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रिश्ते

Written By Shalini Kaushik on गुरुवार, 5 अप्रैल 2012 | 7:48 pm







कभी हमारे मन भाते हैं,
     कभी हैं इनसे दिल जलते,
कभी हमें ख़ुशी दे जाते हैं,
      कभी हैं इनसे गम मिलते,
कभी निभाना मुश्किल इनको,
     कभी हैं इनसे दिन चलते,
कभी तोड़ देते ये दिल को,
      कभी होंठ इनसे हिलते,
कभी ये लेते कीमत खुद की,
      कभी ये खुद ही हैं लुटते,
कभी जोड़ लेते ये जग को,
     कभी रोशनी से कटते,
कभी चमक दे जाते मुख पर,
     कभी हैं इनसे हम छिपते,
कभी हमारे दुःख हैं बांटते,
     कभी यही हैं दुःख देते,
इतने पर भी हर जीवन के प्राणों में ये हैं बसते,
और नहीं कोई नाम है इनका हम सबके प्यारे''रिश्ते''
                   शालिनी  कौशिक 


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6 टिप्पणियाँ:

शिखा कौशिक ने कहा…

nice post .thanks
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sushma 'आहुति' ने कहा…

प्रभावशाली रचना......

Asha Saxena ने कहा…

अच्छा लिखा है बधाई |
आशा

सदा ने कहा…

कल 11/04/2012 को आपके इस ब्‍लॉग को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


... हलचल में चर्चा है ...

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

nice.

dr.aditya ने कहा…

bahut sundar rachna...

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