नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

Home » » आहार व्यवहार की पवित्रता

आहार व्यवहार की पवित्रता

Written By DR. ANWER JAMAL on बुधवार, 14 दिसंबर 2011 | 7:12 pm

एक तथ्यपरक चर्चा बेहतर भविष्य के लिए

हमारी भूलें : आहार व्यवहार की अपवित्रता - 2



व्यवहार में पवित्रतता लाने के लिए आहार की पवित्रता अत्यंत आवश्यक है| कहा गया है कि – “ जैसा अन्न वैसा मन”| जिस प्रकार का हम आहार करते है उसी प्रकार का मन बनने का आशय है कि यदि हमारा आहार तामस है तो मन उससे प्रभावित होकर अहंकार के पक्ष में निर्णय करेगा व यदि आहार सात्विक है तो मन सदा बुद्धि के अनुकूल रहकर हमको तर्क संगत विकासशील मार्ग अग्रसर करता रहेगा| 

इसी विषय पर यहां भी चर्चा जारी है.
देखिए Facebook पर
यह लिंक :
http://www.facebook.com/himanshijain18/posts/260672843987658?cmntid=260738030647806
Share this article :

3 टिप्पणियाँ:

Pallavi ने कहा…

काफी हद तक आपकी बात सही है सहमत हूँ। ....

RITU ने कहा…

i want to post my articles on this page ..how to go ahead..?

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

@ Ritu Ji ! Pahle aap apni email ID bhejkar is blog ki sadasy banen aur phir likhen .

@ Pallavi ji ! Shukriya .

एक टिप्पणी भेजें

Thanks for your valuable comment.