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सुधींद्र गोढ़ प्रेस फोटोग्राफर बखूबी निभाते थे ,,

Written By आपका अख्तर खान अकेला on रविवार, 19 मई 2019 | 6:45 am

अभी हाल ही में चुनावी रैली के दौरान ,,कांग्रेस के राष्ट्रिय अध्यक्ष राहुलगांधी के साथ प्रेस फोटोग्राफर के रूप में रफ़ीक़ पठान साथ थे ,,,राहुल गांधी ने रफ़ीक़ पठान को आवाज़ देकर पोज़ बनाकर एक फोटो खेंचने के लिए कहा ,तो मुझे अचानक पुरानी प्रेस फोटोग्राफरी का दौर याद आ गया जब रंगीन फोटो ग्राफ़ी नहीं हुआ करती थी ,महंगे ज़ूम वाले कैमरे डिजिटल नहीं हुआ करते थे ,एक रील जिसे वी आई पी फोटो होने पर बीच में से काटकर हाथों हाथ ,फोटो धोकर देना ही फोटोग्राफर की कला हुआ करती थी ,इस और इस कला को मन में मंदिर की पूजा की तरह पुजारी बनकर ,,सुधींद्र गोढ़ प्रेस फोटोग्राफर बखूबी निभाते थे ,,ऐसे में उनकी फोटोग्राफी की कलाकृतियां ,कलामंदिर स्टूडियो के नाम से खूब प्रसिद्ध हुई ,,सभी जानते है ,,फोटो अपने आप में बहुत कुछ कहानिये बयांन करते है ,एक फोटो अपने आप में एक खबर होता है ,आज डिजिटल ,एडिटिंग कैमरा युग में चाहे यह सब आसान हो लेकिन भागम भाग के उस पुराने दौर अख़बार की आत्मा ,अख़बार की रूह सिर्फ प्रेस फोटोग्राफर ही हुआ करते थे , जिसके इर्द गिर्द सभी खबरे ,खबरे छपवाने वाले घूमते नज़र आते है , पुराने प्रेस फोटोग्राफरों में यह विधा ,,मंदिर के पुजारी की तरह ,इस कला को पूजा की तरह जनमानस टटोल कर प्रस्तुतिकरण करने में माहिर ,,सुधींद्र गोड़ प्रमुख कहे जाते थे ,जिनका कला मंदिर ऐसे रेयरेस्ट आदिकाल की प्रेस फोटोग्राफी का रिसर्च म्यूज़ियम भी कहा जा सकता है ,बाद में इस लाइन में ओमेंद्र सक्सेना ,,पेट्रिओट स्टूडियो के नाम से आगे आये फिर पत्रिका अखबार आ जाने के बाद हाबुलाल ,,रफ़ीक़ पठान ,प्रेस फोटोग्राफर के रूप में हीरो बनकर उभरे है ,,अब डिजिटल युग है ,मोबाइल युग है ,लेकिन फोटोग्राफी की आर्ट ,स्पीड फोटोग्राफी हर किसी के बस की बात नहीं है ,मुझे याद है ,कलामंदिर स्टूडियों के भाई सुधींद्र गौड़ का कैमरा ऐ के फोर्टी सेवन की तरह हर कार्यक्रम ,में ,हर वी आई पी यात्रा में प्रत्येक ऐंगल से धांय ,धांय फोटो शूट करता ,था हर ,तस्वीर हर लम्हा ,,हर कार्यक्रम ,हर वी आ पी यात्रा इनके कैमरे की खबर हुआ करती थी ,,अख़बार छपने के पहले सुधींद्र गॉड के स्टूडियो के बाहर इन्तिज़ार में रहते थे ,,जहाँ यह तत्काल शूट के बाद एक अँधेरे कमरे में ,,रील रोल को कट लगाकर ,लाल बल्ब की रौशनी में ,केमिकल से नेगेटिव धोकर पोजेटिव बनाकर ,,खूबसूरत फोटो निकलते थे ,फिर इन फोटोओं के ब्लॉक ,महालक्ष्मी ब्लॉक पर भाई वहीद अंसारी बनाया करते थे ,इनकी हर तस्वीर एक कहानी बयांन करती थी ,इस दौर अब्दुल हनीफ ज़ैदी की केमराग्राफी भी क़ाबिल ऐ तारीफ़ थी ,लेकिन वोह जूलॉजिकल ,,जियोग्राफिकल फोटोग्राफी के शौक़ीन थे फिर वोह सरकारी ओहदेदार होने से उनकी अपनी मर्यादाये भी थी ,सुधींद्र गौड़ वी आई पी यात्राओं में खुद वी आई पी हो जाते थे ,,मेने देखा है आज जो बढे बढे ओहदों पर बैठे सियासी लोग है ,यह इनके इर्द गिर्द वी आई पी नेताओं के साथ फोटो खिंचवाने के लिए इनसे अनुनय करते थे विनय करते थे ,फिर उस फोटो को बनवाकर सजाने के लिए इनके इर्द गिर्द मेला लगाते थे ,एक बार इंद्रा गांधी की कोटा में सभा थी ,,मूवमेंट फोटो नहीं बन रहा था ,सभी सुरक्षा कर्मियों के साथ इंद्रा जी को घेरे हुए थे ,,सुधींद्र गौड़ ,तपाक से अंदर घेरे में घुसे ,इंद्रा जी का अंदाज़ देखने जैसा था ,,सब सकपकाए हुए थे ,,सुधींद्र गौड़ ,हाथ जोड़े ,इंद्रा जी से प्रार्थना की एक मिनट पोज़ प्लीज़ ,,इन्द्रा जी मुस्कुराई ,उनका वोह फोटो दूसरे दिन ,,अख़बार की सुर्ख़ियों में एक अपने आप में खबर कह रहा था ,सुधींद्र गौड़ ने उस फोटो में अपनी पूरी कलाकारी उंडेल दी थी ,,,इसी तरह अटल बिहारी वाजपेयी का एयरपोर्ट पर सभी नेता इन्तिज़ार कर रहे थे ,,अटल बिहारी वाजपेयी हवाई जहाज़ से उतरे ,,नेताओं से दूर से हाय ,नमस्कार किया और दूसरी तरफ अधिकारियों के घेरे की तरफ मुड़ ,गए ,,जो नेता एयरपोर्ट पर ,प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से हाथ मिलाकर ,अभिवादन कर कुछ कहना चाहते थे ,उनके साथ यादगार तस्वीर के लम्हों को कैमरे में क़ैद करवाना चाहते थे ,वोह सभी नेता लोग स्तब्ध थे ,निराश थे ,लेकिन सुधींद्र गौड़ मुस्कुराये ,उचके ,और भागते हुए सीधे अटल बिहारी वाजपेयी का रास्ता रोककर उनके फोटो खेंचते हुए ,उनसे बतियाने लगे ,उनसे कहा साहिब ,कुछ लोग आपका उधर काफी उम्मीदों से इन्तिज़ार कर रहे है ,अटल बिहारी वाजपेयी भी मुस्कुराये ,वोह मुड़े ,,और फिर वापस लौटकर उन कार्यकर्ताओं के पास आये ,फोटो शूट हुए ,,अभिवादन ,सत्कार ,स्वागत हुआ ,,सभी नेता ,अटल बिहारी वाजपेयी के साथ फोटो ग्राफ़ी से खुश हो गए ,कोटा मेले दशहरे कार्यक्रम में फिल्म स्टार हो , कवि हों ,शायर हो ,,सभी कार्यक्रमों की फोटोग्राफी इनके पास थी ,रात्रि को वही कैमरा कट ,फोटो बनाकर ब्लॉक बनवाकर अख़बारों में पहुचवाना इनकी ततपरता पर ही निर्भर था ,,कलेक्टर हो , स्थानीय नेता हो ,,प्राइवेट उद्योगपति हो ,,अख़बार के मालिक हो सभी इन के इर्द गिर्द थे ,फिर यह मोर्चा एकल कम्पीटिशन खत्म होने के बाद ओमेंद्र सक्सेना की हिस्सेदारी में रहा ,,पुराना कैमरा युग बदला ,,कलर फोटोग्राफी आयी ,,फिर वही डिजिटल फोटोग्राफी आने के बाद अब तो तुरंत फोटो प्रकाशन के लिए तैयार है ,लेकिन प्रेस फोटोग्राफर की ज़िंदगी पहले जितने जोखिम में थी ,जितनी चैलेंजिंग थी वोह आज नहीं है ,आज सुविधाएं है ,,आज तत्कालिक तकनीक है ,,वाह वाही है ,पहले फोटग्राफर गुमनामी के अँधेरे में भी रहता था और अखबारों को रौशनी से भी भरता था ,पहले प्रेस फोटोग्राफर अपने कैमरे छोटे बढे नेताओं का इतिहास केंद्रीय नेताओं के साथ क़ैद भी करता था ,,आज तो मोबाइल पर ही सब मच सम्भव हो गया है ,,,,ऑडियो,, वीडियो,, फोटोग्राफी सब राजीव गाँधी के डिजिटल युग के इक्कीसवीं सदी के सपने का अंग बन गया है ,,यही बात राजीव गांधी जब बूंदी दूरदर्शन रिले केंद्र का लोकार्पण करने आये थे तब ,दैनिक जननायक के तात्कालिक पत्रकार भंवर शर्मा अटल का पास नहीं होने से उन्होंने उनकी फीएट सर्किट हाउस के गेट पर रोकी थी और पास नहीं बनाने पर अधिकारियों से विवाद चल ही रहा था ,के राजीव गाँधी जी आये ,वोह उतरे ,फीएट कार एक तरफ लगवाई ,,बूंदी जाने की तैयारी थी ,तब राजीव गांधी जी ने प्रेस फोटोग्राफी के तात्कालिक युग के आधुनिकीकरण ,डिज़िलीकरण के लिए इक्कीसवीं सदी का भारत स्वर्णिम काल बनाने की बात कही थी ,,, प्रेस फोटोग्राफी आज भी जस की तस है ,चाहे सोशल मीडिया पर मोबाइल की डिजिटल तस्वीरें हों ,तात्कालिक फोटो हों ,लकिन जो आर्ट ,जो कला ,जो स्टाइल प्रेस फोटोग्राफी की जीवंत शैली ,भाई सुधींद्र गौड़ ने शुरू की थी ,ओमेंद्र सक्सेना ने अंगीकार की ,,हाबुलाल शर्मा ,,रफ़ीक ,पठान ,कमलेश बागड़ी ,,सलीम शेरी ,गिर्राज पांचाल ,,अशफ़ाक़ खान ,,ऐ एच जैदी ,,छोटे जैदी सहित कई लोग है जो इस विधा को ,,जीवंत खबरों की प्रेस् फोटोग्राफी को आगे बढ़ा रहे है ,,बस यूँ ही , राहुल गाँधी जी कोटा यात्रा पर रफ़ीक़ पठान के आधुनिक कैमरे से धड़ाधड़ मुलाक़ात की फोटोग्राफी फिर ,राहुल जी का रफ़ीक़ पठान को इशारा देकर पुकार कर आसिफ मिर्ज़ा ,,सहित हमारी तरफ बुलाकर एक फोटो खेंचने का पोज़ बनाकर फोटो खिंचवाने की घटना ने मुझे पुरानी प्रेस फोटोग्राफी की जोखिम भरी तकनीक ,तात्कालिक दुश्वारियां ,,वर्तमान के आधुनिकीकरण फोटोग्राफी के युग की कुछ दास्ताने ,,कुछ संस्मरण ताज़ा कर दिए और आप लोगों तक यह भूली बिसरी यादे जिसमे पुराने और नए कोटा की कलाकृतियां फोटो शूट यादें शामिल है ,अल्फ़ाज़ों में उकेर कर पहुंचाने के लिए में मजबूर हो गया ,सभी प्रेस फोटोग्राफर्स को मेरा सेल्यूट ,मेरा सलाम ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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