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भीगे भीगे से शब्द ....

Written By PRIYANKA RATHORE on सोमवार, 21 फ़रवरी 2011 | 10:58 pm






भीगे भीगे से शब्द
हैं व्याकुल कुछ
भावों का मुक्ताहार बनाने को !
स्वप्नों का जाल बुनकर
पलकों में मधु पराग छिपाए
ना जाने किसका इंतजार ,
हर एक दस्तक देती थी
उत्सुकता किसी सन्देश की !
नियति इन्तेजार करवाती रही
जीवन बीत गया !
आस की हुयी निराश में तबदीली
पलकों से स्वप्न झरें
कुछ टूटे बिखरे से
यहीं कहीं धरती पर !
ऐसे में हे ! ईश
तुम आये बनकर शिवम् स्वरूप
भावों का फिर संचार हुआ
नया मुक्ताहार हुआ 
प्रेम नीर से रंजित 
भीगे भीगे से शब्द 
जो हैं व्याख्येय 
श्वेत समर्पण रूप !!





प्रियंका राठौर









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7 टिप्पणियाँ:

Atul Shrivastava ने कहा…

भाव भरी रचना। बधाई हो आपको।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

@ बहुत अच्छा लगा आपकी रचना पढ़कर । मैं चाहूँगा कि इस सुंदर रचना को आप हिंदी ब्लागर्स फोरम पर भी अपने कर कमलों से सजा दें ।
eshvani@gmail.com
पर अपनी ईमेल आईडी भेज दीजिए ताकि आपको निमंत्रित किया जा सके ।

सलीम ख़ान ने कहा…

नियति इन्तेजार करवाती रही
जीवन बीत गया

शालिनी कौशिक ने कहा…

bahut sundar rachna...

वन्दना ने कहा…

बेहद गहन अभिव्यक्ति।

PRIYANKA RATHORE ने कहा…

aap sabhi ka bhut bhut dhanybad...@anver ji- maine aapke mail id pr apni id send ki thi...prantu hr baar mail reject ho gaya...kirpya btaye aage kya kru? dhanybad

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Very easy .
आप अपनी आईडी हिंदी ब्लागर फोरम की नई पोस्ट पर अपनी टिप्पणी में पेश कर दीजिए , अभी तुरंत आपको निमंत्रित किया जाएगा ।

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