नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

कलयुग - यानी कला का युग

Written By Brahmachari Prahladanand on सोमवार, 29 अगस्त 2011 | 10:35 am

कलयुग - यानी कला का युग, जिसके पास कला है, वही सफल है, कोई भी कला हो, कलयुग में कला ही काम आने वाली है, कलयुग में सब कलाकार हैं, यहाँ पर सब अपनी कला का प्रदर्शन करके पैसा और ख्याति प्राप्त करते हैं, तो यह जरूरी है की कोई-न-कोई कला हर कोई अपने में ढूडे और उस कला के माध्यम से अपना उद्धार करे, यही इस कलयुग में सफलता का मंत्र है |

.

कुछ मिले न मिले, पर सुकून मिलता है

Written By Brahmachari Prahladanand on रविवार, 28 अगस्त 2011 | 7:35 pm

कुछ मिले न मिले, पर सुकून मिलता है,
खुदा की इबादत से, हर जूनून मिलता है,
खोजते थे जिसे बेतहाशा, इल्म मिलता है,
रुक गया कारवाँ अब, मकाँ यूँ मिलता है,

न पशु-ओ-मन में, अब भड-भड़ाहट-सी होती है,
रुक गया, मर गया मन, अब तो दुआ होती है,
है फितरते जहान में, सब सलाहियत होती है,
न किसी से दोस्ती, न दुश्मनी अब तो होती है,

इस तरह वक्त का पल-पल गुज़रता है,
जैसे वक्त रुका हो, अब न सरकता है,
आखों के दरमियाँ, अब बस दुआ है,
बाकी अब कुछ नहीं, अब बस खुदा है,

अब न तुलुखुशवार है, किसी से ज़माने में,
सब मसरूफ हैं, किसी-न-किसी फ़साने में,
न अब किसी से मिलते, यूँ अब ज़माने में,
बस दुआ सबके लिए, करते इसी बहाने में,

                                                       ------- बेतखल्लुस



.

फर्क केसा केसा ..........


सभी इंसान हैं
मागर फर्क
सिर्फ इतना है ॥
कुछ जख्म देते हैं
कुछ जख्म भरते हैं ।
हम सफ़र सभी हैं
लेकिन फर्क
सिर्फ इतना है
कुछ साथ देते हैं
कुछ साथ छोड़ जाते हैं ....
प्यार सभी करते हैं
लेकिन फर्क सिर्फ इतना है
कुछ जान देते हैं
कुछ जान ले लेते हैं ।
दोस्ती सभी करते हैं
लेकिन फर्क सिर्फ इतना है
कुछ लोग निभाते हैं
कुछ लोग आजमाते हैं
और कुछ लोग यूँही
मंझधार में छोड़ जाते हैं ......
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

नदी की धारा मत मोड़ो हे ! ये सैलाब न ले डूबे


नदी की धारा मत मोड़ो हे !
ये सैलाब न ले डूबे
बहुत तेज धारा है इसकी
नहीं संभलने वाली
हैं गरीब भूखे किश्ती में
करो नहीं मनमानी !!
———————-
83286-anna-hazare
अरे भागीरथ के गुण गाओ
जिसने इसे उतारा
बड़ी पुन्य पावन ये धारा
सदियों से है तारा
श्वेत हंस सी -माँ-शारद सी
ईमाँ-धर्म ये न्यारा
————————-
धारा ! -जाति धर्म न बाँटो
सूप सुभाय ले छांटो
अच्छा गुण – जो काम में आये
जन हित का हो हर मन भाये
297750_109011752535774_100002808480456_48658_2157637_n
——————————-
तेरी कश्ती मेरी कश्ती
कल के युवा जवान की कश्ती
सेना और किसान की कश्ती
भारत के हर-जन की कश्ती
डूब न जाएँ -कुटिल चाल से तेरी
नहीं बजा रन-भेरी
———————————-
माना तू है बड़ा खिलाडी
और बड़ा तैराक !
इनमे कितने गांधी -शास्त्री
भगत सिंह-आजाद !!
——————————–
जिनकी एक जुबान हिलने से
क्रूर भंवर रुक जाए
कदम ताल गर चलें मिलाये
ये धरती थर्राए !!
—————————–
इससे पहले घेर तुझे लें
सौ -सौ छोटे नाविक
अरे जगा ले मृतक -ह्रदय को
हमराही हो -संग-मुसाफिर !!
———————————-
क्या जमीर हे मारा तुम्हारा
देश -भेष कुछ नहीं विचारा
उस दधीचि की हड्डी से हे !
थोडा नजर मिलाओ
वज्र से जो तुम ना टूटे तो
मोड़ो धारा -या बह जाओ !!
———————————
सभी मित्रो को बधाई और हार्दिक शुभ कामनाये ..अपना सब का साथ हमेशा यों ही बना रहे ......

शुक्ल भ्रमर ५
जल पी बी २६.८.२०११
११.५० मध्याह्न

यूँ जिस्म को, छोड़ते हुए, किसी की रूह को देखा है,

Written By Pappu Parihar Bundelkhandi on शनिवार, 27 अगस्त 2011 | 12:53 pm

अब तो दिल बैठा जाता है,
तेरे बिना न रहा जाता है,
तू जल्दी से चली आ रे,
नहीं तो रुखसत हुआ रे,

बद्खुलूसवार हुकुम सुना तो दिया,
तामीर करे न करे, ये बता तो दिया,

अह्सासे-हुज़ुरियत का इन्तखाब,
बज्में खायियत की जिन्दगी न थी,
उस रूह न निकली हर नज़्म,
तेरी नजरियत की जिन्दगी न थी,

इन मह्ताबों से, मरकजों की खातिर,
इन फब्तीनों से, नज़रनूरों की खातिर,

रूह तो कब की चली गयी,
जिस्म अभी पड़ा है,
न टटोल उसे इस तरह,
क्यों अभी खड़ा है,

यूँ जिस्म को, छोड़ते हुए,
किसी की रूह को देखा है,
झटका-सा लगते हुए,
रोमा-रोमा कांपते देखा है,

ये मोहब्बत है की फ़ना हो जाती है,
इज्जत की खातिर,
न सोचती न समझती है, मर जाती है,
लाज की खातिर,

कशमकश की जिन्दगी में,
इसकी सुनूँ की, उसकी सुनूँ,
दिल की दिल में रहने दूँ,
या सारे जहाँ से कह दूँ,

मजबूर दिल का क्या करें,
कदम अपने-आप उधर चलें,
रोकने से अब वो क्या रुकें,
सर-ए-कलम की परवाह न करें,

इख्तियाले हुश्न,
न ये तेरा मतला,
तेरे पैमाने की,
पैमाईश से गुज़र सका,

मशहूर होते-होते,
दिन गुज़र गए,
तेरी नज़र से,
न गुज़र सका,

.




इक पेड़ की हँसी

Written By नीरज द्विवेदी on शुक्रवार, 26 अगस्त 2011 | 10:55 pm





छोटी सी चोट पर ही, लोग रोया करते हैं बहुत यूँ ही,
दूसरे का हक मरकर भी, खुश रहा करते हैं बहुत यूँ ही,
हम, सबको, अपना सब कुछ, देने से ही नहीं अघाते,
लोगों से जख्म पाने पर भी, हँसा करते हैं बहुत यूँ ही॥

चोट हो बच्चों के पत्थर की फल के लिए, तब तो हम,
उनकी आँखों में ख़ुशी देखकर, हँसा करते हैं बहुत यूँ ही,
गर हो जख्म लालची मनुष्य... इक पेड़ की हँसी (Complete)


My Blog: Life is Just a Life

राजीव जी के भ्रस्टाचार मुक्त भारत के सपने को उनकी पार्टी ने ही चकनाचूर किया


देश के युवराज राहुल गांधी ने आज देश की संसद में पहली बार भ्रष्टाचार के इतने संगीन मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी ..उन्होंने चिंता व्यक्त की के लोकपाल भी भ्रष्ट हो सकता है .सही है मानवीय स्वभाव है लेकिन किसी भी लोकपाल को हटाने की प्रक्रिया भी तय कर लेना चाहिए ...राहुल जी शायद जानते होंगे के उनके वालिद और देश के दिल की धडकन आदरणीय राजीव गान्धी एक मात्र ऐसे नेता थे जो भ्रष्टाचार के दुश्मन थे और उन्होंने हर हाल में भ्रष्टाचार खत्म करने का संकल्प लिया ....सार्वजनिक रूप से भ्रष्टाचार की बात स्वीकारी इसे खत्म करने के प्रयास किये लेकिन अफ़सोस उनकी खोफ्नाक और दर्दनाक हत्या के बाद देश में वोह लोग शासन में आये जो राजीव जी के हत्यारों की फ़ाइल उलझाकर बेठे थे जिन्होंने राजिव जी की विधवा सोनिया गाँधी को अलग थलग कर उनका अपमान किया था और लगातार अपमान करते रहे थे .....वही लोग प्रधानमन्त्री गृह मंत्री बने और फिर राजीव जी की हत्या की जांच के नाम पर तमाशे किये गये लेकिन राजीव जी की भ्रष्टाचार विरोधी मुहीम को आगे बढ़ाने की जगह सांसदों को रिश्वत देकर विश्वास मत प्राप्त किया पकड़े गए तो फिर उनके कपिल सिब्बल ने उनकी ऐसी पेरवी की के वोह भी उनकी टीम के हिस्सा बन गए उस वक्त आज के प्रधानमन्त्री सांसदों को रिश्वत देकर विश्वास मत प्राप्त करे वाले प्रधानमन्त्री के नजदीकी थे और विदेशी एजेंसियों को देश में बुलाकर देश में आंतरिक मूल्य वृद्धि करवा रहे थे ..आज जो प्रधानमन्त्री हैं उन्होंने भी राजीव जी के सपनों को चकनाचूर किया और संसद में नोटों के प्रदर्शन के बाद अल्पमत में आने पर भी जिस तरह से पिछली बार उन्होंने विश्वासमत हांसिल किया एक कलंक है ....यह सब राजीव जी की छवि को खत्म करने का एक प्रयास था जो लोग राजीव जी के दुश्मन और भ्रष्टाचार के पक्षधर थे आज वही सब सोनिया के खास दरबारी है देश के मुखिया है ..संसद में वोह लोग देश की गरीबी ..कालाबाजारी ..भ्रष्टाचार से त्रस्त लोगों का मजाक उड़ा कर आप मुंह मिया मिट्ठू बन कर कहते हैं देश की अर्थव्यवस्था उन्होंने सुधारी है देश में बीस रूपये का पेट्रोल ६५ रूपये और गेस महंगी है कपड़े से लेकर सभी खाने पीने की वस्तुएं दवाये महंगे दामों पर कई गुना अधिक कीमते बढ़कर बेचीं जा रही है वायदा व्यापार से जनता दुखी है सोना चांदी आसमां पर है जनता में महंगाई से त्राहि त्राहि है और जनाब प्रधानमन्त्री संसद में कहते है में ईमानदार हूँ मेने देश को अर्थव्यवस्था दी है आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमां पर पहुंचा कर कोनसी अर्थव्यवस्था की बात की जाती है में तो समझ नहीं पाया .ऐ राजा और कोमन वेल्थ घोटाले के बाद प्रधानमन्त्री किस तरह से बेदाग़ है जनता के किसी भी आदमी के समझ में नहीं आया लेकिन एक बात जनता समझ गयी है के चोर चोर मोसेरे भाई है और कोंग्रेस हो या भाजपा सभी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर इसे बनाये रखना चाहते है और तरह तरह के बहाने ढूंढ़ रहे हैं राहुल गाँधी भी इस चंडाल चोकड़ी के शिकार हो गये हैं देश में एक टी ऍन शेषन थे जिन्होंने ने देश को निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था दी थी लेकिन बाद में उनके पर कतरने के लिए कोंग्रेस सरकार ने चुनाव आयुक्त का एकाधिकार खत्म कर तीन चुनाव आयुक्त कर दिए थे और तभी से चुनाव व्यवस्था छिन्न भिन्न है राजनीतिक दलों की आंतरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था खत्म है और इनकी मनमानी है ......देश की फोज देश में हो रहे भ्रष्टाचार और अत्याचार से त्रस्त थी फोज के मुखिया ने प्रधानमन्त्री से जनहित में आपत्ति किया जता दी फोज के मुखिया विखंडित कर दिए गए थल , जल और नभ के फोजी इंचार्ज अलग अलग बनाकर सरकार ने राहत की सांस ली ..अब सरकार अन्ना के मामले को भी मजाक में लेकर इसे हास्यास्पद बना रही है लेकिन देखते हैं अन्ना की आंधी कोंग्रेस को कहां बहा कर ले जायेगी इसका अंदाजा भी राहुल गाँधी को होना चाहिए और उन्हें कोंग्रेस को इस चंडाल भ्रष्ट चोकड़ी से मुक्त करा कर कोंग्रेस को फिर से आज़ाद कराना चाहिए ताकि उसके दाग मिट सकें .....अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

एक भाई ने अपनी बहन को ही अपनी हवस का शिकार बना डाला

बाड़मेर में एक भाई ने अपनी बहन को ही अपनी हवस का शिकार बना डाला इस कलियुगी भाई ने करीब डेढ़ साल पहले उसकी अपने मोबाइल से क्लिप बना दी और उसके बाद वो उसको डरा-डरा कर अपनी हवस मिटाता रहा। बाड़मेर पुलिस के सामने यह लड़की डेढ़ साल बाद जब यह शिकायत लेकर पहुंची तो पुलिस अधिकारी भी सिहर उठे।
     घटना बाड़मेर के बिंजराद थाना क्षेत्र की हैं जहा रहने वाली एक पंद्रह साल की लड़की ने यह मामला दर्ज करवाया हैं। इस घटना के बाद लड़की के माँ बाप और परिजऩ पूरी तरह से सदमे हैं। लड़की के पिता के अनुसार लड़की की उम्र पंद्रह साल हैं और जहा पर उसकी शादी की हुई थी वहा पर लड़के वालो तक यह मोबाइल क्लिप पहुँच गई है, उधर लड़की की जि़न्दगी बर्बाद हो गई हैं अब वे क्या करे कुछ समझ नहीं आ रहा हैं। उन्होने कहा कि इस लड़के ने हमारी बेटी कि जिन्दगी खऱाब कर दी है अब इससे दोबारा शादी कोन करेगा, इसलिए लड़के को कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए।

शुष्क वस्ति - योग क्रिया

शुष्क वस्ति - योग क्रिया
योगिराज बलराम शरण जी द्वारा
इस क्रिया के लाभ - 
१. वात, पित, कफ इन तीनो का नियंत्रण |
२. पाचन क्रिया में वृद्धि |
३. शारीरिक पीड़ा नहीं होगी |
४. कोई रोग नहीं होगा |
५. पानी में किसी भी स्तिथि में नहीं डूबेगा |



Written By आपका अख्तर खान अकेला on गुरुवार, 25 अगस्त 2011 | 9:29 pm

स्वामी अग्निवेश आखिर गद्दार निकले .....कोंग्रेस और भाजपा भी चोर चोर मोसेरे भाई साबित हुए

जी हाँ स्वामी अग्निवेश ने आज तो सरकार की दलाली कर साबित कर दिया की वोह देश के सवा सो करोड़ लोगों के गद्दार हैं .कभी अन्ना के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ अंतिम वक्त तक लड़ने की बात करने वाले स्वामी अग्निवेश आज अचानक बदल गए उन्होंने टी वी को दिए गए अपने बयान में साफ कहा के अन्ना को प्रधानमन्त्री और संसद की बात मान कर अनशन वापस ले लेना चाहिए और फिर थोड़ा आराम कर वापस से आन्दोलन करें स्वामी अग्निवेश और टी वी चेनल की साफ़ सरकार से सांठ गाँठ नज़र आ रही थी ....आज संसद में कोंग्रेस और भाजपा ने एक साथ होकर यह साबित किया है के उन्हें जनता और जनता की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं जनता को वोह जूते की नोक पर रख कर जेसा चाहें व्यवहार करते हैं और को उनका कुछ बिगाड़ भी नहीं सकता है .....आज संसद में चालीस सालों से भी अधिक वक्त से लोकपाल बिल चाकर काटता रहा सेकड़ों विधेयक इस दोरान पेश हुए और पारित हुए कई सांसद आये कई सांसद आकर चले गए लेकिन नहीं आये तो बस भ्रष्टाचार को मिटाने वाले सांसद नहीं आये कोंग्रेस..भाजपा..सपा.बसपा.वगेरा वगेरा जो भी पार्टियां थीं सभी सत्ता में रहीं लेकिन जनता के बारे में जनता के अधिकारों के बारे में किसी भी पार्टी ने नहीं सोचा एक आम आदमी अन्ना जब सडक पर उतरे तो पहले चालीस से धूल चाट रहा विधेयक बाहर निकाला गया सोचा लोगों को साम्प्रदायिकता , हिन्दू मुस्लिम कोंग्रेस भाजपा के नाम पर लड़ाएँगे और इस बिल को टाल देंगे उन्हें पता नहीं था के अन्ना आम आदमी नहीं आंधी हैं वोह ना बिकेंगे ना झुकेंगे और उनकी टीम के एक दो लोग स्वामी अग्निवेश निकल भी जाए तो भी उनके साथ मजबूत कंधे हैं ..सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के पहले उन्हें डराया ,धमकाया उन्हें ब्लेकमेल किया अपनी सारी सरकारी ताकत झोंक कर भारी जान समर्थन के आगे सरकार झुकी लेकिन बड़े आराम के साथ प्रधानमन्त्री और कपिल सिब्बल ने अन्ना का मजाक उदय कोंग्रेस ने उन्हें भ्रष्ट बताया .भाजपा ने उनके बिल का समर्थन नहीं किया चर्चा तक नहीं की और दस दिन बाद सरकार और विपक्ष भाजपा कोंग्रेस अन्ना से कहती है के आपके बिल की भी सांसद में चर्चा होगी अनशन तोड़ दो हमे आपकी फ़िक्र है तो जनाब कोंग्रेस भाजपा के चेहरे इस लोकतंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में साफ़ हो गये हैं कोंग्रेस और भाजपा के दल्ले खूब आये खुद शिवसेना के बालठाकरे के पेट में दर्द हुआ अन्ना टीम को त्द्राया गया धमकाया गया डांटा गया वायदा किया और फिर मुकर गये .कुल मिला कर कोंग्रेस और भाजपा खुले तोर पर भ्रष्टाचार के साथ खड़ी दिखी एक जिद सांसद में कार्यवाही होगी स्टेंडिंग कमेटी देखेगी तो जनाब स्टेंडिंग कमेटी का कहां विधिक प्रावधान हैं क्यों सांसद में सरकार बिल नहीं लायी क्यूँ चर्चा नहीं की क्यूँ बिल को टाल कर स्टेंडिंग कमेटी को तरका दिया गया किया देश की जनता और अन्ना इसकों नहीं समझते हैं ...में खुद सरकार की आज की चाल से चिंतित था मेरा ब्लड प्रेशर ठंढा था में सोचता था के देश का भ्रष्टाचार जीत गया और इस की लड़ाई में लगे सवा सो करोड़ लोग हार गये लेकिन वाह अन्ना वाह नो बिका ना झुका ना फुसलाने में आया सरकार की काली करतूतों को सामने खोल कर रख दिया और अड़ गया कुछ ना कुछ जनता के लियें लेने के लियें अब भाजपा और कोंग्रेस और दुसरे दल तो जनता के सामने भ्रष्टाचार के हिमायती और लोकतंत्र के हत्यारे साबित हो गए है देखे आगे क्या होता है सरकार भ्रष्ट लोगों को बचाने के लिए भाजपा से सांठ गाँठ कर जनता और आन्दोलन कारियों का कितना दमन करती है ........अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

स्वामी अग्निवेश आखिर गद्दार निकले .....कोंग्रेस और भाजपा भी चोर चोर मोसेरे भाई साबित हुए

स्वामी अग्निवेश आखिर गद्दार निकले .....कोंग्रेस और भाजपा भी चोर चोर मोसेरे भाई साबित हुए

जी हाँ स्वामी अग्निवेश ने आज तो सरकार की दलाली कर साबित कर दिया की वोह देश के सवा सो करोड़ लोगों के गद्दार हैं .कभी अन्ना के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ अंतिम वक्त तक लड़ने की बात करने वाले स्वामी अग्निवेश आज अचानक बदल गए उन्होंने टी वी को दिए गए अपने बयान में साफ कहा के अन्ना को प्रधानमन्त्री और संसद की बात मान कर अनशन वापस ले लेना चाहिए और फिर थोड़ा आराम कर वापस से आन्दोलन करें स्वामी अग्निवेश और टी वी चेनल की साफ़ सरकार से सांठ गाँठ नज़र आ रही थी ....आज संसद में कोंग्रेस और भाजपा ने एक साथ होकर यह साबित किया है के उन्हें जनता और जनता की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं जनता को वोह जूते की नोक पर रख कर जेसा चाहें व्यवहार करते हैं और को उनका कुछ बिगाड़ भी नहीं सकता है .....आज संसद में चालीस सालों से भी अधिक वक्त से लोकपाल बिल चाकर काटता रहा सेकड़ों विधेयक इस दोरान पेश हुए और पारित हुए कई सांसद आये कई सांसद आकर चले गए लेकिन नहीं आये तो बस भ्रष्टाचार को मिटाने वाले सांसद नहीं आये कोंग्रेस..भाजपा..सपा.बसपा.वगेरा वगेरा जो भी पार्टियां थीं सभी सत्ता में रहीं लेकिन जनता के बारे में जनता के अधिकारों के बारे में किसी भी पार्टी ने नहीं सोचा एक आम आदमी अन्ना जब सडक पर उतरे तो पहले चालीस से धूल चाट रहा विधेयक बाहर निकाला गया सोचा लोगों को साम्प्रदायिकता , हिन्दू मुस्लिम कोंग्रेस भाजपा के नाम पर लड़ाएँगे और इस बिल को टाल देंगे उन्हें पता नहीं था के अन्ना आम आदमी नहीं आंधी हैं वोह ना बिकेंगे ना झुकेंगे और उनकी टीम के एक दो लोग स्वामी अग्निवेश निकल भी जाए तो भी उनके साथ मजबूत कंधे हैं ..सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के पहले उन्हें डराया ,धमकाया उन्हें ब्लेकमेल किया अपनी सारी सरकारी ताकत झोंक कर भारी जान समर्थन के आगे सरकार झुकी लेकिन बड़े आराम के साथ प्रधानमन्त्री और कपिल सिब्बल ने अन्ना का मजाक उदय कोंग्रेस ने उन्हें भ्रष्ट बताया .भाजपा ने उनके बिल का समर्थन नहीं किया चर्चा तक नहीं की और दस दिन बाद सरकार और विपक्ष भाजपा कोंग्रेस अन्ना से कहती है के आपके बिल की भी सांसद में चर्चा होगी अनशन तोड़ दो हमे आपकी फ़िक्र है तो जनाब कोंग्रेस भाजपा के चेहरे इस लोकतंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में साफ़ हो गये हैं कोंग्रेस और भाजपा के दल्ले खूब आये खुद शिवसेना के बालठाकरे के पेट में दर्द हुआ अन्ना टीम को त्द्राया गया धमकाया गया डांटा गया वायदा किया और फिर मुकर गये .कुल मिला कर कोंग्रेस और भाजपा खुले तोर पर भ्रष्टाचार के साथ खड़ी दिखी एक जिद सांसद में कार्यवाही होगी स्टेंडिंग कमेटी देखेगी तो जनाब स्टेंडिंग कमेटी का कहां विधिक प्रावधान हैं क्यों सांसद में सरकार बिल नहीं लायी क्यूँ चर्चा नहीं की क्यूँ बिल को टाल कर स्टेंडिंग कमेटी को तरका दिया गया किया देश की जनता और अन्ना इसकों नहीं समझते हैं ...में खुद सरकार की आज की चाल से चिंतित था मेरा ब्लड प्रेशर ठंढा था में सोचता था के देश का भ्रष्टाचार जीत गया और इस की लड़ाई में लगे सवा सो करोड़ लोग हार गये लेकिन वाह अन्ना वाह नो बिका ना झुका ना फुसलाने में आया सरकार की काली करतूतों को सामने खोल कर रख दिया और अड़ गया कुछ ना कुछ जनता के लियें लेने के लियें अब भाजपा और कोंग्रेस और दुसरे दल तो जनता के सामने भ्रष्टाचार के हिमायती और लोकतंत्र के हत्यारे साबित हो गए है देखे आगे क्या होता है सरकार भ्रष्ट लोगों को बचाने के लिए भाजपा से सांठ गाँठ कर जनता और आन्दोलन कारियों का कितना दमन करती है ........अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

भिक्षा - सतयुग हो या कलयुग - हमेशा काम देती है

भिक्षा - सतयुग हो या कलयुग - हमेशा काम देती है |
सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग में भिक्षा केवल ब्रह्मचारी मांगते थे |

आज कलयुग में :-
१. चौराहे पर गाडी खड़ी होते ही भिक्षा मांगते बच्चे |
२. ट्रेन में भिक्षा मांगते बच्चे |
३. प्लेटफार्म पर भिक्षा मांगते बच्चे |
४. स्कूल से एक कार्ड लाकर उसपर लिखकर भिक्षा मांगते स्कूली बच्चे |

चलो लोग कहते हैं की आज के बच्चे चौराहे, ट्रेन, प्लेटफार्म पर बच्चा है तो कोई बात नहीं कोई मजबूरी होगी | किन्तु एक बच्चा जो अच्छे स्कूल में जाता है, उसके घरवाले उसकी फीस बड़ी भरते हैं, की उसे समय में अध्ययन करने का, किन्तु वही बच्चा अपने अध्ययन के समय में से एक कार्ड लेकर भिक्षा मांगता है | अब अगर इनको प्राचीन गुरुकुल शिक्षा पद्धति को अपनाना है तो फिर सीधे क्यों नहीं अपना लेते, क्यों इस तरह फीस भी लेते हैं और फिर बच्चों से भिक्षा भी मंगवाते हैं | अब उसके परिवार ने तो फीस भर दी है | तो उसका पड़ने का समय ख़राब और उसकी भिक्षा मांगने की मानसिकता को उसमे क्यों पैदा कर रहे हैं | यह बात समझ नहीं आती है | इसका तो ठीक-ठीक मतलब यही है की भिक्षा मांगना ही किसी ब्रह्मचारी का पहला काम है | इस भिक्षा मांगने के नियम में जरूर कोई बात, जिससे उसका विकास होता है, और यह बात प्राचीन गुरुकुल के आचार्य जानते थे की विद्या जो है वह भिक्षा मांगकर ही सीखी जाती है, और विद्या बिना पैसे दिए ही सीखी जाती है | बिना पैसे देकर ली गयी विद्या ही अच्छी तरह से कोई सीख सकता है और लग्न से सीखता है | जो विद्या पैसे देकर सीखी जाती है वह विद्या व्यक्ति के विकास को पूरा नहीं कर पाती है, और सिखाने वाला भी अगर पैसे लेकर सिखाता है, तो उसका भी विकास रुक जाता है | इसलिए प्राचीन काल में आचार्य और गुरुकुल का सारा भर वहाँ के लोगों के ऊपर होता था, और वह भी केवल भिक्षा ही देते थे, और भिक्षा में केवल अन्न ही देते थे, कोई सोना-चाँदी नहीं देते थे | तो उस विद्या को पाकर विद्यार्थी पूर्ण विकास करता था | किन्तु समय के परिवर्तन के साथ और अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले इसके लिए लोगों ने इसे खरीदना शुरू कर दिया और फिर विद्या भी बिकने लगी | किन्तु ज्ञान फिर भी नहीं बिकता है | जानकारी बेचीं और खरीदी जा सकती है किन्तु ज्ञान नहीं | और कालांतर में तो आध्यात्मिक विद्या भी बिकने लगी और लोग उसे भी व्यापर और व्यवसाय के रूप में लेने लगे और उसका उपयोग वह अपने जीवन की जरूरतों को पूरा करने के लिए करने लगे | किन्तु फिर भी वह नहीं बिका अगर अध्यात्मिक ज्ञान भी इस तरह से बिक जाता तो कितने राजा-महाराजा, सेठ साहूकार, धनाड्य लोग भी आज उस आध्यात्मिक ज्ञान को प्राप्त कर आत्मा को पा चुके होते | किन्तु जब कोई सोना-चाँदी, रुपया जैसी वस्तु में जीवन देखने लग जाता है और उसी के सहारे जीवन की हर उपलब्धि को पाना चाहता है, तो फिर वह एक साधारण से मानव में आत्म को नहीं देख पाता है और अपने आत्म के ज्ञान से चूक जाता है | यही बात हमेशा से ज्ञान और अज्ञान के बीच रही है | ज्ञान हमेशा से सेवा से पाया जाता है | बिना सेवा के ज्ञान नहीं मिलता है | जिसने भी सेवा से ज्ञान पाया है वही ज्ञान उसका सफल हुआ है |
 
.

रामलीला मैंदान में रावण दहन ~ All India Bloggers' Association
ऑल इंडिया ब्लॉगर्स एसोसियेशन

रामलीला मैंदान में रावण दहन


धधक रहा मनस पटल धधक रहा ये ज्वार हैं
सूत्रपात हैं रक्त क्रांति का भभक रहा विचार हैं
लोटने लगे हैं काल सर्प, छातियों पे द्रोहियों के
छुपा रहा मलीन मुख, खड़ा स्तब्ध भ्रष्टाचार हैं

कदम कदम हैं चल रहे नवीन स्वर हैं मिल रहे
लोकपथ पे क्रांति के.. असंख्य चिराग जल रहे
आंधियां रुकेंगी क्या. मिटाए मिट सकेंगी क्या
नहीं ये भीड़ तमाशाइ की,.. स्पष्ट जनाधार हैं
छुपा रहा मलीन मुख, खड़ा स्तब्ध भ्रष्टाचार हैं

दो दो हाथ कर जरा, कर न तू भी बात कर जरा
ढहती इस दीवार पर जम के तूभी लात धर जरा
वक्त हैं यही संभल, क्रूर विषधरों के फन कुचल
हैं तू ही सुर्ख़ियों में पत्र की, तेरा ही समाचार हैं
छुपा रहा मलीन मुख, खड़ा स्तब्ध भ्रष्टाचार हैं

उठा धनुष उठा खड्ग न दिग्भ्रमित हो वार कर
सशश्त्र लोकपाल से..... सुसज्ज हो संहार कर
यही समय हैं रक्त मांगती..खड़ी कपाल मर्दनी
घृणित ग्रसित व्यवस्था पर ये. आखरी प्रहार हैं
छुपा रहा मलीन मुख, खड़ा स्तब्ध भ्रष्टाचार हैं

मिट न पायेगा तिमिर अगर जो सूर्य ढल गया
फिर न हाथ आएगा. अगर समय जो टल गया
संयुक्त हो प्रबुद्ध हो तू.... आज मरण युद्ध को
तप्त दिन गुजर गया निशा के बचे प्रहर चार हैं
छुपा रहा मलीन मुख, खड़ा स्तब्ध भ्रष्टाचार हैं

अन्ना हजारे के साथ क्या क्या कर सकती है सरकार





ये निर्दयी सरकार अन्ना हजारे को भी बाबा रामदेव की तरह उठवा लेगी और टीम अन्ना के सदस्यों को कर लेगी गिरफ्तार
पता नहीं ऐसा विचार मुझे  बार बार क्यूँ आ रहा है

देखा आपने कल के सर्वदलीय बैठक का कवरेज
कैसे ये निकम्मे निर्लज्ज नेता सूखे मेवों का भोज उड़ा रहे  थे.

भ्रष्टाचारी भारत में -रह लो ?? नहीं -कहेंगे-भारत छोडो …


भ्रष्टाचारी भारत में -रह लो ??
नहीं -कहेंगे-भारत छोडो …
गोरे होते तो कह देते
“काले” हो तुम-भाई -मेरे
शर्म हमें -ये “नारा’ देते
0818-anna-hazare-india_full_600
———————-
ये आन्दोलन बहुत बड़ा है
खून –पसीना- सभी लगा है !
बहने -भाई -बाप तुम्हारा
बेटा देखो साथ खड़ा है !!
—————————
हम चाहें तो गरजें बरसें
आंधी तूफाँ कहर दिखाएँ
चपला सी गिर राख बनायें
इतने महल जो भूखे रख के
तुमने बासठ साल बनाये
मिनट में सारे ढहा दिखाएँ
शांत सिन्धु लहराते आयें
और सुनामी हम बन जाएँ !!
—————————-
कदम -ताल में शक्ति हमारे
कांपें भू -वो जोश दिखाएँ
पांच पञ्च के हम सब प्यारे
न्याय अहिंसा के मतवारे
लाठी गोली की आदत तो
वीर शहीदों ने सिखलाये
—————————
भूखे अनशन पर हम बैठे
लूटे जो -कुछ उसे बचाएं ??
गाँधी -अन्ना भूखे बैठे
भ्रष्टाचारी किस-मिस खाएं
जो ईमान की बात भी कर दे
छलनी गोली से हो जाए
——————————–
हे रक्षक ना भक्षक बन जा
गेहूं के संग घुन पिस जाएँ
क्या चाहे तू यज्ञं कराएं
तक्षक -नाग-सांप जल जाएँ
————————————
हमसे भाई “भेद ” रखो ना
घर में रह के “सेंध” करो ना
जिस थाली में खाना खाते
काहे छेद उसी को डाले
—————————
कल बीबी बेलन ले दौड़े
बेटा -गला दबाने दौड़े
दर्पण देख के तुझको रोये
तू क्या चाहे ?? ऐसा होए ??
————————————–
शुक्ल भ्रमर ५
२५.०८.२०११ जल पी बी

भ्रष्टाचार

Written By Pallavi saxena on बुधवार, 24 अगस्त 2011 | 8:01 pm

आज जहाँ देखो वहाँ एक ही नारा है भ्रष्टाचार मिटाना है । आज हर कोई बच्चा हो या बूढ़ा अन्ना हज़ारे हम तुम्हारे साथ है का नारा लगता हुआ ही मिलता है, न सिर्फ सड़कों पर बल्कि facebook ,twitter सभी जगह बस एक ही बात है जन लोक पाल बिल के समर्थन मे सभी का वोट है। जो लोग इंडिया से बहार हैं। वह facebook  और टिवीटर जैसे websites पर जाकर अपने प्रोफ़ाइल में अपने फोटो के ऊपर समर्थन का चित्र चिपका का कर खुद को इस लड़ाई के समर्थन में शामिल कर रहे हैं जिन में से मैं भी एक हूँ। आज कल पूरे भारत में बस एक ही हवा है अन्न हम तुम्हारे साथ है जो लोग लोक पल बिल के बारे में कुछ भी नहीं जानते वो भी आज की तारिक में अन्न के साथ है क्यूँ ? ज़हीर सी बात है क्यूंकि अब तो वो भी भ्रष्टाचार से बुरी तरह तंग आ चूके हैं। और किसी भी हालत में इस भ्रष्टाचार रूप से राखशस से छुटकारा पाना चाहते हैं।  कुछ लोग ऐसे भी होंगे जिन्हें  शायद इस बात से कोई फेर्क ना पड़ता हो मगर आज की तारीख का यह सब से गरम मसला है इसलिए जैसे लोग किसी की हाँ में हाँ मिलते हैं वैसे ही कुछ लोग सुर में सुर मिला रहे हैं। 
इस विषय पर बहुत ने बहुत कुछ लिखा और अब भी लोग लिख ही रहे हैं । तो मैंने भी सोचा की चलो में भी इस विषय में कुछ लिखने का प्रयास करती हूँ वैसे मेरे पास इस विषय में लिखने को ज्यादा कुछ है नहीं क्यूंकि जो कुछ भी है वो सभी मीडिया ने पहले ही गा रखा है। वैसे भी देखा जाये तो जब कभी कोई मुदा अपने पूरे ज़ोर पर हो तो उस पर लिखने का कोई मतलब नहीं निकलता मुझे तो ऐसा लगता है, जो सब कहा रहे हैं वो ही मैं भी बोल रही हूँ उस में क्या नया है। बात तो तब बनती है जब आप उस विषय पर कुछ लीग से हट कर कहो या लिखो मगर आज कल लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के इतने सारे साधन हो गये हैं कि जब तक आप कुछ अलग सोचो तब तक तो वो बात किसी न किसी और माध्यम से लोगों तक पहुँच ही चुकी होती है और उसका सब से बड़ा और प्रभाव शाली माध्यम है मीडिया, और उस में भी खास कर सारे news chennel जो राई का पहाड़ बनने में उस्ताद होते हैं । 
कहा जा रहा है की अन्न गांधी का दूसरा जन्म है ,और उन्ही की रहा पर चलने वाले गांधी वादी नेता है जो अहिंसा में विशवास रखते हैं । इसलिए अनशन पर बैठे हैं। आज कि तारीख में अन्ना आम आदमी कि आवाज हैं। और हमरे देश को आज गांधी वादी तेवरों कि ही जरूरत है। 74 वर्षीय इंसान आज भूखा प्यासा देश के लिए लड़ रहा है।  देश वसीयौन के लिए लड़ रहा है।  उनको न्याय मिल सके इस लिए लड़ रहा है। मुझे तो याद नहीं की मैं आखिर बार कौन सा ऐसा दिन था।  जब पूर्णरूप से भूखी रही होंगी मगर आज उनको 8दिन हो गये बिना कुछ खाये पिये वकाइन "बंदे में है दम वंदे मातरम" उनके इस प्रयास के लिए उनको शत-शत प्रणाम की आज उन की वजह से देश को आवाज मिली देश के नौजवान पीढ़ी को भी यह एहसास हुआ की अपने देश के प्रति उनका भी कोई कर्तव्य है।  मगर मेरी समझ में यह नहीं आता की आज लोग कह रहे हैं की अन्न देश की आवाज हैं सही है आज की तारीख में यही सच है मगर देश की आवाज बूढ़ी क्यूँ है।  भले ही आज उस आवाज से नयी और जवां आवाज़े जुड़ कर उस से एक मजबूत आवाज बनना रही हों मगर सवाल यह है की यह आवाज भी उठी तो इतनी देर बाद क्यूँ? पहले किसी और को समझ नहीं आई यह बात क्यूँ खुद अन्ना ने गाइड नहीं किया औरों को माना के कोई भी क्रांति खुद बख़ुद नहीं आती है उसे लाना पड़ता है और लाने के लिए भी कोई चाहिए। और वही काम कर रहे हैं अन्ना इसलिए आज पूरा देश उनके समर्थन में है। मैं भी, मगर क्या शाला में अनुशासन तभी होना चाहिए जब शोर मच रहा हो, बिना शोर के अनुशान होने के कोई मायने नहीं होते हैं क्या ? और यदि होते हैं तो फिर अन्ना ने यह अनुशासन लाने में इतनी देर क्यूँ करदी की "अमर बेल रूपी भ्रष्टाचार ने विशाल नदी रूपी देश में अपनी पूरी जड़ें फाइलादी" खैर इसका मतबा यह नहीं कि मुझे इस बात से कोई  समस्या या किसी प्रकार कि कोई आपत्ति है। क्यूंकि यदि ऐसा होता तो आज में खुद अन्ना के साथ नहीं होती । मुझे तो गर्व है इस बात पर कि आखिर कोई तो आज भी इस देश में जिसे सच में देश कि चिंता है देश वासियों कि चिंता है। बस कुछ सवाल उठे थे ज़्हेन में तो सोचा के आप सब के बीच रखून बाकी तो जैसा मैंने कहा मैंने खुद भी अन्ना के साथ हूँ। इसलिए श्री रूप चंद्र जी मयक की लिखी कुछ पंक्तियाँ मुझे यहाँ लिखना ठीक लग रहा है की गीता,
 "अन्न जी को ताकत देना लोकपाल को लाने की,
 आज जरूरत जन-गण-मन के सोये भाव जगाने की "

 यहाँ मुझे एक और मशहूर लेखक दूषियंत कुमार की कुछ और पंक्तियाँ भी याद आरही है।   कुछ  इस तरह हैं। 

"सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं है,
सारी कोशिश है की यह सूरत बदलनी चाहिए ,
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सिने में सही ,
हो कहीं भी यह आग ,मगर आग जलनी चाहिए"
जय हिन्द .... 

डा. अमर कुमार जी को श्रृद्धांजलि, डा. अमर कुमार जी आज हमारे बीच नहीं हैं। मौत एक ऐसा सच है जिसे न तो झुठलाया जा सकता है और न ही बदला जा सकता है। कामयाब वही इंसान है जो एक रब का होकर जिये। डा. साहब अक्सर टिप्पणी पर मॉडरेशन लगाए जाने के विरोधी थे। इसके खि़लाफ़ वह अक्सर ही आवाज़ बुलंद किया करते थे। उनकी ख़ुशी के लिए कम से कम एक दिन सभी लोग अपने ब्लॉग से मॉडरेशन हटा लें तो उनके लिए हमारी तरफ़ से यह एक सम्मान होगा। वह एक ज्ञानी आदमी थे। उनकी टिप्पणी उनके ज्ञान का प्रमाण है। जिसे आप देख सकते हैं इस लिंक पर सारी वसुधा एक परिवार है

डा. अमर कुमार जी को श्रृद्धांजलि,
डा. अमर कुमार जी आज हमारे बीच नहीं हैं।
मौत एक ऐसा सच है जिसे न तो झुठलाया जा सकता है और न ही बदला जा सकता है। कामयाब वही इंसान है जो एक रब का होकर जिये।
डा. साहब अक्सर टिप्पणी पर मॉडरेशन लगाए जाने के विरोधी थे।
इसके खि़लाफ़ वह अक्सर ही आवाज़ बुलंद किया करते थे।
उनकी ख़ुशी के लिए कम से कम एक दिन सभी लोग अपने ब्लॉग से मॉडरेशन हटा लें तो उनके लिए हमारी तरफ़ से यह एक सम्मान होगा।
वह एक ज्ञानी आदमी थे।
उनकी टिप्पणी उनके ज्ञान का प्रमाण है।
जिसे आप देख सकते हैं इस लिंक पर  

विजेता बनने का मौका मत चूकिए




ब्लॉग पहेली -२ आ चुकी है आपके सामने .विजेता बनने का मौका मत चूकिए  .जल्दी से दीजिये सही जवाब .कहीं कोई और आगे न निकल जाएँ !
                   shikha kaushik 
                                                    
[चित्र फोटो सर्च से साभार ]

उस रोज़

उस रोज़
वो यूँ खफा हो गयी,
न जाने फिर,
कहाँ दफा हो गयी,

बहुत ढूँढा,
खूब तलाश किया,
बैठे बिठाये,
क्यों मज़ाक किया,

एक रोज़,
न जाने ऐसा लगा,
वही है,
पास मैं जाने लगा,

हवा चली,
पलके बंद हुई,
सामने से,
वह गायब हुई,

इतनी बेरुखी,
इतना गुस्सा हमपर,
कोई नहीं,
हमें ऐतबार खुदपर,

एक रोज़,
अचानक उसका आना,
यूँ रोना,
लिपटकर चले जाना,

इशारा हुआ,
गए पैगाम लेकर,
निकाह हुआ,
आये उसको लेकर,

.



senior citizens: राजनैतिक संतों की परंपरा

भारत में जब-जब सत्ता निरंकुशता की और बढ़ी है और उसके प्रति जनता का आक्रोश बढ़ा है एक राजनैतिक संत का आगमन हुआ है जिसके पीछे पूरा जन-सैलाब उमड़ पड़ा है. महात्मा गांधी से लेकर अन्ना हजारे तक यह सिलसिला चल रहा है. विनोबा भावे, लोकनायक जय प्रकाश नारायण समेत दर्जनों राजनैतिक संत पिछले छः-सात दशक में सामने आ चुके हैं. इनपर आम लोगों की प्रगाढ़ आस्था रहती है लेकिन सत्ता और पद से उन्हें सख्त विरक्ति होती है. अभी तक के अनुभव बताते हैं कि राजनैतिक संतों की यह विरक्ति अंततः उनकी उपलब्धियों पर पानी फेर देती है

senior citizens: राजनैतिक संतों की परंपरा

अन्ना न होते तो बताओ कोन लेता खबर

Written By आपका अख्तर खान अकेला on मंगलवार, 23 अगस्त 2011 | 9:04 pm


अन्ना न होते तो
बताओ कोन लेता खबर
हम भारतवासियों की ।
देश के नेता हो
चाहे हो अधिकारी
किस को थी खबर
के
हम भारतवासियों पर
क्या गुज़रती है .......अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

क्या आप तैयार है ब्लॉग पहेली -२ के लिए


क्या आप तैयार है ब्लॉग पहेली -२ के लिए ? कल को आने वाली है.सबसे पहले-सर्व शुद्ध हल देकर बन पाएंगे विजेता .एक संकेत दे रही हूँ -ब्लॉग पहेली-२ का विजेता बनेगा वही जो पढता है सभी ब्लोगर्स के बारे में ध्यान से .आप भी पढ़कर हो जाएँ तैयार.BEST OF LUCK
                                                     शिखा कौशिक 

कण्ठ इनका सुरीला है

Written By Pappu Parihar Bundelkhandi on सोमवार, 22 अगस्त 2011 | 10:57 pm




कण्ठ इनका सुरीला है,
मिसरी की डली से गीला है,
माता सरस्वती का आशीर्वाद है इनको,
बड़े बुजुर्गों का साथ है इनको,

तालीम इनकी हुई है अच्छी,
मेहनत भी इन्होने की है सच्ची,

किसी रूह की खास पहचान होती है,
दिल साफ़, मीठी जुबान होती है,

इनको तो नाद की सिद्धि हुई है,
नाभि से उठकर, कण्ठ तक वृद्धि हुई है,


.



हाँ में भ्रष्टाचार हूँ मेरे भारत महान का आज में सबसे बढ़ा शिष्टाचार हूँ ।


हाँ में भ्रष्टाचार हूँ
मेरे भारत महान का
आज में
सबसे बढ़ा शिष्टाचार हूँ ।
जहां जाइयेगा मुझे पाइयेगा
किसी भी घर , किसी भी दफ्तर
जहां भी चाहो
मुझे आवाज़ लगाओ
मुझे पाइयेगा
कहीं में कम हूँ तो कहीं ज्यादा
मेरी जड़ें इन दिनों देश के बाहुबलियों
देश के नेताओं ,,देश के पूंजीपतियों में मजबूत हो गयी है
बस थोड़ी बहुत इन दिनों मुझे अडचन हैं
एक अन्ना रोज़ हजारों अन्ना पैदा कर
मुझे डरा रहा है
लेकिन दोस्तों
बेचारे नासमझ हैं अन्ना जी
मुझे देश के प्रधानमन्त्री का वरद हस्त है
मेरे वाइरस को अन्ना के भ्रष्टाचार विरोधी दवा से बचाने के लियें
मेरे पास कपिल सिब्बल हैं दिग्विजय है चिदम्बरम हैं
संसद में नोटों की रिश्वत देने वाले अमर सिंह
बिहार का चारा खाकर जेल जाने वाले लालू यादव हैं
जी हाँ में कोई छोटी मोती चीज़ नहीं हूँ
मेरे खिलाफ जो बोलेगा
उसे ही में चोर साबित कर दूंगा
मेरा बस नहीं चला तो में ऐसे लोगों को आर एस एस का समर्थक देश का दुश्मन
घोषित करवा दूंगा
हिन्दुओं को मुस्लिम से मुस्लिम को हिन्दुओं से लडवा दूंगा
जी हाँ में भ्रस्ताचार हूँ
क्या होगा अन्ना की अन्ना गिरी से
क्या होगा लोकपाल से क्या होगा जन्लोक्पाल से
में तो में हूँ
कुछ भी कर लो अंग्रेजों की तरह लालच दूंगा
डिवाइड एंड रुल करूंगा
महंगाई और भ्रष्टाचार
कालाबाजारी ..मुनाफाखोर
मुफ्त खोर रिश्वतखोर
विदेशों में कला धन रखने वाले सभी तो मेरे साथ हैं
तो जनाब मेरी जड़ें ऐसे बरगद की तरह मजबूत है
जो अन्ना की आंधी ..अन्ना के गाँधी से ना तो हिलेंगी ना गिरेंगी
क्योंकि में भ्रस्ताचार हूँ ..............अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

Founder

Founder
Saleem Khan