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नूर नासूर बन गया

Written By बरुण सखाजी on शुक्रवार, 30 मार्च 2012 | 9:14 pm

लड़कियों का नूर नासूर बन गया
हर दफ्तरान का दस्तूर बन गया
काम आता नहीं, मेल चेक करना तक
कतार में हैं बॉस से अदने चाकर तक
सैलरी उठातीं इन बालाओं का सुरूर बन गया
हर दफ्तरान का दस्तूर बन गया
टाइम जो जी में आया आ गईं
लंच हुआ तो पेल-पेल के खा गईं
आंसुओं को कह ही रखा है
लगे तुम्हे जरा भी ठेस चले आना
चश्में से झांकती आंखों का गुरूर बन गया
हर दफ्तरान का दस्तूर बन गया
लिपस्टिक्स, लाली, गुलाली, फाउंडेशन
चूड़ी कंगन, बेंदी, वॉव, सरप्राइज में मुंह खुला
शैंपू, साड़ी, चप्पल, रंग, रोगन
परफ्यू सा बातों में घुला
काम कहां, किसे करना है
बॉस टैंपरेरी झूठा ही सही हुजूर बन गया
हर दफ्तरान का दस्तूर बन गया
खैर है सरकारी, जहां यह तो नहीं हैं
मगर स्वेटर न जाने कितनी बुनी हैं
ऊन के भाव बैठ वित्त विभाग में बताएं
डंडे के पीले कलर पर पुलिस में आपत्ति जताएं
लाल कर दो प्यार होगा,
काम होगा, मुजरिमों का दीदार होगा
वुमन हरासमेंट सेल में सुबकना जरूर बन गया
हर दफ्तरान का यह दस्तूर बन गया
- सखाजी
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