर ख़ुदा ने क़लील ही को फ़तह दी) और ख़ुदा अपनी मदद से जिस की चाहता है ताईद करता है बेशक आँख वालों के वास्ते इस वाक़ये में बड़ी इबरत है (13)
दुनिया में लोगों को उनकी मरग़ूब चीज़े (मसलन) बीवियों और बेटों और सोने चाँदी के बड़े बड़े लगे हुए ढेरों और उम्दा उम्दा घोड़ों और मवेशियों ओर खेती के साथ उलफ़त भली करके दिखा दी गई है ये सब दुनयावी जि़न्दगी के (चन्द रोज़ा) फ़ायदे हैं और (हमेशा का) अच्छा ठिकाना तो ख़ुदा ही के यहां है (14)
(ऐ रसूल) उन लोगों से कह दो कि क्या मैं तुमको उन सब चीज़ों से बेहतर चीज़ बता दू (अच्छा सुनो) जिन लोगों ने परहेज़गारी इख़्तेयार की उनके लिए उनके परवरदिगार के यहां (बेहिश्त) के वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं (और वह) हमेशा उसमें रहेंगे और उसके अलावा उनके लिए साफ सुथरी बीवियां हैं और (सबसे बढ़कर) ख़ुदा की ख़ुशनूदी है और ख़ुदा (अपने) उन बन्दों को खूब देख रहा हे जो दुआऐं मांगा करते हैं (15)
कि हमारे पालने वाले हम तो (बेताम्मुल) इमान लाए हैं बस तू भी हमारे गुनाहों को बख़्श दे और हमको दोज़ख़ के अज़ाब से बचा (16)
(यही लोग हैं) सब्र करने वाले और सच बोलने वाले और (ख़ुदा के) फ़रमाबरदार और (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करने वाले और पिछली रातों में (ख़ुदा से तौबा) इस्तग़फ़ार करने वाले (17)
ज़रूर ख़ुदा और फ़रिश्तों और इल्म वालों ने गवाही दी है कि उसके सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं है और वह ख़ुदा अद्ल व इन्साफ़ के साथ (कारख़ानाए आलम का) सॅभालने वाला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वही हर चीज़ पर) ग़ालिब और दाना है (सच्चा) दीन तो ख़ुदा के नज़दीक यक़ीनन (बस यही) इस्लाम है (18)
और अहले किताब ने जो उस दीने हक़ से इख़्तेलाफ़ किया तो महज़ आपस की शरारत और असली (अम्र) मालूम हो जाने के बाद (ही क्या है) और जिस शख़्स ने ख़ुदा की निशानियों से इन्कार किया तो (वह समझ ले कि यक़ीनन ख़ुदा (उससे) बहुत जल्दी हिसाब लेने वाला है (19)
(ऐ रसूल) बस अगर ये लोग तुमसे (ख़्वाह मा ख़्वाह) हुज्जत करे तो कह दो मैंने ख़ुदा के आगे अपना सरे तस्लीम ख़म कर दिया है और जो मेरे ताबे है (उन्होंने) भी) और ऐ रसूल तुम एहले किताब और जाहिलों से पूॅछो कि क्या तुम भी इस्लाम लाए हो (या नही) बस अगर इस्लाम लाए हैं तो बेख़टके राहे रास्त पर आ गए और अगर मुँह फेरे तो (ऐ रसूल) तुम पर सिर्फ़ पैग़ाम (इस्लाम) पंहुचा देना फ़र्ज़ है (बस) और ख़ुदा (अपने बन्दों) को देख रहा है (20)

बेशक ख़ुदा पर कोई चीज़ पोशीदा नहीं है (न) ज़मीन में न आसमान में

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 12 मई 2019 | 7:19 am

अलिफ़ लाम मीम अल्लाह ही वह (ख़ुदा) है जिसके सिवा कोई क़ाबिले परस्तिश नहीं है (1)
वही जि़न्दा (और) सारे जहान का सॅभालने वाला है (2)
(ऐ रसूल) उसी ने तुम पर बरहक़ किताब नाजि़ल की जो (आसमानी किताबें पहले से) उसके सामने मौजूद हैं उनकी तसदीक़ करती है और उसी ने उससे पहले लोगों की हिदायत के वास्ते तौरेत व इन्जील नाजि़ल की (3)
और हक़ व बातिल में तमीज़ देने वाली किताब (कु़रान) नाज़िल की बेशक जिन लोगों ने ख़ुदा की आयतों को न माना उनके लिए सख़्त अज़ाब है और ख़ुदा हर चीज़ पर ग़ालिब बदला लेने वाला है (4)
बेशक ख़ुदा पर कोई चीज़ पोशीदा नहीं है (न) ज़मीन में न आसमान में (5)
वही तो वह ख़ुदा है जो माँ के पेट में तुम्हारी सूरत जैसी चाहता है बनाता हे उसके सिवा कोई माबूद नहीं (6)
वही (हर चीज़ पर) ग़ालिब और दाना है (ए रसूल) वही (वह ख़ुदा) है जिसने तुमपर किताब नाजि़ल की उसमें की बाज़ आयतें तो मोहकम (बहुत सरीह) हैं वही (अमल करने के लिए) असल (व बुनियाद) किताब है और कुछ (आयतें) मुतशाबेह (मिलती जुलती) (गोल गोल जिसके मायने में से पहलू निकल सकते हैं) बस जिन लोगों के दिलों में कज़ी है वह उन्हीं आयतों के पीछे पड़े रहते हैं जो मुतशाबेह हैं ताकि फ़साद बरपा करें और इस ख़्याल से कि उन्हें मतलब पर ढाले लें हालाँकि ख़ुदा और उन लोगों के सिवा जो इल्म से बड़े पाए पर फ़ायज़ हैं उनका असली मतलब कोई नहीं जानता वह लोग (ये भी) कहते हैं कि हम उस पर ईमान लाए (यह) सब (मोहकम हो या मुतशाबेह) हमारे परवरदिगार की तरफ़ से है और अक़्ल वाले ही समझते हैं (7)
(और दुआ करते हैं) ऐ हमारे पालने वाले हमारे दिल को हिदायत करने के बाद डावाडोल न कर और अपनी बारगाह से हमें रहमत अता फ़रमा इसमें तो शक ही नहीं कि तू बड़ा देने वाला है (8)
ऐ हमारे परवरदिगार बेशक तू एक न एक दिन जिसके आने में शुबह नहीं लोगों को इक्ट्ठा करेगा (तो हम पर नज़रे इनायत रहे) बेशक ख़ुदा अपने वायदे के खि़लाफ़ नहीं करता (9)
बेशक जिन लोगों ने कुफ्र इख़्तेयार किया उनको ख़ुदा (के अज़ाब) से न उनके माल ही कुछ बचाएंगे, न उनकी औलाद (कुछ काम आएगी) और यही लोग जहन्नुम के ईधन होंगे (10)

उस दिन से डरो जिस दिन तुम सब के सब ख़ुदा की तरफ़ लौटाये जाओगे

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शुक्रवार, 10 मई 2019 | 6:25 am

और उस दिन से डरो जिस दिन तुम सब के सब ख़ुदा की तरफ़ लौटाये जाओगे फिर जो कुछ जिस शख़्स ने किया है उसका पूरा पूरा बदला दिया जाएगा और उनकी ज़रा भी हक़ तलफ़ी न होगी (281)
ऐ ईमानदारों जब एक मियादे मुक़र्ररा तक के लिए आपस में क़र्ज़ का लेन देन करो तो उसे लिखा पढ़ी कर लिया करो और लिखने वाले को चाहिये कि तुम्हारे दरम्यिान तुम्हारे क़ौल व क़रार को, इन्साफ़ से ठीक ठीक लिखे और लिखने वाले को लिखने से इन्कार न करना चाहिये (बल्कि) जिस तरह ख़ुदा ने उसे (लिखना पढ़ना) सिखाया है उसी तरह उसको भी उज़्र लिख देना चाहिये और जिसके जि़म्मे कर्ज आयद होता है उसी को चाहिए कि (तमस्सुक) की इबारत बताता जाये और ख़ुदा से डरे जो उसका सच्चा पालने वाला है डरता रहे और (बताने में) और कर्ज देने वाले के हुक़ूक़ में कुछ कमी न करे अगर कर्ज लेने वाला कम अक़्ल या माज़़ूर या ख़ुद (तमस्सुक) का मतलब लिखवा न सकता हो तो उसका सरपरस्त ठीक ठीक इन्साफ़ से लिखवा दे और अपने लोगों में से जिन लोगों को तुम गवाही लेने के लिये पसन्द करो (कम से कम) दो मर्दों की गवाही कर लिया करो फिर अगर दो मर्द न हो तो (कम से कम) एक मर्द और दो औरतें (क्योंकि) उन दोनों में से अगर एक भूल जाएगी तो एक दूसरी को याद दिला देगी, और जब गवाह हुक्काम के सामने (गवाही के लिए) बुलाया जाएँ तो हाजि़र होने से इन्कार न करे और कर्ज का मामला ख़्वाह छोटा हो या उसकी मियाद मुअय्युन तक की (दस्तावेज़) लिखवाने में काहिली न करो, ख़ुदा के नज़दीक ये लिखा पढ़ी बहुत ही मुन्सिफ़ाना कारवाई है और गवाही के लिए भी बहुत मज़बूती है और बहुत क़रीन (क़यास) है कि तुम आईन्दा किसी तरह के शक व शुबहा में न पड़ो मगर जब नक़द सौदा हो जो तुम लोग आपस में उलट फेर किया करते हो तो उसकी (दस्तावेज) के न लिखने में तुम पर कुछ इल्ज़ाम नहीं है (हां) और जब उसी तरह की ख़रीद (फ़रोख़्त) हो तो गवाह कर लिया करो और क़ातिब (दस्तावेज़) और गवाह को ज़रर न पहुँचाया जाए और अगर तुम ऐसा कर बैठे तो ये ज़रूर तुम्हारी शरारत है और ख़ुदा से डरो ख़ुदा तुमको मामले की सफ़ाई सिखाता है और वह हर चीज़ को ख़ूब जानता है (282)
और अगर तुम सफ़र में हो और कोई लिखने वाला न मिले (और कर्ज देना हो) तो रहन बा कब्ज़ा रख लो और अगर तुममें एक का एक को एतबार हो तो (यॅू ही कर्ज दे सकता है मगर) फिर जिस शख़्स पर एतबार किया गया है (कर्ज लेने वाला) उसको चाहिये कर्ज देने वाले की अमानत (कर्ज) पूरी पूरी अदा कर दे और अपने पालने वाले ख़ुदा से डरे (मुसलमानो) तुम गवाही को न छिपाओ और जो छिपाएगा तो बेशक उसका दिल गुनाहगार है और तुम लोग जो कुछ करते हो ख़ुदा उसको ख़ूब जानता है (283)
जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़) सब कुछ खुदा ही का है और जो कुछ तुम्हारे दिलों में हे ख़्वाह तुम उसको ज़ाहिर करो या उसे छिपाओ ख़ुदा तुमसे उसका हिसाब लेगा, फिर जिस को चाहे बख़्श दे और जिस पर चाहे अज़ाब करे, और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (284)
हमारे पैग़म्बर (मोहम्मद) जो कुछ उनपर उनके परवरदिगार की तरफ से नाजि़ल किया गया है उस पर ईमान लाए और उनके (साथ) मोमिनीन भी (सबके) सब ख़ुदा और उसके फ़रिश्तों और उसकी किताबों और उसके रसूलों पर ईमान लाए (और कहते हैं कि) हम ख़ुदा के पैग़म्बरों में से किसी में तफ़रक़ा नहीं करते और कहने लगे ऐ हमारे परवरदिगार हमने (तेरा इरशाद) सुना (285)
और मान लिया परवरदिगार हमें तेरी ही मग़फि़रत की (ख़्वाहिश है) और तेरी ही तरफ़ लौट कर जाना है ख़ुदा किसी को उसकी ताक़त से ज़्यादा तकलीफ़ नहीं देता उसने अच्छा काम किया तो अपने नफ़े के लिए और बुरा काम किया तो (उसका बवाल) उसी पर पडे़गा ऐ हमारे परवरदिगार अगर हम भूल जाऐं या ग़लती करें तो हमारी गिरफ़्त न कर ऐ हमारे परवरदिगार हम पर वैसा बोझ न डाल जैसा हमसे अगले लोगों पर बोझा डाला था, और ऐ हमारे परवरदिगार इतना बोझ जिसके उठाने की हमें ताक़त न हो हमसे न उठवा और हमारे कु़सूरों से दरगुज़र कर और हमारे गुनाहों को बख़्श दे और हम पर रहम फ़रमा तू ही हमारा मालिक है तू ही काफि़रों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर (286)

खुदा सूद को मिटाता है और ख़ैरात को बढ़ाता है

Written By आपका अख्तर खान अकेला on गुरुवार, 9 मई 2019 | 6:11 am

अगर ख़ैरात को ज़ाहिर में दो तो यह (ज़ाहिर करके देना) भी अच्छा है और अगर उसको छिपाओ और हाजतमन्दों को दो तो ये छिपा कर देना तुम्हारे हक़ में ज़्यादा बेहतर है और ऐसे देने को ख़ुदा तुम्हारे गुनाहों का कफ़्फ़ारा कर देगा और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे ख़बरदार है (271)
ऐ रसूल उनका मंजि़ले मक़सूद तक पहुँचाना तुम्हारा काम नहीं (तुम्हारा काम सिर्फ़ रास्ता दिखाना है) मगर हां ख़ुदा जिसको चाहे मंजि़ले मक़सूद तक पहुँचा दे और (लोगों) तुम जो कुछ नेक काम में ख़र्च करोगे तो अपने लिए और तुम ख़ुदा की ख़ुशनूदी के सिवा और काम में ख़र्च करते ही नहीं हो (और जो कुछ तुम नेक काम में ख़र्च करोगे) (क़यामत में) तुमको भरपूर वापस मिलेगा और तुम्हारा हक़ न मारा जाएगा (272)
(यह खै़रात) ख़ास उन हाजतमन्दों के लिए है जो ख़ुदा की राह में घिर गये हो (और) रूए ज़मीन पर (जाना चाहें तो) चल नहीं सकते नावाकि़फ़ उनको सवाल न करने की वजह से अमीर समझते हैं (लेकिन) तू (ऐ मुख़ातिब अगर उनको देखे) तो उनकी सूरत से ताड़ जाये (कि ये मोहताज हैं अगरचे) लोगों से चिमट के सवाल नहीं करते और जो कुछ भी तुम नेक काम में ख़र्च करते हो ख़ुदा उसको ज़रूर जानता है (273)
जो लोग रात को या दिन को छिपा कर या दिखा कर (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करते हैं तो उनके लिए उनका अज्र व सवाब उनके परवरदिगार के पास है और (क़यामत में) न उन पर किसी कि़स्म का ख़ौफ़ होगा और न वह आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे (274)
जो लोग सूद खाते हैं वह (क़यामत में) खड़े न हो सकेंगे मगर उस शख़्स की तरह खड़े होंगे जिस को शैतान ने लिपट कर मख़बूतुल हवास {पागल} बना दिया है ये इस वजह से कि वह उसके क़ायल हो गए कि जैसा बिक्री का मामला वैसा ही सूद का मामला हालाकि बिक्री को तो खुदा ने हलाल और सूद को हराम कर दिया बस जिस शख़्स के पास उसके परवरदिगार की तरफ़ से नसीहत (मुमानियत) आये और वह बाज़ आ गया तो इस हुक्म के नाजि़ल होने से पहले जो सूद ले चुका वह तो उस का हो चुका और उसका अम्र (मामला) ख़ुदा के हवाले है और जो मनाही के बाद फिर सूद ले (या बिक्री और सूद के मामले को यकसा बताए जाए) तो ऐसे ही लोग जहन्नुम में रहेंगे (275)
खुदा सूद को मिटाता है और ख़ैरात को बढ़ाता है और जितने नाशुक्रे गुनाहगार हैं खुदा उन्हें दोस्त नहीं रखता (276)
(हां) जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ी और ज़कात दिया किये उनके लिए अलबत्ता उनका अज्र व (सवाब) उनके परवरदिगार के पास है और (क़यामत में) न तो उन पर किसी कि़स्म का ख़ौफ़ होगा और न वह रन्जीदा दिल होंगे (277)
ऐ ईमानदारों ख़ुदा से डरो और जो सूद लोगों के जि़म्मे बाक़ी रह गया है अगर तुम सच्चे मोमिन हो तो छोड़ दो (278)
और अगर तुमने ऐसा न किया तो ख़ुदा और उसके रसूल से लड़ने के लिये तैयार रहो और अगर तुमने तौबा की है तो तुम्हारे लिए तुम्हारा असल माल है न तुम किसी का ज़बरदस्ती नुकसान करो न तुम पर ज़बरदस्ती की जाएगी (279)
और अगर कोई तंगदस्त तुम्हारा (कर्जदार हो) तो उसे ख़ुशहाली तक मोहल्लत (दो) और सदक़ा करो और अगर तुम समझो तो तुम्हारे हक़ में ज़्यादा बेहतर है कि असल भी बख़्श दो (280)

नेकी ,इबादत ,इस्लामिक शिक्षा की ट्रेनिंग का पाक महीना

Written By आपका अख्तर खान अकेला on बुधवार, 8 मई 2019 | 6:21 am

नेकी ,इबादत ,इस्लामिक शिक्षा की ट्रेनिंग का पाक महीना ,माह ऐ रमज़ान के पहले दिन ,,पर्यावरण संरक्षण ,पंछियों के बसेरा संरक्षण और उनके लिए दाने ,पानी के प्रबंधन के लिए नयापुरा क़ब्रिस्तान ,शहर ऐ खमूशा ,यानी बशर में चले गए लोगों की आबादी में ,,पेढ पौधे लगाकर ,ऑक्सीजन ज़ोन ,बनाने की कोशिशों में जुटे ,भाई हिकमत खान और उनकी टीम ने आज फिर रमज़ान के पहले रोज़े के दिन पर्यावरण संरक्षण के तहत पेढ लगाए ,,परिंडे बांधे ,,और आसपास की बस्तियों में रह रहे बच्चों को पर्यावरण शिक्षा ,,का पाठ पढ़ाते हुए उन्हें भी पेड़ों को बचाये रखने ,परिण्डों में पानी ,जुआर ,बाजरा ,,गेहूं वगेरा दाना डालने के लिए मोटिवेट किया ,,हिकमत खान पिछले कई सालों से क़ब्रिस्तान की गंदगी साफ़ कर वहां पेढ़ों को लगाने ,,बाउंड्री कर आवारा मवेशियों से होने वाले क़ब्रों को नुकसान बचाने की कामयाब कोशिश में अपनी टीम के साथ लगातार जुटे है ,,,आज हिकमत खान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षाविद ,,समाजसेवक ,,अमित धारीवाल ,,समाजसेवक पत्रकार,,चम्बल संदेश ,, पवन आहूजा ,,पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र में कार्य कर रहे समाजसेवक डॉक्टर सुधीर गुप्ता ,,,,शिक्षाविद डॉक्टर ज़फर मोहम्मद ,,ह्यूमन रिलीफ सोसायटी के एडवोकेट अख्तर खान अकेला ,,कांग्रेस के जिला संगठन सचिव रामेश्वर सुनवालका ,,,कोटा उत्तर के ब्लॉक अध्यक्ष भाई राजीव आचार्य ,,सेवादल के भाई अमीत सूद ,विपिन बरथूनिया ,,साहित्यकार मुस्तुफा खान ,,असलम भाई ,,शाकिर भाई ,,नयापुरा बढ़ी मस्जिद के इमाम साहब ,,सहित कई पर्यावरण विद ,हिकमत भाई के साथ क़ब्रिस्तान ,सरंक्षण ,सोंदर्यकरण समिति के सदस्यगण शामिल थे ,हिकमत खान ने इस मौके पर क़ब्रिस्तान के इर्द गिर्द रहने वाले बच्चों को पेड़ ,,पौधों ,पर्यावरण ,,के बारे में जानकारी देते हुए इस्लामिक ज़िम्मेदारी ,पर्यावरण बचाओं अभियान से जुड़ने का अहसास दिलाया ,और मोटिवेशन कार्यक्रम के लिए रमज़ान का महीना होने से ऐसे बच्चे जो पेड़ पौधे संरक्षित करने में दिलचस्पी रखते रहे है ,,इस क्षेत्र में काम कर रहे है ,परिण्डों स्वेच्छा से पानी ,दाना डालकर पंछियों के भोजन पानी का ध्यान रख रहे है ,ऐसे बच्चों को ,खिताब ऐ पर्यावरण संरक्षण ,,के एजाज़ से सम्मानित करते हुए ,उनका टोपी उढ़ाकर सम्मान करवाया ,,हिकमत खान ने बताया के अभी सुरक्षित बाउंड्रीवाल होने के बाद यहाँ अलग अलग टुकड़ों में तार फेंसिंग करके ,उस क्षेत्र में क़ब्रों के आसपास और पेड़ लगाने की योजना है ,फिलहाल साफ़ सफाई अभियान में सैकड़ों किलों ,पॉलीथिन की थैलियों का कचरा साफ़ करवाया है और भविष्य में क़ब्रिस्तान संरक्षित रहे इसके लिए ,,कचरापात्र लगाए गए है ,फातिहा वगेरा पढ़ने आने जाने वालों से अपील की गयी है के वोह कचरा ,और पॉलीथिन वगेरा कचरा पात्र में डालें ,इस अपील का फायदा भी हुआ है और अब इस साल कूड़े कचरे पॉलीथिन की समस्या कम रही है ,,,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

ऐ ईमान वालों अपनी पाक कमाई और उन चीज़ों में से जो हमने तुम्हारे लिए ज़मीन से पैदा की हैं (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करो

जो लोग अपने माल खुदा की राह में खर्च करते हैं उनके (खर्च) की मिसाल उस दाने की सी मिसाल है जिसकी सात बालियाॅ निकलें (और) हर बाली में सौ (सौ) दाने हों और ख़ुदा जिसके लिये चाहता है दूना कर देता है और खुदा बड़ी गुन्जाइश वाला (हर चीज़ से) वाकि़फ़ है (261)
जो लोग अपने माल ख़़ुदा की राह में ख़र्च करते हैं और फिर ख़र्च करने के बाद किसी तरह का एहसान नहीं जताते हैं और न जिनपर एहसान किया है उनको सताते हैं उनका अज्र (व सवाब) उनके परवरदिगार के पास है और न आख़ेरत में उनपर कोई ख़ौफ़ होगा और न वह ग़मगीन होंगे (262)
(सायल को) नरमी से जवाब दे देना और (उसके इसरार पर न झिड़कना बल्कि) उससे दरगुज़र करना उस खै़रात से कहीं बेहतर है जिसके बाद (सायल को) ईज़ा पहुँचे और ख़ुदा हर शै से बेपरवा (और) बुर्दबार है (263)
ऐ इमानदारों आपनी खै़रात को एहसान जताने और (सायल को) ईज़ा {तकलीफ} देने की वजह से उस शख़्स की तरह अकारत मत करो जो अपना माल महज़ लोगों को दिखाने के वास्ते ख़र्च करता है और ख़ुदा और रोजे़ आखे़रत पर ईमान नहीं रखता तो उसकी खै़रात की मिसाल उस चिकनी चट्टान की सी है जिसपर कुछ ख़ाक (पड़ी हुयी) हो फिर उसपर ज़ोर शोर का (बड़े बड़े क़तरों से) मेंह बरसे और उसको (मिट्टी को बहाके)
चिकना चुपड़ा छोड़ जाए (इसी तरह) रियाकार अपनी उस ख़ैरात या उसके सवाब में से जो उन्होंने की है किसी चीज़ पर क़ब्ज़ा न पाएंगे (न दुनिया में न आख़ेरत में) और ख़ुदा काफि़रों को हिदायत करके मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता (264)
और जो लोग ख़ुदा की ख़ुशनूदी के लिए और अपने दिली एतक़ाद से अपने माल ख़र्च करते हैं उनकी मिसाल उस (हरे भरे) बाग़ की सी है जो किसी टीले या टीकरे पर लगा हो और उस पर ज़ोर शोर से पानी बरसा तो अपने दुगने फल लाया और अगर उस पर बड़े धड़ल्ले का पानी न भी बरसे तो उसके लिये हल्की फुआर (ही काफ़ी) है और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उसकी देखभाल करता रहता है (265)
भला तुम में कोई भी इसको पसन्द करेगा कि उसके लिए खजूरों और अंगूरों का एक बाग़ हो उसके नीचे नहरें जारी हों और उसके लिए उसमें तरह तरह के मेवे हों और (अब) उसको बुढ़ापे ने घेर लिया है और उसके (छोटे छोटे) नातवां कमज़ोर बच्चे हैं कि एकबारगी उस बाग़ पर ऐसा बगोला आ पड़ा जिसमें आग (भरी) थी कि वह बाग़ जल भुन कर रह गया ख़ुदा अपने एहकाम को तुम लोगों से साफ़ साफ़ बयान करता है ताकि तुम ग़ौर करो (266)
ऐ ईमान वालों अपनी पाक कमाई और उन चीज़ों में से जो हमने तुम्हारे लिए ज़मीन से पैदा की हैं (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करो और बुरे माल को (ख़ुदा की राह में) देने का क़सद भी न करो हालाकि अगर ऐसा माल कोई तुमको देना चाहे तो तुम अपनी ख़ुशी से उसके लेने वाले नहीं हो मगर ये कि उस (के लेने) में (अमदन) आख़ चुराओ और जाने रहो कि ख़ुदा बेशक बेनियाज़ (और) सज़ावारे हम्द है (267)
शैतान तमुको तंगदस्ती से डराता है और बुरी बात (बुख़्ल) का तुमको हुक्म करता है और ख़ुदा तुमसे अपनी बखि़्शश और फ़ज़ल (व करम) का वायदा करता है और ख़ुदा बड़ी गुन्जाइश वाला और सब बातों का जानने वाला है (268)
वह जिसको चाहता है हिकमत अता फ़रमाता है और जिसको (ख़ुदा की तरफ) से हिकमत अता की गई तो इसमें शक नहीं कि उसे ख़ूबियों से बड़ी दौलत हाथ लगी और अक़्लमन्दों के सिवा कोई नसीहत मानता ही नहीं (269)
और तुम जो कुछ भी ख़र्च करो या कोई मन्नत मानो ख़ुदा उसको ज़रूर जानता है और (ये भी याद रहे) कि ज़ालिमों का (जो) ख़ुदा का हक़ मार कर औरों की नज़्र करते हैं (क़यामत में) कोई मददगार न होगा (270)

मेरे मित्र ,मेरे भाई पंकज मेहता, को आज उनके जन्म दिन पर बेशुमार कामयाबी की दुआओं के साथ दिली मुबारकबाद

Written By आपका अख्तर खान अकेला on मंगलवार, 7 मई 2019 | 7:36 am

राजस्थान कांग्रेस में अपनी सक्रियता ,,मृदुल व्यवहार ,,हंसमुख स्वभाव ,,गाँधीवादी छवि से कांग्रेस पार्टी में ,जान फूंकने के प्रयासों में जुटे रहने वाले ,,मेरे मित्र ,मेरे भाई पंकज मेहता, को आज उनके जन्म दिन पर बेशुमार कामयाबी की दुआओं के साथ दिली मुबारकबाद ,, मुख्य मंत्री अशोक गहलोत , सचिन पायलेट सहित कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं का जन्म दिन मनाने वाले पंकज मेहता के जन्म दिन पर आज उनके मित्रों ,कार्यकर्ताओं ,वफादार साथियों ने हर साल की तरह इस बार भी ,तलवंडी कोटा स्थित पुष्पा मैरीज हॉल में ,सुबह 9 बजे से रक्तदान शिविर का आयोजन रखा है ,,
राजस्थान कांग्रेस में अपनी सक्रियता ,,मृदुल व्यवहार ,,हंसमुख स्वभाव ,,गाँधीवादी छवि से कांग्रेस पार्टी में ,जान फूंकने के प्रयासों में जुटे भाई पंकज मेहता,,का रविवार को जन्म दिन है ,उनका जन्म दिन उनके मित्र ,परिजन ,कार्यकर्ता कोटा दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में रक्तदान शिविर के साथ मनाएंगे ,,,पंकज मेहता को जन्म दिन की बधाई ,,,, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में सदस्य ,, पंकज मेहता प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महासचिव और कुशल वक्ता ,प्रवक्ता के रूप में भाजपा की नीतियों के खिलाफ लगातार मुंह तोड़ जवाब दे रहे ,है ,,,पंकज मेहता झालावाड़ ज़िले के प्रभारी है उनके प्रबंधन में राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा सिंधिया के गढ में नगर निकाय चुनाव में भाजपा को करारी हार देकर पंकज मेहता के प्रबंधन में वहां कांग्रेस का नगर निगम चेयरमेन बनाकर उन्होंने सभी को चौंका दिया था ,,,राजस्थान कांग्रेस में अपनी सक्रियता ,,मृदुल व्यवहार ,,हंसमुख स्वभाव ,,गाँधीवादी छवि से जान फूंकने के प्रयासों में जुटे भाई पंकज मेहता कोटा संभाग की कांग्रेस एक जुट सक्रिय करने की भूमिका ,,बखूबी निभा रहे है ,,,जी हाँ दोस्तों पंकज मेहता जिन्हे लोग प्यार से धरती पुत्र इसलिए कहते है के यह कभी आसमान पर नहीं देखते ,,कभी आसमान पर नहीं थूकते ,,,सिर्फ ज़मीन पर चलते है ,,ज़मीनी हक़ीक़त समझते है ,,ज़मीनी कार्यकर्ताओं को कीड़े मकोड़े नहीं बल्कि अपना दोस्त समझते है ,,इसीलिए पंकज मेहता की छवि यारो के यार के रूप में बनी हुई है ,,कोटा संभाग की कांग्रेस में चाहे कितने भी गुट हो लेकिन पंकज मेहता निर्गुट होकर सभी को साथ लेकर संगठन की छवि सुधरने के सफलतम प्रयासों में जुटे है ,,,,,किसी की खुशियां हो ,,किसी का गम हो सभी में यह शामिल रहते है ,,बाहर से आने वाले कोंग्रेसी पदाधिकारी इनकी महमान नवाज़िश के शुक्रगुज़ार रहते है ,,,कोई भी बाहर से आने वाला कोंग्रेसी पदाधिकारी इनकी जानकारी में आने के बाद इनकी महमान नवाज़िश का लुत्फ़ ज़रूर लेता है ,,,,,पंकज मेहता सहज ,,सरल ,,,सभी से जुड़ाव रखने वाले सादा जीवन उच्च विचार रखकर कोटा कंग्रेस के सभी गुटों में आलू की तरह शामिल होकर संगठन का मज़बूती से काम कर रहे है ,,पंकज मेहता को कोटा दक्षिण से टिकिट मिला विकट परिस्थितियों भीतरघात के चलते चुनाव हारे ,,लेकिन इसकी शिकन उनके चेहरे पर नहीं चुनाव में हार जीत चलती है ,,कहावत है गिरते वही शाह सवार है जो चला करते है वोह तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चला करते है ,,ऊँची सोच ऊँची उड़ान ,,,पंकज मेहता की है ,,,राजकीय महाविद्यालय कॉमर्स कॉलेज से ही छात्र राजनीति से जुड़े पंकज मेहता मुखर वक्ता रहे है और इसीलिए छात्र कांग्रेस ,,युवक कांग्रेस ,,,रोडवेज डाइरेक्टर ,,जिला कांग्रेस अध्यक्ष ,,प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ,,प्रदेश महासचिव पद के सभी अनुभवों के साथ इन्होने अपना कर्तवय ज़िम्मेदारी से निभाया है ,,,,,पंकज मेहता रोज़ अपने मित्रों और ज़रूरत मन्दो से मिलते है इनका रामपुरा स्थित ऐतिहासिक निवास ,,,गुमानपुरा वल्ल्भनगर का कार्यालय ज़रूरत मन्दो के लिए हमेशा खुला हुआ है ,,इनके सम्पर्क में कोई भी पीड़ित आये तो वोह निराश नहीं लोटता उसे न्याय ज़रूर मिलता है ,,सत्ता हो या विपक्ष इनकी एक ही चाल यारो की यारी रहती है कोई घमंड कोई गुरुर नहीं ,,,सबसे अपनापन ,,कोटा संभाग सहित राजस्थान के सभी प्रशासनिक अधिकारी इनकी सहजता और सरलता के क़ायल है और इसीलिए सत्ता हो या ना हो पंकज मेहता की वाजिब बात इन अधिकारीयों को मानना पढ़ती है ,,पंकज मेहता विपक्षी पार्टियों से भी सिर्फ और सिर्फ चुनावी विरोध रखते है वरना विपक्षी पार्टियों से भी इनके भाईचारा और सद्भाविक व्यवहार के लोग क़ायल है ,,,,राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस में सक्रिय पंकज मेहता का लोहा दूसरे पदाधिकारी भी स्वीकारते है ,,,अभी कोटा में पार्टी का बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन हुआ ,, उनके पास ,,कोटा संभाग की ज़िम्मेदारी थी विकट परिस्थतियों के बाद भी इस ज़िम्मेदारी को पंकज महेता ने सहज सरलता से स्वीकारी ,,,कोटा में सचिन पायलेट का आगमन हो या फिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोई भी वरिष्ठ नेता हो वोह हमेशा उनके स्वागत उनके निर्देशों के पालन के लिए तैयार रहते है ,, पंकज मेहता अपने हुनर से सभी को साथ लेकर कामयाबी के सफर की तरफ ले जाने के प्रयासों में जुट गए है ,,,कांग्रेस में उत्तर दक्षिण ,,पूरब पश्चिम कोंग्रेसियों को एक साथ बिठाकर ,,एक मंच पर लाकर ,,एक जुट करने के प्रयासों में अगर कोई जुटा है तो वोह पंकज मेहता है ,,,पंकज मेहता गुटबाज़ी से हारे नहीं है वोह निर्गुट होकर सभी गुटों में जाते है और उन्हें ,,मुझे उनके मित्रों को पूरा यक़ीन है के राजस्थान सरकार में बैठे गांधीवादी मुख्यमंत्री उनके त्याग ,समर्पण ,पार्टी के प्रति निष्ठां और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ध्यान में रखकर भाई पंकज मेहता को उनके क़द के मुताबिक़ कोई सरकार में ज़िम्मेदारी ज़रूर देंगे ,ोंकज मेहता क़ौमी एकता का प्रतीक भी कहे जाते है ,जहाँ पंकज मेहता रोज़ा इफ्तार ,,ईद मिलन ,,ईद मिलादुन्नबी जैसे कार्यक्रमों के अगवा रहते है वही इनके नेतृत्व में होली मिलन ,,दीपावली मिलन जैसे समारोह भी भव्य रूप में मनाये जाते रहे है ,, ,,,पंकज मेहता को सालगिरह की बधाई ,,मुबारकबाद ,,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

Founder

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Saleem Khan