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दिमाग उसका चलता है

Written By Brahmachari Prahladanand on सोमवार, 21 नवंबर 2011 | 10:47 am

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दिमाग उसका चलता है, किताबों से किसी को क्या मिलता है,
जो वो करवाते हैं, किताबों में तो वही किस्से लिखे जाते हैं,

राज-ए-राज को जान जाता है, दिमाग अपना चलाता है,
किसी का सहारा न लेता है, तभी तो नेता कहलाता है,

मोहरा सभी को बनाता है, काम अपना निकालता है,
शह पर उसकी, कोई भी कोई काम कर निकलता है,

किताबों की बातें, बस रह जाती हैं, रखी की रखी,
किताबें गर हटा दो तो, रह जाती है उनकी बुद्धि धरी की धरी,

पड़-लिखकर जी हुजूरी आ सकती है,
हुजुर गर बनना हो तो फिर न जाने कितनी मजबूरी आ जाती है,

वो हिम्मत, वो हौसला, वो ताकत, वो दिमाग,
पड़े-लिखे की कुव्वत नहीं होती है,
थोड़ी सी बात पर तो हर पड़े लिखे,
को हरारत होती है,

शहंशाह-ए-अकबर तो अंगूठा छाप थे,
फिर भी कितना राज कर गए,
उनके दिमाग के किस्से,
अकबर-बीरबल के नाम से मशहूर हो गए,

वक्त-ए-नजाकत क्या कहूँ, उसे राजनीति कहूँ की चालाकी कहूँ,
पड़े-लिखे चालाक हो सकते हैं,
किसी की भाल मन्साहत का फायदा उठा सकते हैं,
पर पड़े-लिखे राजनीति में राज न छुपा सकते हैं,

पड़े-लिखे के मंसूबे जब सब जान जाते हैं,
तो फिर अनपड़ भी बगावत कर जाते हैं,
पड़े-लिखे लोग दुनिया में फिर छिप जाते हैं,
वो भी अनपड़ होने का ढोंग दिखाते हैं,

राजनीति का देश यह बहुत पहले से है,
आज पड़ा-लिखा इंसान ही गुलाम है,
देखो कितने पड़े लिखे अपनी गुलामीनामे पर दस्तखत करते हैं,
हर कंपनी वाले पड़े-लिखे इंसान को गुलाम रखना पसदं करते हैं,

आज के दौर में, पड़ा लिखा कहाँ अपनी जिन्दगी जी पाता है,
ऋण लेता है, कार, घर, सब कुछ तो उसका उधार खाता है,
गुलामी कर कर कम्पनी की जिन्दगी निकाल जाता है,
फिर भी कहते हैं की वो अपने आप को आज़ाद पाता है,

आज़ादी देह की कम और दिमाग की ज्यादा होनी चाहिए,
एक फोन आया नहीं की दिमाग गुलाम हो जाता है,
फोन पर ही फिर वह यस-यस सर करता जाता है,
जी हुजुर-जी हुजुर कहने वाला ही तो गुलाम होना चाहिए,

देश की बात तो बहुत बड़ी है,
यह देश कभी एक था नहीं,
राजा राज करते थे,
अपने-अपने नाम के लिए,
न जाने कितनों का क़त्ल करते थे,

                                 ------- बेतखल्लुस


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8 टिप्पणियाँ:

nirupama varma ने कहा…

सटीक रचना है ....राजा आज भी राज कर रहे हैं .....प्रजातंत्र के नाम से राज ( परिवार )तंत्र चला रहे हैं

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

सदा ने कहा…

बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है!
आपके ब्लॉग पर अधिक से अधिक पाठक पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

kanu..... ने कहा…

bahut hi acchi rachana hai....aj ke paripekshya me ekdam sateek....

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति

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Mamta Bajpai ने कहा…

सास्वत सत्य लिख दिया है बहुत बधाई

Mamta Bajpai ने कहा…

सास्वत सत्य लिख दिया है बहुत बधाई

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