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कौन है हम

Written By rajender singh on बुधवार, 23 फ़रवरी 2011 | 12:47 pm

कौन है हम और है आये कहां से
क्या है हमारा ठिकाना
हंस देते है हम, जो पुछे है हमसे
बाते यही है जमाना।

गाते है क्यूं और चिल्लाते है क्यूं हम
बेकार है ये बताना
हमारे लिये तो लहू गर्म रखने का
छोटा सा है इक बहाना।

मगर याद रखना, लहू की हमारे
जो गर्मी रहेगी, यहां पर
उसे अपने खूं की, हर इक बूंद से है
उसी से है उबाला लगाना।

आये है हम तो, चले जायेगें भी
रह जायेगा ये तराना
कसम है तुम्हे कि हां बाद हमारे
तुम भी इसे गुनगुनाना।

http://rsnagie.blogspot.com

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4 टिप्पणियाँ:

Minakshi Pant ने कहा…

अपना पता खुद से ही पूछती एक खुबसूरत रचना |
एक खुबसूरत अंदाज़ |

सलीम ख़ान ने कहा…

खुबसूरत अंदाज़!!!

आये है हम तो, चले जायेगें भी
रह जायेगा ये तराना
कसम है तुम्हे कि हां बाद हमारे
तुम भी इसे गुनगुनाना!!!!

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (24-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

kkk ने कहा…

"कौन हैं हम और हैं आये कहाँ से, कहाँ है हमारा ठिकाना ." सुन्दर अभिव्यक्ति , अध्यातम की तरफ जाते भाव , अगर इन बातों को हम जान ले या जानने का प्रयास भी करने लगे तो बहुत सी बुराइयों एवं समस्याओं का हल खुद - ब- खुद हो जायेगा .

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