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साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्था 'सृजन' का वार्षिक समारोह......ड़ा श्याम गुप्त

Written By shyam gupta on सोमवार, 22 अगस्त 2011 | 2:30 pm

                लखनऊ के  युवा रचनाकारों की साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्था  'सृजन' का वार्षिक समारोह स्थानीय गांधी भवन के लाइब्रेरी हाल में दिनांक २१ अगस्त २०११ को संपन्न हुआ | सरस्वती पूजन व माल्यार्पण के पश्चात वाणी वन्दना प्रातिभ युवा कवि श्री सुभाष चन्द्र रसिया ने की | अतिथियों का स्वागत संस्था के अध्यक्ष डॉ योगेश गुप्त ने किया एवं संस्था की गतिविधियों व उसकी स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला  | संस्था द्वारा  नगर के वरिष्ठ कवि साहित्यकार , रेलवे के अवकाश प्राप्त वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक  व सर्जन ड़ा श्याम गुप्त  को 'सृजन साधना वरिष्ठ रचनाकार सम्मान व युवा कवि श्री अखिलेश त्रिवेदी को सृजन साधना युवा रचनाकार सम्मान प्रदान किया गया |
ड़ा श्याम गुप्त को सम्मानित करते हुए पूर्व महानिदेशक पुलिस श्री महेश चन्द्र द्विवेदी

संस्था के उपाध्यक्ष परिचय पढते हुए
श्रीमती सुषमा गुप्ता परिचय पढते हुए
सम्मानित साहित्यकार ड़ा श्याम गुप्त व अखिलेश त्रिवेदी व मंचस्थ  डॉ सत्य, श्री द्विवेदी जी, सिन्हा जी, विनोद चन्द्र पांडे जी व अन्य



संस्था केअध्यक्ष ड़ा योगेश द्वारा धन्यवाद ज्ञापन व साथ में महामंत्री देवेश कुमार देवेश व श्री पार्थो सेन

                  समारोह की अध्यक्षता अगीत विधा के संस्थापक ड़ा रंग नाथ मिश्र 'सत्य' ने की | मुख्य अतिथि श्री विनोद चन्द्र पांडे 'विनोद' आई ऐ एस पूर्व अध्यक्ष हिन्दी संस्थान,  विशिष्ट अतिथि श्री महेश चन्द्र द्विवेदी पूर्व डीजीपी लखनऊ, श्री गदाधर नारायण सिन्हा पूर्व डीजीपी  व श्री राम चन्द्र शुक्ल पूर्व न्यायाधीश  थे |
                  संस्था के उपाध्यक्ष श्री राजेश कुमार श्रीवास्तव  व कवयत्री श्रीमती सुषमा गुप्ता  ने ड़ा श्याम गुप्त का जीवन परिचय दिया एवं श्री गौरव दीक्षित 'मासूम' ने श्री अखिलेश त्रिवेदी का परिचय दिया |  प्रमुख वक्ताओं साहित्यकार व कवि  प्रोफ. ओम प्रकाश गुप्त 'मधुर, कवयित्री श्रीमती स्नेह लता , सुषमा गुप्ता, श्री पार्थो सेन  व मशहूर शायर सुलतान शाकिर हाशमी  ने ड़ा श्याम गुप्त के रचना संसार व रचना धर्मिता की विशद रूप से चर्चा की |
                
             समारोह में उपस्थित  ड़ा आर के गुप्ता पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ,मंडल रेलवे  चिकित्सालय,  लखनऊ   ने भी ड़ा श्याम गुप्त के जीवन वृत्त व रचनाओं पर प्रकाश डाला |            ड़ा श्याम गुप्त  व  श्री अखिलेश त्रिवेदी 'शाश्वत'  द्वारा काव्य-पाठ किया गया | संस्था द्वारा अन्य कविगणों को भी सम्मानित किया गया | अध्यक्ष, मुख्य अतिथि व अन्य मंचस्थ वरिष्ठ विद्वानों ने काव्य जगत में सृजन जैसी संस्थाओं की अत्यंत आवश्यकता व उनके महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए संस्था  के कार्य कलापों की भूरि -भूरि  प्रशंसा की |  अध्यक्ष ड़ा योगेश द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया |






पूत जने माई बप्पा तो झूमें आज देशवा ख़ुशी भागशाली श्याम जू पैदा भये


आप सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर ढेर सारी हार्दिक शुभ कामनाएं आइये आवाहन करें की कृष्ण हम सब में आयें और अनाचार मिटायें हमारे सभी आन्दोलन सफल हों और दुराचारी भ्रष्टाचारी मुह की खाएं-इस कलयुग में द्वापर की बातें याद आ जाती हैं -आज तो कितनी द्रौपदी बेचारी कोई कान्हा नहीं पाती हैं ..ग्वाल बाल सब .सखियों सहेलियों का पवित्र प्यार अब कहाँ …जो भी हो आज अपने अंगना में गोपाला को आइये लायें ….गोदी में खिलाएं ….स्वागत करें …काले काले बदरा ..भादों का महीना … -भ्रमर ५
———–भ्रमर गीत———
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श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
ढोल मजीरा तो हर दिन बाजे
आज घर घर बजे सब की थाली
श्याम जू पैदा भये
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घुंघटा वाली नाचे चूड़ी कंगन बजाई के
बच्चे बूढ़े भी नाचें बजा ताली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
बदरा बजाये पशु पक्षी भी नाचें
पेड़ पौधों में छाई हरियाली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
कृष्ण पाख कुछ चाँद छिपावे
आज घर घर मने है दिवाली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
भादों में नदी नाले सागर बने
कान्हा चरण छुए यमुना भयीं खाली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
पूत जने माई बप्पा तो झूमें
आज देशवा ख़ुशी भागशाली
श्याम जू पैदा भये
आज मथुरा में -हाँ आज गोकुला में
छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये !!
——————-
कृपया मेरी अन्य तरह की रचनाएँ मेरे अन्य ब्लॉग पर पढ़ें जो इस पृष्ठ पर दायीं तरफ रहती हैं ….
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
२२.०८.२०११
प्रतापगढ़ उ.प्र. ६.३० पूर्वाह्न

क्या कहते हैं पाठक ‘ब्लॉगर्स मीट वीकली‘ के बारे में ?

प्रेरणा अर्गल जी और डॉ.अनवर जमाल जी की ये संयुक्त प्रस्तुति बहुत ही सार्थक पहल है और जिस शालीन ढंग से यहाँ ब्लोग्स की पोस्ट की चर्चा की जाती है वह सारे ब्लॉग जगत में सराहनीय है.सही कहा कि जब त्यौहार साथ साथ हो सकते हैं तो हम उन्हें साथ साथ मनाने से गुरेज़ क्यों करें.हम तो अपने बचपन से ही सारे त्यौहार साथ साथ मनाते रहे हैं और यदि ईश्वर की और इस धरती पर बसे सत्पुरुषों की कृपा दृष्टि यूँ ही बनी रही तो सारी जिंदगी हम मिल जुल कर ही अपने जीवन को हंसी ख़ुशी बिताना चाहेंगे.

ब्लॉगर्स मीट वीकली (5) Happy Janmashtami & Happy Ramazan

नेता जी की अपील ''शोर मत मचाओ ''

Written By Shikha Kaushik on रविवार, 21 अगस्त 2011 | 8:23 pm


नेता जी की अपील ''शोर मत मचाओ ''
Supporters of Indian rights activist Anna Hazare shout slogans during a rally in Mumbai, India, Tuesday, Aug. 16, 2011. The prominent activist who had announced an indefinite hunger strike to demand tougher anti-corruption laws was detained early Tuesday morning, police said.(AP Photo/Rafiq Maqbool)
     [yahoo न्यूज़ से साभार ]

 ना डंडे से डरते हैं  ,  न बारिश से डरते हैं,
''अन्ना'' के समर्थक  शोर बहुत  करते हैं,
ये  सुनकर मैंने तो कानों पर रख लिए हाथ हैं
''अन्ना तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं''

                                   शिखा कौशिक http://netajikyakahtehain.blogspot.com

                                 

कलयुग है या भ्रष्टतंत्र है तानाशाही-अत्याचार???



कलयुग है या भ्रष्टतंत्र है
तानाशाही-अत्याचार???
चार जमा कर स्विस में बैठे
भूखे मरें हजार .................


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चक्की में जो पिसे लोग हैं
अब चक्की पर चढ़ बैठे !
लिए हथौड़ा  छेनी संग में
कितनी मूर्ति ---गढ़ बैठे !!



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जला -"दिया" है -पूंछ सुलगती
कभी धमाका हो सकता !
अंधियारे में डींग हांकती
सोयी बैठी है सरकार !!
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इतने दिन में ना लिख पाओ
"रामायण" कोई बात नहीं
राम से मिल के चरण पकड़ के
राम कथा के नीति नियम -
"कुछ "- लगे लगा लो बात बने !!
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रावण सा तुम अहं भरो ना
समय चक्र चलता है -"काल"
मन में मैल भरी जो धो लो
आँखों से पट्टी तो खोलो
गांधारी- धृत राष्ट्र- बनो ना
कौरव -तेरे ना टिक पायें
"पांच" पांडव- हैं दमदार !!
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पत्थर ढोती वानर सेना
पुल भी कभी बना सकती
ले मशाल जो बढ़ निकली है
लंका- आग लगा सकती !!
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पास विभीषण हैं तेरे भी
कुछ मंदोदरी भी हैं बैठी
उनकी भी कुछ बात सुनो हे !
दंभ भरो ना हे पाखंडी !!
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(सभी फोटो गूगल /नेट/याहू से साभार )
शुक्ल भ्रमर ५
१०.२० मध्याह्न जल पी बी
२०.०८.२०११


दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

आखिर कब तक लुटती रहेगी जनता




अन्ना हजारे के नाम पर भी हो रही है ठगी

रानी (राजस्थान) २० अगस्त २०११
एक तरफ जहां पूरा समाज अन्ना हजारे के साथ जुट गया है वहीँ दूसरी ओर मोबाइल कंपनिया लोगो को लूट रही है
मुझे एक सन्देश मिला
Sender DD-ANNA
Dial *234*52# aur Payein Anna Hazare se judi tazza khabrein rs.10/10 days

हमने भी ये पैक शुरू करवा लिया  देखिये  सन्देश क्या आ रहे हैं

Day -1  19.08.2011
Massage 1 Sender Anna Lokpb
1. Anna launches protest from ramlila maidan.
2. My strenght is youth: Anna
3. Will not leave till Lokpal bill is introduced : Anna
source : NDTV (04.36.17 PM)

Massage 2 Sender Anna Lokpb
1. Mumbai dabbawalas take day off for anna.
2. kaart announces nationwide protest
3. lost 3 kgs, but fight has just began: Anna
source NDTV (06.36.09 PM)

Day-2 (20.08.2011)
Massage 1 Sender Anna Lokpb
1. Torch of revolution has been lit: Anna.
2.  He is the leader not the mask: Team Anna.
3. Do not debate lokpal on streets : Yeddy
Source: NDTV (10.23.19 AM)

Massage 2 Sender Anna Lokpb
1. Devotional songs,slogans echo at ramlila maidan.
2. govt mulls options on annas deadline
3. will not give up, says anna

Source NDTV (02.36.17 PM)

Massage 3 Sender Anna Lokpb
1. Committed to strong lokpal :PM
2.Public opinion sought on lokpal bill
3. anna hazare ups ante, government, congress hit back
Source NDTV (04.36.48 PM)


Massage 4 Sender Anna Lokpb
1. Open to discussion on Lokpal :PM
2.No time limit can be specified on lokpal bill : Congress
3. Want nationwide consensus on Lokpal: PM
Source NDTV (06.36.27 PM)


 Day-3(21.08.2011)
Massage 1 Sender Anna Lokpb
1. Annas august 30 deadline unrealistic:Congress
2.Annas health stable :Doctors
3.Have to break chain of corruption: Anna
Source: NDTV (10.22.19 AM)


चलिए ये थे सन्देश
माना की ये प्रतिदिन की १ रूपये में महँगी सेवा नहीं है मगर ये कम्पनिया तो कम रही है ना हम लोगो की भावना के साथ खेलकर

जैसा की राजीव तनेजा जी ने अपनी पोस्ट में लिखा है उसका लिंक दे रहा हूँ

नतीजा फिर भी वही…ठन्न…ठन्न…. गोपाल-राजीव तनेजा






Know About Ayurvedic herbs
Ayurvdic medicines have a long history in India . Ayurveda begins when everything fails and when the treatment is uncertain and prolonged, ayurvedic approach is the right choice since it cures chronic and stubborn diseases by its deep-rooted treatment procedures and drugs.

Ayurvedic herbs do nothing but just seeks to strengthen and enhance the body's own healing process - to help the body help itself.

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श्री कृष्ण जी हमें भी प्रिय है और हम भी उनका आदर करते हैं - Dr. Anwer Jamal



महापुरूषों के जन्मदिन क्यों मनाए जाते हैं ?
अलग अलग लोग इसके अलग अलग कारण बताएंगे।
जो कारण मैं समझा हूं वह यह है कि ऐसा करके लोग उन्हें याद रखना चाहते हैं।
इस मौक़े पर उनके जीवन से संबंधित झांकियां भी निकाली जाती हैं।
इनके ज़रिये से उनके जीवन की प्रमुख घटनाओं को सामने लाना होता है।
ये झाकियां मात्र मनोरंजन के लिए नहीं बनाई जाती हैं जैसा कि आम तौर पर समझ लिया जाता है।
महापुरूषों का जीवन सामने लाने का मक़सद यही होता है कि उनके पदचिन्हों पर चला जाए।
श्री कृष्ण जन्म अष्टमी हमारे सामने है।
लोग सजावट और मेहमानदारी के लिए ख़रीदारी में लग गए हैं। यह सचमुच एक ज़रूरी काम है लेकिन उससे भी बहुत ज़्यादा ज़रूरी है श्री कृष्ण जी के जीवन को समझना।
उनका जीवन हिंदुओं के साथ साथ मुसलमानों को भी शुरू से ही आकर्षित करता रहा है। हम भी उनका आदर दिल से करते हैं और उनके बारे में किसी भी अनुचित और अश्लील कथा को सही नहीं मानते।
श्री कृष्ण जी का काल आम तौर पर 5 हज़ार साल पुराना माना जाता है और उनके बारे में लिखे गए ग्रंथ उनके हज़ारों साल बाद लिखे गए हैं बल्कि अब तक लिखे जा रहे हैं। हरेक लेखक के कथन को सत्य माना जाए तो उनका वास्तविक चरित्र कभी सामने नहीं आएगा।
उनके काल में लोग ईश्वर को छोड़कर आर्य राजा इन्द्र की पूजा करने लगे थे। वह उनसे बेगार कराता था और उनका सारा उत्पादन बिना कोई शुल्क चुकाए ही हड़प लेता था। लोग उसके ज़ुल्म की वजह से उसका प्रतिरोध भी नहीं कर पाते थे। ऐसे समय में श्री कृष्ण जी ने जन्म लिया और उसकी पूजा रूकवा दी और जब उसने लोगों को डुबाकर उनकी हत्या कर देनी चाही तब भी श्री कृष्ण जी ने ही उनकी रक्षा का उपाय किया।
ऐसे थे हमारे श्री कृष्ण जी !
उन्होंने जब यह आदर्श प्रस्तुत किया तो केवल हिन्दुओं के लिए ही प्रस्तुत नहीं किया था बल्कि मानव मात्र के लिए प्रस्तुत किया था। उनके प्रयासों से इन्द्र की पूजा तो लगभग बंद सी ही हो गई लेकिन अन्य बहुत सी चीज़ों की पूजा उनके बाद शुरू कर दी गई बल्कि ख़ुद उनकी ही पूजा शुरू कर दी गई। इस तरह उनके मिशन को विपरीत धारा में मोड़ दिया गया।
इसी के साथ उनके जीवन से प्रेरणा लेना भी बंद कर दिया गया वर्ना आज भारत की धरती में भ्रष्टाचारी एमएलए , एमपी और नेता मौजूद न होते।
मंदिर बनाने का मिशन भी श्री कृष्ण जी का मिशन नहीं था। उन्होंने आजीवन किसी का भी कोई मंदिर नहीं बनवाया। जब मंदिर ही नहीं बनवाया तो वहां धन संपत्ति का भंडार भी नहीं हुआ और उनके समय में धन का प्रवाह होता रहा। जिसके नतीजे में उनके राज्य में दूध घी की नहरें बहती रहीं।
श्री कृष्ण जी की मूर्ति भी उनकी याद में और उनके बाद में बनाई गई और उनके मंदिर भी उनकी याद में और उनके बाद में बनाए गए।
उनकी मूर्ति और उनके मंदिर बनाने न बनाने पर हमें आज कुछ भी नहीं कहना है लेकिन हम यह ज़रूर कहेंगे कि श्री कृष्ण जी की जन्म अष्टमी के इस अवसर पर हम यह देखें कि हम उनके पद चिन्हों पर चल रहे हैं या उनके विपरीत चल रहे हैं ?
अगर हम श्री कृष्ण जी की प्रेरणा को अपने मन में स्थिर नहीं करते तो फिर हमारा नाचना गाना हमें उनसे हरगिज़ नहीं जोड़ पाएगा।
त्यौहारों को उनकी मूल भावना से काट दिया जाए तो फिर वह मात्र मनोरंजन बनकर रह जाता है और फिर वह एक आडंबर की शक्ल ले लेता है। भारतीय त्यौहारों को उनकी मूल भावना के साथ मनाया जाए तो भारत से भ्रष्टाचार और ग़रीबी का ख़ात्मा हो सकता है।

महापुरूष कोई भी हो उसके चरित्र के बारे में कोई भी अनुचित बात स्वीकार न की जाए और महापुरूषों को हिन्दू मुस्लिम के दायरे में बांटकर न देखा जाए।
जब उन महापुरूषों ने ख़ुद नहीं कहा कि हमें बांटकर मानना तो फिर उन्हें बांटा क्यों जा रहा है ?
यह एक नाज़ुक विषय है लेकिन भारतीय जनमानस आस्था प्रधान है और महापुरूषों के सही जीवन चरित्र को उसके सामने लाना भी हमारा कर्तव्य है।
कोई आदमी यह समझे कि वह जीवन और जगत के सत्य को मात्र अपनी बुद्धि से समझ लेगा तो यह उसका भ्रम है।
कोई आदमी यह समझे कि वह कर्तव्य-अकर्तव्य और सफलता के मार्ग को महज़ अपनी बुद्धि से पा सकता है तो यह उसकी ग़लतफ़हमी है।
महापुरूषों के जीवन चरित्र को जाने बिना उसे सत्य का ज्ञान कभी नहीं हो सकता। इसीलिए सभी सभ्यताओं में महापुरूषों की शिक्षाओं को अपनी हद तक सुरक्षित रखने का प्रयास भी किया गया और उन्हें बराबर याद रखने के लिए ही पर्व और त्यौहार की व्यवस्था भी की गई।
इस जन्म अष्टमी पर हमें श्री कृष्ण जी के चरित्र पर विचार करते हुए उस सत्य का पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए जिसके लिए उन्होंने आजीवन प्रयास किया और इसी प्रयास में उन्होंने अपनी जान तक क़ुर्बान कर दी।
उनकी महान क़ुर्बानियों को याद करने का अवसर है जन्माष्टमी का त्यौहार !
यह हमारे जज़्बात हैं और विनम्र विनती है कि इसे हिंदू मुस्लिम की विभाजनकारी संकीर्ण दृष्टि से न देखा जाए।
श्री कृष्ण जी हमें भी प्रिय है और हम भी उनका आदर करते हैं। उन्हें आदर देने की रीति में अंतर मिल सकता है। जैसे कि हिंदू कहलाने वाले भाई अपने माता पिता को आदर देने के लिए उनके पैर छूते हैं लेकिन मुस्लिम कहलाने वाले भाई उनके पैर नहीं छूते लेकिन दिल से अपने माता पिता का आदर दोनों ही करते हैं।

यह भी एक अनोखा मंज़र है जबकि सभी हिंदी ब्लॉगर्स जन्माष्टमी मिलकर मना रहे हैं
‘ब्लॉगर्स मीट वीकली 5‘ में।
आप भी इसके साक्षी बन सकते हैं और आप इसमें शामिल भी हो सकते हैं। यहां आपको जन्माष्टमी के संबंध में सभी के बहुत से लेख भी मिलेंगे।

हाँ में भारत की संसद हूँ ..मुझे शर्म आती है .............


हाँ में भारत की संसद हूँ .मुझे मेरी करतूतों पर कई बार शर्म आती है और इन दिनों तो में खुद अपनी करतूतों से शर्मसार हूँ .....मुझे मेरे देश मेरे भारत के लोगों ने उनकी हिफाजत ,सुरक्षा और कल्याण के लियें योजना बनाने के लिए चुना है ..मुझे गरीबी और भ्रष्टाचार दूर करने के लियें बनाया गया है लेकिन में इन सभी मामलों में नाकामयाब रही हूँ .मेरे ५४४ सदस्य है जो कभी भी किसी भी सेशन में कार्यकाल में उपस्थित नहीं रहे हैं ..जब भी किसी बिल को पास कराने या चर्चा के लियें मुझे इन लोगों की जरूरत पढ़ी तब यह लोग गायब मिले हैं कई लोग तो मेरे समक्ष रखे गये बिलों को खोल कर पढ़ भी नहीं पाए है कई ऐसे सदस्य हैं जिन्होंने एक भी सवाल नहीं किया है ..सदस्य आते है बैठते हैं ....और सस्ता खाना खाकर मजे लेकर चले जाते हैं यह लोग मुफ्त में मेरे यहाँ उपस्थित नहीं होते है अपनी उपस्थिति के लियें यह ख़ासा भत्ता लेते हैं .आने जाने का किराया खर्चा लेते हैं ठहरने का खर्चा लेते हैं ........दोस्तों मेने जो देखा है वोह बताते हुए मुझे अफ़सोस है इन लालची सदस्यों ने केवल खुद की तनख्वाह बढाने के मामले और भत्ते बढाने के मामले के विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया है ..लेकिन आरक्षण मामला ..महिला बिल ...लोकपाल बिल कई वर्षों से अटका पढ़ा है ...दोस्तों मेने देखा है यहाँ रोज़ जूतम पैजार ..गली ग्लोंच चीख पुकार और हाथापाई होती है तब मुझे लगता है के यह संसद है या सब्जी मंडी..दोस्तों मुझे जीतने के लियें मेरा विश्वास मत प्राप्त कर वापस सत्ता पाने के लियें सांसदों को नर्सिंम्माराओ ने रिश्वत दी पकड़े गए मुकदमा चला कुछ नहीं हुआ ..संसद में मनमोहन सिंह ने विशवास मत जीतने के लियें सांसदों को रिश्वत की पेशकश की ..रिश्वत की राशि मेरे कक्ष में लहराई गयी उडाई गयी मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन नतीजे के नाम पर सिफर ........मेरे अन्दर बेठ कर हिन्दुस्तान टाइम्स के सम्पादक बी जी वर्गिस को गिरफ्तार बुलाया गया खुद को सुप्रीम कोर्ट से बढा समझा गया ....मुझ पर पाकिस्तानी हमला हुआ आतंकवादी अंदर घुसे उनके डर से कई सांसद तो कई दिनों तक मुझे शक्ल तक दिखाने नहीं आये ...दोस्तों मुझे यह कहते हुए भी शर्म आती है के मेरे सदस्य सांसद लोगों से सवाल पूंछने की भी रिश्वत लेते हैं में जनता के प्रति जवाबदार हूँ लेकिन जनता को कीड़ा मकोड़ा समझने लगी हूँ मेरे सद्सस्य जनता के बीच नहीं जाते हैं उन्हें उनकी करतूतों की सजा देने वाला कोई नहीं है उन्हें मेरे कानूनों ने प्रोटेक्शन दे रखा है न तो वोह गिरफ्तार होते हैं ना ही उन्हें सजा मिलती है किसी चोर को चोर कहो तो संसद की अवमानना की कार्यवाही का डर बता कर ब्लेकमेल किया जाता है .दोस्तों मेने अरबों खरबों रूपये के घोटाले झेले है मेने देखा है के जब भी मत विभाजन होता है तो कुछ लोग गिनती की गणित बिगाड़ने के लियें एक पक्ष से फायदा लेकर संसद से गायब हो जाते है वोह संसद में डट कर वोटिंग नहीं करते हैं ......दोस्तों किसी भी बिल पर अगर कोई भी सांसद बिना किसी युक्तियुक्त कारण के अनुपस्थित रहे तो उसे सजा देने का कोई प्रावधान नहीं है जान बुझ कर वोट का बहिष्कार करे तो उससे जनता को सवाल पूंछने और संसद को उसे सजा देने का कोई कानून नहीं है दोस्तों में ६२ साल की बूढी हो गयी हूँ लेकिन देश को कुछ सार्थक नहीं दे पायी हूँ सांसदों को सुधार नहीं पायी हूँ में जनता की तो सुनती नहीं खुद को जनता द्वारा चुन कर जनता के लाभ के लियें बनाई गयी हूँ लेकिन हठधर्मिता देखो के किसी भी मामले में में जनता को बाहर का आदमी कहकर उसकी बात नहीं सुनती हूँ में खुद मेरी करतूतों से शर्मसार हूँ ..परेशान हूँ मुझे माफ़ करो ......अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

बोला सुभाष


From Google


यहाँ देश धर्म करते करते, मैं चलते चलते ठहर गया,
भारत को एक करते करते, मैं ही टुकड़ों में बिखर गया,
अरे मेरा भी इक जीना था, बहता जो खून पसीना था,
इस धरती की सेवा करते, बहते बहते बस निकल गया॥

जो निकल गया सो निकल गया, इस आज़ादी की राहों में,
उसकी सोचो जो तेरी रगों में, बहता बहता ही सूख गया,
अब जाग और पहचान मुझे, हे देशभक्त, क्या पता तुम्हें?
बोला सुभाष, लड़ते लड़ते इस धरा से कब मैं चला गया?

अरुणा राय मुकदमे से डर कर कोंग्रेस की गोदी में बैठकर अन्ना का विरोध कर रही हैं

Written By आपका अख्तर खान अकेला on शनिवार, 20 अगस्त 2011 | 9:17 pm

अरुणा राय मुकदमे से डर कर कोंग्रेस की गोदी में बैठकर अन्ना का विरोध कर रही हैं ........

कथित समाज सेवकों की मोका परस्ती देखिये के जिस अन्ना हजारे ने अरुणा राय के साथ मिलकर सुचना के अधिकार अधिनियम की लड़ाई लड़ी आज वही अरुणा राय अपनी जान और इज्ज़त के साथ खुद को पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के डर से अन्ना के खिलाफ कोंग्रेस की गोदी मैं जा बेठी हैं .......अरुणा रॉय ने अन्ना के खिलाफ सिर्फ इसलियें मोर्चा खोला है के कश्मीर में उनके बयान के खिलाफ कोंग्रेस ने जो मुकदमा दर्ज किया है और दिल्ली के अलावा कश्मीर पुलिस जिस मुकदमे की जांच कर रही है उसमे खुद को गिरफ्तारी से बचाने के लियें अरुणा राय ने कोंग्रेस से समझोता किया और अन्ना के जन्लोक्पाल बिल के खिलाफ एक नया लोकपाल बिल तय्यार कर आनन फानन में पेश कर एक नया विवाद खड़ा कर अन्ना को कमजोर करने की कोशिश की है लेकिन यह पब्लिक है सब जानती है इसलियें हजारों हजार लोगों के बीच जब कोंग्रेस के नेताओं द्वारा पत्रकारों को लिख कर दिए गए सवाल पूंछे जा रहे थे तो जनता कोंग्रेस की हर कुटिल चाल पर मुस्कुरा रही थी ..जनता अन्ना को कभी आर आर एस एस का समर्थन तो कभी अमेरिका का समर्थन होना बताती है तो कभी उन्हें डराती है तो कभी भ्रष्ट कहकर आहात करती है तो कभी उन्हें जेल भेज कर बाहर निकलने के लियें हाथ जोडती है .इतना ही नहीं कोंग्रेस के नेता अन्ना और उनकी टीम को संसद की अवमानना का डर बताकर दबाना चाहते हैं ..अन्ना का बिल को समर्थन और इधर स्टेंडिंग कमेटी का सुझाव मांगने का विज्ञापन , अरुणा राय का लोकपाल बिल यह दर्शाता है के सब कुछ कोंग्रेस हार की खीज पर कर रही है ,,, दो दिनों से कोंग्रेस के इलेक्ट्रोनिक और प्रिंट मीडिया में अनाप शनाप विज्ञापन और मीडिया का बदला रुख जो कोंग्रेस को फेवर और अन्ना के खिलाफ हो रहा है सभी लोग जानते है जो सवाल पत्रकार दाग रहे है वोह सब कोंग्रेस ने लिख कर दिए हैं लेकिन जनता जनार्दन थी .जनता जनार्दन है और जनता जनार्दन रहेगी ..अरुणा राय गद्दारी करे ..गिनती के पत्रकार बिकें या फिर कुछ भ्रष्ट नेता अन्ना को आरोपित करें कोई फर्क नहीं पढ़ता .............अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

तुमसे बिछड़कर, जिन्दगी को जीना, अजीब-सा लगता है

तुमसे बिछड़कर, जिन्दगी को जीना, अजीब-सा लगता है |
जिन्दगी का हर कोना, खाली-खाली सुनसान-सा लगता है |

पता नहीं, क्यूँ दिन में भी वीरानगी-सी लगती है |
पता नहीं, क्यूँ रात में भी महफ़िल-सी सजती है |

चन्द शेर निकल आते हैं, गम से डुबे हुए |
अपने को ही सुना लेते हैं, तुम में डुबे हुए |

यूँ ही गलियाँ नापते हैं, यूँ ही सड़कें नापते हैं |
कहीं किसी पुलिया पर, अपने में ही झांकते हैं |

चेहरा सामने होता है, दिमाग ठण्डा होता है |
आखें तुम्हें देखती हैं, पलकें न अब झेप्ति हैं |

रोज़ का किस्सा यही होता है |
जमाना मुझ पर हँसता है |
मेरा अपना मुझपर रोता है |
क्यूँ जिन्दगी यूँ खोता है |

क्या करें, अब तुझे, यूँ भुलाया नहीं जाता |
किसी और को तेरी जगह लाया नहीं जाता |

अब तो गम छिपा लेते हैं, ज़माने के काम हम भी आ लेते हैं |
चेहरे से सारे दिन हँसते रहें, रात को दिल खोलकर रो लेते हैं |

क्यूँ जाहिर करें, अपने गम जिन्दगी के |
बहाने ढूढते हैं, ज़माने को खुश करने के |

तुमसे बिछड़कर, जिन्दगी को जीना, अजीब-सा लगता है |
जिन्दगी का हर कोना, खाली-खाली सुनसान-सा लगता है |


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‘सर्च ए विलेन तकनीक‘

इस तकनीक के अंतर्गत हम दो तकनीकों का संयुक्त अध्ययन करेंगे।
इसमें पहली तकनीक का नाम है ‘हातिम ताई तकनीक‘
और दूसरी का नाम है ‘अवतार तकनीक‘
आगामी पोस्ट में इन दोनों तकनीकों के बारे में विस्तृत चर्चा की जाएगी, इंशा अल्लाह !
इस विषय में ये दो पोस्ट भी फायदेमंद हैं :

फलसफा-ए-हुश्न का


फलसफा-ए-हुश्न का, तेरे अफसाने से शुरू होगा |
तू ख़ूबसूरत इतनी है, कि जमाना तेरे हुश्न का कायल होगा |
उस पर तेरी सोखी का आलम, इस कदर समां गया है |
तू महफूज़ रहे, तेरे भीतर खुदा का नूर
आ गया है || १ ||

मुर्बते हुश्न, कि तेरे दायरे से, न निकल पायेंगे |
मर जायेंगे, मिट जायेंगे, तुझे खुश कर जायेंगे || २ ||

खुश है जमाना तेरे दीदार से, क्यूँ तू छिपा रही है अपने हुश्न को |
दुआयें देंगे तुझको,
ज़माने कि नज़रों से गुजरने दे, अपने हुश्न को || ३ ||

छुरियां चल जाती हैं, सरे बाज़ार तेरे हुश्न कि खातिर |
दोस्तों मैं भी जंग, छिड जाती है तेरे हुश्न कि खातिर |
तेरे हुश्न पर जवानी इस कदर छाई है |
तू बस मेरे लिए ही, इस दुनिया में आयी है || ४ ||

बदस्तूर तेरा यह जुल्म, हम सह न सके |
अब तो दीदार करा दे, तेरे बिना हम रह न सके || ५ ||

तुझे देखे जमाना हो गया |
मस्ताने से तेरा दीवाना हो गया |
पल-पल तेरी याद में |
दर-दर भटकने वाला बेगाना हो गया || ६ ||
 
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इतिहास इसे भी याद रखेगा

Written By Dr Mandhata Singh on गुरुवार, 18 अगस्त 2011 | 8:51 pm


   १६ अगस्त को जब अन्ना हजारे अनशन पर बैठने से पहले गिरफ्तार कर लिए गए तो उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया। वहीं भारी हुजूम जमा हो गया। सभी समाचार चैनल अपने-अपने तरीके से इस घटनाक्रम को प्रसारित कर रहे थे। उसी समय स्टार न्यूज के दीपक चौरसिया यह पता करने की कोशिश कर रहे थे कि कितने लोगों को पता हैं कि लोकपाल बिल क्या है और जनलोकपाल बिल उससे क्या भिन्न है। मोटे तौर पर तो सभी जान रहे थे कि सरकारी लोकपाल बिल जनहित में नहीं है मगर क्या भिन्न है, यह बताने में वे सभी लोग असमर्थ रहे जिनसे चौरसिया ने दोनों में अंतर पूछा था। कई ने तो अंतर बताने की बजाए देशभक्ति गीत गाए। सवाल यह नही है कि लोग कितना जानते हैं बल्कि सवाल यह है कि दीपक चौरसिया किस तकनाकी ज्ञान की अपेक्षा उन सामान्य लोगों से कर रहे थे जो यह मानकर आए थे कि अन्ना हजारे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं। और सरकार से भ्रष्टाचार रोकने की गारंटी का कानून लाने की मांग कर रहे हैं। समर्थन के लिए आई जनता को क्या इतना जानना काफी नहीं ? शायद दीपक चौरसिया इससे ज्यादा की अपेक्षा रख रहे थे। तो क्या सारी जनता किसी आंदोलन में शामिल होने से पहले अध्ययन में जुट जाए। क्या यह संभव है? मेरा दावा है कि अगर अचानक इस देश के तमाम सांसदों व विधायकों से भी पूछा जाए तो वे भी इतनी बारीकी से दोनों लोकपाल विधेयकों का फर्क नहीं बता पाएंगे।
 चौरसिया शायद बताना चाह रहे थे कि यह भेड़ों वाली भीड़ है और किसी को भ्रष्टाचार या लोकपाल से कोई लेनादेना नहीं है। अगर इस पूछताछ के बाद खुद चौरसिया यह स्पष्ट करते कि यह भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता है जो अन्ना ते समर्थन में जुटी है। अगर इन्हे तकनीकी फर्क नहीं भी मालूम है तो क्या ये भ्रष्टाचार को समाप्त होते देखना चाहते हैं। मगर उन्होंने जानबूझकर ऐसा करके लोगों में गलतफहमी फैलाने की कोशिश की। एक कार्यकर्ता यह देख रहा था और उसने आकर स्पष्ट किया कि सभी को तकनीकी जानकारी रखना संभव नहीं मगर भ्रष्टाचार के मायने सभी जानते हैं। मीडिया का यह रोल भी किसा भ्रषटाचार से कम नहीं। इतिहास इसे भी याद रखेगा।
  आलइंडिया ब्लागर एसोसिएशन ने एक पोस्ट डाली है जिसमें दोनों लोकपाल बिल में मुख्य फर्क को बताया है। मैं यहां उसके पीडीएफ को डाल रहा हूं ताकि आप भी इन बारीकियों को जान लें और फिर कभी कोई दीपक चौरसिया गुमराह करे तो करारा जवाब दे सकें। मित्रों भ्रष्टाचार की जड़े बड़ी गहरी हैं और कहां कहां समाई हुई हैं कह पाना मुश्किल है। भले जड़ से मिटाने पर सवाल खड़ा हो रहा है तो क्या प्रयास ही नहीं किए जाने चाहिए। भ्रष्टों की मंडली तो साथ नहीं देगी मगर सचमुच में जो त्रस्त है उसे तो लड़ना ही पड़ेगा। अब दीपक चौरसिया से सीख लीजिए और खुद को जवाब देने लायक भी बनाकर रखिए। इस लिहाज हम दीपक के आभारी भी हैं उन्होंने हमारी इस कमी परह सवाल उठाया। निंदक नियरे राखिए.................।

सरकारी लोकपाल और जन लोकपाल में प्रमुख अंतर

ये हैं पहली ब्लॉग पहेली .

बहुत आसान प्रश्न हैं फिर भी आप अब तक नहीं बता पाए .जल्दी से बताएं और बने विजेता .ये हैं पहली ब्लॉग पहेली .

अरे भई साधो......: मसखरे हीरो नहीं बन सकते

Written By devendra gautam on बुधवार, 17 अगस्त 2011 | 11:59 pm

मसखरे हीरो नहीं बन सकते

यह एक ध्रुव सत्य है कि हीरो मसखरी कर सकता है लेकिन मसखरे हीरो नहीं बन सकते. ठीक उसी तरह जिन्हें राजनीति की समझ नहीं हो, जो स्थितियों को सही आकलन नहीं कर सकते वे तानाशाह नहीं बन सकते. अन्ना के आंदोलन के साथ मनमोहन सरकार ने इंदिरा गांधी के अंदाज में निपटने का प्रयास किया और अपनी भद पिटा ली. अन्ना को गिरफ़्तारी और जेल का भय दिखने की कोशिश की. उनकी टीम के लोगों को तिहाड़ जेल भेज कर उनके आंदोलन को नेत्रित्वविहीन करने की कोशिश की लेकिन देश भर में ऐसा जन सैलाब उमड़ा की सरकार के पसीने छूट गए. सात दिन की न्यायिक हिरासत की व्यवस्था की और शाम होते-होते उनको जेल से बाहर आने के लिए मिन्नतें करने लगे. एक-एक कर उनकी तमाम शर्तें स्वीकार करनी पड़ी. प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह तक अपरिपक्व बयान जारी कर आलोचना के पात्र बने. गृह मंत्री को अपनी यू टर्न लेना पड़ा. कांग्रेस के मुताबिक उसका विरोध उसकी शर्तों के आधार पर करना चाहिए. इसकी अनुमति लेकर. कांग्रेस की इस पीढ़ी को यह बात समझ में नहीं आती कि विरोध अनुमति लेकर नहीं किया जाता. अन्ना गांधीवादी और अहिंसक तथा शांतिपूर्ण आंदोलन के पक्षधर हैं इसलिए अनशन के लिए जगह देने की गुजारिश की वरना क्या माओवादियों ने कभी सरकार के पास आवेदन दिया कि वे रेल की पटरी उड़ना चाहते हैं कृपया इसकी अनुमति प्रदान की जाये. या वे पुलिस वाहन को लैंडमाइन विस्फोट कर उड़ना चाहते हैं इसकी अनुमति दी जाये. कानून के दायरे में रहकर यदि कोई शांतिपूर्ण विरोध करना चाहता है तो उसपर दमनचक्र चलाना या उसपर शर्तें लादना यह बतलाता है कि सरकार गांधी की भाषा सुनने को तैयार नहीं माओ की भाषा में बोलो तो कोई समस्या नहीं. जेपी आंदोलन के बाद बोध गया महंथ के विरुद्ध संघर्ष वाहिनी के अहिंसक वर्ग संघर्ष को भी इसी तरह कुचला गया था जिसका नतीजा बाद के वर्षों में हिंसक आंदोलनों में अप्रत्याशित वृद्धि के रूप में सामने आया और देश आजतक माओवादी और आतंकवादी हिंसा के रूप में झेल रहा है. मनमोहन सिंह जी की पूरी मंडली इस बात को नहीं समझ रही है कि इस मुद्दे को यदि अन्ना की जगह किसी हिंसक संगठन ने लपक लिया और उसे ऐसा जन समर्थन मिल गया तो क्या होगा. क्या दिल्ली पुलिस या भारतीय पुलिस उसे संभल सकेगी. दुर्भाग्य है कि देश की ऐसे अपरिपक्व और नासमझ लोगों के हाथ में है और अगले चुनाव तक इसे झेलना जनता की मजबूरी है. आज देश का बच्चा समझ रहा है कि किसके विदेशी बैंक खाते को बचाने के लिए देश की प्रतिष्ठा और एक एक गौरवपूर्ण पृष्ठभूमि वाली पार्टी की गरिमा को दावं पर लगाया जा रहा है. कहीं यह व्यक्तिगत निष्ठां पूरे संगठन की ताबूत में आखिरी कील न बन जाये. इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.


-----देवेंद्र गौतम

Anna Hajare is Anna Karore now

कल 16 अगस्त 2011 को अन्ना हजारे द्वारा जे पी पार्क में जो धरना व अनशन करना प्रस्तावित था। उससे पूर्व ही उन्हें गिरफ्तार करके दिल्ली पुलिस ने सत्ता के साथ अपने रिश्तो की मजबूती दर्शाई । फिर दिन भर आरोप प्रत्यारोप लगते रहे और अन्ना के पक्ष मंे बढते जनाधार व सत्ता के प्रति बढते जनाक्रोश के चलते सरकार ने आखिर में उनकी रिहाई का मन बना लिया। उसे देखकर लगता है कि सत्ता आज संविधान से भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं।
आखिर श्री राहुल गांधी को क्या हक हैं कि वह किसी की रिहाई या बंदी बनाने के फैसले की प्रकिया में शामिल हो सकें।
फिर देखें कि कितना जनबल अन्ना के साथ आ गया। कि इन्हें अन्ना हजारे नही अन्ना करोडे कहा जाना चाहिए।
आप सभी पाठकों से मेरा अनुरोध हैं कि अपने स्थानीय सांसद, प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के नाम अन्ना के लोकपाल बिल के संबंध में एक एक पोस्टकार्ड जरूर भेजें। एवं कम से कम 10 लोगों को पोस्टकार्ड भेजने हेतु प्रेरित करें
पोस्टकार्ड में लिखे जाने वाले ज्ञापन का मैटर निम्न रखा जा सकता हैं।
सांसद को लिखा जाने वाला पत्र
हमने आपको अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए संसद में भेजा हैं। न कि उसे बढाने के लिए। शायद ये हमारी गलती हो गई।कृप्या कर हमने आपको चुनकर जो गलती कर दी उसकी और सजा हमें ना देवें। अरे इससे अच्छी तो गुलामी थी कम से कम हमें परेशान करने वाले पराये तो थे, अब तो अपने ही हमें घाव देने लगे हैं। ये काहे की आजादी हैं। ये तो सत्ता का हस्तांतरण हैं। इसमें ज्यादा तकलीफ है क्योंकि आप हमारे हैं और आप ही हमें परेशान करें। लोकपाल बिल पारित करावें।

भवदीयः
आपके व आपकी सरकार के जुल्मों की सताई, आजादी के बाद भी आपकी गुलाम, आपकी जनता


प्रधानमंत्री को लिखा जाने वाला पत्र
हमने आपको अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए जिन्हें संसद में भेजा था शायद ये हमसे उन्हें चुनने में गलती हो गई। क्यांेकि उन्होने आपको अपना नेता चुन लिया। और इस कारण से देष का बेडा गर्क हो गया हैं। कृप्या कर हमने आपको चुनकर जो गलती कर दी उसकी और सजा हमें ना देवें। अरे इससे अच्छी तो गुलामी थी कम से कम हमें परेषान करने वाले पराये तो थे, अब तो अपने ही हमें घाव देने लगे हैं। ये काहे की आजादी हैं। ये तो सत्ता का हस्तांतरण हैं। इसमें ज्यादा तकलीफ है क्योंकि आप हमारे हैं और आप ही हमें परेशान करें। लोकपाल बिल पारित करावें। अरे सिंह साहब शर्म करो, ऐसी भी क्या मजबूरी।

भवदीयः
आपके व आपकी सरकार के जुल्मों की सताई, आजादी के बाद भी आपकी गुलाम, आपकी जनता


राष्ट्रपति को लिखा जाने वाला पत्र
आप भारत के संविधान द्वारा निर्मित सर्वोच्च पद पर आसीन हैं। हम जानते हैं कि आपका पद केवल मात्र एक रबर की मोहर के समान हैं। आपके हाथ में कुछ नही हैं। मगर आपको जो विषेषाधिकार प्राप्त हैं, उनका प्रयोग करें और इस जनता को परेषान करने वाली सरकार को सुधारें। आपसे हमें यही उम्मीद हैं। क्या आप हमारी समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रयास करके हमारी उम्मीदों पर खरी उतरेंगी या अपने पूर्व परिवार (अपनी राजनैतिक पार्टी) एवं पूर्व मित्रों (नेतागणों) के साथ रहकर अपना फर्ज अदा करेंगी। और देष को बर्बाद होते देखना पसंद करेंगी। कृप्या कर आपको चुनकर जो गलती कर दी उसकी और सजा हमें ना देवें। लोकपाल बिल पारित करावें अरे इससे अच्छी तो गुलामी थी कम से कम हमें परेषान करने वाले पराये तो थे, अब तो अपने ही हमें घाव देने लगे हैं। ये काहे की आजादी हैं। ये तो सत्ता का हस्तांतरण हैं। इसमें ज्यादा तकलीफ है क्योंकि आप हमारे हैं और आप ही हमें परेशान करें।
भवदीयः
आपके व आपकी सरकार के जुल्मों की सताई, आजादी के बाद भी आपकी गुलाम, आपकी जनता

अश्लील खेल ले गया जेल, रमेश आडवाणी को Under The Blanket

क्योंकि हवा में उड़ते प्लेन में वह अपने पास की सीट पर सोई हुई औरत के साथ अश्लील हरकतें करने लगे थे। 

कोर्ट ने उन्हें जेल की सज़ा सुनाई है।



कितने साल की ?
यह जानने के लिए देखिए
यह लिंक 

Indian in US jailed for sexual abuse on plane

इससे यही सबक़ मिलता है कि नारी को सम्मान दोगे तो अपना भी सम्मान बचा रहेगा।

भ्रष्ट -चोर को चोर कहें ना ये कैसी आजादी ??


कैसा अपना लोकतंत्र है ??
कैसी लोकशाही ????
भ्रष्ट -चोर को चोर कहें ना
ये कैसी आजादी ??
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें
images
(फोटो साभार गूगल /नेट से लिया गया )
———————–
पेट पे लात मार जो बैठा
क्या राजा कहलाये ?
बड़ी-बड़ी कोठी वो बैठा
झुग्गी नजर गडाए !!
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें
——————————-
मरते भूखे-कृषक -युवा हैं
मरते कोख में बच्चे
भूख अभी भी मुख्य समस्या
कैसी नीति बनाये
सौ सौ गार्ड के बीच चले हैं
जन-सेवक कहलाये ?
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें
————————
महगाई भ्रष्टाचारी से
दे दो हमें निजात
या अनशन भूखे मरने दो
सुन लो हमरी बात
कैसा न्याय कहाँ हैं मंत्री
दूध पिला हमने जो भेजे
“डसते ” देश यही क्या संतरी
रक्त-बीज हैं दस दस फैले
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें
————————————
कला धन-काली तेरी कमाई
मुह भी काला कर अपना !
श्वेत वस्त्र वो टोपी छोडो
भारत-भारती श्वेत हंस -जनता प्यारी से
दूर हटो तुम
दूर हटो तुम ………
चीख -चीख अपना कहना !!
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें
—————————-
धैर्य हमारा टूट न जाये
लग जाए ना आग
अभी होश में आ जाओ
या भाग सके तो भाग
अब मैराथन शुरू हो गयी
लम्बी चले लड़ाई
गुरु -”माँ” की कुछ सीख बची तो
धर्म -न्याय का राह पकड ले
बन रक्षक कहलाये भाई !!
आओ मिलकर शोर मचाएं
चीख -चीख हम रोयें !!
———————————
शुक्ल भ्रमर ५
जल पी बी
१७.८.२०११

बड़ी कीमती आजादी है इसे संभालो

Written By Shikha Kaushik on सोमवार, 15 अगस्त 2011 | 9:12 pm




आया फिर से आजादी का दिन ये प्यारा ,
चहुँ दिशा में गूँज रहा ''जयहिंद' का नारा .

हाथ तिरंगा लेकर गली-गली में घूमें ,
जश्न मनाएं आओ मिलकर हम सब झूमें .

आज शहीदों  को झुक कर  हम नमन करेंगे 
याद शहादत करके आँखें नम कर लेंगे .

प्रण इतना हमको करना है अब ये हँसकर;
प्राण न्यौछावर कर देंगे हम 'भारत माँ' पर .

छोड़ आपसी द्वेष सभी को गले लगा लो ;
बड़ी कीमती आजादी है इसे संभालो .

                                          शिखा कौशिक 


15 अगस्त 2011


ये इस बार स्वतंत्रता दिवस(15 अगस्त 2011) पर खुशी नही हो रही है, शायद इसलिये कि मेरी आँखे जो खुल गयीं हैं, आज़ादी कहीं दिखाई जो नही दे रही है। ना सच बोलने की आज़ादी, न सच लिखने की आज़ादी और ना ही सच देखने की आज़ादी, यहाँ तक कि अब तो भूखे रहने की आज़ादी भी छीन ली गयी है।
स्वतंत्रता और स्वतंत्र व्यक्ति तो कोई नही दिख रहा, दिख रहा है तो गुलामी और गुलामी के नये नये आकर्षक रूप, चाहे वो नेताओं की गुलामी हो, विचारधारा की गुलामी हो या विदेशी कम्पनियों की।
आज तो हर हिन्दुस्तानी देशभक्त हो गया है, और सारी की सारी देशभक्ति मोबाईल सन्देशों और फ़िल्मी गाने सुनने में ही लगी जा रही है। कहीं लोग झन्डे लिये बैठे हैं तो कहीं...  15 अगस्त 2011(Complete)



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