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अरे भई साधो......: पशु प्रताड़ना की चिंता तो कीटों की अनदेखी क्यों

Written By devendra gautam on शुक्रवार, 22 मार्च 2013 | 8:21 am

आज पशु क्रूरता निवारण में कई सरकारी गैर सरकारी संस्थाएं लगी हुई हैं लेकिन पता नहीं क्यों कीट पतंगों की सुधि नहीं ली जाती. आखिर वह भी तो कुदरत के बनाये जीव हैं और डार्विन के सिद्धांतों को माना जाये तो उनका अस्तित्व मनुष्य जाति की उत्पत्ति से बहुत पहले से है. एक मायने में वे बंदर से भी प्राचीन पूर्वजों की श्रेणी में आयेंगे.
हर दिन पता नहीं कितने करोड़ मच्छर बेमौत मारे जाते हैं. कितने ही काक्रोचों की बलि चढ़ती है.माना कि कीट-पतंगो की श्रेणी के जीव अल्पजीवी होते हैं. लेकिन क्या उन्हें स्वाभाविक मौत नसीब नहीं होनी चाहिए. उनकी हत्या के लिये दवायें खुलेआम बाजार में बिक रही हैं. उनका मूल्य उनकी मारक क्षमता के अनुरूप तय किया जाता है. कहीं कोई रोक-टोक नहीं. न जाने कितनी कंपनियां उन्हें मारने के आसान उपायों पर रात दिन शोध करा रही हैं. उनकी नन्ही सी जान सबकी आंखों में कांटा की तरह चुभती रहती है. उनके संरक्षण के लिये कोई कानून नहीं. हाल में गौरैया दिवस मनाया गया. अन्य कई पशुओं और चिड़ियाओं को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा प्रदान की जाती है. क्या आजतक किसी कीट के लिये कोई दिवस घोषित हुआ. उसके प्रति प्रेम या श्रद्धा का भाव प्रदर्शित किया गया. क्या कीट सुंदर नहीं होते. उन्हें नष्ट कर दिया जाना चाहिए. बताइये भला

---देवेंद्र गौतम
अरे भई साधो......: पशु प्रताड़ना की चिंता तो कीटों की अनदेखी क्यों:

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Life is Just a Life: बनाते हैं हम मिटाते हो तुम Banate hain ham Mitate ...

Written By नीरज द्विवेदी on रविवार, 17 मार्च 2013 | 12:27 am

Life is Just a Life: बनाते हैं हम मिटाते हो तुम Banate hain ham Mitate ...: बनाते  हैं  हम  मिटाते  हो तुम , जगाते  हैं  हम  सुलाते  हो तुम। छीना झपटी में माहिर होते जो हैं , उन्ही को ही  बर्दी चढाते हो तु...

Life is Just a Life: पक चुका है नासूर भारत वालों pak chuka hai nasoor

Written By नीरज द्विवेदी on शुक्रवार, 15 मार्च 2013 | 7:22 pm

Life is Just a Life: पक चुका है नासूर भारत वालों pak chuka hai nasoor: कब गुजरेगा ये कुहासा दिल्ली से भारत के दिल से ? नेतृत्व की एतिहासिक चुप्पी , राजनैतिक नपुंसकता , दरबारी षणयंत्र , अनैतिक नै...

मै आतंकी बनूँ अगर माँ खुद “फंदा” ले आएगी


प्रिय दोस्तों इस रचना को ( कोई नहीं सहारा ) ३.३.२०१3 के दैनिक जागरण अखबार में कानपुर रायबरेली (उ.प्रदेश भारत ) आदि से प्रकाशित किया गया रचना को मान और स्नेह देने के लिए आप सभी पाठकगण और जागरण जंक्शन का बहुत बहुत आभार
भ्रमर ५
हम सहिष्णु हैं भोले भाले मूंछें ताने फिरते
अच्छे भले बोल मन काले हम को लूटा करते
भाई मेरे बड़े बहुत हैं खून पसीने वाले
अत्याचार सहे हम पैदा बुझे बुझे दिल वाले
कुछ प्रकाश की खातिर जग के अपनी कुटी जलाई
चिथड़ों में थी छिपी आबरू वस्त्र लूट गए भाई
माँ रोती है फटती छाती जमीं गयी घर सारा
घर आंगन था भरा हुआ -कल- कोई नहीं सहारा
बिना जहर कुछ सांप थे घर में देखे भागे जाते
बड़े विषैले इन्ही बिलों अब सीमा पार से आते
ज्वालामुखी दहकता दिल में मारूं काटूं खाऊँ
छोड़ अहिंसा बनूँ उग्र क्या ?? आतंकी कहलाऊँ ?
गुंडागर्दी दहशत दल बल ले जो आगे बढ़ता
बड़े निठल्ले पीछे चलते फिर आतंक पसरता
ना आतंक दबे भोलों से – गुंडों से तो और बढे
कौन ‘राह’ पकडूँ मै पागल घुट घुट पल पल खून जले
बन अभिमन्यु जोश भरे रण कुछ पल ही तो कूद सकूं
धर्म युद्ध अब कहाँ रहा है ?? ‘वीर’ बहुत- ना जीत सकूं
मटमैली इस माटी का भी रंग बदलता रहा सदा
कभी ओढती चूनर धानी कभी केसरिया रंग चढ़ा
मै हिम हिमगिरि गंधक अन्दर ‘अंतर’ देखो खौल रहा
फूट पड़े जो- सागर भी तब -अंगारा बन उफन पड़ा
समय की पैनी धार वार कर सब को धूल मिला देती
कोई ‘मुकद्दर’ ना ‘जग’ जीता अंत यहीं दिखला देती
तब बच्चा था अब अधेड़ हूँ कल मै बूढा हूँगा
माँ अब भी अंगुली पकडे हे ! बुरी राह ना चुनना
कर्म धर्म आस्था पूजा ले परम -आत्मा जाने
प्रतिदिन घुट-घुट लुट-लुट भी माँ ‘अच्छाई’ को ‘अच्छा’ माने
भोला भाला मै अबोध बन टुकुर टुकुर ताका करता
खुले आसमाँ तले ‘ख़ुशी’ को शान्ति जपे ढूँढा करता
मै आतंकी बनूँ अगर ‘माँ ‘ खुद “फंदा” ले आएगी
पथरायी आँखे पत्थर दिल ले निज हाथों पहनाएगी
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल ‘भ्रमर’ ५
प्रतापगढ़ उ प्र

Sahitya Surbhi: सम्मान स्त्रीत्व का ( चोका )

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on शुक्रवार, 8 मार्च 2013 | 8:34 pm

Sahitya Surbhi: सम्मान स्त्रीत्व का ( चोका ): अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ -  होती गोष्ठियाँ दिए जाते भाषण हालात वही लुटती महिलाएँ सरे-बाजार महिला...

स्त्री-पुरूष

(महिलाओं की स्थिति पर एक कविता)


तुम (पुरूष)
सहज सकते हो
केवल
अपना अहम्
वह (स्त्री) सहेजती है
पीड़ा‌ और दर्द

पुरूष शब्द
तुम्हारे मस्तिष्क
और
तुम्हारी सोच को
खाली कर चुका है
विपरीत इसके
स्त्री भरी रहती है हमेशा
अपनी आँखों में आँसू
क्योंकि
इकठ्ठा करना जानती है वह

भरी रहती हैं हमेशा
उसकी दोनों आँखें
इसलिए तो
पलकें नम रहती हैं
और
उसके सुख
जगह नहीं मिलने पर
लौट जाते हैं खाली हाथ

पुरूष से स्त्री का
भेद सिर्फ इतना है
कि
स्त्री
वह शब्द है
जब
कहा जाए
परिभाषा लिखो दुःख की
तो
मात्र एक शब्द ही पर्याप्त है
“स्त्री”।

सादर ब्लॉगस्ते!: शोभना फेसबुक रत्न सम्मान प्रविष्टि संख्या - 14

Written By डॉ. दिलबागसिंह विर्क on रविवार, 3 मार्च 2013 | 8:56 pm

सादर ब्लॉगस्ते!: शोभना फेसबुक रत्न सम्मान प्रविष्टि संख्या - 14: ग़ज़ल सोचो तुम तन्हाई में  लुटते हम दानाई में । उथले जल में कुछ न मिले  मिलता सब गहराई में । दौलत को सब कुछ माना  उलझे ...

Life is Just a Life: एक बार तो जी जाने दे Ek Bar To Jee Jane De

Written By नीरज द्विवेदी on शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013 | 12:59 pm

Life is Just a Life: एक बार तो जी जाने दे Ek Bar To Jee Jane De: तेरी उदास आँखें चश्में का सहारा ले छिपा लेतीं हैं दर्द तेरा आँखों का किनारा ले। टूट जा अब बिखर जा अब पा ले खुद को, सुधर जा अब...

Life is Just a Life: ये ताजी जलन नहीं है Ye Taji Jalan Nahi hai

Written By नीरज द्विवेदी on मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013 | 9:46 am

Life is Just a Life: ये ताजी जलन नहीं है Ye Taji Jalan Nahi hai: मैं  गुमसुम था  शब्दों में  आँसू में  अंगारों में , छेड़ दिया तो टूट गए कुछ भूखे स्वप्न कतारों में, भूखे पेटों की नज़रों से  जब जब नज...

Life is Just a Life: चटका मगर मटका कोई नहीं Chatka magar Matka koi nahi...

Written By नीरज द्विवेदी on बुधवार, 13 फ़रवरी 2013 | 8:53 pm

Life is Just a Life: चटका मगर मटका कोई नहीं Chatka magar Matka koi nahi...: बेहद सलीके से चटका मगर मटका कोई नहीं , अब तक मौत की  नजर से भटका कोई नहीं। दिख तो जाते रोज हैं  कुछ एक  हसीन चेहरे , तेरे बाद आज ...

Life is Just a Life: खुद को पाना जरूर Khud ko pana jarur

Written By नीरज द्विवेदी on शनिवार, 9 फ़रवरी 2013 | 8:29 pm

Life is Just a Life: खुद को पाना जरूर Khud ko pana jarur: रूठती जा रही  है डगर  साथ चल , बीतती जा  रही है उमर साथ चल , ख्वाव जो भी बुने वो एक एक कर , टूटते जा रहें  तू मगर  साथ चल। उन्हो...

Life is Just a Life: दिमाग की बैंड बजाओ मत Dimag Ki Band Bajao Mat

Written By नीरज द्विवेदी on गुरुवार, 7 फ़रवरी 2013 | 10:04 pm

Life is Just a Life: दिमाग की बैंड बजाओ मत Dimag Ki Band Bajao Mat: तुम बरस  जाओ चिल्ल्लाओ मत , मेरे सर पर राग भैरवी गाओ मत , मत चीखो सब बहरे हैं , बेशर्म हवा के पहरे हैं , मर जाने दो भूखों को , ...

facts and opinion.....: With reference to the passage...

Written By mark rai on बुधवार, 6 फ़रवरी 2013 | 1:33 pm

facts and opinion.....: With reference to the passage...: The need for Competition Law becomes more evident when foreign direct investment (FDI) is liberalised. The impact of FDI is not always pro...

facts and opinion.....: With reference to the passage...

facts and opinion.....: With reference to the passage...: The need for Competition Law becomes more evident when foreign direct investment (FDI) is liberalised. The impact of FDI is not always pro...

हास्य-व्यंग्य दोहे

Written By Ambarish Srivastava on मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013 | 11:04 am

चिमटा बेलन प्रेम का, खुलकर करें बखान.
जोश भरें हर एक में, ले भरपूर उड़ान..

जगनिंदक घर राखिये, ए सी रूम बनाय.
चाहे सिर पर ही चढ़े, वहीं बीट करि जाय..

चमचों से डरते रहें, कभी करें नहिं बैर.
चमचे पीछे यदि पड़े, नहीं आपकी खैर..

नैनों से सुख ले रहे, नाप रहे भूगोल.
सारे भाई बंधु हैं, नहीं इन्हें कुछ बोल..

गलती कर नहिं मानिए, बने खूब पहचान.
अड़े रहें हल्ला करें, सही स्वयं को मान..

अहंकार दिखता बड़ा, 'मैं' छाया बिन प्राण.
'मैं' 'मैं' 'मैं' ही कीजिये, होगा अति कल्याण..

जब तक सीखें गुरु कहें, नहीं करें कुछ पाप.
गुरु हो बैठे आप जब, बनें गुरू के बाप..

गलत सही साबित करें, अगर चले नहिं जोर.
गुटबंदी तब कीजिये, और मचा दें शोर..

कूटतंत्र की राह पर, छूटतंत्र का राज.
लोकतंत्र है सामने रामराज्य है आज..

हास्य व्यंग्य सम-सामयिक. करते दोहे आज.
इनका उल्टा ही भला, सुखमय बने समाज..

--इं० अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर'

Life is Just a Life: ये कैसी काली भोर Ye Kaisi Kali Bhor

Written By नीरज द्विवेदी on शनिवार, 26 जनवरी 2013 | 6:05 pm

Life is Just a Life: ये कैसी काली भोर Ye Kaisi Kali Bhor: गणतंत्र दिवस पर बेशर्मी से नाच रहे हैं मोर , ये देश वही है जिसके मंत्री होते बैशाखी चोर। सजे धजे भूत की झांकी ढोल मृदंगों के नीचे ,...

पैग़म्बर मुहम्मद साहब स. पर इस अनोखी किताब को शुद्ध हृदय से पढ़िए ताकि आप अपनी परेशानियों से मुक्ति पा सकें

Written By DR. ANWER JAMAL on शुक्रवार, 25 जनवरी 2013 | 12:01 pm

पैग़म्बर मुहम्मद साहब स. पर इस अनोखी किताब को शुद्ध हृदय से पढ़िए ताकि आप अपनी परेशानियों से मुक्ति पा सकें.
http://islaminhindi.blogspot.in/2010/04/book-prof-rama-krishna-rao.html

जिज्ञासा: कालाजार

Written By mark rai on बुधवार, 23 जनवरी 2013 | 7:27 pm

जिज्ञासा: कालाजार: मलेरिया के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा मौतें कालाजार से होती हैं. कालाजार धीरे-धीरे फैलने वाला रोग है। सैंडफ्लाइ मक्खियां इस घातक परजीवी की...

Life is Just a Life: बादलों जी भर बरस लो Badlon Jee Bhar Bras Lo

Written By नीरज द्विवेदी on मंगलवार, 22 जनवरी 2013 | 9:33 am

Life is Just a Life: बादलों जी भर बरस लो Badlon Jee Bhar Bras Lo: इस बार , ये बादलों जी भर बरस लो .. है मुझे है याद आती , आह को बूंदे बनाती , काल भी जब हारकर , घाव सूखा जानकर , साँस लेता हो सु...

Life is Just a Life: मैं ढूंढ़ रहा था एक रुबाई Main Dhundh Raha Tha Ek ...

Written By नीरज द्विवेदी on रविवार, 20 जनवरी 2013 | 4:50 pm

Life is Just a Life: मैं ढूंढ़ रहा था एक रुबाई Main Dhundh Raha Tha Ek ...: मैं  ढूंढ़  रहा  था  एक रुबाई , मिली  मगर  वो  थी तन्हाई। सपनों  के  पीछे   दौड़ा  था , नींद  खुली जब  ठोकर खाई। अंधेरों से  ...

Life is Just a Life: झूंठी कायरता का मंचन Jhoonthi Kayarta Ka Manchan

Written By नीरज द्विवेदी on शनिवार, 12 जनवरी 2013 | 8:12 pm

Life is Just a Life: झूंठी कायरता का मंचन Jhoonthi Kayarta Ka Manchan:
सीने में  शोले हैं  बह जाये  बूँद पर बूँद,
खाने को न हो रोटी पर मरता नहीं जुनून,
श्वेत  कफ़न  सी  सरहद  पर  आँखों में,
रक्तिम  आंसू ले कहता  शहीद का खून,
भारत के दो शेरों की निर्मम हत्याओं पर,
कायर नपुंसक दरबारों की  हीलाहवाली है,
गन्दी दागी खद्दर की हिफाजत में हरदम,
तैनात सारी  बंदूकों के मुँह पर  गाली है।
....

fact n figure: अब तो बड़े हो जाओ दुर्योधन!

Written By devendra gautam on बुधवार, 9 जनवरी 2013 | 8:28 pm

 झारखंड सरकार के गिरने और चार बर्षों के अंदर तीसरी बार राष्ट्रपति शासन की नौबत आने के बाद जब झारखंडी नेताओं की तरफ ध्यान जाता है तो महाभारत सीरियल का एक डायलाग बरबस ही याद हो आता है कि- तुम बड़े कब होगे दुर्योधन..?
सरकार बनाने के जादुई आकडे का गणित जिसे नर्सरी का बच्चा भी आसानी से समझ सकता है इतने बड़े-बड़े नेता नहीं समझ सके और सिर्फ अपनी सत्ता लोलुपता के तहत सूबे को राजनैतिक अस्थिरता की खाई में धकेल दिया. शिबू सोरेन जैसे एक ज़माने के क्रांतिकारी नेता जो यदि अपनी गरिमा को बरक़रार रखते तो 20  वीं सदी के बिरसा मुंडा के रूप में जनता के ह्रदय में वास करते, परिवारवाद के चक्कर में अपनी फजीहत करा रहे हैं. अपने व्यक्तित्व को हल्का करते जा रहे हैं. अपने पूर्व में अर्जित आभामंडल को धूमिल करते जा रहे हैं. यदि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने किसी जन मुद्दे पर मुंडा सरकार से समर्थन वापस लिया होता तो उसे आम जनता की सहानुभूति मिलती. सिर्फ इसलिए कि आपकी पार्टी के किसी नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाने को भाजपा तैयार नहीं हुई समर्थन वापस लेने का कोई औचित्य समझ में नहीं आता. इसे  राजनातिक अपरिपक्वता और बचकानी हरकत के अलावा क्या कहा जायेगा. बहुमत का कोई आंकड़ा नहीं होने के बावजूद यह उम्मीद लगाना कि कांग्रेस इस असम्भव कार्य को संभव बनाकर गुरूजी या उनके साहबजादे हेमंत सोरेन जी का राज्याभिषेक कर देगी दिवास्वप्न के अलावा और कुछ भी नहीं है.कांग्रेस के अंदर यह सामर्थ्य होता तो उसके पास मुख्यमंत्री बनने योग्य नेताओं की कमी है क्या. क्यों पूरे देश में झारखंड की फजीहत करा करे हैं. क्यों अपनी राजनैतिक अपरिपक्वता का प्रदर्शन कर रहे हैं. कम से कम दिशोम गुरु शिबू सोरेन की गरिमा का तो ख्याल करो भाई! एक इतिहास पुरुष कि फजीहत क्यों करने पर तुले हो! जोड़-तोड़ से नहीं जनता के समर्थन से जिस भी कुर्सी पर बैठना है बैठ जाओ कौन मन करता है. लेकिन अपनी सत्ता लोलुपता का इतना भोंडा प्रदर्शन मत करो. राज्य गठन का तेरहवां साल है. इतने संघर्षों और सहदतों के बाद मिले झारखंड की तेरहवीं मत मनाओ. बहुत हो चुका दुर्योधन अब तो बड़े हो जाओ.

--देवेंद्र गौतम

fact n figure: अब तो बड़े हो जाओ दुर्योधन!:

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बलात्कार का सही समाधान इस्लाम में है।

Written By Safat Alam Taimi on गुरुवार, 3 जनवरी 2013 | 1:19 pm


दिल्ली में चलती बस में वहशी दरिंदों की सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई छात्रा की मौत पर हम सब लगता है जाग गए हैं। पर इस प्रकार की जो भी समस्याएं पैदा होती हैं उनका सही समाधान इस्लाम ही पैश करता है। आज ज़रूरत है कि इस्लाम की शिक्षाओं की ओर झाँक कर देखा जाए जो मानव के सृष्टा की ओर से अवतरित हुआ है। और सृष्टा ही सृष्टि की हित को सही रूप में समझ सकता है।
इस्लाम महिला को ऐसे वस्त्र पहनने से रोकता है जिस से पुरुषों के जज़बात भर्कें। फिर पुरुषों तथा महिलोओं दोनों को भी निगाह नीची रखने का आदेश देता है।

उसके बाद भी यदि कोई व्यभीचार करता है तो इस्लाम का आदेश यह है कि यदि वह विवाहित है तो उसे पत्थर से मार मार कर नष्ट कर दिया जाए और यदि विवाहित नहीं है तो उसे 100 कुड़े मारे जाएं और एक वर्ष के लिए देश निकाला दिया जाए।

जिस समय यह नियम पूर्ण रूप में लागू था इस्लामी इतिहास साक्षी है कि इस प्रकार के दुष्कर्म बिल्कुल देखने को नहीं मिले। और यदि एकांत में एक व्यक्ति से ऐसा अपराध हुआ भी तो वह दौड़ा दोड़ा मुहम्मद सल्ल0 की सेवा में उपस्थित हुआ कि उसे पवित्र कर दिया जाए।

इस लिए कि इस्लाम सब से पहले हृदय को बदलता है। आज बलात्कारियों के लिए कैसे भी नियम बना दिए जाएं जब तक दिल नहीं बदलेगा, अपने प्रभु के समक्ष उपस्थित होने का भय पैदा न होगा जब तक नियम और क़ानून बनाने के बावजूद किसी भी अपराध पर नियंत्रण पाना असम्भव है।

Life is Just a Life: हम आज तक बस मांग ही करते रहे हैं क्यों?

Life is Just a Life: हम आज तक बस मांग ही करते रहे हैं क्यों?: आज वक्त केवल चीथड़ा पहने हुए है क्यों , कवि के शब्द आज फिर सहमें हुए है क्यों ? हमारे दिलों में इतना तो घुप्प अँधेरा न था , घर की...

नव वर्ष की बधाई

Written By kavisudhirchakra.blogspot.com on मंगलवार, 1 जनवरी 2013 | 10:25 am


हमारे एक मित्र
हैं बड़े विचित्र
एक जनवरी को हमसे बोले -
"
चक्र" जी
नव वर्ष की बधाई !
हमने कहा
बड़े अजीब हो,
बिना सोचे समझे ही बधाई
आपको
देने मै ज़रा भी शर्म नहीं आयी ?
अरे,
नव वर्ष जब भी आता है
केवल
वर्ष ही तो नया रहता है
लेकिन
समस्याएँ पुरानी दोहराता है !
समस्याओं की श्रेणी में
प्रथम क्रमांक
रोटी का आता है
विश्वाश करो,
एक दिन तो ऐसा आएगा
जब
मोनो एक्टिंग करके
कोरी कल्पना से पेट भरना होगा,
तब
हम अपने बच्चों को बताएंगे
कि
रोटी एक इतिहास है
और
उसकी कहानियां सुनाएंगे !
यह सुनकर
हमारे बच्चे भी
रोटी के भूतकालीन अस्तित्व पर
विशवास नहीं कर पाएंगे !
मेरे भाई,
बधाई का क्या है -
नव वर्ष की
सिर्फ निष्ठा बदल जाती है
और
मौक़ा देखकर
उसकी भी नीयत बदल जाती है !
जिस दिन
महंगाई कम हो जाएगी
उस दिन मैं
घी के दिये जलाऊंगा
और
सच मानो
आपको नव वर्ष की बधाई देने अवश्य आऊँगा |

Founder

Founder
Saleem Khan